चिता पर महिला, पेड़ पर सांप

0

udaipur आगरा। इसे पुनर्जन्म की कहानी कहें या लोगों का भ्रम। वृद्ध महिला की मौत पर एक सांप सामने आया। अंतिम संस्कार के समय ये चिता के पास पहुंचा और फिर अचानक पेड़ पर चढ़ गया। महिला की चिता की आग शांत होने तक पेड़ पर बैठा रहा। इसके बाद जितने मुंह उतनी बातें। इसमें सबसे ज्यादा यह कि सांप का महिला से पुनर्जन्म का रिश्ता है।
रामबाग के पास कटरा वजीर खां निवासी 85 वर्षीय रामवती दो माह से बीमार थीं। मंगलवार रात 11 बजे उनकी मौत हो गई। परिवार के लोगों के आने का इंतजार के बाद सुबह 11 बजे परिजन उनका अंतिम संस्कार करने शव को नर्सरी में पड़ी खाली जगह में ले गए। इस बीच एक सांप लोगों को दिखाई दिया, जो चिता के पास पहुंच गया। अचानक सांप को देख लोग सहमे। इसके बाद सांप तेजी से निकला और पेड़ पर पहुंच गया।
करीब 15 फुट ऊंचे पेड़ के फलक पर बैठकर वह चिता की ओर फन करके देखने लगा। लोगों ने सोचा कि चिता की आग तेज होने पर पेड़ पर चढ़ा सांप भाग जाएगा। मगर, ऐसा नहीं हुआ। चिता की आग तेज हुई और पेड़ के पत्ते झुलसने लगे। मगर, सांप फन ऊपर कर वहीं बैठा रहा। दोपहर डेढ़ बजे अंतिम संस्कार के बाद लोग तो घर लौट गए, लेकिन सांप वहीं बैठा रहा। शाम करीब छह बजे तक सांप को उसी पेड़ पर देखा गया। इस पर कहा जा रहा था कि 14 साल पहले रामवती के पति हरी सिंह की मौत हुई थी। उनका अंतिम संस्कार भी नर्सरी में किया गया था।
मृत महिला के परिजन भी सांप से रिश्ता जोडऩे लगे। वे सांप को 14 साल पहले मौत का शिकार हुए हरी सिंह का दूसरा जन्म बता रहे हैं।
बेटे बोले, कुछ तो है : रामवती के तीन बेटे हैं, जिनमें से सुभाष चंद्र कुशवाह सबसे बड़े हैं। नर्सरी संचालक सुभाष का कहना है कि जिस तरह सांप पेड़ पर बैठकर रात तक बैठा रहा। इससे लगता है कि कुछ रिश्ता तो है।

अज्ञात अधेड़ ने पेड़ पर लगाई फांसी

उदयपुर। जावरमांइस थाना के झरियाणा गांव में एक खेत में एक अधेड़ ने पेड़ पर फांसी का फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। पुलिस को समाचार लिखे जाने तक मृतक की शिनाख्त नहीं हो पाई।
पुलिस के अनुसार झरियाणा गांव के समीप एक खेत मालिक बुधवार को खेत पर काम करने के लिए गया। उसी दौरान उसने वहां पर स्थित एक पेड़ पर अधेड़ के शव को लटके देखा। जिस पर उसने पुलिस को सूचना दी। सूचना पर पंहुची पुलिस ने शव को नीचे उतार कर उदयपुर के एमबी अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया। पुलिस शव की शिनाख्त के प्रयास कर रही है। पुलिस ने बताया कि अध्ेाड की उम्र लगभग 60-65 वर्ष की हैं। मृतक आधे बांह की सफदे बनियान, व धोती पहने हुए हंै। उसके सफे द लम्बी दाढी, कमर में रेशमी धागा, लम्बाई करीब 6 फिट है। पुलिस शव को शहर के एमबी अस्पताल की मोर्चरी में रखवार कर शिनाख्त के प्रयास कर रही है।

हड़ताल,धरना, प्रदर्शन का दौर चला

डाक कर्मचारी दूसरे दिन भी हड़ताल पर, संविदा नर्सेज कर्मी अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू, रोड़वेज कर्मचारियों का दो दिवसीय धरना हुआ समाप्त
उदयपुर। शहर में गुरुवार का दिन विरोध प्रदर्शनों का दिन रहा। संविदा नर्सेज ने एमबी हॉस्पीटल के बाहर धरना लगाकर अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी की तो मेडिकल छात्र-छात्राओं ने आरएनटी मेडिकल कॉलेज के बाहर अपनी मांगों के पक्ष में जमकर प्रदर्शन किया। इस तरह डाक कर्मचारियों ने देशव्यापी आंदोलन के तहत अपनी हड़ताल जारी रखी। उधर उदयापोल स्थित केन्द्रीय बस स्टैंड पर रोडवेज कर्मचारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में धरना दूसरे दिन भी जारी रखा। इस प्रकार हर तरफ केन्द्र और राज्य सरकार के खिलाफ आक्रोश का वातावरण दिखाई पड़ा। संबंधित कर्मचारियों को यह विश्वास है कि चुनाव वर्ष होने के कारण वे सरकार को दबाव में लेकर अपनी वाजिब मांगे मनवा लेंगे। इसके अलावा बजरंग सेना के कार्यकर्ताओं ने वेलेंटाईन-डे के विरोध में प्रेम कार्डों की होली जलाकर अपने गुस्से का इजहार किया उनका मानना है कि यह पर्व भारतीय संस्कृति को प्रदूषित करने वाला है, इसलिए इस पर्व को नहीं मनाया जाना चाहिए।
डाक कर्मचारी भारतीय डाक कर्मचारी यूनियन ग्रुप-सी, पोस्टमेन ग्रुप-डी एवं ग्रामीण डाक कर्मचारियों के केन्द्रीय नेतृत्व के आह्वान पर दो दिवसीय हड़ताल बुधवार से शुरू हुई। जो आज भी सभांग के सभी डाक घरों में जारी रही।
इस दौरान आज सभी डाक कर्मचारीयों ने शहर के चेटक स्थित मुख्य डाकघर के बाहर धरना प्रदर्शन कर एवं सद्बुद्धि हवन किया गया। दो दिवसीय हड़ताल के चलते एनएफपीई एवं एफएनपीओ से जुड़े सभी डाक कर्मचारी एवं ग्रामीण डाक कर्मचारी हड़ताल पर रहे। हड़ताल से उदयपुर मण्डल के सभी डाकघरों के ताले नहीं खुले तथा डाक व्यवस्था ठप्प रही। डाक कर्मियों की हड़ताल से डाक का आदान-प्रदान, डाक वितरण, डाक की बुकिंग, रजिस्टर्ड डाक की बुकिंग, स्पीड पोस्ट बुकिंग एवं वितरण, पार्सल बुकिंग एवं वितरण, मनीऑर्डर बुकिंग एवं वितरण, ई-एमओ बुकिंग, वेस्टर्न मनी से पैसों की निकासी, बचत खातों से लेनदेन, वद्धावस्था पेंशन की निकासी, महा नरेगा का भुगतान, जननी सुरक्षा योजना का भुगतान, भारतीय पोस्टल ऑर्डर की बिक्री, आवृत्ति जमा निकासी, सीनियर सिटीजन खातों से जमा एवं निकासी, मासिक आय योजना का लेन-देन, डाक पेटियों से निकासी ठप्प रही। जिस का असर आम आदमी पर भी देखा गया।
डाक कर्मचारी के मांगें : महंगाई भत्ते का विलय, अंतरिम राहत, सातवें वेतन आयोग में जीडीएस का शामिल किया जाना, सातवें वेतन आयोग को लागू किया जाएं, कैजुअल कर्मचारियों का नियमितीकरण तथा वेतन पुनरीक्षण, पी.एफ.आर.डी.ए. एक्ट को समाप्त करना, नई पेंशन योजना को रद्द करना तथा विसंगतियों का निस्तारण करने की मांग की गई।
संविदा नर्सेज कर्मी की बेमियादी हड़ताल शुरू
नर्सेज सीधी भर्ती 2013 के जरिये स्थायीकरण की मांग को लेकर संविदा नर्सेजकर्मी की प्रदेश व्यापी हडताल के तहत बुधवार को आर एन टी मेडिकल कॉलेज के अधिनस्थ संचालित महाराणा भूपाल राजकीय सामान्य चिकित्सालय, पन्नाधाय राजकीय महिला चिकित्सालय व टी.बी. हॉस्पिटल बड़ी में अस्थायी, मेडिकेयर रिलिफ सोसायटी व व्यक्तिगत अनुबंध पर कार्यरत समस्त नर्सेजकर्मियों ने 2 घंटे विरोधस्वरूप कार्य का बहिष्कार किया ।
वहीं संविदा नर्सेजकर्मी ने आज से मांगों के चलाते अनिश्चित हड़ताल की घोषणा कर दी। वहीं बुधवार को अस्थायी संविदा नर्सेज एसोसिएशन के अध्यक्ष हेमंत आमेटा के अनुसार इस दौरान नर्सेज प्रतिनिधीमण्ड़ल ने आर एन टी मेडिकल कॉलेज की प्रधानाचार्य व नियत्रंक को चिकित्सा मंत्री व प्रमुख शासन सचिव (चिकित्सा शिक्षा) के नाम ज्ञापन दिया।
संविदा नर्सेज कर्मी मांगें : संविदा नर्सेज को नियमित करने की मांग, सीधी भर्ती में कार्यरत नर्सेज को अधिकतम 30 प्रतिशत बोनस अंको के प्रावधान के चलते लम्बे अर्से से अटकी नर्सेज सीधी भर्ती को सुप्रीम कोर्ट में सरकार द्वारा दायर की गई विशेष अनुमति याचिका को वापस लेकर हाईकोर्ट द्वारा पारित निर्णय के अनुरूप 5, 10 व 15 प्रतिशत बोनस देकर भर्ती करने की मांग के लिए कई मर्तबा सरकार को ज्ञापन दिया।
रोडवेज कर्मचारियों का दो दिवसीय धरना जारी
परिवहन विभाग राज्य सरकार के बस स्टेण्ड प्राधिकरण गठन एवं राष्ट्रीयकृत मार्गो पर निजी वाहन संचालन हेतु अनुज्ञा पत्र जारी करने के प्रस्ताव के विरोध में आज सम्पूर्ण उदयपुर आगार में निगम कर्मियों द्वारा केन्द्रीय बस स्टेण्ड पर प्रदर्शन करते हुए धरना दिया गया। वही दोपहर बाद जिलाधीश के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन दिया गया। सम्पूर्ण राजस्थान की प्रदेश स्तरीय संघर्ष समिति के आव्हान पर बुधवार से उदयपुर आगार में निगम कर्मियों द्वारा केन्द्रीय बस स्टेण्ड पर प्रदर्शन करते हुए धरना दिया गया। बुधवार के दिए गए धरने की अध्यक्षता रमेश पोरवाल ने की वहीं अतिथि विजेन्द्र चौधरी थे। धरने के दौरान वक्ताओं द्वारा राज्य सरकार के उक्त प्रस्ताव के मूल पर विस्तार पर चर्चा की वहीं प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा जन सेवा को समर्पित परिवहन निगम को गुपचुप तरीके से समाप्त कर इसकी सम्पत्ति को खुर्द बुर्द करते हुए 24000 कर्मचारियों के परिवारों को सड़क पर लाने की कार्यवाही बताया। बक्साराम चौधरी द्वारा राज्य सरकार की इस नीति को भूमााफिया से सांठगाठ का आरोप लगाया। नरेन्द्र बेनीवाल, रामसिंह,अनिश मोहम्मद, लक्ष्मीनारायण नागदा, कल्लु सिंह, कौशल्या भट्ट, अशोक मेहता सहित दर्जन भर वक्ताओं ने सम्बोधित किया।

साथी की मौत से गुस्साए सीटीएई छात्रों का साढ़े तीन घंटे चला प्रदर्शन

IMG_5902

उदयपुर। सुखेर क्षेत्र में रात सडक दुर्घटना में छात्र की मौत होने पर साथी छात्रों ने बुधवार को जमकर प्रदर्शन किया। इस दौरान छात्रों ने दुर्घटना में मृत छात्र के परिजनों को १० लाख रूपये मुआवजा देने एवं आरोपी की गिरफ्तार करने की मांग की है। वहीं भूपालपुरा थाना पुलिस ने छात्रों के खिलाफ रोड जाम करने का मामला भी दर्ज किया है।
मंगलवार रात को कुचामन सिटी निवासी तथा उदयपुर के सीटीएई कॉलेज में अध्ययनरत छात्र नरन्द्र जाट (२२) अपने तीन साथियों के साथ बाइक पर शोभागपुरा १०० फीट रोड से जा रहा था इसी दौरान सामने से आई कार ने चपेट में ले लिया जिससे तीनों गंभीर रूप से घायल हा गए। दुर्घटना में नरेन्द्र की मौत हो गई थी।
इस संबंध में बुधवार प्रात: कृषि विश्वविद्यालय के छात्रसंघ अध्यक्ष के नेतृत्व में दर्जनों की संख्या में छात्र देहलीगेट पर रैली के रूप में पहुंचे जहां छात्रों ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए नारेबाजी कर जाम लगा दिया। करीब डेढ घंटे तक देहलीगेट चौराहे पर प्रदर्शन के बाद सभी छात्र जिला कलेक्ट्री के बाहर पहुंचे और कार चालक को गिरफ्तार करने एवं मृतक के परिजनों का १० लाख रूपये की मुआवजे की राशि की मांग को लेकर धरने पर बैठ गए। प्रदर्शन के दौरान देहलीगेट चौराहा एवं कलेक्ट्री के बाहर जाम लग गया। मामले में पुलिस ने कार चालक को गिरफ्तार कर लिया है।
इधर भूपालपुरा थाना पुलिस ने देहलीगेट व कलेक्ट्री पर प्रदर्शन के दौरान छात्रों रोड जाम से आम जन को हुई परेशानी के संबंध में मामला दर्ज किया है।

IMG_5881 IMG_5875

तेजाब पीड़िता शालू को बैठना ही पडा आमरण अनशन पर

थोथे निकले प्रशासनिक वादे
जनप्रतिनिधियों ने भी दिए झूठे आश्वासन

IMG_5848
उदयपुर। सभी प्रकार के आश्वासनों से ऊब चुकी तेजाब पीड़िता को बुधवार को अंतत: कलेक्ट्रेट के सामने आमरण अनशन पर बैठना ही पडा।
उल्लेखनीय है कि गत ३० अक्टूबर को छेडछाड का विरोध करने पर शालू जैन पर समाज कंटकों ने तेजाब डाल दिया था। तेजाब से झुलसी युवती IMG_5850अब तक सात बार अपनी सर्जरी करवा चुकी है। अपराधियों के विरूद्घ न्यायालय में मामला विचाराधीन है। इन चार वर्षों में अपना उपचार कराते हुए आर्थिक एवं मानसिक रूप से टूट चुकी शालू से राष्ट्रीय महिला आयोग, राज्य महिला आयोग, मानवाधिकार आयोग के अध्यक्षों सहित केन्द्रीय मंत्री एवं राज्य के कई मंत्री मिलकर उसकी सहायता का आश्वासन दे चुके है।
तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी पीड़िता को मुआवजे सहित आवास आदि की सुविधाएं मुहैया कराने का आश्वासन दिया था। लेकिन तमाम आश्वासनों के उपरांत प्रशासन द्वारा अभी तक इस पीड़िता को राहत के नाम पर फूटी कोडी भी नही दी गई ओर न ही आवास की सुविधा मुहैया कराई गई है। महिलाओं के तथाकथित सशक्तिकरण के खोखले दावे करने वाले जनप्रतिनिधि, स्वयं सेवी संगठन एवं प्रशासन अब इस पीड़िता से किनारा करने लगे है। यदि यहीं हादसा प्रदेश या देश की राजधानी में हो जाता तो ’निर्भया’ की भांति राष्ट्रीय मुद्दा बन जाता लेकिन शालू एक छोटे से शहर में अपनी राहत का जुगाड नहीं कर पा रही है।
सभी ओर से थक हारकर आमरण अनशन पर बैठी शालू को आज पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा भी दिनभर धरने पर नहीं बैठने के लिए धमकियां दी जाती रही है। अतिरिक्त जिला कलेक्टर यासीन पठान से अब इस संबंध में प्रशासन का पक्ष जानना चाहा तो उन्होंने धरने के संबंध में ही अनभिज्ञता दर्शा दी जबकि शाम आठ बजे वे स्वयं इस पीड़िता पर धरना उठाने के लिए दबाव बनाते रहे।
बहरहाल एक पीड़िता को अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए पीड़ित अवस्था में भी न्याय के लिए सडक पर बैठकर गुहार लगाने को बाध्य होना हमारे समाज में नारी को दिए जाने वाले सम्मान पर प्रश्न चिन्ह लगाता है।

अब बैंक में खाता न होने पर भी निकाल सकेंगे ATM से पैसे

0

udaipur मुंबई. एटीएम से रुपए निकालने के लिए अब बैंक में अकाउंट या एटीएम कार्ड होना जरूरी नहीं होगा। इसके लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने नई योजना शुरू की है। बुधवार को रिजर्व बैंक के गनर्वर रघुराम राजन ने एक समारोह में बताया कि अब ऐसे लोग भी एटीएम जाकर पैसे निकाल पाएंगे जिनका किसी भी बैंक में अकाउंट नहीं है।

राजन ने बताया कि रिजर्व बैंक ने इस योजना को हाल ही में मंजूरी दे दी है। फिलहाल एटीएम से पैसे सिर्फ उस बैंक खाते से ही निकाले जा सकते हैं। जिसका एटीएम कार्ड है। राजन ने बताया कि नई योजना में ग्राहक की पहचान और जरूरी सुरक्षा मानकों का पूरा ख्याल रखा गया है।

युवराज सिंह ने IPL-7 ऑक्शन के पहले दिन रचा इतिहास, 14 करोड़ में हुए नीलाम

0

udaipurबेंगलुरु. आईटीसी गार्डनिया होटल में हुई आईपीएल-7 के लिए खिलाड़ियों की नीलामी का पहला दिन युवराज सिंह के नाम रहा। बेंगलुरु द्वारा 14 करोड़ रुपए में खरीदे जाने के बाद वे आईपीएल इतिहास के सबसे महंगे खिलाड़ी बने। वहीं दिनेश कार्तिक को दिल्ली डेयरडेविल्स ने 12.5 करोड़ रुपए में खरीदकर दूसरा सबसे महंगा खिलाड़ी बनाया।
इन दोनों धुरंधरों ने गौतम गंभीर द्वारा 2011 में बनाए 11.04 करोड़ रुपए का रिकॉर्ड तोड़ दिया। गंभीर को केकेआर ने 2.4 मिलियन डॉलर (11.04 करोड़ रु) में खरीदा था।
13 फरवरी को अनकैप्ड खिलाड़ियों की नीलामी होगी। आखिरी दिन फ्रेंचाइजियों के पास कुल 34 खिलाड़ियों को खरीदने की गुंजाइश है।
दिवालिया हुए माल्या!
सबसे कम रकम बेंगलुरु की टीम के पास बची है। बेंगलुरु ने तीन खिलाड़ियों को रिटेन किया था। नीलामी में माल्या 30.5 करोड़ रुपए के बजट के साथ उतरे थे। मुथैया मुरलीधरन, पार्थिव पटेल, एल्बी मॉर्केल, रवि रामपॉल, अशोक डिंडा, मिचेल स्टार्क, निक मैडिन्सन, वरुण आरोन और युवराज सिंह के बाद उनके पास कुल 1.8 करोड़ रुपए की राशि बची। उनकी टीम में फिलहाल 4 खिलाड़ी कम हैं और कुल 1.8 करोड़ रुपए उनके बजट में हैं।
फाइनल सेशन में सिर्फ ऑस्ट्रेलिया के मैट हेनरी को खरीददार मिला। उन्हें चेन्नई की टीम ने 30 लाख रुपए के बेस प्राइज पर खरीदा।
किसके पास बचा है कितना पैसा और कितने खिलाड़ियों का है कोटा?

कोलकाता – 6 खिलाड़ी – 9.00 करोड़ रु.

दिल्ली – 3 खिलाड़ी – 8.6 करोड़ रु

पंजाब – 4 खिलाड़ी -14.20 करोड़ रु.

चेन्नई – 3 खिलाड़ी – 2.9 करोड़ रु.

मुंबई – 6 खिलाड़ी – 5.15 करोड़ रु.

बेंगलुरु – 4 खिलाड़ी – 1.8 करोड़ रु.

हैदराबाद – 3 खिलाड़ी – 8.4 करोड़ रु.

राजस्थान – 5 खिलाड़ी – 12.10 करोड़ रु.

111 खिलाड़ियों को नहीं मिला खरीददार-
महेला जयवर्धने, रॉस टेलर, नमन ओझा, मैथ्यू वेड, क्रेग कीस्वेटर, कुशल परेरा, डेविड हसी, एंजलो मैथ्यूज, तिलकरत्ने दिलशान, अजहर महमूद, रॉबिन पीटरसन, मुरली कार्तिक, नाथन मैक्कुलम और प्रवीण कुमार। इन धुरंधरों को मिलाकर कुल 111 खिलाड़ी नीलाम नहीं हुए।
टूर्नामेंट के इतिहास में पहली बार 500 प्लस खिलाड़ी नीलामी में उतरे हैं। इसमें कैप्ड के साथ अनकैप्ड प्लेयर्स भी शामिल हैं। एक बात और जो आईपीएल नीलामी में पहली बार है वह यह कि इस बार खिलाड़ी डॉलर में नहीं, रुपए में बिकेंगे।

वेलेंटाइन डे का इतिहास

0

valentine day

प्यार का दिन, प्यार के इजहार का दिन। अपने जज्बातों को शब्दों में बयां करने के लिए इस दिन का हर धड़कते हुए दिल को बेसब्री से इंतजार होता है। जी हां, हम बात कर रहे हैं, प्यार के परवानों के दिन की, वेलेंटाइन-डे की…। प्यार भरा यह दिन खुशियों का प्रतीक माना जाता है और हर प्यार करने वाले शख्स के लिए अलग ही अहमियत रखता है।
4 फरवरी को मनाया जाने वाला यह दिन विभिन्न देशों में अलग-अलग तरह से और अलग-अलग विश्वास के साथ मनाया जाता है। पश्चिमी देशों में तो इस दिन की रौनक अपने शबाब पर ही होती है, मगर पूर्वी देशों में भी इस दिन को मनाने का अपना-अपना अंदाज होता है।

st-valentine-502141

जहां चीन में यह दिन ‘नाइट्स ऑफ सेवेन्स’ प्यार में डूबे दिलों के लिए खास होता है, वहीं जापान व कोरिया में इस पर्व को ‘वाइट डे’ का नाम से जाना जाता है। इतना ही नहीं, इन देशों में इस दिन से पूरे एक महीने तक लोग अपने प्यार का इजहार करते हैं और एक-दूसरे को तोहफे व फूल देकर अपनी भावनाओं का इजहार करते हैं।
इस पर्व पर पश्चिमी देशों में पारंपरिक रूप से इस पर्व को मनाने के लिए ‘वेलेंटाइन-डे’ नाम से प्रेम-पत्रों का आदान प्रदान तो किया जाता है ही, साथ में दिल, क्यूपिड, फूलों आदि प्रेम के चिन्हों को उपहार स्वरूप देकर अपनी भावनाओं को भी इजहार किया जाता है। 19वीं सदीं में अमेरिका ने इस दिन पर अधिकारिक तौर पर अवकाश घोषित कर दिया था।
यू.एस ग्रीटिंग कार्ड के अनुमान के अनुसार पूरे विश्व में प्रति वर्ष करीब एक बिलियन वेलेंटाइन्स एक-दूसरे को कार्ड भेजते हैं, जो क्रिसमस के बाद दूसरे स्थान सबसे अधिक कार्ड के विक्रय वाला पर्व माना जाता है।

a-quick-history-of-valentine-s-day-large

ऐसा माना जाता है कि वेलेंटाइन-डे मूल रूप से संत वेलेंटाइन के नाम पर रखा गया है। परंतु सैंट वेलेंटाइन के विषय में ऐतिहासिक तौर पर विभिन्न मत हैं और कुछ भी सटीक जानकारी नहीं है। 1969 में कैथोलिक चर्च ने कुल ग्यारह सेंट वेलेंटाइन के होने की पुष्टि की और 14 फरवरी को उनके सम्मान में पर्व मनाने की घोषणा की। इनमें सबसे महत्वपूर्ण वेलेंटाइन रोम के सेंट वेलेंटाइन माने जाते हैं।
1260 में संकलित की गई ‘ऑरिया ऑफ जैकोबस डी वॉराजिन’ नामक पुस्तक में सेंट वेलेंटाइन का वर्णन मिलता है। इसके अनुसार रोम में तीसरी शताब्दी में सम्राट क्लॉडियस का शासन था। उसके अनुसार विवाह करने से पुरुषों की शक्ति और बुद्धि कम होती है। उसने आज्ञा जारी की कि उसका कोई सैनिक या अधिकारी विवाह नहीं करेगा। संत वेलेंटाइन ने इस क्रूर आदेश का विरोध किया।

उन्हीं के आह्वान पर अनेक सैनिकों और अधिकारियों ने विवाह किए। आखिर क्लॉडियस ने 14 फरवरी सन् 269 को संत वेलेंटाइन को फांसी पर चढ़वा दिया। तब से उनकी स्मृति में प्रेम दिवस मनाया जाता है।

कहा जाता है कि सेंट वेलेंटाइन ने अपनी मृत्यु के समय जेलर की नेत्रहीन बेटी जैकोबस को नेत्रदान किया व जेकोबस को एक पत्र लिखा, जिसमें अंत में उन्होंने लिखा था ‘तुम्हारा वेलेंटाइन’। यह दिन था 14 फरवरी, जिसे बाद में इस संत के नाम से मनाया जाने लगा और वेलेंटाइन-डे के बहाने पूरे विश्व में निःस्वार्थ प्रेम का संदेश फैलाया जाता है।

मंज़िल तक पहुंचेगी मोदी की ‘पंखों वाली रेलगाड़ी’?

0

140130060959_narendra_bhai_modi_624x351_afp

 

पंख वाली रेलगाड़ियां अभी ईजाद नहीं हुई हैं. फ़िलहाल उन्हें ज़मीन पर बिछी पटरियों पर ही दौड़ना होता है. उड़ना उनके बूते की बात नहीं है. पर हो सकता है, एक दिन ऐसा हो ही जाए.

डैने वाली रेलगाड़ियां आएं और उड़कर एक से दूसरी जगह पहुंच जाएं. बीच के सारे मुक़ाम बीच में ही रह जाएं.
कल्पनाओं को पंख लगाने वाले पहले भी हुए हैं. दुर्भाग्य से बेचारे कवि-कथाकार मानकर निपटा दिए गए. जार्ज ऑर्वेल हों कि आर्थर सी. क्लार्क. ‘1984’ और ‘मूनडस्ट’ की कल्पनाएं बेचते रहे.

पीटर आसिमोव भी हाल-फ़िलहाल के ठहरे. लेकिन ये चल बहुत पहले से रहा था.

सवा दो हज़ार साल पहले इसकी शुरुआत भारत में हुई. तिरुवल्लुवर के कुरल के साथ. तमिलनाडु के कवि सुब्रमण्यम भारती भी पीछे नहीं थे.

पिछली सदी के आरंभ में लिख गए थे, “ऐसे यंत्र बनेंगे कि कांचीपुरम् बैठकर, काशी के विद्वत्जन का संवाद सुनेंगे.”

ये उस दौर की बात है जब रेडियो को रेंगना भी नहीं आता था.

पंख वाली रेलगाड़ियां

अफ़सोस की बात ये है कि इन सबकी कल्पनाओं को ठीक-ठाक ठेकेदार नहीं मिले. मिले होते तो पता नहीं क्या हुआ होता. या फिर क्या से क्या हो गया होता.

2000 साल से ऊपर की परंपरा में अब लगता है, सही ठेकेदार सामने आया है और उसकी कल्पना हाथों हाथ लेने वाले ख़रीदार भी घरों के बाहर निकल रहे हैं.

अब जाकर पता चला है कि पंख वाली रेलगाड़ियां दरअसल बन चुकी हैं. उन्होंने उड़ना भी शुरू कर दिया है.

गुजरात के मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी की ओर से प्रधानमंत्री पद के दावेदार नरेन्द्र मोदी डैने वाली रेलगाड़ियों का क़िस्सा अक्सर सुनाते हैं.

पता नहीं क्यों वे इसका ज़िक्र तब ज़्यादा करते हैं, जब उत्तर प्रदेश में हों. बक़ौल उनके, ये रेलगाड़ी उत्तर प्रदेश से उड़ती है तो सीधे गुजरात में उतरती है. ठीक-ठीक वजह तो नहीं मालूम, लेकिन संभव है उन्हें एक पुरानी रेलगाड़ी की याद आ जाती हो जो फ़ैज़ाबाद से चली थी और गोधरा जाकर रुकी थी.
उसके बाद जो हुआ, वह राजधर्म के दायरे से बाहर का मामला था. दंगे फ़साद और मारकाट में ये तथ्य कैसे भुलाया जा सकता है कि उत्तर प्रदेश का गुजरात से रेलगाड़ी वाला रिश्ता भी है.

मोदी का क़िस्सा

मोदी शायद इसीलिए बार-बार रेलगाड़ी का क़िस्सा सुनाते हैं. उनके क़िस्से में एक मां का ज़िक्र है, जिसका बेटा काम की तलाश में गुजरात जाने वाली रेलगाड़ी में सवार होता है.

मोबाइल फ़ोन का ज़माना है, सो मां अपने बेटे को घड़ी-घड़ी फ़ोन करती रहती है. हिदायतें देती है. संभल कर रहना. किसी का दिया कुछ मत खाना. ये भी पूछती है कि अब कहां पहुंचे.

देर रात फ़ोन आया तो बेटे ने कहा,”मां, अब सो जाओ, बहुत रात हो गई है. निश्चिंत रहो, मैं वहां पहुंच कर फ़ोन कर दूंगा.”

मां को चैन नहीं आया. वो सोई नहीं. कुछ देर बाद दोबारा फ़ोन किया तो बेटे ने कहा, “मां! गाड़ी गुजरात में दाख़िल हो गई है. कुछ देर में अहमदाबाद पहुंच जाएगी.”

मां आश्वस्त हो गई. बोली, “अब मैं निश्चिंत हूं.” यानी गुजरात पहुंचने का मतलब है कि अब तुम सुरक्षित हो और वो सो गई.

इस क़िस्से पर ख़ूब तालियां बजती हैं. लोगों ने क़िस्सा सुना और समझ लिया कि यही उड़ने वाली रेलगाड़ी होगी. उत्तर प्रदेश से सीधे गुजरात के नभक्षेत्र में.

ज़मीन के रास्ते पटरियों से जाती तो रास्ते में बीना और रतलाम भी पड़ते. मध्य प्रदेश का बड़ा इलाक़ा आता. कुछ गाड़ियां राजस्थान होकर गुज़रतीं.

लोगों ने उड़ंतू रेलगाड़ी की बात इसलिए भी मान ली कि और चाहे जो हो, नरेन्द्र मोदी मध्य प्रदेश में क़ानून-व्यवस्था की स्थिति की आलोचना क्यों करेंगे.

मोदी और राजनीति
वहां तो भाजपा की ही सरकार है. शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री हैं और वो भी ऐसे-वैसे नहीं. तीसरी बार चुनाव जीत कर आए हैं. पिछली बार के मुक़ाबले ज़्यादा सीटों के साथ. ये करिश्मा तो मोदी और रमन सिंह भी नहीं कर पाए.

कुछ विघ्नसंतोषी जीव इसमें भी राजनीति ढूंढ़ने लगे. कहने लगे कि शिवराज ने चुनाव जीतने पर धन्यवाद ज्ञापन किया तो मोदी का नाम चौथे नंबर पर लिया.

पहले राज्य की जनता, फिर लाल कृष्ण आडवाणी, तब पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह और उसके बाद नरेन्द्र मोदी.

ये भी बोले कि मोदी शायद आम चुनाव के बाद की स्थितियों को लेकर चिंतित हैं और चौहान उनके लिए ख़तरे की घंटी हैं.

ये वही लोग हैं जो कल्पनाओं के पंख कतरने की फ़िराक़ में रहते हैं.

नरेन्द्र मोदी ने इतनी दूर तक सोचा कि नहीं सोचा, ये तो वही जानें. फ़िलहाल लोग जो मान बैठे हैं, वही शायद ठीक होगा. मतदाता तो वही हैं. वे अगर मानते हैं कि पंख वाली रेलगाड़ियां बन चुकी हैं तो हो सकता है कि सचमुच बन गईं हों.

 

मधुकर उपाध्याय

वरिष्ठ पत्रकार, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए

बाइक-कार भिड़ंत में छात्र की मौत

उदयपुर सुखेर थाना क्षेत्र में सौ फीट रोड पर मंगलवार रात बाइक और कार की भिड़ंत में सीटीएई के छात्र की मौत हो गई और दो घायल हो गए। रोड पर जहां हादसा हुआ, वहीं पास एक गड्ढा था। आशंका जताई जा रही है कि हादसा गड्ढे के कारण हुआ, क्योंकि इस जगह पर करीब आधा घंटे पहले एक और एक्सीडेंट हुआ था, जिसमें दो लोग घायल हुए थे।
थाना इंचार्ज अशोक नाथ ने बताया कि हादसे में बाइक सवार आकोदा (कुचामन सिटी) निवासी नरेन्द्र खिलेरी (22) की मौत हुई है। इसके साथी झुंझुनूं निवासी प्रवीण चौधरी और छात्रा अंशुल चौधरी घायल हैं। प्रवीण की हालत गंभीर होने पर कॉलेज प्रबंधन ने देर रात उसे एमबी अस्पताल से अमेरिकन हॉस्पिटल में भर्ती कराया। नरेन्द्र सीटीएई कॉलेज में बीई फाइनल ईयर का स्टूडेंट था। बताया गया कि नरेन्द्र की हेड इंजरी के कारण मौत हुई है। अगर उसने हेलमेट पहना होता तो शायद उसकी जान बच सकती थी। पुलिस ने बताया कि नरेन्द्र, प्रवीण और अंशुल बाइक पर सौ फीट रोड से गुजर रहे थे।
सामने से तेज रफ्तार कार ने बाइक को चपेट में ले लिया। हादसे में तीनों गंभीर घायल हो गए। हादसे के बाद मौके पर काफी भीड़ लग गई। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। जहां नरेन्द्र को डॉक्टर्स ने मृत घोषित कर दिया। वहीं गंभीर घायल प्रवीण को भर्ती किया गया। अंशुल प्राथमिक इलाज के बाद घर चली गई।
सड़क पर खोदा गड्ढा, नहीं लगाया कोई बोर्ड
मौके पर किसी विभाग द्वारा केबल लगाने के लिए सड़क किनारे गड्ढा खोदा गया है। इसकी मिट्टी रोड के बीच तक पड़ी हुई है। गड्ढे के बाद विभाग के कर्मचारियों-अधिकारियों ने यहां कोई बोर्ड नहीं लगाया। इससे अंधेरे में किसी को गड्ढा नजर नहीं आ रहा था। अचानक गड्ढे के दिखाई देने से कई वाहन चालक यहां गिरते-गिरते बचे।