पोस्ट न्यूज़। फैशन इंडस्ट्री (fashion industry ) का सबसे अहम् हिस्सा है Hair and makeup
जो मौजूदा दौर में अपने चरम पर है। जहाँ देश में नामी गिरामी हेयर और मेकअप आर्टिस्ट ने दुनिया भर में नाम कमाया वहीँ अब इस इंडस्ट्रीज़ में माफिया भी पनपने लगे है और यह माफिया है अवार्ड माफिया जो काबिलियत या Art को देख कर अवार्ड नहीं देते ये लोग अवार्ड को बेचते है वह भी ऐसे लोगों को अवार्ड बेचते है जो इस काबिल तो नहीं लेकिन Award के लिए बोली लगाना जानता हो .
एक जमाना था जब हर क्षेत्र में अवार्ड लोगों की क़ाबलियत देख कर दिया जाता था | लेकिन आज ये Trend बिल्कुल बदल चुका है | आजकल क़ाबलियत के दम पर नहीं बल्कि पैसों के दम पर अवार्ड दिए जाते हैं | आज कोई भी अवार्ड अपने नाम कर सकता है | या दुसरे शब्दों में कहें तो, आजकल अवार्ड बिकाऊ हैं | वो कहते हैं न पैसा फेक तमाशा देख | पैसा दो और अवार्ड अपने नाम कर लो | Hair and makeup का यह अवार्ड माफिया बड़े शहरों में ही नहीं छोटे छोटे शहरों के हेयर आर्टिस्ट सैलून और मेकअप आर्टिस्टों को भी निशाना बनाते है और उन्हें अपने अवार्ड फंग्शन में आने का न्योता देते है साथ ही प्रोग्राम में आने की फीस लेकर अवार्ड पाने तक की कीमत तक लगा लेते है। यह १५ से २० केटेगरी के अवार्ड रखते है और हर एक केटेगरी का सौदा करते है।
Ashok Paliwal
इस हेयर एन्ड मेकअप माफिया के सन्दर्भ में हमारी बात राजस्थान, उदयपुर शहर के जाने माने हेयर आर्टिस्ट अशोक पालीवाल से हुई, अशोक पालीवाल ने बिकाऊ अवार्ड को लेकर कई चौकाने वाले खुलासे किये। अशोक पालीवाल जो आल इण्डिया ब्यूटी एंड हेयर एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी, हेयर एन्ड ब्यूटी ऑर्गेनाइजेशन ( एचबीओ ) के फाउंडर व् अंतराष्ट्रीय स्तर पर १९४6 से हेयर आर्ट प्रतियोगिता आयोजित करवाने वाली संस्था ओएमसी के ज्यूरी मेंबर है। पालीवाल का कहना है कि हेयर एन्ड ब्यूटी मेकअप का क्रेज़ धीरे धीरे काफी बढ़ गया है। यह काम सिर्फ एक जीवन यापन का काम ही नहीं यह एक आर्ट के रूप में उभरा है . इसीलिए इस विधा के बढ़ते क्रेज़ का फ़ायदा उठा कर इस इंडस्ट्री में कुछ ऐसे लोग आगये है जो इन क्षेत्रों में काम करने वालों को काबिलियत के हिसाब से नहीं बल्कि पैसों के हिसाब से अवार्ड देते है। इन बिकाऊ अवार्ड देने वालों ने एक नया धंधा बना लिया है जो धीरे धीरे अपने पैर पसारता जा रहा है .
पालीवाल ने बताया की हमारी ऑर्गेनाइजेशन आईबा (AIHBA) व् (HBO) भी अवार्ड फंग्शन करवाती है लेकिन वह सिर्फ इस क्षेत्र में कला को प्रोत्साहित करने की मंशा से यह कार्यक्रम आयोजित करती है, जिससे कि इस क्षेत्र में काम करने वालों का होसला बढे और वे अपना सर्व श्रेष्ठ दें साथ ही अपने ग्राहकों को भी इस कला का सर्व श्रेष्ठ दें। जो Hair and makeup आर्टिस्ट सच में अपना काम अच्छा कर रह है अपने आपमें एक नए क्रिएशन को पैदा कर रहे है वह आर्टिस्ट इन अवार्ड को पाते है। हम सिर्फ उनकी कला को प्रोत्साहित करते है और हमारा कम्पीटीशन निष्पक्ष होता है जिसकी वजह से आज देशभर में हमसे जुड़ने वाले अपने अपने शहरों में काफी अच्छा काम कर रहे है .
अशोक पालीवाल बताते है कि हमारे अवार्ड समारोह के लिए जो ज्यूरी होती है वह बिलकुल निष्पक्ष होती है। ज्यूरी की निष्पक्षता इसी बात से पता लगाईं जा सकती है की हमारे अवार्ड समारोह में ज्यूरी पहले तो खुद इतनी काबिल होती है कि उन्हें किसी नाम की आवश्यकता नहीं दूसरे जिस भी मोडल को वह सलेक्ट करते है उसके बारे में कसी ज्यूरी मेंबर को कुछ पता नहीं होता वह बस मोडल पर किया हुआ काम देख कर ही चुना जाता है। साथ ही कम्पीटीशन में ज्यूरी को चुनने के पहले ज्यूरी को सारे नियम कायदे समझाए जाते है फिर भी यदि कभी ज्यूरी का कोई भी मेंबर किसी तरह का पक्षपात करता भी है तो उसके खिलाफ संस्था के स्टार पर एक्शन लिया जाता है .
अशोक पालीवाल ने आगे बताया की इन दिनों राजस्थान ही नहीं देश के कई छोटे बड़े शहरों में इस तरह के अवार्ड देने वाले आयोजन होते है जिसमे अवार्ड की सौदे बाजी की जाती है।
पहले सोशल मिडिया के जरिये विज्ञापन दिया जाता है फिर शहर के हेयर और ब्यूटी मेकअप से जुड़े लोगों को कॉल कर उन्हें आमंत्रित किया जाता है फिर जैसे ही उनका रुझान मिलता है वह अपने अवार्ड कार्यक्रम में किसी सेलिब्रिटी के हाथों अवार्ड देने की बात कहते हुए अवार्ड पाने की रेट बताते है एक लाख से शुरू होती है जो कई बार २५ हज़ार पर तय हो जाती है।
अशोक पालीवाल ने बताया कि इन दिनों हर महीने कही ना कही कोई अवार्ड कार्यक्रम इस माफिया द्वारा आयोजित किया जाता है। ऐसे खरीद फरोख्त अवार्ड कार्यक्रमों से काबिल लोगों को नुकसान उठाना पध्रहा है ज्यूँ कि ऐसे झूठे अवार्ड कार्यक्रमों के चलते वे लोग अखबारों के ज़रिये नाम कमा रहे है जिन्हें अभी इस क्षेत्र में बहुत कुछ सीखना बाकी है . जिन्हे सच में अवार्ड मिलना चाहिए वह वंचित रह जाते है और जो जितना ज्यादा रुपया देता है अवार्ड भी उसको उतना बड़ा ही मिलता है।
पालीवाल ने बताया की यह काफी चिंता का विषय है क्यों कि ऐसे अवार्ड कार्यक्रमों में चयन करने वाली ज्यूरी भी एक तरह से सौदेबाजी कर ही आयी होती है क्यों के यह लोग साफ़ कहते है की अवार्ड कार्यक्रम में आपको जज बनाया जाएगा जिसके लिए आपको इतने रुपये देने होंगे लोग जज बनने की लालसा में लोग इनकी बात को मान भी जाते है। बिना मेहनत के अवार्ड खरीदने वाले लोग खुद के प्रमोशन और समाचारपत्रों में फोटो छपवाने की लालसा में खुद का नुकसान तो कर ही रहे है साथ ही अपने ग्राहकों के साथ भी धोखा कर रहे है .
इस सारे घपले बाजी में एक सबसे बड़ी बात जो सामने आयी है वह यह है कि भारत में फ़िल्मी कलाकारों का काफी क्रेज़ है और इस क्रेज़ का फ़ायदा यह बिकाऊ अवार्ड वाले उठाते है. फ़िल्मी दुनिया की किसी बी या सी ग्रेड की हीरोइन या बॉलीवुड कलाकार को बुलाते है और उसके हाथों विजेता जो पहले से तय होता है उसको अवार्ड दिलवाते है। अवार्ड खरीदने वाला सेलिब्रिटी के साथ फोटो को अखबार छपवाता है अपने सेलून पर लगा कर खुश हो जाता है जब की उसने अपनी ही कला के सार्थ धोखा किया है।
बिकाऊ अवार्ड की खबरे सिर्फ राजस्थान में ही नहीं बल्कि पुरे देश में कई बार सुर्खियां बन चुकी है। अशोक पालीवाल ने बताया कि अवार्ड की सौदेबाजी करने वाले लोग तो रोज़ नए पनपते रहेगें इससे हेयर और मेकअप आर्टिस्टों को खुद को बचना चाहिए . पालीवाल ने बताया कि अब हमो भी और अधिक सक्रीय होना पडेगा और ऐसे बिकाऊ अवार्ड से लोगों को जागरूक करना पड़ेगा . सच तो ये कि कला किसी अवार्ड का मोहताज़ नही होती,… काबिल आदमी की कला ही एक अवार्ड है ,.. सम्मान खरीदा नहीं जा सकता | अगर आप काबिल हैं तो आपकी क़ाबलियत बोलती है और लोगों को समझ में आता है की कौन किस लायक है. आज नहीं तो देर सवेर भी लोगों के समझ में आजायेगा कि बिकाऊ अवार्ड देने वालों का खेल और लोग समझ जायेगें कि इनका मकसद इस क्षेत्र में कला को आगे तक बढ़ना नहीं सिर्फ अपने लाभ के लिए लोगों को बेवकूफ बनाना है
देश में दो तरह की धाराएं ,.. एवार्ड बेचने का और कला के नाम पर अवार्ड देते है ,… काफी लोग इमानदार है जो अवार्ड ठुकरा देते है ,.. कला के दम पर काम करते है ,.. और भी संगठन है वह इमानदारी से काम करते है ,… कलाकार के अन्दर स्वाभिमान और सच्चाई होना जरूरी है तभी समाज और कला के क्षेत्र में नाम कमा सकते है ,…. गलती उनकी ज्यादा है जो अपनी कला पर विशवासनहीं कर ऐसे लोगों के धोखे में आकर शोर्ट कट अपना ते है, शोर्ट कट नहीं अपनाएं , अपने आप से लड़ने की जरूरत है, दोषी सिर्फ अवार्ड बेचने वाले नहीं खरीदने वाले भी है.
Hindustan Zinc received the award for ‘Exporter with Best Risk Management Practices’ during the ECGC Indian Exporters’ Excellence Awards 2017 organised at ITC Maurya, New Delhi on 6th March, 2018. The Award was presented by Mr. Suresh Prabhu – Hon’ble Union Minister of Commerceand Industry to Mr. Vijay Jayarama Murthy – Dy. Chief Marketing Officer and Mr. T.R. Gupta – AVP, Corporate Affairs on behalf of Hindustan Zinc.
The award ceremony saw participation of over 1590 companies in different categories.
ECGC Ltd. has instituted ‘ECGC‐Indian Exporters’ Excellence Awards 2017’ to recognize the contribution made by India Exporters in building brand India as well as making the government’s vision of ‘Make in India’ a reality.
The esteemed Jury members of Award Function comprised of Mrs. Rita Teotia – IAS, Commerce Secretary and Ms. Geetha Muralidhar – CEO & MD of ECGC.
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Udaipur। झीलों में बोटिंग के ठेके आवंटन में अनियामाताताएं और नियमों को साइड में रख कर डिफाल्टर ठेकेदार को बोटिंग का ठेका देने के मामले में सोमवार को High court ने नगर निगम को जोरदार फटकार लगाईं। High court ने पिछोला बोटिंग (lake Pichola) के टेंडर में हुई अनियमतता की जांच एसीबी को सोंप सात दिन में रिपोर्ट पेश करने को कहा है। सूत्रों की माने तो गड़बड़ी पाए जाने पर महापोर भी हाईकोर्ट में तलब किये जासकते है।
pichola में botting का ठेका आवंटन को लेकर हाईकोर्ट में वाद चल रहा है। जानकारी के अनुसार करीब डेड साल पहले पिछोला में एक करोड़ सतेसठ लाख में मेवाड़ा बोटिंग का ठेका हुआ था। लेकिन Nagar Nigam ने काम देने के बाद वापस से कैंसल कर दिया था। बाद में इस ठेके में स्वरुप सागर और जोड़ कर यष एम्यूजमंेट को ठेका दे दिया। जबकि यश एम्युजमेंट नियमों के आधार पर ठेके की शर्तें ही पूरी नहीं करते ऐसे में एम एम ट्रावेल्स ने दावा किया था कि नियमों के आधार पर वह उससे पहले बात करनी चाहिए थी क्योंकि टेण्डर मेवाड़ा के बाद तो वो ही आ रही थी। वहीं यष एम्यूजमेंट के पास तो इपीएफ भी नहीं था। इसी बीच एम एम ट्रावेल्स व मेवाड़ बोटिंग ने हाईकोर्ट में रीट लगा दी। मेवाड़ बोटिंग का कहना है कि नियमों की अनदेखी करते हुए हमारा ठेका केंसल किया। आज जोधपुर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने भी माना की यश एम्युसमेंट को दिया गया ठेका कही ना कही गड़बड़ी दर्शाता है। मेवाड़ बोटिंग के अधिवक्ता ने भी बताया की महापौर ने चार माह तक मेवाड़ बोटिंग की फ़ाइल दबा कर रखी और बाद में नए टेंडर जोड़ कर यश एम्युसमेंट को देदिए। इधर एम् एम् ट्रावेल्स वालों का कहना है कि नियमों के आधार पर यश एम्युसमेंट ठेके के योग्य है और इसके बाद अगर किसी को ठेका मिलना चाहिए तो वह एम् एम् ट्रावेल्स को मिलना चाहिए। हाईकोर्ट ने सोमवार को साड़ी बातों को सुनाने के बाद जांच एसीबी को सोंप दी और एक हफ्ते में रिपोर्ट देने की बात कही है। कोर्ट ने अनियमितता साबित होने पर यह भी कहा की महापौर को भी तलब कर लिया जायेगा और अगर इसमे किसी अधिकारी की कोई लिप्तता हुई तो उसके खिलाफ बी कारवाई के निर्देश दिए जा सकते है।
Udaipur Post News-संवेदनाएं तो मानो जैसे आजके इंसान में बची ही नहीं ना तो किसी इंसान की जान की कोई कीमत रह गयी है ना ही उसके जिस्म के कटे हुए अंग की कीमत। धरती के भगवान् कहे जाने वाले डॉक्टर तो इस मामले में दो कदम हमेशा आगे रहते है। दुर्घटना में घायल मरीज अस्पताल में इलाज कराने आया तो डॉक्टर ने इंसानियत को शर्मसार करने वाला कृत्य कर दिया घायल का कटा हुआ पैर ही उसके सिराहने तकिये की जगह रख दिया। डॉक्टरों की इस हरकत को जिस किसी ने देखा खुद के इंसान होने पर ही उसको शक होने लगा।
मामला है यूपी में झांसी शहर महारानी लक्ष्मी बाई मेडिकल कॉलेज का जहाँ इमरजेंसी वार्ड में इलाज के लिए व्यक्ति के सिर के नीचे उसके कटे पैर का तकिया बनाकर रख दिया। डॉक्टर की इस हरकत ने हॉस्पिटल में मौजूद लोगों को हैरत में डाल दिया। जिसके तुरंत बाद उन्होंने घटना की जानकारी सीएमएस को दी।
शनिवार सुबह मऊरानीपुर इलाके के बम्हौरी और खिलारा के बीच स्कूल के बच्चों से भरी बस पलट गई। इस हादसे में छह बच्चे दबकर घायल हो गए। इस ही हादसे में बस के क्लीनर लहचूरा थाना इलाके के गांव इटायल के रहने वाले घनश्याम का बायां पैर घुटने के नीचे से कटकर अलग हो गया।
घायल बच्चों का इलाज तो मऊरानीपुर के हेल्थ सेंटर में कर दिया गया गया, जबकि घनश्याम को मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। परिवार के लोग जब पीड़ित को लेकर मेडिकल कॉलेज पहुंचे तो डॉक्टरों ने उसके कटे हुए पैर को उसके सिर के नीचे तकिया की जगह लगा दिया।
– इसके तुरंत बाद वहां मौजूद लोगों ने नाराजगी जताते हुए हॉस्पिटल के सीएमएम को फोन करके सूचना दी।
– घटना की जानकारी मिलते ही मेडिकल कॉलेज के सीएमएस डॉ. हरीशचंद्र आर्य मौके पर पहुंचे। उन्होंने तुरंत इमरजेंसी में मौजूद डॉक्टरों को फटकार लगाई। इसके बाद मरीज के सिर के नीचे से कटा हुआ पैर हटवाकर तकिया लगवाया।
सरकार ने दिखाई गंभीरता…
– यूपी सरकार ने महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज झांसी में मरीज का पैर काटकर उसके सिर के नीचे रखने के मामले को गंभीरता से लिया है।
– मंत्री से लेकर मुख्य सचिव तक ने संवेदनशीलता दिखाते हुए शुरआती जांच में दोषी पाए गए डॉक्टरों और स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई करने के आदेश दिए।
– चिकित्सा शिक्षा मंत्री के निर्देश पर दो डॉक्टर और दो नर्स को सस्पेंड कर दिया गया है। जबकि डॉक्टर ऑन कॉल को चार्जशीट दी गई है।
– शासन ने इस मामले में जांच बैठा दी है और मेडिकल कालेज की प्रधानाचार्य से पूरे मामले पर रिपोर्ट तलब की गई है।
उदयपुर। चाहे कोई राजनीति संगठन हो चाहे सामाजिक या धार्मिक संगठन हर संगठन के चुनिंन्दा पदाधिकारियों को कोई सामजिक सरोकार से जुड़ा सार्थक काम करने से ज्यादा जरूरी लगता है अपने ज्ञापन रूपी कार्य का फोटो खिचवा कर अखबारों में छपवाना। इस कार्य में माहिर ये संगठन और पार्टी के लोग सारी मान मर्यादा नियम कायदे भूल बैठते है इन्हे याद रहता है तो सिर्फ यह कि अगले दिन इनका फोटो अखबारों के प्रातः में प्रमुखता से कैसे आये।
छपास के इन रोगियों के पास ना तो संवेदनाएं है ना ही कोई सामाजिक सरोकार और इसका जीताजागता उदाहरण मिला एक बलात्कार पीड़िता मासूम बच्ची और उसकी माँ की पहचान उजागर करने के मामले में। छपास के इन रोगियों की करतूत को दैनिक अखबार दैनिक भास्कर के उदयपुर संस्करण में प्रमुखता से प्रकाशित किया गया समाचार पत्र ने छपास के रोगियों की संवेदनहीनता को प्रमुखता से जग जाहिर किया।
हाल ही में चित्तोड़ के भदेसर में ५ साल की मासूम बच्ची हैवानियत का शिकार बनी जिसका इलाज उदयपुर के महाराणा भूपाल चिकित्सालय में चल रहा है। शुक्रवार को अपनी संगठन और राजनीति की रोटियां सेकने कांग्रेस, शिवसेना के पदाधिकारी और महिला आयोग की सदस्य पीड़िता मासूम बच्ची और उसकी मान से मिलने अस्पताल के आईसीयू तक जा पहुंचे। गए थे पीड़िता के प्रति सहानुभूति और संवेदना जाहिर करने लेकिन संवेदना और जिम्मेदारियों को ताक में रख कर इन महान लोगों ने आईसीयू में पीड़िता बच्ची और उसकी माँ से मिलते हुए अपना फोटो सेशन करवा कर मीडिया में जारी भी कर दिया जब इनसे जवाब मांगा कि इन्होने ऐसा क्यों किया तो बोले गलती हो गयी।
एडवोकेट राजेन्द्र सिंह हिरन ने बताया कि किसी भी दुष्कर्म पीड़ित की पहचान उजागर करने वाले के खिलाफ आईपीसी की धारा 228ए के तहत मामला दर्ज किया जा सकता है। इसमें दो वर्ष के कारावास और जुर्माने की सजा का प्रावधान है।
संवेदनहीनता की हद तो यह है कि महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए बने महिला आयोग की सदस्य सुषमा कुमावत ने मासूम और उसकी मां की फोटो sushmakumawat105@gmail.com ईमेल से खबर प्रकाशित कराने के लिए मीडिया तक को भेज दी।
वहीं भदेसर के पूर्व प्रधान और कांग्रेस नेता अर्जुन सिंह चुंडावत ने भी बच्ची और उसकी मां के फोटो krishnapalsinghmlsu@gmail.com ईमेल से भेज सार्वजनिक कर दिए। ऐसे ही शिवसेना ने gaurav.nagdashivsena@gmail.com से बच्ची की मां की फोटो मय प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी। जब उनसे इस बारे में सवाल किया था तीनों के ही पदाधिकारियों ने गलती स्वीकार करते हुए कहा कि-हमसे बहुत बड़ी भूल हो गई है।
छपास के इं रोगियों पर बलात्कार पीडिता की पहचान उजागर करने के लिए कोई कारवाई हो ना हो लेकिन अधिकारियों ने मामला सामने आने पर कारवाई का जरूर आश्वासन दिया है और ऐसे आश्वासन में कारवाई कहाँ तक होती है यह सब जानते है। दैनिक भास्कर में छापी खबर के अनुसार देखते है जिम्मेदार अधिकारियों ने इस मामले में क्या बयान दिए।
यदि ऐसा है तो जांच करेंगे कि कहां से औैर किसने दुष्कर्म पीड़ित बच्ची के फोटो जारी किए हैं। इसके बाद कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। -हर्ष रत्नू, एएसपी, उदयपुर
जेजे एक्ट के तहत पीड़िता का इस प्रकार से फोटाे नहीं जारी सकते हैं। फिलहाल प्रकरण हमारे सामने नहीं आया है। हम जांच करेंगे। -सुधीर जोशी, एएसपी, चितौडग़ढ़
आईसीयू में फोटोग्राफी प्रतिबंधित है, मामले की जांच कराएंगे : उपाधीक्षक
नियमानुसार आईसीयू में भर्ती बच्ची की हालत देखने मास्क, कैप, अंदर की चप्पलें आदि पहनकर जा तो सकते हैं, क्योंकि भर्ती गंभीर मरीजों को संक्रमण का सर्वाधिक खतरा रहता है। आईसीयू सैरसपाटा करने की जगह नहीं है, जहां फोटोग्राफी प्रतिबंधित है। पब्लिसिटी के लिए दुष्कर्म पीड़ित बच्ची और उसकी मां के फोटो वायरल करना निंदनीय है। मामले की जांच कराई जाएगी। -डॉ. रमेश जोशी, उपाधीक्षक एमबी हॉस्पिटल
उदयपुर। राजस्थान के गृहमंत्री और शहर विधायक गुलाबचंद कटारिया पर बीकानेर के श्री कोलियात जी में हुआ हमला। हमले में उनको व उनके साथियों को गंभीर चोटें आई है एसी पोस्ट के साथ गुलाबचंद कटारिया का एक वीडियो सोशल मिडिया वायरल हो रहा है जिसकी चर्चा शहर ही नहीं पुरे राज्य में है। व्हात्सप के हर एक ग्रुप में यह वीडियो वायरल किया जा रहा है।
पांच मिनट का यह वीडियो दरसल 16 साल पुराना है जिसको अब कटारिया की साख गिराने की नियत से वायरल किया जारहा है। इस वीडियों को देख कर जहाँ एक तरफ कटारिया विरोधी जम कर मजे ले रहे है वही कटारिया समर्थक चिंतित दिखाई दे रहे है लेकिन इस वीडियो को वायरल करने की मंशा चाहे किसी की साख गिराने की हो लेकिन वीडियो के वायरल होने से गृहमंत्री का कद बढ़ता हुआ सा लग रहा है।
पांच मिनट का यह वीडियो बीकानेर के श्री कोलियात जी के एक प्राथमिक स्वास्थ केंद्र का है जहाँ कटारिया और उनके समर्थकों को लोग जम कर पीट रहे है। बाद में गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया को एक अस्पताल में बैठे हुए भी दिखाया है जहाँ वे पुलिस से बात चित कर रहे है।
जानकारी के अनुसार राजस्थान के बीकानेर जिले का श्री कोलियात जी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में जहां पर आज से 16 साल पूर्व गुलाबचंद कटारिया और उनके साथियों पर हमला हुआ था। दरअसल उस समय प्रदेष में अषोक गहलोत की सरकार थी और गुलाब जी नेता प्रतिपक्ष की भुमिका में थे। उन दिनों भाजपा के देवी सिंह भाटी भाजपा से खफा हो गए थे और सामाजिक न्याय मंच के नाम से अपनी पार्टी बना ली थी। तभी कोलियात जी में मौसमी बिमारियों का ऐसा प्रकोप छाया कि मलेरिया से काफी लोगों की मौत हो गई थी। ऐसे में विपक्षी पार्टी भारतीय जनता पार्टी ने तय किया कि गांव का दौरा करने के लिए नेता प्रतिपक्ष गुलाब चंद कटारिया और पार्टी के पदाधिकारी जाएंगे। सूत्र बताते है कि सामाजिक न्याय मंच के प्रमुख देवी सिंह भाटी को यह बात नगवार गुजरी और उनके समर्थकों ने गुलाबचंद कटारिया और उनके साथ गए लोगों पर हमला कर दिया था जिसमें वह काफी चोटिल हो गए थे। वैसे कुछ जानकार तो यह भी बताते है कि कटारिया की पिटाई से आहत उनके समर्थकों ने एक दिन के लिए उदयपुर बंद भी रखा था। सोलह साल बाद यह विडियो अचानक किसी के हाथ लग गया और उसने सोषल मीडिया पर इसे वायरल कर दिया। यह बात और है कि उस समय कटारिया जी को उतनी सहानुभूति नहीं मिली थी, जितनी इन दो दिनों में मिली है। तथाकथित लोगों ने वर्तमान हमले की बात कहते हुए अफवाह फैलाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। वैसे इस वीडियो के वायरल होने के बाद कयास तो यह भी लगाए जा रहे है कि आने वाले चुनाव में कटारिया के प्रति लोगों का समर्थन बड़ेगा। क्योंकि भारतीय जनता पार्टी और एक गांव की जनता की कुषलक्षेम लेने पंहुचे थे उसी समय यह हमला हुआ था इसमे कटारिया जी का समर्पण भाव साफ – साफ जाहिर होता है
पोस्ट न्यूज़। महिलाओं की सशक्तिकरण के लिए कार्य करने वाली मुट्ठी संस्थान द्वारा शहर के आसपास गाँव की महिलाओं की जागरूकता के लिए “एक सप्ताह महिलाओं के नाम” कार्यक्रम का आयोजन किया। जिसमे गाँव की महिलाओं और स्कूल में पढने वाली छात्राओं को विभिन्न मुद्दों पर जागरूक किया एवं कई मनोरंजक कार्यक्रम भी आयोजित किये।
मुट्ठी संस्थान की संस्थापक अर्चना शक्तावत और सरोज पटेल ने बताया कि महिला दिवस के के मौके पर मुट्ठी संसथान द्वारा ” एक सप्ताह महिलाओं के नाम ” साप्ताहिक कार्यक्रमों का आयोजन किया। ५ मार्च से शुरू हुआ महिलाओं के सम्मान में यह सप्ताह ९ मार्च तक चला जिसके दौरान उदयपुर के पास मदार गाँव व् उसके आसपास के एनी गावों में यह साप्ताहिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया जिसमे महिलाओं और स्कूली छात्राओं ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया। गाँव में महिलाओं की पांच दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गयी जिसमे महिलाओं के अलग अलग तरह की गतिविधियां करवाई गयी। कार्यशाला में महिलाओ और छात्राओं को योन उत्पीड़न, मासिक धर्म,स्वास्थ्य, महिला सम्बन्धी कानूनी जानकारी दी गयी। समापन के दौरान महिलाओं द्वारा कई मनोरंजक कार्यक्रमम प्रस्तुत किये गए। छात्राओं और गाँव की महिलाओं ने अपनी प्रतिभा का खासा प्रदर्शन किया। गाँव की महिलाओं ने अपने कई अनुभवों को साझा किया कई महिलाओं ने बहुत ही मनोरंजक किस्से भी सुनाए।
इच्छा मृत्यु को लेकर पिछले काफी समय से चल रहे मामले पर शुक्रवार को सप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. पांच न्यायाधीशों की बेंच ने कुछ शर्तों के साथ इच्छा मृत्यु का इजाजत दे दी है. कोर्ट की ओर से यह भी कहा गया कि इस दौरान इच्छा मृत्यु मांगने वाले के सम्मान का ख्याल रखना भी बेहद जरूरी है. फैसले में यह भी साफ किया गया कि वसीयत न होने की स्थिति में बीमार व्यक्ति के परिजन हाईकोर्ट में इच्छा मृत्यु की मांग कर सकते हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि लिविंग विल पर भी मरीज के परिवार की इजाजत जरूरी होगी। साथ ही एक्सपर्ट डॉक्टरों की टीम भी इजाजत देगी, जो यह तय करेगी कि मरीज का अब ठीक हो पाना नामुमकिन है।
दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा, “बीमार व्यक्ति यह तय कर सकता है कि लाइफ सपोर्ट कब बंद करना है. लाइफ सपोर्ट उसी स्थिति में बंद किया जा सकता है, जब मेडिकल बोर्ड यह घोषित कर दे कि व्यक्ति का इलाज नामुमकिन है.”
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वसीयत का पालन कौन करेगा और इस प्रकार की इच्छा मृत्यु के लिए मेडिकल बोर्ड किस प्रकार हामी भरेगा, इस संबंध में वह पहले ही दिशा-निर्देश जारी कर चुका है.
प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की पीठ ने पिछले साल 11 अक्टूबर को इस याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रखा था. मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि आज कल मध्यम वर्ग में वृद्ध लोगों को बोझ समझा जाता है ऐसे में इच्छा मृत्यु में कई दिक्कते हैं. सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने ये भी सवाल उठाया था कि जब सम्मान से जीने को अधिकार माना जाता है तो क्यों न सम्मान के साथ मरने को भी माना जाए.
ईच्छामृत्यु क्या है?
– किसी गंभीर या लाइलाज बीमारी से पीड़ित शख्स को दर्द से निजात देने के लिए डॉक्टर की मदद से उसकी जिंदगी का अंत करना है। यह दो तरह की होती है। निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) और सक्रिय इच्छामृत्यु (Active Euthanasia)।
निष्क्रिय इच्छामृत्यु क्या है?
– अगर कोई लंबे समय से कोमा में है तो उसके परिवार वालों की इजाजत पर उसे लाइफ सपोर्ट सिस्टम से हटाना निष्क्रिय इच्छामृत्यु है। सुप्रीम कोर्ट ने इसे इजाजत दी है।
सक्रिय इच्छामृत्यु क्या है?
– इसमें मरीज को जहर या पेनकिलर के इन्जेक्शन का ओवरडोज देकर मौत दी जाती है। इसे भारत समेत ज्यादातर देशों में अपराध माना जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने इसे मंजूरी नहीं दी है।
कॉन्स्टीट्यूशन बेंच में कैसे पहुंचा मामला?
– 2014 में सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच ने निष्क्रिय इच्छामृत्यु पर अरुणा शानबाग मामले में 2011 में दिए गए फैसले को असंगत बताया था और यह मामला पांच जजों की बेंच के पास भेज दिया था। तब से यह पेंडिंग था।
अरुणा शानबाग मामले में सुप्रीम कोर्ट ने क्या फैसला दिया था?
– सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई की नर्स अरुणा शानबाग मामले में दायर जर्नलिस्ट पिंकी वीरानी की पिटीशन पर 7 मार्च 2011 को निष्क्रिय इच्छामृत्यु की इजाजत दे दी थी। हालांकि, अरुणा शानबाग के लिए इच्छामृत्यु की मांग खारिज कर दी थी।
सुप्रीम कोर्ट ने वीरानी की पिटीशन क्यों खारिज की थी?
– सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि कुछ खास परिस्थितियों में संबंधित हाईकोर्ट के निर्देश पर निष्क्रिय इच्छामृत्यु की इजाजत दी जा सकती है, लेकिन इसके लिए तीन डॉक्टरों और मरीज के परिवार वालों की इजाजत जरूरी है। पिंकी वीरानी शानबाग की परिजन नहीं थीं, इसलिए उनकी पिटीशन खारिज कर दी गई।
पोस्ट न्यूज़ । ए आई सी सी में उच्च पद पर स्थित सूत्रों का कहना है कि ए आई सी सी महाधिवेशन के बाद राहुल गांधी के निजी पसंदीदा तथा आंकडों के खेल के माहिर नेता का पत्ता कटना तय है।
ए आई सी सी महासचिव सी पी जोशी ९ राज्यों में प्रभारी हैं, जो राहुल गांधी द्वारा स्वयं घोषित इस मंशा के विरूद्घ है कि एक महासचिव एक ही राज्य का प्रभारी होगा ताकि वह उस राज्य के प्रति न्याय कर सके जिसकी वह देखभाल कर रहा है।
सी पी जोशी के प्रभार के आधीन ७ उत्तर पूर्वी राज्यों में से कांग्रेस छ: राज्यों में सत्ता गंवा चुकी है। सातवां राज्य मिजोरम है जहां इस साल के अंत में चुनाव होने हैं। एक समय उत्तर पूर्व पर शासन करने वाली कांग्रेस हाल में हुए चुनावों में त्रिपुरा तथा नागालैंड में शून्य अंक पाकर आज साफ हो चुकी है। उनके प्रभार में दो अन्य राज्य बिहार तथा पश्चिम बंगाल हैं। बिहार में राज्य पी सी सी अध्यक्ष अशोक चौधरी सहित चार विधायक पार्टी छोडकर जद (यू) में शामिल हो चुके हैं। गत दो दिनों में दो जिला अध्यक्ष भी कांग्रेस छोड गये हैं।
सी पी जोशी को राहुल के नजदीक माना जाता है। कम्प्यूटर के आंकडों के विश्लेषण में वे दक्ष हैं। माना जाता है कि इससे वे राहुल को संतुष्ट कर देते हैं कि अधिक चिंता की आवश्यकता नहीं है क्योंकि पार्टी को लगभग उतने ही मत मिल रहे हैं जितने पहले मिला करते थे। लेकिन वह ये बताना भूल जाते हैं कि ये मत सीटों में क्यों नहीं बदल रहे हैं।
इन राज्यों के कांग्रेसियों ने कभी यह शिकायत करने का प्रयास नहीं किया कि जोशी को पार्टी के लोगों से मिलना पसंद नहीं है, वे उन क्षेत्रों का दौरा करने के प्रति अरूचि रखते हैं जिसके वे प्रभारी हैं तथा उनका रूख रूखा तथा अवज्ञा पूर्ण है जो पार्टी के लोगों को निराश कर देता है और डांटे जाने के डर से पार्टी कार्यकर्ता उनसे दुबारा नहीं मिलना चाहते।
राजस्थान के एक वरिष्ठ ब्राह्मण नेता के रूप में वे राजस्थान के मुख्यमंत्री पद में बहुत रूचि रखते थे और रखते हैं। उन्हें आशा है कि राहुल गांधी से उनकी निकटता उन्हें राज्य का शीर्ष पद दिलवा देगी। उन्होंने अशोक गहलोत से गठजोड किया है जो राज्य के शीर्ष पद के एक और दावेदार हैं। यह दोनों सचिन पायलट का हटना सुनिश्चित करने के लिए मिल कर कार्य कर रहे हैं।
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जो रहस्य बना हुआ है वह ये कि राहुल गांधी ने जोशी से अभी तक वे कई राज्य छीने क्यों नहीं है जिनके वे प्रभारी हैं, जब कि खुद उनके निर्णय के अनुसार एक व्यक्ति के पास एक राज्य होना चाहिये। पार्टी के लोग कहते हैं कि वे उलझन में हैं क्योंकि उन्होंने उन सभी राज्यों को बर्बाद कर दिया है जिन्हें वे संभाल रहे हैं और उत्तर पूर्व में वे परिणाम नहीं दिला पाए हैं। उत्तर पूर्व में निर्वाचन के गत चक्र में मणिपुर को पार्टी के हाथ से फिसल जाने देने के लिये उनकी कडी आलोचना हुई थी क्योंकि उन्होंने मौके पर रहने तथा यह सुनिश्चित करने के लिये कोई प्रयास नहीं किये थे कि पार्टी अपनी स्वयं की सरकार बनाए। इस बार मेघालय में यही दोहराया गया।
राहुल गांधी के पार्टी अध्यक्ष बनने के बाद कई ए आई सी सी महा सचिवों से उनके राज्य वापस ले लिये गए थे लेकिन आश्चर्यजनक रूप से सी पी जोशी के मामले में राहुल ने अपने ही निर्देश की अनदेखी कर दी। इसका परिणाम यह हुआ कि उत्तर पूर्व को संभालने के तरीके तथा जिस तरीके से पार्टी कई राज्यों में शून्य के स्तर पर पहुंच गई है उसको लेकर पार्टी के भीतर बहुत अधिक आलोचना हो रही है।
इस दशा में राहुल भी दोष मुत्त* नहीं रहते क्योंकि सूत्रों के अनुसार ममता बनर्जी ने भाजपा को सत्ता से बाहर रखने के लिये त्रिपुरा में कांग्रेस से गठबंधन की पेशकश की थी। लेकिन ज्ञात हुआ है कि कांग्रेस नेतृत्व ने इसे अस्वीकार कर दिया। जो स्पष्ट नहीं है वह ये कि क्या ऐसा राहुल के खुद के विवेक से किया गया था या इसमें सी पी जोशी की सलाह का हिस्सा भी था। चाहे जो रहा हो, उत्तर पूर्व के नेता आज जिस खराब दशा में पार्टी स्वयं को पा रही है उसके लिये सी पी जोशी को दोष देने में संकोच नहीं कर रहे हैं। और शायद अब समय आ गया है कि राहुल गांधी उन राज्यों सहित जिनके मुखिया सी पी जोशी हैं, कई राज्यों में सुधार के लिये कदम उठाएं।
ZINC reduces hunger by increasing the level of leptin, a key hormone that alerts the body when one is full so that a person does not keep eating when he or she is full. Zinc regulates hunger hormones and leads to weight loss.
ZINC promotes fat loss by preventing fat oxidation and storage of excess fat. It helps in proper digestion by improving protein synthesis, which boosts muscle recovery and metabolism. Zinc also increases energy by improving digestion which allows more energy to be converted from foods.
Evidence suggests that Zinc can help control appetite. Zinc intake reduces hunger by increasing the level of leptin, a key hormone that alerts the body when one is full so that a person does not keep eating when he or she is full. This promotes the body’s natural metabolism and digestion which further supports the oxidation of fat cells to prevent further storage.
According to a study by National Centre for Biotechnology Information, there’s a clear link between Zinc deficiency and body composition, with overweight people being much more likely to have low levels of the mineral. Zinc deficiency generally makes the body store excess fat.
According to clinical nutritionist, Byron Richards, those who are struggling to lose weight due to low thyroid function would benefit from additional Zinc. Zinc plays a primary role in insulin health by improving the production of enzymes that protect the cells and helps detoxify inflammatory biomarkers that get in the way of metabolic function. It has excellent weight loss properties. It enables the body to produce more thyroid hormone that is responsible for maintaining healthy weight. Zinc supplement is great help for people with slow metabolism. Thus, Zinc regulates hunger hormones and leads to weight loss.
Triglycerides, Body Mass Index (BMI) and waist size shrink with Zinc.
While getting plenty of Zinc in diet may help enhance weight loss if one is overweight or obese, the total daily calorie intake and energy spent determines whether or not one will lose weight. According to the “American Journal of Clinical Nutrition”, many Zinc-rich foods are also high in dietary protein, which help boost satiety, and energy payoffs and are beneficial when one is trying to shed pounds.
Hindustan Zinc is India’s only and world’s leading Zinc producer, proudly known as Zinc of India.
Pavan Kaushik
Article by- Pavan Kaushik, Head – Corporate Communication, Hindustan Zinc