And We Thought Zinc is ONLY for GALVANIZATION

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Zinc is an essential micronutrient in the body and a component of many complex structures in the body including enzymes and proteins. The link between Zinc and memory is well studied especially because Zinc deficiency can cause MEMORY LOSS. In fact, Zinc is the only metal to appear in all classes of enzymes. Zinc supplements have also been proven to speed up healing after an injury, stimulate the sense of smell and promote the activities of over 100 enzymes in the body.

The human body usually contains 2 – 4 gm of Zinc at any time. The recommended daily intake value of Zinc is 8 mg/day for women and 11 mg/day for men. This quantity is widely distributed and mostly found in the brain, liver, kidney, muscle and bone but highly concentrated in the prostate and the eyes. The semen is another rich site of Zinc and the mineral is known to contribute to the growth of reproductive organs.  In the brain, Zinc is held in the glutamatergic pathway and its chief function is to control excitability. It contributes to learning.  However, high levels of Zinc in the brain can be neurotoxic. Therefore, the central nervous system closely regulates the amount of Zinc it holds.

Once absorbed into the blood, Zinc is bound to the proteins, albumin and transferrin.

Referring to the soil, the Zinc contents of plants depend on the amount of Zinc in the soils in which they are grown. Where the soil is rich in Zinc, the best plant dietary sources of Zincinclude the seeds of alfalfa, sesame, sunflower, poppy, pumpkin, celery and mustard; wheat germ and bran; as well as beans, nuts, whole grains, blackcurrant and almonds.  Other sources of Zinc include supplements and fortified foods.

Topical Zinc preparations are used to protect against sunburn, windburn and diaper rash. Because Zinc ions have antimicrobial effects, Zinc Lactate is used in toothpastes and Zinc Pyrithione is an ingredient of shampoos.

Although Zinc deficiency is largely uncommon in the developed world, it affects about 2 billion people worldwide.

Signs of Zinc deficiency include impaired growth, impaired immune system, loss of appetite, diarrhoea, impotence, hair loss, soft tissue lesions and cognitive decline.

Don’t be surprised, Zinc deficiency also affects your Memory – How !!!

Over the years, it has been shown that some people with memory impairment do have Zincdeficiency.  In a study done on mice by researchers from Duke University Medical Centre and Massachusetts Institute of Technology, the role of Zinc in the brain has been highlighted.

Zinc is stored and released in the brain from nerve cells that are also responsible for releasing the neurotransmitter, glutamate. The released Zinc can act on glutamate receptors and other voltage-gated ion channels in the brain. It can also modulate synapses (a property known as synaptic plasticity). Both of these effects contribute significantly to learning and memory. Zinc deficiency affects short-term memory more than long-term memory.

Hindustan Zinc is India’s only and world’s leading Zinc-Lead-Silver Producer..

Pavan Kaushik

Article by- Pavan Kaushik, Head – Corporate Communication, Hindustan Zinc

डूंगरपुर के एमएमबी ग्रुप ने 100 परिवारों को किया राशन वितरित

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पोस्ट न्यूज़। डूंगरपुर में मस्तान बाबा के 24 वें उर्स के मोके पर एम एम् बी ग्रुप की तरफ से 100 जरूरत मंदों को एक महीने का राशन वितरित किया गया। एम्एम्बी ग्रुप के सदर नूर मोहम्मद मकरानी हर तीज त्यौहार के मोके पर बिना भेद भाव के गरीबों में राशन वितरण का कार्य निरंतर करते आरहे है, उनके इस कार्य सहयोग के लिए हर धर्म के भामाशाह बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेते है।
मस्तान बाबा के 24 वें उर्स के मोके पर एम् एम् बी ग्रुप की तरफ से ओटे पर कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमे 100 गरीब जरूरत मंद परिवारों को महीने भर का राशन वितरित किया साथ ही गो वंश बचाने का सन्देश देते हुए स्वच्छता अभियान को भी बढ़ावा दिया। इस दौरान प्लास्टिक का उपयोग नहीं करने का संदेश दिया व् कपड़े की थैलियां वितरित की गई।
एम् एम् बी ग्रुप के नूर मोहम्मद मकरानी ने कहा कि एम् एम् बी ग्रुप हमेशा सर्व धर्म सद्भाव की निति पर सेवा कार्य करता है और ग्रुप से जुड़े हर सदस्य पदाधिकारी गरीबों की सेवा के लिए तत्पर रहते है।
मस्तान बाबा के 24 वें उर्स के मोके पर हुए इस कार्यक्रम में जिला कलेक्टर राजेंद्र भट्ट, एएसपी नीतेश आर्य, कांग्रेस के प्रदेश महासचिव शंकर यादव, चेंबर ऑफ कॉमर्स के महामंत्री प्रभुलाल पटेल, अख्तर हुसैन, डॉ. गौरव यादव, उपाधीक्षक इकबाल अहमद की मौजूद थे।
सदर नूर मोहम्मद मकरानी ने स्वागत संबोधन दिया। भामाशाह अक्षय गडिया, पंकज शर्मा, प्रभू पटेल, डॉ. गौरव, संजय शर्मा, रमेश वरयानी, इंतखाब मकरानी, असरार मकरानी, अनवर असद, मुस्ताअली दादू, हारून, अवधेश जैन, जयन जैन, विक्की टांकू, भुवेश लबाना, हितेश भावसार, मणिलाल खेमारू, जयंतीलाल, बाबू भाई प्रजापत, परेश खुशहाली, वैभव पटवा, मुर्तजा, मुस्ता अली, राहत भाई अजमेर, धनपाल जैन, मोहम्मद रफीक के सहयोग से 100 जरूरतमंद परिवारों को एक महीने का राशन वितरण किया गया।
इससे पूर्व भी 7 जनवरी को एम् एम् बी ग्रुप की तरफ से ब्लड डोनेशन का केम्प आयोजित किया गया था जिसमे 24 यूनिट ब्लड डोनेट किया गया था। एमएमबी बी ग्रुप के सदर नूर मोहम्मद मकरानी ने खुद भी 24 वीं बार ब्लड डोनेट किया था।

आम हिन्दुस्तानी की जेब पर बैंक इस तरह डालेगी डाका – गरीब खुद को लुटता हुआ बस देखेगा .

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पोस्ट न्यूज़। केंद्र सरकार ने आम आदमी को घेर घेर कर मारने की योजना बनाई थी जो अब धीरे धीरे काम कर रही है। पहले काले धन के 15-15 लाख रूपये देने का लालच दे कर जान धन खाते खुलवाना। हर गरीब आम आदमी जिसकी आमदनी से दो वक़्त का गुजारा भी मुश्किल से होता है उसको तरह तरह के लालच देकर बैंक में खाते खुलवा दिए। फिर राष्ट्रवादी और आंतकवाद को ख़तम करने की नोटंकी कर नोट बंदी का डंडा कर हर आम आदमी के रूपये बैंक में जमा करवा दिए, और अब बैंक को अरबों खरबों का फायदा देने के लिए आम आदमी की फटी जेब को भी लूटा जारहा है। जिसके घर में पाई पाई की जरूरत महसूस होती है उसकी जेब से जबरदस्ती बैंकों की तिजोरियां भरने के लिए केंद्र सरकार ने सरकारी डंडा आम आदमी के सामने लटका दिया है जो ना चाहते हुए भी उसके सर पर खुद उसको मारना पड़ेगा। खून पसीने की कमाई को धन्ना सेठो की तिजोरियों में भरने के लिए एक आम आदमी का खून चूसने की तैयारी हो चुकी है।
आइये जानते है बैंक आपके जेबों पर किस तरह डाका डालेगें।
एक और तो गवर्नमेंट सभी लोगों को बैंक से जोड़ना चाहती है और दूसरी और आम लोगों पर ही ज्यादा से ज्यादा भार डाला जा रहा है। बैंकों में 20 जनवरी से नियम बदलने जा रहे हैं। बैंक में पैसा जमा करने का भी आपको चार्जेस देना होगा। चेक से अमाउंट निकालने पर चार्ज देना होगा। हम बता रहे हैं ऐसी 7 सर्विसेज जो अब फ्री नहीं रह जाएंगी। आपको इन छोटी-छोटी सर्विसेज के लिए भी बैंक को चार्ज देना होगा।
अकाउंट से सीधे कट जाएगा चार्ज

यह चार्जेस लागू होते हैं तो आपके अकाउंट से सीधे शुल्क कटेगा। देशभर के अकाउंट होल्डर्स इससे प्रभावित होंगे। बैंक ग्राहक पहले ही कई तरह के चार्जेस दे रहे हैं। इसमें मिनिमम बैंलेंस न होने से लेकर एटीएम से निकाले जाने वाली राशी को लेकर लगने वाले चार्जेस तक शामिल हैं।ऐसे में यह नये चार्जेस ग्राहकों को और बड़ा झटका दे सकते हैं।
ये 7 सर्विस 20 जनवरी से नहीं रह जाएंगी मुफ्त, देखिए कोन कोन सी सर्विस है जिन पर  अब चार्ज ….

 

मंत्रीजी ने न्यूटन की थ्योरी को ही कर दिया चेलेंज – गुरुवाकर्षण की न्यूटन ने नहीं इन्होने की थी खोज ,…

पोस्ट न्यूज़। अबतक हम पढ़ते आये है गुरुत्वाकर्षण का सिद्धांत न्यूटन ने दिया था लेकिन हो सकता है आने वाले समय में हमे अब पढना पढ़े कि गुरुत्वाकर्षण का सिद्धांत न्यूटन ने नहीं बल्कि उसके एक हज़ार साल पूर्व भारतवर्ष के ह्मगुप्त द्वितीय ने दिया था। क्यूँ की इस बात का दावा किया है राजस्थान के शिक्षा राज्यमंत्री वासुदेव देवनानी ने। और जब सरकार के शिक्षा मंत्री दावा कर रहे है तो पाठ्यक्रम में बदलाव भी संभव है। क्यूँ की उन्ही के विचारों के चलते पाठ्यक्रम में कई बदलाव भी किये गए है।
गुरुत्वाकर्षण का सिद्धांत न्यूटन ने नहीं बल्कि ब्रह्मगुप्त द्वितीय ने दिया था। इतना ही नहीं उन्होंने यह सिद्धांत न्यूटन से एक हजार साल पूर्व ही दे दिया था। यह दावा किया शिक्षा राज्यमंत्री वासुदेव देवनानी।
दरअसल, देवनानी सोमवार को राजस्थान विवि के 72वें स्थापना दिवस कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि बचपन से हम सभी ने पढ़ा है कि गुरुत्वाकर्षण का सिद्धांत न्यूटन ने दिया है। जबकि वास्तविकता यह है कि न्यूटन से एक हजार साल पूर्व भारत में ब्रह्मगुप्त द्वितीय ने यह सिद्धांत दे दिया था।
उन्होंने कहा कि इसे सिलेबस में क्यों नहीं जोड़ा जाए। एक हजार साल बाद आए आधुनिक वैज्ञानिक को भी पढ़ाएं। मगर विश्व की चीज को भारतानूकुल व भारत की चीज को देशानुकूल बनाया जाना चाहिए। गौरतलब है कि देवनानी ने पिछले वर्ष भी गाय पर विवादित बयान दिया था।
>देवनानी यहीं नहीं रूके, उन्होंने कहा कि राजस्थान में कोई कन्हैया पैदा न हो, विश्वविद्यालय इसका ध्यान रखे। उच्च शिक्षा में केवल पैकेज वाले विद्यार्थी तैयार हो रहे हैं जबकि संस्कारों की शिक्षा गौण होती जा रही है। शिक्षा के साथ-साथ विद्यार्थियों में संस्कारों को भी संचार करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों का काम शोध करवाना है। स्नातक पाठ्यक्रमों को विवि से अलग करना चाहिए। अगर ऐसा नहीं हुआ तो शोध गौण हो जाएगा। स्नातक कॉलेजों के लिए अलग से विश्वविद्यालय बनाया जाए, जो कि केवल मान्यता देने का काम करे। विश्वविद्यालय शोध पर विशेष फोकस करे। शोध जनसमस्या किए जाएं, ताकि देश-प्रदेश के सामने आ रही चुनौतियों का समाधान हो सकें।

चेन्नई से उदयपुर के लिए सीधी फ्लाईट शुरू होगी – एयर्लाइन्स यह दे रहा है सुविधाएँ ..

उदयपुर। इंडिगो ने चेन्नई से उदयपुर के लिए सीधी विमान सेवा शुरू करने जा रहा है। फरवरी व मार्च में शुरू हो रही इस सेवा के लिए शिड्यूल जारी कर दिया गया है। नई समय सारिणी में उदयपुर-चेन्नई रूट पर अतिरिक्त उड़ानें प्रारंभ होगी। इन उड़ान सेवाओं की बुकिंग तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है. 1 तथा 20 फरवरी से इन मार्गों पर उड़ानें संचालित होने लगेंगी। इंडिगो के मुख्य वाणिज्यिक अधिकारी संजय कुमार ने बताया कि पहली फरवरी को चेन्नई से उदयपुर व उदयपुर से जयपुर के बीच विमान सेवा होगी तथा 1 मार्च से उदयपुर से चेन्नई के बीच विमान सेवा शुरू होगी।
चेन्नई-उदयपुर-जयपुर : प्रतिदिन यह विमान चेन्नई से 15.25 बजे रवाना होगा और उदयपुर 17.55 बजे पहुंचेगा, जहां से वापसी में 18.30 बजे रवाना होगा और 19.35 बजे जयपुर पहुंचेगा। यह सेवा एक फरवरी से शुरू होगी। उदयपुर से चेन्नई के लिए 12.15 बजे विमान उड़ान भरेगा जो 14.40 बजे चेन्नई पहुंचेगा। विमान सेवा एक मार्च से शुरू होकर सातों दिन चलेगी।
1 फरवरी से चेन्नई के लिए फ्लाइट-
फ्लाइट 6E-442 चेन्नई से दोपहर 3:25 बजे चलेगी उदयपुर के लिए
उदयपुर से शाम 6:20 बजे चलेगी जयपुर के लिए
फ्लाइट 6E-442 जयपुर से शाम 8:05 बजे जाएगी चेन्नई
इंडिगो ये भी ऑफर चला रही है। इंटरग्लोब एविशन की इंडिगो ने नए साल के मौके पर यात्रियों के लिए सबसे बड़ी न्यू ईयर सेल लेकर आई है. कंपनी सिर्फ 899 रुपए के बेस प्राइस पर हवाई सफर का मौका दे रही है। ऑफर के तहत एक फरवरी से 15 अप्रैल, 2018 के बीच यात्रा करने पर यह ऑफर लागू है। ऑफर का फायदा उठाने के लिए टिकट की बुकिंग 8 जनवरी से 10 जनवरी के बीच करानी होगी। इंडिगो का यह ऑफर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों उड़ानों पर लागू होगा।

राजस्‍थान विधानसभाध्‍यक्ष कैलाश मेघवाल ने मिडिया के लिए ही बोल दिए विवादित बोल और ये कहा ,..

उदयपुर। श्‍ाहर की रेडिसन होटल में सोमवार से शुरू हुए दो दिवसीय 18 वें अखिल भारतीय सचेतक सम्मेलन के दूसरे दिन समापन सत्र के बाद राजस्थान विधानसभाध्यक्ष कैलाश मेघवाल ने विवादित बयान दिया है। सचेतक सम्मलेन के समापन सत्र के बाद पत्रकारों से बातचीत में मेघवाल ने कहा कि मिडिया विधानसभा और लोकसभा में गड़बडिय़ां पैदा कर रहा है । मेघवाल ने कहा कि मीडिया जिस तरह की हल्की-फुल्की बातें लेकर अखबार में छाप देता है, जिसका कोई आधार नहीं होता। मीडिया विधानसभा और लोकसभा में सबसे ज्यादा गड़बडिय़ां पैदा कर रहा है। मेघवाल द्वारा समापन सत्र में मीडिया पर प्रतिबंध लगाने की बात कही गई थी। इस पर पत्रकारों ने जवाब मांगा था, जवाब में मेघवाल ने मीडिया को ही कटघरे में खड़ा कर दिया। वहीं दूसरी ओर पत्रकारों से बातचीत में केन्द्रीय संसदीय कार्य राज्यमंत्री अर्जुन मेघवाल ने कहा कि मीडिया चौथा स्तंभ है, इसे मजबूत करने की जरूरत है। हम इसे और मजबूत बनाएंगे।
उदयपुर की अवैध होटल रेडिसन ब्लू में आयोजित हुए 18 वें अखिल भारतीय सचेतक सम्मेलन का मंगलवार को समापन हो गया। समापन समारोह विधानसभा अध्यक्ष कैलाश ​मेघवाल की अध्यक्षता सम्पन्न हुआ। साथ ही केन्द्रीय मंत्री विजय गोयल ​केन्द्रीय राज्य मंत्री अर्जुनराम मेघवाल प्रदेश के संसदीय कार्य मंत्री राजेन्द्र राठौड मुख्य सचेतक कालूलाल गुर्जर सहित 21 राज्यों से आये मुख्य सचेतक और प्रतिनिधि मौजूद रहे। सचेतक सम्मलेन के समापन सत्र में मेघवाल ने कहा कि स्पीकर का कत्र्तव्य चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। दुर्भाग्य से स्थिति बनती जा रही है । बहस के आधार पर परिणाम लाना और निंदा के आधार पर परिणाम लाना ये चिंता का विषय है। चाहे लोकसभा हो, चाहे राज्य सभा हो या चाहे विधानसभा हो, यहां परिणाम लेने के लिए अपना बिन्दु सही ढंग से कहने की बजाय हंगामा करने की स्थिति पैदा की जाती है, यह दुप्रवृत्ति है। बहस का स्तर गिरता जा रहा है, यह कहने में कही कोई एतराज नहीं है। नवीं लोकसभा में जब मैं था तो पुराने वक्तव्य निकाल कर पढ़ता था, उस समय से अब आज भाषा पर नियंत्रण नहीं, विचारों में तारतम्य नहीं है। इस पर विशेष देने की जरूरत है, इसे सचेतक पूरा कर सकते हैं। बोलने के लिए जो विषय है उस पर बोलने वाला वक्ता आना चाहिए। जीरो ऑवर में जो हंगामा होता है, टोका टोकी होती है, यह अखबारों में सुर्खियों से आता है। अखबारों में सुर्खियां पाने के लिए यह दुष्प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है। वैचारिक दृष्टि से जो भाषण होते है, वे बहुत कम छपते हैं। या तो यह प्रतिबंध लगादे कि हंगामें की खबर किसी अखबार में नहीं जाएगी। या ये प्रतिबंध लगादे कि कोई भी विधायक वेल में नहीं आएगा और जो आएगा उसकी खबर नहीं छपेगी, तो छपास रोग से पीडि़त छापा के शौकिन विधायक कम हो जाएंगे।
समारोह में केन्द्रीय मंत्री विजय गोयल ने कहा कि सभी तकनीकी सत्रों में सामने आए सुझावों और सिफारिशों की विस्तार से चर्चा की गई है और इन निष्कर्षों के अनुरूप बेहतर प्रबंध सुनिश्चित करने के प्रयास किये जायेंगे। उन्होंने कहा कि ई विधान को पूरी प्राथमिकता से लागू करने के कार्य में तेजी लाने की बात पर जोर दिया गया है जिससे पारदर्शिता को मजबूती मिलेगी साथ ही विधायिका के डिजिटाइजेशन पर भी बल दिया जाएगा।
बाद में पत्रकारों से बात करते हुए विजय गोयल ने कहा कि अभी यह समझा जाता है कि सचेतक का काम यह था कि संसद में ज्यादा से ज्यादा सदस्य किस तरह से उपस्थित रहें पर इस कांफ्रेंस ने यह साफ कर दिया है कि सचेतक का कार्य उपस्थिति को बढ़ाना नही बल्कि सदस्यों को मोटिवेट करने का भी है। जिससे पार्लियामेंट को चलाने में उनका सहयोग किस तरह मिल सके और सुझावों का भी पार्टिसिपेशन ज्यादा से ज्यादा कैसा हो इस पर ध्यान दिया गया है। गोयल ने साफ किया कि सम्मेलन में लगभग सभी सदस्यों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया है और सबसे खास बात यह है कि सभी सदस्य इस बात पर सहमत हुए कि जो वेली में सदस्य निकलकर सामने आ जाते है उनके लिए सबको मिलकर आचार संहिता बनाने की जरूरत है। साठ के दशक में लोकसभाएं 120 दिन चला करती थी अब दिनो की संख्या 80 तक पंहुच गयी ​है यह भी एक चिंता का विषय है। गोयल से जब पत्रकारों ने संसद में वेतन बढोत्तरी को लेकर सवाल किया तो उन्होंने कहा ​कि सभी का सुझाव सामने आ रहा है कि सरकार ऐसा कोई सिस्टम बनाये कि सैलरी को लेकर सांसद और विधायक को इस बारे में चर्चा नही करनी पडे़।

Usage of Zinc to Preserve Cemetery Monuments

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Corrosion is a potential problem for any metal monument, especially in highly polluted or seaside atmospheres. Nevertheless, white-bronze monuments, which were meant to remain unpainted, survived remarkably well. Perhaps this is because the cast metal was relatively pure (more than 99% zinc) and the joining metal was also composed of zinc.
Beginning in the 1870s, inexpensive monuments in American cemeteries began to be made of zinc. While many of these are in surprisingly good condition even today, others have begun to deteriorate after a century outdoors. Understanding how these monuments were made, what they were meant to look like, and what treatments are suitable for them provided a sound basis for preservation of this heritage.
Companies in U.S. and Canada produced the most commonly found items using a unique methodology that included a sand-blasted finish to imitate the mat appearance of stone. Marketed as superior to stone in terms of durability, their products were referred to as “white bronze.” They included thousands of markers custom-made effigies of the dead, off-the-shelf statues of Faith, Hope, and Charity, and enormous Civil War memorials crowned by statues of soldiers.
Using a more conventional technique, New York-based firms sold zinc statues of soldiers and firemen painted in imitation of bronze to veteran’s groups and municipal governments. The cast-iron fountains with classicizing zinc statues were occasionally placed in cemeteries, originally painted light colors in imitation of stone. By the early 20th century the companies in Chicago introduced copper-plated zinc for Roman Catholic cemeteries, which continued to be sold as late as the 1950s.

Hindustan Zinc is India’s only and world’s leading Zinc-Lead-Silver Producer..

Pavan Kaushik

Article by- Pavan Kaushik, Head – Corporate Communication, Hindustan Zinc

इंटरनेशनल बॉक्सिंग में पदक जीतने वाली झलक का लेकसिटी में हुआ जोरदार स्वागत

post news. यूक्रेन में इंटरनेशनल जूनियर बॉक्सिंग प्रतियोगिता में भारत के लिए रजत पदक जितने वाली झलक का पदक जितने के बाद झीलों की नगरी में आगमन पर जोरदार स्वागत हुआ। झलक के सम्मान में शानदार रैली निकाली गयी और बॉक्सिंग संघ हेमराज व्यायाम शाला में झलक और उनके कोच नरपत सिंह चुण्डावत का सम्मान किया गया। मुख्य अतिथि पूर्व सांसद रघुवीर मीणा, जिला खेल अधिकारी ललितसिंह झाला थे। बातचीत में झलक ने कहा कि देश के लिए पदक जीतने के बाद अब उनका लक्ष्य है कि ओलिंपिक में देश के लिए पदक जीता जाए। इसके लिए वे अभी से पूरी मेहनत से तैयारी कर रही हैं। झलक ने बताया कि उनकी सफलता का श्रेय कोच की मेहनत माता-पिता की प्रेरणा को जाता है।
दसवींमें पढ़ने वाली झलक मूलतः मुज्जफरनगर नगर की है और यहां अपने मामा के निर्देशन में पढ़ाई कर रही है। सबसे पहले उन्होंने बीएन स्कूल में प्रवेश लिया और कोच वर्धमानसिंह के निर्देशन में बॉक्सिंग सीखने लगी। झलक के पिता तेज तोमर ने बताया कि इसके बाद उन्होंने राजस्थान संघ के अध्यक्ष फतहसिंह राठौड़ से बात की और बॉक्सिंग सीखने हेमराज व्यायामशाला में गई। झलक ने 2016 में जिलास्तरीय टूर्नामेंट में स्वर्ण जीता। फिर जून 2017 में जोधपुर में स्टेट में चैम्पियन बनी और नेशनल के लिए चयनित हुई। नवंबर में रोहतक में नेशनल में कांस्य पदक हासिल किया और श्रेष्ठ प्रदर्शन के आधार पर भारतीय टीम के कैंप में चुनी गई। भारतीय टीम में शामिल होकर दिसंबर में देश के लिए रजत पदक जीता।

व्हाट्सएेप ग्रुप पर आपत्तिजनक कमेंट करने वाला BLO निलंबित

 post news. शिक्षा विभाग के तृतीय श्रेणी शिक्षक और बीएलओ भीमराज गायरी को सोशल मीडिया ग्रुप पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में निलंबित कर दिया गया। बड़गांव के सोनारिया में राजकीय प्राथमिक विद्यालय के अध्यापक और बीएलओ का कार्यभार संभाल रहे भीमराज ने बीएलओ नाम से बने सोशल मीडिया ग्रुप में समुदाय विशेष के लिए आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इसकी शिकायत कलेक्टर के पास पहुंची। कलेक्टर के निर्देश पर जिला शिक्षा अधिकारी गिरिजा वैष्णव ने अध्यापक भीमराज गायरी को निलंबित कर दिया।

– जिला शिक्षा अधिकारी वैष्णव ने बताया कि भीमराज काे निलंबित कर डीईओ कार्यालय उदयपुर मुख्यालय रखा गया है।

– बीएलओ गायरी का कहना है कि उनका मोबाइल आठ वर्षीय पोते के पास था। उसने गलती से मैसेज सभी ग्रुप में फॉरवर्ड कर दिया। मुझे जैसे ही यह पता चला मैंने सभी ग्रुप में और तहसीलदार से क्षमा मांगी थी। मुझे तो ये फोन चलाना भी नहीं आता है। जब से मुझे बीएलओ का कार्यभार दिया गया, मुझे जबरन यह मोबाइल लेने को कहा गया और ग्रुप में जोड़ा।

सिनेमाघरों में राष्ट्रगान बजाना अब अनिवार्य नहीं

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पोस्ट न्यूज़. सुप्रीम कोर्ट ने अपने ही फेसले में संशोधन करते हुए कहा कि अब सिनेमा घरों में राष्ट्रगान (National anthem) बजाना अनिवार्य नहीं है. Supreme court ने 30 नवंबर 2016 को फैसला दिया था कि सिनेमा घरों में फिल्म चलाने के पहले राष्ट्रगान चलाना और दर्शकों का खड़े होना अनिवार्य है। अब अपने ही फैसले को बदलते हुए कहा कि सिनेमा घरों में राष्ट्रगान बजाना अनिवार्य नहीं है।

इससे पहलेे सोमवार को Supreme court में केन्‍द्र सरकार (central government) ने कहा था कि फिलहाल राष्ट्रगान (National anthem) को अनिवार्य ना बनाया जाए. केंद्र ने हलफनामा दाखिल कर कहा कि केंद्र सरकार ने इंटर मिनिष्ट्रियल कमेटी बनाई है जो छह महीने में अपने सुझाव देगी.  इसके बाद सरकार तय करेगी कि कोई नोटिफिकेशन या सर्कुलर जारी किया जाए या नहीं. केंद्र ने कहा है कि तब तक 30 नवंबर 2016 के राष्ट्रीय गान के अनिवार्य करने के आदेश से पहले की स्थिति बहाल हो.

गौरतलब है कि 23 अक्टूबर, 2017 को Supreme court ने केंद्र सरकार को कहा कि सिनेमाघरों और अन्य स्थानों पर राष्ट्रगान बजाना अनिवार्य हो या नहीं, ये वो तय करे। इस संबंध में कोई भी सर्कुलर जारी किया जाए तो सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश से प्रभावित ना हों। सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि ये भी देखना चाहिए कि सिनेमाघर में लोग मनोरंजन के लिए जाते हैं, ऐसे में देशभक्ति का क्या पैमाना हो, इसके लिए कोई रेखा तय होनी चाहिए? सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि इस तरह के नोटिफिकेशन या नियम का मामला संसद का है। ये काम कोर्ट पर क्यों थोपा जाए? जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा था कि लोग सिनेमाघर सिर्फ मनोरंजन के लिए जाते हैं। हम क्यों देशभक्ति को अपनी बांहों में रखें. ये सब मामले मनोरंजन के हैं. फ्लैग कोड काफी नहीं है, सरकार को एग्जीक्यूटिव आदेश जारी करने चाहिए. कोर्ट क्यों इसका बोझ उठाए।
दरअसल, श्याम नारायण चौकसे की याचिका में कहा गया था कि किसी भी व्यावसायिक गतिविधि के लिए राष्ट्रगान के चलन पर रोक लगाई जानी चाहिए और एंटरटेनमेंट शो में ड्रामा क्रिएट करने के लिए राष्ट्रगान को इस्तेमाल न किया जाए. याचिका में यह भी कहा गया था कि एक बार शुरू होने पर राष्ट्रगान को अंत तक गाया जाना चाहिए और बीच में बंद नहीं किया जाना चाहिए. याचिका में कोर्ट से यह आदेश देने का आग्रह भी किया गया था कि राष्ट्रगान को ऐसे लोगों के बीच न गाया जाए, जो इसे नहीं समझते. इसके अतिरिक्त राष्ट्रगान की धुन बदलकर किसी ओर तरीके से गाने की इजाज़त नहीं मिलनी चाहिए.

याचिका में कहा गया कि इस तरह के मामलों में राष्ट्रगान नियमों का उल्लंघन है और यह वर्ष 1971 के कानून के खिलाफ है. इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जब लोग राष्ट्रगान और राष्ट्रीय ध्वज का आदर करेंगे तो इससे लोगों के मन में देशभक्ति और राष्ट्रवाद की भावना जगेगी. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये लोगों की फंडामेंटल ड्यूटी है कि वह संविधान का आदर करें और उसका पालन करें और फिर संवैधानिक संस्थानों, राष्ट्रगान और राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान करें.