बच्चों को अपना लक्ष्य दिखाने और नन्हे इरादों को बुलंदियों तक पहुचाने का का काम कर रही है डूंगरपुर की पीपी एज्युकेशन सोसायटी .

Prakash Pankal, director of PP Education
कौन कहता है कि आसमान में सुराख नहीं हो सकता 
एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारों , 
कुछ एसा ही जज्बा लेकर खूबसूरती और सफाई में  अपनी पहचान बना चुके डूंगरपुर निवासी प्रकाश पंचाल ने पीपी एजुकेशन सोसायटी (PP Education Society ) स्थापित कर एक विशेष अभियान शुरू किया है.
पीपी एजुकेशन सोसायटी के निदेशक प्रकाश पंचाल ने एक एसी सोच के साथ अपना अभियान शुरू किया है जिसकी आज के दौर में सबसे अधिक आवश्यकता है. श्री पंचाल अपने अभियान के बारे में बताते हुए कहते है कि मेरा मानना है कि बच्चा चाहे दिल्ली, मुम्बई जैसे महानगर का हो या फिर हमारे वागड़ क्षेत्र के किसी छोटे से गाँव का, हर एक बच्चे में कोई एक विशेष प्रतिभा होती है. बस जरूरत है तो उस प्रतिभा को निखारने की उस प्रतिभा को पहचान कर उसको प्रोत्साहित करने की और यही काम हमारी PP Education Society  का मुख्य उद्देश्य है. श्री पंचाल कहते है कि यह कार्य का जिम्मा भी हमने एक तरह से बच्चों को ही सोंप शुरू किया  “एक दिन एक रूपया” के अंशदान के आधार पर. कहने को एक रुपया काफी छोटा है लेकिन यही एक रुपया खुद बच्चों के हाथों से बच्चों के लिए जमा होने लगे तो उन लाखों वंचितों की तक़दीर बदल सकता है जिन्हें आज के दौर में जरूरत है . प्रकाश पंचाल बताते है कि अभावग्रस्त व जरुरतमंद विद्यार्थी जिनमें प्रतिभा तो है पर आभावों के तले अपने सपने साकार नहीं कर पा रहे। ऐसे बालकों के लिए प्रति व्यक्ति प्रतिदिन शिक्षा के लिए 1 रुपया का अंशदान अथवा 1 रुपए के गुणाक में  अपनी सामर्थ्य अनुसार देने का आग्रह किया, ताकि हम सभी मिलकर भावी पीढ़ी के निर्माण में सशक्त भूमिका निभा सकते हैं। पंचाल के इस अभियान को बच्चों ने

Prakash Pankal, director of PP Education

अपने दिल से लगा लिया और इस प्रतिदिन एक रुपये के अंशदान को हाथों हाथ लेते हुए कई मासूम हाथ आगे बढ़ गए . और साथ में आगये उनके माता पिता .

प्रकाश पंचाल ने बताया कि पीपी एज्यूकेशन का उद्देश्य सीधा सा है बच्चों को उनकी मंजिल को पहचानने में मदद करना. हर बच्चा प्रतिभावान है लेकिन मार्गदर्शन के अभाव में वह अपना सही फिल्ड खोज नहीं पाता या यूँ कहिये पहचान नहीं पाता बस इसी काम को पीपी एजुकेशन सोसायटी करेगी .सोसायटी वागड़ के बच्चों का देश विदेश के घटनाक्रमों के साथ ही शिक्षा के क्षेत्रों में बालकों के लिए उचित मार्गदर्शन देकर उनकी प्रतिभाओं को तराशना व बालकों को विभिन्न ऊंचाइयों तक पहुचाने के प्रति प्रतिबद्ध है । जिससे बालकों को पीपी एज्यूकेशन द्वारा समय-समय पर निःशुल्क फार्म पहुंचाकर उनकी अभिरूचि जानकर उन्हें पूर्ण किया जाता है।

मोटिवेशनल सेमीनार में छात्रों ने जाना ज़िन्दगी जीने का मूल मन्त्र 

इस कड़ी में PP Education Society Dungarpur व रोटरी कल्ब की ओर से आयोजित एक दिवसीय मॉटीवेशनल सेमिनार का आयोजन विगत दिन शहर के विजयाराजे सिंधिया ऑडिटोरियम में संपन्न हुआ। जिसमें शहर के उपस्थित अंग्रेजी माध्यम के राजकीय व नीजी विद्यालय के छात्रों ने छात्रों बुलंदियों से आच्छादित जिवनयापन का मूल मंत्र सिखा। सेमिनार में छात्रों को जीवनयापन का  मूल मंत्र प्रदान करने व उनका मार्गदर्शन करने के लिए बतौर मुख्य अतिथि ससुराल सिमर का धारावाहिक की टीवी कलाकारा श्वेता सिंह, मोटिवेश्वल स्पीकर तिरंदाजी में राष्ट्रीय पुरस्कार से सुसज्जित और असहाय बालकों के अपना सहयोग और गायकी द्वारा उन असहाय बालकों का जीवन संवारने वाली, संसार की सबसे कम उम्र की मॉटिवेशनल स्पीकर, स्टूडेंट ऑफ द ईयर 2018 मुबंई की जाह्नवी पंड्या तथा मुंबई की ख्यातनाम फैशन स्टाइलिस्ट आकांशा कपूर उपस्थित रही। जिन्होंने बालकों को जीवन यापन व तनाव मुक्त रहकर जीवनशैली को जिने का मंत्र देकर उनका मार्गदर्शन किया। सेमिनार में पीपी एज्युकेशन सोसायटी के संरक्षक विक्रम माखिजा ने सोसायटी के उद्धेश्य बतलाते हुए कहा कि डूंगरपुर जिले में सोसायटी का आरंभ विगत 4 वर्षों पूर्व किया गया था। माखीजा ने बताया कि मानव जीवन में ज्ञान के साथ ही हर किसी व्यक्ति को अपना रोल मॉडल तय करना चाहिए, वागड़ में भी रोल मॉडल का खजाना भरा पड़ा है, लेकिन आव्यश्कता है, तो बस उसे तराशने की जो काम सोसायटी द्वारा भी किया जा रहा हैं।
आशाओं की भरों उड़ान,छ लो शिखर 
सेमिनार में उपस्थित छात्रों को मोटिवेश्वल स्पीकर जाह्नवी पंड्या ने संबोधित कर अंग्रेजी गीत देयर ही नो… सुनाते हुए कहा कि जीवन में कुछ आशाएं है, तो उन्हें बुलंद करो ओर शिखर को चुमते हुए अपना रॉल मॉडल प्राप्त कर लो। पंड्या ने कहा कि जीवन में सबसे महत्वपूर्ण योग कर्मयोग है। सपनों के शिखर तक पहुंचने का माध्यम ही कर्म है, यदि आप कर्म को अपना लेते है तो निश्वित ही शिखरता और प्रशस्ती आपके कदम चूमेगी।
 व्यस्त रहने पर मिलेंगे अनुभव के सागर:
सेमिनार को आगामी क्रम में ससुराल सिमर का धारावाहिक की टीवी कलाकारा श्वेता सिंह ने बालकों को संबोधित करते हुए उनके साधारण व्यक्तित्व से टीवी दुनिया कि शिखरता बतलाकर कहा, उन्होंने समय की महत्ता को अपनी जीवन शैली में उतारा व व्यर्थ में समय न गवां कुछ न कुछ सिखती रही। जिसके अनुभव उन्हें उनके टीवी किरदार में भी मिले ।सिंह ने बालकों को बताया कि वह कभी अपने अविश्वास व नकारात्मकता को अपने प्रयासों पर हावी न होने दें और सकारात्मक आवरण को अपना विश्वास के साथ अडिंग रहे चाहे परिस्थितियां जो भी हो। सेमिनार में माता-पिता से कहा कि बच्चों को सदैव स्कूली शिक्षा के बाद अपने भविष्य को लेकर असंमजसता बनी रहती है, लेकिन माता-पिता को सदैव बच्चों को उनका साथ देकर बालक की प्रतिभा को समझकर उसकी इच्छानुसार उसे अपना फिल्ड चुनने में सहायता करनी चाहिए।
दो महीनों की क्लास ने बदली जिंदगी 
मुंबई की ख्यातनाम फैशन स्टाइलिस्ट आकांशा कपूर ने स्कूली छात्रों से कहा कि जैसे जैसे समय बदलता है, तो सोच में बदलाव होना स्वाभाविकता है। कपूर ने बच्चों से कहा कि प्रयोग करने पर आपको अपनी योग्यता का अनुमान लग सकेगा। कपूर ने अपनी जीवन कि वास्तविकता को बतलाते हुए बालकों से कहा कि उनके परिवार में अधिकांशतः मेडिकल क्षेत्र से है। एवं वह भी कक्षा 11वीं तक मेडिकल में ही अपनी रूचि रखती थी, लेकिन 11वीं कक्षा में अवकाश के दौरान कपूर ने दो महीना फैशन की कक्षा लेना प्रारंभ किया, जिसने उनकी सोच बदली ओर वह फैशन स्टाइलिस्ट बनी।
अतिथियों ने किया अंशदान, शहर का किया भ्रमण
मुम्बई से आई जाह्नवी पंड्या, ससुराल सिमर की अदाकारा श्वेता सिंहा तथा आकांक्षा कपूर ने भी अपना अंशदान देते हुए शिक्षा के प्रति इस अनूठी पहल की खुले मन से सराहना की। शाम को सभी मेहमानों ने शहर के खुबसूरत स्थानों का अवलोकन किया एवं स्वच्छ एवम सुंदर शहर के लिए तथा ऑडिटोरियम के लिए नगर परिषद के को धन्यवाद दिया, सभापति से दूरभाष पर वार्ता की .

चार साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म करने वाले आरोपी को मासूम ने पहचाना, बोली-पीटा भी।

हिरण मगरी थाना क्षेत्र में झामर कोटड़ा के धामदर गांव में बुधवार शाम ज्यादती का शिकार हुई चार साल की बच्ची ने आरोपी युवक को पहचान लिया। बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के सामने कहा कि वह आंगन में खेल रही थी। झमकिया उसे मोबाइल में नए वीडियो दिखाने के बहाने मगरे पर ले गया, वहां पीटा भी। बच्ची शुरुआत में सहमी रही, लेकिन सदस्यों ने विश्वास में लिया और सहज होने जैसा माहौल दिया तो उसने हर सवाल का जवाब दिया। उसकी हर बात बयान के रूप में कलमबद्ध की गई है।

इधर बच्ची के साथ दुष्कर्म करने की घटना सामने आने के बाद उदयपुर वासियों ने सोशल मीडिया पर तरह तरह की प;ओसत और उदाहरण देकर आरोपी को फांसी की सजा देने की पेरवी की। लोगों में इस घटना को लेकर जोरदार आक्रोश है।

सीडब्ल्यूसी के सदस्य हरीश पालीवाल सहित अन्य ने बयान नोट किए और बच्ची को माता-पिता के सुपुर्द किया। साथ ही पुलिस को मामले में जल्द चालान पेश करने के लिए कहा। उधर, एसपी कुंवर राष्ट्रदीप भी कह चुके हैं कि इस मामले में जल्द चालान पेश किया जाएगा। हालांकि एफएसएल द्वारा लिए डीएनए सैंपल की रिपोर्ट आने में समय लगने का अंदेशा है।

सीडब्ल्यूसी ने पीड़ित प्रतिकर में सहायता राशि दिलाने के लिए भी बच्ची की तरफ से आवेदन किया। बता दें कि बुधवार को धामदर में झमक लाल उर्फ झमकिया आंगन में खेलती बच्ची को उठा ले गया था। उसे पहाड़ी पर ले जाकर दुष्कर्म किया। घटना के वक्त बच्ची की मां खेत पर काम करने गई थी, जबकि पिता शहर में था। पुलिस ने देर रात आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था

रावण दहन देख रहे लोगों को 100 से ज्यादा रफ्तार वाली 2 ट्रेनों ने कुचला, पुलिस ने कहा- 50 से ज्यादा की मौत

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  • अमृतसर के जोड़ा फाटक पर शुक्रवार शाम हुआ दर्दनाक हादसा
  • पटाखों के शोर में दब गई ट्रेन की आवाज, चपेट में आए काफी लोग
  • जोड़ा बाजार में रावण दहन के दौरान नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी भी मौजूद थीं

जोड़ा बाजार में रावण दहन देख रहे लोग शुक्रवार शाम 100 से ज्यादा रफ्तार वाली दो ट्रेनों की चपेट में आ गए। पुलिस का कहना है कि इस हादसे में 50 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है। बताया जा रहा है कि दशहरा मैदान के पास ही जोड़ा फाटक है। रावण दहन देखने के लिए लोग दशहरा मैदान से जोड़ा फाटक तक खड़े हुए थे।

पुतला जलने के बाद भगदड़ मची थी : पुलिस के मुताबिक, रावण का पुतला जलने के बाद जोड़ा बाजार में भगदड़ मच गई। उसी दौरान जोड़ा फाटक से तेज रफ्तार में दो ट्रेनें गुजरीं, जिनकी चपेट में काफी लोग आ गए।

150 मीटर तक बिखरी लाशें : पुलिस ने बताया कि एक ट्रेन पठानकोट से अमृतसर जा रही थी। प्रत्यक्षदर्शियों ने कहा कि पटाखों के शोर में लोग ट्रेन की आवाज नहीं सुन पाए। घटनास्थल पर 100 से 150 मीटर के दायरे में लाशें बिखरी हैं। मौके पर एनडीआरएफ की टीम रेस्क्यू अभियान में जुटी है।

हादसे के बाद चली गईं नवजोत कौर सिद्धू : लोगों का कहना है कि दशहरा का कार्यक्रम कांग्रेसी पार्षद करा रहे थे। इस कार्यक्रम में नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर सिद्धू चीफ गेस्ट थीं। हादसा होने के बाद वे मौके से चली गईं।

सभी सरकारी और प्राइवेट अस्पताल खुले रहेंगे : पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह कहा- अमृतसर में रेल दुर्घटना की खबर सुनकर मैं चौंक गया। सभी सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों को खुले रहने को कहा गया है। हादसे में मारे गए लोगों के परिजनों को 5-5 लाख रुपए दिए जाएंगे।

पीएम मोदी ने तुरंत मदद करने के निर्देश दिए : अमृतसर ट्रेन हादसे के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह हृदय विदारक हादसा है। हादसे में अपनों को खोने वाले लोगों के प्रति मेरी संवेदनाएं हैं। प्रार्थना करता हूं कि घायल हुए लोग जल्द ठीक हो जाएंगे। अधिकारियों को जरूरत के मुताबिक तुरंत सहायता देने के निर्देश दिए गए हैं।

बिना इजाजत हो रहा था कार्यक्रम : लोगों का कहना है कि जोड़ा बाजार में रावण दहन का कार्यक्रम बिना इजाजत हो रहा था। इस मामले में जिला प्रशासन और दशहरा कमेटी ने पूरी तरह लापरवाही बरती। कार्यक्रम को देखते हुए उन्हें रेलवे क्रॉसिंग के पास अलार्म की व्यवस्था करनी चाहिए थी। इसके अलावा ट्रेन को रोकने या गति धीमी रखने का इंतजाम होना चाहिए था।

 

क्या हमने लोगों पर ट्रेन चढ़ा दी? : नवजोत कौर सिद्धू का कहना है कि हर साल इसी जगह दशहरा होता है। क्या हमने लोगों को ट्रैक पर बैठाया? क्या ट्रेन हमने लोगों पर चढ़ा दी? इस हादसे में हमारी गलती नहीं है। भाजपा भी इसी जगह दशहरा आयोजन कराती थी। अब हादसे के बाद राजनीति कर रही है। रेलवे को भी ट्रेन की स्पीड धीमी रखनी चाहिए थी।

कटारिया को खुली चुनौती – भरोसिंह शेखावत मंच और जनता सेना गुलाबचंद कटारिया के सामने अपना प्रत्याशी खड़ा करेगें।

उदयपुर। अपने भाषणों में कांग्रेस को खुली चुनौती देने वाले गृहमंत्री और उदयपुर शहर के विधायक गुलाबचंद कटारिया को इस चुनाव में अपनी ही पार्टी के भैरो सिंह शेखावत मंच के द्वारा खुली चुनौती मिलने वाली है।
आमागी विधानसभा चुनाव में उदयपुर शहर से भाजपा के संभावित प्रत्याशी गुलाबचन्द कटारिया के लिए चुनाव की डगर कठिन होती जा रही है। कटारिया इन दिनों अपनी ही पार्टी के कार्यकर्ताओं के आरोपों से घिरे हैं। शेखावत मंच ने कटारिया के विरूद्ध चुनाव लड़ने की खुली चुनौती देकर कटारिया की राह को और भी कठिन बना दिया है।
जानकारी के अनुसार सोमवार को राणकपुर में हुई भाजपा के दिग्गजों की रायशुमारी की बैठक में कटारिया के उदयपुर से नाम आने की संभावनाओं के बाद शेखावत मंच पुनः अपने मिशन की ओर जुट गया है। कटारिया के समक्ष उदयपुर शहर विधानसभा सीट से अपना प्रत्याशी खड़ा करने की अपनी घोषणा पर प्रतिबद्धता दिखाते हुये बुधवार को मंच के मुख्य समन्वयक मांगीलाल जोशी, मार्ग दर्शक दलपत सुराणा और कटारिया के धुर विरोधी जनता सेना के संस्थापक और वल्लभनगर के विधायक रणधीर सिंह भींडर के बीच सुराणा के निवास पर लंबी बैठक चली। बैठक में 20 अक्टूबर को शेखावत मंच की कौर कमिटी की बैठक तय हुई इस बैठक में जनता सेना और शेखावत मंच की सहमति से उदयपुर से किसी बड़े नेता के नाम पर मुहर लगाने की संभावना है। मंच के मांगीलाल जोशी ने बताया की जनता सेना के रणधीर सिंह वहींदार के साथ लम्बी चर्चा चली जिसमे यह तय हुआ की जल्दी ही मंच के अन्य लोगों के साथ चर्चा कर विधायक के लिए नाम की घोषणा कर दी जाएगी। इस बीच मंच के जोशी और विधायक भींडर ने मंच के नेता एडवोकेट रोशनलाल जैन, पूर्व उपसभापति वीरेंद्र बापना और किरण चन्द लसोड़ से भी बारी-बारी से बात की। जोशी ने बताया कि वैसे तो कटारिया के पास उदयपुर सीट के अतिरिक्त कोई विकल्प नहीं है फिर भी उदयपुर जिले में कहीं से भी वे चुनाव लड़ते हैं तो शेखावत मंच उनके विरूद्ध अपना प्रत्याशी उतारेगा।
इधर कटारिया लगातार कहते आ रहे है कि पार्टी उन्हें जहां से कहेगी वहां से चुनाव लड़ने को तैयार हैं। वहीं रायशुमारी में उदयपुर सीट से गुलाबचन्द कटारिया के साथ देहात भाजपा जिलाध्यक्ष गुणवंत सिंह झाला का नाम भी संभावित सूची में आने से राजनीतिक अटकलें तेज हो गई हैं।

क्या मी टू के आरोपी कैलाश खेर को उदयपुर नगर निगम को बुलाना चाहिए ?

उदयपुर। दुनियाभर में पचास से ज्यादा हस्तियों पर अब तक मी टू केम्पेन के तहत आरोप लग चुके है। इस केम्पेन की वजह से यूएस समेत 15 देशों में कानून बदलने की कवायद चल रही है। भारत में भी कई मामले सामने आ रहे है। इस बार नगर निगम में आयोजित होने वाले दीपावली दशहरा मेले में भी जाने माने कलाकार कैलाश खेर की नाईट होने वाली है।
जबकि गायककार कैलाश खैर पर भी एक सिंगर सोना मोहपात्रा सहित कई महिलाओं ने आरोप लगाया है, कि सिंगर कैलाष खैर ने उनके साथ जबरन ऐसी हरकत की जो उनकी मर्जी के खिलाफ थी। ऐसे में चैतरफा जब कैलाष खेर ट्रोल हो रहे है तो उदयपुर नगर निगम पर भी सवाल उठ रहे है कि क्या कैलाश खेर की नाईट उदयपुर में करवानी चाहिए?
कई लोगों का मानना है कि उनकी जगह पर किसी और प्रसिद्ध सिंगर को बुलाया जाना चाहिए। इस मामले पर कांग्रेस के नेता दिनेश श्रीमाली और प्रतिपक्ष नेता मोहसिन खान ने अपना विरोध जताया है। उनका कहना है कि भारतीय संस्कृति की बात पर देश में बड़ी – बड़ी बातें करने वाले भारतीय जनता पार्टी के कई नेता भी मी टू मामले में फंसत्ते नजर आ रहे। कई अभिनेताओं पर भी आरोप लग रहे है और ऐसे में निगम की ओर से आयोजित दीपावली दशहरा मेले में इस तरह के एक आरोपी कलाकार को बुलाना बहुत गलत होगा। जिसका विरोध भी स्वाभाविक रूप से किया जाएगा। आपको बता दे 2006 में सामाजिक कार्यकर्ता तराना बर्क ने पहली बार मी टू केम्पेन शुरू किया था।

Water Problem is Ruining Children’s Future

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Dream of every child is to study and become someone who is educated, dignified, carries respect in society and is self-sufficient. It is fundamentally right also. But even before the journey begins, like a dream, it already ends like a dream for millions of children living in rural villages.

As a nation we have been struggling with atrocities on girl child. Campaigns like ‘Save Girl Child’ have made all of us conscious and also cautious. Women and girls across the world collectively spend about 200 million hours every day, collecting water i.e. 200 million hours – or more than 22,800 years – every day collecting this vital resource.

But here the matter is not about girl child. Issue is about who fetches fresh drinking water from considerable distances since most of the villages in India do not have drinking water wells anymore. If the child goes daily to fetch drinking water, alone or along with her mother, when will the child go to school.

The number of steps the child travels to fetch water is almost equal to the drops of water the vessel can carry.

If you think that scaling mountains every single day to secure drinking water is a myth in present-day India, it is time you think again. Reports emerging from Madhya Pradesh’s Damoh district reveal how boys and girls as young as 11 years of age have to climb down a nearly 70 feet deep open well for a single pitcher of water.

For children who are sent by their parents to fetch water from the well which usually touches the ground in summer, putting their lives in danger is now part of their daily routine.

The wells in the villages were identification of how much deep is the water below the earth… Today it only counts how much deep you can dig the well to get water.

Are we thinking our child will get enough water to drink even if we still think casually ? Forget about it.

As we say, Save Water – Before we mine it like a metal…

“Manthan”, an initiative by Hindustan Zinc, is a series of stories to bring awareness about various concerns like air pollution, water pollution, plastic pollution, noise pollution, climate change, road safety and wildlife protection.

 उदयपुर शहर का जन प्रतिनिधि कोई युवा नहीं होना चाहिए ? – स्मार्ट सिटी को है स्मार्ट युवा जनप्रतिनिधि की दरकार . 

उदयपुर। चाहे भाजपा हो या कांग्रेस दोनों बड़ी राजनातिक पार्टियां अपने युवा कार्यकर्ताओं के जोश के साथ आगे बढ़ रही है। इन्ही कार्यकर्ताओं की वजह से हर चुनाव को पुरे दम ख़म के साथ लडती है तो फिर एसी क्या वजह है कि जब विधानसभा टिकिट की दावेदारी की बात आती है  तो यही पार्टियाँ युवाओं को दर किनार कर वही पुराने 70 प्लस के नेताओं को टिकिट दे देती है।
उदयपुर शहर स्मार्ट सिटी में शुमार है यह बात अलग है कि अभी तक इसकी स्मार्टनेस कही दिखाई नहीं देती , लेकिन क्या इस स्मार्ट सिटी का विधायक स्मार्ट और तेज़ तर्रार युवा नहीं होना चाहिएम ?
70 प्लस के मोजुदा नेताओं के मार्गदर्शन के चलते क्या एक युवा शहर के विकास के लिए दोगुनी शक्ति से काम नहीं कर पायेगा ?
कांग्रेस और भाजपा के आलाकमान टिकिट बंटवारे के लिए अपने अपने जुगाड़ लगा रहे है जहाँ कांग्रेस के आला पदाधिकारी कॉल पर फीडबैक ले रहे है तो , भाजपा के आला कमान रणकपुर में वोट करवा कर उम्मीदवारों का रुझान जान रहे है।

उदयपुर शहर विधानसभा भाजपा का  कौन हो सकता है युवा दावेदार ?

अगर हम उदयपुर शहर भाजपा की बात करें तो लगभग सभी का मानना है कि गुलाबचंद कटारिया के आगे कुछ सोचा नहीं जा सकता क्यों कि चाहे कोई कितनी भी जुगत लगा ले कटारिया अगर चुनाव लड़ना चाहेगें तो टिकिट उन्ही को मिलेगा, कोई और उम्मीदवार नहीं हो सकता।  ऐसे में उदयपुर शहर से किसी युवा चेहरे की तो उम्मीद ही नहीं की जा सकती कटारिया के बाद अगर सेकण्ड लाइन के भाजपा नेता के बारे में देखें तो लाइन लम्बी है. हालाँकि कई भाजपा के नेता कहते है कि कटारिया ने सेकण्ड लाइन को शहर में कभी पूरी तरह ऊपर नहीं आने दिया और समय समय पर उनके हाथ के निचे सेकण्ड लाइन के नेताओं की सूचि बदलती रहती है.
पेनल में अगर नाम की चर्चा है तो उनमे देहात जिलाध्यक्ष गुणवंत सिंह झाला, शहर जिलाध्यक्ष दिनेश भट्ट, युआईटी चेयरमैन रविन्द्र श्रीमाली, नगर निगम महापौर चन्द्र सिंह कोठारी और नगर निगम निर्माण समिति के अध्यक्ष पारस सिंघवी के नाम आते है इनमे अगर किसी युवा चेहरे की तरफ देखें तो एक मात्र पारस सिंघवी और चन्द्र सिंह कौठारी का नाम आता है लेकिन क्या गुलाबचंद कटारिया और भाजपा के आला कमान पारस सिंघवी के नाम पर मुहर लगा सकते है.

कांग्रेस में कौन हो सकता है युवा उम्मीदवार :

भाजपा की तरह ही कुछ हाल शहर कांग्रेस का भी है जहाँ उम्मीदवारों की लाइन लम्बी है जिसमे दिनेश श्रीमाली, सुरेश श्रीमाली, गिरजा व्यास, गोपाल शर्मा, लाल सिंह झाला अपनी उम्मीदवारी की ताल ठोक रहे है। इनमें अगर युवा उम्मीदवार की बात करें तो दिनेश श्रीमाली एक ऐसा चेहरा है जिसकी शहर में एक अलग पहचान है । पिछले विधानसभा चुनाव में मोदी लहर होने के बावजूद गुलाबचंद कटारिया जैसे दिग्गज नेता के सामने दिनेश श्रीमाली ने खासी टक्कर दी थी। अगर इस बार कांग्रेस दिनेश श्रीमाली को टिकिट देती है उदयपुर शहर की सीट कांग्रेस के खाते में जाने के चांस काफी बढ़ सकते है। हालांकि गिरजा व्यास जैसी वरिष्ठ नेता अगर शहर से टिकिट की मांग करती है तो दिनेश श्रीमाली सहित बाकी उम्मीदवारों की थोड़ी मुश्किलें बढ़ सकती है । वैसे शहर कांग्रेस के कार्यकर्ताओं का तो यह भी कहना है कि अगर युवा चेहरा अगर नही आता है तो शहर में खुद कांग्रेसी ही पार्टी के लिए मुसीबत खड़ी कर सकते है ।।
इनके अलावा भी भाजपा और कांग्रेस से कुछ उम्मीदवार ऐसे भी है जो सोशल मिडिया के जरिये अपना प्रचार कर रहे है , यह तो अब वक़्त ही बताएगा कि किसको टिकिट मिलता है और कोण किसपर भारी पड़ता है लेकिन एक बात तो तय है कि उदयपुर शहर जैसी विधान सभा को एक युवा जन प्रतिनिधि की जरूरत है जो शहर के मिजाज को अच्छी तरह समझ विकास के कुछ नए आयाम स्थापित कर सके .

ग्लोबल हंगर इंडेक्स: भुखमरी दूर करने में और पिछड़ा भारत, 119 देशों में से 103वें पर पहुंचा

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भुखमरी खत्म करने वाले देशों की सूची में भारत और पीछे चला गया है. साल 2018 का The Global Hunger Index (GHI) जारी किया गया है और इसके मुताबिक भारत 119 देशों की सूची में 103वें स्थान पर है. पिछले साल भारत 100वें स्थान पर था.

ध्यान देने वाली बात ये है कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में भारत  Global Hunger Index (GHI) में लगातार पिछड़ता जा रहा है. इस मामले में साल 2014 में भारत 99वें स्थान पर था. वहीं साल 2015 में थोड़े सुधार के साथ भारत 80वें स्थान पर जा पहुंचा. इसके बाद साल 2016 में 97वें और साल 2017 में 100वें पायदान पर पहुंच गया.

Global Hunger Index (GHI)वैश्विक, क्षेत्रीय, और राष्ट्रीय स्तर पर भुखमरी का आंकलन करता है. भूख से लड़ने में हुई प्रगति और समस्याओं को लेकर हर साल इसकी गणना की जाती है. जीएचआई को भूख के खिलाफ संघर्ष की जागरूकता और समझ को बढ़ाने, देशों के बीच भूख के स्तर की तुलना करने के लिए एक तरीका प्रदान करने और उस जगह पर लोगों का ध्यान खींचना जहां पर भारी भुखमरी है, के लिए डिजाइन किया गया है.

ग्लोबल हंगर इंडेक्स में ये देखा जाता है कि देश की कितनी जनसंख्या को पर्याप्त मात्रा में भोजन नहीं मिल रहा है. यानि देश के कितने लोग कुपोषण के शिकार हैं. इसमें ये भी देखा जाता है कि पांच साल के नीचे के कितने बच्चों की लंबाई और वजन उनके उम्र के हिसाब से कम है. इसके साथ ही इसमें बाल मृत्यु दर की गणना को भी शामिल किया जाता है.

ग्लोबल हंगर इंडेक्स में भारत का खराब प्रदर्शन लगातार जारी है. भारत की स्थिति नेपाल और बांग्लादेश जैसे पड़ोसी देशों से भी खराब है. इस मामले में चीन भारत से काफी आगे है. चीन 25वें नंबर पर है. वहीं बांग्लादेश 86वें, नेपाल 72वें, श्रीलंका 67वें और म्यामांर 68वें स्थान पर हैं. पाकिस्तान भारत से पीछे है. उसे 106वां स्थान मिला है.

जीएचआई की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में भूख की स्थिति बेहद गंभीर है. संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम की ‘2018 बहुआयामी वैश्विक गरीबी सूचकांक’ के मुताबिक साल 2005-06 से 2015-16 के बीच एक दशक में भारत में 27 करोड़ लोग गरीबी रेखा से बाहर निकल गए हैं. हालांकि ग्लोबल हंगर इंडेक्स की हालिया रिपोर्ट ने इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

उदयपुर जिले की 8 विधानसभा सीटों पर कांग्रेस के दावेदार लगा रहे है जोर – जानिये कौन कौन है किसको मिल सकता है कांग्रेस से टिकिट।

उदयपुर। सत्ता में आने की चाह में जहां कांग्रेस पूरी तरह से सक्रिय हो गई है, वहीं टिकट दावेदार भी पूरी तरह से सक्रियता बनाए हुए हैं। दावेदारों के साथ ही पार्टी भी प्रत्याशियों के चयन की प्रक्रिया में जुटी हुई है। दावेदारों को पहली सूची जारी होने का बेसब्री से इंतजार है।इसको लेकर कई दावेदार जयपुर में डेरा डाले हुए हैं। राजस्थान में कांग्रेस को मेवाड़ से बड़ी उम्मीद है। आला नेता पहले ही साफ कर चुके हैं कि प्रत्याशियों के चयन में किसी भी तरह की कोताही नहीं बरती जाएगी। मजबूत व जनता में गहरी पैठ रखने वाले प्रत्याशियों को ही टिकट दिया जाएगा। उदयपुर शहर और ग्रामीण के अलावा जिले की अन्य सीटों पर भी कई दावेदार हैं।

टिकट की जुगाड़ में जयपुर में डेरा
पिछले दो दिनों से जयपुर में टिकट के दावेदारों से पार्टी पदाधिकारी। बायोडाटा ले रहे हैं। उनसे उनकी क्षेत्र में पकड़ व अन्य मुद्दों पर चर्चा की जा रही है। जिले से टिकट के दावेदारों ने वहां पहुंचकर अपना मजबूती से पक्ष रखा।
भाजपा से लोहा लेना बड़ी चुनौती : मेवाड़ में पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा ने एकतरफा जीत । हासिल की थी। उदयपुर संभाग में कांग्रेस को मात्र 2 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा था। हालांकि पिछले 5 साल में भाजपा से नाराजगी का फायदा कांग्रेस को मिलेगा।

कहां से कौन व कितने दावेदार
उदयपुर शहर : दिनेश श्रीमाली, डॉ. गिरिजा व्यास, पंकज शर्मा, सुरेश श्रीमाली, नीलिमा सुखाड़िया।
उदयपुर ग्रामीण : सज्जन कटारा, विवेक कटारा, शंकरलाल मीणा, मोहनलाल भील, कालूलाल मीणा, शारदा रोत, ओम प्रकाश गमेती।
मावली : पुष्कर डांगी, जगदीशराज श्रीमाली, गोरधनसिंह चौहान, जीतसिंह चुंडावत, सुरेश सुथार, गोपालसिंह चौहान, राजकुमार श्रीमाली।
वल्लभनगर: गजेंद्रसिंह शक्तावत, देवेंद्रसिंह शक्तावत, कुबेरसिंह चावड़ा, सूरजमल मेनारिया।। खेरवाड़ा: दयाराम परमार, बंशीलाल मीणा, सविता मीणा।
सलूंबर : रघुवीर मीणा, बसंती देवी मीणा, रेशमा मीणा।
गोगुंदा :मांगीलाल गरासिया, बत्तीलाल मीणा।
झाड़ोल : हीरालाल दांगी, सुनील भजात, शांतिलाल स्नोकरिया।

यूपी पुलिस का एक और कारनामा, इस बार ‘भूतों’ के खिलाफ कोर्ट में पेश कर दिया चालान 

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इन दिनों उत्तर प्रदेश पुलिस (Uttar Pradesh Police) की अजब-गजब कहानियां सुनने को मिल रही हैं. एक दिन पहले ही संभल जिले में बदमाशों को पकड़ने गई पुलिस की पिस्तौल ने जब ऐन मौके पर जवाब दे दिया तो मुंह से ‘ठांय-ठांय’ की आवाज निकाल बदमाशों को डराने का प्रयास किया. ताजा मामला हमीरपुर जिले का है, जहां यूपी पुलिस एक कदम और आगे निकल गई. नवरात्र के दौरान कानून और सुरक्षा व्यवस्था में खलल न पड़े, इसके लिए पुलिस ने 31 लोगों का नाम चिन्हित कर उप जिला मजिस्ट्रेट सदर के न्यायालय में उन्हें पाबंद करने की चालानी रिपोर्ट पेश की, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि इन 31 लोगों में 3 ‘भूत’ यानी ऐसे लोग शामिल थे जिनका काफी पहले ही निधन हो चुका है.

जानकारी के मुताबिक हमीरपुर नगर कोतवाल शैल कुमार सिंह ने 4 अक्टूबर को नवरात्र में शांति भंग की आशंका के मद्देनजर कुल 31 लोगों को चिन्हित कर उप जिला मजिस्ट्रेट सदर की अदालत में चालानी रिपोर्ट पेश कर पाबंद किए जाने का अनुरोध किया था. सूची में जिन लोगों का नाम था उसमें से नीशू द्विवेदी पुत्र प्रेम नारायण, नन्हे अवस्थी पुत्र देवी शरण और कल्लू पुत्र नामवेद की मौत हो चुकी है. चौंकाने वाली बात यह है कि अदालत ने इस चालानी रिपोर्ट पर वाद संख्या-2266 पंजीकृत कर छह अक्टूबर को बिना परीक्षण किए सीआरपीसी की धारा-111 के तहत पाबंद करने का आदेश निर्गत कर सभी को 10 अक्टूबर को तलब भी कर लिया.