आरटीई को लेकर केंद्र व राज्य सरकार से जवाब – तलब

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निजी स्कूलों पर कार्रवाई की तैयारी
उदयपुर। शिक्षा के कानून के तहत अब निजी स्कूलों की बहानेबाजी पर शिकंजा कसता जा रहा है और प्रवेश देने व निशुल्क पाठ्य सामग्री देने में आनाकानी कर रहे स्कूलों पर कार्रवाई की जा सकती है। एक तरफ अभी हाल ही में उदयपुर जिले के 330 स्कूलों ने शिक्षा का अधिकारी (आरटीई) के तहत ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन नहीं होने पर जिला कलेक्टर ने सख्त रवैया अपनाते हुए सख्त कार्रवाई के आदेश दिए थे। अब इधर, हाईकोर्ट ने भी शिक्षा के कानून का सही ढंग से पालन नहीं होने पर केंद्र व राज्य सरकार से जवाब-तलब कर लिया है।
अदालत ने केंद्र सरकार के एचआरडी विभाग के सचिव, राज्य के मुख्य सचिव, प्रमुख शिक्षा सचिव, प्रारंभिक व माध्यमिक शिक्षा निदेशक सहित केंद्रीय विद्यालय संगठन को नोटिस जारी किए हैं। अदालत ने यह अंतरिम आदेश प्रोफेसर राजीव गुप्ता व हैल्पिंग हैंड्स ग्रुप की जनहित याचिका पर दिया। जानकारी के अनुसार आरटीई कानून 2009 में बना और एक अप्रैल, 2010 से लागू हो गया, लेकिन प्रदेश में सरकारी व निजी स्कूलों में इस कानून का पालन नहीं हो रहा।
प्रदेश में निजी स्कूलों द्वारा किए गए प्रवेश की जानकारी के लिए कोई कॉमन प्लेटफार्म नहीं है। सरकार ने निशुल्क शिक्षा के लिए 2011 में नियम बनाए थे, लेकिन नियमों में निशुल्क को सही तरीके से परिभाषित नहीं किया है और स्कूलों में इस कानून के तहत दिए बच्चों के साथ भेदभाव हो रहा है, जिस कारण बच्चे बीच शैक्षणिक सत्र में ही स्कूल छोड़ देते हैं। राज्य के शिक्षा नियमों के अनुसार एक किमी की दूरी पर प्राइमरी स्कूल व दो किमी की दूरी पर मीडिल स्कूल का प्रावधान है, लेकिन इन प्रावधानों का पालन भी नहीं हो रहा। इसलिए प्रदेश में सरकारी व निजी स्कूलों में आरटीई कानून के प्रावधानों का पालन करवाया जाए। इधर, मंगलवार को जिला शिक्षाधिकारियों की जिला कलेक्टर आशुतोष पेढणेकर के साथ हुई बैठक में जिला कलेक्टर ने शिक्षा के कानून के तहत निजी स्कूलों द्वारा हो रही अनियमितताओं पर सख्त नाराजगी जताते हुए कार्रवाई के आदेश दिए थे। क्योंकि जिले में 330 स्कूलों ने अभी तक आरटीई के तहत अपना रजिस्ट्रेशन ही नहीं करवाया है, जिससे गरीब बच्चों के प्रवेश की स्थिति भी स्पष्ट नहीं हो पा रही है। कलेक्टर ने जल्द ही कार्रवाई कर रजिस्ट्रेशन करवाने की बात कही थी। अन्यथा स्कूलों की मान्यता तक रद्द की जा सकती है।

ऊपर-नीचे मौत की लपटें : ऐसे जान बचाई 500 लोगों ने

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सूरत। शहर के कडोदरा राजमार्ग क्षेत्र स्थित लेन्डमार्क टेक्सटाइल मार्केट में बुधवार शाम आग भड़क गई। जान बचाने के लिए कई लोग नीचे कूद गए। इनमें से एक व्यक्ति की मौत हो गई वहीं 22 लोग घायल हो गए हैं। आग भड़कने की वजह से 200 लोग होटल में फंस गए थे।
ज्यादातर लोगों ने खिड़कियों से बाहर लटककर जान बचाई। निचली मंजिलों के लोगों ने जान जोखिम में डालकर बचाव कार्य किया और सैंकड़ों लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला।
मौत को मात देकर बाहर निकले लोगों ने बताया कि आग लगने के बाद उन्हें कुछ सूझ नहीं रहा था कि क्या करें। लगभग 500 से अधिक लोग खिड़कियों की ग्रिल से तार बांधकर नीचे उतरे। हालांकि निचली मंजिल के कर्मचारी और स्थानीय लोग बचाव कार्य में लगे हुए थे। कुछ ही देर में मौके पर पहुंची फायर ब्रिगेड ने लगभग तीन-चार घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।
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कठपुतली कला ने खोया अमूल्य पारखी

Shyam maliलोक कला मण्डल के सहायक निदेशक श्याम माली का निधन
उदयपुर। लोक कला मंडल एवं कठपुतली कला में प्राण फूकने वाले महान कलाविज्ञ श्याम माली का मंगलवार देर रात हृदयगति रूक जाने से निधन हो गया। बुधवार को उनका अंतिम संस्कार कुम्हारों का भट्टा स्थित मोक्ष धाम में किया गया।
वर्तमान में लोक कला मण्डल के सहायक निदेशक के पद पर कार्यरत श्याम माली करीब तीन दशकों से कला मण्डल से जुडकर लोक कलाओं में प्राण फूंकते रहे। उन्होंने कठपुतली कला को जीवंत बनाए रखने के लिए वे अंतिम समय तक प्रयासरत रहे। उन्होंने प्रौढ शिक्षा, बाल विवाह, बाल श्रमिक सहित कई सामाजिक कुरूतियों के विरूद्घ कठपुतली के माध्यम से जन जाग्रति अभियान चलाकर समाज में व्याप्त कुरीतियों को दूर करने का प्रयास किया।
उन्होंने अपनी कई विदेश यात्राओं में भी राजस्थानी कठपुतली को विश्व रंगमंच पर स्थापित करने में अपना योगदान दिया। साहित्य अकादमी अवार्ड प्राप्त श्याम माली ने वर्तमान में स्वामी विवेकानंद के जीवन वृत्त पर एक कठपुतली नाटिका निर्मित कर पूरे भारत वर्ष में स्वामी विवेकानंद के सिद्घांतों के प्रचार प्रसार में अहम भूमिका निभाई थी। अब तक इस नाटिका के अब तक करीब १५० मंचन अब तक भारत में हो चुके है एवं वर्तमान में भी जारी है। आगामी मई माह में उनको इसी नाटिका के प्रदर्शन के लिए अमेरिका जाना था। जिसके लिए कलाकारों को उन्होंने बुधवार से तैयारी के निर्देश दिए थे। उनके असामायिक निधन से लोक कला एवं कठपुतली विधाता के अमूल्य पारखी की कमी हो गई है जिसकी क्षतिपूर्ति संभव नहीं है।
उनकी शवयात्रा में कला मण्डल के मानद सचिव रियाज तहसीन, पश्चिम सांस्कृतिक केन्द्र के वरिष्ठ कार्यक्रम अधिकारी लईक हुसैन, विलास जानवे, कला मण्डल कार्यकारिणी के जकारिया, रफीक एम. पठान सहित कई रंगमंच से जुडे कई कलाकार एवं समाजसेवियों एवं बुद्घिजीवियों ने भाग लेकर उनके अंतिम विदाई दी। वे अपने पीछे एक पुत्र-पुत्री एवं पत्नी को छोड गए है। उनको मुखाग्नि उनके पुत्र वैभव माली ने दी।

थानों में जब्त वाहन हुए कबाड़!

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जिले के थानों में १००० से अधिक वाहन लावारिस पड़े, पुलिस वाले चुरा रहे जब्त वाहनों के पाटर््स
उदयपुर। जिले के पुलिस थानों में जब्त एक हजार से अधिक वाहन कबाड़ में तब्दील हो गए हैं। इसमें से अधिकतर वाहन पुलिस द्वारा चोरों या फिर दुर्घटना के दौरान जब्त किए गए है। वाहन जब्ती के समय तो ठीक-ठाक हालत में होते हैं, लेकिन वर्षों से खुले में पड़े होने के कारण इनकी हालत कंडम हो चुकी है। पता चला है कि हादसे या चोरों से जब्त वाहनों में से दस फीसदी ही उनके मालिक तक पहुंच पाते हैं। जब्त वाहनों को उनके मालिक तक पहुंचाने के लिए पुलिस दिलचस्पी नहीं दिखाती। जिसके चलते थानों के एक हिस्से में पड़े वाहन कबाड़ बनते जा रहे हैं। इन वाहनों की स्थिति इस प्रकार की हो चुकी है कि इन्हें केवल कबाड़ी ही खरीद सकता है, वो भी केवल कबाड़ के भाव में, क्योंकि उन्हें सही करना किसी भी मिस्त्री के हाथ में नहीं है।
गायब हैं पाटर््स : जब्त वाहन की हालत प्रारंभ में ठीक ही होती है, लेकिन थानों में पहुंचने के बाद इनकी हालत कबाड़ हो जाती है। थानों में मोटर साइकिल की जब्ती अधिक होती है। अधिकतर वाहन अब अधूरे है, किसी के टायर गायब है, तो किसी का हैडलाइट, तो किसी का साइलेंसर। इससे पता चलता है कि इसके पार्ट पुलिसकर्मी अपने वाहनों की जरूरत के हिसाब से गायब कर लेते हैं।
नीलामी भी नहीं करते : जब्त वाहनों को उनके मालिकों द्वारा नहीं छुड़वाने पर नीलाम करने का प्रावधान है, लेकिन विभाग द्वारा इस कार्य में सुस्ती बरती जा रही है, जिससे थानों में वाहनों की संख्या बढ़ती जा रही है। जिले के कई थानों में पड़े वाहनों का तो रिकार्ड भी नहीं मिलता है।
सभी प्रकार के वाहन : जिले के थानों में मोटर साइकल ही नहीं, बल्कि रिक्शा, टैम्पो, टैक्सी, जीप बोलेरो सहित कई वाहन नजर आ जाते हैं। इनकी भी हालत पूरी तरह से कंडम हो चुकी है। इसमें केवल नए वाहन ही सही सलामत है, लेकिन कुछ समय निकलने के बाद वह भी कबाड़ बन जाते हैं।
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क्या कहते हैं एसपी साहब
॥ सवाल – थानों में पड़े वाहनों की नीलामी क्यों नहीं की जाती है?
जवाब – थानोंं में जब्त किए गए वाहनों की नीलामी के लिए कोर्ट से आदेश आते हैं। कोर्ट में लंबे समय तक केस चलने के कारण थानों में वाहनों के संख्या बढ़ती जा रही है।
॥ सवाल – पुलिस वाहनों के मालिकों को खोजने के क्या प्रयास कर रही है?
जवाब – पुलिस चोरी के वाहनों के चेचिस नंबर के आधार पर आरटीओ से ब्योरा मांग कर उनके मालिकों को सूचना देती है। जिस पर वाहन मालिक उसके वाहन के कागज कोर्ट में पेश कर वाहन को ले जा सकता है। यह प्रयास निरंतर किया जाता है। जिससे वाहन उनके मालिकों तक पहुंच सके।
॥ सवाल – थानों ने वाहनों के पार्ट गायब क्यों जाते है?
जवाब – थानों में से वाहनों के पार्ट चोरी होने की अभी तक कोई भी शिकायत नहीं मिली है, लेकिन अगर कोई व्यक्ति इस प्रकार की शिकायत करता है, तो मामला दर्ज किया जाएगा। थाना स्तर पर मामला दर्ज नहीं होने पर वह कोर्ट से मामला दर्ज करा सकता है।

निजी स्कूल मालिक और सरकार आमने-सामने

आरटीई के तहत भर्ती बच्चों को पाठ्य सामग्री देने को तैयार नहीं निजी स्कूल
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उदयपुर। एक तरफ तो राज्य सरकार ने निजी स्कूलों को आरटीई के तहत प्रवेश पाने वाले विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तकें नि:शुल्क देने का प्रावधान किया है । दूसरी तरफ निजी स्कूल वाले अपनी मनमानी पर अड़े हुए है, और छात्रों को पाठ्य पुस्तकें नहीं देकर सरकार के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जाने का फैसला कर रहे है।
शहर के अधिकांश स्कूल सरकार के इन निर्देशों की पालना नहीं कर रहे है। ऐसे में गरीब बच्चों के माता पिता की मुश्किलें बढ़ गयी है, उन्हें ऊँचे दामों में पैसे उधार और जुगाड़ कर किताबें खरीदनी पढ़ रही है। गरीब एवं अभाव ग्रस्त बच्चों को नि:शुल्क प्रवेश तो मिल गया लेकिन अब स्कूल की मनमर्जी से उन्हें परेशानी उठानी पड़ रही है। कई स्कूलों में तो नया सत्र शुरू हुए 15-20 दिन हो गए लेकिन आरटीई में प्रवेश पाने वालों के पास अभी तक पाठ्य पुस्तकें नहीं हैं।

रोज कहते हैं किताब लाओ : आरटीई के तहत प्रवेश पाने वाले बच्चों को स्कूल में विषय अध्यापक रोजाना किताब लाने पर दबाव बना रहे हंै। अभिभावक स्कूल में जाकर पूछते हैं, तो स्कूल प्रबंधन न तो पुस्तक देने से स्पष्ट मना करते है और ना ही पाठ्य पुस्तक उपलब्ध करवाते हैं। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
कैसे खरीदें महंगी पुस्तकें : गरीब बच्चों के अभिभावकों की परेशानी यह है कि इतनी मंहगी किताबें आखिर वे कैसे खरीदें? नर्सरी, केजी क्लास की किताबों की कीमत भी 1200 से 3000 रुपए तक है। इतनी राशि जुटाना उनके लिए भारी पड़ रहा है।
नहीं तो देने पड़ेंगेे रुपए : विभागीय अधिकारियों के अनुसार अधिनियम के नए प्रावधानों में आरटी ई के तहत प्राइवेट स्कूलों प्रवेशित बच्चों को निशुल्क पाठ्य पुस्तकें व सहायक सामग्री उपलब्ध करवाना भी संबंधित स्कूल का दायित्व है। नहीं देने पर स्कूलों को दी जाने वाली प्रतिभूति राशि (नि:शुल्क प्रवेश के बदले) में से पाठ्य पुस्तकों की कीमत के बराबर राशि संबंधित छात्र को प्राप्त करने का अधिकार है।
विरोध में हैं निजी स्कूल : अभी हाल ही में निजी स्कूल के संगठनों ने हिरणमगरी की एक स्कूल में बैठककर निर्णय लिया था कि निशुल्क पाठ्यसामग्री उपलब्ध करवाने के विरोध में वह सुप्रीम कोर्ट तक जाएंगे और सरकार को अपना यह फैसला वापस लेने पर मजबूर करेंगे।

मच्छरों के साथ अब मच्छर मार घातक

अस्थमा, फिट्स और एलर्जी के बढ़ रहे कैसेज
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उदयपुर। मच्छरों के आतंक से बचने को अभी बेहतर हथियार समझे जाने वाली मॉस्किटो क्वॉयल अब उतनी पॉपुलर नहीं। वजह बाजार में आई लिक्बिड मॉस्किटो रेपलेंट ने तेजी से घरों में अपनी पहुंच बना ली है। सेफ्टी के दावों और पॉवर बच्चों तक की पंसद बन गए, लेकिन एड फिल्मों में मां के नजरिए से बेहद सुरक्षित और मच्छरों से बचाव के लिए बेहतर मानी जाने वाली यह लिक्विड असल में डाक्ॅटर्स की नजर में काफी खतरनाक है। इसके यूज करने के दौरान की जाने वाली असावधानियांं लोगों को न सिर्फ बीमार बना रही है, बल्कि लंबे समय तक इस्तेमाल करने पर ये जान के लिए भी खतरा साबित हो रही है।

क्वॉयल जितनी खरतनाक
धुआं छोडऩे वाली मॉस्किटो क्वॉयल से बेहतर ऑपशन माने जानी वाली लिक्विड रेंपलेंट भी बेहद खतरनाक है। मॉस्किटो क्वॉयल का धुआं, जहां आंख, कान और सांस की एलर्जी की वजह बनता है, वहीं इसे गलती से खा लेने पर एसिडिटी, उल्टी, पेट दर्द, लूज मोशन और ब्लीडिंग की प्रॉब्लम्स होती है। इससे शरीर में कमजोरी, मिर्गी के दौरे और अस्थमेटिक अटैक की प्रॉबलम्स वाले रोगियों की तादाद काफी तेजी से बढ़ रही है।

कंस्ट्रेटेड लेवल में खेल
लिक्विड रेपलेंट में यूज होने वाले केमिकल्स मच्छरों के साथ इंसान के लिए भी काफी खतरनाक होते हैं।
इनमें ट्रांसफ्लुथ्रिन, ब्यूटीलेटेड हाइड्रॉक्सी, टालुइन और डिऑड्राइज्ड केरोसिन का यूज होता है। डाक्टर में माने तो रेंपलेंट को एक निश्चित कंस्ट्रेटेड लेवल तक ही बनाया जा सकता है, जो इंसानों की सेहत के लिए खरतनाक ना हो, लेकिन ज्याद रिजल्ट दिखाने के लिए कई बार कंपनीज ज्यादा कंस्ट्रेटेड लेवल का रेपलेंट बनाती है, जबकि केमिकल कंपोजीशन में इसकी क्षमता कम दिखा दी जात है। वहीं बॉक्स में दिए स्लिप पर कंपोजीशन नेम बेहद छोटे होते हैं, ताकि पता ना चल पाए।
वेपर्स बन रहा है साइलेंट किलर
लिक्विड रेपलेंट में मौजूद वेपर्स ही मच्छरों से बचाव के इस जरिए को लोगों के लिए नुकसानदेह बना रहे हैं। दरअसल इंसान के फेफड़े एक निश्चित साइज वाले वेपर्स को ही सोखने की क्षमता रखता है, जबकि लिक्विड रेपलेंट से निकलने वाला वेपर्स का साइज बड़ा होत है, जो फेफड़े में पहुंचकर वहां जम जाते हैं। इन वेपर्स से अगर सावधानी नहीं रखी जाए, तो यह एक समय के बाद साइलेंट किलर की तरह काम शुरू कर देता है।

अवेरयनेस से ही बचाव
लिक्विड रेपलेंट का सावधानी से यूज करना ही इससे होने वाली बीमारियों से बचाव का कारगर तरीका है। डॉक्टर की माने, तो लोग मॉस्किटो क्वॉयल के यूज के लिए तो बेहद अवेयर रहते हैं, लेकिन लिक्विड रेपलेंट के मामले में काफी लापरवाही बरतते हैं। लिक्विड रेपलेंट के यूज के लिए सबसे पहले कमरे में प्रॉपर वेंटिलेशन होना बेहद जरूरी है। वही बेहद बुजूर्ग और छोटे बच्चों के कमरों में यूज करने समय भी काफी सावधानी बरतनी चाहिए। कमरे में वेंटिलेशन ना होने की सिचुएशन में इससे निकले वाले वेपर्स दम घुटने की भी वजह बनते हैं। वहीं ऐसे रोगी, जिनका इलाज चल रह हो और खाने के बाद उन्हें गहरी नींद आती हो। साथ ही एल्कोहल लेने वाले लोगों को भी इसके यूज में सावधानी बरतनी चाहिए।

वकील की पत्नी की हत्या

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चित्तौडग़ढ़ के हनुमान दरवाजे के पास मिली लाश
उदयपुर/चित्तौडग़ढ़। यहां किला रोड पर हनुमान दरवाजे के पास आज सुबह एक वकील की पत्नी की लाश मिली है। हत्या के बाद लाश को वहां फेंका गया था। मृतका के शरीर पर पहने गहने मौजूद है, जिससे लूट की आशंका भी नहीं जताई जा रही है। हत्या के कारणों का अभी पता नहीं चला है। पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया है।
पुलिस के अनुसार आज सुबह हनुमान दरवाजे के पास शास्त्री नगर निवासी वकील शंकरलाल सिंघवी की पत्नी कुमुद (४८) की लाश मिली है। मृतका के गले पर चाकू से वार किया गया है। घटनास्थल पर खून के निशान नहीं है। इससे पता चलता है कि हत्या करने के बाद लाश वहां फेेंकी गई थी। मृतका के शरीर पर पहने हुए सभी गहने मौजूद है, जिससे लूट की आशंका भी नहीं जताई जा रही है। हत्या के कारणों का पुलिस अभी पता लगा रही है। वकील शंकरलाल ने कल शाम को छह बजे कोतवाली थाने में उसकी पत्नी कुमुद की गुमशुदगी दर्ज कराई थी। कुमुद कल सुबह 11 बजे एलआईसी की किश्त जमा कराने के लिए घर से निकली थी। उसने किश्त भी जमा करवा दी, लेकिन बाद में उसका अपहरण कर लिया गया, जिसकी रात को हत्या के बाद शव हनुमान दरवाजे के पास फेंक दिया गया था। शंकरलाल पहले वकालात करते थे, लेकिन अभी उन्होंने प्रेक्ट्सि छोड़ दी है।
॥प्रथम दृष्ट्या लूट जैसा कोई मामला प्रतीत नहीं हो रहा है। अज्ञात के खिलाफ अपहरण और हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। हत्या के कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है।
-प्रसन्न कुमार खमेसरा, एसपी चित्तौडग़ढ़

मोदी चुनाव के बाद कांग्रेस के साथ काम करने को तैयार

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नमो ने कहा – सरकार की आर्थिक नीतियां जारी रहेंगी
लोगों ने पूछा – फिर क्यों हो अबकी बार मोदी सरकार
– डी भट्टाचार्य/पार्था घोष –
गांधीनगर/नई दिल्ली। नरेंद्र मोदी बीजेपी के नेतृत्व में एनडीए को बहुमत मिलने को लेकर आत्मविश्वास से भरे नजर आ रहे हैं। मोदी का कहना है कि कांग्रेस का सफाया होना ‘लगभग तयÓ है। हालांकि, चुनाव, नीतियों और गवर्नेंस के बारे में इकनॉमिक टाइम्स से बातचीत में मोदी ने कहा कि अभी जो जंग चल रही है, वह चुनाव के बाद बीजेपी और कांग्रेस के बीच सहयोग के आड़े नहीं आएगी। बीजेपी के पीएम कैंडिडेट ने क्रईटीञ्ज की ओर से ईमेल के जरिए भेजे गए तमाम सवालों के जवाब दिए और इस दौरान उन्होंने साफ तौर पर कहा कि ‘इन्वेस्टर सेंटिमेंटÓ की रक्षा करना उनकी टॉप प्रायॉरिटी है। उन्होंने यहां तक अगर रोजगार पैदा होंगे तो मल्टि-ब्रैंड रीटेल में भी एफडीआई का स्वागत है। उन्होंने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की तारीफ भी की और कहा कि पीएम के रूप में उनके नॉन-परफॉर्मेंस की वजह ‘अधिकार और स्वतंत्रताÓ की कमी थी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अगर वह सरकार में आए तो इकनॉमिक पॉलिसी की निरंतरता जारी रखेंगे।
जीत का भरोसा : चुनाव में जीत का भरोसा जताते हुए मोदी ने कहा, ‘कांग्रेस की हार तो तय है ही, वह अब तक की सबसे कम सीटों पर सिमटने जा रही है। मुझे आश्चर्य नहीं होगा अगर कांग्रेस किसी भी राज्य में 10 सीटें भी न जीत पाए। यह लगभग तय है कि राष्ट्रीय स्तर पर वह 100 के आंकड़े तक नहीं पहुंचेगी। बीजेपी और एनडीए, दोनों ही अब तक का अपना सर्वश्रेष्ठ करने जा रहे हैं। एनडीए के प्री-पोल अलायंस को साफ बहुमत मिलना निश्चित है।Ó
इकॉनमी में सुधार पहली प्राथमिकता : मोदी ने कहा कि इसमें कोई शक नहीं कि नई सरकार के सामने इकॉनमी की बुरी हालत से निपटने की चुनौती होगी। उन्होंने कहा कि उन्हें पता नहीं कि क्या यूपीए सरकार ने जान-बूझकर इकॉनमी को ऐसे हालत में छोड़ा है। हो सकता है कि यह कांग्रेस का तरीका हो कि आने वाली सरकार के लिए हालात मुश्किल करके जाएं।
कांग्रेस के साथ काम करने को तैयार : मोदी ने चुनाव के बाद कांग्रेस के साथ सहयोग का संकेत भी दिया। उन्होंने कहा, ‘मैच्योर नेता मिलकर काम करने की अहमियत समझते हैं।Ó मोदी ने कहा कि चुनाव के दौरान तो हमले तेज होते ही हैं। हमने यूपीए के 10 साल के दौरान फूड सिक्यॉरिटी बिल, भूमि अधिग्रहण बिल, लोकपाल बिल जैसे कई मुद्दों पर सरकार का साथ दिया। हमारे रिश्ते इतने भी नहीं खराब हुए हैं।
अच्छे वित्त मंत्री थे मनमोहन : मोदी ने ईटी से कहा, ‘मनमोहन सिंह ने नरसिंह राव सरकार में फाइनैंस मिनिस्टर के रूप में जो काम किए, उनके लिए मैं उन्हें निश्चित तौर पर श्रेय दूंगा। अगर उन्हें अधिकार और काम करने की स्वतंत्रता दी गई होती तो वह प्रधानमंत्री के रूप में भी अच्छा काम कर सकते थे। इसमें कोई संदेह नहीं है कि एक व्यक्ति के रूप में मैं उनका सम्मान करता हूं।Ó
एफडीआई पर सारे विकल्प खुले : मोदी ने कहा कि हमने मल्टि-ब्रैंड रीटेल में एफडीआई को लेकर आपत्ति जताई है, लेकिन हमारे मैनिफेस्टो में साफ तौर पर कहा गया है कि हम सभी सेक्टर्स में एफडीआई का स्वागत करेंगे। जहां भी हमें लगेगा कि एफडीआई से युवाओं के लिए रोजगार पैदा होगा, वहां हम इसे बढ़ावा देंगे।
इन्वेस्टर सेंटिमेंट सबसे अहम : मोदी ने कहा कि अगर वह सरकार में आए तो यह सुनिश्चित करेंगे कि निर्णय करने के मोर्चे पर निरंतरता रहे और ऐसा कोई मेसेज न दिया जाए जिससे फॉरेन इन्वेस्टर्स के सेंटिमेंट पर ‘बुरा असरÓ पड़े। मोदी ने कहा, ‘हम इन्वेस्टर सेंटिमेंट्स का ध्यान रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि ऐसा कोई मेसेज न जाए जिससे लगे कि अनिश्चितता और फैसले लेने की प्रक्रिया प्रॉसेस में निरंतरता की कमी है, जिनसे फॉरेन इन्वेस्टर्स सहित सभी निवेशकों के भरोसे पर बुरा असर पड़ता हो।Ó (साभार : एनबीटी)
गिरिराज और तोगडिय़ा के बयान से परेशानी
नई दिल्ली। हाल ही में बिहार बीजेपी नेता गिरिराज सिंह और फिर विश्व हिंदू परिषद के प्रवीण तोगडिय़ा के विवादास्पद बयानों की वजह से विरोधियों के निशाने पर आए नरेंद्र मोदी ने चुप्पी तोड़ी है। मोदी ने बिना किसी का नाम लिए सख्त लहजे में कहा है कि मैं इस तरह के किसी भी गैरजिम्मेदाराना बयान की निंदा करता हूं। उन्होंने तोगडिय़ा का नाम लिए बिना कहा कि बीजेपी के शुभचिंतक होने का दावा करने वाले लोगों के उल्टे-सीधे बयान पार्टी की चुनावी कैंपेन को डिवेलपमेंट और गुड गवर्नेंस के मुद्दे से भटका रहे हैं।
गौरतलब है कि वीएचपी के नेता प्रवीण तोगडिय़ा ने हिंदू बहुल इलाकों में घर खरीदने वाले मुसलमानों के खिलाफ जहर उगलते हुए बहुसंख्यकों को उकसाने वाला बयान दिया था। भावनगर में हिन्दू बहुल इलाके में घर खरीदने वाले मुस्लिम व्यापारी के विरोध में उनके घर के बाहर जमा वीएचपी और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं से तोगडिय़ा ने कहा कि अगर वह 48 घंटे में घर खाली नहीं करते हैं तो इस पर कब्जा कर लें। इस बयान के लेकर काफी बवाल मचा। बाद में तोगडिय़ा के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई।
इसके पहले एक चुनावी सभा में बिहार बीजेपी के नेता और नरेंद्र मोदी के बड़े समर्थक गिरिराज सिंह ने कहा था, ‘जो लोग नरेंद्र मोदी को रोकना चाहते हैं, वे पाकिस्तान की ओर देख रहे हैं। आने वाले दिनों में उनके लिए भारत में कोई जगह नहीं होगी। उनके लिए बस पाकिस्तान में जगह बचेगी।Ó उस रैली में गिरिराज सिंह के साथ बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष नितिन गडकरी भी मौजूद थे। इस मामले में गिरिराज के खिलाफ भी कई एफआईआर दर्ज किए गए हैं। इन दोनों के अलावा भी संघ परिवार से जुड़े कई लोगों ने विवादास्पद बयान दिए हैं। खासकर अल्पसंख्यकों के बारे में।
जब चुनावी प्रचार अपने चरम पर हैं ऐसे में ये विवादास्पद बयान नरेंद्र मोदी के लिए परेशानी पैदा करने लगे हैं। अब तक नरेंद्र मोदी ने खुद इस तरह की बयानों की निंदा नहीं की थी। लेकिन, जब इन बयानों को लेकर मीडिया का दबाव बढऩे लगा तो खुद सफाई देने सामने आए।
मंगलवार की सुबह उन्होंने ट्वीट कर कहा, ‘बीजेपी के शुभचिंतक होने का दावा करने वाले लोगों के उल्टे-सीधे बयान पार्टी की चुनावी कैंपेन को डिवेलपमेंट और गुड गवर्नेंस के मुद्दे से भटका रहे हैं।Ó इसके बाद अपने अगले ट्वीट में मोदी ने लिखा, ‘मैं इस तरह के किसी भी गैरजिम्मेदाराना बयान की निंदा करता हूं और उन लोगों से अपील करता हूं कि कृपया इस तरह के बयानों से परहेज करें।Ó

महाकाल ट्रस्ट पर फतहसागर में भराव डालने का आरोप

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पूर्व और वर्तमान अध्यक्ष के बीच जुबानी जंग

उदयपुर। महाकालेश्वर मंदिर ट्रस्ट द्वारा मंदिर के पीछे की जमीन का प्राकृतिक स्वरूप बिगाड़कर भराव फतहसागर झील में डाला जा रहा है। पिछवाड़े में जो निर्माण करवाया जा रहा है। उसकी कोई आवश्यकता नहीं है। ऐसे आरोप लगाते हुए जिला कलेक्टर और संभागीय आयुक्त को ट्रस्ट के पूर्व अध्यक्ष सहित कई लोगों ने वर्तमान अध्यक्ष व पदाधिकारियों के खिलाफ शिकायत की है।
जिला कलेक्टर को दिए गए ज्ञापन में बताया की मौजूदा ट्रस्ट द्वारा सारे नियमों को ताक में रखकर महाकाल के भक्तों की सहयोग राशि में दिए रुपयों का दुरूपयोग किया जा रहा है। मंदिर में बिना आवश्यकता के निर्माण कार्य करवाए जा रहे हैं। झील संरक्षण क्षेत्र होने के बावजूद भी निर्माण करवाया जा रहा है। मंदिर के पीछे जेसीबी से खुदाई कर भराव झील में डाला जा रहा है। ज्ञापन में यह भी बताया गया कि मौजूदा ट्रस्ट ने मंदिर में कई निर्माण ऐसे करवा दिए हैं जिनकी आवश्यता नहीं थी। वाहनों के आने पर रोक लगा दी है। निर्माण कार्य के लिए भक्तों से जो सहयोग राशि ली जाती है, उसका आज तक मौजूदा ट्रस्ट ने हिसाब-किताब नहीं दिया है।
पूर्व ट्रस्ट के अध्यक्ष दयाशंकर कुमावत ने कहा कि जिला कलेक्टर और संभागीय आयुक्त से मांग की गई है कि ट्रस्ट द्वारा करवाए जा रहे निर्माण कार्यों की जांच की जाए। ट्रस्ट द्वारा किए गए खर्च को सार्वजनिक किया जाए तथा महाकाल मंदिर के आसपास की जमीन का जो प्राकृतिक स्वरूप बिगाड़ा जा रहा है, उस पर रोक लगाई जाए। साथ ही झील में डाले जा रहे भराव को रोका जाए।

> सारे आरोप निराधार है। आज महाकाल मंदिर का विस्तार हो रहा है और बहुत अच्छा काम हो रहा है। ये विस्तार और कार्य कुछ गिने चुने लोगों को अच्छा नहीं लग रहा, जो ऐसे आरोप लगा रहे हैं। उनमें पूर्व अध्यक्ष दयाशंकर कुमावत भी शामिल है, जो अपने कार्यकाल के दौरान महाकाल की संपत्ति को निजी कामों में उपयोग में लिया करते थे। आने वाले समय में मंदिर के पीछे वाली जगह पर घाट बनाया जाएगा, जहां से बोटें संचालित की जाएगी। भक्त बोटिंग का आनंद लेते हुए महाकाल के दर्शन करने आ सकेंगे।
-तेजसिंह सरुपरिया, अध्यक्ष, महाकालेश्वर मंदिर ट्रस्ट

बारूद से उड़ाई जा रही है पहाडिय़ां!

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कहां से आ रहा है भारी मात्रा में प्रतिबंधित विस्फोटक ?
-अख्तर खान-
उदयपुर। हाईकोर्ट के आदेशों, मास्टर प्लान में शहर के आसपास की पहाडिय़ों को संरक्षित करने के बाद भी प्रशासनिक अधिकारियों की मिलीभगत से प्रतिबंधित विस्फोटकों के जरिये पहाडिय़ों को उड़ाया जा रहा है। निजी कॉलोनाइजर्स और भूमाफियाओं ने सैकड़ों पहाडिय़ों को प्लाटिंग, रिसोर्ट और होटल्स बनाने के लिए समतल कर दिया है। दूसरी तरफ, इनके संरक्षण के लिए प्रशासनिक पदों पर बैठे अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं। हाईकोर्ट के आदेशों के अनुसार वन क्षेत्र और निजी खातेदारी की पहाडिय़ों को सिर्फ विकास के लिए एक निश्चित ऊंचाई तक ही समतल किया जा सकता है।
चारों दिशाओं में समतल हो रही है पहाडिय़ां : पिछले कुछ सालों में जमीनों की दरें आसमान छूने लगी, तो भूमाफियाओं की नजर निजी खातेदारी और गैर खातेदारी की पहाडिय़ों पर पड़ी। चित्रकूटनगर के पास रघुनाथपुरा की कई पहाडिय़ां, ईसवाल हाइवे के आस-पास की पहाडिय़ां, उमरड़ा और नाई के आगे खेड़ा गांव तक पहाडिय़ों में बारूद भरकर उन्हें उड़ाकर समतल कर दिया गया है। इन पर प्लाटिंग काटी जा रही है, रिसोर्ट और होटल्स विकसित किए जा रहे हैं। रघुनाथपुरा में तो इन पहाडिय़ों को समतल करने के लिए पिछले कई दिनों से रोज शाम को ब्लास्ट किए जा रहे हैं। ना तो इन भू-माफियाओं को कोई रोकने वाला है और ना ही इनसे कोई पूछने वाला। हर शाम बारूद से ब्लास्ट करने के बाद दिन-रात जेसीबी और डंपरों से भराव हटाया जा रहा है।
कहां से आता है बारूद ? : इन पहाडिय़ों के लिए निजी कॉलोनाइजर्स भारी मात्रा में प्रतिबंधित विस्फोटक सामग्री ला रहे हैं। इन विस्फोटकों में सैन्य विस्फोटक भी शामिल है, जो बाजार में आ रहा है, यह एक गंभीर चिंता का विषय है, लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही और कार्रवाई नहीं होने के कारण इनका बेखौफ इस्तेमाल किया जा रहा है। पता चला है कि इन पहाड़ों को उड़ाने के लिए डायनामाइट, जिलेटिन की छड़े, बारूद उपयोग में लाए जा रहे हैं। कई विस्फोटक तो ऐसे हैं, जिन्हेें केवल मिलिट्री ही उपयोग में ले सकती है। ऐसे विस्फोटक भी इनके पास आ रहे है, जिसमे मर्करी फल्मिनेट और टीएनटी जैसे घातक तत्व शामिल है।
सुनने को तैयार नहीं यूआईटी सचिव : यूआईटी सचिव को जब यूआईटी के क्षेत्राधिकार में आने वाली रघुनाथपुरा की पहाडिय़ां पर विस्फोट होने की जानकारी दी गई, तो उन्होंने पल्ला झाड़ते हुए कहा कि ये हमारा मामला नहीं है। यह तो माइनिंग विभाग का मामला है, जबकि पिछले दिनों इन पहाडिय़ों के आसपास कब्जे होने पर यूआईटी ने ही पुलिस बुलाकर वहां से कब्जे हटाए थे।
यह है नियम : हाईकोर्ट के सख्त आदेश हैं कि शहर की पहाडिय़ों का स्वरूप नहीं बिगाड़ा जाए, यदि विकास के लिए आवश्यक है, तो सिर्फ एक निश्चित ऊंचाई तक ही पहाडिय़ों को काटा जा सकता है, जिसमेें भी यह देखना जरूरी है कि इससे पहाडिय़ों का वास्तविक रूप नहीं बिगड़ेगा। झील संरक्षण समिति के अनिल मेहता ने बताया कि उदयपुर का सौंदर्य इन पहाडिय़ों की वजह से ही बना हुआ है। यह पहाडिय़ां ही शहर में झीलों को भरने का मुख्य स्रोत है। इनको अगर ढहने से नहीं बचाया गया, तो संकट की स्थिति पैदा हो जाएगी।
मास्टर प्लान में भी पहाडिय़ों को किया गया संरक्षित : यूआईटी सचिव पहाडिय़ों को विस्फोटकों से उड़ाने की बात सुनने तक तैयार नहीं है, जबकि यूआईटी द्वारा तैयार मास्टर प्लान 2011-31 में इस बात का मुख्य रूप से ध्यान रखा गया है कि विकास के लिए भी उदयपुर की पहाडिय़ों का वास्तविक रूप नहीं बिगड़े। उदयपुर शहर का धरातल तस्तरीनुमा है, जहां सघन पौधरोपण की जरूरत है, क्योंकि इन्हीं पहाडिय़ों से बरसाती पानी शहर की झीलों को भरने में बहुत हद तक मदद करता है।

प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही से खत्म होता जा रहा है झीलों का
लालच : कैचमेंट निजी कॉलोनाइजर और प्रशासनिक अधिकारियों की मिलीभगत से निजी खातेदारी तथा गैर खातेदारी की पहाड़ी जमीनों को औने-पौने दामों पर खरीदकर सेना के बारूद से उड़ाया जा रहा है। इससे निजी कॉलोनाइजर्स को वहां पर प्लाटिंग करके लाखों-करोड़ों का लाभ हो रहा है, जिसका एक निश्चित हिस्सा अधिकारियों तक भी पहुुंचाया जा रहा है। इन लोगों के लालच के कारण संरक्षित पहाडिय़ां खत्म होती जा रही है, इतना ही नहीं यह कार्य पर्यावरण के लिए खतरनाक होने के साथ ही झीलों के कैचमेंट को भी बुरी तरह प्रभावित कर रहा है।
लाचारी : हाईकोर्ट के सख्त आदेश है कि शहर की पहाडिय़ों का स्वरूप नहीं बिगाड़ा जाए। यदि विकास के लिए आवश्यक है, तो सिर्फ एक निश्चित ऊंचाई तक ही पहाडिय़ों को काटा जा सकता है, जिसमें भी यह ध्यान रखा जाना चाहिए कि पहाडिय़ों का मूल स्वरूप नहीं बिगड़े। लेकिन निजी कॉलोनाइजर्स द्वारा दिए जा रहे लालच के कारण अधिकारी भी माननीय हाईकोर्ट के आदेशों की भी परवाह नहीं कर रहे हैं और भूमाफिया धड़ल्ले से शहर के आसपास की पहाडिय़ों को विस्फोटकों से उड़ा रहे हैं। अधिकारियों को यह तक परवाह नहीं है कि पहाडिय़ों को उड़ाने के लिए सेना के विस्फोटक को काम में लिया जा रहा है, जो कहां से आ रहा है? इसकी कौन खरीद-फरोख्त कर रहा है? अपने फायदे के लिए अधिकारियों ने इन सवालों पर भी पर्दा डाल दिया है।
॥पहाडिय़ों को विस्फोटकों से हटाया जा रहा है, तो चिंता का विषय है। मैं आज ही इस मामले में दिखवाता हूं और रघुनाथपुरा में भी संबंधित अधिकारियों को भिजवाकर कार्रवाई करवाता हूं।
-आशुतोष पेढणेकर, जिला कलेक्टर
॥बिना परमिशन अगर पहाडिय़ों को विस्फोटकों से ढहाया जा रहा है, तो गलत है। यह अपराध की श्रेणी में आता है। सैन्य और दूसरी तरह का विस्फोटक कहां से आ रहा है। इसकी तुरंत जांच करवाकर कार्रवाई की जाएगी।
-अजयपाल लांबा, एसपी उदयपुर
॥इस बारे में आप माइनिंग विभाग से जानकारी लो, हमारे अधिकार क्षेत्र का मामला नहीं है। रघुनाथपुरा में अगर कोई विस्फोट कर रहा है, तो उसकी निजी खातेदारी होगी।
-आरएन मेहता, यूआईटी सचिव
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