हत्या के दो आरोपी गिरफ्तार

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उदयपुर। होली के दिन सरेआम शास्त्रीसर्कल स्थित एक रेडिमेड शो-रूम में घुसकर हिस्ट्रीशीटर प्रवीण पालीवाल की हत्या के दो आरोपियों को पुलिस ने गुरूवार रात गिरफ्तार कर लिया। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने गैंगवार के चलते हुए झगड़े में प्रवीण की हत्या करना स्वीकारा है। हत्याकांड का मुख्य षड़यंत्रकर्ता नरेश ही था जो वारदात के बाद से फरार है।

arrested1पुलिस अधीक्षक अजयपाल लाम्बा ने बताया कि रामसिंह की बाड़ी सेक्टर-11 निवासी प्रवीण (34) पुत्र गणेशलाल पालीवाल की हत्या के मामले में नाड़ाखाड़ा सूरजपोल निवासी साहिल पुत्र सुन्दरलाल, रेलवे कॉलोनी अम्बामाता निवासी करणसिंह पुत्र मोतीसिंह को गोगुन्दा टोल नाके पर गिरफ्तार किया। आरोपी जोधपुर जाने के लिए वहां वीडियोकोच का इंतजार कर रहे थे। आरोपियों से पूछताछ के बाद पुलिस ने साहिल के काका नरेश, हिरणमगरी थाने के हिस्ट्रीशीटर दलपतसिंह व चंचल महाराज को नामजद किया है।

आवरी माता व जोगणिया माता के दिए दर्शन: चंचल व दलपत से अलग होने के बाद साहिल व करण जगत (कुराबड़) होते हुए जोगणिया माता पहुंचे। वहां से बेगूं होकर चित्तौड़गढ़ के आवरीमाता आए। यहां से पुन: उदयपुर आकर जोधपुर जाने के लिए गोगुन्दा जा पहुंचे जहां पुलिस ने उन्हें धर दबोचा। पुलिस ने बताया कि वारदात के बाद से ही मुख्य षड़यंत्रकर्ता नरेश अपने परिवार सहित घर से फरार है।

झगड़े के पीछे गैंगवार

एसपी ने बताया कि झगडे के पीछे गैंगवार ही सामने आया है। आरोपी प्रवीण व नरेश एक समय साथ-साथ ही अपराध व प्रोपर्टी का काम करते थे लेकिन बाद में उनके बीच झगड़े हो गए। दोनों ने अपनी-अपनी गैंग बना ली। हर छोटी-छोटी बातों पर इनके बीच कई बार झगड़े हुए। दोनों ही पक्ष आदतन अपराधी होने से थानों तक इसकी सूचनाएं भी नहीं पहुंची। उलझी हुई जमीनों को सौदों में भी यह आमने-सामने हुए।

सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गए थे आरोपी

एसपी ने बताया कि प्रवीण व नरेश के बीच चल रही रंजिश के बाद से आरोपी संदिग्ध थे। शो-रूम में लगे सीसीटीवी कैमरे में भी वे कैद हो गए। आरोपियों को पकड़ने के लिए एएसपी राजेश भारद्वाज के नेतृत्व में उपाधीक्षक गोवर्घनलाल खटीक, थानाधिकारी रतन चावला, डबोक थानाधिकारी जीतेन्द्र आंचलिया, गोगुन्दा हनुवंतसिंह टीम के साथ ही स्पेशल टीम ने अलग-अलग जगह दबिश देकर आरोपियों को धर दबोचा।

कवर फायरिंग में साहिल के लगी गोली

आरोपियो ने पूछताछ में बताया कि उन्होंने प्रवीण की रैकी की थी। शो-रूम में प्रवीण के जाने पर साहिल व दलपत भी अंदर घुसे तथा करण बाहर ही खड़ा रहा। तीनों के पास अलग-अलग पिस्टल थी। प्रवीण से बातचीत के बाद दलपत व साहिल ने उस पर अंधाधुंध फायर किए। भागने के लिए बाहर से करण ने भी फायर दागा जो साहिल के दांये पैर पर जा लगा। साहिल अपना जूता वहीं छोड़ साथियों के साथ कार में भाग निकला। आगे जाकर चारों आरोपी अलग-अलग हो गए।

आधा बीघा जमीन से किसान ने कमाए 260000 रूपये

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चित्तौड़गढ़। कहते हैं कि किस्मत भी मेहनत करने वालों का साथ देती है। ऎसा ही कारनामा राजस्थान के चित्तौड़गढ़ के एक किसान नंदलाल ने कर दिखाया है। नंदलाल ने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद आधा बीघा जमीन में शिमला मिर्च की खेती से ढाई लाख की खरी कमाई की। साथ ही नंदलाल की बोई शिमला मिर्च की डिमांड फाइव स्टार होटलों में है और मिर्च की कीमत वह खुद तय करता है। इसके साथ ही नंदलाल की शिमला मिर्च जापान भी जा चुकी है।

खर्चा एक लाख, कमाई 3.60 लाख
modern farming265319-03-2014-02-03-99Wचित्तौड़गढ़ जिले के जेसिंघपुरा के किसान नन्दलाल जाट ने तीन साल पहले खेती करना शुरू किया। इसके तहत उसने केवल आधा बीघा जमीन में 60 çक्ंवटल शिमला मिर्च पैदा की। इस पर लगभग 1 लाख का खर्चा आया और कमाई हुई 3.60 लाख की। इस तरह से नंदलाल को 2.60 लाख का शुद्ध लाभ हुआ। नंदलाल सरपंच भी रह चुका है, इस दौरान उसने देश में कई जगहों की यात्रा की और खेती के मॉडल जाने।

ऎसे की शुरूआत
नंदलाल ने तीन साल पहले खेती करना शुरू किया। इसके तहत उसने पॉली हाऊस बनाया। उम्दा खाद-मिट्टी के मिश्रण से परफेक्ट धोरे बनाए और केवल तीस ग्राम शिमला मिर्च बीजों की पौध से 3000 पौधे 50 से.मी की दूरी पर लगाए। इसके साथ ही एक बेड पर दो लाइनें और हर पौधे पर 10-12 फीट क्लिप के साथ धागे बांधे गए ताकि मिर्चियों के वजन को पौधे झेल सके। पौधों को खाद ड्रीप से दिया गया। इसके बाद तीन महीने बाद मिर्ची लगनी शुरू हो गई। एक मिर्ची का वजन रहा 200 ग्राम। फसल का भाव मिला 60 रूपये प्रति किलो। इसके अलावा नंदलाल ने टमाटर, तर ककड़ी जैसे सब्जियों को आधुनिक खेती के तहत बोया।

गुजरात का वाडियाः जहां सजती है देह की मंडी

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बीते 80 सालों से भी ज़्यादा अरसे से ये रिवाज गुजरात के इस गाँव में बदस्तूर जारी है. इस गाँव में पैदा होने वाली लड़कियां वेश्यावृत्ति के धंधे को अपनाने के लिए एक तरह से अभिशप्त हैं.
तक़रीबन 600 लोगों की आबादी वाले इस गाँव की लड़कियों के लिए देह व्यापार के पेशे में उतरना एक अलिखित नियम सा बन गया है. यह गुजरात के बनास कांठा ज़िले का वाडिया गाँव है. इसे यौनकर्मियों के गाँव के तौर पर जाना जाता है. इस गाँव में पानी का कोई कनेक्शन नहीं है, कुछ ही घरों में बिजली की सुविधा है, स्कूल, बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएँ और सड़कें तक नहीं हैं.
साफ़ सफ़ाई जैसी कोई चीज़ इस गाँव में नहीं दिखाई देती लेकिन ये वो विकास नहीं हैं, जो इस गाँव की औरतें चाहती हैं. वे ऐसी ज़िंदगी की तलबगार हैं जिसमें उन्हें किसी दलाल या ख़रीदार की ज़रूरत न पड़े. वाडिया की औरतों का उस भारत से कोई जुड़ाव नहीं दिखाई देता जिसने हाल की मंगल के लिए एक उपग्रह छोड़ा है.
भारत के विकास की कहानी का इन औरतों के लिए केवल एक ही मतलब है कि अब उनके ज़्यादातर ग्राहक कारों में आते हैं. पिछले साठ सालों से वे यही ज़िदगी जी रही हैं.

तवायफ़ों का गाँव

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गुजरात की राजधानी गाँधीनगर से क़रीब 250 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ये वाडिया गाँव बीते कई दशकों से देह व्यापार से जुड़ा हुआ है. गाँव के ज़्यादातर मर्द दलाली करने लगे हैं और कई बार उन्हें अपने परिवार की औरतों के लिए खुलेआम ग्राहकों को फंसाते हुए देखा जा सकता है. इस गाँव के बाशिंदे ज़्यादातर यायावर जनजाति के हैं. इन्हें सरनिया जनजाति कहा जाता है.
माना जाता है कि ये राजस्थान से गुजरात आए थे. सनीबेन भी इस सरनिया जनजाति की हैं. उनकी उम्र कोई 55 साल की होगी और अब वह यौनकर्मी नहीं है. पड़ोस के गांव में छोटे-मोटे काम करके वह अपना गुजारा करती हैं. वह कहती हैं, “मैं तब दस बरस की रही होउंगी जब यौनकर्मी बनी थी. ख़राब स्वास्थ्य और ढलती उम्र की वजह से मैंने यह पेशा अब छोड़ दिया है.”
सनीबेन की तरह ही सोनीबेन ने भी उम्र ढल जाने के बाद यह पेशा छोड़ दिया. उन्होंने कहा, “मैं 40 बरस तक सेक्स वर्कर रही. अब मेरी उम्र हो गई है और गुज़ारा करना मुश्किल होता जा रहा है.” सनीबेन और सोनीबोन दोनों ही ये कहती हैं कि उनकी माँ और यहाँ तक कि उनकी माँ की माँ ने भी शादी नहीं की थी और इसी पेशे में थीं.

गर्भ निरोध

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सोनीबेन कहती हैं, “वाडिया में कई ऐसे घर थे और अब भी हैं, जहाँ माँ, माँ की माँ और बेटी तीनों के ही ग्राहक एक ही घर में एक ही वक़्त में आते हैं.” उन्होंने बताया, “हमारे दिनों में बच्चा गिराना आसान काम नहीं था. इसलिए ज़्यादातर लड़कियों को 11 बरस की उम्र होते-होते बच्चे हो जाते थे लेकिन अब औरतें बिना किसी हिचक के गर्भ निरोधक गोलियाँ लेती हैं और बच्चा गिरवाती भी हैं.”
हालांकि सोनीबेन का कहना है, “वाडिया की औरतों के लिए यौनकर्मी बनने के अलावा कोई और उपाय नहीं रहता है. उन्हें कोई काम भी नहीं देता है. अगर कोई काम दे भी देता है तो वह सोचता है कि हम उसे काम के बदले ख़ुद को सौंप देंगे.”
रमेशभाई सरनिया की उम्र 40 साल है और वह वाडिया में किराने की एक दुकान चलाते हैं. रमेशभाई के विस्तृत परिवार के कुछ लोग देह व्यापार के पेशे से जुड़े हुए हैं लेकिन उन्होंने ख़ुद को इस पेशे से बाहर कर लिया. रमेशभाई ने किसी अन्य गाँव की एक आदिवासी लड़की से शादी भी की.

स्कूल नहीं

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रमेशभाई कहते हैं, “वाडिया एक प्रतिबंधित नाम है. इस गाँव के बाहर हम में से ज़्यादातर लोग कभी यह नहीं कहते कि हम वाडिया से हैं नहीं तो लोग हमें नीची नज़र से देखेंगे. अगर आज कोई औरत अपने बच्चों ख़ासकर बेटियों की बेहतर ज़िंदगी की ख़्वाहिश रखती भी हैं तो उसके पास कोई विकल्प नहीं होता है.”
वह बताते हैं, “वहाँ शादी जैसी कोई परंपरा नहीं है. कोई अपने बाप का नाम नहीं जानता. ज़्यादातर लड़कियों का जन्म ही सेक्स वर्कर बनने के लिए होता है और मर्द दलाल बन जाते हैं. वाडिया के किसी बाशिंदे को कोई नौकरी तक नहीं देता है.” रमेशभाई की तीन बेटियाँ और दो बेटे हैं. उन्होंने अपने बड़े बेटे को स्कूल भेजा लेकिन बेटियों को नहीं.
उनका कहना है, “कुछ गिने चुने परिवारों ने यह तय किया कि वे अपनी बेटियों को देह व्यापार में नहीं जाने देंगे. वे कभी भी अपनी बेटियों को नज़र से दूर नहीं करते, यहाँ तक कि स्कूल भी नहीं भेजते. गाँव में सक्रिय दलालों से ख़तरे की भी आशंका रहती है. सुरक्षा कारणों से मैं अपनी बेटियों को स्कूल तक जाने की इजाज़त नहीं दे सकता. वे केवल शादी के बाद ही घर से बाहर जा पाएंगी.”

अग़वा का डर

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रमेशभाई को हाल ही में नया गुर्दा लगाया गया है. उनकी पत्नी ने उन्हें किडनी दी है. रमेशभाई की तरह ही वाडिया गाँव में 13 से 15 परिवार ऐसे हैं जो कि देह व्यापार के पेशे में अपनी बेटियों को नहीं भेजते हैं. हालांकि गाँव की कई लड़कियों ने प्राइमरी स्कूल तक की तालीम हासिल की है लेकिन वाडिया में ऐसी कोई भी लड़की नहीं है जिसने छठी के बाद स्कूल देखा हो.
क्योंकि कोई भी माँ-बाप अपनी बेटी को गाँव के बाहर इस डर से नहीं भेजना चाहते हैं कि कहीं दलाल उनकी बेटी को अग़वा न कर ले. ऐसा लगता है कि जैसे वाडिया को किसी की परवाह नहीं है. वाडिया की यौनकर्मियों के ख़रीदार समाज के सभी वर्गों से आते हैं. इनमें मुंबई से लेकर अहमदाबाद तक के कारोबारी हैं, पास के गाँवों के ज़मींदार हैं तो राजनेता भी और सरकारी अफ़सर भी.
वाडिया गाँव का ये पेशा राज्य सरकार की नाक के नीचे फलता फूलता रहा है. इस गाँव में एक पुलिस चौकी भी है लेकिन कोई पुलिसकर्मी शायद ही कभी यहाँ दिखाई देता है. हालांकि कुछ ग़ैर सरकारी संगठनों के अलावा शायद ही किसी ने वाडिया और उसकी औरतों के लिए सहानुभूति दिखाई हो.

सामाजिक समस्या

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बांसकांठा के पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार यादव कहते हैं, “जब भी हमें ये ख़बर मिली कि गाँव में कोई देह व्यापार कर रहा है तो हमने वहाँ छापा मारा. लेकिन इसके बावजूद हम वहाँ वेश्यावृत्ति को पूरी तरह से नहीं रोक पाए हैं क्योंकि यह एक सामाजिक समस्या है. ज़्यादातर परिवार अपनी लड़कियों को इस पेशे में भेजते रहे हैं.”
हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस की निगरानी बढ़ी है लेकिन दलालों और मानव तस्करों पर लगाम नहीं लगाई गई है. स्थानीय लोग बताते हैं कि ज़्यादातर गाँव वालों को पता होता है कि पुलिस कब आने वाली है और इन छापों का कोई नतीजा नहीं निकलता.
देह व्यापार में कमी के दावों को ख़ारिज करते हुए पड़ोस के गाँव में अस्पताल चलाने वाले एक डॉक्टर बताते हैं कि उनके पास कम उम्र की कई ऐसी लड़कियाँ और औरतें गर्भपात करवाने या फिर गुप्तांगों पर आई चोट की तकलीफ का निदान करवाने आती हैं. डॉक्टर ने अपना नाम न ज़ाहिर करने की शर्त पर बताया कि उसने किशोर उम्र की लड़कियों को गर्भपात कराने में मदद की है.

लिंग परीक्षण

वह कहते हैं, “गर्भपात के लिए आई कई लड़कियों की हालत बेहद नाज़ुक होती हैं क्योंकि वे गर्भ ठहर जाने के बाद भी यौन संबंध बनाती रहती हैं. मैं जानता हूँ कि जो मैं कर रहा हूँ वो अनैतिक है लेकिन इस गाँव में कई लड़कियाँ डॉक्टरी इलाज के अभाव में मर जाती हैं.”
डॉक्टर ने बताया कि दलाल कई बार इस बात पर ज़ोर देते हैं और कई बार तो धमकाते भी हैं कि मैं बच्चे के लिंग की जाँच करूं और अगर वो बेटी हो तो उसका गर्भपात न किया जाए.
उन्होंने कहा, “वे ये नहीं समझते कि एक 11 साल की लड़की बच्चे को जन्म नहीं दे सकती लेकिन उनके लिए एक लड़की आमदनी का केवल एक ज़रिया भर होती है. इसलिए मैं गर्भ में पल रहे बच्चे के लिंग के बारे में बता देता हूँ.”
देह व्यापार से जुड़ी औरतों के लिए काम करने वाले ग़ैर सरकारी संगठन ‘विचर्त समुदाय समर्पण मंच’ से जुड़ी मितल पटेल कहती हैं कि किसी भी सरकारी एजेंसी ने वाडिया गाँव के लोगों के लिए सहानुभूति नहीं रखी. मुझे लगता है कि यह उनके हित में है कि वाडिया के लोगों के हालात वैसे ही बने रहें.

सोजन्य -अंकुर जैन अहमदाबाद से, बीबीसी रिपोर्टर

जमीनों के कारोबार पर माफिया राज

कई जमीनों के सौदों में करके अपराधी कर रहे हैं मोटी कमाई, पुलिस की जानकारी में हो रहा है संगठित अपराध
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उदयपुर। उदयपुर में जमीनों के दामों में हो रही बढ़ोतरी से अपराधियों की इस व्यवसाय में गहरी रूचि पैदा हुई है। कुछ समय पूर्व शराब तस्करी के लिए मशहूर उदयपुर के अपराधियों का अब तस्करी से मोह भंग हो गया है। ये सभी लोग गिरोह बनाकर जमीनों का धंधा कर रहे हैं, जिनमें जमीनों को खाली कराना, आदिवासियों और ग्रामीणों को डरा-धमकाकर उनकी जमीनों की रजिस्ट्री कराना और बड़े भू व्यवसायियों के साथ मिलकर प्लानिंंग काटने जैसे कामों में लगे हैं। इस सारे गोरखधंधे से पुलिस अनजान नहीं है। कुछ समय पूर्व उदयपुर पुलिस ने भू-माफियाओं और अपराधियों की एक सूची तैयार की थी, लेकिन उनके खिलाफ पुलिस की कोई कार्रवाई नहीं होने से अपराधियों के हौंसले बढ़ गए। इसी कारण गोगुंदा क्षेत्र में हिस्ट्रीशीटर नरेश हरिजन पर हमला हुआ और बदला लेने की नीयत से उसके रिश्तेदार साहिल हरिजन ने प्रवीण की हत्या कर दी। बताया जा रहा है कि नरेश पर हुए हमले के पीछे प्रवीण का हाथ था। इसी प्रकार जमीन के कारोबार में नये-नये बदमाश उतर रहे हैं। इनमें से कुछ तो देखते ही देखते लाखों-करोड़ों में खेलने लगे हैं। इसी कारण युवाओं की रूचि भी इन बदमाशों के साथ रहने में बढ़ रही है, जिससे इनका गिरोह मजबूत बनता जा रहा है। शराब तस्करी और माइंस मालिकों से उगाही के बाद अब सबसे ज्यादा मालदार धंधा उदयपुर में जमीनों का हो गया है, जिस पर पुलिस की कोई पैनी नजर नहीं है। इससे पूर्व भी जमीनों से जुड़ें मामलों में कई लोगों की जानें गई हैं, जिन पर सख्त कार्रवाई नहीं होने या फिर गवाहों की कमी के कारण अपराधियों को न्यायालय द्वारा छोड़ देने से नये-पुराने अपराधी बेखौफ होकर घूम रहे हैं।
॥सभी थानाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि भूमाफियाओं को चिह्नित करें और जो नये भूमाफिया हैं। उनकी सूची तैयार की जाए। इसके साथ ही भूमाफियाओं पर अब तक दर्ज हुए मामलों में कड़ी कार्रवाई की जाए।
-अजय लांबा, एसपी, उदयपुर

प्रवीण के हत्यारों का सुराग नहीं

पुलिस की टीमें मार रही है छापे, आरोपियों की तलाश जारी

Shok1उदयपुर। हिस्ट्रीशीटर प्रवीण पालीवाल की हत्या के आरोपियों की गिरफ्तारी अब तक नहीं हो पाई है और ना ही पुलिस के हाथ कोई ठोस सबूत लगे हैं। पुलिस ने आशंका जताई है कि इस हत्याकांड में साहिल हरिजन के साथ चंचल महाराज और बबलु खारोल नामक युवक भी शामिल हो सकते हैं। इधर, अमेरिकन हॉस्पीटल में भर्ती विजेंद्र को होश नहीं आया है। पुलिस उसके होश में आने का इंतजार कर रही है।

उल्लेखनीय पिछले रविवार को हिस्ट्रीशीटर प्रवीण पालीवाल की शास्त्री सर्कल स्थित स्टार लाइन शोरूम में दो युवकों ने गोलियां बरसाकर हत्या कर दी। इस दौरान बीच-बचाव में आए पालीवाल के दोस्त विजेंद्र को भी एक गोली लगी, जो अमेरिकन हॉस्पीटल में भर्ती है और अभी तक उसे होश नहीं आया है। प्रारंभिक पड़ताल में पुलिस को पता चला है कि उक्त हत्या के पीछे साहिल हरिजन हैं, जिसने उसके चाचा नरेश हरिजन पर गोगुंदा क्षेत्र में हुए हमले का बदला लेने के लिए इस वारदात को अंजाम दिया है। भूपालपुरा थानाधिकारी रतन चावला ने बताया कि इस हत्याकांड में चंचल महाराज और बबलु खारोल का भी नाम आ रहा है, जिनकी तलाश की जा रही है। पुलिस की टीमें आरोपियों की तलाश में एमपी, कांकरोली और राजसमंद क्षेत्र में दबीशें दे रही है।

नागदा से दो कार, सोना व पांच लाख रुपए बरामद

॥ download में घोटाले का मामला
॥ एक साल से पिता से अलग रह रहा था दामोदर
उदयपुर। भविष्य क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी में घोटाले के मामले में सोसायटी के अध्यक्ष दामोदर नागदा ने रिमांड के दौरान कई राज खोले हैं। आरोपी नागदा पर भविष्य क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी का गठन कर तीस हजार निवेशकों के लगभग दो सौ करोड़ रुपए का गबन करने का आरोप है। नागदा से चल रही पूछताछ में सामने आया कि उसने सोसायटी के रुपयों से दो कारें खरीदी थी, जो कि बडग़ांव स्थित पिंक पर्ल कॉम्पलेक्स में किराए के फ्लैट की पार्किंग में रखी थी। पुलिस ने दोनों कारें बरामद कर ली। आरोपी ने बताया कि करीब आठ माह पूर्व उसका पिता से झगड़ा हो गया था। इसके बाद से ही वह अपने पूरे परिवार के साथ बडग़ांव में ही रह रहा था। आरोपी ने सोसायटी के रुपयों से 300 ग्राम सोना खरीदा था और इस सोने को एक सर्राफा व्यापारी गौतम तलेसरा को अपनी पत्नी और पुत्री के जेवर बनाने के लिए दिया था। इसके साथ ही आरोपी ने इस सर्राफा व्यापारी को पांच लाख रुपए भी दिए थे। पुलिस ने इस व्यापारी से रुपए और सोना बरामद कर लिया है। पुलिस आरोपी से लगातार पूछताछ कर रही है। उधर, पुलिस की एक टीम आरोपी के सहयोगी और सोसायटी के उपाध्यक्ष संजय शुक्ला

नाकाफी सुरक्षा इंतजाम के कारण बुझ गए दो घरों के चिराग

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वॉच टावर पर पुलिसकर्मी नहीं, पेट्रोलिंग का भी रहा अभाव
उदयपुर। धुलंड़ी के दिन दो घरों के चिराग बुझ गए। इससे झीलों के आसपास पेट्रोलिंग फोर्स, वॉच टावर और सुरक्षा गार्ड लगाने के दावे खोखले साबित हुए हैं। जब ये दोनों युवक झील में डूब रहे थे, तब वहां पर प्रशासन द्वारा किया गया कोई भी इंतजाम सक्रिय नहीं था। इस कारण दोनों की जान चली गई।
नुमाइश बने वॉच टावर
पुलिस विभाग ने निगरानी रखने के लिए शहर में उदियापोल, सूरजपोल, चेतक और फतहसागर झील किनारे वॉच टावर लगाए हैं, लेकिन इन पर कभी कोई पुलिसकर्मी बैठा हुआ नजर नहीं आता है। इन वॉच टावर पर भी बच्चे या युवा मस्ती करते या खेलते हुए नजर आते हैं। अगर इन वॉच टावर का सही इस्तमाल होता और होली के दिन उस पर पुलिस कर्मी तैनात होते, तो उन युवाओं को जरूर बचाया जा सकता था। उन तक समय पर सहायता नहीं पहुंच पाई। इन वॉच टावर पर शोभायात्रा, जुलूस के दौरान ही कुछ पुलिसकर्मी नजर आते हैं।
लेक पेट्रोलिंग का भी पता नहीं
पिछले दिनों जिला कलेक्टर ने झीलों की सुरक्षा और सफाई के लिए लेक पेट्रोलिंग दल तैनात किया था, लेकिन घटना के दिन उसका भी कहीं कोई अता-पता नहीं था, जबकि उस पेट्रोलिंग दल की वहां पर सबसे ज्यादा जरूरत थी। नियमित रूप से शाम को फतहसागर वॉक करने वाले निरंजन साहू का कहना है कि धुलंड़ी के अवसर पर फतहसागर पर पुलिसकर्मी का तैनात होना जरूरी था। अगर वहां कोई पुलिसकर्मी होता तो, डूबने वाले दोनों युवाओं को बचाया जासकता था या उन्हें झील में उतरने से रोका जा सकता था।
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पहले दिन नहीं हुआ एक भी नामांकन

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उदयपुर। लोकसभा चुनाव को लेकर नामांकन दाखिल करने की आज पहली तारीख थी, लेकिन दोपहर एक बजे तक कोई नामांकन दाखिल नहीं हुआ। जिला निर्वाचन अधिकारी ( कलेक्टर ) के अनुसार अधिसूचना जारी होने के साथ आज से उम्मीदवारी के लिए पर्चा भरा जा सकेगा, नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 26 मार्च है। जिला निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि नामांकन पत्र कलेक्ट्रेट स्थित जिला निर्वाचन अधिकारी कक्ष में सुबह 11 से अपराह्न तीन बजे तक जिला निर्वाचन अधिकारी के सम्मुख प्रस्तुत किए जाएंगे। नामांकन पत्र भरने के लिए राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार उम्मीदवार कलेक्ट्रेट परिसर में तीन वाहन के साथ आ सकेंगे, जिसमें वाहन चालकों के साथ 15 व्यक्ति हो सकेंगे। जिला निर्वाचन अधिकारी के कक्ष में उम्मीदवार के साथ चार अन्य सदस्य प्रवेश कर सकेंगे। नामांकन पत्र भरने वाले उम्मीदवार को नामांकन पत्र के साथ पूर्ति की जाने वाली जानकारी की चेक लिस्ट भी उपलब्ध करा दी जाएगी। सामान्य जाति के उम्मीदवार को 25 हजार रुपए तथा अजा-जजा के उम्मीदवार के जाति प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने पर 12 हजार पांच सौ रुपए प्रतिभूति जमा करानी होगी। उदयपुर की सीट अजा-जजा के लिए रिजर्व है। नामांकन के पहले दिन आज दिन में एक बजे तक किसी उम्मीदवार ने नामांकन दाखिल नहीं किया है।

सिटी पैलेस में हुआ परंपरागत होली-दीपन

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उदयपुर। महाराणा मेवाड़ चैरिटेबल फाउण्डेशन, उदयपुर द्वारा आयोजित चार दिवसीय विश्व जीवंत विरासत महोत्सव 2014 के अंतिम दिन रविवार को पैलेस के माणक चौक में होली दीपन किया गया। समारोह में ब्रज के कलाकारों ने ब्रज की होली पेश की। इससे पूर्व प्रात: 6 बजे खुश महल में कलाकारों ने स्वर लहरियां बिखेरी।
मेवाड़ की परंपरागत सांस्कृतिक धरोहर का निर्वाह करते हुए वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा कर फाउण्डेशन के अध्यक्ष एवं प्रबंध न्यासी श्रीजी अरविन्द सिंह मेवाड़ एवं फाउण्डेशन के ट्रस्टी लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने पारंपरिक होली दीपन की रस्म अदा की। इससे पूर्व श्रीजी अरविन्द सिंह मेवाड़ नौबत री आसवारी के साथ शंभू निवास पैलेस से माणक चौक पधारे। इस भव्य असवारी में शामिल रंण कंकण घोड़े, नगाड़ा आदि का लवाजमा आगन्तुक स्वदेशी व विदेशी अतिथियों के लिए आकर्षण था। मेवाड़ की इस परंपरागत होली दीपन समारोह को देख बड़ी संख्या में उपस्थित विदेशी पर्यटक रोमांचित हो उठे।
समारोह में खूब जमी ब्रज की होली : समारोह में भरतपुर के लोक कलाकार अशोक शर्मा ने 12 सह कलाकारों के साथ ब्रज की होली पेश की। जिसमें ब्रज धाम वंदना, मयूर, चंग होली, लठ्ठमार होली तथा फूल की होली पेश की। इससे पूर्व खुश महल में प्रात: 5 बजे नाथद्वारा घराने के यशोनंदन पखावज पर अपनी प्रस्तुति दी। वहीं सुबह 6.30 बजे स्थानीय कलाकार समर्थ जानवे ने अपनी स्वर लहरियां बिखेरी। कार्यक्रम का संचालन हिमानी दीक्षित ने किया।
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डॉ. वेलाराम घोगरा (मीना) उदयपुर संसदीय सीट के लिए आम आदमी पार्टी प्रत्याशी

1 उदयपुर। आगामी लोकसभा चुनाव में उदयपुर संसदीय सीट के लिए डॉ. वेलाराम घोगरा (मीना) को आम आदमी पार्टी उदयपुर का प्रत्याशी बनाया गया है। डॉ. वेलाराम घोगरा के नेतृत्व में पार्टी की उदयपुर टीम ने होली के पावन पर्व से ही प्रचार प्रसार अभियान प्रारम्भ कर दिया है। प्रचार अभियान के लिए 8 विधानसभा क्षेत्रों हेतु विभिन्न समितियों का गठन किया गया है।
यह जानकारी देते हुए पार्टी के प्रवक्ता पुनित जैन ने बताया कि उदयपुर में आम आदमी पार्टी की संसदीय मामलों की समिति की बैठक पार्टी के प्रदेश कोषाध्यक्ष सुधीर माहेश्वरी के सानिध्य में आयोजित हुई जिसमें चुनाव अभियान के प्रचार हेतु विभिन्न समितियों के गठन के साथ-साथ चुनाव अभियान हेतु विस्तारपुर्वक कार्य रूप रेखा तैयार की गई। बैठक में निर्णय लिया गया कि पार्टी उदयपुर संसदीय क्षेत्र के 15 लाख से अधिक मतदाताओं के बीच जाकर उनकी समस्याओं, स्थानीय मुद्दों और मांगों को आधार बनाकर ही लोकसभा चुनाव लडेगी।
बैठक में कोष समिति, प्रचार प्रसार समिति, विधि समिति, मीडिया समिति, व्यय समिति का गठन किया गया। बैठक में सत्यवान कौशिक, विजय गोयल, भरत कुमावत, चयनिका वर्मा, विवेक पण्डित, खेमराज कुमावत, राजेश चौहान, सुधीर जारोली, सौरभ नागर आदि उपस्थित थे।