अयोध्या: मीडिया 1992 की तरह एक बार फिर सांप्रदायिकता की आग में घी डाल रहा है .

By –  कृष्ण प्रताप सिंह 

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी सरकार की दो-दो ‘भव्य’, ‘देव’ व ‘दिव्य’ सरकारी दीपावलियों के बावजूद न तो अयोध्या में उस अभीष्ट ‘त्रेता की वापसी’ हुई और न विश्व हिंदू परिषद व शिवसेना का मंदिर राग अयोध्या की आंखों में वैसा उन्माद उतार पा रहा है, जिसे ‘निहारकर’ भाजपा 2019 के लोकसभा चुनाव अथवा मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ व राजस्थान आदि राज्यों के विधानसभा चुनावों के नतीजों को लेकर आश्वस्त हो सके.

हालांकि मीडिया, खासकर हिंदी मीडिया, न सिर्फ़ अपनी 1990-92 की भूमिका में उतर गया बल्कि उसे प्राण-प्रण से दोहरा रहा है. उसके इस दोहराव में कोई अंतर आया है तो सिर्फ इतना कि 90-92 में प्रिंट मीडिया का प्रभुत्व था, जबकि अब इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने उसे पीछे धकेलकर उसका ‘सांप्रदायिक’ पत्रकारिता का परचम उससे छीन लिया है. ख़ुद को राम मंदिर आंदोलन का अघोषित प्रवक्ता तो बना ही लिया है.

लेकिन इधर ये चैनल एक बड़ी मुश्किल से जूझ रहे हैं. अयोध्या है कि प्राइम टाइम का ज़्यादातर वक़्त राम मंदिर विवाद को समर्पित करने के उनके लक्ष्य में सहायक सिद्ध होने को तैयार नहीं है.

धीरे-धीरे करके ही सही आम अयोध्यावासी इस विवाद की व्यर्थता को समझने लगे हैं और अपनी ओर से किसी अंदेशे को हवा नहीं देना चाहते. अयोध्या के इर्द-गिर्द के गांवों के किसान व मज़दूर खाद, बीज, डीजल, बिजली व नहरों में पानी की उपलब्धता और गन्ना व धान बिक्री से जुड़ी अपनी समस्याओं से जूझने से ही फुरसत नहीं पा रहे जबकि भाजपा सरकारों की अनेक वादाख़िलाफ़ियों से दुखी मध्यवर्ग ने भी निर्लिप्तता की चादर ओढ़ ली है.

सो, शिवसेना और विहिप को अपनी कवायदों में उल्लास व उमंग भरने के लिए अपने भरोसेमंद कार्यकर्ताओं पर ही निर्भर करना पड़ रहा है. इससे अयोध्या इन चैनलों के लिहाज़ से पहले जितनी ख़बर-उर्वर या न्यूज़फ्रेंडली रह ही नहीं गई है.

इसका एक कारण ये भी कि चूंकि ‘दूसरे’ पक्ष ने अपनी नियति स्वीकार कर सारे प्रतिरोधों से हाथ खींच लिए हैं, इसलिए कहीं कोई ‘टकराव’ नहीं दिखता.

कई बुज़ुर्ग, शिवसैनिकों व विहिप कार्यकर्ताओं को इंगित कर कहते हैं कि ये जो राम मंदिर का नाम लेकर ‘रोने’ वाले लोग वादाख़िलाफ़ प्रधानमंत्री के कार्यालय के बाहर ‘रोने’ के बजाय चुनाव निकट देख यहां ‘रोने’ आ गए हैं.

उनका इलाज यही है कि उन्हें भरपूर रोने और थक जाने देना चाहिए. बुज़ुर्ग यह भी समझाते हैं कि कैसे मीडिया ने दुरभिसंधिपूर्वक इस विवाद को पहले ‘बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि विवाद’ से ‘राम जन्मभूमि/बाबरी मस्जिद विवाद’ बनाया और कैसे अब न्यूज़ चैनल अपने ‘अयोध्या से लाइव’ कार्यक्रमों में ‘राम मदिंर विवाद’ बताने लगे हैं. इसलिए जागरूक व सचेत नागरिक तो उनके ऐसे ‘लाइव’ कार्यक्रमों से सायास परहेज़ बरतने लगे हैं.

इन चैनलों द्वारा इस हेतु संपर्क किए जाने पर कई जागरूक नागरिक यह पूछने से भी संकोच नहीं करते कि जब उन्होंने अपना पक्ष पहले से तय कर रखा है तो उनके द्वारा इस सिलसिले में कराई जाने वाली किसी भी बहस का क्या मतलब है?

स्थानीय दैनिक ‘जनमोर्चा’ के संपादक शीतला सिंह तो इन चैनलों के प्रतिनिधियों से दो टूक पूछ लेते हैं कि मैं आपकी स्वार्थसाधना का हिस्सा बनने आपके कार्यक्रम में क्यों चलूं? ऐसे में ये चैनल स्थानीय लोगों के असहयोग की भरपाई इस तरह कर रहे हैं कि तीर्थयात्रियों को जमाकर लेते और उन्हें ही अयोध्यावासी बताते रहते हैं.

हां, अपने अहर्निश प्रयासों से वे ऐसे लोगों की एक जमात पैदा करने में सफल रहे हैं जो टीवी पर दिखने के लालच में कैमरे के सामने कुछ भी बोल देने या कैसे भी ऊल-जलूल नारे लगाने को तैयार हो जाती है.

चूंकि इस जमात के बूते चैनलों का काम भरपूर चल निकला है इसलिए ज़मीनी हक़ीक़त की उन्हें परवाह नहीं है. उन्हें यह भी नहीं दिखता कि अयोध्या में यह पहली बार हुआ है कि विहिप के मुकाबले शिवसेना बाज़ी मार ले गयी है- आक्रामकता में भी और प्रचार में भी.

अयोध्या और उसके जुड़वां शहर फ़ैज़ाबाद में प्राय: हर प्रमुख जगह पर लगे शिवसेना के ‘पहले मंदिर, फिर सरकार’ के होर्डिंगों ने विहिप की ‘धर्मसभा’ की चमक छीन ली है.

राम मंदिर को लेकर शिवसेना की ओर से ‘पहले मंदिर फिर सरकार’ का नारा दिया गया है. (फोटो साभार: फेसबुक/शिवसेना)

शिवसेना के मैनेजरों द्वारा विहिप के क़िले में सेंधमारी की कोशिशें भी सफल होती दिखती हैं. पिछले दिनों एक चैनल पर शिवसेना के प्रतिनिधि ने यह कहकर भाजपा के स्थानीय सांसद लल्लू सिंह की तीखी आलोचना शुरू की तो उसे यह कहकर रोक दिया गया कि किसी जनप्रतिनिधि का नाम इस तरह कैसे ले सकते हैं. जैसे कि उसने कोई गंभीर अपराध कर दिया हो.

उन ख़ौफ़ों और अंदेशों को तो ख़ैर प्रिंट मीडिया भी नहीं ही देख रहा, इस अंचल के रोज़ कुंआ खोदने व पानी पीने वाले निम्न आय वर्ग के लोग जिनके शिकार हैं, वे 1990 और 92 के दूध के जले हुए हैं, इसलिए उन्हें न प्रशासन की भरपूर बताई जा रही सुरक्षा व्यवस्था के छाछ पर एतबार हो पा रहा है, न शिवसैनिकों व विहिप के कार्यकर्ताओं की ‘सदाशयता’ पर.

किसी अनहोनी के डर से वे अपने सामर्थ्य भर खाने-पीने व आवश्यक उपभोग की चीज़ें अपने घरों में जमा कर ले रहे हैं लेकिन सबसे बुरा हाल उनका है, जिनके घरों में इस बीच शादियां या कोई अन्य समारोह है.

शादी वाले एक घर के मुखिया जब मैंने पूछा कि वह सैकड़ों मेहमानों के लिए खाना पकवा ले और अचानक कर्फ्यू लग जाए तो क्या होगा? बाहर से आने वाली बारात शहर में कैसे प्रवेश पाएगी? बढ़ती असुरक्षा के बीच अयोध्या में कार्तिक पूर्णिमा का मेला भी ख़ासा फीका रहा. बड़ी संख्या में मेलार्थी आए ही नहीं.

इससे पहले बाबरी मस्जिद के पक्षकार इक़बाल अंसारी ने, जो मरहूम हाशिम अंसारी के बेटे भी हैं, कहा कि असुरक्षा ऐसी ही रही तो वे अयोध्या छोड़कर चले जाएंगे तो मीडिया ने उनकी तकलीफ़ को ज़्यादा कान नहीं दिया, लेकिन मंदिर निर्माण के लिए क़ानून बनाने की मांग पर उनका बयान आया तो उसका अनर्थ करके हाथों-हाथ लपक लिया.

दरअसल, इक़बाल ने कहा यह था कि वे क़ानून बना सकते हैं तो बना लें. हम तो क़ानून के पाबंद नागरिक हैं, जो भी कानून बन जाएगा, उसका पालन करेंगे और नहीं कर सकते तो उपयुक्त मंच पर फरियाद करेंगे.

लेकिन हिंदी के अख़बारों और न्यूज़ चैनलों ने इसे इस तरह पेश किया कि जैसे वे अपना दावा छोड़कर मंदिर निर्माण के लिए क़ानून का समर्थन कर रहे हों. मज़े की बात यह कि ये चैनल, यक़ीनन, भ्रम गहरा करने के लिए लोगों से यह सवाल तो पूछते हैं कि आप अयोध्या में मंदिर निर्माण के पक्ष में हैं या नहीं, लेकिन किसी से भूल कर भी नहीं पूछते कि वहीं मंदिर निर्माण की ज़िद का क्या अर्थ है और क्या इस निर्माण के लिए वह देश के क़ानून, संविधान और सर्वोच्च न्यायालय की गरिमा की बलि भी चाहता है?

विहिप कहती है कि वह इसके लिए अयोध्या की धर्मसभा में तीन लाख लोगों को जुटा रही है तो फौरन इसका प्रचार शुरू कर देने वाले न्यूज़ चैनल उससे इतना भी नहीं पूछते कि उसके अपेक्षाकृत छोटे सभास्थल में ये इतने लाख लोग समाएंगे कैसे?

इससे समझा जा सकता है कि वे लोग कितने ग़लत थे, जो मनमोहन सिंह के राज में कहें या भाजपा व विहिप के पराभव के दिनों में, कहने लगे थे कि भारत 1990-92 के सांप्रदायिक जुनून के दौर से बहुत आगे निकल आया है और अब जाति व धर्म की संकीर्णताओं के लिए अपने पंजे व डैने फड़फड़ाना बहुत मुश्किल होगा.

अब जब सरकारें और उनके समर्थक ही सांप्रदायिक आधार पर अशांति व अंदेशे पैदा कर रहे हैं, समाजवादी नेता सुरेंद्र मोहन ही ठीक नज़र आते हैं, जिन्होंने तब कहा था कि बढ़ती हुई सांप्रदायिकता आर्थिक तनावों का बाय-प्रोडक्ट है और उसे तब तक ख़त्म नहीं किया जा सकता, जब तक अनर्थकारी आर्थिक नीतियों से निजात नहीं पा ली जाती.

लेख साभार – द वायर 

 

मंत्री श्रीचंद कृपलानी बोले, अबकी नहीं जिताओगे तो सुसाइड कर लूंगा

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निम्बाहेड़ा से फिर चुनाव लड़ रहे नगरीय विकास मंत्री व भाजपा प्रत्याशी श्रीचंद कृपलानी ने चुनावी सभा में विवादित बयान दिया है। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
दो दिन पुराने इस वीडियो में कृपलानी मतदाताओं से समर्थन मांगते हुए कह रहे हैं कि अबकी बार मुझे नहीं जिताओगे तो मैं सुसाइड कर लूंगा यह ध्यान रखना। यह वीडियो बुधवार को निम्बाहेड़ा पंचायत समिति के गादोला ग्राम पंचायत के सेगवा गांव की नुक्कड़ सभा का है।
निम्बाहेड़ा प्रधान यशोदा मीणा के गांव में हुई सभा में कार्यकर्ताओं ने कृपलानी को केले से तोलने का कार्यक्रम भी रखा था। कृपलानी उनसे कह रहे हैं कि वे केले से तभी तुलेंगे, जब सभी वहां हाथ उठाकर भाजपा को वोट देने का वादा करेंगे। वीडियो वायरल होने के बाद श्रीचंद ने इसे मजाक में दिया गया बयान बताया। उधर, कांग्रेस ने कहा कि ऐसे बयानों से लगता है कि भाजपा ने हार मान ली है।
हास्य व मजाक में कही गई बात को विरोधी बौखलाहट में इस तरह प्रचारित कर रहे हैं। यह कोई मुद्दा नहीं है। श्रीचंद कृपलानी, भाजपा प्रत्याशी निम्बाहेड़ा
इतने बड़े नेता का सुसाइड कर लूंगा जैसा बयान देना भाजपा व उसके प्रत्याशी की हार की बौखलाहट को बताता है। इस तरह के शब्दों के उपयोग से साफ लग रहा है कि भाजपा ने मतदान से पहले ही हार मान ली है। मांगीलाल धाकड़, कांग्रेस जिलाध्यक्ष, चित्तौडग़ढ़

राजस्थान में 5 पांच दिन में 10 रैलियां करेंगे पीएम मोदी, जानिए कहां-कहां होगी रैली।

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Rajasthan Election 2018- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह एमपी के बाद अब राजस्थान में ताकत झोंकने को तैयार हैं।

जयपुर। Rajasthan Election 2018– प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह एमपी के बाद अब राजस्थान में ताकत झोंकने को तैयार हैं।
मोदी वसुंधरा राजे की नैया पार लगाने के लिए 25 नवबंर को अलवर से राजस्थान के सियासी रण में उतर रहे हैं। पीएम मोदी पांच दिन में 10 रैलियां करेंगे।
जबकि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह अपने 27 नवंबर से 8 दिन के दौरे में 20 चुनावी जनसभा और तीन रोड शो कर भाजपा के पक्ष में चुनावी माहौल बनाने का प्रयास करेंगे।
नागौर में भाजपा प्रत्याशी के समर्थन में आम सभा को संबाधित करने के लिए मोदी 28 नवंबर को आएंगे। मोदी की प्रदेश में अंतिम रैली 4 दिसंबर को जयपुर में होगी।
शाह व मोदी के कार्यक्रम इस तरह तय किए गए हैं, जिससे राजस्थान की अधिक से अधिक विधानसभा क्षेत्र कवर हो जाएं।
प्रदेश में मोदी की रैलियों को देखते हुए पुलिस व इंटेलीजेंस के अधिकारी सुरक्षा के इंतजाम पुख्ता करने में जुटे हुए हैं।
राजस्थान में 7 दिसंबर को मतदान होगा। जीत और हार का फैसला 11 दिसंबर को होगा।
इन—इन शहरों में होगी होगी मोदी के रैली
25 नवंबर को अलवर में
26 नवंबर को भीलवाड़ा,
कोटा और बणेश्वर में
28 नवंबर को नागौर और भरतपुर में
3 दिसंबर को जोधपुर में
4 दिसंबर को हनुमानगढ़, सीकर और जयपुर में

Vodafone और Airtel से चलने वाले 20 करोड़ मोबाइल जल्द हो जाएंगे बंद

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अगर आपके पास वोडाफोन या एयरटेल का सिम है, तो आपके लिए काम की खबर है. देशभर में वोडाफोन और एयरटेल के कई कनेक्शन आने वाले हफ्तों में काम करना बंद कर सकते हैं. कंपनियां 20 करोड़ से ज्यादा लोगों के कनेक्शन बंद करने वाली हैं.

पोर्ट के मुताबिक, जो लोग अपने फोन पर हर महीने 35 रुपए से कम का रीचार्ज करते हैं, उन्हें दूसरा नंबर लेना होगा.

इन दोनों कंपनियों ने ये फैसला अपना Average Revenue per user यानी प्रति व्यक्ति कमाई को बढ़ाने के लिए लिया है.

रिलायंस जियो के आने के बाद से टेलीकॉम कंपनियां पहले ही भारी दबाव में हैं. जियो के सस्ते ऑफर के बाद कंपनियों को भी कॉम्पि‍टीशन में बने रहने के लिए भारी छूट देनी पड़ी, जिससे ज्यादातर बड़ी कंपनियों की प्रति व्यक्ति से इनकम में भारी गिरावट आई और वो उससे उबरने की कोशिश कर रही हैं.

जियो पहली टेलीकॉम कंपनी थी, जिसने फोन कॉल को भी फ्री कर दिया था, जिसको देखते हुए बाकी कंपनियों को भी फोन कॉल फ्री करने का फैसला करना पड़ा. टेलीकॉम इंडस्ट्री को इन फैसलों से काफी नुकसान उठाना पड़ा है.

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: दरअसल वोडाफोन और एयरटेल के करीब 15 और 10 करोड़ यूजर 2G सिम का इस्तेमाल करते हैं. ज्यादातर लोग सिर्फ इसलिए अब तक 2G पर ही टिके हैं, क्योंकि उन्होंने अपना कनेक्शन अपग्रेड नहीं कराया. ये लोग कंपनियों के लिए मुसीबत बने हुए हैं.

हमारे पास करीब 33 करोड़ कस्टमर हैं. लेकिन अगर आप प्रति व्यक्ति इस्तेमाल को देखें, तो करीब 10 करोड़ लोग ऐसे हैं, जिनमें ये बहुत कम है. इसमें से ज्यादातर कनेक्शन हमारे हिस्से में टेलीनॉर के अधिग्रहण के वक्त आए थे.
गोपाल विट्टल, MD और CEO, भारती एयरटेल

4G और 5G के जमाने में कंपनियां आने वाले वक्त में 2G को खत्म करना चाहती हैं.

फाइनेंशियल एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, इन 25 करोड़ यूजर्स में से ज्यादातर ड्युअल सिम फोन का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिसका मतलब है कि एक सिम को सिर्फ इंटरनेट कनेक्शन के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है, दूसरो को छोटे रीचार्ज कर कॉलिंग के लिए.

टेलीकॉम कंपनियों के पिछले फाइनेंशियल नतीजों के मुताबिक, प्रति व्यक्ति से आय के मामले में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली कंपनी जियो है, जिसे 131 रुपए की कमाई होती है, वहीं दूसरे नंबर पर एयरटेल है, जिसे 101 रुपए की कमाई होती है. आइडिया और वोडाफोन को सिर्फ 88 रुपए प्रति यूजर की कमाई हो रही है.

अमित शाह व डीजी वंजारा तुलसीराम प्रजापति हत्याकांड के मुख्य साजिशकर्ता: मुख्य जांच अधिकारी

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गुजरात में तुलसीराम प्रजापति फर्जी एनकाउंटर केस के मुख्य जांच अधिकारी ने बुधवार को सीबीआई की स्पेशल कोर्ट को बताया कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और डीजी वंजारा, दिनेश एमएन और राजकुमार पांडियन जैसे आईपीएस अधिकारी इस मामले के मुख्य साजिशकर्ता थे.

सोहराबुद्दीन शेख के साथी तुलसीराम प्रजापति की साल 2006 में गुजरात में एक फर्जी एनकाउंटर में हत्या हुई थी. नगालैंड कैडर के पुलिस अधिकारी संदीप तमगड़े ने अप्रैल 2012 से मुख्य जांच अधिकारी के रूप में इस मामले की जांच की थी.

तमगड़े ने कोर्ट को बताया कि नेताओं-अपराधियों का एक नेक्सस बना हुआ था. अमित शाह और राजस्थान के गृह मंत्री गुलाबचंद कटारिया ने सोहराबुद्दीन शेख, तुलसीराम प्रजापति और आजम खान जैसे लोगों का इस्तेमाल कर साल 2004 में नामी बिल्डरों के यहां हमला कराया था.

बता दें कि अमित शाह, गुलाबचंद कटारिया, दिनेश एमएन, पांडियन और वंजारा इन मामलों में आरोपी थे और इन्हें 2014 से 2017 के बीच में ट्रायल कोर्ट द्वारा बरी किया जा चुका है.

तमगड़े ने बताया कि आरोपियों के कॉल डेटा रिकॉर्ड (सीडीआर) से ये स्पष्ट हुआ है कि इस तरह के अपराध करने की साजिश रची गई थी.

कोर्ट में पूछताछ के दौरान अधिकारी ने स्वीकार किया कि सीडीआर किसी निश्चित समय पर किसी व्यक्ति के स्थान का पता लगाने का सबसे बेहतरीन सबूत है. जब ये पूछा गया कि जांच के दौरान इकट्ठा किए गए सीडीआर से क्या ये बात स्थापित होती है कि साजिश रची गई थी, तो उन्होंने कहा कि हां ऐसा हुआ था.

जब बचाव पक्ष के वकील के पूछा कि उन लोगों का नाम बताइए जिनके सीडीआर से ये स्पष्ट होता है कि साजिश रची गई थी, तो तमगड़े ने कहा, ‘अमित शाह, दिनेश एमएन, वंजारा, पांडियान, विपुल अग्रवाल, आशीष पांड्या, एनएच दाभी और जीएस राव.’

संदीप तमगड़े ने जितने लोगों का नाम लिया है उसमें से अभी पांडियन, दाभी और राव मामले में आरोपी हैं. अमित शाह जैसे अन्य लोगों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया है. सीबीआई ने इन लोगों के बीच की बातचीत को चार्जशीट में शामिल किया है. ट्रायल कोर्ट ने आरोपियों को बरी करते वक्त कहा था कि इनके खिलाफ सबूतों का अभाव है.

तुलसीराम प्रजापति की 28 दिसंबर, 2006 को गुजरात में हत्या हुई थी. राजस्थान पुलिस अधिकारियों का दावा था कि प्रजापति को जब अहमदाबाद में सुनवाई के बाद उदयपुर जेल वापस ले जाया जा रहा था तो वो पुलिस कस्टडी से भाग गया था. सीबीआई इस बात को स्वीकार करती आई है कि सोहराबुद्दीन और तुलसीराम प्रजापति पुलिस और नेताओं के सहयोग से उगाही रैकेट चलाते थे.

सीबीआई के मुताबिक 23 नवंबर, 2005 को सोहराबुद्दीन, उसकी पत्नी कौसर बी और तुलसीराम की हत्या के लिए साजिश रची गई थी. सीबीआई चार्जशीट के मुताबिक सोहराबुद्दीन की 26 नवंबर, 2005 को फेक एनकाउंटर में हत्या की गई और बाद में कौसर बी की हत्या कर दी गई.

बुधवार को तमगड़े ने कोर्ट को बताया कि जब उन्होंने अप्रैल 2012 में इस मामले की जांच शुरू की तो उस समय उनके पहले वाले अधिकारियों ने सोहराबुद्दीन मामले की जांच काफी हद तक खत्म कर ली थी. तमगड़े ने कहा कि उन्होंने गुलाबचंद कटारिया और मार्बल बिजनेसमैन विमल पाटनी का बयान दर्ज किया था.

जब वकील वहाब खान ने पूछा कि क्या सबूतों को खत्म कर दिया गया या छुपाया गया, तो कोर्ट ने ये सवाल पूछने नहीं दिया. कोर्ट ने कहा कि ये सवाल खान के मुवक्किल राजस्थान पुलिस अधिकारी अब्दुल रहमान से संबंधित नहीं है.

भाजपा और आरएसएस का समर्थन करने वाले ही हिन्दू नहीं होते हिन्दू धर्म को मानने वाला हिन्दू होता है, नफरत की राजनीति बंद होनी चाहिए – अशोक गहलोत

उदयपुर। विधानसभा चुनाव को लेकर उदयपुर में उदयपुर शहर और ग्रामीण विधानसभा के कांग्रेसी प्रत्याशियों के समर्थन में आये पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भाजपा और वसुंधरा पर खूब प्रहार किये. गहलोत ने कहा कांग्रेस को लेकर पूरा प्रदेश में अच्छा माहौल है। कांग्रेस को लेकर सब जगह माहौल अंडर करंट चल रहा है । भारी बहुमत से कांग्रेस जीतने जा रही है। भाजपा धर्म की राजनीति करती है आर एस एस और भाजपा का समर्थन करने वाले ही हिन्दू नहीं होते हिन्दू हम सब है . गहलोत ने सभा के बाद विवेक कटारा के सम्बन्ध में जन संपर्क कर लोगों से जीत दिलाने की अपील की .
सेक्टर 11 गवरी चौक में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने उदयपुर शहर और देहात विधानसभा सीटों के कांग्रेस प्रत्याशियों विवेक कटारा और गिरजा व्यास के समर्थन में चुनावी सभा को संबोधित करते हुए वसुंधरा राजे और प्रधानमंत्री परेन्द्र मोदी को निशाने पर लेते हुए कहा कि, उन्होंने अपने पूर्ववर्ती मुख्यमंत्री कार्यकाल में अकाल राहत के लिए किए कामों सहित मुख्यमंत्री नि:शुल्क दवा, जांच, पशु चिकित्सा योजनाओं का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने देश के लिए अंगुली तक नहीं कटवाई, वह कांगे्रस से 70 साल का हिसाब मांग रहे। कांग्रेस वह पार्टी है जिसने देश के लिए खून दिया है। आजाद हिन्दूस्तान को अपने पैरों पर खड़ा किया। उन्होंने कहा कि मोदीजी ने देश से 50 दिन मांगे थे, पांच साल में भी कुछ नहीं कर पाए। नोटबंदी की आड़ में कालाधन पूरा सफेद हो गया। स्विस बैंकों से एक रुपया तक नहीं ला सके। उन्होंने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह पर निशाना साधते हुए कहा कि शाह भरी सभाओं को लोगों को गिरेहबान पकडऩे के लिए उकसा रहे हैं। यदि ऐसा हुआ तो कानून व्यवस्था का क्या होगा? उन्होंने कहा कि भाजपा का नियम-कानूनों में विश्वास ही नही रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री पर भी निशाना साधते हुए कहा कि मुख्यमंत्री काले झण्डे से डर रही है।
जिस तरह वसुंधरा राजे आज अमित शाह को नमन कर रही है एसे अगर पांच साल तक अगर मतदाताओं को नमन कर लेतीं तो आक्रोश पैदा नहीं होता। उन्होंने परवाह ही नहीं की . वे 5 साल केवल प्लेन से दिल्ली और धौलपुर जाती रहीं। काम उन्होंने कब किया। गहलोत ने कहा कि हम जब जब भी सरकार में आये तब पूर्व की भाजपा सरकार के कोई काम बंद नहीं किये लेकिन जैसे ही भाजपा की सरकार आई उन्होंने हमारे द्वारा चलाई गयी जनहित योजनाओं को बंद कर दिया .वसुंधरा राजे के प्रति गावों में लोगों के अन्दर गुस्सा है . गहलोत ने कहा कि जनता अनपढ़ गरीब हो सकती है लेकिन उसकी समझ बहुत है और इस बार अपनी समझ से वह भाजपा को जवाब देगी. वसुंधरा 5 साल तक जनता के सामने सिर्फ महारानी बन कर रही है . राज्य में अपराधों का ग्राफ बढ़ा है लोग अपने घरों में सुरक्षित नहीं है और नाम के गृह मंत्री गुलाबचंद कटारिया चुप बैठे रहे है .
गहलोत ने नरेंद्र मोदी पर प्रहार करते हुए नोटबंदी पर सवाल उठाये और रफाल के मामले में भ्रष्टाचार का हवाला दिया . सीपी जोशी के मामले में वे बोले, बीजेपी तोड़मरोडकऱ बयान को पेश कर रही है। इस तरह के बयानाेें से नेतााओंं को बचना चाहिए।
सभा के बाद अशोक गहलोत ने विवेक कटारा के समर्थन में वोट डालने की अपील करते हुए पास की ही कोलोनी में जन संपर्क किया .
सभा में शहर विधानसभा की प्रत्याशी गिरजा व्यास भी मोजूद थी उन्होंने भी अपने उद्बोधन में वसुंधरा और गुलाबचंद कटारिया के कार्यकाल पर सवाल उठाये. ग्रामीण प्रत्याशी विवेक कटारा कांग्रेस देहात जिलाध्यक्ष लालसिंह झाला भी मोजूद थे जिन्होंने सभा को संबोधित किया . सभा के दौरान अशोक गहलोत का कांग्रेसी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों द्वारा सूत की माला पहना कर स्वागत किया .

विवादित बयान पर राहुल गांधी की ‘फटकार’ के बाद बोले डॉ जोशी, ‘खेद प्रकट करता हूं’

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जाति-धर्म के आधार पर दिए गए विवादित बयान के वायरल होने के बाद पूर्व केन्द्रीय मंत्री डॉ सीपी जोशी बुरी तरह से फंस गए। नौबत अब यहाँ तक आ गई है कि उन्हें अपने बयान को लेकर सार्वजनिक तौर पर खेद जताना पड़ गया है। अपने ऑफिशियल ट्विटर अकाउंट पर एक ट्वीट करते हुए डॉ जोशी ने इस विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। ट्वीट में उन्होंने लिखा, ”कांग्रेस के सिद्धांतो एवं कार्यकर्ताओं की भावनाओं का सम्मान करते हुए मेरे कथन से समाज के किसी वर्ग को ठेस पहुंची हो तो मैं उसके लिए खेद प्रकट करता हूं।
इससे पहले एक अन्य ट्वीट में डॉ जोशी ने लिखा, ”बीजेपी की ओर से मेरे कथन को तोड़-मरोड़कर पेश करने की मैं निंदा करता हूं। तमाम विवादों को ख़त्म करने के लिए, मैं यहां मेरे भाषण का क्लिप संलग्न कर रहा हूं। “ सत्यमेव जयते”
कांग्रेस के सिद्धांतो एवं कार्यकर्ताओं की भावनाओं का सम्मान करते हुए मेरे कथन से समाज के किसी वर्ग को ठेस पहुँची हो तो मैं उसके लिए खेद प्रकट करता हूँ ।
राहुल गांधी ने भी जताई नाराज़गी
डॉक्टर सीपी जोशी के ट्वीट कर खेद प्रकट करने से पहले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी जोशी के बयान को लेकर प्रतिक्रिया दी। राहुल ने भी ट्वीट करते हुए लिखा, ”सीपी जोशी जी का बयान कांग्रेस पार्टी के आदर्शों के विपरीत है। पार्टी के नेता ऐसा कोई बयान न दें जिससे समाज के किसी भी वर्ग को दुःख पहुंचे। कांग्रेस के सिद्धांतों, कार्यकर्ताओं की भावना का आदर करते हुए जोशीजी को जरूर गलती का अहसास होगा। उन्हें अपने बयान पर खेद प्रकट करना चाहिए।”
सी पी जोशी जी का बयान कांग्रेस पार्टी के आदर्शों के विपरीत है। पार्टी के नेता ऐसा कोई बयान न दें जिससे समाज के किसी भी वर्ग को दुःख पहुँचे। कांग्रेस के सिद्धांतों, कार्यकर्ताओं की भावना का आदर करते हुए जोशीजी को जरूर गलती का अहसास होगा। उन्हें अपने बयान पर खेद प्रकट करना चाहिए।
गुरुवार को सेमा गांव में चुनावी सभा में दिए भाषण का वीडियो वायरल हुआ है। राज व धर्म की व्याख्या करते जोशी ने जाति-धर्म का जिक्र कर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, उमा भारती व साध्वी ऋतम्भरा पर वार किया। भाजपा ने इस वीडियो को मुख्य चुनाव अधिकारी को भेजकर आरोप लगाया कि जोशी जातिगत वैमनस्य फैला रहे हैं।

राजसमंद जिले की नाथद्वारा विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी जोशी सेमा गांव में चुनावी सभा को सम्बोधित किया। इस दौरान जोशी ने भाजपा की नीतियों की जमकर खिंचाई की। करीब 23 मिनट के भाषण के बीच उनके द्वारा धर्म और जाति पर दिए 35 सैकंड का वीडियो बाद में वायरल हो गया। उदयपुर भाजपा देहात ने निर्वाचन विभाग को दी शिकायत में कहा कि सीपी जोशी ने आदर्श चुनावी आचार संहिता का उल्लंघन किया है।

भाजपा उदयपुर देहात जिला उपाध्यक्ष तथा मीडिया प्रभारी वीरेन्द्र सिंह सोलंकी ने ई-मेल व वाट्सएप के जरिए निर्वाचन विभाग को भेजी शिकायत में बताया कि गुरुवार को सेमा गांव में चुनावी सभा में भाषण के दौरान सीपी ने प्रधानमंत्री मोदी, साध्वी उमा भारती व साध्वी ऋतंभरा की जाति का गलत तरीके से उल्लेख करते हुए विद्वेष फैलाया है। पत्रिका ने इस संबंध में जोशी का पक्ष जानने के लिए उनसे मोबाइल पर सम्पर्क करना चाहा लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।

कांग्रेस का काम है, इस तरह की निम्न स्तर की टिप्पणी करना। भाजपा इसमें विश्वास नहीं करती है। एक मंत्री रहे नेता को यह शोभा नहीं देता कि ऐसी बात करना।
भंवरलाल शर्मा, भाजपा जिलाध्यक्ष, राजसमंद

साधु-संतों और शीर्ष पदों पर बैठे लोगों के खिलाफ इस प्रकार का बयान घोर निंदनीय है। मानसिक दिवालियापन का प्रतीक है। जनता से माफी मांगनी चाहिए।
दिनेश भट्ट, भाजपा शहर जिलाध्यक्ष, उदयपुर

जावड़ेकर बोले- निंदनीय है जोशी का बयान
केंद्रीय मंत्री और राजस्थान प्रभारी प्रकाश जावड़ेकर ने कांग्रेस की ओर से जारी किए जा रहे बयानों की भर्त्सना की है। सीपी जोशी के बयान का विरोध करते हुए उन्होंने आचार संहिता का उल्लंघन बताया और चुनाव आयोग में कांग्रेस की शिकायत की भी बात की। कांग्रेस के सेना विरोधी और राष्ट्र विरोधी बयानों की भी उन्होंने निंदा की।
जावड़ेकर ने कहा कि महंगाई रोजगार जैसे मुद्दों पर कांग्रेस झूठ बोल रही है। सचिन पायलट को खेलने लेकिन अशोक गहलोत के विरुद्ध दमदार उम्मीदवार नहीं उतारने के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि यहां भी हमारी रणनीति है और समय आने पर पता चलेगा।

उदयपुर शहर विधानसभा में भाईसाहब की मुश्किलें बढ़ी – नहीं उठे बागियों के फ़ार्म।

उदयपुर। दावेदारों के नामांकन उठाने की 22 नवम्बर आखरी तारीख थी। भाजपा के बागी के रूप में माने जाने वाले जनता सेना के दलपत सुराना और निर्दलीय प्रवीण रतालिया के फ़ार्म उठाने की अफवाहें उडती रही लेकिन किसी ने फ़ार्म नहीं उठाया।
उदयपुर शहर में भाजपा और शहर से भाजपा के प्रत्याशी गुलाबचंद कटारिया की मुश्किलें कम होती नहीं दिख रही भाजपा के बागी दलपत सुराणा और प्रवीण रातलिया ने फ़ार्म नहीं उठाया और चुनाव लड़ने का फैसला किया। गुरूवार सुबह से ही हर जननेता और खासोआम में यही पषोपेष चल रही थी कि जनता सेना के दलपत सुराणा और प्रवीण रतलिया अपना नामांकन उठा सकते है। कलेक्टरी पर ही सभी की निगाहें भी थी लेकिन आखिर निराशा ही हाथ लगी। करीब पांच दषकों तक भारतीय जनता पार्टी के साथ रहकर जनता के बीच पार्टी को सिद्धांतों की बात करने वाले दलपत सुराणा ने पार्टी को छोड़कर जनता सेना का दामन थामा और उदयपुर षहर से चुनावी मैदान में भी उतर गए । दलपत जी गुरूवार सुबह भी उसी जोष खरोष से निकले जिस उर्जा से वह चुनावी मैदान में उतरे थे। षहर में अपने समर्थकों के साथ प्रचार – प्रसार कर रहे थे। बातचीत में उन्होंने साफ किया कटारिया जी का फोन आया था, लेकिन मैं बैठने वाला नहीं मैंने तो उन्हें यही कहा चालिस साल हो गए आपको अब तो सत्ता का मोह छोड़ो।

इधर प्रवीण रातलिया भी चुनावी मैदान में है आज दिन में हास्यास्प्रद वाक्या तो तब हो गया जब सभी को यह पता चला कि निर्दलीय उम्मीदवार प्रवीण रतलिया नामांकन उठाकर भाजपा प्रत्याषी कटारिया को समर्थन कर रहे हैं। पार्टी के अधिवक्ता भी कलेक्टरी पर पंहुच गए, ऐसे में ठीक 2 बजकर 55 मिनट पर रतलिया अपनी गाड़ी में कलेेक्टरी पंहुचे। सभी मीडियाकर्मियों के कैमरे षुरू हो गए, अधिवक्ता प्रवीण खण्डेलवाल और राजेष वसीटा भी उनके साथ – साथ कलेक्टर चेम्बर की ओर चल दिए। लेकिन सभी चैंक तो उस समय गए जब रतलिया ने कहा मैं पर्चा उठाने नहीं सिम्बोल लेने आया हूं। रतलिया द्वारा ऐसा बोलते ही पार्टी से जुड़े सभी लोग मौन साधकर चुपचाप वहां से खिसक लिए। मीडिया से बातचीत में रतलिया ने कहा कि उनका चुनाव लड़ना तय है और निकलने का समय तो अब गुलाब जी का है, षहरवासी इस बार चाबी को ही चुनेंगे।

उदयपुर के जुलुस-ए-मोहम्मदी के दौरान करीब ढाई से तीन करोड़ रूपये का तबरुक बांटा जाता है- कोई खाली हाथ नहीं जाता।

उदयपुर। आशिक़ ए रसूल के दीवानों का यह हाल है कि पुरे शहर में सिर्फ एक दिन में जुलुस के दौरान ढाई से तीन करोड़ रूपये से ज्यादा विभिन्न तरह की खाने पिने की चीजें वितरित कर देते है। जिसमें फ्रूटी, आइस क्रीम, अलुबदे, कोल्ड ड्रिंक, चिकन दाना, पुलाव, चोकलेट, फ्रूट केक, मफिन केक, खीर, रबड़ी, राब, छाछ आदि हर एक खाने पिने की चिओजें बांटी जाती है।
करीब एक लाख से अधिक लोग जुलुस में शरीक होते है और जुलुस की शान यह है कि एक भी बच्चा युवा महिला या वृद्ध एसा नहीं होता है जिसको कही कोई खाने पिने से वंचित होना पडा हो। आशिक़ ए रसूल जुलुस में आये लोगों को रोक रोक कर उन्हें हर खाने पिने की चीजें देते है।
पुरे जुलुस में इस बार करीब करीब 250 से अधिक बड़ी  और  छोटी स्टालें लगी हुई थी इसके अलावा हर मोहल्लों में करीब 150 से अधिक खाने पिने की स्टालें लगी हुई थी। एक अनुमान लगाया और स्टाल लगाने वालों से पूछा तो चोकाने वाला आंकड़ा सामने आया कम से कम 5000 हज़ार और अधिक से अधिक सवा लाख रूपये तक खर्च कर खाने पिने की चीजें बांट देते है। हालाँकि भीड़ ज्यादा होने की वजह से बांटने का तरिका कई बार सही नहीं होता लेकिन इसके बावजूद जुलुस में मोजूद हर एक बच्चे बच्चे के साथ में कुछ न कुछ खाने की चीज मिल जाती है।
जुलुस के बाद कई मोहल्लों में आम नयाज़ का कार्यक्रम भी होता है जिसमे २१ हज़ार रूपये से एक लाख रूपये तक का खर्च होता है। इसके अलावा जश्न ए ईद मिलादुन्नबी की पूर्व संध्या पर हर मुस्लिम मोहल्लों में रौशनी से सजाया जाता है जहाँ कई खाने पिने की स्टालें लगी रहती है और रात ८ बजे से देर रात १२ बजे तक जश्न का माहोल रहता है जिसमे शहर कोग शरीक होते है। खानजी पीर जिसमे मुख्य है जहां ख़ास विशुत सज्जा देखने के लिए हर कोई आता है।

 

 

“रावले में कैद भाजपा” कटारिया का यह बयान वल्लभनगर में क्या गुल खिलायेगा ?

उदयपुर। वल्लभनगर विधानसभा उदयपुर जिले की सबसे हॉट सीट है। त्रिकोणीय मुकाबला है। जनता सेना भाजपा और कांग्रेस के बिच। जनता सेना से है जनता सेना के सुप्रीमो रंधीर सिंह भिंडर जो मोजुदा विधायक भी है। कांग्रेस से मैदान में गजेन्द्र सिंह शक्तावत और भाजपा के प्रत्याशी है उदयलाल डांगी।
गौरतलब है कि पिछले विधानसभा चुनाव में मोदी लहर के बावजूद यहाँ से जनता सेना के निर्दलीय होने के बावजूद रणधीर सिंह भिंडर ने विजय हासिल की थी। इस बार भी भिंडर पुरे दम ख़म के साथ मैदान में है और इधर कांग्रेस के गजेन्द्र सिंह शक्तावत भी मैदान में है जिन्होंने हार के बावजूद क्षेत्र में लोगों के बिच बने रहे। भाजपा के प्रत्याशी उदयलाल डांगी भी मैदान में है देखते है इस बार तीनों के बिच कैसी करामात होती है और 12 दिसंबर के बाद किसकी बात होती है।
इन्ही साड़ी बातों को लेकर क्षत्रिय महासभा के महामंत्री और राजनीति विशेषग्य तनवीर सिंह क्रशानावत हमारे साथ है निचे विडियो में आम जनता की बात वे बेबाकी से रख रहे है आप भी देखिये।