डीएस ग्रुप की जल सरंक्षण योजनाओं ने राजस्थान के भूजल स्तर में सुधार किया .

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5,316 हेकटेयर के उपचार से करीबन 9.64 लाख क्यूबिक मीटर जल भंडारण और पुनर्भरण क्षमता किया गया है

उदयपुर, 21 मार्च, 2020। डीएस ग्रुप की महत्वाकांक्षी परियोजना ‘‘वाटर इकोनाॅमिक जोन‘‘ की षुरूआत वर्ष 2018 में वल्र्ड वाॅटर डे के अवसर पर की गई, जो कि उदयपुर जिले के अलसीगढ और कुराबड के 11,385 हेकटेयर क्षेत्र में विस्तृत है और इसका लक्ष्य 26 गांवों के 24,000 लोगो तक पहुंचने का है। कम्पनी द्वारा 5,316 हेकटेयर भूमि को उपचारित कर 9.64 लाख क्यूबिक मीटर जल भंडारण और पुनर्भरण क्षमता तैयार कर चुकी है। डीएस ग्रुप एक जल संवेदी संगठन है। कम्पनी ने अपने बिजनेस फिलोसाॅफी और लोकाचार के लिए जल संरक्षण को प्रमुख बनाया है। इसी का नतीजा है कि जल संरक्षण इसकी काॅरपोरेट सामाजिक भागीदारी (सीएसआर) के एक प्रमुख ध्यानाकर्षण क्षेत्रों में से एक रहा है।
डीएस ग्रुप ने अपनी पहली जल संरक्षण संयन्त्र परियोजना सीकर में वर्ष 2013 में षुरू की तब से लेकर अब तक इसने सीकर जिले के दीपावास, मोकावास और अजीतगढ़ गावों में 23 चेक डेम्स का निर्माण किया। कम्पनी ने बुंदेलखण्ड में महोबा और बांदा में जल संरक्षण परियोजनाएं भी विकसित कीं इसके अलावा डूंगरपुर में सुरता, करौली, उदयपुर, कुराबड़ और अलसीगढ़, सीकर में दीपावास, मोकलवास और अजीतगढ़ में समूह की जल संरक्षण परियोजनाएं विकसित कीं हैं।
डीएस ग्रुुप राजस्थान में पहले ही करीब 20,83,855 घनमीटर पानी अबतक संरक्षित कर चूके है जोकि 617 हेक्टेयर को कवर कर 33,000 लोगों के जीवन को लाभान्वित कर रहा है।
केन्द्रीय जल आयोग की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत को अधिकतम 3,000 बिलियन क्यूबिक मीटर पानी की जरूरत हर साल होती है जबकि वर्षा से इसे 4,000 बिलियन क्यूबिक मीटर जल प्राप्त होता है। लेकिन देष की क्षमता सालाना वर्षा जल के संरक्षण की क्षमता केवल 8 प्रतिषत ही है, जिसे विष्व की सबसे कम क्षमता कहा जा सकता है, यही कारण है कि यहां पानी की कमी हमेषा एक मुद्दा बना हुआ है।
राजस्थान में पानी की कमी सबसे बड़ी समस्या है। इसमें 13.88 प्रतिषत भारत का कृषि योग्य क्षेत्र, 5.67 प्रतिषत जनसंख्या और देश का लगभग 11 प्रतिषत पशुधन है, लेकिन इसमें केवल 1.6 प्रतिषत सतही जल और 1.70 प्रतिषत भूजल है। जल संरक्षण परियोजनाएं राज्य में सामाजिक और आर्थिक स्थितियों में काफी सुधार करती हैं।
कम्पनी अपने परिचालनों में भी जल संरक्षण के बारे में काफी विवेकषील रही है, और कम्पनी का नोएडा स्थित मुख्यालय जीरो डिस्चार्ज ईकाई है। कम्पनी ने जल संरक्षण के लिए अपने परिसर में 9 डिस्चार्ज पिट्स, आरओ संयन्त्र, एफ्लुएंट एवं सीवेज सिस्टम जैसे उपायों पर निवेष किया है। कूलिंग टॉवर, एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट्स से निकलने वाले पानी के डिस्चार्ज का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स मंे इलाज किया जाता है और बागवानी के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है। 13 लीटर प्रति मिनट (एलपीएम) से 3.18 लीटर प्रति मिनट (एलपीएम) पर पानी के प्रवाह की दर को कम करने के लिए वॉशरूम में पानी के नल के एरेटर को बदल दिया गया है। 9 लीटर से 7 लीटर तक पानी के फ्लशिंग को कम करने के लिए सभी पानी की क्लोसेट को समायोजित किया गया है।
रूफ टॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम, आर.ओ. पानी और प्राकृतिक रीचार्जिंग तालाब/गड्ढों के रिचार्जिंग और जल पुनर्भरण की पहल जैसे जल संरक्षण की पहल ने पानी को बचाने में मदद की है। डीएस ग्रुप की सभी इकाइयों में कमी, बचाओ, रिसाइकिल रीयूज एवं रिचार्ज की फिलोसाॅफी को अपनाया जा रहा है। रिसाइकिलिंग और रीयूज एवं रिचार्ज के कारण आज डीएस ग्रुप 301,644 किलो लीटर पानी फ्लषिंग, बागवानी और सिंचाई के लिए उपयोग कर पा रहा है। करीब 91,400 किलो लीटर पानी तालाबों से एकत्र किया जाता है और उसका उपयोग सिंचाई के उद्देष्य से किया जाता है और करीब 15,044 किलो लीटर वर्षा जल का उपयोग बागवानी के लिए, वर्षा जल संरक्षण पिट्स के माध्यम से नोएडा स्थित मुख्यालय में किया जाता है।
केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, भारत 2050 तक लगभग 1.66 बिलियन की आबादी तक पहुंच जाएगा। भोजन की वार्षिक आवश्यकता भी 250 मिलियन टन से अधिक होगी। इसका मतलब यह भी है कि पानी की मांग में भी काफी वृद्धि होगी।

क्या है डीएस ग्रुप ?

धर्मपाल सत्यपाल ग्रुप (डीएस ग्रुप) एफएण्डबी, हॉस्पिटैलिटी, माउथ फ्रेशनर्स, टोबैको, पैकेजिंग और एग्रो फॉरेस्ट्री में एक मजबूत स्थिति के साथ एक तेजी से बढ़ता मल्टी डाइवर्सिफाइड ग्रुप है। ग्रुप ने डेयरी और कन्फेक्शनरी सेगमेंट में प्रवेश करके अपनी उपस्थिति मजबूत की है। डीएस समूह प्रीमियम गुणवत्ता वाले उत्पादों के लिए प्रतिबद्ध है और विगत नौ दशकों के लिए कई इनोवेषन का श्रेय हासिल किया है।
कैच स्पाइस, कैच स्प्रिंग वाटर, कैच फ्लेवर्ड वाटर, चिंगल्स, क्षीर, डेयरीमेक्स, तुलसी, पास-पास, रजनीगंधा, रजनीगंधा पल्र्स इलायची दाना, पल्स, द मनु महारानी और नमः जैसे कुछ प्रमुख ब्रांड हैं, जो इस ग्रुप की छत्र छाया में काफी विकसित हो रहे हैं।
डीएस समूह ने व्यावसायिक दृष्टि में अपनी सामाजिक प्रतिबद्धता को बढ़ाने के लिए चुना है। कम्पनी ‘जल‘ के साथ सीएसआर कार्यक्रमों की एक विस्तृत श्रृंखला पर पूरे देश में काम कर रही है। समूह अखण्डता, समर्पण, संसाधनशीलता और प्रतिबद्धता के सिद्धान्तों पर दृढ़ता से काम करता है।

हिन्दुस्तान जिंक प्रबंधन कोरोना वायरस से बचाव के लिए मुस्तैद – चलाया जा रहा है स्वच्छता जागरूकता अभियान।

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उदयपुर। कोरोना वायरस के नियंत्रण एवं बचाव के लिए जिम्मेदार उद्योग की भूमिका निभाते हुए हिन्दुस्तान जिंक के प्रधान कार्यालय एवं सभी इकाईयों के साथ साथ आस पास के क्षेत्र में भी विशेष स्वच्छता जागरूकता अभियान एवं बचाव के उपाय किये जा रहै हैं। कोराना वायरस की आपात स्थ्तिि से निपटने के लिए हिन्दुस्तान जिंक प्रबंधन सरकारी आदेशों के अनुरूप पालना कर स्वयं के स्तर पर भी पूरी तरह मुस्तैद है। हिन्दुस्तान जिंक द्वारा आस पास की इकाईयों के निकटवर्ती गांवों में अपने स्वास्थ्य कार्यक्रम स्माईल ओन व्हील्स से ग्रामीणों में कोरोना वायरस से बचाव के लिए जागरूक कर रहा है।
हिन्दुस्तान जिंक के उपमुख्य कार्यकारी अधिकारी अरूण मिश्रा ने आव्हान किया है कि जिस प्रकार प्रत्येक कर्मचारी शून्य दूर्घटना के लिए सुरक्षा अग्रदूत है उसी प्रकार कोरोना वायरस के बचाव के लिए एकजुट हो कर कोराना सुरक्षा दूत बन कर स्वयं एवं दूसरे की स्वच्छता को सुनिश्चित करते हुए इसका मुकाबला करें। इस विपरित परिस्थिति में संयम और सर्तकता बरतते हुए हम सभी को सरकार का साथ देते हुए इस स्थिति से निपटना है जिसके लिए अफवाहों पे ध्यान दिये बगैर तनावग्रस्त न हो कर सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
हिन्दुस्तान जिंक में विभिन्न संक्रमण निवारक उपायों के माध्यम से अपने कार्यालयों, प्लांट, कॉलोनी और आम क्षेत्रों में सफाई करके बड़े पैमाने पर स्वच्छता अभियान चलाया जा रहा हैं। प्रत्येक कर्मचारी से अपने कार्यस्थल और घर पर स्वच्छता हेतु सहयोग एवं दूसरों को जागरूकता हेतु अनुरोध किया गया है । सभी इकाईयों में नमस्ते अभियान, कार्यस्थल पर जाने से पूर्व प्रवेश के समय हाइपोक्लोराइट के 1 प्रतिशत के घोल का छिड़काव, कार्यस्थ्ल पर ठेकेदारों एवं कामगारों के लिए जागरूकता सत्र, सुरक्षा गार्ड और कैंटीन कर्मचारियों द्वारा पीपीई के अनिवार्य उपयोग, सयंत्र और कॉलोनी में फोगर के माध्यम से हाइपोक्लोराइट का छिड़काव, हाथ धोने हेतु मुख्य गेट के प्रवेश और निकास पर सैनिटाइजर सहीत सभी स्थानों पर वाॅश बेसिन एवं साबुन, बसों और कंपनी वाहनों का स्वच्छता, और निवास पर हाइपोक्लोराइट का वितरण जैसे प्रमुख इंतजाम किये जा रहे है।
सभी इकाईयों में कर्मचारियों, संबंधित विभागों, व्यापारिक भागीदारों एवं अन्य आगन्तुकों की यात्रा को स्थगित करते हुए तकनीकी सहायता टीपी, माइक्रोसॉफ्ट टीम्स, स्काइप, टीम व्यूअर आदि के माध्यम से कार्य करने की सलाह दी गयी हैं। हाथ की स्वच्छता बनाए रखने के लिए, सभी कॉन्फ्रेंस रूम, रिसेप्शन डेस्क में सैनिटाइजर रखने के साथ ही आगंतुकों को इसका उपयोग करने के लिए निर्देशित किया गया है।
किसी भी संक्रमण या बुखाार की स्थिति में हिन्दुस्तान जिं़क काॅलानी के सभी चिकित्सालयों में तुरंत परामर्श की सलाह दी गयी है जहां थर्मल स्कैनर के माध्यम से तापमान जांचने सहित सामान्य रोगो के लिए आवश्यक दवाईयां उपलब्ध है। कर्मचारियों के लिए उपस्थिति हेतु पंचिग को स्थगित कर दिया गया है। प्रत्येक कार्य स्थल, घरों एवं संबंधित स्थानों पर स्वच्छता एवं सुरक्षा को प्रमुखता दी जा रही है।

कोरोना वायरस की जंग में मुस्तैद है मेवाड़ ओर्थोपेडिक हॉस्पिटल – वायरस से बचाव व् सुरक्षित कर मरीजों को दे रहा है दर्द से राहत।

उदयपुर। कोरोना वायरस को लेकर पूरा देश एक तरह से जंग लड़ रहा है । जहां एक तरफ देश में केंद्र की सरकार के साथ साथ राज्य की सरकारें भी कोरोना से मुकाबला करने के लिए अपने अपने स्तर पर तैयारी कर चुके है । तो वहीं दूसरी तरफ हर विभाग, संस्था भी इस वायरस से लड़ने के लिए मुस्तैद खड़े दिखाई दे रहे है। इस सब के बिच इस सबसे बड़ी जंग में फ्रंट फुट पर जाबाजो की तरह खड़े है हमारे देश के डॉक्टर और मेडिकल कर्मी । कोरोना वायरस से लड़ाई की इस जंग में अपनी तरह से पूरी तैयारी कर खड़ा है मेवाड़ का प्रतिष्ठित मेवाड़ ऑर्थोपेडिक हॉस्पिटल। उदयपुर शहर के बेदला में स्थित मेवाड़ ऑर्थोपेडिक हॉस्पिटल कोरोना से पूरी तरह बचाव करते हुए अपने मरीजों को पूरी तरह से सुरक्षित कर उनके इलाज में उनको दर्द से राहत दिलाने में जुटा हुआ है । करोना वायरस रहित रखने के लिए मेवाड़ हॉस्पिटल का हर डॉक्टर हर मेडिकल कर्मी पूरी तरह मुस्तैदी से अपनी ज़िम्मेदारी निभा रहा है। मेवाड़ के डायरेक्टर डॉ मनीष छापरवाल का कहना है कि हमारे लिए ये वक़्त दुगुनी जिम्मेदारी का वक़्त है और इसको हम पूरी मुस्तैदी से निभा रहे है। हमारे यहां मरीज़ अपने हड्डियों का मर्ज लेकर आते है दर्द से राहत पाने के लिए और हम उनका पूरा खयाल रखते है । छापरवाल कहते है कि अब जब कि एक तरफ पुरे देश में कोरोना वायरस का डर है ऐसे में हम मरीजों उनके परिजनों का और ज्यादा खयाल रख रहे है। छापरवाल कहते है कि हमारे यहाँ हड्डियों से जुडी समस्याएँ लेकर सेकड़ों मरीज़ रोज़ आते है। ऐसे वक़्त में हमे उनका कोरोना वायरस से सुरक्षित भी रखना है और उनकी हड्डियों से जुडी समस्याओं का निराकरण भी करना है।
मेवाड़ हॉस्पिटल में इंटर होते ही यहां हर व्यक्ति का पूरी तरह से ध्यान रखा जाता है सेनेटाइजर मास्क यहाँ सबके लिए अनिवार्य कर रखा है। छापरवाल बताते है कि हमारा अस्पताल एक तरह से करोना वायरस रहित है। दिन भर में लगातार पूरे अस्पताल को यहां के कर्मी परिसर को आइसोलेट करते रहते है । जगह जगह सेनेटाइजर रखे हुए है । यहां आने वाले मरीज़ और उनके परिजनों भी विशेषज्ञों की देख रेख में रहते हैं कि कहीं कोई करोना के कुछ लक्षण सर्दी खासी जैसे भी तो नहीं । यहां के ऑपरेशन थिएटर भी पूरी तरह वायरस रहित रखने के लिए विशेष व्यवस्थाएं की जा रही है। मनीष छापरवाल का कहना है कि हमारा ध्येय है कि ज़िन्दगी दर्द रहित हो और इसके लिए हम हर हाल में हर समय प्रतिपद्ध है। यह एक ऐसी घडी है जब हम को मिल कर इस वायरस का सामना करना है अपने मरीजों का ख्याल भी रखना है। करोना से बचना भी है और लोगों को उनके मर्ज का सही इलाज भी देना है वह भी सही वक़्त में । मनीष छापरवाल का कहना है कि ऑर्थोपेडिक समस्या ऐसी होती है जिसके दर्द में कोई भी व्यक्ति चेन से नहीं बैठ सकता और ऐसे वक़्त में हम दर्द से कराहत मरीजों को छोड़ हम घर नहीं बैठ सकते इसलिए हमने तय किया है कि हम कोरोना का मुकाबला भी करेगें अपने मरीजों का बचाव भी करेगें और उनका सही वक़्त में इलाज भी करेगें।
शायद ऐसे ही मुस्तेद और अपने काम के प्रति समर्पित डॉक्टरों के लिए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 मार्च को जनता कर्फ्यू के वक़्त जनता से ताली थाली बजा कर इनका अभिवादन करने का आग्रह किया है।

हिन्दुस्तान जिंक में 300 से अधिक महिला कर्मचारियों ने ई-सेलिब्रेशन से मनाया महिला दिवस

उदयपुर. महिला सशक्तिरण और समानता के लिए हिन्दुस्तान जिंक के प्रयास अनुकरणीय है जिन्हें अन्य संस्थानों द्वारा भी अपनाना चाहिए। अपने साथ कार्य करने वाले कर्मचारियों के लिए स्वस्थ्य वातावरण बनाने के लिए हमें सामूहिक प्रयास करने चाहिए जिससे कार्यस्थल पर दक्षता से कार्य किया जा सके यह बात पुलिस महानिरीक्षक उदयपुर बिनिता ठाकुर ने हिन्दुस्तान जिंक में आयोजित अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस कार्यक्रम में कहीं। ठाकुर ने मुख्य अतिथि के रूप में हिन्दुस्तान जिंक प्रधान कार्यालय से ईकनेक्ट के माध्यम से 300 से अधिक महिला कर्मचारियों से अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि जिस क्षेत्र में वह कार्यरत है वह एक चुनौती भरा जरूर था लेकिन असंभव नहीं। सभी महिलाएं यदि दृढता से आगे बढे तो किसी भी क्षेत्र में सफलता हांसिल करना मुश्किल नहीं है। हिन्दुस्तान जिंक की इकाईयों से महिला कर्मचारियों के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कार्य करने के लिए उम्र मायने नहीं रखती, आत्मविश्वास के साथ उनके सहयोग से किसी भी क्षेत्र में कार्य से उसमें उपलब्धि हांसिल की जा सकती हैं।
महिलाओं को आगे बढ़ाने एवं सशक्तिरण के लिए कई प्रकार के कानून है। किसी भी कंपनी के बोर्ड आॅफ डायरेक्टर में महिला प्रतिनिधि अनिवार्य है। हम जिस क्षेत्र में कार्य करते है उसके वातावरण का महत्वपूर्ण योगदान होता है यदि हम चाहे तो 8 घण्टें में अपने कार्य को पूरा किया जा सकता है, क्योकिं एक महिला बहुत सारी जिम्मेदारी एक साथ एक ही समय पर निभाती है उसका समय पर घर जाना भी जरूरी है। परिवार का सहयोग भी किसी भी महिला के करियर में बहुत महत्वपूर्ण है जिससे वह सभी जिम्मेदारियों को आसानी से निभा सकती है। उन्होंने इस अवसर पर हिन्दुस्तान जिं़क द्वारा वी सेफ एप और सेफ्टी किट को लांच करते हुए सराहना की एवं कहा कि इस नवाचार से पुलिस विभाग भी जुडे़गा।
इस अवसर पर हिन्दुस्तान जिं़क के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुनील दुग्गल ने कहा कि हिन्दुस्तान जिं़क महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए सदैव कटिबद्ध है, कंपनी में प्रत्येक क्षेत्र में महिलाओं को आगे बढ़ने के समान अवसर है जिसके लिए प्रत्येक कर्मचारी सहयोग और समानता प्रदान करता है। महिला कर्मचारियों से आव्हान करते हुए उन्होंने महत्वूर्ण पदों पर उनके योगदान के लिए स्वेच्छा से आगे आने और उन्हें स्वस्थ्य वातावरण और सहयोग हेतु विश्वास दिलाया।

हिन्दुस्तान जिं़क के उप मुख्य कार्यकारी अधिकारी अरूण मिश्रा ने कहा कि कंपनी के महिला और पुरूष कर्मचारियों में समानता की भावना है जो कि मिलकर लक्ष्य को प्राप्त करने की ओर अग्रसर है। हमें गर्व है कि हिन्दुस्तान जिं़क में इकाईयों और प्रमुख पदों पर महिला कर्मचारी उच्च एवं मुख्य श्रेणी में कार्यरत है यदि हम सभी मिल कर प्रयास करें तो कुछ भी असंभव नही है।
इस मौके पर वेदांता बोर्ड आॅफ डायरेक्टर प्रिया अग्रवाल हैब्बर ने इस कार्यक्रम को अभूतपूर्व बताते हुए महिला कर्मचारियों की सुरक्षा के हित में लांच किये गये सेफ्टी एप के लिए बधाई दी एवं महिला सशक्तिरण के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया।
हिन्दुस्तान जिं़क की चीफ ह्यूमन रिसोर्सेस आॅफिसर कविता सिंह ने कहा कि समानता हिंदुस्तान जिंक के डीएनए में है। अलग अलग कार्यानुभव और पृष्ठभूमि के साथ लोग जब एक साथ आते हैं तो टीम मिलकर जमीनी स्तर पर विचारों को विकसित कर सकती है। कार्यस्थल पर विविधता भी अनिवार्य है। हिन्दुस्तान जिं़क को पुरुषों और महिलाओं के समान प्रतिनिधित्व के लिए जाना जाता है। हमें गर्व है कि हिन्दुस्तान ंिजंक में वर्तमान में कर्मचारियों में 14 प्रतिशत डायवरसिटी है।
कार्यक्रम में हिन्दुस्तान जिं़क द्वारा लांच किये गये वीसेफ एप को डाउनलोड कर महिला कर्मचारियों द्वारा किसी भी आपात स्थिति में अपने निकटतम परिजन, कर्मचारी या मित्र से सहयोग के लिए 5 व्यक्तियों तक तुरंत मदद पहुंचाने के लिए मोबाईल में पेनिक बटन को दबाने या निर्धारित तरिके से हिलाने पर सायरन बजने की सुविधा सहित, लोकेशन और एमरजेंसी नंबरो तक फोन, मेल एवं मैसेज भी पहंुचेगा जिससे त्वरित गति से सहायता मिल सके। इस एप को पुलिस विभाग के महिला सुरक्षा एप से भी जोडा जाएगा।
साथ ही इस मौके पर लांच किए गये सेफ्टी किट को सभी महिला कर्मचारियों को पेपर स्पे्र, शाॅक देने वाली स्टनगन, आत्मरक्षा हेतु उपकरण कनकल, व्हीसल एवं एलईडी टार्च भी दिया गया।
इस मौके पर महिला डाॅ राजीन्दर कौर सग्गु द्वारा सभी कर्मचारियांे को स्तन कैंसर के लक्षण, बचाव एवं उपाय के बारें में जानकारी दी। कार्यक्रम में हिन्दुस्तान जिं़क की सभी इकाईयों की 50 से अधिक महिला कर्मचारियों को उनकी विषिष्ट उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया गया।
महिला कर्मचारियों के साथ समानता और सशक्तिरण एवं इस वर्ष के अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस के विषय आई एम जनरेशन इक्वेलिटीः रियलाइजिं़ग वूमेन्स राईट्स पर मुख्य वित्तीय अधिकारी स्वयं सौरव हेड एचएसई-राजेन्द्र सिंह आहुजा, हेड-आईटी चेतन त्रिवेदी, हिन्दुस्तान जिं़क की सभी इकाईयों के आईबीयू डायरेक्टर चंदेरिया स्मेल्टिंग काॅम्प्लेक्स-पंकज कुमार शर्मा, कायड़ माइन-संजय खटोड़, रामपुरा आगुचा-सुजल शाह, जावर माइन-बलवंत सिंह राठौड, राजपुरा दरीबा काॅम्प्लेक्स-प्रवीण जैन, देबारी स्मेल्टर से अनिल त्रिपाठी एवं पंतनगर मेटल्स से रविश कुमार ने अपने विचार साझा किये। कार्यक्रम का संचालन लीड कार्पोरेट कम्यूनिकेशन मैत्रेयी सांखला, हेड-एचआर दरीबा की रूही शेरवानी एवं सेफ्टी विभाग की हंसा व्यास ने किया।

टीडी की टीम ने 5 विकटो से मैच जीतकर टूर्नामेंट ट्राॅफी पर किया कब्जा

हिन्दुस्तान जिंक, जावर माइन्स के द्वारा सीएसआर कार्यक्रम के अंतर्गत 4 दिवसीय पंचायत स्तरीय क्रिकेट टूर्नामेंट माइन्स के प्रतापपुरा मैदान पर आयोजित गया। इस प्रतियोगिता मंे जावर और आस-पास की 13 पंचायतों के 200 से अधिक युवाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। टूर्नामेंट का उद्देष्य आस-पास के ग्रामीण प्रतिभाओं को खेल के प्रति प्रोत्साहित करना है।

टूर्नामेंट का फाइनल टीडी़ और भालड़िया पंचायत के बीच खेला गया जिसमें टीडी की टीम ने 5 विकटो से मैच जीतकर टूर्नामेंट ट्राॅफी पर कब्जा जमाया। मैच के दौरान जावर-माइन्स एसबीयू डायरेक्टर, बलवन्त सिंह राठौड़ ने दोनों टीम के सभी खिलाड़ियों को अपने उद्बोधन से प्रोत्साहित कर उनका मार्गदर्शन किया। इस मौके पर टीड़ी सरपंच बन्शी लाल, भालड़िया सरपंच धूलचन्द मीणा एनेवतलाई सरपंच वेलचंद मीणा और जावर सरपंच प्रकाश मीणा उपस्थित रहे। टूर्नामेंट में खेले गए कुल 15 मैचों में सन्नी, प्रभु, लाल, मनीष, महेश, प्रकाश, प्रथम, पंकज, नंदू, महेन्द्र मैन आॅफ मैच सन्नी मैन आॅफ द टूर्नामेंट बने।

महिला सशक्तिकरण और समानता के लिए हिन्दुस्तान जिंक के लिए प्रयास अनुकरणीय – आईजी बिनीता ठाकुर

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महिला सशक्तिरण और समानता के लिए हिन्दुस्तान जिंक के प्रयास अनुकरणीय है जिन्हें अन्य संस्थानों द्वारा भी अपनाना चाहिए। अपने साथ कार्य करने वाले कर्मचारियों के लिए स्वस्थ्य वातावरण बनाने के लिए हमें सामूहिक प्रयास करने चाहिए जिससे कार्यस्थल पर दक्षता से कार्य किया जा सके यह बात पुलिस महानिरीक्षक उदयपुर बिनिता ठाकुर ने हिन्दुस्तान जिंक में आयोजित अन्तर्राश्ट्रीय महिला दिवस कार्यक्रम में कहीं। ठाकुर ने मुख्य अतिथि के रूप में हिन्दुस्तान जिंक प्रधान कार्यालय से ईकनेक्ट के माध्यम से 300 से अधिक महिला कर्मचारियों से अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि जिस क्षेत्र में वह कार्यरत है वह एक चुनौती भरा जरूर था लेकिन असंभव नहीं। सभी महिलाएं यदि दृढता से आगे बढे तो किसी भी क्षेत्र में सफलता हासिल करना मुश्किल नहीं है। हिन्दुस्तान जिंक की इकाईयों से महिला कर्मचारियों के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कार्य करने के लिए उम्र मायने नहीं रखती, आत्मविश्वास के साथ उनके सहयोग से किसी भी क्षेत्र में कार्य से उसमें उपलब्धि हासिल की जा सकती हैं।
महिलाओं को आगे बढ़ाने एवं स वितरण के लिए कई प्रकार के कानून है। किसी भी कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर में महिला प्रतिनिधि अनिवार्य है। हम जिस क्षेत्र में कार्य करते है उसके वातावरण का महत्वपूर्ण योगदान होता है यदि हम चाहे तो 8 घण्टें में अपने कार्य को पूरा किया जा सकता है, क्योकिं एक महिला बहुत सारी जिम्मेदारी एक साथ एक ही समय पर निभाती है उसका समय पर घर जाना भी जरूरी है। परिवार का सहयोग भी किसी भी महिला के करियर में बहुत महत्वपूर्ण है जिससे वह सभी जिम्मेदारियों को आसानी से निभा सकती है। उन्होंने इस अवसर पर हिन्दुस्तान जिंक द्वारा वी सेफ एप और सेफ्टी किट को लांच करते हुए सराहना की एवं कहा कि इस नवाचार से पुलिस विभाग भी जुड़ेगा। इस अवसर पर हिन्दुस्तान जिंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुनील दुग्गल ने कहा कि हिन्दुस्तान जिंक महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए सदैव कटिबद्ध है, कंपनी में प्रत्येक क्षेत्र में महिलाओं को आगे बढ़ने के समान अवसर है जिसके लिए प्रत्येक कर्मचारी सहयोग और समानता प्रदान करता है। महिला कर्मचारियों से आव्हान करते हुए उन्होंने महत्वूर्ण पदों पर उनके योगदान के लिए स्वेच्छा से आगे आने और उन्हें स्वस्थ्य वातावरण और सहयोग हेतु वि वास दिलाया।
हिन्दुस्तान जिंक के उप मुख्य कार्यकारी अधिकारी अरूण मिश्रा ने कहा कि कंपनी के महिला और पुरुष कर्मचारियों में समानता की भावना है जो कि मिलकर लक्ष्य को प्राप्त करने की ओर अग्रसर है। हमें गर्व है कि हिन्दुस्तान जिंक में इकाईयों और प्रमुख पदों पर महिला कर्मचारी उच्च एवं मुख्य श्रेणी में कार्यरत है यदि हम सभी मिल कर प्रयास करें तो कुछ भी असंभव नही है। इस मौके पर वेदांता बोर्ड ऑफ डायरेक्टर प्रिया अग्रवाल हैब्बर ने इस कार्यक्रम को अभूतपूर्व बताते हुए महिला कर्मचारियों की सुरक्षा के हित में लांच किये गये सेफ्टी एप के लिए बधाई दी एवं महिला सशक्तिरण के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया। हिन्दुस्तान जिंक की चीफ ह्यूमन रिसोर्सेस ऑफिसर कविता सिंह ने कहा कि समानता हिंदुस्तान जिंक के डीएनए में है। अलग अलग कार्यानुभव और पृष्ठभूमि के साथ लोग जब एक साथ आते हैं तो टीम मिलकर जमीनी स्तर पर विचारों को विकसित कर सकती है। कार्यस्थल पर विविधता भी अनिवार्य है। हिन्दुस्तान जिंक को पुरुषों और महिलाओं के समान प्रतिनिधित्व के लिए जाना जाता है। हमें गर्व है कि हिन्दुस्तान जिंक में वर्तमान में कर्मचारियों में 14 प्रतिशत डायवरसिटी है। कार्यक्रम में हिन्दुस्तान जिंक द्वारा लांच किये गये वीसेफ एप को डाउनलोड कर महिला कर्मचारियों द्वारा किसी भी आपात स्थिति में अपने निकटतम परिजन, कर्मचारी या मित्र से सहयोग के लिए 5 व्यक्तियों तक तुरंत मदद पहुंचाने के लिए मोबाईल में पेनिक बटन को दबाने या निर्धारित तरिके से हिलाने पर सायरन बजने की सुविधा सहित, लोकेशन और एमरजेंसी नंबरो तक फोन, मेल एवं मैसेज भी पहुंचेगा जिससे त्वरित गति से सहायता मिल सके। इस एप को पुलिस विभाग के महिला सुरक्षा एप से भी जोडा जाएगा। साथ ही इस मौके पर लांच किए गये सेफ्टी किट को सभी महिला कर्मचारियों को पेपर स्प्रे, शॉक देने वाली स्टनगन, आत्मरक्षा हेतु उपकरण कनकल, व्हीसल एवं एलईडी टार्च भी दिया गया। इस मौके पर महिला डॉ राजीन्दर कौर सग्गु द्वारा सभी कर्मचारियों को स्तन कैंसर के लक्षण, बचाव एवं उपाय के बारें में जानकारी दी। कार्यक्रम में हिन्दुस्तान जिंक की सभी इकाईयों की 50 से अधिक महिला कर्मचारियों को उनकी विशिष्ट उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया गया। महिला कर्मचारियों के साथ समानता और सशक्तिरण एवं इस वर्श के अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस के विषय आई एम जनरेशन इक्वेलिटी: रियलाइजिंग वूमेन्स राईट्स पर मुख्य वित्तीय अधिकारी स्वयं सौरव हेड एचएसई-राजेन्द्र सिंह आहुजा, हेड-आईटी चेतन त्रिवेदी, हिन्दुस्तान जिंक की सभी इकाईयों के आईबीयू डायरेक्टर चंदेरिया स्मेल्टिंग कॉम्प्लेक्स-पंकज कुमार शर्मा, कायड़ माइन-संजय खटोड़, रामपुरा आगुचा-सुजल शाह, जावर माइन-बलवंत सिंह राठौड, राजपुरा दरीबा कॉम्प्लेक्स-प्रवीण जैन, देबारी स्मेल्टर से अनिल त्रिपाठी एवं पंतनगर मेटल्स से रविश कुमार ने अपने विचार साझा किये। कार्यक्रम का संचालन लीड कार्पोरेट कम्यूनिकेशन मैत्रेयी सांखला, हेड-एचआर दरीबा की रूही शेरवानी एवं सेफ्टी विभाग की हंसा व्यास ने किया।

80 साल की उम्र में भी सफल होता है घुटने का प्रत्यारोपण – मरीजों को है मेवाड़ हॉस्पिटल में विश्वास।

उदयपुर। उदयपुर संभाग का मेवाड़ ऑर्थोपेडिक हॉस्पिटल एक ऐसा हॉस्पिटल है जहाँ हड्डियों से जुडी हर समस्या हर बिमारी का इलाज ऑर्थोपेडिक स्पेशलिस्ट डॉक्टरों के द्वारा किया जाता है। मरीज जिस विश्वास के साथ मेवाड़ हॉस्पिटल में अपना इलाज करवाने के लिए आता है उसी विश्वास के साथ उसका इलाज किया जाता है। मेवाड़ ऑर्थोपेडिक हॉस्पिटल के मेनेजिंग डायरेक्टर डॉ. मनीष छापरवाल का कहना है कि मेवाड़ हॉस्पिटल की राजस्थान और मध्यप्रदेश सहित 11 शाखाएं है जहाँ एक ही ध्येय है कि ज़िन्दगी दर्द रहित हो और उसके लिए हम प्रतिबद्ध है।
हर उम्र के मरीज़ हड्डियों से जुडी अपनी समस्या लेकर आते है और समस्या से छुटकारा पा कर यहाँ से जाते है। डॉ छापरवाल बताते है कि मुख्यतः 80 वर्ष से ऊपर के वृद्धों में घुटनों की समस्या आम हो चली है, लेकिन इसके साथ ही साथ हमारे समाज के हर तबके में यह भ्रान्ति फेली हुई है कि 80 वर्ष से ऊपर के मरीजों का घुटना प्रत्यारोपण सफल नहीं होता जबकि हमारे यहाँ विशेषज्ञों द्वारा 80 से 90 वर्ष तक के वृद्धो का सफल इलाज किया जाता है।
डॉ मनीष छापरवाल के इस दावे की सच्चाई जानने के लिए उदयपुर पोस्ट की टीम ने 80 से 90 वर्ष के मरीजों और उनके परिजनों से इसकी सच्चाई जानी तो चोंकाने वाले परिणाम सामने आये। जब मरीजों और उनके परिजनों से मेवाड़ हॉस्पिटल से जुड़े अपने अनुभव साझा करने को कहा तो उनके चेहरे की ख़ुशी और संतोष देखते बनता है।

डूंगरपुर जिले के सागवाड़ा कसबे के मनीष पंड्या बताते है कि मेरी माँ की उम्र 85 वर्ष है उनके घुटने की तकलीफ इस तरह थी कि उन्हें या तो सहारे से चलाना पड़ता था या फिर उठा कर इधर उधर ले जाना पड़ता था। कई हॉस्पिटल में बताया इलाज घुटना प्रत्यारोपण ही बताया। लेकिन उम्र अधिक होने ली वजह से हम यह निर्णय नहीं ले पा रहे थे कि ओपरेशन करवाना चाहिए या नहीं और किस भी अस्पताल के डॉक्टर ने हमे विशवास नहीं दिलाया. लेकिन इसी वर्ष जनवरी माह में हम अपनी माँ को मेवाड़ हॉस्पिटल के डॉ मनीष छापरवाल को दिखाने के लिए आये उन्होंने घुटना प्रत्यारोपण का कहा और पूरा विशवास दिलाया कि आपकी माँ बिलकुल स्वस्थ हो जायेगी। उन्होंने माँ के दोनों पेरों का प्रत्यारोपण किया और महज़ सात दिनों में ही माँ को अपने पेरों पर चलता कर दिया। मनीष पंड्या बताते है कि ये डॉ मनीष छापरवाल का ही विश्वास था की उन्होंने इतनी उम्र में माँ के घुटने का सफल इलाज किया। ऐसे ही भीलवाड़ा से आये 87 साल के सालेह मोहम्मद कहते है कि में अपने घुटनों की वजह से पिछले सात सालों से परेशान था लेकिन अधिक उम्र में ओपरेशन नहीं करवाने की भ्रान्ति के चलते ओपरेशन नहीं करवाया. लेकिन जब यहाँ पर डॉ मनीष छापरवाल के पास दिखाने के लिए आये तो उन्होंने हमे विशवास दिलाया कि अधिक उम्र से कोई फर्क नहीं पड़ता हम आधुनिक तकनीक से आपका सफल ओपरेशन करेगें और आज छह माह हो गए है ओपरेशन को एसा लगता है मानो मेरी टांगों में नयी जान आगई मुझे एक नया जीवन मिल गया। इसी तरह उदयपुर शहर के ही अम्बामाता स्कीम में रहने वाले राजेन्द्र सिंह राव बताते है कि उनके दादा के घुटनों का प्रत्यारोपण 86 वर्ष में चार माह पहले ही मेवाड़ हॉस्पिटल में डॉ मनीष छापरवाल द्वारा करवाया जो की सफल है और दादा चल फिर सकते है। बांसवाडा की सुमित्रा दवे बताती है की 79 साल में उनकी माँ का घुटना प्रत्यारोपण हमने मेवाड़ अस्पताल में करवाया आज 11 माह हो गए है माँ स्वस्थ है और आराम से अपने पेरों से चल सकती है  माँ को एक नया जीवन मिल गया हो एसा लगता है।
डॉ मनीष छापरवाल कहते है कि यह सिर्फ भ्रान्ति है कि आहार 80 वर्ष से अधिक की आयु हो तो घुटनों का सफल ओपरेशन नहीं हो सकता लेकिन हमने इसे कई ओपरेशन किये है जिसमे मरीज की उम्र ८० से ९० के बिच है और उनके घुटनों का सफल प्रत्यारोपण किया है।

43वीं खान सुरक्षा, स्वच्छता एवं सिलिकोसिस जागरूकता सप्ताह का आयोजन

खान सुरक्षा महानिदेशालय उदयपुर के तत्वाधान में दिनांक 9 से 16 फरवरी तक क्षेत्र की विभिन्न भूमिगत खदानों में 43 वी खान सुरक्षा, स्वच्छता एवं सिलिकोसिस जागरूकता सप्ताह का आयोजन किया गया । इस सप्ताह में भूमिगत खदानों का निरीक्षण किया गया व विभिन्न ट्रेड टेस्ट एवं प्राथमिक सहायता प्रतियोगिताओं का आयोजन दरीबा खान परिसर में किया गया जिसमें सभी भूमिगत खदानों के तकरीबन 200 प्रतियोगियों ने भाग लिया एवं प्रतियोगियों को विजेता घोषित किया गया । इस सप्ताह का समापन समारोह 1 मार्च को जावर माइंस के जावर स्टेडियम में आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री मनीष मुरकुटे डिप्टी डायरेक्टर जनरल थे एवं अध्यक्षता श्री लक्ष्मण सिंह शेखावत डायरेक्टर ऑपरेशन ने की। जावर माइंस मजदूर संघ के महामंत्री श्री लालू राम मीणा, श्री अशोक पोरवाल, निदेशक खान सुरक्षा , जावर डाइरेक्टर श्री बलवंत सिंह राठौड़ एंव खान सुरक्षा निदेशालय के अधिकारी इस कार्यक्रम में शरीक हुए आज के कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री मनीष मुरकुटे ने आने वाले समय में भूमिगत खदानों में बढ़ते हुए मैकेनाइजेशन के कारण होने वाले खतरों एवं इनसे निपटने के उपायों के बारे में आगाह किया । भारत सरकार द्वारा महिला अभियन्ताओं को भी भूमिगत खानो में सुपरवाइजरी कार्य करने की अनुमति गत वर्ष से दी गयी और हिंदुस्तान जिंक ने इसमें एक अग्रणी भूमिका निभाई है। इस कार्यक्रम में हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड में कार्यरत महिला खनन अभियंताओं को विशेष तौर पर सम्मानित किया गया।

मुख्य अतिथि श्री मनीष मुरकुटे ने कहा कि उनका यह सपना है कि आने वाले समय में कोई महिला अभियंता माइंस मैनेजर के पद को भी सुशोभित करें ।

जावर माइंस मजदूर संघ के महामंत्री श्री लालू राम मीणा ने महिलाओ के लिए भूमिगत खदानों में विभिन्न ट्रेड्स में काम करने के लिए अनुमति प्रदान करने की अनुशंसा भारत सरकार से करने का अनुरोध किया। डायरेक्टर श्री लक्ष्मण सिंह शेखावत ने इस मौके पर सुरक्षा महानिदेशालय को यह आश्वासन दिया कि आने वाले समय में बैट्री ऑपरेटेड मशीनो का इस्तेमाल भूमिगत खदानों मैं प्रायोगिक तौर पर बहुत जल्दी ही शुरुआत की जाएगी उन्होंने खदानों में खुले स्टॉपिंग एरिया को वेस्ट फीलिंग द्वारा भरकर ग्लोबल स्टेबलाइजेशन सुनिश्चित करने का आश्वासन भी दिया इस कार्यक्रम के कन्वीनर श्री ए के पोरवाल डायरेक्टर माइंस सेफ्टी ने बहुत कम समय में इस कार्यक्रम को सफलतापूर्वक आयोजित करने के लिए हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड मैनेजमेंट को धन्यवाद दिया एवं महिलाओं को भूमिगत खदानों में अनुमति प्रदान किए जाने को 1 साल पूरा हो जाने के इस अवसर पर महिला अभियंताओं को बधाई दी

इस कार्यक्रम में जावर माइंस डायरेक्टर श्री बलवंत सिंह राठौड़ ने मुख्य अतिथि को हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड जावर माइंस का आदित्य स्वीकार करने के लिए आभार व्यक्त किया। अपने स्वागत भाषण में उन्होंने अध्यक्ष श्री लक्ष्मण सिंहशेखावत साहब एवं बाहर से पधारे विभिन्न खदानों के प्रतिनिधियों एवं विशेष तौर पर महिला खनन अभियंताओं का स्वागत किया। इस अवसर पर हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड के साथ काम कर रहे विभिन्न बिजनेस पार्टनर्स द्वारा 17 स्टालस लगाई गई जिसमें आधुनिक तकनीक युक्त मशीनों एवं विभिन्न नए-नए सुरक्षा साधनों का प्रदर्शन भी किया गया। स्टॉल्स के प्रदर्शन को मुख्य अतिथि द्वारा भी सराहा गया

Get rid of your hungover legs with homoeopathy – Dr. Kajal Verma

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Calf: The belly or fleshy hind part of the back of the leg below the knee. The calf is made up mainly of the gastrocnemius muscle. Pain in the calf is commonly caused by muscle strain, but can be caused by blood clots in veins of the legs.

CAUSES OF CALF PAIN
A variety of conditions and situations can cause calf pain, including:

1. Muscle cramp
Muscle cramps in the calf are a common complaint for those who exercise frequently.

डॉ. काजल वर्मा

Calf muscle cramps are usually temporary but can cause significant pain and discomfort.It may occur due to
dehydration
a loss of electrolytes through sweating
lack of stretching
prolonged physical activity
weak muscles

2. Muscle strain
A calf muscle strain occurs when the muscle fibers in the calf tear either partially or completely.

The symptoms will vary depending on the severity of the strain, but most people will experience sudden, sharp pain and tenderness at the calf muscle site.

3. Arterial claudication
A person may experience calf pain due to narrowing or blockages in the arteries that supply blood flow to the legs. This is known as arterial claudication.

Arterial claudication may cause pain while walking, as this movement requires blood to flow to the lower legs.

If the blood has difficulty moving due to narrowing (claudication), a person may experience calf pain.

A person with arterial claudication will experience no discomfort at rest, but pain after a few minutes of walking.

4. Neurogenic claudication
Neurogenic claudication occurs when the nerves that go to the legs are pinched, affecting their ability to communicate with the lower legs.

Neurogenic claudication is often due to a condition called spinal stenosis.This condition occurs when the bones in the spinal column narrow, placing extra pressure on the nerves. Sciatica is one example of neurogenic claudication.

In addition to calf pain, neurogenic claudication symptoms include:

*pain while walking
*pain after prolonged *standing
*pain that also occurs in the thighs, lower back, or buttocks
*pain that usually improves when a person leans forward at the waist
*A person may also experience calf pain from neurogenic claudication when at rest.

5. Achilles tendinitis
The Achilles tendon is a tough, fibrous band that connects the calf muscle to the heel bone.

If a person’s calf muscles are especially tight, this may put extra pressure on the Achilles tendon. As a result, a person can experience calf pain.

People are more likely to experience Achilles tendinitis if they have recently started an exercise program or they perform repetitive exercises.

Frequent stretching can often help to reduce symptoms.

6. Compartment syndrome
Persistent pain in the calf should be addressed by a doctor.
Compartment syndrome is a painful condition that can occur in the calf muscle or in both legs, usually after a person has experienced a trauma or severe injury.

It occurs when excess blood or fluid builds up underneath a band of tough tissues in the body that cannot stretch very well. This fluid places extra pressure on the nerves and blood vessels in the lower leg, causing pain, swelling, numbness, and tingling.

Another form of compartment syndrome is chronic or exertional compartment syndrome. This type occurs when a person experiences pain while exercising.

Symptoms associated with chronic compartment syndrome include numbness, visible bulging or enlarging of muscles, or trouble moving the foot.

7. Diabetic neuropathy
Diabetic neuropathy is a condition that occurs when a person experiences nerve damage related to diabetes.

Frequently high blood sugar levels can damage the body’s nerves, usually beginning with the hands and feet.

Sometimes, the tingling and numbness can cause shooting pain and discomfort that radiates to the calf muscles.

8. Plantar fasciitis
Plantar fasciitis is a condition that affects the plantar fascia tissue located on the bottom of the foot.

If the calf muscles are too tight, a person may be more likely to experience plantar fascia because the calf muscles cannot support the foot.

The most common symptoms of plantar fasciitis are foot pain when waking and difficulty flexing the foot.

9. Varicose veins
Varicose veins are enlarged veins that often bulge from the legs and may look like cords. They develop when damaged valves in a person’s veins allow blood to backflow.

Factors that contribute to varicose veins include:
*age
* family history
*hormone fluctuations
*pregnancy
*obesity
*lack of physical activity
*Varicose most commonly appear in the legs and can cause pain, throbbing, cramping, and aching.

10. Deep vein thrombosis
Deep vein thrombosis (DVT) is the result of a blood clot that forms in one of the veins in the leg. This condition can cause severe pain and affect blood flow to the legs.

People are more likely to develop DVT if they have been sitting for long periods, such as on a flight, or if they have high blood pressure or blood clotting disorders.

Symptoms of DVT include *calf pain that usually gets worse when standing or walking.
*A person’s leg may also swell and have a red or inflamed area due to the problems with blood flow.

TREATMENT
People can treat calf pain that is the result of injury or overuse using the PRICE method. This stands for:

Protection: Apply a cloth bandage, splint, or immobilizer to the foot, ankle, or calf to protect the injury and allow the muscles to rest.
Rest: Avoid using the calf muscle more than necessary.
Ice: Apply a cloth-covered ice pack for 10 to 15 minutes at a time to help reduce inflammation.
Ice packs are available to buy in pharmacies and online.
Compression: Wrap the calf in a stretchy, tight bandage or wear a compression stocking to reduce swelling.
Elevation: Elevate the leg on pillows to help promote circulation and reduce swelling.
Other causes of calf pain may be treated with medications or other medical procedures, depending on the underlying cause.

A person should seek emergency medical treatment if they suspect they have DVT.

HOMOEOPATHIC APPROACH
Homeopathy is a system of medicine which is very holistic in nature. The goal of homeopathy is to focus on the causes of a disorder rather than just curing the symptoms. Homeopathic remedies do not yield any side effect unlike the conventional treatments. Apart from treating the symptoms, homeopathic remedies also help improve your overall wellbeing.

There are many homeopathic remedies that can be used to treat leg cramps. The remedies are focused on treating any underlying condition that may be causing these leg cramps, apart from relieving the symptoms. The first step of the treatment is to diagnose the condition, which is done by a trained practitioner. You will be asked questions pertaining to the cramps and your diet. Once the diagnosis is complete, the medications are prescribed based on the diagnosis.

The various Homeopathic offerings are:

Causticum

Calcarea carbonica

Arsenicum album

Colocynthis

Pulsatilla Nigricans

Arnica montana

In case you have a concern or query you can always consult an expert & get answers to your questions!

Hindustan Zinc awarded at 2nd India Procurement Leadership Forum & Awards 2020

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Ms. Amrita Singh, Head Domestic Marketing – HZL, was conferred with “Woman Procurement Leader” at 2nd India Procurement Leadership Forum & Awards 2020. The One Lakshya corporate team set up for commercial and marketing initiatives was also awarded in the innovation category. SCM pro is a thought leadership knowledge portal of Institute of Supply Chain & Management Pvt Ltd (ISCM). ISCM is India`s premier supply chain education, research, and consulting firm. It was established in the year 2009 as a center for excellence in supply chain management and logistics. The summit witnessed India’s Premier Gathering of CPO’s and Senior Procurement Professionals from across the Indian business landscape.