बॉलीवुड की एक बेहतरीन अदाकारा श्रीदेवी ने बे वक़्त दुनिया को कह दिया अलविदा।

0
Last Pictures Of Sridevi From The Wedding In Dubai

पोस्ट न्यूज़ बॉलीवुड की चुलबुली एक्ट्रेस श्रीदेवी हमारे बीच नहीं रहीं। शनिवार की रात दुबई में एक शादी समारोह के दौरान दिल का दौरा (कार्डियक अरेस्ट) पड़ने से 54 साल की इस अदाकारा का निधन हो गया। श्रीदेवी अपने पति बोनी कपूर और छोटी बेटी खुशी कपूर के साथ इस शादी में शामिल होने के लिए दुबई गई थीं। श्रीदेवी की मौत की खबर मिलने के बाद बॉलीवुड में शोक की लहर दौड़ गई है। निधन की सूचना मिलते ही कई कलाकार मुंबई में श्रीदेवी के घर पहुंचे। श्रीदेवी ने हिन्दी के साथ तेलगु, तमिल, कन्नड़ और मलयाली फिल्मों में भी किया है। श्रीदेवी का जन्म 13 अगस्त 1963 को तमिलनाडु के शिवकाशी में हुआ था।
वे दुबई में अपने भांजे मोहित मारवाह की शादी में शरीक होने के लिए गई थीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके निधन पर शोक जताया है। अमिताभ बच्चन, कमल हासन, प्रियंका चोपड़ा समेत तमाम कलाकारों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है। अमिताभ ने देर रात ट्वीट कर कहा- “न जानें क्यों, एक अजीब सी घबराहट हो रही है।” श्रीदेवी को 2013 में पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया था।
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को दिग्गज अभिनेत्री श्रीदेवी के निधन पर शोक जताया। श्रीदेवी का दुबई में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। राष्ट्रपति ने ट्वीट किया, “फिल्म अभिनेत्री श्रीदेवी के निधन की खबर सुनकर स्तब्ध हूं। वह लाखों प्रशंसकों को दर्द दे गईं। मूंद्रम पिराई, लम्हे और इंग्लिश विंग्लिश जैसी फिल्मों में उनका अभिनय अन्य कलाकारों को प्रेरित करता रहेगा। उनके परिवार और करीबियों के लिए मेरी संवेदनाएं हैं। मोदी ने भी ट्विटर पर लिखा, “सुप्रसिद्ध अभिनेत्री श्रीदेवी के असामयिक निधन से दुख हुआ। वह फिल्म उद्योग की दिग्गज हस्ती थीं जिन्होंने अपने लंबे करियर में विविध भूमिकाएं निभाईं और यादगार अभिनय किया। इस दुख की घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिवार और प्रशंसकों के साथ हैं। उनकी आत्मा को शांति मिले। दिग्गज अभिनेत्री श्रीदेवी (54) अपने पति बोनी कपूर और छोटी बेटी खुशी कपूर के साथ एक पारिवारिक विवाह समारोह में हिस्सा लेने दुबई गई थीं। श्रीदेवी को ‘मिस्टर इंडिया’, ‘सदमा’, ‘चालबाज’, ‘चांदनी’ जैसी कई बेहतरीन फिल्मों के लिए जाना जाता है। श्रीदेवी को 2013 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था।
श्रीदेवी का बॉलीवुड में प्रवेश 1978 के फिल्म सोलहवां सावन से हुआ था, लेकिन उन्होंने वर्ष 1983 की फिल्म हिम्मतवाला से खूब सुर्खियां बटोरीं. श्रीदेवी की सदमा, नागिन,निगाहें, मिस्टर इन्डिया, चालबाज़, लम्हे, खुदा गावाह और जुदाई फ़िल्में हैं. श्रीदेवी को पांच फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिलेे.

दो घंटे की लूट की नौटंकी में उछल कूद मचाते नामालूम रेसलर, फूहड़ता परोसती महिला रेसलर , तमाशबीन बने शहर के जिम्मेदार – खेल गाँव अब शादी ब्याह के लिए भी उपलब्ध होना चाहिए ?

0

उदयपुर। अगर आपका रसूख है और अधिकारियों को खुश करने का माद्दा है तो शहर में आप कैसी भी फूहड़ता दिखा कर जनता को लूट सकते हो कोई सवाल नहीं उठाएगा ना ही कोई रोकने आएगा। चमक दमक दिखा कर अखबारों में बड़े बड़े विज्ञापन देकर पत्रकारों की कलम भी कुछ समय के लिए गिरवी रखी जा सकती है। पुलिस और प्रशासन के बड़े अधिकारियों को खुश कर कानून व्यवस्था के नाम पर पूरी तरह व्यावसायिक आयोजन में मुफ्त में पुलिस सेवाएं लेकर लाखों करोड़ों कमाए जा सकते है। फिर चाहे जनता को मुर्ख बना कर 6 घंटे का शो सिर्फ २ घंटे में समाप्त कर जनता को दिल खोल कर लूट लो,.. कोई सवाल नहीं करेगा। इस काम में इनका साथ देते है कुछ दलाल,.. जो मीडिया और प्रशासन को खुश करने की दलाली करते है वह आपका सारा काम आसान कर्देगें।
और यह सब कुछ करने के लिए खुद प्रशासन जनता के पैसों से बना खेल गाँव जैसा सुरक्षित स्थान थेंक्यु में उपलब्ध करवा देता है। यह सब हुआ उदयपुर शहर में ” एनकाउंटर 18″ नामक रेसलिंग की घटिया नौटंकी में जहाँ इस नौटंकी में कुछ किराय के पहलवानों ने रिंग में उछल कूद मचाई। फिर महिलाओं की कुश्ती के नाम पर अशलीलता और फूहड़ता परोसी गयी और आखिर में इस शो के ब्रांड एम्बेसेटर “खली” की शो फाइट का डेमो दिखा कर खुली आखों से जनता को लूटा गया। ये बात और है कि कहा कुछ और था दिखाया कुछ और लेकिन इनसे जवाब मांगने वाले खुद चुप्पी साढ़े बैठे है।

इस नौटंकी के दौरान बाउंसरों को रिंग के बाहर खुली छूट दी गयी जिस पर उन्होंने जनता से ही नहीं एडीएम प्रशासन तक से बदसलूकी कर डाली। और 20 रूपये की पानी की बोतल को 80 में बेचा गया .
खिलाड़ियों के नाम पर बनया गया खेल गाँव में इस नौटंकी को खेल अधिकारी बड़े मजे लेकर हाथ बांधे देखते रहे। शहर की जनता के लिए अब खेल गाँव को शादी ब्याह और निजी आयोजन के लिए भी उपलब्ध करवा देना चाहिए। क्यों कि यहाँ अभी तक खिलाड़ियों के लिए वह सुविधाएं तो उपलब्ध करवा नहीं पा रहे जिसके वादे ये अधिकारी और नेता हमेशा करते रहे है। बल्कि अब तो इनकी आड़ में यहाँ पर व्यावसायिक और राजनितिक कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे है, तो क्यों नहीं यहाँ पर हर समाज के लिए सामुदायिक केंद्र और मैरिज गार्डन बना दिया जाय। इस खेल गाँव पर इन रसूखदार नौटंकीबाजों का ही अधिकार नहीं जनता का भी अधिकार है आखिर यह बना तो जनता की खून पसीने की गाडी कमाई से है। इसको बनाने के लिए पैसा ना तो किसी राजनितिक दल ने दिया है ना ही किसी अधिकारी ने अपनी जेब से तो फिर आम जनता इसकी इन सुविधाओं से क्यों वंचित रहे।
खेल गाँव में शनिवार की रात को हुई रेसलिंग के नाम पर नौटंकी सिर्फ एक फूहड़ता वाला तमाशा बन कर रह गयी। जिसमे बड़े अधिकारियों और उनके परिवारों ने भी आंनद लिया ये अलग बात है की कुछ छोटे अधिकारी और करीब ३०० से अधिक पुलिस कर्मी ऊपर के आदेश पर इस नौटंकी की सुरक्षा व्यवस्था करने में लगे रहे। और इसतरह के निजी कार्यक्रम में जहाँ पुलिस विभाग में सुरक्षा के लिए जो शुल्क लिया जाता है वह भी इनको माफ़ कर दिया गया। उम्मीद है पुलिस विभाग बाकी जनता के निजी कार्यक्रमों में भी निशुल्क सुरक्षा उपलब्ध करवाती रहेगी।
सबसे बड़ी बात इस नौटंकी का प्रचार प्रसार पीछा;ले दो माह से चल रहा था इस नौटंकी में एक बड़ा विज्ञापन दाता का नाम जुड़ा हुआ था जो साल के करोड़ों का बिजनेस बड़े मीडिया हाउस को देता है और इस नौटंकी के लिए भी लाखों के विज्ञापन के लालच में बड़े अखबारों ने भी इस फूहड़ता और लूट नौटंकी पर कोई सवाल नहीं उठाया बल्कि अपने विज्ञापनी अनुबंध के चलते इसको महिमंडित करते रहे जिससे जनता भी भ्रमित हुई और खेल अधिकारी भी निश्चिन्त हो गए। रुपया अगर करोड़ों में खर्च किया जाए तो जनता को क्या नहीं परोसा जा सकता इसका जीता जागता नमूना एनकाउंटर 18 में देखने को मिला।

कुश्ती की नोटंकी में खली की जीत तय जनता को बनायेगें मुर्ख, जितने वाले विदेशी पहलवान जबरदस्ती हारेगें ?

0

उदयपुर । शहर के खेलगांव में पिछले पन्द्रह दिनों से जग प्रसिद्ध नोटंकीबाज कुष्तियों के एक प्रारूप ‘एनकाउन्टर – 18’ की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा चुका है। खेलगांव के जिस मैदान पर यह नोटंकीबाज कुष्ती आयोजित की जा रही है, वहां पर भावी क्रिकेटरों को तैयार करने का ख्वाब इस खेलगांव का कर्ताधर्ताओं ने देखा होगा। लेकिन शहर के तथाकथित खेल अधिकारी ने अपने दिमागी कौशल से खेलगांव के नीजिकरण में कोई कसर नहीं छोड़ी। आज भी यहां के हालात तो यहीं कहते है खेलअधिकारी ललित सिंह झाला जब तक इस पद पर आसिन्न रहेंगे बिना रसूख वाले खिलाड़ियों का भविश्य तो नहीं बनेगा। खैर अब बात करते हैं नोटंकीबाज कुष्ती की जिसमें भाग लेने के लिए सारे ही पहलवान शूरवीरों की धरती में आ चुके है। सुना है इस कुष्ती दंगल से पहले नामचीन मोडल रिंग में अपने जलवे बिखेरकर दर्षकों का मनोरंजन करेगी, जो शायद पहली बार ही होगा। कार्यक्रम के आयोजकों ने जनता को मुर्ख बनाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी और खली को ब्राण्ड एम्बेसेडर बनाते हुए विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से गुमराह करके टिकिटों में खूब लूट खसौट की है। वैसे इस कुष्ती को लेकर सट्टा लगना भी शुरू हो गया है, माना जा रहा है कि यहां पर खली की जीत तय है और विदेशी पहलवान की हार। खैर यह नोटंकी कुष्ती शुरू से ही सट्टे पर ही आधारित रही है, लेकिन मेवाड़ में आज तक ऐसा खेल खुलेआम नहीं खेला गया जो तथाकथित आयोजकों ने सरकारी स्वीकृति करके कर डाला।

एनकाउंटर 18 के नाम पर खेल गाँव में होने जारही है लूट की नोटंकी – जनता और खिलाड़ियों के साथ हो रहा है धोखा ?

उदयपुर। एनकाउंटर 18 के नाम की रेसलिंग नोटंकी से उदयपुर की जनता को लूटने की तय्यारी पूरी की जाचुकी है। इस लूट की नोटंकी में साथ दे रहे है उदयपुर के खेल अधिकारी जिन्होंने शहर के खिलाड़ियों का खेल गाँव इन एनकाउंटर 18 वाले व्यवसाइयों को बेच दिया है। इस पुरे व्यावसायिक खेल में हर तरह से नुकसान शहर के खिलाड़ियों का ही होना है। सबसे पहले तो इस रेसलिंग नोटंकी की स्वीकृति भी ली है या नहीं ? अगर ली भी है तो पूरी तरह से व्यावसायिक गतिविधि जिसका टिकिट 500 रूपये से लेकर 10000 रूपये तक रखा गया है एसी व्यावसायिक गतिविधि की अनुमति इन खेल अधिकारियों ने दे खेल गाँव में कैसे दे दी? खेल गाँव को पहले तो एक-एक लाख रूपये की मेंबरशिप में सिर्फ शहर के ख़ास लोगों के हवाले कर दिया और अब उसके बाद एनकाउंटर 18 जैसी नोटंकी रेसलिंग आयोजित करवाई जा रही है, जिसका खामियाजा पूरी तरह से शहर के खिलाड़ियों को ही उठाना पडेगा। क्यूँ कि इस नाटकीय मेले के बाद खेल गाँव का जो नुक्सान होगा उसकी भरपाई कोन करेगा। रसूखदार और ख़ास लोगों को फायदा पहुचाने के लिए करवाए जारहे इस एन्काउंतर 18 जो सिर्फ स्मार्ट सिटी की जनता और स्मार्ट सिटी के खिलाड़ियों के साथ एक छलावा भर है। आयोजक इस रेसलिंग नोटंकी को पेश तो एक फेशन शो की तरह कर रहे है लेकिन इन्होने इसको दर्शाया एक खेल की तरह है जबकि सर्व विदित है कि wwe की तर्ज़ पर खेली जाने वाली यह नोटंकी सिर्फ एक पम्पिंग शो भर है इससे ज्यादा कुछ नहीं, जिसको देखने के बाद यक़ीनन 500 से 10000 रूपये खर्च करने वाले दर्शक खुद को ठगा महसूस करने वाले है ।
जिस खेल गाँव को असली खिलाड़ियों को आगे बढाने के लिए जैसे तैसे जनता के पैसों से सरकार ने बनाया गया उसको खेल के जिम्मेदार लोग इन खेल के नाम पर नोटंकी करने वालों को बेचने की शुरुआत कर रहे है। इस कोशिश का पुरजोर विरोध किया जाना चाहिए। आम आदमी वहां जाने की सोच भी नहीं सकेगा ना ही खिलाड़ी खेल गाँव तक जा सकेगें एक बार उदयपुर की जनता को और शहर के खिलाड़ियों को खेल अधिकारियों और उदयपुर के प्रशासन से सवाल जरूर पूछना चाहिए कि खेल गाँव जिसको सिर्फ खिलाड़ियों के लिए बनाया जारहा है जहाँ जनता के खून पसीने की कमी का पैसा लगा कर बनाया जारहा है वहां एसी व्यावसायिक नोटंकी क्यूँ आयोजित की जारही है ?

सरकार वासुदेव की पतलून में झांकना बंद करो और शम्भू जैसे हत्यारे के पीछे कौन लोग है जो नफरत फैला रहे है उनकी जांच करो।

0

उदयपुर पोस्ट। बंगाली श्रमिक की जला कर ह्त्या करने वाले हत्यारे शम्भूनाथ द्वारा जेल से वीडियो वायरल करने के मामले में अधिकारी और सरकार का गृह विभाग एक तरह का मजाक कर रहा है। जिन पहलुओं पर जांच की जानी चाहिए उन पर जांच नहीं कर सिर्फ इस पर ध्यान केन्द्रित कर रहे है कि हत्यारे शम्भू ने जिस कैदी वासुदेव पर मुस्लिम होने के आरोप लगाए है वह मुस्लिम है या नहीं।
सभी बड़े बड़े जेल अधिकारी और राजस्द्थान के काबिल डॉक्टर वासुदेव की पतलून में झाँक रहे है और जहां कर जांच करने के बावजूद पता नहीं चल रहा है कि वासुदेव ने खतना करवाई है या नहीं।
ताज्जुब की बात है कि बड़े बड़े अधिकारी और डॉक्टर वासुदेव का प्राइवेट पार्ट चेक कर अंदाजा लगा रहे है कि उसकी खतना की हुई है या नहीं जिससे पता लगे वह मुस्लिम या हिन्दू है। एसा लग रहा है मानों वासुदेव दुनिया में निराला प्राणी है जिसका कोई आगा पीछा रिकोर्ड नहीं कोई घर बार नहीं जिससे कि यह पता लगाया जा सके वह हिन्दू है। बस सिर्फ एक ही रास्ता बचा है वह है उसका प्राइवेट पार्ट देख कर बताया जा सके कि वह हिन्दू है या मुस्लिम। उससे भी आश्चर्य जनक और हास्यास्पद बात तब लगती है जब अधिकारी और डाक्टर्स मिल कर यह तय नहीं कर पा रहे है कि उसने खतना की है या नहीं।
एक हत्यारा जिसने देश में साम्प्रदायिक सोहार्द बिगाड़ने की नियत से एक मुस्लिम बंगाली श्रमिक की हत्या की और ह्त्या का लाइव वीडियो बना कर वायरल किया। बाद में वह जेल जाने के बाद भी वह जेल से वीडियो बनाता है जिसमे वह सिर्फ भड़काऊ बातें ही बोलता है। वीडियो में साफ़ दिख रहा है कि वह जो भी बोल रहा है वह एक कागज़ पर लिखा हुआ है और उसकी मानसिक विकसितता से साफ़ पता चलता है कि उसको यह सब लिख कर देने वाला कोई और ही है। उसको जेल में मोबाइल फोन वह भी हेड फोन के साथ देने वाला कोई और है। इसके बावजूद पूरा प्रशासनिक और पुलिस अमला सिर्फ यह जांच करने में जुटा है कि उसने जिस वासुदेव नामक कैदी पर मुस्लिम होने का आरोप लगाया है वह भी उसका प्राइवेट पार्ट देख कर वह हिन्दू है या मुस्लिम।
इस बात को जानते बुझते गोल किया जारहा है कि शम्भू जैसे हत्यारे को हीरो बनाने वाले और नफरत फैला कर दंगा करवाने वाले लोग आखिर कोन है जिसने हत्यारे शम्भू को हाई सिक्युरिटी जेल के अन्दर मोबाइल फोन उपलब्ध करवाया।
जेल के अधिकारियों के अनुसार राजस्थान की सभी सेन्ट्रल जेल में जैमर लगे हुए है जिससे कि किसी भी मोबाइल से कोई सा भी नेटवर्क नहीं मिल सकता। तो फिर क्या जैमर की तकनीक खराब हो गयी, जैमर लगाने के २० करोड़ रूपये क्या व्यर्थ हो गए और अगर एसा नहीं है तो फिर बाहर आकर शम्भू का विडियो केसे और किसने वायरल किया। इन सारे सवालों के जावाब कोई अधिकारी नहीं दे रहा या इन सब सवालों के जवाब जानते हुए भी बताया नहीं जा रहा।
चाहे कुछ भी अभी तो साफ़ तौर पर दिख रहा है कि जेल अधिकारी और सरकार का गृह विभाग बजाय सही जांच करने के वासुदेव की पतलून में झाँक रहा है।

सुखाडिया विवि में भर्तियों में हो रही गड़बड़ी के खुलासे के बाद लगी रोक

सुखाड़िया विश्वविद्यालय में असिस्टेंट रजिस्ट्रार के पदों पर भर्ती में हुई गड़बड़ियां सामने आने के बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन ने शेष सभी नॉन-टीचिंग पदों पर भर्तियों को रद्द कर दिया है। भर्तियों के तहत अबतक जो भी प्रक्रिया हुई, उसे रद्द कर दोबारा नए सिरे से विज्ञापित किया जाएगा। इसके लिए योग्यता और नियमों में बदलाव भी यूजीसी और अन्य विवि के मानदंडों को देखते हुए किए जाएंगे। अब भर्तियां नए सिरे से निकाली जाएंगी। इससे पहले बुधवार सुबह गेस्ट फैकल्टी शिक्षकों ने प्रशासनिक भवन की घेराबंदी कर विवि प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और परीक्षाओं का बहिष्कार किया। इससे विवि प्रशासन के हाथ पांव फूल गए और उन्होंने आनन-फानन में आपातकालीन व्यवस्थाएं करते हुए गैरशैक्षिक कर्मचारियों को परीक्षा लेने के लिए लगाया। दैनिक भास्कर ने मंगलवार को असिस्टेंट रजिस्ट्रार की भर्तियों में हुई गड़बड़ी के संबंध में खबर प्रकाशित कर इस मामले का पूरा खुलासा किया था। इसके बाद बीसियों ऐसे पात्र अभ्यर्थी खुलकर सामने आए, जिन्हें एक अन्य कमेटी ने वंचित कर दिया था। इन सबने विवि प्रशासन का कड़ा विरोध किया था। मामले में यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार शुरू से भर्तियों के विरोध में नजर आए, इसे भी सिर्फ भास्कर ने ही प्रकाशित किया। इसी का असर रहा कि आखिरकार विवि प्रशासन ने भर्तियों को रद्द कर दोबारा भर्तियां कराने का निर्णय लिया है।

इन भर्तियों को रद्द करने के बाद यूनिवर्सिटी ने 7 सदस्यीय नई स्क्रीनिंग कमेटी बनाई है। इस कमेटी में विवि के चारों कॉलेजों के डीन प्रो. आनंद पालीवाल, प्रो. जी. सोरेल, प्रो. बीएल आहूजा और प्रो. साधना कोठारी हैं। कमेटी के मेम्बर सेक्रेटरी रजिस्ट्रार हिम्मत सिंह भाटी होंगे। कमेटी में दो इनवाइटी मेम्बर भूगोल विभाग की अध्यक्ष सीमा जालान और जिओलॉजी विभाग के प्रो. एमएल नागौरी होंगे। ये नई स्क्रीनिंग कमेटी अब भर्तियों के लिए यूजीसी के तहत नए नियम-कायदे बनाएगी। इसके बाद सभी भर्तियों को री-एडवर्टाइज किया जाएगा।

नए भर्तियों के तहत डिप्टी कंप्ट्रोलर के पद के लिए 1, डिप्टी रजिस्ट्रार के पद के लिए 2 , असिस्टेंट रजिस्ट्रार के पद के लिए 3, स्टेटिस्टिकल असिस्टेंट के पद पर 1, लैब टेक्नीशियन के पद पर 4, जूनियर टेक्नीकल असिस्टेंट के पद पर 3 और एचएलए के पद पर 1 नियुक्तियां दोबारा होगी। इन 7 पदों के लिए यूनिवर्सिटी विज्ञापन देकर नए पद निकालेगी।
25 साल से यूजीसी और अन्य यूनिवर्सिटी के परे जाकर हो रही थी भर्तियां
सुखाड़िया विवि अबतक जिन नियम और कायदों का हवाला देकर नियुक्ति प्रक्रिया को सही ठहरा रही थी, अब उस पर सवाल उठ रहे हैं। दरअसल असिस्टेंट रजिस्ट्रार के पद पर भर्ती के लिए जो योग्यताएं तय की गई हैं, वे यूजीसी और प्रदेश के अन्य राज्य विवि के नियमों से बिलकुल अलग थी। यूजीसी और प्रदेश की अन्य स्टेट यूनिवर्सिटीज में 5 साल का शैक्षणिक अनुभव अनिवार्य ही नहीं हैं। सुखाड़िया यूनिवर्सिटी इसे अनिवार्य कर भर्तियां करती थी। यह नियम पिछले 25 साल से हो रही भर्तियों में लागू थे। यह बात यूनिवर्सिटी के कुलपति और रजिस्ट्रार ने भी मानी है।
ऐसे हल हुआ पूरा प्रकरण
बुधवार सुबह गेस्ट फैकल्टी ने जैसे ही 11 से 2 बजे वाली पारी की परीक्षा के बायकाट का फैसला लिया। पूरा हंगामा रहा। 60-70 गेस्ट फैकल्टी सुबह से प्रशासनिक भवन के बाहर प्रदर्शन और नारेबाजी करते रहे। इस दौरान कुलपति कार्यालय को ताला जड़ दिया। लेकिन कुलपति पिछले तीन दिन से जयपुर में थे। वे बुधवार दोपहर बाद लाैटे तो तीन बजे बातचीत हुई और भर्तियां रद्द करने पर वे सहमत हो गए। इसके बाद ही नई स्क्रीनिंग कमेटी के गठन का एलान हुआ।

Pantnagar Metal Plant receives Par Excellence Award

0

Hindustan Zinc’s Pantnagar Metal Plant received Par Excellence Award in 5S & Kaizen in the 5th National Enclave on 5S organized by Quality Circle Forum of India.

Over 75 companies from all over the country participated in the conclave held at BIT, Sathyamangalam, Coimbatore (Tamil Nadu) on 9th -10th February 2018. The theme for the conclave was – “Enhance Global Competitiveness through 5S”.

PMP received Par Excellence Award in 5S and also received Par Excellence Award in Kaizens with the highest saving Kaizen out of 56 different companies.

On behalf of Hindustan Zinc, the award was received by Mr. VK Singh Mr. SK Rahaman and Mr. Rajesh Dabi.

MLSU में अब अतिथियों का स्वागत होगा पौधो और पुस्तकों से – छात्रों ने किया आदेश का स्वागत

उदयपुर। उदयपुर के मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय और उससे जुड़े चारों संगठक महाविद्यालयों में अब किसी भी गेस्ट या महत्वपूर्ण हस्ती का स्वागत फूल माला और गुलदस्तों से नहीं होगा। कुलपति के नए आदेश के अनुसार अब पोधों और किताबों से स्वागत किया जाएगा। इस आदेश का छात्रों ने हर्ष के साथ स्वागत किया और जन्म दिन में पौधा रोपण के साथ इसकी शुरुआत भी कर दी।
सुखाडिया विश्वविध्यालय के कुलपति प्रोफ़ेसर जेपी शर्मा ने सोमवार को आदेश जारी किये कि मोहनलाल सुखाडिया विश्वविध्यालय के सभी संघटक कोलेजों में होने वाले कार्यक्रमों के दौरान आने वाले अतिथियों का स्वागत पुस्तकों और पौधो से किया जायेगा। जानकारी के अनुसार लॉ कॉलेज में अंतिम वर्ष की छात्रा और लॉ कॉलेज की छात्रसंघ उपाध्यक्ष साक्षी पंड्या के सुझाव पर यह निर्णय लिया गया । दरअसल साक्षी ने कुलपति को एक पत्र लिखकर सुझाव दिया था कि अतिथियों के स्वागत में गुलदस्ते और मालाएं देने की बजाय पौधे भेंट किया जाए जिससे पर्यावरण को मदद मिलेगी । ऐसे में कुलपति ने साक्षी के इस सुझाव को पसंद किया और उन्होंने हाथों-हाथ रजिस्ट्रार को आदेश देकर इस सुझाव को और आगे बढ़ाते हुए पुस्तक भी शामिल करने को कहा है। साथ ही विश्वविद्यालय के चारों संगठक महाविद्यालयों को भी समारोह में आने वाले अतिथियों के स्वागत के लिए सिर्फ पुस्तक और पौधे भेंट करने को निर्देशित किया है। यही नहीं इस आदेश के आते ही कई छात्र इसको अमल में भी ले आये, अपने जन्मदिन पर दोस्तों को आमंत्रित कर सामूहिक रूप से पौधा रोपण किया गया। आर्स कोलेज में द्वितीय वर्ष में पढ़ रहे छात्र निशांत ने अपना जन्म दिन केम्पस के गार्डन में अपने दोस्तों के साथ पौधा रोपण कर मनाया। यही नहीं निशांत के मित्र मिनहाज़ खान ने भी जन्मदिन के तोहफे के रूप में निशांत को एक पुस्तक भेंट की। निशांत ने बताया कि पुस्तक और पौधे हमारे जीवन का एक भाग है, पुस्तक सच्चे साथी तो पौधा स्वस्थ जीवन का प्रतिक है।
निशांत के जन्मदिन पर पहुचे छात्र मिनहाज़ खान ने बताया कि विश्वविध्यालय द्वारा उठाया गया यह कदम पर्यावरण संरक्षण में बोहत अहम् कदम है। देखा जाय तो एक पोधा और एक पुस्तक से अच्छा और सच्चा कोई दोस्त नहीं ऐसे में अगर पौधे और पुस्तक से अतिथियों का स्वागत होता है तो फूल मालाओं से कई ज्यादा बढ़ कर सम्मानजनक स्वागत होगा। निशांत की इस पहल में डीन साधना कोठारी प्रोफ़ेसर इशहाक मोहम्मद कयामखानी ने होसला बढ़ाया और छात्र नेता कला महाविद्यालय के अध्यक्ष महेश रोत, पूर्व अध्यक्ष मोहित नायक, जितेश खटिक, और समीर नायक ने सहयोग किया।

हत्यारा शम्भू मानो जेल से चुनाव प्रचार कर रहा है – बहन बता कर अवैध सम्बन्ध रखने वाला हत्यारा राजनितिक और नैतिकता का ज्ञान बाँट रहा है।

1

उदयपुर। जिस हत्यारे शम्भू ने राजसमन्द में बंगाली श्रमिक अफ्राजुल को सिर्फ अपने शौक़ और अपने अवैध सम्बन्ध छिपाने के लिए गेंती से मार कर ज़िंदा जला दिया वह हत्यारा अब जेल से वीडियो वायरल कर रहा है। इजराइल की तरह मुस्लिमों से लड़ने और प्रधानमंत्री मोदी का साथ देने जैसा ज्ञान दे रहा है। मानो एक महान कार्य कर वह जेल गया हो और जेल से अपने प्रवचन का वीडियो बना रहा हो। हालाँकि वीडियो देखने पर लगता है कि पुरे वीडियो में उसने जो कुछ भी कहा है वह उसको किसी ने पहले से लिख कर दिया है। जोधपुर जेल से इस आतंकी हत्यारे ने वीडियो वायरल कर सिर्फ जेल प्रशासन ही नहीं पूरी राज्य की सुरक्षा की धज्जियां उड़ा कर रख दी है।
आतंकी हत्यारे शम्भू नाथ ने जेल से जो वीडियो जारी किया है वह वीडियो कई सवाल खड़े कर रहा है। जेल और राज्य की सुरक्षा पर तो सवाल खड़े कर ही रहा है लेकिन जेल में उसने वीडियो में जो बातें कही दरअसल वह किसी कागज़ पर लिखी हुई स्क्रिप्ट पढ़ी है जिसका राइटर कोई और है। वीडियो में साफ़ दिख रहा है कि या आतंकी हत्यारा किसी और कि लिखी हुई स्क्रिप्ट पढ़ रहा है क्यूँ कि जो बातें उसने वीडियो में कही वह उसकी बुद्धि और समझ के सो कोस दूर है। एक बार तो मानो एसा लग रहा है जैसे वह भाजपा और प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी का प्रचार और हिंदुत्व के लिए उनका साथ देने की बात कर रहा है। देश और देशभक्ति की बातें करते हुए उसको अपने किये हुए पर कोई पछतावा भी नहीं जबकि पुलिस की चार्ज शिट में साबित हो गया है कि जिस लव जिहाद की बात कर उसने बंगाली श्रमिक को जलाया था दरअसल उस लड़की से खुद उसके अवैध सम्बन्ध थे और उसी के उजागर होने के डर से उसने बंगाली श्रमिक की ह्त्या करदी और अपने अवैध संबंधों को लव जिहाद का रूप देकर विडियो वायरल कर दिया।
अब जेल में बजाय पाबंदी के मानो वो चुनाव प्रचारक और महात्मा की भूमिका में आगया हो वीडियों में हत्यारा राजनैतिक और नैतिकता की बातें कर ज्ञान बाँट रहा है।
हत्यारे शंभूनाथ के एक वीडियो ने राजस्थान जेल प्रशासन की बीस करोड़ रुपए की पोल खोलकर रख दी है। दरअसल, शंभूनाथ का यह वीडियो जोधपुर जेल से वायरल होने की बात कही जा रही है। उसमें जेल की सलाखें भी साफ नजर आ रही हैं। एेसे में जेल प्रशासन और यहां लगे जैमर्स पर सवाल खड़े हो गए हैं।
ताजुब की बात तो यहाँ है कि जेल प्रशासन ने सेन्ट्रल जेलों में मोबाइल फोन के इस्तमाल को रोकने के लिए जैमर लगाए है और इसलिए इन्होने बीस करोड़ रूपये खर्च कर दिए है इसके बावजूद जेल से संचालित होने वाले ना तो अपराधियों के कॉल को रोक पा रहे है ना ही सोशल मीडिया की पोस्ट को।
हत्यारे शम्भू ने जो विडियो वायरल किया वह जोशपूर जेल से किया और एसा माना जाता है कि जोधपुर जेल दिल्ली की तिहाड़ जेल के बाद देश की दूसरी सबसे सुरक्षित जेल मानी जाती है।

चेटक ट्रेन के सामने बड़ा हादसा होने से टला।

उदयपुर। हर शाम चलने वाली चेटक ट्रेन के ड्राइवर की वजह से शुक्रवार शाम हादसा होता होता टल गया। राणा प्रताप नगर स्टेशन के कुछ ही दूरी पर ट्रेन के सामने एक वृद्ध अचानक आकर लेट गया। इंजन के ड्राइवर ने तुरंत ट्रेन के ब्रेक मार दिए और वृद्ध की जान बचा ली बाद में वृद्ध के परिजन उसको समझा बुझा कर घर ले गए। झटके से अचानक ट्रेन रुकने से यात्रियों में एक बार अफरा तफरी मच गयी।
जानकारी के अनुसार शुक्रवार शाम को चेटक एक्सप्रेस अपने निर्धारित समय से उदयपुर सिटी स्टेशन से रवाना हुई थी । राणा प्रताप नगर स्टेशन पर रुकने के बाद ट्रेन सुंदरवास तक ही पहुंची थी की एक वृद्ध अचानक आत्महत्या करने का सोच ट्रेन की पटरियों पर आकर लेट गया। चेतक ट्रेन के ड्राइवर ने वृद्ध को इस पटरियों पर सोते हुए देख लिया था। ड्राइवर ने अपनी सूझ बुझ से तुरंत ट्रेन का ब्रेक जोर से लगा दिया और वृद्ध के ठीक आगे आकर ट्रेन रुक गयी। झटके से ट्रेन का रुकना यात्रियों में चिंता का विषय बन गया और एक बार यात्री परेशान हो गए और निचे उतर कर देखने लग गए। मोके पर वृद्ध के परिजन भी पीछे पीछे आगये और उन्होंने वृद्ध को समझा बुझा कर ले गए मोके पर जीआरपी के जवान भी आगये उन्होंने भी वृद्ध को समझा कर घर भेज दिया। इस सारी घटना में ट्रेन १० मीनट लेट हो गयी। इस सारे मामले में रेलवे प्रशासन का कहना है कि कोई वृद्ध परिजनों से झगड़ा कर ट्रेन के आगे आने की कोशिश कर रहा था लेकिन एक टाइम पर ट्रेन रोक दी। इधर राणा जीआरपी थाने में कोई रिपोर्ट तो दर्ज नहीं की गयी लेकिन वृद्ध को समझा कर उसके परिजनों के साथ रवाना कर दिया। घटना का पता भी आज सुबह चला जब ट्रेन के यात्रियों ने घटना का वीडियो कुछ वाह्टसप ग्रुप में शेयर किया।