हस्तरेखा: आपके हाथ में प्यार और वासना के बारे में बताती है लव लाइन, ये छोटी नहीं होनी चाहिए

किसी भी हथेली में हृदय रेखा वह रेखा है जो दिल से जुड़ी भावनाओं के विषय में बतलाती है। इसे हार्ट लाइन भी कहा जाता है। आमतौर पर किसी भी हथेली में हृदय रेखा इंडेक्स फिंगर या मीडिल फिंगर से शुरू होकर लिटिल फिंगर के नीचे तक जाती है। हस्तरेखा शास्त्र में इसे देखकर कई बातों के बारे में जाना जा सकता है। ये लाइन लव लाइफ और इंसान के नेचर के बारे में बताती है।

लव लाइन से जानिए अपने बारे में – 

– जिन लोगों के हाथ में हृदय रेखा इंडेक्स फिंगर और मीडिल फिंगर के बीच से शुरू होती है वो लोग स्वभाव से सच्चे और शांत होते हैं।

– ये लाइन छोटी हो और मीडिल फिंगर से शुरू होकर रिंग फिंगर के नीचे वाले हिस्से पर खत्म हो जाए तो प्रेम में वासना होती है। ऐसा योग होने पर पूरी तरह से स्वार्थी व्यवहार हो सकता है।

– ये लाइन एक छोर से शुरु होकर दूूसरे छोर तक जाए तो इंसान का स्वभाव वर्तमान में जीने वाला होता है। ऐसे लोग सपनों की दुनिया से दूर रहते हैं। स्वभाव से भावुक व जलन करने वाले भी हो सकते हैं।

– इस रेखा का लाल होना और अधिक गहरा होने से स्वभाव से तेज हो सकते हैं। किसी बुरी आदत का शिकार भी बन सकते हैं।

-दो हृदय रेखा हो और उनमें किसी भी प्रकार का दोष न हो तो बुद्धि सात्विक होती है।

– इस रेखा का बीच में से टूटना, प्रेम संबंधो में बिखराव होने की तरफ इशारा करता है।

​- हृदय रेखा पतली हो, गहरी न हो और होकर हल्की हो तो स्वभाव में रुखापन होता है।

– ये रेखा पहली उंगली यानी इंडेक्स फिंगर के नीचे से शुरू होती है तो यह दृढ़ निश्चयी और आदर्शवादी होने का संकेत है।

– ये लाइन इंडेक्स फिंगर के ठीक नीचे से शुरू हो तो ये मानसिक रुप से परेशानी का इशारा है।

उदयपुर के नए आयुक्त विकास भाले, पुलिस कप्तान राष्ट्र्दिप और UIT सचिव उज्जवल राठोड।

उदयपुर । राजस्थान सरकार ने राज्य में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 30 आईएएस और 75 आईपीएस के तबादले किए। इन्ही तबादलों में उदयपुर के तीन बड़े अधिकारी संभागीय आयुक्त , पुलिस अधीक्षक और यु आई टी सचिव का तबादला किया गया है।
चुनावी वर्ष और आगामी कुछ माह पश्चात राज्य में चुनाव आचार संहिता लागू होने की संभावनाओं के बीच राज्य सरकार के गृह एवं कार्मिक विभाग ने कई आईएएस और आईपीएस अधिकारियों को इधर-उधर कर दिया है । ज्ञात हो कि गत 30 जून तक पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों में फेरबदल तय था, लेकिन किसी वजह से तबादला सूची जारी नहीं की जा सकी थी। परन्तु बीती रात को सरकार ने एक के बाद एक तबादला सूचियां जारी कर दी।बड़े फेरबदल के तहत उदयपुर संभागीय आयुक्त भवानीसिंह देथा का तबादला कर उन्हें अजमेर संभागीय आयुक्त के पद पर नियुक्त किया है। देथा की जगह अब कृषि विभाग जयपुर में आयुक्त पद पर तैनात विकास सीताराम भाले को उदयपुर संभागीय आयुक्त एवं पदेन आयुक्त टीएडी पद लगाया गया है। वहीं उदयपुर जिला पुलिस अधीक्षक राजेन्द्र प्रसाद गोयल का तबादला जयपुर क्राइम ब्रांच में कर दिया गया है। उनकी जगह अब उदयपुर के नए पुलिस कप्तान कुंवर राष्ट्रदीप होगे। राष्ट्रदीप पुलिस आयुक्तालय जयपुर में पुलिस उपायुक्त से स्थानान्तरिक हुए हैं। जबकि एएसपी सिटी हर्ष रतु के भीलवाड़ा जाने से नए सिटी एएसपी पारसमल जैन होगें। कार्मिक विभाग की ताजा तबादला सूची में विनिता बोहरा अतिरिक्त संभागीय आयुक्त, उदयपुर का तबादला देवस्थान विभाग उदयपुर के आयुक्त पद कर दिया है। इसी तरह वर्तमान देवस्थान आयुक्त जितेन्द्र कुमार उपाध्याय को खान निदेशक उदयपुर के पद पर पदस्थापित किया है। युआइती सचिव रामनिवास मेहता की जगह पूर्व में काफी टाइम तक यूआईटी में सचिव पद पर रहे उज्ज्वल राठोड को एक बार फिर यूआईटी उदयपुर के सचिव पद पर लगाया है।

आज से ट्रक-बस ऑपरेटर्स की अनिश्चितकालीन हड़ताल, आम आदमी पर होगा ये असर

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ट्रक और बस ऑपरेटर्स संगठन (AIMTC) अपनी पुरानी मांगों के साथ 20 जुलार्इ यानी आज से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चल गए हैं. आपको बता दें कि करीब 90 ट्रक और 50 लाख बस के पहिये थम सकते हैं. इसके पहले हड़ताल की धमकी के बाद सरकार ने ट्रांसपोटर्स को मनाने और कुछ रियायते देने की पेशकश की थी. इस मामले पर सरकारी सूत्रों का कहना है कि सरकार अभी ट्रांसपोटर्स को मनाने के प्रयास में लगी हुर्इ है.

आप पर होगा ये असर
ट्रक हड़ताल का सीधा असर आम आदमी पर होता हैं, क्योंकि ट्रक हड़ताल से दूध-सब्जी और बाकी सामानों की सप्लाई बंद हो जाएगी. ऐसे में डिमांड बनी रहेगी और सप्लाई घट जाएगी. लिहाजा आम आदमी को इन चीजों के लिए ज्यादा दाम चुकाने होंगे.

ये हैं ट्रांसपोर्ट्स की मांगें

    • प्रेस कांफ्रेंस में उन्होंने मांग की कि डीजल की कीमतों को जीएसटी के दायरे में लाया जाए या फिर मौजूदा समय में इनपर केन्द्रीय व राज्यों की तरफ से लगने वाले टैक्स को कम किया जाए.
    • टोल कलेक्शन सिस्टम को भी बदला जाए क्योंकि टोल प्लाजा पर र्इंधन और समय के नुकसान से सालाना 1.5 लाख करोड़ रुपये का नुकसान होता है.
    • थर्ड पार्टी बीमा प्रिमियम पर जीएसटी की छूट मिले और इससे एजेंट्स को मिलने वाले अतिरिक्त कमिशन को भी खत्म किया जाए.
    • इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 44AE में प्रिजेंप्टिव इनकम के तहत लगने वाले टीडीएस को बंद किया जाए और र्इ-वे बिल में संशोधन हो.
  • ट्रांसपोर्ट मंत्री नितिन गडकरी ने मीडिया से बातचीत में इस बात के संकेत दिए हैं कि दो ड्राइवर्स रखने की अनिवार्यता से राहत दी जा सकती है. वहीं फिटनेस की बात है तो हर साल छोड़कर इसे एक साल छोड़कर कराने की रियायत दिया जा सकती है.

पधारो म्हारे देश रे ,.. उदयपुर दुनिया का तीसरा पसंदीदा शहर


उदयपुर. विदेशी पर्यटकों के लिए झीलों की नगरी उदयपुर एशिया का पहला और दुनिया का तीसरा पसंदीदा शहर बन गया है। अमेरिका की सबसे बड़ी मैग्जीन ट्रेवल एंड लीजर के हर साल होने वाले सर्वे में लेकसिटी को यह स्थान दिया गया है।
विश्व के सबसे खूबसूरत शहरों में तो उदयपुर शुमार है ही, अब ये विश्व के श्रेष्ठ शहरों में भी शुमार हो चुका है। जी हां, उदयपुर के ताज में एक और नगीना जड़ चुका है। ट्रेवल एंड लेजर की ओर से वर्ष 2018 में विश्व के श्रेष्ठ 15 शहरों में तीसरे स्थान पर उदयपुर चुना गया है। ये भारत का इकलौता शहर है जिसने इस सूची में अपनी जगह बनाई है। प्रथम दो स्थान प्राप्त करने वाले दोनों शहर मैक्सिको सिटी में हैं।
सर्वे में विदेशी पर्यटकों ने बताया- लेकसिटी जैसी बात और कहीं नहीं
विश्व भर में घूमने वाले कई पर्यटकों के फीडबैक और रेटिंग को लेकर ट्रेवल एंड लीजर मैग्जीन काम करती है। विश्व के अलग-अलग शहर में आने वाले पर्यटक यहां के खान-पान रहन सहन और अनुभव को बताते हैं। जिसे बाद में रेटिंग के अनुसार चयन किया जाता है। लेकसिटी के बारे में भी पर्यटकों ने अनुभव साझा किए और यहां के खान-पान के साथ प्राकृतिक छटा, झीलें व परंपराओं की सराहना की है। उन्होंने यह भी कहा है कि पर्यटक यहां आकर सुकून का अहसास करते हैं।

उदयपुर का स्कोर 89.31
ट्रेवल एंड लेजर की ओर से कराए गए पोल में वर्ष 2018 के 15 बेहतरीन शहरों में से उदयपुर भी शुमार हो गया है। उदयपुर को 89.31 स्कोर मिला है। इसी साइट की ओर से वर्ष 2009 में उदयपुर को सबसे खूबसूरत शहर का खिताब हासिल हुआ था। वहीं वर्ष 2017 में भी उदयपुर ने श्रेष्ठ 15 शहरों में जगह बनाई थी। उदयपुर की इस उपलब्धि पर एमएमसीएफ के अरविंद सिंह मेवाड़ ने कहा कि ये उदयपुर शहर के हर नागरिक के लिए गर्व की बात है। इससे पूर्व हाल ही ट्रिप एडवाइजर की वर्ष 2018 की ट्रेवलर्स चॉइस रैंकिंग में भी भारत के टॉप 10 डेस्टिनेशंस में उदयपुर ने छठा स्थान प्राप्त किया था।

https://youtu.be/4GkdzYl2f1A

ये हैं बेस्ट सिटीज इन द वल्र्ड
1. सेन मिगुएल, मैक्सिको-स्कोर- 91.9 4
2. ओक्साका, मैक्सिको- स्कोर- 90.52
3 . उदयपुर, इंडिया- स्कोर- 89.31
4. उबूद, इंडोनशिया- स्कोर- 88.74
5. क्योटा, जापान- स्कोर- 88.42
6. फ्लोरेंस, इटली- स्कोर- 88.29
7. लुआंग प्रबांग, लाओस- स्कोर- 88.20
8. होई, एन, विएतनाम- स्कोर- 88.09
9. चियांग मे, थाईलैंड- स्कोर- 87.93
10. चाल्र्सटन, साउथ कैरोलिना- स्कोर- 87.79
11. मैक्सिको सिटी- स्कोर- 87.65
12. कैप टाउन, साउथ अफ्रीका- स्कोर- 87.63
13. रोम-इटली स्कोर- 87.16
14. इस्तांबुल, टर्की- स्कोर- 87.09
15. बैरूत, लेबनान- स्कोर- 87.04

संसद में किस तरह हर मिनट बर्बाद होता है ढाई लाख रुपया!

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संसद में आज से मानसून सत्र शुरू हो गया है. ये सत्र 18 जुलाई से लेकर 10 अगस्त तक चलेगा. पिछले कुछ समय में संसद में कामकाज को लेकर सवाल उठते रहे हैं. खासकर संसद में होने वाले हंगामे और बहिष्कार को लेकर खराब होने वाले समय को लेकर. क्या आपको मालूम है कि संसद में एक घंटे की कार्यवाही पर कितना खर्च होता है. करीब 1.5 करोड़ रुपया यानि हर मिनट की कार्यवाही पर 2.5 लाख रुपया.

संसद के सत्र कुल कितने दिनों के होते हैं?
– खुद अंदाज लगाया जा सकता है कि संसद के दोनों सदनों में होने वाले बॉयकाट और हंगामे से जनता का कितना पैसा बर्बाद हो जाता है. मोटे तौर पर देखा जाए तो संसद में सालभर के तीन सत्रों में छह से सात काम के होते हैं. इनमें भी अगर अवकाश और सप्ताहांत के दिनों को निकाल दें तो दो से तीन महीने और कम हो जाते हैं. इस लिहाज से सालभर में वास्तविक काम के दिन 70-80 ही होते हैं. लेकिन इतने दिन भी संसद चल नहीं पाती. 1982 ही एकमात्र ऐसा साल था जब हमारी संसद 80 दिन चल पाई थी.

संसद कितने बजे शुरू होता कामकाज?

– संसद में कामकाज सुबह 11 बजे शुरू होता है और आमतौर पर शाम छह बजे तक चलता है. लेकिन ये पक्का नहीं होता. कभी कभी शाम को देर तक कार्यवाही चलती रहती है. इसमें दोपहर में एक बजे से लेकर दो बजे तक का समय लंच का होता है लेकिन कभी कभी लंच का समय बदला भी जा सकता है या खत्म किया जा सकता है. ये स्पीकर पर निर्भर करता है. शनिवार और रविवार के दिन संसद में कार्यवाही नहीं चलती, ये दिन सप्ताहांत अवकाश के होते हैं

संसद के तीन सत्र कब कब होते हैं?
– बजट सत्र – फरवरी से लेकर मई
– मानसून सत्र – जुलाई से अगस्त-सितंबर
– शीत सत्र – नवंबर से दिसंबर

किस तरह संसद कार्यवाही पर खर्च होता है धन ?
लोकसभा के पिछले शीतकालीन सत्र पर हुआ कुल खर्च – 144 करोड़ रुपए
प्रतिदिन कार्यवाही का समय – छह घंटे
शीतकालीन सत्र में संसद चली – 90 घंटे
प्रति घंटे का खर्च – 1.44 करोड़ रुपए
संसद को एक घंटे चलाने की लागत – 1.6 करोड़ रुपए
संसद के प्रति मिनट का खर्च -1.6 लाख रुपए
संसद के एक मिनट तक चलने की कुल लागत – 2.6 लाख रुपये.

पिछले सत्रों में कितना खर्च हुआ ?
– एक रिपोर्ट के मुताबिक 29 जनवरी से 9 फरवरी और 5 मार्च से 6 अप्रैल तक दो चरणों में चले बजट सत्र में कुल मिलाकर 190 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च हुए. यानि अगर इसकी खर्च की गणित पर जाएंगे तो संसद चलने पर आई प्रति मिनट लागत तीन लाख रुपए से ज्यादा होगी. संसदीय आंकड़ों के अनुसार दिसम्बर 2016 के शीत कालीन सत्र के दौरान करीब 92 घंटे व्यवधान की वजह से बर्बाद हो गए थे. इस दौरान करीब 144 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था, जिसमें 138 करोड़ रुपये संसद चलाने का खर्च और 6 करोड़ रुपये सांसदों के वेतन, भत्ते और आवास का खर्च शामिल है.

कितने घंटे हुआ काम
– पीआरएस लेजिस्लेटिव के डाटा के अनुसार मौजूदा साल बजट सत्र का दूसरा चरण छह अप्रैल तक चला. इसमें लोकसभा में 14.1 घंटे और राज्यसभा में मात्र 11.2 घंटे ही बजट पर चर्चा हुई. काम के घंटों के लिहाज से साल 2000 से अब तक यह सबसे खराब बजट सत्र रहा. वैसे कुल मिलाकर बजट सत्र के दोनों चरणों में लोकसभा में सिर्फ 33.6 घंटे और राज्यसभा कुल 53.2 घंटे काम हुआ.

ये पैसा किस तरह खर्च होता है?
– सांसदों के वेतन के रूप में
– सत्र दौरान सांसदों को मिलने वाले भत्तों के रूप में
– संसद सचिवालय पर आने वाले खर्च के रूप में
– संसद सचिवालय के कर्मचारियों के वेतन के रूप में
– सत्र के दौरान सांसदों की सुविधाओं पर खर्च के रूप में

क्या है रिकॉर्ड?
– पिछले कुछ सालों के बजट सत्रों से तुलना की जाए तो आमतौर पर बजट सत्र में बजट पर चर्चा के लिए निर्धारित घंटों के करीब 20 फीसद या 33 घंटे बहस होती है. साल 2018 के बजट सत्र में कुल 21 फीसद (लोकसभा) और 31 फीसद (राज्यसभा) में काम हुआ. आंकड़ों के मुताबिक 2010 का शीतकालीन सत्र प्रोडक्टिविटी के लिहाज से सबसे खराब सत्र रहा था. इसके बाद 2013 और 2016 के संसद सत्रों का नंबर आता है. 2010- 2014 के बीच संसद के 900 घंटे बर्बाद हुए, ताे साेचिए कितना पैसा बर्बाद हुअा हाेगा.

यानि क्या होता है?
– संसद में हंगामा होने से आम आदमी का ढाई लाख रुपए हर मिनट बर्बाद होता है

आपकी कमाई से चलती है संसद?
– जानते हैं संसद की कार्यवाही के लिए जो इतने पैसे खर्च किए जाते हैं वो कहां से आते हैं. वो आते हैं हमारी और आपकी कमाई से. ये वही धन है, जो हमसे टैक्स के रूप में वसूला जाता है.

कितना होता है सांसदों का वेतन?
– लोकसभा द्वारा मिले आंकड़ों की माने तो सांसदों को वेतन के रूप में हर महीने 50,000 रुपये, निर्वाचन क्षेत्र भत्ता के रूप में 45,000 रुपये, कार्यालय खर्च के रूप में 15,000 रुपये और सचिवीय सहायता के रूप में 30,000 रुपये दिये जाते हैं. इस प्रकार सांसदों की प्रति माह सैलरी 1.4 लाख रुपए होती है. इसके अलावा सांसदों को सालभर में 34 हवाई यात्राओं और असीमित रेल और सड़क यात्रा के लिए सरकारी खजाने से धन दिया जाता है.

राहुल की नयी टीम में गहलोत, रघुवीर तो क्या सीपी जोशी राजस्थान देखेगें या ,….

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उदयपुर विधानसभा चुनाव के पहले राहुल ने अपनी टीम घोषित की और मेवाड़ में कांग्रेस की राजनीति में रातों रात भूचाल आगया। उत्साह और इस तरह का भूचाल आना लाज़मी भी है क्यूँ की मेवाड़ के कांग्रेसी नेता रघुवीर मीना को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की सबसे बड़ी कांग्रेस वर्किंग कमेटी (सीडब्ल्यूसी) में शामिल किया गया। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बाद रघुवीर मीना ही इसे है जो मेवाड़ से अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी में शामिल हुए है। सबसे ज्यादा चौंकाने वाली खबर यह है कि मेवाड़ के ही कद्दावर नेता सीपी जोशी को दरकिनार कर दिया गया। जानकार कहते है की सीपी जोशी को अब राजस्थान का कार्यभार सौंपा जाएगा लेकिन इसका अंदेशा अभी दूर दूर तक दिखाई नहीं देता। सीपी जोशी के समर्थकों में एक तरह की उदासी भी है वहीँ गहलोत और रघुवीर के समर्थकों का उत्साह देखते बनता है।
उदयपुर के पूर्व सांसद रघुवीर सिंह मीणा के के कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के नजदीक दिल्ली ले जाने को लेकर मेवाड़ की 28 विधानसभा सीटों की गणित भी शामिल है, इनमें से कई सीटें आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में आती है और कांग्रेस चाहती है कि भाजपा के कदवर नेताओं की तरह पार्टी का भी कोई मजबूत नेता हो और उसी सोच से रघु के नाम को आगे किया गया, रघु पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के भी नजदीक है और उनका भी इसमें बड़ा रोल है। इधर इसी कमेटी में से मेवाड़ से आने वाले सीपी जोशी का नाम काटने पर उनके समर्थकों में चर्चा शुरू हो गई कि साहब के नाम से प्रसिद्ध सीपी जोशी को राजस्थान भेजने की यह कवायद् है। कांग्रेस के अंदर एक बड़े धड़े में इस चर्चा ने जोर पकड़ लिया है कि सीपी जोशी को राजस्थान की चुनाव अभियान की जिम्मेदारी सौंपी जाने वाली है, इसलिए उनको इस कमेटी में नहीं लिया गया। सीपी विरोधी नेताओं में रात को ये थी कि कई राज्यों से प्रभार वापस लेने के बाद अब इस कमेटी से भी सीपी की छूट्टी कर दी गई है और गहलोत का शक्ति केन्द्र बढ़ा है
राहुल की गणित अशोक-सचिन-सीपी वैसे राहुल गांधी की ओर से विधानसभा चुनाव को लेकर एक बड़ी गणित राजस्थान में तैयार की जा रही है। इसमें यह पूरा जोर दिया जा रहा है कि राजस्थान के चुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, सीपी जोशी व प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट को अलग-अलग जिम्मेदारी दी जाए। उनकी सोच है कि मुख्यमंत्री के नाम और अलग-अलग गुटों में पार्टी और उसका कार्यकर्ता नहीं बंटे इसके लिए तीनों को बेहतर जिम्मेदारी दे दी जाए ताकि पार्टी को जीत में बड़ी मदद मिलेगी।
रघुवीर की नियुक्ति के मायने
फायदे – रघुवीर का दखल मेवाड़ में बढ़ेगा, विधानसभा चुनाव में टिकट में भी उनकी चलेगी, पार्टी में उनका कद बढ़ा।
नुकसान – अब ज्यादातर समय पार्टी के लिए देना होगा स्थानीय दौरों की बजाय दिल्ली में ज्यादा रहना होगा सलूंबर क्षेत्र से जमीनी पकड़ कमजोर होगी।
एक परिचय रघुवीर का- बीए पास रघु सबसे पहले यूथ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रहे और उसके बाद वे 1993 में विधायक बने। इसके बाद 2002 में राज्य में मंत्री बने। 2009 में सांसद बने। वे संसदीय समितियों में भी रहे और कांग्रेस में कई बड़े पदों पर काम कर चुके है।

काउंसलिंग के दौरान छात्र गुट आमने सामने, मचा हंगामा, पुलिस ने खदेड़ा.

सुखाड़िया विश्वविद्यालय के संघटक कॉमर्स कॉलेज में सरकारी सीटें बढ़ाने के लिए मंगलवार को दोनों प्रमुख संगठनों के समर्थक छात्र आमने-सामने हो गए। एबीवीपी ने काउंसलिंग रुकवा दी, जिसका एनएसयूआई सदस्यों ने विरोध किया। माहौल बिगड़ता देख पुलिस जाप्ते ने लाठियां भांजकर छात्रों काे खदेड़ा। कुछ छात्राें को चोटें भी आईं। पुलिस ने केन्द्रीय छात्रसंघ अध्यक्ष सहित एबीवीपी से जुड़े चार छात्रों को शांतिभंग में पकड़ा, जिन्हें शाम को जमानत पर रिहा किया गया। इससे पहले काउंसलिंग तो बहाल हो गई, लेकिन नए छात्र सहमे रहे। कॉलेज परिसर में दिनभर जाप्ता तैनात रहा।

ऐसे बढ़ा विवाद :सुबह एबीवीपी ने सरकारी सीटें बढ़ाने के लिए बीकॉम प्रथम वर्ष की काउंसलिंग रुकवा दी। एनएसयूआई कार्यकर्ता छात्रों ने यह कह विरोध शुरू कर दिया कि काउंसलिंग के लिए कई छात्र दूर-दराज से आए हैं। उन्हें वापस कॉलेज आना पड़ेगा। कुछ छात्र काउंसलिंग के लिए जा रहे थे। इन्हें राेकने और नहीं रोकने की बहस में लोकेंद्र सिंह राव और अमन असनानी के बीच धक्का-मुक्की हो गई। पुलिस ने इन्हें छुड़ाया। सूचना पर भूपालपुरा सीआई हरेन्द्र सिंह भी जाप्ता लेकर पहुंचे। लेकिन छात्र नेता उनसे भी बहस करने लगे। डीएसपी भगवतसिंह हिंगड़ सहित अन्य थानों के सीआई भी आ गए। समझाइश बेअसर देख पुलिस ने हंगामा करते छात्रों पर लाठियां फटकारनी शुरू कर दी। कुछ छात्रों को लाठियां भी पड़ीं। पुलिस ने भवानी शंकर बोरीवाल, गजेंद्र राणा, अविनाश कुमावत व लोकेंद्र सिंह राव को शांतिभंग में पकड़ा। इन्हें शाम को जमानत पर छोड़ा गया। एबीवीपी का कहना है कि कॉमर्स कॉलेज में सीटों को बढ़ाने के लिए दो साल से ज्ञापन दे रहे हैं। हाल ही उच्च शिक्षामंत्री किरण माहेश्वरी काे भी ज्ञापन दिया। मंगलवार को कुलपति से भी मिले, जिस पर कुलपति ने कॉमर्स की 10 फीसदी सरकारी सीटें बढ़ाईं।

जाप्ते की तैनातगी से छावनी में तब्दील हुआ कॉलेज, नए छात्र सहमे

दो का अनशन खत्म करवाया कि एनएसयूआई वाले बैठे भूख हड़ताल पर, शाम तक मनाया

घटनाक्रम के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने कॉमर्स कॉलेज में 16 सरकारी सीटें बढ़ाई। घोषणा के साथ कॉमर्स डीन प्रो. जी. सोरल और पुलिस अधिकारियों ने अनशन कर रहे कमलेश सामरिया और जयदीप सिंह राठौड़ काे जूस पिलाया। यह सब हुआ ही था कि 16 सीट के इजाफे को नाकाफी बताते हुए एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने भूख हड़ताल शुरू कर दी। उनका कहना था कि इससे छात्रों को कोई राहत नहीं मिली है। विश्वविद्यालय ग्रामीण अंचल के छात्रों के लिए पर्याप्त सीटें बढ़ाए। भूख हड़ताल पर बैठने वालों में एनएसयूआई के जिलाध्यक्ष कुशलेश चौधरी, कॉमर्स कॉलेज अध्यक्ष हिमांशु पंवार, अर्पित कोठारी, महेश रोत शामिल थे। शाम को डीन ने इन्हें भी मनाया। कहा कि कॉलेज-विश्वविद्यालय प्रबंधन के अधिकार क्षेत्र में जितनी सीटें बढ़ाना था, बढ़ा चुके। ज्यादा के लिए सरकार स्तर पर बातचीत होगी।

आज फिर होगी सलमान को सजा व रिहाई को चुनौती देने वाली अपीलों की सुनवाई

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हिरण शिकार मामले में अभिनेता सलमान खान को पांच अप्रेल को सुनाई गई सजा के स्थगन की अपील पर मंगलवार को सत्र न्यायालय में सुनवाई होगी। इसी अदालत में राज्य सरकार की ओर से सलमान को अवैध हथियार मामले में बरी किए जाने के खिलाफ दायर अपील पर भी सुनवाई होगी। गत 7 तथा 17 मई को मामलों की अलग-अलग सुनवाई के दौरान सलमान के अधिवक्ता के आग्रह के बाद न्यायाधीश चंद्रकुमार सोनगरा ने दोनों मामलों में पक्षकार तथा तथ्यों की समानता के मद्देनजर एक ही दिन सुनवाई रखने का आदेश दिया था।

सलमान को अवैध हथियार मामले में 18 जनवरी 2017 को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट दलपतसिंह ने बरी कर दिया था। इसके खिलाफ राज्य सरकार की ओर से सत्र न्यायालय में की गई अपील पर सुनवाई होगी। इस मामले में अब तक 9 सुनवाई हो चुकी है। पिछली सुनवाई के दौरान सरकारी अधिवक्ता पोकरराम विश्नोई ने 6 दिसंबर 2017 को दिए गए प्रार्थना पत्र के आधार पर मामले को फिर से निचली अदालत में भेजने का आग्रह किया था। सलमान के अधिवक्ता हस्तीमल सारस्वत ने इसका विरोध किया। न्यायाधीश सोनगरा ने मौखिक रूप से कहा कि इस प्रार्थना पत्र पर निर्णय मेरिट के आधार पर तय किया जाएगा।

गौरतलब है कि मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट जोधपुर जिला के पीठासीन अधिकारी देवकुमार खत्री ने 5 अप्रेल को कांकाणी काले हिरण शिकार मामले में सलमान को पांच साल की सजा सुनाई थी। इस सजा के खिलाफ सलमान ने जिला न्यायालय में अपील दायर की थी। सात मई को गत पेशी के दौरान इस मामले में बहस नहीं हुई थी। उस दौरान सलमान कोर्ट में हाजिर हुए थे.

सूत्रों के अनुसार दोनों मामलों में सुनवाई के दौरान सलमान की उपस्थिति आवश्यक नहीं है। इसलिए मंगलवार को कोर्ट में हाजिरी माफी पेश की जाएगी। उल्लेखनीय है कि पिछली सुनवाइयों में आए सलमान को जेल जाना पड़ा था। कुछ दिन उन्हें जेल में गुजारने पड़े थे।

क्या दैनिक भास्कर के समूह संपादक कल्पेश याग्निक ने आत्महत्या की थी? – याग्निक को झूठे केस में फंसाने की धमकी दे रही थी महिला पत्रकार .

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12 जुलाई की रात जब कल्पेश याग्निक की मौत हुई तो इसका कारण दिल का दौरा बताया गया, लेकिन अब पुलिस आत्महत्या के एंगल को भी टटोल रही है. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि कल्पेश याग्निक की संदिग्ध आत्महत्या मामले की उचित जांच होगी. इस मामले में किसी महिला पत्रकार द्वारा याग्निक को झूठे केस में फंसाने की बात की जारही है . याग्निक का महिला पत्रकार से बातचीत का एक ऑडियो भी वायरल हो रहा है हालाँकि उदयपुर पोस्ट इस ऑडियो की सत्यता की पुष्ठी नहीं करता .

https://youtu.be/x6tflnuaPBY

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बीते रविवार को कहा कि वरिष्ठ पत्रकार कल्पेश याग्निक की संदिग्ध आत्महत्या के मामले की उचित जांच कराई जाएगी.

मालूम हो कि दैनिक भास्कर अख़बार के 55 वर्षीय समूह संपादक कल्पेश याग्निक ने अपनी मौत से कुछ ही दिन पहले पुलिस के एक आला अधिकारी से मिलकर उन्हें बताया था कि एक महिला पत्रकार उन्हें झूठे मामले में फंसाने की धमकी दे रही है.

स्थानीय पत्रकारों ने मुख्यमंत्री से इंदौर स्थित रेसीडेंसी कोठी में मुलाकात की और याग्निक की मौत के मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की.

पत्रकारों की बात सुनने के बाद शिवराज ने याग्निक की मौत पर गहरा अफसोस जताते हुए कहा, ‘हम इस मामले की निश्चित तौर पर उचित जांच कराएंगे.’

मुख्यमंत्री ने याग्निक के घर पहुंचकर उनके शोकसंतप्त परिजनों से मुलाकात भी की और वरिष्ठ पत्रकार के निधन पर संवेदना व्यक्त की.

ज़ी न्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार, मुख्यमंत्री शिवराज चौहान ने कहा, ‘जो भी कल्पेश याग्निक की मौत का कारण है, उसे बख्शा नहीं जाएगा, उसे कड़ी से कड़ी सज़ा दिलाई जाएगी. साथ ही उन्होंने एडीजी को जो पत्र सौंपा है उसे अनदेखा नहीं किया जाएगा. जो कोई भी उनकी मौत के पीछे का कारण है उसे सामने लाना ज़रूरी है.

पुलिस को शुरुआती जांच के बाद संदेह है कि याग्निक ने इंदौर के एबी रोड स्थित दैनिक भास्कर की तीन मंज़िला इमारत की छत से बीते 12 जुलाई की रात छलांग लगाकर आत्महत्या कर ली थी. उनके शव की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि उनकी कई हड्डियां टूटी हुई थीं.

इस बीच, इंदौर रेंज के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजी) अजय कुमार शर्मा ने इस बात की पुष्टि की कि याग्निक अपने छोटे भाई के साथ करीब 10-12 दिन पहले उनसे मिलने आए थे.

उन्होंने कहा कि इस मुलाकात के दौरान याग्निक ने उन्हें बताया था कि उनके अख़बार की नौकरी से निकाली गई एक महिला पत्रकार बहाली के लिए उन पर कथित रूप से दबाव बना रही है. इसके साथ ही, उन्हें कथित तौर पर धमका रही है कि अगर वह उसे दोबारा नौकरी पर नहीं रखवाएंगे तो वह उन्हें किसी झूठे मामले में फंसा देगी.

एडीजी ने महिला पत्रकार के नाम का खुलासा किए बगैर बताया, ‘याग्निक ने हमसे अनुरोध किया था कि अगर वह महिला पत्रकार पुलिस को उनके खिलाफ कोई शिकायत करती है, तो इस शिकायत पर किसी तरह का कानूनी कदम उठाए जाने से पहले एक बार उनका पक्ष भी सुना जाए.’

उन्होंने बताया कि याग्निक ने अपने इस अनुरोध को लेकर उन्हें एक औपचारिक आवेदन पत्र भी सौंपा था. लेकिन उन्होंने संबंधित महिला पत्रकार के खिलाफ किसी कानूनी कार्रवाई की मांग पुलिस से नहीं की थी.

शर्मा ने बताया कि उन्होंने याग्निक के आवेदन को शहर के पुलिस उप महानिरीक्षक (डीआईजी) हरिनारायणचारी मिश्र को भेज दिया था.

उन्होंने बताया, ‘संदिग्ध हालात में याग्निक की मौत के मद्देनज़र हमने इस आवेदन को केस डायरी में शामिल कर लिया है. हम जांच कर रहे हैं कि कहीं इस पत्र की इबारत का याग्निक की मौत से कोई संबंध तो नहीं है.’

नई दुनिया की रिपोर्ट के अनुसार, डीआईजी ने याग्निक के परिवार को सूचित किया है कि याग्निक के लैपटॉप, मोबाइल और आईपैड के साथ छेड़छाड़ न की जाए. मामले की जांच सीएसपी जयंत राठौर को सौंपी गई है. इस बारे में परिजनों से भी पूछताछ की जाएगी.

एडीजी ने कहा, ‘याग्निक की मौत के मामले में हम जल्दबाजी में किसी नतीजे पर नहीं पहुंचना चाहते. हम सभी पहलुओं पर जांच कर रहे हैं. मामले से जुड़े सभी लोगों से पूछताछ की जाएगी.’

उन्होंने याग्निक की हत्या के संदेह को ख़ारिज करते हुए कहा कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और शुरुआती जांच के बाद पहली नज़र में यही लगता है कि उन्होंने मीडिया संस्थान की छत से कथित तौर पर छलांग लगा कर जान दे दी थी. हालांकि, पुलिस को अब तक उनकी ओर से छोड़ा गया कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है.

एडीजी ने बताया, ‘हम इस पहलू पर भी जांच कर रहे हैं कि कहीं याग्निक इमारत से दुर्घटनावश तो नहीं गिर गए थे.’

मालूम हो कि बीते 12 जुलाई की रात करीब 10:15 बजे कल्पेश याग्निक दैनिक भास्कर के इंदौर स्थित ऑफिस परिसर में बेहोशी की हालत में गिरे मिले. गार्ड की सूचना पर उन्हें तुरंत बॉम्बे हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, पर देर रात डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.

उस रात ख़बर फैली थी कि उन्‍हें दिल का दौरा पड़ा है. हालांकि अगले दिन 13 जुलाई को पोस्‍टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत की वजह ऊंचाई से गिरने और मल्‍टीपल फ्रैक्‍चर बताई गई. इसके बाद महिला पत्रकार द्वारा उन्हें धमकी दिए जाने और आत्महत्या के एंगल से पुलिस ने मामले की जांच शुरू की.

नई दुनिया की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने मामला दर्ज कर आत्महत्या के कारणों की जांच कर रही है. उनके लैपटॉप, मोबाइल और आइपैड भी जांचे जा रहे हैं.

रिपोर्ट के अनुसार, 12 जुलाई की रात डीआईजी हरिनारायणचारी मिश्र और एसपी अवधेश गोस्वामी सहित एफएसएल अधिकारी घटनास्थल पहुंचे. फॉरेंसिक टीम छत (तीसरी मंजिल) पर पहुंची तो पैराफिट वॉल पर लगे एसी के कंप्रेशर पर जूते के निशान मिले. डीआईजी के मुताबिक, याग्निक एसी के कंप्रेशर पर पैर रखकर कूदे.

पुलिस ने उनका जूता और एसी पर जमी मिट्टी की परत जब्त कर ली है. इसकी सागर स्थित फॉरेंसिक लैब से जांच कराई जा रही है.

21 जून 1963 को जन्मे कल्पेश याग्निक 1998 में दैनिक भास्कर समूह से जुड़े थे. वह समूह संपादक के पद पर कार्यरत थे.

उदयपुर के मुख्य बापू बाजार में हिस्ट्रीशीटर पर नकाबपाशों ने की फायरिंग .

उदयपुर . शहर में अपराधी बैखोफ है . उन्हें ना कानून का डर है ना ही किसी पुलिस द्वारा पकडे जाने की चिंता. उदयपुर शहर का सबसे मुख्य बाज़ार में आज बदमाशों ने दिन दहाड़े बैखोफ फायरिंग की घटना को अंजाम दिया . एक बदमाश को पकडे जाने की सूचना है .

सोमवार शाम बाइक सवार दो नकाबपोश युवकों ने प्रोपर्टी डीलर हिस्ट्रीशीटर कन्नू कुमावत पर फायर कर दिया। गोली कार के शीशे में छेदकर कुमावत के हाथ को छूकर निकल गई। दूसरा फायर करने से पहले उसने संभलते हुए आरोपियों की तरफ एकदम कार दौड़ा दी, इससे वे देहलीगेट की तरफ तेज गति से भाग निकले। जानकारी मिली की एक बदमाश को पकड़ लिया गया है .

अपराधी फायरिंग कर भाग रहे थे तब कुछ ही दूरी पर खड़ी चेतक वाहन में बैठे सिपाहियों की आरोपियों की नजर पड़ गई। उन्होंने आरोपियों के पीछे जीप दौड़ाते हुए उन्हें टक्कर मार नीचे गिराया। आरोपी बाइक छोड़कर पैदल दौड़े तो सिपाहियों ने पीछा कर एक को पकड़ लिया

पकड़ में आए आरोपी ने छूटने के लिए कांस्टेबल पर भी पिस्टल तानी लेकिन उन्होंने उसे धरदबोचा। पुलिस आरोपी से पूछताछ के बाद साथी का पता लगाने में जुटी है।
इस बीच कुमावत ने सूरजपोल चौकी पहुंच उपाधीक्षक भगतवतसिंह हिंगड़ को पूरा घटनाक्रम बताया, उन्होंने तुरंत कुमावत को अस्पताल पहुंचाकर उपचार करवाया। सहेलीनगर निवासी कन्हैयालाल (58) पुत्र डालचंद कुमावत ने पुलिस को बताया कि वह नाड़ाखाड़ा स्थित कार्यालय से कार से घर जा रहा था। बापूबाजार वुडलैंड शो-रूम के बाहर वह फल विक्रेता से बात कर रहा था तभी बाइक पर दो नकाबपोश युवक उसके पास आए। एक ने पिस्टल निकालकर फायर कर दिया। पुलिस ने कुमावत की रिपोर्ट पर जानलेवा हमले का मामला दर्ज किया।