
उदयपुर। अपराधियों में डर आमजन विष्वास’’ यह पुलिसिया नारा कहीं सुना – सुनाया सा लगता है। लेकिन गृहमंत्री के गढ़ की खाकी की बात करें तो यह नारा ‘‘आमजन में डर और अपराधियों में विष्वास’’ सा लगने लगा है। तबादलों की फिक्र में उलझी खाकी यहां इतनी कमजोर हो गई हैकि मामूली गुण्डे भी शहर की आबो हवा में खौफ का जहर घोलकर सरेराह बेखौफ घुम रहे हैं। जीहां हम बात कर रहे है एक मामूली गुण्डे इमरान कूंजडा की।। जिसने पूरे शहर की वजनदार खाकी को बेदम कर दिया है। दो दिन पूर्व इस कुंजड़ा और इसके साथी गुण्डे का ऐसा विडियो वायरल हुआ जिसने पूरे शहर को खौफजदा कर दिया, लेकिन खाकी फिर भी आजतक बेपरवाह बनी हुई है। आष्चर्य की बात तो यह है कि जिस कार में यह गुण्डे उत्पात मचाकर शहर में घूम रहे थे वही कार अम्बामाता थाना पुलिस को लावारिस हालात में मिली और कार तलाशी लेने पर खाकी को अवैध शराब के दो कार्टून भी बरामद हुए सिर्फ इसी आधार पर आबकारी एक्ट के तहत कार को जब्त कर लिया गया, लेकिन दोनों बदमाश कहां गए यह खाकी के गुप्तचरों तक को नहीं पता।
शहर के विभिन्न थाना क्षेत्रों का हिस्ट्रीशीटर इमरान कुंजड़ा बुधवार को अंबामाता थाना क्षेत्र में आया और मल्लाहतलाई की एक दुकान में शराब की बोतल फेंककर भाग खड़ा हुआ। सीसीटीवी कैमरे में डेढ मिनट का एक विडियो वायरल हुआ है जिसने मल्लातलाई इलाके में हिस्ट्रीशीटर इमरान कुंजड़ा अपने साथी के साथ हल्के आसमानी रंग की कार में सवार होकर पहुंचा। वह कार से शराब की बोतल लेकर उतरा और लोगों को डराना शुरू कर दिया। हालांकि ज्यादातर सीसीटीवी कैमरे में आॅडियो रिकाॅर्ड नहीं होता इसलिए यह गुण्डा क्या कह रहा था वह सुनाई नहीं दिया। इस बीच दुसरा साथी गुण्डा भी कार से बाहर निकला और जेब से कुछ निकालने लगा, लेकिन कुंजड़ा ने उसको रोक दिया। वहीं यह गुण्डा फिर उलटी तरफ मुड़ा और शराब की बोतल सामने वाले मकान में फैंकते हुए कार में सवार होकर रवाना हो गया। हमेशा की तरह देर से पंहुचने वाली खाकी मौके पर भी पंहुची और सीसीटीवी खंगालकर कार्रवाई में ही इतिश्री कर ली। हालाकि पुलिस को वारदात में प्रयुक्त कार तो लावारिस हालत में मिल गई, लेकिन उसमें सवार गुण्डों का कहीं कोई पता नहीं चल सका।
एक मामूली गुंडे को कही भी दबिश देकर नहीं पकड़ना खाकी की कार्यशैली पर सवाल उठाता है। जो अपराधी वांटेड है पुलिस को उसकी तलाश है उसको पकड़ने में पुलिस की ईएसआई कोताही कुछ समझ के परे है। एसा लग रहा है मानो गृहसेवक के गढ़ की खाकी भी खौफ खा रही है। उन्हें कार तो मिलती है लेकिन कार सवार नहीं। यह कैसे संभव हुआ वह तो अम्बामाता पुलिस ही जाने, लेकिन इस तरह से एक गुण्डे का अभी भी बाहर घुमना किसी बड़े अपराध का संकेत भी हो सकता है।


उदयपुर पोस्ट . राजस्थान में एक विधानसभा सीट मंडलगढ़ और दो लिक सभा सीट अलवर व् अजमेर पर उपचुनाव हुए थे . आज आये नतीजों में अब तक तीनों सीटों पर कांग्रेस आगे चल रही है . माना जारहा है कि राजस्थान के मुख्य विधानसभा चुनाव के ठीक पहले हुए उपचुनाव एक तरह से सेमी फायनल था और इस सेमी फायनल में कांग्रेस पूरी तरह से विजयी रही है .
उदयपुर .प्रधानमंत्री आवास योजना के 19 हजार आवेदकों का रिकाॅर्ड नगर विकास प्रन्यास से गायब हो गया है . आवेदक दर – बदर भटक रहे है . खुद भाजपा के ही एक गुट ने ही नगर विन्यास की कार्यशेली पर सवाल उठाया है.
पोस्ट न्यूज़। देश की मोदी सरकार अपना अंतिम पूर्णकालिक budget 2018 एक फरवरी यानि गुरूवार को पेश करने जा रही है। केंद्रीय वित्तसेवक अरुण जेटली इस आम budget 2018 को संसद के पटल पर रखेंगे। वैसे अगले लोकसभा चुनाव के मद्देनजर माना जा रहा था कि यह बजट लोकलुभावन हो सकता है. लेकिन प्रधानसेवक नरेंद्र मोदी ने टीवी इंटरव्यू में कह दिया कि लोगों को मुफ्त की चीजें नहीं बल्कि ईमानदार शासन पसंद है. ऐसे में अब कयास लग रहा है कि आखिर कैसा होगा यह बजट ? हालांकि विशेषज्ञ कहते हैं कि चुनावी वर्ष में सरकार खजाना न खोले, ऐसा हो पाना मुमकिन नहीं. ऐसे में जेटली के सामने एक बड़ी चुनौती राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को सामने रख महंगाई और विकास दर में संतुलन बिठाना होगा. सरकार यह कतई नहीं चाहेगी कि चुनावी वर्ष में विपक्ष उस पर महंगाई बढ़ाने की तोहमत लगाए. ऐसे में सरकारी खर्च पर सबकी नजरें करीब से लगी रहेंगी. आंकलन तो यह भी है कि इस साल के मध्य तक भारत की अर्थव्यवस्था चीन को पीछे छोड़ कर दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बन जाएगी. चुनावी वर्ष में सरकार के लिए अपनी पीठ थपथपाने का यह एक बड़ा मौका हो सकता है. एक बड़ा सवाल यह भी है कि सरकार चुनावी वर्ष में खर्च करने के लिए पैसा कहां से लाएगी. कहा जा रहा है कि विनिवेश के नए मौके खोजे जाएंगे. वहीं गुजरात चुनाव में ग्रामीण इलाकों में बीजेपी की हार के बाद यह सवाल उठने लगा है कि देश भर में कृषि क्षेत्र में छाए संकट को दूर करने के लिए सरकार क्या उपाय कर रही है ? स्वयं प्रधानसेवक ने भी टीवी इंटरव्यू में इस संकट के बारे में स्वीकार किया है और इसके लिए आवश्यक उपाय उठाने का आश्वासन दिया है. याद रहे कि पिछले बजट में सरकार ने अगले पांच वर्षों में यानी 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुनी करने का लक्ष्य रखा है. लेकिन कृषि विकास दर में कमी इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य के पूरा होने पर सवालिया निशान लगा रही है. किसानों की आत्महत्या और उपज के सही दाम न मिल पाना राज्य सरकारों के सामने बड़ी चुनौती है. बीजेपी के लिए यह ज्यादा बड़ी परेशानी है क्योंकि सहयोगियों के साथ 19 राज्यों में उसकी सरकार है. युवाओं को रोजगार एक ऐसा मुद्दा है जिस पर मोदी सरकार को अगले चुनाव में कई सवालों के जवाब देने हैं. हालांकि पीएम मोदी कह रहे हैं कि रोजगार के आंकड़े जुटाने के तरीके ठीक नहीं हैं और वह स्वरोजगार के बढ़े अवसरों का जिक्र करते हैं. लेकिन बजट एक ऐसा अंतिम अवसर है जिसमें सरकार युवाओं के रोजगार को बढ़ाने के लिए कुछ बड़े ऐलान कर सकती है.साथ निजी निवेश के लिए सरकार कुछ प्रोत्साहन के कदम घोषित कर सकती है. हर चुनाव से पहले मध्यम वर्ग बड़ी आस से सरकार की ओर देखता है. हालांकि जीएसटी लगने के बाद अप्रत्यक्ष कर अब बजट का हिस्सा नहीं होंगे. ऐसे में मध्य वर्ग की पूरी आशा प्रत्यक्ष कर यानी आयकर पर आकर टिक जाती है. वैसे इतिहास गवाह है कि चुनाव से पहले के अंतिम पूर्ण बजट में सरकारें मध्यम वर्ग को आयकर की दरों में कोई बड़ी राहत देने से बचती रही हैं. बजट लोक लुभावन न होने के पीएम मोदी के इशारे से भी मध्यम वर्ग की उम्मीदों को झटका लगा है. हालांकि जानकार कहते हैं कि हाल के सारे चुनावों में बीजेपी का मजबूती से साथ देने वाले मध्यम वर्ग को दरकिनार करना सरकार के लिए थोड़ा मुश्किल होगा. इसलिए संभावना व्यक्त की जा रही है कि आय कर की दरों में मामूली राहत जरूर मिलेगी.

तीन साल की बच्ची को बर्बरता से पीटना कहां तक उचित है। मासूम अपनी जान बचाने के लिए फांसी न लग जाए इसलिए फंदे को पकडता रहा और जैसे ही पिता छड़ी बच्चे के नग्न कुल्हे पर मारता। बेबस अपने कांपते हातों से खुद को बचाने का प्रयास चींखते गिड़गिड़ाते हुए करता रहा। इस ‘राक्षक’ पिता की हरकतों को दुनिया भर में जिस किसी ने भी देखा उसकी रूह कांप उठी। बच्चों की गलती सिर्फ इतनी थी कि वह नींद में बिस्तर में ही टाॅयलेट कर देते थे।
उदयपुर। इंसानियत और बाप के रिश्ते को शर्मसार करने वाली घटना। चार साल के बेटे को फंदे पर लटका कर खूंटी पर टांग रखा है और दो साल की बेटी को छड़ी से बेरहमी से पिटे जा रहा है। इन मासूमों का गुनाह वो ही है जो अक्सर इस उम्र के बच्चे करते है जिसको किसी भी सूरत में गुनाह नहीं मना जा सकता ,.. बिस्तर में पेशाब करना ,. मानो जैसे कि अपने ही मासूम बच्चों पर थर्ड डिग्री करने वाला पिता सीधा बड़ा ही बन कर पैदा हुआ था कभी छोटा था ही नहीं ,.. कभी बिस्तर में पेशाब किया ही नहीं पैदा होते ही सीधे बाथरूम की तरफ भागा होगा की मुझे पेसाब आई है या पोटी आई है बोल कर .

