रसूखदार जमीन खोरों ने कोर्ट के आदेषों को भी किया दरकिनार, बुरहानी नगर में अवैध निर्माण बदस्तूर जारी, बाहुबलियों के आगे नतमस्तक हुए जिम्मेदार .

उदयपुर। चलिए आज आपको फिर लिए चलते है 100 करोड़ के महाजमीन घोटाले की ओर जिस पर कार्रवाई करने की हिम्मत शहर के किसी निजाम में शायद बची नहीं है। जीहां हम बात कर रहे है उदयपुर के बुरहानी नगर की प्लानिंग करने वाले जमीनखोरों की। जिन्होंने वहां की जनता के साथ बहुत बड़ा खिलवाड़ करते हुए एक लाख से ज्यादा स्कवायर फीट जमीन को कागजों से ही गायब करके उस मौके पर आकर बैठ गए जहां की कीमत आज आसमान छू रही है। इतना ही नहीं नगर विकास प्रन्यास की हिदायत और माननीय न्यायालय की रोक के बावजुद यह रसूखदार जमीनखोर इस हिस्से को खुर्दबुर्द करने में लगे हुए हैं जिसे रोकना शायद शहर के सबसे ईमानदार सचिव रामनिवास मेहता के हद में भी नहीं है। शहर का सबसे आगे रहने वाला केबल चेनल उदयपुर न्यूज के मनु राव ने दो वर्ष पूर्व अपने खास कार्यक्रम खबरदार में इसका बुरहानी नगर में हुए इस घोटाले का खुलासा किया था,जिसमें इस नगर के प्लानर्स दिलीप सुराणा और भुपेंद्र बाबेल ने भी अपनी बात रखी थी, लेकिन जो जमीन गायब हुई उसके बारे में पूछने पर उनमे से एक भी सही जवाब नहीं दे पाया। खबर लगाए जाने के बाद थोड़ी बहुत कार्रवाई तो हुई, लेकिन कहते है न जहां बात करोड़ों की हो तो अच्छे अच्छे ई्मानदारों का ईमान भी डोल जाता है यहां की स्थिति को देखते हुए भी कुछ ऐसा ही लग रहा है। क्योंकि इस शहर में न्यायपालिका का डर तो किसी को है ही नहीं।
बुरहानी नगर की 80 फीट रोड़ पर लगे इस बोर्ड को ध्यान से देखिए। इसमें युआईटी सचिव की ओर से साफ कृ साफ दर्शाया गया है कि श्श्ग्राम भुवाणा की आराजी नम्बर 3609 से लेकर 3621 तक की आराजी भूमि कृषि भूमि योजना में है। इसमें किसी प्रकार का निर्माण क्रय विक्रय अवैध है। माननीय न्यायालय में भी प्रकरण लम्बित है। लेकिन यह आदेश यहां पर कोई मानता दिखाई नहीं दे रहा है और इस जमीन पर लगातार निर्माण भी हो रहा है। वहीं 3619 से लेकर 3621 तक की जमीन पर कुल 63 हिस्सेदार हैं। अपने साथ हुए जमीनी धोखे के बाद एक खातेदार ने न्यायालय की शरण भी ली। जिसकी सुनवाई 29 जनवरी को होने वाली पेशी में होनी है तब तक के लिए इन तीनों ही आराजीयों में अदालती स्टे लगा हुआ है और माननीय न्यायालय ने इस स्टे को कायम रखने के लिए बड़गांव तहसीलदार को निर्दशित भी कर रखा है। लेकिन यहां होते निर्माण को देखते हुए तो यही लगता है कि तहसीलदार को भी आंखों पर पट्टी बांध लेेने के लिए ही निर्देशित कर दिया गया होगा। आपको बता दे कि करीब 23 वर्ष पूर्व दिलीप सुराणा, भुपेन्द्र बाबेल सहित चार भुका​रोबारियों ने बुरहानी नगर बसाने की योजना बनाई थी। जिसमें करीब बोहरा समुदाय से जुड़े 300 परिवारों को बसाया जाना था। सभी लोग बोहरा समुदाय के पास पंहुचे जो काफी संभ्रांत भोले और भीरू प्रव्रति के होते हैं। एक मुलाकात के बाद तय हो गया कि यहां पर बुरहानी नगर बसाया जाएगा,क्योंकि षड़यंत्रकर्ताओं ने इस प्लानिंग का नाम ही समुदाय के धर्मगुरू के नाम पर जो रखा था। करीब 36 बीघा जमीन इन भूकारो​बारियों ने समाज की सुविधाओं केलिए जमातखाना, मस्जिद, मदरसा, मुसाफिर खाना, चिकित्सालय, गार्डन आदि बनाने का वादा भी किया। 1986 में बोहरा समुदाय से जुड़े लोगों ने यहां पर जमीन लेना भी शुरू कर दिया लेकिन बाद में एक ऐसा समय आया जब भीरू स्वभाव वाले समाजजनों पर दबाव बनाकर बुरहानी नगर की काफी जमीन पर इन लोगों या इनसे जुड़े बाहूबलियों ने रजिस्ट्रियां करवा ली। बंटवारा नहीं होने के कारण जिसकी जहां मर्जी पड़ी वहां पर काबिज होता गया, लेकिन इस बीच प्लानर्स दिलीप सुराणा और भुपेंद्र बाबेल ने एक सुनियोजित षड़यंत्र के तहत जमातखाना, मुसाफिर खाना, चिकित्सालय, मस्जिद, मदरसा, गार्डन की जगह गायब करते हुए एक बड़ा हिस्सा बुरहानी नगर से जुड़ी 80 फीट पर निकाल दिया और उसके स्वयंभू मालिक बन बैठे। यहां पर रहने वाले मुट्ठीभर लोगों ने आपत्ती भी जताई थी, लेकिन इन रसूखदार बाहूबलियों के आगे किसी की एक न चली और जिस जमीन के उपयोग का अधिकार बुरहानी नगर में रहने वाले हर इंसान का था उस जमीन को इन जमीनखोरों ने ऐसा हड़पा की मुलभूत सुविधाएं ही 36 बीघा जमीन से गायब हो गई।
अब मौजूदा हाल यह है कि बुरहानी नगर में अदालत से मिले स्टे के बावजुद भी रसूखदार जमीनखोर अपना काम बदस्तुर जारी किए हुए है। वैसे सूत्र तो यह भी बताते है कि यहां पर शहर के बहुत बड़े-बड़े अफसरों ने भी यहां जमीन ले रखी है और यह भी एक वजह हो सकती है कि यहां पर कार्रवाई की हिम्मत कोई नहीं जुटा पा रहा हो। उदयपुर पोस्ट और उदयपुर न्यूज चैनल की नजर इस खबर पर लगातार बनी रहेगी और कोशिश यह रहेगी की जो जिम्मेदार अभी अपने बयान देने से बचे है उन जिम्मेदारों के बयानों को भी आपके समक्ष लेकर आ सके। ताकी यह तो साफ हो जाए कि स्टे के बावजुद भी किसके कहने पर यहां निर्माण किया जा रहा है।

भाजपा पार्षद अपने ही सत्ता के बोर्ड से उपेक्षित हो कर कांग्रेसी पार्षद के साथ मिलकर वार्ड समस्याओं का ज्ञापन देने पहुचां।

उदयपुर। इनदिनों शहर भाजपा बड़ी अजीब स्थिति से गुजर रही है। युवा मोर्चा अध्यक्ष का इस्तीफा फिर १५० कार्यकर्ताओं का कांग्रेस में सम्मिलित होना और अब एक भाजपा का पार्षद ने कांग्रेस के पार्षद के साथ मिल कर ज्ञापन देना पड़ा। वजह थी कि अपनी ही पार्टी के बोर्ड में सुनवाई नहीं हो रही थी।
वार्ड सात के भाजपा समर्थित पार्षद बाबूलाल कटारा ने वार्ड छह के कांग्रेस समर्थित पार्षद से मदद मांगी। अपनी मुलभूत सुविधाओं को पाने के लिए वार्ड 7 की जनता भाजपा पार्षद बाबूलाल कटारा और कांग्रेस पार्षद मोहसिन खान के साथ जिला कलेक्टर की चैखट पर गई है। वार्ड की जनता की माने तो यहां की समस्याओं से बार-बार अवगत कराने के बाद भी निगम और नगर विकास प्रन्यास द्वारा कोई भी विकास काम क्षेत्र में नहीं करवाया जा रहा है। पूर्व में जो पार्षद रहे हैं उन्होंने भी कुछ नहीं करवाया और वर्तमान पार्षद अपनी ही पार्टी की गंदी राजनीति के चलते विकास कार्य करवा नहीं पा रहे है। जनता की माने तो दोनो बार वार्ड सात में भाजपा का ही पार्शद काबिज रहा है, लेकिन काम के नाम पर ज्यादा कुछ नहीं करवा पाया है। इस वजह से आमजन को खासी मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है। ज्ञापन के दौरान भाजपा के पार्शद बाबूलाल के साथ कांग्रेस के पार्शद मोहसीन खान भी खड़े रहे है और अब जिला प्रषासन से समस्याओं का निराकरण करने की मांग की है। गौरतलब है कि कुछ दिनों पहले जिला कलेक्टर बिश्णुचरण मलिक की रात्रि चैपाल में वार्ड 7 की समस्याओं को लेकर लिखित शिकायत भी की गई थी, लेकिन सिर्फ आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला।
उदयपुर शहर की जनता ने पहली बार पूरे मन से नगर निगम चुनावों में भाजपा को वोट दिए। नतीजा यह रहा कि पचपन से 49 वार्डों पर भाजपा का कब्जा हुआ। विपक्ष तो यहां पर रहा ही नहीं। कांग्रेस के तीन के अलावा तीन और निर्दलीय पार्शदों ने जैसे – तैसे जीत हासिल की। लेकिन इतनी बड़ी जम्बों जीत के बाद न तो वार्ड की जनता खुश है न ही उनके द्वारा चुने गए पार्शद। क्योंकि इस निगम पर सिर्फ एक ही षक्स की बात मानी जाती है। वह चाहे तो जनता खुश होगी और न चाहे तो कोई कुछ कर भी नहीं सकता। पिछले दिनों कुछ समितिध्यक्षों ने काम नहीं होने के कारण इस्तीफे भी दे दिए थे, लेकिन भाजपा के भाई साहब ने जयपुर में अपनी महत्वपूर्ण मीटिंग को छोड़कर यहां आना उचित समझा और सभी को ऐसी फटकार लगाई की अच्छे – अच्छे हिम्मतवालों ने भी हार मानना ही उचित समझा। लेकिन इन दिनों वार्ड 7 के पार्शद के साथ तो गजब ही खेल हो रहा है और यही वजह रही कि भाजपा के पार्शद बाबूलाल को अपने नजदीक के पार्शद मोहसीन खान जो की कांग्रेस से हैं मदद मांगनी पड़ी। भाजपा के एक पार्शद को अपनो से ही परेषान होकर विपक्षी से मदद मांगनी पड़ रही है। इससे तो यह साफ होता है कि स्मार्ट सिटी पर काबिज भारतीय जनता पार्टी के नुमाइंदे अपने ही वार्डों का काम नहीं करवा पा रहे हैं। फिर तो शहर कागजों में ही स्मार्ट होगा।

अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर विक्रम को दूसरा एवं राष्ट्रीय स्तर पर चैथा स्थान

उदयपुर पोस्ट। उपली ओड़न स्थित श्रीनाथजी इन्स्टीटयूट आॅफ फार्मेसी के छात्र विक्रम चैधरी को इण्डियन फार्मास्यूटिकल कांग्रेस एसोसिएषन के 69वें राष्ट्रीय काॅन्फ्रेन्स मे बेस्ट ओरल प्रजेन्टेषन के लिए चैथा स्थान प्राप्त हुआ।
संस्थान के पीआरओ धर्मेष पालीवाल ने बताया कि आईपीसीए की ओर से चण्डीगढ़ में आयोजित सालाना काॅन्फ्रेन्स मे विक्रम चैघरी ने संस्थान के व्याख्याता शौर्य प्रताप सिंह के निर्देषन में ”डेकिंग स्टडी आॅन टू साइनोप्राइडेड” विषय पर अपने पत्र का वाचन किया जिस पर उन्हे राष्ट्रीय स्तर पर बेस्ट ओरल प्रजेन्टेषन चैथा स्थान मिला। इस पर उन्हे बीस हजार रू. की राषि एवं प्रषस्ति पत्र से सम्मानित किया। साथ ही उन्होने बताया कि छात्र विक्रम चैधरी ने ही आॅलवेज फोर द फार्मेसी प्राफेषन एण्ड प्रोफेषनल्स, आन्ध्रप्रदेष स्टेट ब्रान्च के तृतीय इण्डो आॅस्ट्रेलियन काॅन्फ्रेन्स आॅन फार्मास्यूटिकल टेक्नोलोजी पास्ट, प्रजेन्ट एण्ड फ्यूचर परस्पेक्टिव विषय आयोजित अन्तर्राष्ट्रीय स्तर की काॅन्फ्रेन्स में अपने पोस्टर प्रजेन्टेषन के लिए उन्हे दूसरा स्थान प्राप्त किया।
छात्रं की इस उपलब्धि पर संस्थान के प्रबन्ध निदेषक अषोक पारीख, महाविद्यालय प्राचार्य डाॅ. राघवेन्द्र सिह भदौरिया ने हर्ष व्यक्त कर उज्जवल भविष्य की कामना की।

शिक्षण संस्थाओं में हुआ आज ‘‘बेटियां अनमोल है’’ कार्यक्रम का भव्य आयोजन .

उदयपुर, । जिला व ब्लाॅक स्तर पर बुधवार को राष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर राज्य पीसीपीएनडीटी प्रकोष्ठ द्वारा डाटर्स आर प्रीसियस अभियान के अंतर्गत डेप संवाद -2 का महा-आयोजन कर जागरुकता उत्सव के रूप में मनाया गया। इस दिन जिले की लगभग 180 से अधिक शैक्षणिक संस्थानों में उदयपुर जिले के इतिहास में पहली बार प्रशिक्षित डेप रक्षकों द्वारा एक दिन-एक साथ-एक समय में लगभग 80 हजार से अधिक युवाओं को बेटी बचाओ का संदेश वृहद्व स्तर पर दिया गया। इस दौरान सभी शिक्षण संस्थाओं में प्रातः 11ः30 बजे एक साथ-एक समय सभी प्रतिभागियों द्वारा राष्ट्रगान जन-गण मन गाया गया। कार्यक्रम में बच्चों को कन्या भू्रण हत्या पर बनाई गई कई मार्मिक चलचित्रा दिखाए गए, जिसे देखकर कई छात्राओं की आंखें छलक उठी।
जिला स्तरीय कार्यक्रम के दौरान संयुक्त निदेषक बैरवा ने कहा कि बेटियां इस जहा की जहान है बेटियों का महत्व तो ऐतिहासिक है जिसे हमें भुलना नहीं चाहिए। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डाॅ. संजीव टांक ने ने कहा कि बेटियों के बिना इस सृष्टि की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। इसलिए हम सब की जिम्मेदारी बनती हैं कि हमें बेटियों को हर हाल में बचाना हैं तथा जितनी खुशी लडके होने पर करते हैं उतनी ही खुशी बेटी होने पर भी करे। एडिषिनल सीएमएुचओ डा रागिनि अग्रवाल, आरसीएचओ डा अषोक आदित्य ने स्कूलों में बेटियों के महत्व व भ्रण हत्या निशेद है के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि बेटियां दो परिवारों का मान बढाती हैं तथा जिस घर की महिलाऐं शिक्षित होगीं वह परिवार स्वतः ही शिक्षित हो जाएगा। यदि हमारी बेटियों को आगे बढने का मौका मिले, तो बेटियांें ने भी अपने गांव, राज्य, देश और माता पिता का नाम हर क्षेत्र में रोशन किया है। भारत में हजारों-लाखों ऐसी बेटियां है, जिनकी पहचान किसी की मोहताज नहीं है। उन्होंने बताया कि अब बेटियां माता पिता, समाज पर बोझ नहीं है। लोगों की इस सोच में बदलावा आया है, लेकिन फिर भी बेटियों का कोख में कत्ल किया जा रहा हैं। कन्या भू्रण हत्या व अवैध लिंग परीक्षण पर रोक लगाने के लिए सभी को जागरूक होना पडेगा। उन्होंने बताया कि गर्भ में कन्या भू्रण की हत्याएं होते रहने से भविष्य में इसका दुष्प्रभाव समाज के हर वर्ग को को भुगतना पड़ेगा। हमें लोगों की सोच को बदलना होगा, जो बेटों की चाह में बेटियों का तिरस्कार करते हैं। हमें लोगों को बताना होगा कि बेटियां एक नहीं, दो परिवारों को रोशन करती हैं। इसके लिए कार्यक्रम के तहत संचालित मुखबिर की सूचना के आधार पर किये जा रहे डिकाॅय आॅपरेशन में युवा महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
समारोह के अंत में सभी डेप रक्षकों ने जिले के हजारों विद्यार्थियों को जीवन में कभी भी भू्रण लिंग परीक्षण नहीं कराने की शपथ दिलाई। उन्होंने बताया कि भू्रण लिंग जांच जैसे घिनौने कार्य में लिप्त चिकित्सक व दलालों की सूचना टोल फ्री नंबर 104 अथवा 108 टोल फ्री नम्बरों पर देनी चाहिए। उन्होंने मुखबिर योजना के तहत दी जाने वाले 2.5 लाख रुपए की राशि के बारे में जानकारी दी।
जिले के डेप रक्षकों ने निभाई जिम्मेदारी- जिले में बेटियां अनमोल है कार्यक्रम के दौरान जिले से बनाए गए डेप रक्षकों में जिला स्तर से डा अलका, डा षैलेन्द्रा, डा आकांषा, वैभव सरोहा, गोवर्धनसिंह राव, नीतीषा सैडिक, मनीषा भटनागर, अनुप साहनी समेत अरबन पीएचएम, ब्लाक स्तरीय अधिकारी व कार्मिक आदि ने बेटी बचाओं और भू्रण लिंग जांच नही कराने के संदेश को छात्रा-छात्राओं तक पहुंचाया।

पूरा उदयपुर जुड़ा ‘महा वस्त्र दान’ अभियान से

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post. एक पिक्चर आई थी मनोज कुमार साहब की, “रोटी, कपड़ा और मकान”। बस इसका टाइटल ही काफ़ी है ये बताने को कि हमारे लिए कपड़ों का कितना महत्व है! और इस महत्व को हमारे शहर के लोगो ने बखूबी समझा है। ‘वस्त्र दान’ सप्ताह शुरू हुए अभी एक दिन ही हुआ है लेकिन शहर के लोगो की जागरूकता इस क़दर है कि बढ़-चढ़कर परिवार इस ‘महादान’ में भाग ले रहे है।
21 जनवरी से शुरू हुए ‘वस्त्र दान सप्ताह’ लक्ष्यराज सिंह जी मेवाड़ के हाथो शुरू हुआ। वस्त्र इंसानों की मूलभूत जरूरतों में से एक है, इसी को ध्यान में रखते हुए नए पुराने ​​कपड़ो  को एकत्रित करके ज़रूरतमंदो तक पहुंचाया जाए व फटे पुराने कपड़ो को रीसायकल प्रोसेस के ज़रिए फिर से पहनने लायक बनाया जाए, इसी उद्देश्य को ध्यान में रखकर पूरी टीम इस काम में लगी हुई है। लक्ष्यराज सिंह जी मेवाड़ की इस मुहीम में देशभर के 1000 से ज्यादा वालंटियर्स जुड़ चुके है जिसमे उदयपुर एवं आसपास के क्षेत्र से 635, उदयपुर के बाहर से 268, मेलबोर्न से 18, स्वीडन से 15, अमरीका से 27 और अन्य देशों से 250+ वालंटियर्स ने अपना रजिस्ट्रेशन करवाया है।

इस अभियान के तहत शहर में 60 अलग-अलग ड्राप पॉइंट्स बनाये गए है जहाँ शहरवासी वस्त्रदान कर रहे है, अगर आपको भी इस मुहिम में भाग लेना है तो इन ड्राप पॉन्ट्स पर आकर आप वस्त्र दान जैसे नेक काम में भाग ले सकते है।
26 जनवरी 2018 को गणतंत्र दिवस के ​अवसर पर वालंटियर्स शहरभर में घर-घर जाकर लोगो को वस्त्रदान करने के लिए प्रेरित भी करेंगे।​
‘वस्त्र दान’ के सबसे पहले योगदान का श्रेय इंडियन आर्मी के 30 इन्फेंट्री ब्रिगेड के JCO’s, OR’s और उनके परिवारों को जाता है। इनके अलावा अब तक 250 परिवार भाग ले चुके है साथ ही साथ इस मुहिम में 30 से ज्यादा स्कूल्स और हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड, फ्यूज़न जैसी कंपनियां भी जुड़ चुकी है, जो एक तरह से इसमें लगे वालंटियर्स की मेहनत को और हौसला मिलने जैसा है।
ये पूरी तरह से ऐच्छिक होने के बावजूद इस तरह शहर को इस काम के लिए जुड़ता देख पूरी टीम बहुत खुश है और उन्हें लगता है कि उनकी मेहनत रंग ला रही है। टीम का कहना है कि ये सब ज़रूरतमंदों के लिए किया जा रहा है ताकि वो कपड़े पहन सके, उनके तन को ढका जा सके। उन्हें मानव की तीन मूलभूत सुविधाओं में से एक ‘कपड़ा’ मिल सके।
लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ पूरे उदयपुर से निवेदन भी कर रहे है कि ज्यादा से ज्यादा इस मुहिम में भाग लेंवे और ज़रुरतमंदो के लिए वस्त्र दान करें।
​इस अभियान के बारे में अधिक जानकारी के लिए  mahavastradaan.org पर जा सकते है एवं जुड़ने के लिए इस नंबर पर मिस कॉल करे – 8505999922

“Philosopher’s Wool” or “White Snow”.. Zinc… always and forever…

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While Zinc was unknown in Europe until the end of 16th century, India had been producing Zinc at a large scale since the 12thcentury onwards. The mines in Rajasthan have given an evidence of zinc production since 6th century BC.  Zinc was distinctly recognized as a metal under the designation of “Yasada” or “Jasada” (Yashad) in the medical dictionary written in the year 1374.

 Alchemists burned Zinc in air to form Zinc Oxide, also called, “philosopher’s wool” or “white snow”. The Charaka Samhita, which was written between 300 and 500 AD, mentions a metal which, when oxidized, produces pushpanjan, which was thought to be Zinc Oxide. Zinc was distinctly recognized as a metal under the designation of Yasada or Jasada (Yashad) in the medical lexicon (Dictionary) which was written in the year 1374.

Smelting and extraction of impure zinc by reducing calamine with wool and other organic substances was accomplished in the 13th century in India.

The Chinese did not learn of the technique until the 17th century.

 The Zawar mines of Rajasthan (District Udaipur) are one of the oldest evidence of Zinc mines that date back to the 9th century. These mines have been active since the Mauryan period. While Zinc was unknown in Europe until the end of 16th century, it was being produced at a large scale in India since 12th century. The smelting of metallic zinc appears to have begun around the 12th century in India.

Hindustan Zinc is India’s only and world’s leading Zinc-Lead-Silver Producer..

Pavan Kaushik

Article by- Pavan Kaushik, Head – Corporate Communication, Hindustan Zinc

उदयपुर शहर के 150 भाजपा कार्यकर्ता पार्टी छोड़ कांग्रेस के साथ हुए – भाजपा शहर जिलाध्यक्ष को नहीं है इसकी जानकारी।

उदयपुर। मेवाड़ के कद्दावर नेता राजस्थान के गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया के गृहनगर और उनके वार्ड व अन्य दो वार्ड से भाजपा के कार्यकर्ता कांग्रेस में शामिल हो गए। कांग्रेस युवा नेता विवेक कटारा के जन्म दिन पर करीब 150 भाजपा कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस में शामिल हो कर उन्हें जन्म दिन का तोहफा दिया। भाजपा कार्यकर्ताओं का मानना था कि शहर भाजपा में युवा नेतृत्व की कमी थी इसी वजह से वे कांग्रेस के युवा नेता के साथ आये है। इस सारे मामले में भाजपा के शहर जिलाध्यक्ष ने अनभिज्ञता ज़ाहिर की है।
दो दिन पहले कांग्रेस के नेता विवेक कटारा का जन्म दिन था। कटारा के जन्म दिन पर ही पूर्व महापौर रजनी डांगी के मकान से महज ५० मीटर दूर पर स्थित गवरी चैक पर श्री कटारा का जन्मदिन मनाया गया, इस दौरान करीब 150 भाजपाईयों ने कटारा को मालाएं पहनाकर कांग्रेस का दामन थाम लिया। भाजपा के वार्ड अध्यक्ष करण गंभीर, गवरी चैक मित्र मंडल के ओम मेनारिया, दिनेष आचार्य, राजीव षर्मा, प्रशांत शर्मा, संजयपुरी गोस्वामी, विकास लोधा जैसे दिग्गज कार्यकर्ताओं के नेतृत्व में 150 भाजपाईयों ने कोंग्रेस जॉइन करके सभी को चैंका दिया है। भाजपा के वार्ड अध्यक्ष का पार्टी छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम लेना साबित करता है कि कहीं न कहीं कार्यकर्ताओं का मनोबल अब टूटता जा रहा है। कार्यकर्ताओं की माने तो पहले विधानसभा फिर लोकसभा और अंत मे नगर निगम चुनावों में भाजपा को भारी मतों से जिताने के बावजूद भी क्षेत्र में भाजपा का नेतृत्व ढंग से काम नहीं कर पाया यहां पर पार्टी के ही कार्यकर्ताओं की नहीं सुनी जाती तो आम आदमी की बिसात। जब पदाधिकारी ही त्याग पत्र दे रहे हैं तो आम कार्य कर्ता की कौन सुनेगा। वैसे भी उदयपुर में भाजपा के दो धड़े हो गए है और दोनों में शीत युद्ध चल रहा है जिसके थमने के दूर -दूर तक कोई आसार दिखाई नहीं देते। वैसे सूचना मिली है कि भाजपा को त्यागने वाले कार्यकर्ताओं में ज्यादातर पूर्व महापौर रजनी डांगी और गृहमंत्री के वार्ड में रहने वाले थे।
भाजपा कार्यकर्ताओं का पार्टी छोड़ के कांग्रेस में जाने पर भाजपा के शहर जिलाध्यक्ष दिनेश भट्ट ने इस मामले में अनभिज्ञता ज़ाहिर की है। दिनेश भट्ट का कहना है कि मेरी सूचना में एसा कोई मामला नहीं आया की कोई भाजपा का कार्यकर्ता पद पर रहा हो और पार्टी छोड़ कर गया हो। कोई आम कर्ता गया होगा तो दिखवाते है बात करेगें। ताज्जुब की बात है कि 150 कार्यकर्ता पार्टी छोड़ कर अन्य पार्टी में जा मिले और जिलाध्यक्ष को भनक ही नहीं। खेर एसा हो नहीं सकता क्यूँ कि सूत्रों की माने तो भाजपा के बड़े पदाधिकारी इन कार्यकर्ताओं से संपर्क साधने की कोशिश कर रहे है और घरों के चक्कर काट रहे है। मुख्य कार्यकर्ता जो पदों पर थे वह भूमिगत हो चुके है।
वैसे कार्यकर्ताओं के भाजपा से उठते विष्वास के बाद तो यही लगता है कि भाई साहब का विजय रथ कहीं इस बार रूक न जाए। क्योंकि युवा मोर्चा के पदाधिकारी तो पहले ही अपने कार्यकर्ता को पुलिसकर्मी द्वारा ‘थप्पड़’ मारे जाने का इंसाफ अभी तक नहीं दिला पाए है वहीं दुसरी तरफ पार्टी के कार्यकर्ताओं का कांग्रेस में जाना भाजपा के लिए तो नुकसानदेह होगा ही।
इधर कांग्रेस के नेता विवेक कटारा का कहना है कि करीब 150 भाजपा के कार्यकर्ता कांग्रेस में शामिल हें है। शामिल हुए कार्यकर्ताओं का कहना था कि भाजपा में युवा नेतृत्व की कमी है और युवाओं को तरजीह भी नहीं दी जाती इसी वजह से आज वह कांग्रेस के युवा नेता के साथ है।

दावोस में शाहरुख खान को दिया गया क्रिस्टल अवॉर्ड, ‘नमस्कार’ और ‘जय हिंद’ कहकर खत्म की स्पीच

बॉलीवुड एक्टर शाहरुख खान को सोमवार शाम दावोस में हो रहे 48वें वर्ल्ड इकॉनोमिकल फोरम(WEF) में 24वें क्रिस्टल अवॉर्ड से नवाजा गया। उन्हें यह अवॉर्ड देश में महिलाओं और बच्चों के हक में कैम्पेन चलाने के लिए दिया गया है। एक्ट्रेस-डायरेक्टर केट ब्लैंचेट और सिंगर एल्टन जॉन को भी इस समिट में अवॉर्ड दिया गया।

‘नमस्कार’ और ‘जय हिंद’ कहकर खत्म की स्पीच

– न्यूज एजेंसी के मुताबिक, इस मौके पर शाहरुख ने कहा, “मैं वाकई दिल से इस अवॉर्ड के लिए शुक्रगुजार हूं।” इस थैकिंग स्पीच को उन्होंने ‘नमस्कार’ और ‘जय हिंद’ कहकर खत्म किया।

क्यों दिया गया शाहरुख को ये अवॉर्ड?

– वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम समिट में सोशल वर्क्स के लिए किए जाने वाले कॉन्ट्रीब्यूशन के लिए ये अवाॅर्ड दिया जाता है।

ञ बता दें शाहरुख मीर फाउंडेशन के फाउंडर हैं, जो एसिड अटैक विक्टिम को सपोर्ट करती है। साथ ही एसिड अटैक में गंभीर तौर पर जल चुकी महिलाओं की सर्जरी और मेडिकल ट्रीटमेंट समेत कानूनी मदद, अपने पैरों पर खड़े होने के लिए प्रोफेशनल ट्रेनिंग देने, रिहेबिलिटेशन में भी मदद करती है। इस फाउंडेशन का नाम शाहरुख के पिता मीर ताज मोहम्मद खान के नाम पर रखा गया है और ये एक नॉन प्रॉफिटेबल ऑर्गनाइजेशन है।

केट ब्लैंचेट और सिंगर एल्टन जॉन को क्यों मिला ये अवॉर्ड?

– दुनिया के बेहतरीन सोलो म्यूजिक परफॉर्मर में शामिल ब्रिटिश म्यूजिशियन एल्टन जॉन के 25 करोड़ से ज्यादा रिकॉर्ड सेल हो चुके हैं। पिछले 50 सालों के करियर में वे 35 गोल्ड और 25 प्लेटिनम एलबल जारी कर चुके हैं।

– वहीं ऑस्ट्रेलिया की एक्ट्रेस केट ब्लैंचेट UNHCR की ग्लोबल गुडविल एम्बेस्डर हैं और शरणार्थी (रिफ्यूजी) के लिए काम कर रही हैं।

इससे पहले इन भारतीयों को मिल चुका है ये अवॉर्ड

इससे पहले भारत से अमिताभ बच्चन, एआर रहमान, शबाना आजमी और अमजद अली खान क्रिस्टल अवॉर्ड जीत चुके हैं।

क्या हैं वर्ल्ड इकॉनोमिकल फोरम

– बता दें WEF चार दिन चलेगा। इसे स्विट्जरलैंड के स्कीइंग रिजॉर्ट में ऑर्गनाइज किया गया है। WEF में इस बार सबसे ज्यादा 130 देश हिस्सा ले रहे हैं। समिट सोमवार शाम से शुरू हो चुका है। मीटिंग की थीम क्रिएटिंग अ शेयर्ड फ्यूचर इन ए फ्रैक्चर्ड वर्ल्ड रखी गई है।

आज मोदी देंगे ओपनिंग स्पीच

– समिट में मोदी मंगलवार को ओपनिंग स्पीच देंगे। माना जा रहा है कि इस दौरान पीएम दुनिया के सामने भारत की ओपन इकोनॉमी का नजरिया पेश करेंगे। इसके अलावा और ग्लोबल इकोनॉमी और भारत में इन्वेस्टमेंट के मामले में भी चर्चा कर सकते हैं।

– मोदी दुनिया के टॉप सीईओज के लिए डिनर भी होस्त करेंगे। मोदी स्विस पीएम एलन बर्सेट से भी मुलाकात करेंगे। पीएम के साथ अरुण जेटली, सुरेश प्रभु, पीयूष गोयल, धर्मेंद्र प्रधान, एमजे. अकबर और जितेंद्र सिंह भी दावोस जा रहे हैं।

राजस्थान सरकार की पिटीशंस सुप्रीमकोर्ट ने की खारिज – पद्मावत होगी रिलीज़

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पोस्ट न्यूज़ . पद्मावत फिल्म पर विवाद ज्यों का त्यों कायम है . सुप्रीम कोर्ट ने साफ़ कह दिया कि पद्मावत फिल्म के रिलीज़ होने के निर्देश पहले ही दे चुके है और पुरे देश में फिल्म रिलीज़ होगी . इसके साथ ही कोर्ट ने फिल्म की रिलीज पर रोक हटाने के खिलाफ दायर की गईं मध्य प्रदेश और राजस्थान सरकार की पिटीशंस खारिज कर दीं। गुरुवार को कोर्ट ने गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा में फिल्म की रिलीज न किए जाने के नोटिफिकेशन पर रोक लगा दी थी। उधर, करणी सेना इस फिल्म को देखने को तैयार हो गई है। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट और सेंसर बोर्ड से हरी झंडी मिलने के बाद पद्मावत 25 तारीख को रिलीज होगी। इसके साथ ही करनी सेना व् अन्य राजपूत संगठन का विरोध भी बरकरार है . करनी सेना ने 25 को जनता कर्फ्यू का एलान किया है साथ ही सोमवार को करनी सेना के लोकेन्द्र singh कालवी ने कहा था कि अगर संजय लीला भंसाली चाहे तो हम फिल्म देखने को तय्यार है. लेकिन अभी तक संजय लीला भंसाली की तरफ से कोई सन्देश नहीं आया है जबकि पूर्व में लीला भंसाली कुछ लोगों को फिल्म दिखा चुके है जिसमे उदयपुर के पूर्व राज घराने के अरविन्द सिंह मेवाड़ भी थे जिन्होंने पद्मावत फिल्म को रिलीज़ नहीं करने की सिफारिश भी की हाई .

राजस्थान सरकार की ओर से पेश हुए एडीशनल सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, “हम यह नहीं कह रहे हैं कि हमें फिल्म बैन करने की इजाजत दी जाए, बल्कि हम सुप्रीम कोर्ट के पहले दिए गए ऑर्डर में कुछ सुधार चाहते हैं।”

– हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने अपने ऑर्डर में सुधार करने से इनकार कर दिया। साथ ही राज्यों सरकारों की ओर से दायर की गईं पिटीशंस खारिज कर दीं।

– कोर्ट ने कहा कि फिल्म की रिलीज के दौरान कानून-व्यवस्था बनी रहे यह राज्यों सरकारों को तय करना चाहिए।

अब्दुल कादिर है रियल ज़िन्दगी के “पेडमेन”

पोस्ट न्यूज़। अक्षय कुमार की फिल्म पेडमेन आने वाले २-३ हफ्तों में सिनेमा घरों में रिलीज़ होगी। लेकिन राजस्थान के उदयपुर शहर में अब्दुल कादिर खान असल ज़िन्दगी का पेडमेन है, जिसने अपने पांच साल के अथक प्रयासों के बाद सेनेटरी नेपकिन का बोहत कम दाम में निर्माण करने वाली मशीन को बना दिया। इस मशीन से बनने वाली नेपकिन का फायदा उन गरीब महिलाओं को पहुच रहा है जो बाजारों में उपलब्ध मंहगी सेनेटरी नेपकिन खरीदने में असमर्थ है।
उदयपुर निवासी अब्दुल कादिर खान एक ऐसे नवयुवक है जिन्होंने समाज में रहने वाली उस गरीब तबके कि महिलाओं के बारे में सोचा जो बाज़ारों से महगी सेनेटरी नेपकिन खरीदने में असमर्थ है। इसी वजह से इन गरीब महिलाओं को अक्सर कई इन्फेक्शन की बीमारियों से गुजरना पड़ता है। अब्दुल कादिर का कहना है कि महिला चाहे अमीर हो या गरीब सेनेटरी नेपकिन हर एक महिला की जरूरत है। बाज़ार में मिलने वाली महगे नेपकिन तक सिर्फ पैसे वाली महिलाओं की ही पहुच है। गरीब महिलाएं ख़ास कर गाँव की महिलाएं आज भी पुराने गंदे कपड़ों का इस्तमाल करती है जिसकी वजह से उन्हें कई तरह के इन्फेक्शन होते है।
अब्दुल कादिर ने समाज की इस परेशानी को समझते हुए एक एसी मशीन को इजाद किया जो मात्र 90 पैसे में एक सेनेटरी पेड को बना देती है। इस मशीन की ख़ास बात कि इसको चलाना इतना आसान है कि कोई गाँव की अनपढ़ महिला भी इसको आराम से चला सकती है।
उदयपुर शहर के युवा इंजिनियर अब्दुल कादिर खांन पुत्र अब्दुल रऊफ ने एक ऐसी सैनेटरी नेपाकिन निर्माण की मशीनरी का निर्माण किया है जो कीमत में दुनिया में सबसे कम है।

पेशे से ‘‘मैकेनिकल इंजिनियर’’ अब्दुल कादिर खांन का यह भी दावा है कि उनके द्वारा बनाये गये सैनेटरी नेपाकिन की कीमत ’90’ पैसे भी कम है। और मशीनरी इकाई की कीमत ‘एक लाख’ रूपये है।

सैमी आॅटोमेटिक सिस्अम पर आधारित है पूरा प्लांट
प्लांट में उपस्थित सारी मशीनरी सैमी आॅटोमेटिक सिस्टम पर आधारित है और उन मशीनरी को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि कोई भी महिला जिसने किसी भी तरह की कोई मशीन नहीं चलाई है वह भी इसे बड़ी ही आसानी से चला सकती है और उत्पाद बना सकती है।
अब्दुल का यह भी दावा है कि सारी मशीनरी को चलाना एक सिलाई मशीन चलाने से भी ज्यादा आसान है।

सब से कम कीमत का सैनेटारी पैड बनाने के लिए अब्दुल लगभग ‘‘5 वर्ष से अथक प्रयास कर रहे हैं। इस विषय में उन्होंने अपना कीमती समय एवं अपनी सैलेरी तक लगा दी। पिछले तीन वर्षाें में जो भी वह अपनी जाॅब से कमाते हैं वह सारा कुछ इस विषय में अध्ययन एवं खोज में लगा देते ।
इस पूर सफर में अब्दुल को अपने परिवार का पूरा सहयोग भी मिला और उन्होंने इसी के अन्तर्गत पूरी मशीनरी इकाई का नाम अपनी माता के नाम से ‘‘शहनाज़ इंटरप्राइज रखा।
अब्दुल चाहते है की वह हर-एक महिला जिसको इस प्रोडक्ट की जरूरत होती है उन तक इसको पहुंचाएं और कम से कम कीमत में उपलब्ध कराएं।
उनका कहना यह है कि आज जो भी मार्केट में प्रोडक्ट चलन में है वह बहुत ही मंहगे है और वह हर एक महिला की पहुंच से परे है। आज के इस आधुनिक युग में जब भारत इतनी तरक्की कर रहा है। वहंा भारत की बहुत सी ग्रामीण महिलाएं आज भी कपडे का उपयोग करती हैं। जो कि उनके स्वास्थ्य के लिए बहुत ही हानिकारक है जो वह समझ भी नहीं सकती हैं
आज इसलिए आज के दौर में अब्दुुल अपने प्रयासों से यह भ्रांतियां दूर करने में लगे हुए हैं।
अब्दुल लगातार अपने प्रयासों से गांवो में सैनेटरी नैपकिन बनाने की इकाईयां को लगा रहे हैं। जहां पर महिलाएं स्वयं अपने हाथों से सारी मशीनरी को चलाती हैं और उत्पाद बनाती हैं। यह उत्पाद पैक कर पूरे गांव में अलग-अलग स्थानों से वितरीत किया एवं बेचा जाता है। जिससे गांवो की महिलाओं को आजीविका मिलती है एवं जो लोग सैनेटरी नैपकिन सिर्फ अधिक कीमतों की वजह से नहीं उपयोग करते थे उनको कम कीमत में उत्पाद मिल जाता है।
अब्दुल कादिर खांन का एक युवा स्टार्टअप इंटरप्रिन्योर है। उन्होंने अपनी कंपनी स्टार्ट की है। जिसका नाम शहनाज इंटरप्राइज है। जिसके अंतर्गत वह अलग-अलग सैनेटरी नेपकिन बनाने के मशीन सप्लाई करते हैं। वह एक लाख रूपये से 10 लाख रूपये तक का प्लांट उपलब्ध कराते हैं। जिसके अंतर्गत मशीनरी इंस्टोलेशन, महिलाओं को बनाने की टेªनिंग एवं मार्केटिंग स्किल प्रशिक्षण दिया जाता है। जिससे महिलाएं अपने पैरों पर खडी हो सके और आत्मनिर्भर बन सके।