गुजरात के पूर्व गृहमंत्री हरेन पंड्या की ह्त्या की सुपारी आईपीएस डीजी बंजारा ने दी थी – आज़म ने कोर्ट में दिया बड़ा बयान . सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस पर फिर एक बार मचा हडकंप

उदयपुर . सोहराबुद्दीन एनकाउन्टर ( Sohrabuddin Encounter ) मामले के मुख्य गवाह आज़म खान (azam khan ) के शनिवार मुंबई की सीबीआई की विशेष कोर्ट में हुए बयान के बाद पूरा एनकाउंटर का पूरा मामला ही बदल गया.
जिन बड़े आईपीस अधिकारियों को कोर्ट ने बरी कर दिया है वे अधिकारी एक बार फिर कटघरे में खड़े दिखाई दे रहे है .

आज़म खान ने शनिवार 3 नवम्बर को कोर्ट बड़ा सनसनीखेज खुलासा करते हुए अपने बयान में बताया कि गुजरात के पूर्व गृहमंत्री हरेन पंड्या की हत्या की सुपारी गुजरात के आईपीएस डीजी बंजारा ने सोहराबुद्दीन को दी थी . बंजारा के कहने पर ही पूर्व गृहमंत्री हरेन पंड्या की हत्या सोहराबुद्दीन और उसके साथी नईमुद्दीन ने मिल कर की थी.

आज़म खान के इस बड़े बयान के बाद सोहराबुद्दीन एनकाउन्टर( Sohrabuddin Encounter ) मामले की पूरी तस्वीर ही बदल गयी है. जहाँ एक तरफ सीबीआई ने चार्जशीट पेश की जिसमे बताया कि  Sohrabuddin Encounter  मार्बल व्यवसाइयों से फिरोती मांगने की वजह से राजनेताओं के कहने पर पुलिस अधिकारियों ने किया. जबकि अब आज़म खान ने शनिवार को कोर्ट में जो बयान दिए है उससे तो साबित होता है कि गुजरात के पूर्व गृहमंत्री हरेन पंड्या की हत्या में बड़े नामों के शामिल होने और उनके राज़ बहार ना आयें इस वजह से हुई है. कोर्ट में आज़म खान ने आईपीएस डीजी बंजारा द्वारा हरेन पंडया की ह्त्या की सुपारी देना वाला बयान दिया, आज़म के बयान के बाद राजनैतिक हलकों में खासी हलचल हो गयी है क्यूँ कि कयास लगाए जा रहे है कि हो सकता है इसके पीछे कई ऐसे और बड़े बड़े नाम हो जिनके सामने आने पर पुरे देश में राजनातिक भूकंप आजाये. हालाँकि एसी निष्पक्ष जांच होना मुश्किल है. लेकिन हरेन पंड्या की ह्त्या में डीजी बंजारा का नाम आना ही एक बड़ा खुलासा है.

कोर्ट में आज़म के बयान :

आजम ने कोर्ट को बताया कि सोहराबुद्दीन, तुलसी उसके अच्छे दोस्त थे और सोहराबुद्दीन ने ही मुझे बताया था कि उसने बंजारा के कहने पर नयीमुद्दीन उर्फ कलीमुद्दीन और शाहिद के साथ मिलकर हरेन पंड्या की हत्या की थी। गौरतलब है कि हरेन पंड्या केस में गुजरात पुलिस ने पहले जिन भी लोगों को गिरफ्तार था, वह सभी दोष मुक्त होकर बरी हो चुके हैं।

सोहराबुद्दीन एनकाउंटर को लेकर कोर्ट में आजम खान ने बयान दिए कि उसी ने ही सोहराबुद्दीन, उसकी पत्नी कौसरबी और तुलसी को अपनी बुआ के मल्लातलाई स्थित मकान में पनाह दिलवाई थी। ये तीनों यहां रह रहे थे। फिर एक दिन सोहराबुद्दीन ने तुलसी और किसी एक अन्य व्यक्ति के जरिए अहमदाबाद के गुजरात बिल्डर के यहां फायरिंग करवाई थी। सोहराबुद्दीन को एक कंपनी से रिकवरी का काम मिला था और उसे मरीयम मार्बल वाले से रिकवरी करनी थी, इसके लिए सोहराबुद्दीन ने मरियम मार्बल वाले को धमकी दी थी, तो उदयपुर के हामिदलाल के कहने पर मरीयम मार्बल मालिक ने सोहराबुद्दीन के खिलाफ मामला दर्ज करवा दिया था। इस पर सोहराबुद्दीन के कहने पर तुलसी ने मुदस्सर के साथ मिलकर हामिदलाल की 31 दिंसबर 2004 को हत्या करवा दी थी। हामिदलाल की हत्या के बाद हम सभी अलग-अलग फरार हो गए थे और मैं पत्नी के साथ रिश्तेदार के यहां मोडासा चला गया था। अप्रेल 2005 में मुझे उदयपुर पुलिस ने मोडासा से हामिदलाल हत्या कांड में गिरफ्तार कर लिया था और मुझे सेंट्रल जेल भेज दिया गया था। 27 नवंबर 2005 को मुझे जेल में अखबार से पता चला कि सोहराबुद्दीन एनकाउंटर में मारा गया है, इसके तीन-चार दिन बाद तुलसी के गिरफ्तार होने का समाचार अखबार में पढ़ा था। कुछ दिनों बाद तुलसी को भी उदयपुर सेंट्रल जेल भेज दिया गया।

तुलसी मुझे सेंट्रल जेल में मिला और फूट-फूट कर रोने लगा, तुलसी ने मुझे बताया कि गुजरात पुलिस ने मुझे धोखा दिया है। एक आदमी ने मुझे बंजारा से मिलवाया था। बंजारा ने कहा था कि उपर से बहुत ज्यादा दबाव है, एक बार सोहराबुद्दीन को पकड़वा दो, छह महीने में उसकी जमानत करवा देंगे। मुझे बंजारा ने कहा था कि सोहराबुद्दीन को पकड़वा दिया तो मुझे लतीफ सेठ की जगह बैठा देंगे। गौरतलब है कि लतीफ सेठ उस समय अहमदाबाद का बड़ा डॉन था। मैं बंजारा की बातों में आ गया। मेरी सूचना पर ही गुजरात पुलिस ने सोहराबुद्दीन, कौसरबी और मुझे हम तीनों को हैदराबाद से लौटते समय सांगली के पास से बस से उतार लिया था और इस बात की उन लोगों ने बंजारा को सूचना दी थी। हम तीनों को अहमदाबाद के फार्म हाउस में लाया गया था। जहां वे लोग सोहराबुद्दीन से मारपीट करने लगे। इसका कौसरबी ने विरोध किया, तो उसके साथ भी मारपीट हुई, फिर एक फायर हुआ और कौसरबी की आवाज बंद हो गई, इसके बाद एक और फायर हुआ और सोहराबुद्दीन की आवाज भी बंद हो गई। तुलसी ने मुझे बताया था कि सोहराबुद्दीन-कौसरबी की हत्या के बाद उन लोगों ने मुझे दो-तीन दिन उसी फार्म हाउस में रखा और फिर राजस्थान पुलिस के सुपुर्द कर दिया था। तुलसी सेंट्रल जेल में अक्सर बोलता था कि मेरे साथ धोखा हुआ है, मैं बंजारा को मार दूंगा। उदयपुर जेल में बंजारा का मुखबीर अहमद जाबिर बंद था, उसने तुलसी की यह सारी बातें बंजारा तक पहुंचा दीं। .

पेशी पर जाने से पहले तुलसी ने कहा था अकेले जा रहा हूं, वापस नहीं आउंगा :

तुलसी एनकाउंटर ( Tulsi Encounter ) को लेकर आजम ने कोर्ट में बयान दिए कि अहमदाबाद पुलिस ने तुलसी के साथ उसे भी पॉपुलर बिल्डर पर हुई फायरिंग मामले में आरोपी बनाया था। आजम ने बताया कि इस केस में हम दोनों को अहमदाबाद पेशी पर एक साथ ले जाया जाता था। राजस्थान पुलिस एक पेशी पर मुझे और तुलसी को लेकर अहमदाबाद कालूपुर स्टेशन पहुंची। वहां से एटीएस वाले हमें शाहीबाग स्थित ऑफिस और फिर कोर्ट लेकर गए। कोर्ट में हमें सोहराबुद्दीन का वकील सलीम मिला। हमने उसे कहा कि हमारी जान को खतरा है। इस पर सलीम ने हमें जज के सामने पेश करवाया और हमने जज से निवेदन किया कि हमें हथकड़ी, रस्सी से बांधकर सुरक्षित उदयपुर सेंट्रल जेल पहुंचा दिया जाए। कोर्ट पेशी के बाद राजस्थान पुलिस हमें उदयपुर ले आई और सेंट्रल जेल में जमा करवा दिया।

आजम ने कोर्ट में बयान दिए कि हम दोनों की अगली पेशी थी, इससे पहले पुलिस ने मुझे एक चोरी के मामले में प्रोडक्शन वारंट पर गिरफ्तार कर लिया। अंबामाता थाना पुलिस मुझे लेने आई, तब तुलसी ने मुझे कहा था कि इस पेशी पर मैं अहमदाबाद अकेला जाउंगा और शायद इस बार वापस न लौटूं। अंबामाता थाना से रिमांड पूरी होने पर मैं सेंट्रल जेल लौटा तो पता चला कि तुलसी पुलिस कस्टडी से भाग गया है और अगले दिन उसके भी एनकाउंटर में मारे जाने की खबर मिली। 2009 में मुझे भी कोर्ट ने हामिदलाल हत्याकांड से बरी कर दिया और मैं जेल से बाहर आ गया।

बदला एनकाउंटर का मोटिव और स्थान

सोहराबुद्दीन एनकाउंटर का अनुसंधान कर सीबीआई ने जो चार्जशीट पेश की थी, उसमें एनकाउंटर का मोटिव अलग है। सीबीआई चार्जशीट के अनुसार सोहराबुद्दीन ने मार्बल व्यवसायी आरके मार्बल के विमल पाटनी और संगम टेक्सटाइल वाले को धमकी देकर एक्सटॉर्शन मनी मांगी थी। व्यवसायियों ने इसकी जानकारी राजनेताओं को दी थी और इसके बाद आईपीएस डीजी बंजारा, राजकुमार पांडियन और दिनेश एमएन ने मिलकर सोहराबुद्दीन के एनकाउंटर की साजिश रची थी। लेकिन आजम ने जो बयान ट्रायल कोर्ट में दिए, उससे तो सोहराबुद्दीन एनकाउंटर का मोटिव हरेन पंड्या की हत्या से जुड़ गया। चार्जशीट में एनकाउंटर पावर हाउस के पास बताया गया है, जबकि आजम ने कहा कि सोहराबुद्दीन और कौसरबी की हत्या तो फार्म हाउस में ही कर दी गई थी।

दाउद से थे सोहराबुद्दीन के कनेक्शन

आजम ने कोर्ट को बताया कि एक बार सोहराबुद्दीन ने उसे बताया कि वह नयीमुद्दीन से मिलने हैदराबाद गया था, नयीमुद्दीन दाउद इब्राहिम से बात करना चाहता था, लेकिन मैंने उसको यह कहकर मना कर दिया था कि दाउद तो किसी से बात नहीं करता है, हां वह उसकी छोटा शकील से बात करवा सकता है। तब आजम ने सोहराबुद्दीन को चेताया था कि नयीमुद्दीन अच्छा आदमी नहीं है, तो सोहराबुद्दीन ने आजम को भरोसा दिलाया था कि नयीमुद्दीन उसके साथ धोखा नहीं कर सकता है, क्यों कि वे एक-दूसरे के राजदार है और हमने ही हरेन पंड्या की हत्या की थी और हमें सुपारी डीजी बंजारा ने दी थी।

पहले के बयानों में है अलग कहानी, फिर भी पीपी ने नहीं पूछा एक भी सवाल

गौरतलब है कि सोहराबुद्दीन-तुलसी एनकाउंटर केस की जब सीबीआई जांच कर रही थी, तब सीबीआई के इंस्पेक्टर पंवार, विश्वास मीणा और एनएस राजू ने अलग-अलग तीन बार उसके सीआरपीसी की धारा 161 के तहत बयान लिए थे और आजम इस पूरे केस का एकलौता ऐसा गवाह है, जिसके सीआरपीसी की धारा 164 के तहत कोर्ट में दो बार बयान हो चुके हैं। पांच बार हुए बयानों में आजम ने जो कहानी बताई है, वह शनिवार को ट्रायल कोर्ट में दिए बयानों से अलग है। इसके बावजूद न तो सीबीआई के स्पेशल सरकारी वकील बीपी राजू ने इस पर कोई प्रश्न पूछा और न ही उसे होस्टाइल घोषित किया।

बचाव पक्ष के वकील ने आजम से पूछा कि हरेन पंड्या की हत्या से संबंधित यह बात तुम्हारे पूर्व में सीबीआई को दिए बयानों में कहीं नहीं है। तो आजम ने कोर्ट में बताया कि उसने सीबीआई इंस्पेक्टर एनएस राजू को बयान देते समय यह बात बताई थी, लेकिन उन्होंने यह बात लिखने से मना कर दिया था और मुझे कहा था कि इससे बहुत बड़ा बवाल मच जाएगा, यह बात बयान में मत लिखवाओ। तो मैंने एनएस राजू को कहा था कि मैं जो जानता हूं, वह बताउंगा।

 

News Source – ARlive news ( Lucke Jain ) 

“उदयपुर लाईट फेस्टिवल” उदयपुर की पहचान बना – युवाओं के सर चढ़ बोल रहा है “ULF” का जादू .

Udaipur . उदयपुर ब्लॉग द्वारा आयोजित राजस्थान भर में मशहूर उदयपुर के युवाओं दिल के करीब “उदयपुर लाईट फेस्टिवल” “ULF” रंगारंग, मस्ती, एडवेंचर और संगीत की रोशनी से भरपूर रविवार 4 नवम्बर को शिल्प ग्राम के पास शोर्यगढ़ में होने जा रहा है। उदयपुर लाईट फेस्टिवल की रंगीनियों में जहाँ एक तरफ सुरों का जादू बिखेरने के लिए कई कलाकार अपनी लाइव प्रस्तुति देंगे वहीँ इसबार के फेस्टिवल में एडवेंचर गेम्स जैसे कई आकर्षक आयोजन युवाओं का इंतज़ार कर रहे है। फेस्टिवल को लेकर युवाओं की दीवानगी का आलम अपने चरम पर है।
उदयपुर ब्लॉग हर वर्ष की तरह इस बार भी लाईट फेस्टिवल (ULF) रविवार को आयोजित होने जा रहा है। लाईट फेस्टिवल की रंग बिरंगी रोशनी के बिच सुरों की गंगा भी बहेगी और मस्ती भरे कई आयोजन भी होंगे। उदयपुर ब्लॉग के फाउंडर संजीत ने बताया कि इससे होने वाली आय का एक बड़ा हिस्सा सामाजिक कल्याण और ज़रूरतमंदों के बीच समर्पित किया जाता है। लाईट फेस्टिवल एक तरह से उदयपुर की पहचान बन चुका है। राजस्थान भर में मशहूर यह फेस्टिवल अब पर्यटकों में खासा फेमस हो रहा है। देसी और विदेशी पर्यटकों ने फेस्टिवल में आने के लिए अपनी बुकिंग करवा ली है।
संजीत ने बताया कि रविवार को दोपहर 3 बजे से यह शुरू हो जाएगा और शोर्यगढ़ में आयोजित हो रहे इस फेस्टिवल में संगीत से जुड़े कई कलाकार अपनी प्रस्तुति देंगे। साथ ही साथ एडवेंचर से जुड़े कई आयोजन भी होंगे।

 

छह साल पहले 300 लोगों के बिच फतहसागर की पाल से उदयपुर ब्लॉग के संजीत और उसके साथ जुड़े कुछ जोशीले युवाओं द्वारा शुरू किया लेन्टर्न फेस्टिवल अब उदयपुर लाईट फेस्टिवल से उदयपुर की पहचान बनता जा रहा है। यह फेस्टिवल सिर्फ उदयपुर ही नहीं पुरे प्रदेश में ख्याति पा चुका है जयपुर जोधपुर, कोटा अजमेर बांसवाडा डूंगरपुर के युवा इसमें भाग लेने के लिए आते है . युवाओं को हर वर्ष इस फेस्टिवल का इंतज़ार रहता है।
इस बार रोशनी का यह रंगारंग फेस्टिवल शिल्पग्राम के पास स्थित शोर्य गढ़ में रविवार को शाम 3 से 11 बजे तक के बिच आयोजित होगा। इस बार करीब 8000 लोग इसको देखने पहुचेगें। फेस्टिवल को लेकर उदयपुर ब्लॉग की टीम तय्यारियाँ जोरों पर कर रही है।
रविवार फेस्टिवल की शुरुआत रोक बेंड सूफ़ी संगीत, डीजे मस्ती के साथ होगी जो आखिर तक चलेगी .इन सबके आलावा शाम के चार बजे से ही वहाँ आपको ढेर सारी मस्ती.डांस और म्यूजिक देखने को मिलेगाए इनके साथ आप खाने का मज़ा भी ले पाएँगेए अलग.अलग तरह के कई खाने की स्टाल्स वहाँ आपको सभी तरह के ज़ायके उपलब्ध करवाएगी। कई तरह के गेम्सए क्विज और सेल्फी कार्नर आकर्षण का केंद्र बने रहेंगे। कई सरप्राइसेज़ भी आपका इंतज़ार करेंगे।

लेन्टर्न फेस्टिवल में प्रवेश करने के लिए अधिकतर पास युवा हाथो हाथ ले चुके है। सशुल्क प्रवेश की मांग लगातार बढती जा रही है। इवेंट के पासेज़ और फेस्टिवल से जुड़ी अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक कर बुक करा सकते है।

https://allevents.in/udaipur/ulf-%7C-udaipur-light-festival-2018/20002106469279

अचार संहिता में बंधे महापौर पार्षद पुलिस से उलझे – राज्य निर्वाचन अधिकारी से की शिकायत बेवजह जनप्रतिनिधियों को किया जा रहा परेशान।

उदयपुर। आचार संहिता के चलते नगरनिगम दशहरा दीपावली मेले में जन प्रतिनिधियों पर जिला निर्वाचन आयोग द्वारा हद से ज्यादा पाबंदी को लेकर राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी से मिलने गए नगर निगम के महापौर पार्षद और पुलिस अधीक्षक सहित पुलिस अधिकारी आमने सामने हो गए। स्थिति धक्का मुक्की तक बन आई एक पार्षद को गिरफ्तार कर थाने भी ले गए लेकिन विरोध बढ़ने पर आधे रास्ते से वापस लेकर आगये। बाद में राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी ने पार्षदों और महापोर की शिकायतें भी सुनी और जिला निर्वाचन अधिकारी को मेले में बरती जा रही सख्ती में नियमानुसार रियायत देने की निर्देश भी दिए।
नगर निगम में दीपावली दशहरा मेला शुरू हुए छह दिन हो गए है लेकिन आचार संहिता के चलते नगर निगम के पार्षदों सहित महापौर या अन्य जनप्रतिनिधियों को मेले में आयोजित कार्यक्रमों से दूर रखा जा रहा है। देखा जाए तो आयोजन स्थल पर कुर्सियों पर बैठने को लेकर जनप्रतिनिधि और अधिकारी आमने सामने हो रहे है। नगर निगम आयुक्त ने वहां एक बोर्ड भी लगा रखा ही कि जन प्रतिनिधियों का प्रवेश इस परिधि के बाहर रहे।
आज स्थिति तब और बिगड़ गयी जब आरसीए राय के मुख्य निर्वाचन अधिकारी आनंद कुमार जिला निर्वाचन अधिकारी के साथ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की बैठक ले रहे थे। इस दौरान महापौर चन्द्र सिंह कोठारी सहित करीब ४० पार्षद निर्वाचन अधिकारी से मिलने और नगर निगम मेले में बरती जा रही बेवजह की सख्ती को लेकर शिकायत दर्ज करवाने के लिए आये थे। इधर आरसीए में मोजूद जिला पुलिस अधीक्षक राष्ट्र्दीप कुंवर और अन्य पुलिस अधिकारियों ने जन प्रतिनिधियों की इतनी भीड़ देख कर अन्दर जाने से मना कर दिया और पांच लोगों को जाने के लिए ही कहा। इसी मिलने की बात को लेकर पुलिस और जनप्रतिनिधियों के बिच बहस हो गयी। बहस काफी हद तक धक्का मुक्की तक भी पहुच गयी बहस बढ़ने के बाद पार्षद राकेश पोरवाल को पुलिस अधीक्षक ने थाने ले जाने तक के लिए कह दिया लेकिन बाद में विरोध को देखते हुए आधे रास्ते से वापस बुलवा लिया। राकेश पोरवाल का कहना है कि महापौर जनप्रतिनिधि है और उनके साथ पुलिस अधीक्षक द्वारा किये जा रहे व्यवहार से मुझे आक्रोश आगया। हालाँकि बाद में मामला शांत हो गया और महापौर सहित पांच पार्षद राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी से मुलाक़ात कर अपना विरोध दर्ज करवाया और प्रशासन द्वारा मेले में जनप्रतिनिधियों के साथ बरती जा रही सख्ती के का विरोध दर्ज करवाया। इधर चुनाव अधिकारी ने भी जनप्रतिनिधियों को माना कि यह सही है कि आचार संहिता के चलते स्टेज पर कोई किसी जनप्रतिनिधि को नहीं बुलाया जा सकता लेकिन बाकी बैठने की व्यवस्था तो जिस तरह पहले रहती थी वह किया जा सकता है। पार्षदों का आरोप है कि जनप्रतिनिधि की बैठने की जगह पर अधिकारी अपने परिचितों को बैठा देते है और आचार संहिता का हवाला दे लकर हमको दूर रहने को बोला जा रहा है। मेले के निमंत्रण पत्र भी नहीं बंटवाये गए जबकि बिना किसी जनप्रतिनिधि का फोटो लगा कर पत्रकारों व् अन्य लोगों को निमंत्रण पत्र दिया जा सकता था। आगंतुकों के स्वागत के लिए लाल उपरना ओढाया जा रहा है और लाल कलर किसी पार्टी विशेष का सिम्बोल है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने नियमों के अंतर्गत आरही जनप्रतिनिधि बातों को सही माना और जिला निर्वाचन अधिकारी को निर्देश भी दिए।

36 घंटे के नवजात को लेकर परीक्षा देने पहुची महिला – इस होसले का सबने किया सम्मान .

उदयपुर। सेकण्ड ग्रेड शिक्षक की परीक्षा बुधवार को आयोजित हुई इस परीक्षा को लेकर एक ऐसे होसले वाली महिला का किस्सा सामने आया कि उसके होसले के आगे हर कोई अचंभित हो गया। सिजेरियन से प्रसव होने के दुसरे दिन ही तकलीफों के बावजूद महिला परीक्षा केंद्र में पहुच गयी और अपना पेपर दिया ।
उदयपुर जिले में सराडा की रहने वाली नाजमीन बानों ने गर्भवती होने के बावजूद भी बड़ी मेहनत और लगन से सेकण्ड ग्रेड शिक्षक परीक्षा की तय्यारी की थी लेकिन एन परीक्षा के मात्र दो दिन पहले सिजेरियन से प्रसव करवाना पढ़ा। इसके बावजूद नाजमीन की हिम्मत नहीं टूटी और ओपरेशन के बाद भी वह बुधवार को पानेरियों की मादडी स्थित स्कूल में आये सेंटर में परीक्षा देने पहुची। नाजमीन की इस हिम्मत होसले और शिक्षक बनने के जूनून को सबने सलाम किया एक तरफ जिस अरावली हॉस्पिटल में नाजमीन भर्ती थी वहां की डॉक्टर और स्टाफ ने काफी सहायता की और स्टाफ की देख रेख में उसको एम्बुलेंस से परीक्षा केंद्र भेजा गया । इधर परीक्षा केंद्र में तैनात परीक्षा संचालक को भी जब इस बात का पता चला तो उन्होंने नाजमीन की सहायता की और परीक्षा हॉल के सामने ही एम्बुलेंस खड़ी करवाई । एम्बुलेंस में नवजात बच्चे को लेकर नाना नानी को बैठने की इजाजत भी मिल गयी। जीतनी देर तक परीक्षा चलती रही नाना नानी बच्चे की देखभाल करते रहे। नाजमीन ने बताया कि शिक्षक बनने का उसका सपना है और उसने इस परीक्षा के लिए गर्भवती होने के बावजूद भी तय्यारी जारी राखी थी । आगे भी वह अपने बाकी पेपर इसी तरह देगी । नाजमीन की इस हिम्मत में साथ उसके परिजनों सहित अरावली अस्पताल के स्टाफ और परीक्षा केंद्र पर तैनात कर्मचारियों ने भी दिया ।

राज्यमंत्री , बांसवाडा के विधायक अब खुल कर नफरत फैला धर्म के नाम पर वोट मांग रहे है – मामला हुआ दर्ज .

Udaipur. किसी ने सही ही कहा है खादी धारी नेता अपनी कुर्सी और वोटों के लिए किसी भी हद तक जा सकते है तो फिर आचार संहिता इनके लिए क्या चीज़ है . आचार संहिता का तो ये लोग अचार बना कर मर्तबान में रख देते है . बांसवाडा ग्रामीण विकास और पंचायत रात मंत्री धन सिंह रावत अब सभा में खुल कर धर्म के नाम पर वोट मांग रहे है। इनका कहना है कि जब मुसलमान एक जुट हो कर कांग्रेस को वोट दे सकते है तो हिन्दू भाजपा को वोट क्यूँ नहीं दे सकते।
हालाँकि मंत्री महोदय इस बयान के बाद आदर्श चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन में फंस गए हैं। राज्य चुनाव आयोग के निर्देश पर बांसवाड़ा के सहायक रिटर्निंग अधिकारी ने राज्यमंत्री रावत के खिलाफ कोतवाली थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है। साथ ही उन्हें नोटिस जारी कर तीन दिन में जवाब मांगा है। सिरोही के गांव एवडी हाल बांसवाड़ा तहसीलदार एवं सहायक रिटर्निंग अधिकारी रामसिंह राव पुत्र मूलसिंह राव ने 29 अक्टूबर को कोतवाली थाना पुलिस को सौंपी रिपोर्ट में बताया कि 27 अक्टूबर को उदयपुर रोड स्थित निजी वाटिका में हाउसिंग बोर्ड निवासी राज्यमंत्री धनसिंह रावत ने सभा में मौजूद लोगों को यह कहते हुए सार्वजनिक भाषण दिया कि मुसलमान कांग्रेस को वोट देते हैं। कांग्रेस मुसलमानों की पार्टी है। प्रदेश के हिंदुओं को एकजुट होकर बीजेपी को वोट देना चाहिए। रिपोर्ट के अनुसार आगामी विधानसभाओं के मद्देनजर आचार संहिता के बावजूद रावत ने विभिन्न वर्गों के बीच शत्रुता व घृणा की भावना पैदा करने की नियत से कटुतापूर्ण भाषण दिया है। रिपोर्ट अनुसार आरोपी रावत का भाषण लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 125 के तहत दण्डनीय अपराध है। गौरतलब है कि 27 अक्टूबर को वाटिका में भाजपा बांसवाड़ा विधानसभा क्षेत्र के कार्यकर्ताओं का नवशक्ति सम्मेलन था, जिसमें राज्यमंत्री ने उक्त बयान अपने संबोधन में दिया था।
चुनाव आयोग से मिली शिकायत रिटर्निंग अधिकारी एवं बांसवाड़ा उपखंड अधिकारी पूजा पार्थ ने मंगलवार को बताया कि सीईओ राजस्थान को रावत के खिलाफ धर्म के आधार पर वोट मांगे जाने की शिकायत प्राप्त हुई थी। स्थानीय स्तर पर यह मामला संज्ञान में था। सीईओ राजस्थान से रिपोर्ट आते ही धनसिंह रावत को आचार संहिता के उल्लंघन का नोटिस जारी किया है और कोतवाली थाने को रिपोर्ट दर्ज करने के लिए प्रकरण भेजा।
बयान का विरोध भी गौरतलब है कि मंत्री के बयान के बाद कांग्रेस ने जिला निर्वाचन अधिकारी को सोमवार को पत्र देकर आचार संहिता के उल्लंघन की शिकायत करते हुए कार्रवाई की मांग की थी। वहीं अंजुमन इस्लामिया के सदर नईम शेख ने पत्रकार वार्ता में कहा कि मुस्लिम समुदाय किसी पार्टी का पक्षधर नहीं है। मंत्री के बयान से समाज के लोगों को धक्का लगा है। बयान एक कौम को समाज की अन्य कौमों से अलग रखने की कोशिश जैसा है। बयान से मुस्लिम समुदाय में गलत संदेश गया. यह कहा था गृहमंत्री ने राज्यमंत्री के बयान के अगले दिन रविवार को बांसवाड़ा आए गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया ने कहा था कि मतदाता की कोई जात नहीं होती है। मतदाता उस व्यक्ति को वोट दे जिससे देश का विकास हो। भाजपा का यह कभी उद्देश्य नहीं रहा कि किसी धर्म का व्यक्ति वोट देगा या नहीं देगा।

उदयपुर जनाना अस्पताल की लापरवाही में नवजात की मौत फिर किया इंसानियत को भी शर्मसार।

उदयपुर। शहर के पन्नाधाय चिकित्सालय में लापरवाही और इंसानियत को तार – तार करने का मामला सामने आया है। लापरवाही एसी कि नवजात बाल्टी में गिर गया और उसकी मौत हो गयी। बाद में अपनी गलती छिपाने के लिए अस्पताल प्रशासन ने जबरदस्ती प्रसूता को अस्पताल से निकाल दिया।
दरअसल सेमारी तहसील के ग्राम पंचायत भौराई की रहने वाली बंसती नाम की गर्भवती महिला को इलाज के लिए पन्नाधाय चिकित्सालय में भर्ती करवाया गया था। इसके बाद बसंती देवी ने एक बच्चे को जन्म दिया। कुछ ही घंटो के बाद जब बच्चे को हास्पीटल का स्टाफ इधर से उधर ले जा रहा था। लापरवाही से पकड़ा गया नवजात हॉस्पिटल स्टाफ के हाथों से बाल्टी में गिर गया और उसके सिर पर चोट लगने से काफी खून बह गया। हास्पीटल स्टाफ नवजात को आईसीयू में ले गया, लेकिन तब तक नवजात ने दम तोड दिया।
लेकिन हद यहाँ खत्म नहीं होती इंसानियत को तार तार करने का किस्सा यहाँ से शुरू होता है। अपनी लापरवाही छिपाने और अस्पताल की इस गलती को रफा दफा करने के लिए बेसुध मरीज और उसके पति को ही दफा करने की योजना बना ली।
इस घटना के बाद 29 अक्टूबर की रात को ही हास्पीटल स्टाफ ने मामले को रफा – दफा करने के लिए बसंती देवी और उसके पति सहित परिजनों को वहां से जाने के लिए कह दिया, लेकिन रात होने की वजह से हास्पीटल से कोई नही गया। मंगलवार सुबह हास्पीटल के स्टाफ ने मामले को रफा – दफा करते हुए जोर जबरदस्ती कर बसंती देवी और उसके परिजनों को मृत बच्चे को देकर रवाना कर दिया। इसके बाद परिजन बंसती देवी को हास्पीटल के गार्डन में ले आये। इस मामले के सामने आने के बाद गार्डन में भी सेकड़ों लोग जमा हो गये। बसंती देवी के पति हरि शंकर मीणा की माने तो हास्पीटल स्टॉफ अपनी गलती को मानने को तैयार नही है। इसके अलावा हास्पीटल स्टाफ ने बिना डिस्चार्ज टिकिट दिये ही पीड़िता को हास्पीटल से बाहर निकाल दिया जिसने न सिर्फ इंसानियत को शर्मसार किया है बल्कि डाॅक्टरी पेशे पर भी बदनुमा दाग लगाया है, आपको बता दे कि पीडित प्रसूता के साथ उसकी मां जमना देवी और ननंद केसर देवी मौजूद थी और जब नवजात बाल्टी में गिरा इस दौरान भी इन दोनों को उसके पास नही जाने दिया। नवजात की मौत हो जाने के कई घंटो के बाद इसकी सूचना परिजनों की दी गई। अब परिजन इस मामले में हॉस्पिटल प्रशासन से दोषी स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर हैं।

अशोक गहलोत: राजस्थान कांग्रेस का जादूगर

1970 के दशक की शुरुआत में जब इंदिरा गांधी के बेटे संजय गांधी की तूती बोलती थी, उस समय Ashok Ghlot को किस्मत से कांग्रेस में एंट्री मिली. संजय एक दूसरे गहलोत, जनार्दन को आगे बढ़ा रहे थे, जिन्होंने कद्दावर भैंरों सिंह शेखावत को 1972 में जयपुर के गांधीनगर से पटखनी दी थी.

लेकिन यह किस्मत का ही खेल था कि जनार्दन के प्रति संजय का प्रेम ज्यादा दिनों तक बना नहीं रहा और उनके लोगों ने जल्दी ही जनार्दन की जगह माली समुदाय से आनेवाले एक दूसरे गहलोत को दे दी.

Ashok Gahlot को राजस्थान के नेशनल स्टूडेंट यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) का अध्यक्ष बनाने का किस्सा बड़ा ही दिलचस्प है. एक बाइकर उनका नियुक्ति पत्र मोटरसाइकिल पर दिल्ली से जयपुर लेकर गया था.

जादूगरों के परिवार से आनेवाले अशोक गहलोत को शुरू में संजय की मंडली में गिल्ली बिल्ली संबोधन से पुकारा जाता था. वे मृदुभाषी और काफी धार्मिक थे और गांधीवादी जीवन पद्धति को कई रूपों में व्यवहार में लाते थे. व्यसन के नाम पर सिर्फ चाय पीनेवाले गहलोत सिर्फ सात्विक भोजन करने में यकीन करते हैं और शाम ढलने के बाद से सुबह तक कुछ भी खाने से परहेज करते हैं.

राहुल गांधी के कांग्रेस के सबसे ताकतवर लोगों में शुमार किये जानेवाले गहलोत के बारे में लोगों को ज्यादा जानकारी नहीं है, सिवाय इसके कि गहलोत के पिता लक्ष्मण सिंह दक्ष एक प्रसिद्ध जादूगर थे, जो देशभर में अपनी प्रस्तुतियां दिया करते थे.

अपने बचपन के दिनों में अशोक भी अपने पिता के साथ सफर किया करते और जादू दिखाकर दर्शकों को एक तरह से सम्मोहित कर देते थे.

कुछ साल पहले गहलोत ने एक साक्षात्कार में कहा था, ‘अगर मैं राजनीति में नहीं आया होता, तो मैं एक जादूगर होता. मैं हमेशा सामाजिक काम करना और जादूगरी सीखना पसंद करता था. भविष्य में भी मुझे जादूगर बनने का मौका शायद न मिल सके, लेकिन जादूगरी आज भी मेरी आत्मा में है.’

हालांकि, वे इसे स्वीकार नहीं करते हैं, लेकिन ऐसा कहा जाता है कि गहलोत ने इंदिरा गांधी की मौजूदगी में युवा राहुल और प्रियंका के सामने जादू दिखाया था.

कुछ लोग यह महसूस करते हैं कि अशोक गहलोत की खोज का श्रेय इंदिरा गांधी को दिया जाना चाहिए, क्योंकि वे उत्तर पूर्व क्षेत्र में भीषण शरणार्थी समस्या के दौरान गहलोत से मिलने वाले शुरुआती नेताओं में थीं.

उस समय 20 साल के गहलोत को राजनीति में आने का निमंत्रण और किसी ने नहीं, खुद उस समय की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने दिया था. वे इंदौर में अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के सत्र में शामिल हुए थे, जहां उनकी मुलाकात संजय गांधी से भी हुई. उसके बाद से उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा.

इंदौर सत्र के दौरान प्रियरंजन दासमुंशी को यूथ कांग्रेस का अध्यक्ष चुना गया था और वे आज तक यूथ कांग्रेस के निर्वाचित होनेवाले एकमात्र अध्यक्ष हैं. यह वह दौर था, जब इंदिरा गांधी और संजय गांधी यह चाहते थे कि यूथ कांग्रेस दक्षिणपंथी संघ और उससे संबंधित संगठनों का मुकाबला करे. यह कांग्रेस में युवा नेताओं को तैयार करने के लिहाज से स्वर्णकाल था.

वैसे तो संजय गांधी की आलोचना 21 महीने चले आपातकाल के दौरान उनकी अकड़ और संविधानेत्तर सत्ता केंद्र के तौर पर काम करने के लिए की जाती है, लेकिन यह भी सच है कि उन्होंने पार्टी के भीतर एक नेतृत्व के कारखाने की स्थापना की थी, जिससे कई ऐसे नेता निकले जिन्होंने 1980, 1990 और 2000 के दशकों में ग्रैंड ओल्ड पार्टी के अंदर प्रभावशाली भूमिका अदा की.

उनमें से कई, मसलन कमलनाथ, दिग्विजय सिंह, अंबिका सोनी, व्यालार रवि, एके एंटनी, गुलाम नबी आज़ाद, मुकुल वासनिक, बीके हरिप्रसाद आज भी सक्रिय हैं.

संजय के नेतृत्व में इन नेताओं को कई जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं, मसलन झुग्गियों को गिराना, परिवार नियोजन, वयस्क शिक्षा अभियान, एक व्यक्ति एक पेड़ पर्यावरण योजना, दहेज विरोधी अभियान, सरकारी कर्मचारियों के साथ शारीरिक बल-प्रयोग आदि.

यह संजय गांधी के ‘सीधे शासन’ का विचार था, जिसके तहत यूथ कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ताओं को पथभ्रष्ट नौकरशाहों की सार्वजनिक पिटाई करने का निर्देश दिया गया था. अतिउत्साहित और घमंड से भरे यूथ कांग्रेस के नेताओं द्वारा सरकारी कर्मचारियों पर जूते निकालने की कई घटनाएं हुईं.

लेकिन गहलोत संजय की मृत्यु के बाद राजीव गांधी के राजनीति में आने तक राजस्थान और दिल्ली में सामान्य भूमिकाओं में रहे. राजीव ने इंदिरा के मंत्रिमंडल में जूनियर मंत्री के तौर पर उनका नाम आगे किया. हरिदेव जोशी और शिवचरण माथुर जैसे कद्दावर नेताओं के खिलाफ उतारे गए अशोक राजस्थान में राजीव के आंख और कान बन गए.

राजनीतिक गलियारों में ये चर्चाएं रहीं कि जब राजीव गांधी ने राज्य की राजधानी से 170 किलोमीटर दूर कैबिनेट की बैठक करने का फैसला किया, उस समय गहलोत ने राजस्थान के मुख्यमंत्री के पद से जोशी को हटाए जाने में मुख्य भूमिका निभाई.

राजीव के निर्देशों के तहत राज्य के मंत्रियों को राजीव से मिलने के लिए सरकारी गाड़ियों का इस्तेमाल नहीं करना था. राजीव खुद एक एसयूवी ड्राइव कर रहे थे, जिसे कथित तौर पर स्थानीय ट्रैफिक कॉन्सटेबल द्वारा सीधे जाने देने की जगह दायें मुड़ने का संकेत दिया गया.

ऊपर से मासूम सी दिखाई देनेवाली यह चूक (कुछ लोगों का दावा है कि यह जादूगर अशोक की कारगुजारी थी) जोशी को महंगी पड़ी, क्योंकि मार्ग में यह बदलाव उस जगह की ओर लेकर गया जहां राज्य के मंत्रियों और अधिकारियों की सैकड़ों में संख्या में गाड़ियां खड़ी की गई थी.

विभिन्न मोर्चों पर लड़ रहे राजीव ने यह निर्देश उस समय भीषण सूखे का सामना कर रहे राजस्थान में किफायत का संदेश देने के लिए दिया था. राजीव द्वारा लगाई गई सार्वजनिक फटकार जोशी को हजम नहीं हुई, जिन्होंने नाराज होकर दोपहर के भोजन का बहिष्कार कर दिया.

मेजबान मुख्यमंत्री की गैरहाजिरी पर जोशी के मित्र पीवी नरसिम्हा राव का ध्यान गया, जो उस समय राजीव गांधी की कैबिनेट में मानव संसाधन विकास मंत्री थे. राव द्वारा बीच-बचाव की कोशिश बेकार गई और एक महीने के भीतर जोशी की जगह माथुर को राज्य का मुख्यमंत्री बना दिया गया.

इस दौरान गहलोत दिल्ली में थे और पर्यटन मंत्रालय की कमान संभाल रहे थे. इससे पहले नागरिक उड्डयन मंत्रालय में जूनियर मंत्री के तौर पर उनके कार्यकाल ने उनके कद को बढ़ाने का काम किया था, क्योंकि उन्होंने जी जान लगाकर राजीव के विजन के मुताबिक काम किया था.

इसके बाद गहलोत के हिस्से में कई सफलताएं जुड़ीं. गहलोत को आईएनए मार्केट के सामने दिल्ली हाट की स्थापना का श्रेय दिया गया, जो आज भी लोक-कलाओं के बाजार के तौर पर काम करता है, जो देशभर के दस्तकारों/शिल्पियों और उनके हस्तशिल्प को सीधे खरीददारों से जोड़ता है.

पीवी नरसिम्हा राव के मंत्रिमंडल में कपड़ा मंत्री के तौर पर उनके कार्यकाल को कई नवाचारी विचारों कों मूर्त रूप देने के कारण यादगार माना जाता है.

राजीव गांधी के साथ उनकी नजदीकी ने संभवतः सोनिया गांधी और उनके बाद राहुल गांधी के साथ अच्छे संबंध बनाने में गहलोत की मदद की, जो अब तक अपने मित्र सचिन पायलट (जो वर्तमान में राजस्थान कांग्रेस के अध्यक्ष हैं) और अपने चाचा के समान गहलोत के बीच बेहतरीन संतुलन कायम करने में कामयाब रहे हैं.

राहुल की मौजूदगी यह सुनिश्चित करने में कामयाब रही है कि गहलोत ने सचिन पायलट का तख्तापलट करने की कोई कोशिश नहीं की है. इसके साथ ही सचिन से यह उम्मीद की जाती है कि वे दो बार राजस्थान के मुख्यमंत्री रहे अशोक गहलोत को पूरा महत्व दें.

कांग्रेस में ऐसा सोचने वालों की कोई कमी नहीं है कि अगर राजस्थान में कांग्रेस कम अंतर से जीत हासिल करने में कामयाब रहती है, तो गहलोत मुख्यमंत्री के तौर पर राहुल की पहली पसंद होंगे.

गहलोत की सरलता और उनकी सादगी ने उनके कद को काफी बड़ा करने में काफी मदद की है. एक समय ऐसा भी था जब गहलोत अहमद पटेल और गुलाम नबी आजाद के सामने कुर्सी पर नहीं बैठा करते थे. आज वे उनके साथ बराबरी की कुर्सी पर बैठते हैं और वे 24 अकबर रोड के किसी भी शक्तिशाली पदाधिकारी जितने ही ताकतवर हैं.

पार्टी नेताओं और सहकर्मियों के एक बड़े हिस्से में गहलोत आज भी अच्छी नीयत वाले व्यक्ति के तौर पर जाने जाते हैं, जिन्होंने दिल्ली और जयपुर के सियासी गलियारों में चहलकदमी के बावजूद अपने दोस्तों के साथ सामान्य रिश्ते बनाए रखा है.

अपने गृहनगर जोधपुर में आराम फरमाने का गहलोत का तरीका एक पीसीओ के सामने बैठना और सभी तरह के लोगों के साथ गपशप करना है. इस अनुभवी नेता के पास खुद पर हंसने की क्षमता है.

एक बार उन्होंने एक युवा से धीमे स्वर में फुसफुसाकर कर जो कुछ कहा, वह इस तरह सुनाई दिया जैसे वे कह रहे हों ‘टमाटर खाओ’, जबकि उनके कहने का मतलब था, ‘कमाकर खाओ. जब यह चुटकुला गहलोत को सुनाया गया, तो वे जोर से हंसे थे.

The bridge between professional education and industry requirements needs to be narrowed down-Pavan Kaushik,

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Pavan Kaushik, Vice President and Head – Corporate Communication, Hindustan Zinc was the Chief Guest of Spardha 2018, Institute of Rural Management, Jaipur. The event started with lamp lighting and a welcome address by Dr. B.R. Madan, Advisor, SIIRM. Over 150 MBA students attended the event.

 In his address, Pavan Kaushik said, “I am glad to be a part of Spardha 2018 and address all the bright students present here. I believe that today’s children are the future of the country. It is crucial that these future leaders drive the growth of our nation and make it reach its potential.”

 Pavan Kaushik explained that the bridge between professional education and industry requirements needs to be narrowed down. For that, the students must do research, data mining and forecast for the future.

 With regard to CSR, Pavan Kaushik said, “CSR or Corporate Social Responsibility is not merely a duty or job profile being fulfilled by a Corporate. For doing CSR, it is very important to have a ‘Character’ that drives you to do CSR. I believe that the ‘C’ in CSR stands for ‘Character’. As for the ‘S’ of CSR, I feel that the ‘S’ stands for ‘Sustenance’. It is utmost important that the projects in CSR provide for a long lasting and sustained growth. Thirdly, I feel that the ‘R’ in CSR’ stands for ‘Result’ because impact assessment and measurement is also imperative.”

 “30% of world’s poor children live in India. It is high time that we think about the future human resources of the country. There are many challenges that our country is facing. As an Institute, the students should collectively pick one area and work towards improving it.”

 Pavan Kaushik also gave an overview of how Hindustan Zinc is working towards child care through its project Khushi, and towards rural and tribal women empowerment through its project Sakhi. He also explained about project Be Safe Zindagi, which Pavan Kaushik launched to bring about road safety, especially in the state of Rajasthan.

 In the event, Spardha 2018, also present on the dais were Professor Barbara Cangan – President SIIRM, Dr. B.R. Madan – Advisor SIIRM, Ms. Stany Thomas Cangan – CEO SIIRM, Mr. R.D. Singh – Advisor SIIRM and Dr. Jessy John – Director FMS IRM, Jaipur.

राजस्थान : रिश्तों को शर्मसार करदे एसी घटना – पिता ने 14 साल की बेटी से किया रेप।

राजस्थान के सीकर जिले के खंडेला कस्बे में पिता-बेटी के रिश्तों को शर्मसार करने देने वाला मामला सामने आया है, जिसमें एक रक्षक पिता ही अपनी बेटी का भक्षक बन गया। रात को बेटी को अकेला पाकर हैवानियत की सारी हदें पार कर डाली।
इस पिता ने बेटी के साथ रेप किया और किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी दी। सुबह बेटी ने अपनी मां को आपबीती बताई तो उसका भी खून खौल उठा। मां अपनी बेटी को लेकर पुलिस थाने पहुंची और दरिंदगी करने वाले पति के खिलाफ मामला दर्ज करवाया। प्रकरण सामने आने के बाद पुलिस ने आरोपित पिता को हिरासत में ले लिया और पीडि़ता बेटी का मेडिकल करवाया।
जानकारी के अनुसार खंडेला कस्बे के वार्ड नम्बर 2 की एक महिला ने खंडेला पुलिस थाने में शुक्रवार सुबह रिपोर्ट दर्ज करवाई कि उसका बच्चा बीमार चल रहा है।
वह उसके इलाज के लिए गुरुवार शाम को सीकर आई थी। बच्चे की तबीयत में सुधार नहीं होने पर वह रात को सीकर ही रुक गई थी।
सुबह महिला घर पहुंची तो 14 वर्षीय नाबालिग बेटी गुमशुम थी। मां इसकी वजह जाननी चाही तो बेटी फूट पड़ी और उसने रात को अपने साथ हुई हैवानियत की पूरी कहानी बयां कर दी। बेटी ने मां को बताया कि जब वह रात सो रही थी।
तब पिता ने उसके साथ दुष्कर्म किया। मां की शिकायत पर खंडेला पुलिस ने पीडि़ता के पिता के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
साथ ही पीडि़ता का खंडेला के सरकारी अस्पताल में मेडिकल करवाया गया। पुलिस ने आरोपित पिता को हिरासत में भी ले लिया है।
पीडि़ता की मानें तो पिता द्वारा रेप किए जाने की शुक्रवार रात की पहली घटना नहीं है। पिछले करीब सालभर से पिता उसकी अस्मत लूट रहा है। वह जब भी उसे मौका मिलता तब बेटी का रेप कर देता था। उल्लेखनीय है कि आरोपी की पिता की उम्र करीब 40 साल है। वह मजदूरी करता है।

अग्रवाल समाज बोला स्मार्ट सिटी को स्मार्ट विधायक की दरकार, डूंगरपुर के सभापति के.के गुप्ता ही हो सकते है स्मार्ट विधायक प्रत्याशी।

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उदयपुर। विधानसभा चुनाव में उदयपुर शहर से एक और भाजपा के दमदार नेता की उम्मीदवारी सामने आई है। डूंगरपुर नगर परिषद् के सभापति के के गुप्ता, हालाँकि के के गुप्ता की दावेदारी अग्रवाल समाज द्वारा रखी गयी है। लेकिन अगर सूत्रों की मानें तो खुद के के गुप्ता भी उदयपुर शहर से भाजपा के प्रत्याशी की दावेदारी मुख्यमंत्री वसुंधराराजे के समक्ष पेश कर चुके है। के के गुप्ता का नाम उदयपुर शहर के दावेदारों की सूचि में आने से भाजपा की अंदरूनी राजनीति में भूचाल सा अगया है। क्यूँ कि डूंगरपुर शहर के विकास कार्यों के चलते के के गुप्ता मेवाड़ ही नहीं बल्कि राजस्थान और भारत में एक बड़ा नाम हो गया है . के के गुप्ता ने डूंगरपुर शहर में नगर परिषद् सभापति रहते विकास के जो कार्य किये है उसकी बदोलत गुप्ता राजस्थान में ही नहीं देश भर में जाने पहचाने जाने लगे है। के. के. गुप्ता ने अपनी कार्यशैली से न सिर्फ डूंगरपुर को चमन किया है, बल्कि पूरे राजस्थान की निकायों के ब्राण्ड एम्बेसेडर भी बने है। इतना ही नहीं उनके कामों को अनुसरण के लिए विदेशों से भी निगम और निकाय वाले डूंगरपुर आ रहे हैं, ऐसे में अग्रवाल समाज चाहता है कि भारतीय जनता पार्टी हर बार एक ही आदमी को टिकिट देती है, इस बार पार्टी को बदलाव करना चाहिए और के.के. गुप्ता को उम्मीदवार बनाना चाहिए है। ताकी शहर की दिशा और दशा में सुधार आसके।
गुरुवार को उदयपुर शहर से अग्रवाल समाज ने अपने प्रत्याशी को मैदान में उतारने की ताल ठोकते हुए अग्रसेन भवन में पत्रकार वार्ता आयोजित जिसमें समाज के पदाधिकारियों ने पत्रकारों को सम्बोधित करते हुए कहा कि विधानसभा चुनाव में अगर अग्रवाल समाज के प्रतिनिधि को विधायक की दावेदारी के लिए टिकिट नहीं मिला तो समाज सभी राजनीतिक दलों का बहिष्कार करेगा। इस मौके उन्होंने कहा कि अग्रवाल समाज वर्षों से राजनीति उपेक्षा का शिकार रहा है, ऐसे में अब समाज डूंगरपुर के सभापति के. के. गुप्ता को अपने प्रत्याशी के रूप में देखना चाह रहा है। इस अवसर पर समाज के पदाधिकारियों ने बताया कि हम पूरजोर तरीके से पार्टी से टिकिट देने की मांग कर रहे है और अगर उदयपुर से गुप्ता को टिकिट नही मिलता है तो समाज मेवाड़ में अलग से अपना प्रत्याशी उतार सकता है। इस मौके पर कैलाशचंद्र अग्रवाल, मदन लाल अग्रवाल, रामचन्द्र अग्रवाल, बृजमोहन अग्रवाल ,ओमप्रकाश अग्रवाल सहित कई पदाधिकारी और समाजजन मौजूद रहे।