Galvanised Steel for Kedarnath Pilgrimage Temple Bridge

Who can forget the year 2013 when humanity saw one of the worst natural disasters in the history of India. Due to cloudbursts in the state of Uttarakhand, the flash floods in river Ganga and landslides washed away thousands of lives.  The Kedarnath bridge at Sonprayag also washed out due to heavy floods. The death toll and destruction was so massive that it left the region devastated.

Subsequently, a Bailey Bridge (a portable, pre-fabricated, truss bridge) was built by the Border Roads Organisation, limiting the traffic to one way and a maximum load of 12 tonnes at the most. But June 2015 saw more floods and this bridge was also washed away.

Since the Temple is 3500 feet above sea level and is situated in challenging topography, the construction of a stronger flawless bridge required more than 3 years to build. Further, since the bridge was to be built in such difficult conditions, it would have been impossible to regularly protect or maintain.

It was decided finally that the new bridge has to be made of galvanized steel to ensure that it does not collapse. But Galvanizing in this remote town was not easily available.

Thus, the galvanized bridge was shipped in containers from the USA, completed and became operational in an incredible 45 days. In the new bridge, all the panel chords, diagonals, verticals, raker, reinforcing chords along with all the structural beam members and flooring were hot dip galvanized.

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Pavan Kaushik

Article by- Pavan Kaushik, Head – Corporate Communication, Hindustan Zinc

आरएसएस की सोच यह है कि 2019 में मोदी के नेतृत्व में भाजपा “2014 के चरम” के आसपास भी नहीं पहुंच पाएगी।

रमणा स्वामी-राष्ट्दूत दिल्ली ब्यूरो की सटीक रिपोर्ट 

post रिपोर्ट. गुजरात चुनाव के नतीजों में आरएसएस क्या देख रही है? नरेन्द्र मोदी व अमित शाह के लिए इस बात का महत्व किसी भी अन्य, चाहे वे दोस्त हों या दुश्मन, के अनुमानों या टिप्पणियों से अधिक है। मीडिया की चकाचौंध से दूर रहने वाले इन भगवा रणनीतिज्ञों की प्रतिक्रिया, यदा कदा ही सार्वजनिक की जाती है। लेकिन नागपुर के हेडगेवार भवन तथा दिल्ली के झंडेवालान स्थित केशव कुंज से रिसकर आई जानकारी से साफ है कि आरएसएस नीतिकार जानते थे कि ऐसा होने जा रहा है। अंदरूनी लोग कहते हैं कि आरामदायक बहुमत के साथ सत्ता में वापस लौटने में भाजपा सरकार की
असफलता कोई आश्चर्यजनक घटना नहीं है। झडेवालान में विश्लेषक कई महीनों से केन्द्र में भाजपा के समग्र प्रदर्शन पर निगाह रखे हुए थे और मूल्यांकन कर रहे थे तथा विभिन्न राज्यों से शाखा स्तर से प्रतिक्रियाएं और जानकारियां प्राप्त करते रहे हैं।

हिमाचल प्रदेश और गुजरात के लिए चुनाव कार्यक्रमों की घोषणा होने के हफ्तों पहले आरएसएस देश में धरातल की स्थिति को स्पष्ट रुप से समझ चुकी थी। एक तो, प्रधानमंत्री की निजी लोकप्रियता घट रही है दूसरे भाजपा की सीटों की संख्या 2014 के लोकसभा चुनाव में चरम पर पहुंच चुकी है, तथा इसका विधानसभा चुनाव में गिरना तय है। गुजरात के चुनाव परिणामों ने ये दोनों ही आकलन सही सिद्ध कर दिये हैं। जहां तक स्वयं मोदी का सम्बन्ध है उनके घोर प्रयासों के बावजूद, मोदी का करिश्मा राज्य की जनता के कुछ नाराज़ वर्गों को पुन: आश्वस्त करने तथा उनके वोट प्राप्त करने के लिए पर्याप्त नहीं था। वैसे भी प्राकृतिक नियम है कि किसी भी चीज का बार-बार उपयोग किया जाए तो उसकी उपयोगिता कम हो जाती है।
2019 के आम चुनावों के दृष्टिकोण से जो बात अधिक चिंताजनक है वह यह कि भाजपा गुजरात में जितने भी मत खींच पाई वे राज्य में उसके बोट प्रतिशत से कम हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को मोदी के गृह राज्य में 63 प्रतिशत वैध मत प्राप्त हुए थे। हाल ही में समाप्त हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा की मतों में हिस्सेदारी में भारी गिरावट हुई और यह 49 प्रतिशत रह गयी। 2014 में भाजपा 165 विधानसभा क्षेत्रों में आगे रही थी। इस बार पार्टी को 100 से भी कम मात्र 99 सीटें मिली हैं।
किन्तु आरएसएस के गणना करने वाले नीतिकारों को 2019 में संसद के लिए होने वाले की चिंता अधिक है। उन्हें विश्वास है कि भाजपा 2014 के “चरम बिन्दु” तक पुन: नहीं पहुंच पाएगी। इसका तर्क यह है किपश्चिमी हिन्दी भाषी राज्यों से सांसदों की संख्या बढ़ने की गुंजाइश नहीं है। यही कारण हैं कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को पूर्वी तथा दक्षिणी राज्यों में पहुंचकर भाजपा का आधार बढ़ाने के निर्देश दिए गये।

अभी तक ऐसे कोई संकेत नहीं हैं कि पूर्व में पश्चिमी बंगाल तथा दक्षिण में केरल जैसे राज्यों में पैठ बनाने की आक्रामक गतिविधि से चुनावों के संदर्भ में कोई लाभदायक परिणाम मिले हैं। आरएसएस के विश्लेषकों ने आखिल भारतीय राज्यवार चार्ट तैयार किया है। इसमें 2014 में जीती गयी संसदीय सीटों तथा 2019 में होने वाली संभावित हानि या लाभ को सूचीबद्ध किया गया है।

जितना संभव हो सकता है उतने आशावादी किन्तु कड़वी सच्चाई के साथ पूर्वानुमान उपलब्ध कराने के लिए कई आर्थिक सामाजिक तथा राजनैतिक घटनाक्रमों तथा प्रवृतियों को भी ध्यान में रखा गया हैं।

राज्यवार चार्ट में भाजपा द्वारा- 2014 में जीती गयी सीटें तथा उसके बाद 2019 की यथार्थवादी संख्या दी गयी है। गुजरात में गत बार 26 सीटें जीती गयी थीं, अगले लोकसभा चुनाव में यह 20 रह जाएगी। हरियाणा में 7 से 5, हिमाचल में 4 से 3, दिल्ली में 7 से घटकर 5, पंजाब में 2 से 1 , जम्मू एवं कश्मीर में मौजूदा तीन कायम रहेंगी, महाराष्ट्र में 41 से 35, उत्तर प्रदेश में 73 से 50 (या 30 भी), मध्यप्रदेश में 26 से 18 तथा उससे भी कम, छत्तीसगढ़ में 10 से 8 या 9,राजस्थान में 25 से 15 या कम, बिहार में 3 से बढ़कर 30 तक संभवत, झारखंड में 4 से बढ़कर 8 या 10 भी हो सकती हैं। पश्चिम बंगाल में अभी दो सीटें, दाजीलिंग और आसनसोल भाजपा के पास हैं जो छिन सकती हैं, और गिनती शून्य रह सकती है। ओडिशा में अभी एक सीट हैं जो बढ़कर 7 या 8 हो सकती है। कर्नाटक की 18 सीटें यथावत बनी रहने की संभावना है। तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना और केरल में कोई लाभ होने का अनुभव नहीं हैं।
यदि अनुमानित हानि और लाभ को जोड़कर देखा जाए तो 19 वीं लोकसभा में भाजपा सांसदों की संख्या उनको वर्तमान संख्या से 40 या 50 तक भी कम रह सकती हैं। वास्तविक आंकड़े कुछ भी रहें, महत्वपूर्ण मुद्दा यही है कि आरएसएस की सोच यह है कि मोदी के नेतृत्व में भाजपा “2014 के चरम” के आसपास भी नहीं पहुंच पाएगी।
मत दिलाने वाले के नेता के रूप में मोदी के फीके पड़ते करिश्मे और राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस के पुनर्जीवित होने के संकेतों के साथ भगवा खेमे के लिए चिंतित होने का उचित कारण हैं।

“राहत” की लापरवाही से हुई मासूम की मौत के बाद इलाज माफियाओं के प्रति बढ़ रहा है शहर वासियों का गुस्सा

उदयपुर। शहर में राहत हॉस्पिटल के लापरवाही से एक मासूम नवजात की मौत के बाद शहर वासियों में इलाज माफियाँ के प्रति गुस्सा बढ़ता जारहा है। इधर राहत अस्पताल के विरोध में समाजजन कारवाई की मांग कर रहे है तो उधर निजी डॉक्टर्स राहत अस्पताल में की गयी तोड़फोड़ के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कारवाई की मांग कर रहे है।
राहत अस्पताल की वजह से हुई नवजात बच्ची के परिजनों और छात्रों ने पुलिस महानिरीक्षक को निष्पक्ष जांच करवा कर कारवाई करने का ज्ञापन दिया। इसके पहले भी राहत हाॅस्पिटल के पक्षधर चिकित्सक घटना के दौरान गुस्साए परिजनों की गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ छात्रों और युवाओं का गुस्सा रोद्र रूप ले रहा है। हालाकि मंगलवार को मोहनलाल सुखाड़िया युनिवर्सिटी पूर्व छात्रसंघ ऐसोसिएषन की ओर से कलेक्टरी से लेकर राहत हाॅस्पिटल तक केंडल मार्च भी निकाला गया था। गौर तलब है कि राहत अस्पताल में करीब 7 दिन की बच्ची को बीमार हालत में ही डिस्चार्ज करके एम बी चिकिस्तालय में रैफर किया गया था। उसके कुछ समय बाद आए बच्ची के परिजन और षुभचिंतकों ने हाॅस्पिटल में हंगामा खड़ा कर दिया। वहीं इलाज बिगाड़ने वाले डाक्टर लाखन पोसवाल, डाक्टर सुरेष धाकड़ और डाक्टर देवेंद्र को बुलाने की बात पर अड़ गए। माहौल इतना गर्मा गया था कि अस्पताल प्रषासन को पुलिस की मदद लेनी पड़ी, लेकिन तब तक भी जिम्मेदार चिकित्सक जिनके नाम बार -बार परिजनों द्वारा लिए जा रहे थे, मौके पर नहीं आए। इस पर परिजनों का गुस्सा और भी तेज हो गया और वह अपना आपा खो गए। ऐसे में अस्पताल में तोड़फोड़ और पिटाई की घटना को भी अंजाम दिया गया, इस पर खाकी ने अस्पताल का समर्थन करते हुए कुछ लोगों को हिरासत में ले लिया। बाद में दोनो ही पक्षों की ओर से थाने में मुकदमा भी दर्ज हो गया। लेकिन सात दिन की उस बच्ची का एम बी चिकित्सालय में भी इलाज नहीं हो पाया और वह इस आई तो थी दुनिया को देखने लेकिन लापरवाही की ऐसी भेंट चढ़ी कि आंखें खोलने से पहले ही दुनिया से चल बसी। वैसे अपुश्ट सूत्रों की माने तो दो दिन पूर्व ही मासूम बच्ची ने दम तोड़दिया था और उसकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इन्फेक्षन के सदमे से हुई मौत का कारण सामने आ रहा है। ऐसे में यह बात तो साबित हो गई हैकि बच्ची की मौत लापरवाही की वजह से ही हुई थी। लेकिन चिकित्सकों ने भी अपने ज्ञापन के दौरान साईन्टिफिक कारण बताते हुए हवाला दिया था कि प्रीमैच्योर बेबी को गैंगरीन का खतरा रहता है और ऐसा ही उस बच्ची के साथ हुआ था। लेकिन यहां सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि सबसे महंगे बच्चों के हाॅस्पिटल मंे षूमार ‘‘राहत’’ अस्पताल में भर्ती बच्ची को परिजनों को दिखाया क्यों नहीं गया और जब भी जिम्मेदार चिकित्सक ने बात की तो यह क्यों नहीं बताया कि बच्ची का पैर खराब होता जा रहा है। क्योंकि कल्पना नर्सिंग हाॅम से जब बच्ची को लाकर भर्ती कराया गया था तो उसके सभी अंग सही थे। ऐेसे में यह बात तो साबित होती ही है कि बच्ची का पांव ‘‘राहत’’ में ही ‘‘आहत’’ हुआ था। अब जब दोनो ही पक्षों का मामला पुलिस के पास लम्बित है तो देखना दिलचस्प होगा कि पुलिस पहले किस नतीजे पर पंहुचती है। क्योंकि एक अपराध तो सामने दिख रहा है और दूसरा अपराध गोपनीय था।

उदयपुर के गुलाबबाग में बच्चों की ट्रेन में लगी आग

उदयपुर। शहर के गुलाबबाग में संचालित बच्चों की रेलगाड़ी में बुधवार को आग लग गई। हालांकि गनीमत रही की जिस वक्त यह हादसा हुआ उस वक्त इसमें कोई पर्यटक नहीं थे। बताया गया कि रेलगाड़ी में तकनीकी खराबी के चलते ट्रेक पर ही इसके इंजन को रिपेयर किया जा रहा था तभी अचानक इंजन मेंं आग भभक गई।
गुलाब बाग़ में चलने वाली टॉय ट्रेन में आग की लपटें इस कदर उठीं की रिपेयरिंग करने वालों को भागकर अपनी जान बचानी पड़ी। पानी छिडककर आग की लपटों को शांत किया लेकिन धुआंं उठता रहा। इस दौरान स्टेशन पर काफी यात्री इस ट्रेन में बैठने का इंतजार ही करते रह गए। हादसा स्टेशन से कुछ ही दूरी पर हुआ जिससे इसमें बैठने के लिए कुछ पर्यटक ट्रेन के पास पहुंच गए थे लेकिन आग लगते ही उन्हें भी भागना पड़ा। हादसे को देख पर्यटक सहम से गए। गौरतलब है कि यह बच्चों की रेलगाड़ी कई बार हादसों का शिकार हो चुकी है लेकिन नगर निगम और संचालन करने वाली एजेंसी की ओर से इसको रेाकने के तमाम दावे खोखले साबित हुए हैं। गौरतलब है कि गुलाबबाग में चलने वाली बच्चों की रेलगाड़ी हादसों की रेलगाड़ी बनकर रह गई है, आये दिन कोई ना कोई हादसा होता ही रहता है। यह तो गनीमत रही कि अब तक के हुए हादसों में किसी की जान नहीं गई नहीं तो पर्यटक नगरी का यह डेस्टिनेशन बदनाम हो जाता। यह कोई पहली बार नहीं हुआ यह ट्रेन खस्ताहाल ट्रेक और ट्रेन के कारण पहले भी कई बार पलट चुकी थी लेकिन ठेकेदार रुपए कमाने के अलावा मेंटेनेस पर बिल्कुल नहीं दे रहा था। यही नहीं वह हर बार हादसे की वजह असामाजिक तत्वोा पर थोप कर बच रहा था एेेेेसे में ट्रेन संचालन रोक दिया गया था। लेकिन बाद में पुन: ट्रेन का संचालन शुरू कर दिया गया था।

Restoring the Statue of Liberty with ZINC

The Statue of Liberty is a sculpture on Liberty Island in New York City which symbolizes the United States of America to millions of people around the world. The 151 feet statue was a gift from France to the United States and was designed by French sculptor – Frédéric Auguste Bartholdi & built by Gustave Eiffel. It took over a decade to build (1875 to 1886) and over $250,000 which was a significant amount considering that it was the 19th century.

For more than 100 years, the Statue of Liberty welcomed seafarers to the shores with dignity, grace, health and vigour. But deep down, it was hurting. Standing in the humid and saline environment of New York Harbour, left the Statue of Liberty interiors vulnerable to massive corrosion. The regular maintenance checks in the 1980s revealed that galvanic corrosion had taken place between the outer Copper skin and the inner wrought Iron structure.

In 1982, it was announced that the statue was in need of considerable restoration.

A Zinc Silicate coating was used in the restoration that provided the Statue with superior corrosion resistance. Zinc Silicate coating was an inorganic water-based Zinc primer that was applied as a rust inhibitor. Also, according to the New York Historical Society, the Statue had developed a green hue by the year 1920. If the Statue had been covered with a Zinc & Copper alloy, this process would likely have taken much longer and stood the test of time.

Restoring the metallurgic integrity to Liberty took 6 years and costed $162 million. According to author Jonathan Waldman, “Rust is costlier than all other natural disasters combined, amounting in the US alone to $437 billion a year, which approaches to 3% of the nation’s GDP. By comparison, the damage done to property by hurricanes Katrina, Sandy and Andrew in 2012 was $128 billion, $50 billion and $44 billion, respectively.”

Another testimony of the strength of Zinc … We all have Zinc in our lives…

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Pavan Kaushik

Article by- Pavan Kaushik, Head – Corporate Communication, Hindustan Zinc

राजसमन्द में मूर्ति हटाने को लेकर हुए तनाव को लेकर “व्हाट्सअप यूनिवर्सिटी” के विद्वानों ने जम कर फैलाई अफवाहें।

उदयपुर। राजसमन्द में प्रशासन द्वारा मूर्ति हटाने को लेकर हुए तनाव से पुरे संभाग में अफवाहों का बाज़ार गर्म रहा। व्हाट्सअप यूनिवर्सिटी के समझदार लोगों ने दिन भर अपनी घटिया व्हाट्सएपिया शिक्षा का नमूना पेश किया। इन विद्वान लोगों ने दंगे और कर्फ्यू को लेकर whatsapp पर मेसेज वायरल करते रहे। कही मस्जिद तोड़ने के झूठे और पुराने विडियो वायरल करते रहे तो कही मंदिर पर हमले को लेकर मेसेज वायरल होते रहे। कुछ समझदार लोग मेसेज और ग्रुप में अफवाहें नहीं फैलाने का अनुरोध भी करते नज़र आये। जिन लोगों को इन व्हाट्सप्प यूनिवर्सिटी की प्रवर्ति मालूम हे उन्होंने सच्चाई पता लगाने के लिए अपने पुलिस और पत्रकार संपर्कों से सच्चाई पूछ सही बात को भी रखा। लेकिन आजकल नफरत का मोल ज्यादा है सच्चाई और भाईचारे का नहीं।
राजसमन्द के बाघपुरा गाँव में चारागाह की ज़मीं जिसको पंचायत ने नमाज़ के लिए दी थी वहां पर हनुमान जी की मूर्ति लगाने और उसके बाद मुस्लिम समुदाय की शिकायत पर प्रशासन द्वारा मूर्ति हटाये जाने और फिर से अगले दिन वहां मूर्ति नहीं देख हिन्दू समुदाय में आक्रोश और पुनः मूर्ति स्थापित किये जाने के घटना क्रम से सिर्फ राजसमन्द ही नहीं संभाग भर में गलत और अफवाहों के मेसेज होने से माहोल में तनाव पैदा हो गया। राजसमन्द में बाद में मूर्ति हटाने को लेकर सेकड़ों लोगों ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन दिया। ज्ञापन दे कर लोटते लोगों में पथराव होने की वजह से अफरातफरी मच गयी पुलिस ने बल का प्रयोग कर सबको वहां से तितर बितर किया। बाघपुरा में स्कूल के सामने एक साल से खड़ी कार में शाम को आग लगाने के बाद शहर के कमल तलाई क्षेत्र में किसी ने रूई की बंद दुकान में केरोसीन डालकर जलती हुई तीली डाल दी। इससे दुकान में रूई, गद्दे सहित सामान जल गया। दोपहर को पथराव के बाद लाठीचार्ज और आग लगाने की घटनाओं से शहर में तनाव बढ़ गया है। कलेक्टर पीसी बेरवाल, एसपी मनोजकुमार चौधरी ने रात को बाघपुरा में चारागाह स्थल का दौरा किया। उन्होंने यहां के साथ शहर में भी हालात को लेकर जानकारी ली। यहां उन्होंने अधीनस्थ पुलिस, प्रशासनिक अधिकारियों को हालात पर नजर रखने को कहा। तनाव के बाद शहर में टोंक की स्पेशल टास्क फोर्स सहित जिलेभर के डिप्टी, थानाधिकारी, थानों और पुलिस लाइन का अतिरिक्त जाप्ता लगा दिया है। इससे पहले शाम को जवानों ने शहर में फ्लेग मार्च निकाला। बाघपुरा में उपजे विवाद के बाद बुधवार को कलेक्टर सर्व समाज के लोगों के साथ बैठक करेंगे। तनाव के बीच कुछ लोगों ने रात को शहर के कमल तलाई में स्थित जमालुद्दीन पिंजारा की बंद दुकान में शटर के नीचे से केरोसीन डालकर आग लगा दी। इससे दुकान के अंदर सिलाई मशीन, पानी का कैम्पर, गद्दे, रूई जल गए। बाद में यहां आग बुझाई गई।
कलेक्टर, एसपी का कहना है कि बाघपुरा में चारागाह पर नमाज पढ़ने के लिए पंचायत ने जमीन दी थी। एक सप्ताह पहले ही कुछ लोगों ने यहां हनुमानजी की मूर्ति स्थापित कर दी। इधर, विरोध जताने वाले लोगों का कहना है कि यहां पहले कब्जा था, जिसे प्रशासन ने कुछ लोगों के कहने पर हटा दिया। बाद में इसे नमाज पढ़ने के लिए दे दिया। हनुमानजी की मूर्ति को हटाने के लिए सोमवार को ज्ञापन दिया था।
पुलिस ने पत्थर फेंकने पर कुछ लोगों को हिरासत में लिया
कलेक्टरके आश्वासन से संतुष्ट नहीं होने पर आक्रोशित लोग शाम चार बजे कलेक्ट्री से पैदल रवाना होकर नारेबाजी करते हुए बाघपुरा की तरफ रवाना हो गए। मुखर्जी चौराहा पर कुछ लोगों ने एक मकान पर पत्थर फेंक दिए। यहां पुलिस ने भीड़ पर हल्का बल प्रयोग करते हुए खदेड़ लिया। इसके बाद बांडियावाला, बाघपुरा मस्जिद, मदानी कॉलोनी में पथराव हो गया। पुलिस ने एक साथ तीनों ही जगहों पर लाठीचार्ज कर पत्थर फेंकने वाले लोगों को हिरासत में लिया है।

वहाबी बता, बेटे को माँ के जनाजे में जाने से रोका – पुलिस के साए में ले जाया गया जनाज़ा

उदयपुर। धार्मिक कट्टरता इन दिनों पुरे हिन्दुस्तान में अपने चरम पर है, और यहाँ कट्टरता सिर्फ दूसरे धर्म को लेकर नहीं अपने ही धर्म को लेकर भी है। राजस्थान के उदयपुर शहर में इसका उदाहरण देखने को मिला जब एक युवक ने वहाबी लड़की से निकाह कर लिया तो उसको सुन्नी समुदाय ने वहाबी बता कर अपनी माँ के जनाजे को ना तो कांधा देने दिया ना ही कब्रस्तान में जाने दिया। पुलिस सुरक्षा में जनाजे को कब्रस्तान ले जाया गया और सुपुर्दे ख़ाक किया गया।
राजस्थान के उदयपुर शहर के चमनपुरा में १०० वर्षीय रहमत बाई का इन्तक़ाला हो गया। रहमत बाई के चार बेटे है रफीक, हुसैन, । वह चमन पूरा में रफीक, हुसैन और अब्दुल कादिर एक भाई उदयपुर से बाहर रहता है। रहमत बाई हुसैन और रफीक के साथ चमन पूरा में ही रहती थी। मंगलवार को रहमत बाई का इंतक़ाल हुआ तो अब्दुल कादिर को सुन्नी समुदाय ने माँ के जनाजे को कांधा नहीं देने दिया ना ही कब्रस्तान में दाखिल होने दिया। अब्दुल कादिर ने वहाबी परिवार की बेटी से निकाह किया था तब से ही सुन्नी समुदाय ने कादिर को कथित टूर पर वहाबी करार देदिया था। अब्दुल कादिर ने अपनी मां को इंतकाल के बाद दफनाने के लिए हाथीपोल पुलिस थाने में लिखित में सूचना दी। जब यह बात समाज के लोगों को पता चली तो वे अब्दुल के कब्रिस्तान में आने को लेकर विरोध में गए। इसके बाद मामला बढ़ता देख पुलिस ने भी अब्दुल कादिर को उसकी मां के जनाजे में जाने से रोकने के लिए हाथीपोल थाने में बैठा लिया। तनाव की आशंका पर जनाजा भी पुलिस के साये में निकला। इससे अब्दुल कादिर अपनी ही मां को सुपुर्द-ए-खाक नहीं कर सका। रफीक और हुसैन ने ही सारे रिवाज अदा किए। हुसैन का कहना है कि मामला नहीं बिगड़े इस कारण पुलिस ने कागज पर लिखवाया था। समाज वालों के कहने के कारण अब्दुल कब्रिस्तान में नहीं आ सका।
गौरतलब है कि पहले भी कब्रिस्तान में अन्य फिरके के शव को दफनाने को लेकर हुए विवाद हुआ था। जिसमे खांजीपीरनिवासी मोहम्मद यूसुफ की म़ृत्यू 9 फरवरी 2016 को हुई थी। अगले दिन अश्विनी बाजार स्थित कब्रिस्तान में मृतक के परिजनों ने गाड़ दी थी। परिजन जैसे की घर पहुंचे पीछे से मुस्लिम समाज के लोगों ने कब्रिस्तान पहुंच कब्र खाेद लाश बाहर निकाल दी थी।

ZINC – The Answer to some of the Most Worrying Skin Conditions…

Zinc is used in countless number of items in some form or another. Another benefit of Zinc is its usage in Soaps. Zinc helps treat various skin conditions like psoriasis, eczema, ringworm, fungus etc…

Zinc in the form of ‘Zinc Pyrithione’ is majorly used in bathing soaps due to its anti-fungal and anti-bacterial properties along with its ability to cure skin diseases like seborrheic dermatitis (skin disorder that affects face, scalp and torso). Most notably, it has a suppressing effect on Malassezia Fungus (commonly considered the main culprit in various skin diseases). Its other medical applications include treatments of psoriasis, eczema, ringworm, fungus, athletes foot, dry skin, sensitive skin, atopic dermatitis, rashes, tinea, and vitiligo. It also helps fight many pathogens from the Streptococcus and Staphylococcus genera.

 Along with soaps, Zinc Pyrithione is best known for its use in treating dandruff, thus making its use imperative in anti-dandruff shampoos. The American shampoo brand ‘Head & Shoulders’ actively uses and promotes Zinc Pyrithione as its major ingredient, introduced in the year 1961.

 Cosmetics alone are not the only applications for Zinc Pyrithione. Due to its low solubility in water (8 ppm at neutral pH) and ability to protect against mildew and algae, Zinc Pyrithione is used in outdoor paints and proves to be an effective algaecide. Also, Zinc Pyrithione slows down the process of decomposition done by ultraviolet lights, thus providing years of protection even against direct sunlight. Zinc Pyrithione is also used as an antibacterial treatment for household sponges.

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Article by- Pavan Kaushik, Head – Corporate Communication, Hindustan Zinc

Pavan Kaushik

उदयपुर जेल के 1031 कैदियों को, 71 हेयर एक्सपर्ट ने बना दिया हीरो – बनाया एक नया रिकार्ड

उदयपुर। केन्द्रीय कारागृह उदयपुर प्रागंण में प्रभात स्पा सैलुन एण्ड इंस्टीट्युट, सेन क्षोर कलाकार मण्डल, लेकसिटी ब्युटी क्लब, हेयर एण्ड ब्युटी आॅर्गेनाइजेशन के नेतृत्व में कैम्प लगाकर 71 हेयर एक्सपर्ट द्वारा मात्र 3 घण्टे 30 मिनट में 1031 हेयर कट किये गये। तथा स्वच्छता के लिए चलाए गये अभियान के तहत एक महत्वपुर्ण किर्तिमान स्थापित किया गया।
उक्त उल्लेखनीय सेवाएँ देने में उपमहानिरिक्षक (जेल) रेन्ज उदयपुर श्रीमती प्रीता भार्गव , जेलर ओमप्रकाश वर्मा, अशोक पारीक , मुरारी लाल जी व राजकुमार यादव, फेक्ट्री मेनेजर एवं अन्य स्टाफ के सहयोग से यह कैम्प सफल हो पाया।
प्रभात स्पा सेलुन एण्ड इन्स्टीट्युट के डायरेक्टर अशोक पालीवाल ने बताया कि जेल मे सभी बंदी हेयर कटींग के बाद बहुत खुश थे कि उन्है उच्चस्तरीय सेंवा तथा बालों की देखभाल केसे कि जाए उसकी जानकारी मिली। हेयर कटीग अभियान मे श्यामलाल सेन व शंभुलाल सेन, (सेन क्षौर कलाकार मण्डल उदयपुर) राजेश दाडीवाला, बनवारी तँवर, कमलेश सेन व मंजु शर्मा (हेयर एण्ड ब्यूटी आॅर्गेनाइजेशन, राजस्थान) नन्दा भाटीया, अनीता गेहलोत, आशा कालरा (लेकसिटी ब्यूटी क्लब, उदयपुर) पुष्कर सेन, आशा पालीवाल (प्रभात स्पा सेलुन एण्ड इन्स्टीट्युट) चमन सेन (मालवा हेयर एसोसिएशन, निमच) शामिल रहे।
सांय 5 बजे कारागृह प्रागंण मे समापन समारोह आयोजित किया गया जिसमे श्री राकेश सेन अध्यक्ष रोटरी पन्ना उदयपुर, श्रीमती प्रीता भार्गव उपमहानिरिक्षक कारागृह (रेन्ज) उदयपुर व श्री ओ.पी वर्मा जेलर उदयपुर मुख्य अतिथी थे जिन्होने समस्त हेयर एक्सपर्ट को प्रशंसा प्रत्र देकर सम्मनित किया।

राजस्थान का कड़वा सच – अपने ही लूट रहे है महिलाओं की अस्मत।

उदयपुर। राजस्थान में महिलाओं से होने वाले आंकड़ों पर एक नज़र डाली जाय तो शर्म से हर राजस्थानी का सर नीचा हो जाय। राष्ट्रीय अपराध रिकोर्ड ब्यूरो ने हाल ही में 2016 के आंकड़े जारी किये। और ये आंकड़े सच में चोंकाने वाले है। रिकोर्ड के अनुसार साल 2016 में 3656 महिलाओं से दुष्कर्म हुआ जिसमे सबसे चोंकाने वाली बात यह सामने आई कि 555 ऐसे मामले है जिसमे अपनों ने ही रिश्तों को तार तार करते हुए महिलाओं से दुष्कर्म किया। इन अपनों में निकट के रिश्तेदार ही शामिल है। आंकड़ों के मुताबिक इनमें दादा, पिता, भाई और बेटे तक के नाम शामिल हैं। एक चोकाने वाला पह्लु यह भी है की 18 फीसदी मामलों में बलात्कारी पडोसी रहा।

एनसीआरबी के आकंड़ों के मुताबिक देश में दुष्कर्म के कुल मामलों में राजस्थान का चौथा स्थान है। सबसे ज्यादा मामले मध्यप्रदेश (4882) में दर्ज किए गए। उत्तर प्रदेश में (4816) और महाराष्ट्र में (4189) मामले दर्ज किए है।
घटनाएं हो रही हैं उन्हें मनोविज्ञान में कौटोम्बिक व्यभिचार (इनसेस्ट) कहा जाता है। समाज में ऐसी घटनाओं के बढऩे का मुख्य कारण संस्कारों में कमी आना है और शराब और अन्य नशे की लत है। सामूहिक परिवारों के विघटन के चलते लोगों में नैतिकता की कमी हो रही है। जिसके चलते इस तरह की घटनाएं बढ़ रही हैं।
राजस्थान के पंकज कुमार सिंह एडीजी क्राइम कहते है कि परिवार के सदस्यों द्वारा महिला और बच्चियों के साथ यौन दुराचार के मामले बढ़े हैं। पहले तो ऐसे मामले घर से बाहर ही नहीं निकलते थे, लेकिन अब जागरूकता आई है, पीडि़त थाने पहुंचने लगे हैं। पुलिस भी ऐसे मामलों में संजीदगी से पेश आती है।
राजस्थान महिला आयोग की अध्यक्ष सुमन शर्मा का कहना है कि ये हमारे लिए चौंकाने वाला और आंखें खोलने वाला आंकड़ा है। समाज के सभी तबकों में ब’िचयां और महिलाएं घर में भी सुरक्षित नहीं है। पुलिस घर में नहीं हो सकती। हमने इसीलिए घरेलू महिलाओं की काउंसलिंग व्यवस्था शुरू की है। जिसके परिणाम जल्द ही आने लगेंगे।