राजसमन्द में सर्व समाज के साथ मंत्री किरण माहेश्वरी आई धरना प्रदर्शन में .

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उदयपुर . पुरे देश में पद्मावती फिल्म का विरोध हो रहा है वही दूसरी तरफ चाहे केंद्र सरकार हो या राज्य सरकार विरोध में बयान दे रहे है लेकिन इसके बावजूद विरोध प्रदर्शन से दुरी बनाये हुए है वही राज्य में पहली बार उच्च  शिक्षा मंत्री किरण माहेश्वरी सांसद हरिओम पंवार धरना प्रदर्शन में शामिल हुए.

मेवाड़गौरव रक्षा मंच के आह्वान पर राजसमंद जिले के सर्व समाज ने फिल्म पद्मावती के विरोध में शुक्रवार को पुरानी कलेक्ट्री के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। मंच के भरत पालीवाल ने बताया की फिल्म पद्मावती में रानी पद्मिनी के व्यक्तित्व और इतिहास के साथ छेड़छाड़ की गई है। रानी पद्मिनी का व्यक्तित्व भारतीय नारी के लिए आर्दश है ऐसे आर्दश चरित्र के प्रति भारतीय समाज की गहरी निष्ठा सम्मान रहा है। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता मनोहर सिंह, कृष्णावत ने रानी पद्मिनी के जीवन पर ऐतिहासिक तथ्यों से अवगत कराते हुए इस फिल्म को किसी भी स्थिति में रिलीज नहीं होने देने का आह्वान किया। सभा को सांसद हरिओम सिंह राठौड़, उच्च शिक्षा मंत्री किरण माहेश्वरी ने भी संबोधित करते हुए फिल्म में रानी पद्मिनी के चरित्र एवं इतिहास से संबंधित जो गलत कथानक फिल्माए गए है उनका विरोध किया और सेंसर बोर्ड सरकार से इस पर तुरंत कार्रवाई करने की मांग की। इस दौरान पीसीसी सदस्य हरिसिंह राठौड़, श्रीराजपूत करणी सेना प्रदेश उपाध्यक्ष कुलदीप सिंह ताल, जिलाध्यक्ष चंद्रभानसिंह मोयणा, अर्जुनसिंह चूंडावत, पूर्व सरपंच दिग्विजयसिंह भाटी, पूर्व केलवा सरपंच दिग्विजयसिंह राठौड़, युवा कांग्रेस राजसमंद विधान सभा अध्यक्ष मुकेश भार्गव, प्रदीप पालीवाल, सुन्दरलाल कुमावत, अशोक टांक, संगीता चौहान, महेंद्रसिंह चौहान, झौर सरपंच शिवचरण सिंह चौहान सहित बड़ी संख्या लोग मौजूद थे।

कांस्टेबल का अपहरण करने वाला कांस्टेबल अजमेर में पकड़ा गया

उदयपुर। खाकी ने ही कुछ दिनों पहले खाकी का अपहरण किया और अब वहीं खाकी, खाकी की कैद मेें है। यह मामला सूरजपोल थाना क्षेत्र का बताया जा रहा है। पुलिस लाईन में तैनात कांस्टेबल कानसिंह ने गत 2 नवम्बर को उसके अपहरण का रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। इसके तहत उसने बताया कि कांस्टेबल धर्मीचंद ने उसे लाईन के प्रवेष द्वार पर फोन करके बुलाया । जब वह वहां पंहुचा तो धर्मीचंद और उसके साथ आए चार लोगों ने उसे जबरन स्वीफ्ट कार में डालकर डबोक की ओर ले गए। जहां इन सभी आरोपियों ने उसके साथ मारपीट की और कहा कि अशोक मुंशी के खिलाफ आए दिन शिकायत करता रहता है इसलिए तुझे आज जिंदा नहीं छोड़ेंगे। हालाकि कानसिंह जैसे – तैसे खुद को आरोपियों के चंगुल से मुक्त होने में सफल रहा और रिपोर्ट दर्ज करवाई। इस पर सूरजपोल थाना पुलिस ने कई दिनों से फरार चल रहे धर्मीचंद को आखिरकार शुक्रवार को गिरफ्तार कर ही लिया। पुलिस ने आरोपी धर्मीचंद को अजमेर जिले से गिरफ्तार किया है। अब कांस्टेबल धर्मीचंद से पुलिस इस अपहरण और इसके पीछे छिपे राज उगलवाएंगी।

Are You Suffering from Sleep Disorder…Zinc can help you have a sound sleep…

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Zinc plays an essential role in neurotransmitter function and helps maintain cognition. It is necessary in the metabolism of Melatonin which is a key hormone for healthy sleep. Zinc is one of the three minerals that have a sedative effect on the nervous system (the others are Calcium and Magnesium) and is also thought to help mental recovery post-stress.

A research study by Rondanelli et al in 2011 tested the effect of Zinc, Melatonin & Magnesium on patients with primary insomnia and found that the treatment had a beneficial effect on the quality of sleep. It is thought that whilst the Melatonin helped with sleep onset, it was Magnesium and Zinc that had a positive effect on the restorative value of sleep.

Consumption of Zinc helps to have less wake-ups in the night. It is an excellent & safe sleep aid; and also has a calming & antidepressant effect.

Pavan Kaushik

Along with helping to regulate sleep, Zinc has shown to improve the vividness of dreams. As explained over at Nutrition Central (one of the world’s largest nutrition supplement companies), “When researching the signs and symptoms of vitamin B6 and Zinc deficiency, Dr. Carl Pfeiffer, from the Brain Bio Center in New Jersey, found that an alarming proportion of deficient people couldn’t recall their dreams. After supplementing with B6 and Zinc, dream recall would return.”

Using Zinc for sleep is an excellent way to improve general sleeping ability. It regulates the sleep portion of the circadian rhythm. Melatonin is able to normalize the Zinc level in people who had a low level of Zinc in their body. Studies published in the Journal of American Geriatrics Society have revealed that the combination of Zinc, Melatonin and Magnesium is highly recommended to help improve the quality of sleep of insomnia patients.

Zinc supplement, if taken at night will be beneficial for the body in multiple ways. Zinc is involved in the production of at least 300 enzymes, helps in hundreds of body processes, from producing DNA to repairing cells and boosting immune system. The mineral can help to sleep better at night, along with a host of additional benefits.

Pavan Kaushik, Head of Corporate Communication                                              Hindustan Zinc, Udaipur

बजरी माफिया की बल्ले बल्ले – बजरी मिलेगी लेकिन तीन गुना दामों में

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उदयपुर। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद प्रशासन ने उदयपुर में बजरी खनन बंद करने के आदेश दिए या नहीं लेकिन बजरी के दामों में एक दिन में ही दुगुना उछाल आगया। बजरी खनन माफिया की एक ही दिन में बल्ले बल्ले हो गयी। दुगुने दाम में बजरी खुले आम धडल्ले से बिकती रही और जिम्मेदार अधिकारी कागजों में खनन को बंद करवाने के आदेश निकालते रहे।
सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरण की मंजूरी के चलते बजरी खनन पर रोक लगा दी है उदयपुर में आने वाली बजरी पर भी कहने को कथित तौर पर रोक लग गयी लेकिन असल में बजरी बड़ी आसानी से मिल रही है। बस फर्क आया है तो यह कि कल तक जो बजरी ५०० से ६०० रूपये टन मिल रही थी आज वही बजरी १००० से १२०० रूपये में बिकी, बजरी माफियाओं की एक ही रात में बल्ले बल्ले हो गयी। जिनके निर्माण कार्य चल रहे है वे प्रताप नगर सुखेर रेती स्टेण्ड चक्कर काटते रहे।
उदयपुर में सुमेरपुर, बस्सी, भीलवाडा,नाथद्वारा, राजसमन्द, सरदार गढ़ से रेती आरही है जो 500 से 600 रूपये टन में बिक रही थी। आज यही रेती दुगुने दामों में बिकी। यही नहीं सूत्रों की माने तो कई रेती माफिया ने अपने खाली पड़े प्लाट और खेतों में रेती का स्टोक कर लिया है। आने वाले दिनों में जब अधिकारी सख्ती करदेंगे तब यह रेती मनमाने दामों में बिकेगी। जिन लोगों के मकानों के निर्माण कार्य अधूरे है उनके लिए मुसीबत हो गयी है। रेती माफिया पर प्रशासन की कोई लगाम नहीं। चाहे प्रशासनिक अधिकारी हो खान विभाग हो या आरटीओ ये सिर्फ चंद दिन मोनिटरिंग करते है उसके बाद सुप्रीम कोर्ट के आर्डर के दम पर ये माफिया मूंह मांगी कीमत वसूलते है।
निर्माण कार्य करने वाले ठेकेदारों का कहना है कि रेती अब भी उसी तरह और उसी तादाद में आएगी जैसे पहले आती थी फर्क इतना है कि कीमतें दुगुनी हो जाएगी। इधर जो सरकारी कार्य कर रहे है उन ठेकेदारों का कहना है कि उदयपुर में आने वाली रेती कही भी ईएसआई नहीं जहाँ से पर्यावरण मंजूरी ले राखी हो इसे में सरकारी कार्य सारे रुक जायेगें। क्यूँ की इतनी महगी रेती लेकर सरकारी कार्य नहीं किये जा सकते।
रेती ट्रक चालक यूनियन के अध्यक्ष अन्तोश का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद रेती की खरीद फरोख्त में काला बाजारी बढ़ जाएगी। अगले दो दिन बाद चाहिए जितनी रेती मिलेगी लेकिन उसके दाम दो से तीन गुने होंगे।

 

दिमागी बुखार के लिए अलर्ट – तीन बीमारियों से ही 265 मौत

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post news. चिकित्सा विभाग की लापरवाही और अनदेखी के चलते मौसमी बीमारियों का कहर जारी है। डेंगू, स्वाइन फ्लू और स्क्रब टाइफस से इस साल 266 लोग मौत के मुंह में जाने के बावजूद मौत का सिलसिला जारी है।
स्वाइन फ्लू केे मिशिगन वायरस से 239, डेंगू से 10 स्क्रब टाइफस से 17 जाने से चिकित्सा विभाग के दावे फेल साबित और इंतजाम नाकाफी साबित हो रहे हैं। हकीकत ये है कि अकेले डेंगू से 50 से ज्यादा मौत हो गई , लेकिन विभाग सिर्फ एलाइजा को ही कन्फर्म मानता है। अब सवाल उठता है कि यदि विभाग एलाइजा को कन्फर्म मानता है, तो कार्ड टेस्ट पर रोक लगानी चाहिए। इससे पहले निजी अस्पतालों और हरेक जगह एलाइजा जांच सुविधा विकसित करनी चाहिए। इधर, बूंदी जिले की केशोरायपाटन निवासी एक महिला के ब्लड सैंपल की जांच में जापानी एनसिफेलाइटिस यानि जापानी बुखार मिलने पर चिकित्सा विभाग हरकत में आया है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी राज्य में पहला मामला आने पर हर तरह से अलर्ट रहने के लिए कहा है। देश में तमिलनाडु के वेल्लोर में 1995 में पहला मामला मिला था।
जापानी एनसिफेलाइटिस : यहएक प्रकार से दिमागी बुखार है, जो वायरल संक्रमण के कारण फैलता है। यह मच्छर से फैलता है। एक बार शरीर के संपर्क में आने पर सीधा दिमाग पर असर डालता है। दिमाग में जाते ही सोचने, समझने, देखने और सुनने की क्षमता को प्रभावित करता है। यह बीमारी छूने से नहीं फैलती है। इससे 1 से 14 साल तक की उम्र के बच्चे एवं 65 साल से अधिक लोग चपेट में आते हैं। बीमारी का प्रकोप अगस्त, सितंबर और अक्टूबर-नवंबर में ज्यादा होता है। संक्रमण काल 5 से 15 दिन है। और मृत्यु दर 0.3 से 60 फीसदी है।
22राज्य प्रभावित : देशमें जापानी एनसिफेलाइटिस से प्रभावित 22 राज्यों में असम, बिहार, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र, मणिपुर, मेघालय, नागालैंड, ओड़ीशा, तमिलनाडु, तेलंगाना, त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड तथा वेस्ट बंगाल शामिल हैं।

भंसाली और दीपिका पादुकोण का सर काटने वाले को पांच करोड़ का इनाम – फिल्म पद्मावती विवाद (video)

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पोस्ट न्यूज़ .  संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावती की प्रस्तावित रिलीज डेट नजदीक आते ही विवाद चरम पर पहुंचता जा रहा है. सिनेमाघर जलाने, जान से मारने और हिंसा फैलाने की धमकी दी जा रही है. इन सबसे आगे बढ़कर अब मेरठ से भी अखिल भारतीय युवा क्षत्रिय महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अभिषेक सोम ने विवादित बयान देकर सनसनी फैला दी है। अभिषेक सोम ने कहा है कि फिल्म पद्मावती यदि रिलीज होती है तो दीपिका पादुकोण और संजय लीला भंसाली की गर्दन काटने वाले को पांच करोड़ का नगद ईनाम दिया जाएगा।

https://www.youtube.com/watch?v=4UEk8cMuczQ

गौरतलब है कि फिल्म में अभिनेत्री दीपिका पादुकोण पद्मावती का किरदार निभा रही हैं। सोम का कहना है कि पद्मावती के किरदार को इस फिल्म में गलत ढंग से दर्शाया गया है। इससे पूरा क्षत्रिय समाज आहत है। उन्होंने कहा कि इतने धरना-प्रर्दशन और विरोध के बाद भी फिल्म रिलीज करने की तैयारी चल रही है। इस लिए अब क्षत्रिय आरपार की लड़ाई को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि दीपिका और संजय लीला भंसाली देश छोड़ दें नहीं तो मरेंगे।

उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि दोनों को अब कोई पुलिस या सुरक्ष बचा नहीं पाएगी। पुलिस -प्रशासन पूरे मामले पर नजर बनाए हुए हैं। इसके अलावा, करणी सेना का कहा कि इस फिल्म से राजपूत समाज की बेज्जती होगी, इसलिए अगर ये फिल्म रिलीज होती है तो हम फिल्म की अभिनेत्री का नाक काट लेंगे। इसके साथ ही राजपूत करणी सेना ने फिल्म के विरोध में 1 दिसम्बर को देशव्यापी बंद का ऐलान किया है।

 

हड़ताल के दौरान हुई 30 मौतों के जिम्मेदार है डॉक्टर – मौतों का खामियाजा भी उन्हें ही भुगतना पड़ेगा .

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पोस्ट न्यूज़ . डॉक्टरों की हड़ताल के दौरान हुई 30 लोगों की मौतों पर राजस्थान हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए उनके परिजनों को मुआवजा देने की बात कही है . और यह मुआवजा इन हडताली डॉक्टरों से लेकर दिया जाय और इन मौतों की जवाबदेही देहि इनकी तय की जाय . कोर्ट ने डॉक्टरों की जवाबदेही तय करने के लिए राज्य सरकार से शपथ पत्र मांगा है .

न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा ने इस बारे में महाधिवक्ता के जरिए राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। कोर्ट ने सुनवाई 27 नवम्बर तक टालते हुए हड़ताली डॉक्टरों की जवाबदेही तय करने के लिए राज्य सरकार से शपथ पत्र मांगा है। आपको बता दें कोर्ट ने हड़ताल के दौरान 30 लोगों की मौत को गंभीरता से लिया है। अतिरिक्त स्वास्थ्य निदेशक डॉ. कुसुम सांघी ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए आवेदन किया था। सरकार ने लोगों की स्वास्थ्य सुविधाओं को  में रखते हुए स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति का प्रार्थना पत्र निरस्त कर दिया था। डॉ. सांघी की ओर से अधिवक्ता प्रवीण शर्मा ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति का प्रार्थना पत्र निरस्त करने के राज्य सरकार के निर्णय को चुनौती दी थी। कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के दौरान स्वास्थ्य मंत्री के बयान का हवाला देकर डॉक्टर हड़ताल के दौरान 30 लोगों की मौत के बयान को गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने इस बात को भी गंभीरता से लिया कि राज्य सरकार ने वेतन सहित अन्य मांगों को मान लिया, इसके बाद हड़ताल समाप्त हुई।

गौरतलब है कि सात दिनों में हुई 30 मौतों के बाद डॉक्टरों की हड़ताल रविवार रात 11 बजे समाप्त हुई थी। 8.30 घंटे तक चली मैराथन बैठक के बाद सेवारत चिकित्सक संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अजय चौधरी और चिकित्सा मंत्री कालीचरण सराफ ने इसकी आधिकारिक घोषणा की थी। हड़ताल समाप्ति की घोषणा से पहले कई बार नाटककीय घटनाक्रम चला। रात 9 बजे सेवारत डॉक्टरों की मांगों पर सहमति बनने के बाद रेजीडेंट्स को बुलाया गया। रेजीडेंट की मांगों पर रात 1.30 बजे सहमति बनी थी

 

बिंदी, काजल, सिंदूर पर GST नहीं तो “नेपकिन” पर आखिर क्यों – दिल्ली हाईकोर्ट

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post News . दिल्ली हाईकोर्ट ने जीएसटी की कटोती पर केंद्र सरकार से एक सवाल पुच लिया . कि जब काजल, बिंदिया, सिंदूर जैसी चीजों पर जीएसटी नहीं लग रहा है तो महिलाओं के लिए बेहद जरूरी चीज सेनेटरी नेपकिन पर जीएसटी कैसे लगाया जा सकता है , सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से जवाब मांगा की आपके पास क्या इसके लिए कोई व्याख्या है. केंद्र सरकार द्वारा महिलाओं के लिए आवश्यक सेनेटरी नेपकिन को 12 प्रतिशत जीएसटी के दायरे में रखा जिसके बाद सोशल मिडिया पर सरकार का खासा मजाक भी बनाया और इस बात का विरोध भी हुआ . और अब सुप्रीम कोर्ट ने जवाब मांगा है .

कोर्ट ने इस बात पर भी अपनी नाराजगी जताई की, 31 सदस्यों की जीएसटी काउंसिल में एक भी औरत क्यो नहीं है। कार्ट ने ये भी सरकार से कड़े लहजे में ये भी पूछा कि, क्या इसको लेकर आपने महिला एवं बाल विकास मंत्रालय से इस बाबत कोई बात किया या फिर आपने केवल इंपोर्ट और एक्सपोर्ट ड्यूटी को देखकर सैनेटरी नैपकिन पर जीएसटी लगाने का फैसला किया। कोर्ट अब इस मामले की सुनवाई 14 दिसंबर को करेगा। हाई कोर्ट ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की एक पीएचडी स्कॉलर जमिरा इसरार खान द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा। इस याचिका में सैनेटरी नैपकिन पर लगाया जाने वाला 12 फीसदी जीएसटी को अवैध एवं असंवैधानिक बताया था।

सरकार के एक आला अधिकारी ने बताया कि, यदि हम सैनेटरी नैपकिन पर जीएसटी की छूट देते हैं तो इसकी कीमत में बढ़ातरी हो जाएगा। सैनेटरी नैपकिन पर जीएसटी हटा लेेने से घरेलू मैन्यूफैक्चरर को कोई भी इनपुट के्रडिट नहीं मिल सकेगा। सरकार द्वारा फाइल किए काउंटर एफिडेविट में कहा गया है कि, इससे घरेलू रूप से निर्मित सैनेटरी नैपकिन को आयात के रूप में भारी नुकसान होगा। जो की जीरो रेटेड होगा। इस पर कोर्ट ने कहा कि, ये एक तकनीक एवं सांख्यिकी कारण है और सरकार नंबर गेम में उलझा रही है।

सरकार ने अपने काउंटर ऐफिडेविट में कहा कि, सैनेटरी नैपकिन बनाने के लिए प्रयोग होने वाले कच्चे सामानों पर 12 से 18 फीसदी का जीएसटी लगता है यहां तक सैनेटरी नैपकिन पर 12 फीसदी जीएसटी लगाना भी जीएसटी स्ट्रक्चर में एक उलटाव है। ये भी कहा गया कि, टैक्स दर न तो मनमाना है और न ही असंवैधानिक है।

परिषद से दायर याचिका पर जवाब मांगा था। याचिकाकर्ता ने ये दावा किया है कि ये याचिका महिलाओं के हित के लिए दायर किया गया है, खासकर उन महिलाओं के लिए तो नीचले आर्थिक तबके से आती है। एडवोकेट अमित जॉर्ज द्वारा दायर किया गया इस याचिका में कहा गया है कि, ये एक जमीनी स्तर का मसला है और सैनेटरी नैपकिन से 12 फीसदी के जीएसटी को पूरी तरह से खत्म कर देना चाहिए। याचिका में कहा गया है कि, सरकार ने काजल, कुमकुम, बिन्दी, सिंदुर, आल्ता, प्लास्टिक और चुडिय़ां और पूजा समग्री जैसी वस्तुओं से पर जीएसटी नहीं लगाया है। इसके साथ ही सभी तरह के कंट्रासेप्टिव जैस कंडोम पर भी जीएसटी नहीं लगाया गया है। लेकिन महिलाओं की सेहत के लिए जरूरी सैनेटरी नैपकिन पर अभी जीएसटी लगाया जा रहा है।

पद्मावती देश का गौरव कहा अजमेर दरगाह दीवान ने – मुस्लिम दें विरोध में राजपूतों का साथ

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पोस्ट न्यूज़ . सूफी संत ख्वाज़ा मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह के दीवान ने “पद्मावती” फिल्म का विरोध करते हुए कहा कि संजय लीला भंसाली पद्मावती फिल्म के जरिये देश में धार्मिक भावनाएं भड़का कर माहोल खराब करना चाहते है. उन्होंने संजय लीला भंसाली की तुलना सलमान रश्दी और तसलीमा नसरीन से करते हुए कहा कि भंसाली बेवजह विवाद पैदा कर देश का सांप्रदायिक सोहार्द ख़त्म करना चाहते है . पद्मावती इस देश का गौरव है .

दरगाह दीवान ने कहा कि भंसाली की फिल्म इतिहास और तथ्यों से परे नजर आती है। चित्तौड़ की महारानी पदमावती देश और राजपूत समाज की वीरता और सम्मान का प्रतीक है। उनकी नाराजगी को देखते हुए मुस्लिम समुदाय को भी राजपूत समुदाय को समर्थन देना चाहिए। भंसाली ने इतिहास को तोड़-मरोड़कर पदमावती फिल्म का निर्माण किया। इससे राजपूत समुदाय की धार्मिक भावनाएं आहत हो रही हैं। इससे पहले रश्दी और नसरीन ने इस्लाम धर्म के खिलाफ अनर्गल टिप्पणियां कर मुस्लिम समुदाय के लोगों की भावनाएं आहत करने की कोशिश की है। फिल्म में पदमावती और अलाउद्दीन खिलजी के कथित चित्रण से धार्मिक भावनाएं भड़क सकती है।

दीवान जैनुअल आबेदीन ने कहा कि फिल्म का मकसद किसी समुदाय की भावना को आहत करना नहीं होता है। लेकिन पद्मावती फ्लिम में राजपूतों के गौरवशाली इतिहास को धूमिल करने और तोडऩे-मरोडऩे का प्रयास किया गया है। ऐसे में भारत सरकार को तत्काल फिल्म प्रदर्शन पर रोक लगानी चाहिए। पद्मिनी राजस्थान और पूरे देश के स्वाभिमान का प्रतीक हैं। उनके अपमान को कोई भी स्वीकार नहीं करेगा।

 

अरविन्द सिंह मेवाड़ और लक्ष्यराज ने कहा इतिहास के साथ छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी – लेकिन विरोध का तरिका शांतिपूर्ण हो .

उदयपुर . संजयलीला भंसाली की फिल्म पद्मावती पर पंगा अब पुरे देश में बड़ा रूप ले चुका है . राजस्थान में हर जगह विरोध प्रदर्शन हो रहे है . हर संगठन ने फिल्म का विरोध करते हुए इसके प्रदर्शन को रोकने की मांग की है . पूर्व में राजस्थान के कई राजघरानों ने इसका विरोध किया और अपने बयान जारी करदिये . बुधवार को मेवाड़ पूर्व के राजघराने से अरविन्द सिंह मेवाड़ और लक्ष्यराज सिंह ने भी अपना बयान फेसबुक के जरिये जारी किया . जिसमे उन्होंने फिल्म का विरोध तो किया है लेकिन किसी भी तरह की बयान बाजी और तोड़ फोड़ को उचित नहीं माना .

फेसबुक और whatsapp पर अरविन्द सिंह मेवाड़ एवं लक्ष्य राज सिंह मेवाड़ के बयान आने बाद जहाँ कई लोगों ने उनका समर्थन किया वही कई पोस्ट इस पूर्व राज घराने के विरोध में भी वायरल हो रही है .

आइये देखते है मेवाड़ के पूर्व राज घरानों ने अपने बयानों में क्या कहा .

क्या कहा अरविन्द सिंह मेवाड़ ने :

मे रानिवेदन है कि इस प्रकरण को बैठकर सुलझाया जाए। इस प्रकार के रोष और आक्रामक रुख को अपनाने से कुछ नहीं होता। आक्रामक रोष अपनाने से सभी पक्षों काे हानि है। इसमें किसी की जीत है, किसी की हार है। ऐसा कोई माध्यम ढूंढा जाए कि जिससे बातचीत से इस मसले को सुलझाया जा सके। यही परिपक्व तरीका है। यह कोई मजाक नहीं। यह चित्तौड़ और राजस्थान ही नहीं, पूरे देश की नारी अस्मिता का प्रश्न है। हमारे सारे राजपूत भाई और हम खुद इस विषय पर फिल्म बनाने के विरोध में हैं, क्योंकि आप कितना भी कर लें, असलियत आप नहीं बता पाएंगे। असलियत बताएंगे तो फिल्म नहीं बनेगी। बनेगी तो बहुत ही रूखी होगी। आप जिस मकसद से फिल्म बनाना चाहते हैं, आपका मकसद पूरा नहीं होगा और बॉक्स ऑफिस में मुनाफा नहीं दिला पाएगी। आपके लिए तो ये व्यापार है। मैं चाहता हूं, आप ऐसी फिल्म बनाएं जिससे किसी समाज की भावनाएं आहत हों। पूरा समाज उमड़ा हुआ है। आज बच्चे इतिहास नहीं पढ़ते। इतिहास की पुस्तकों में से बहुत सा इतिहास निकाल दिया गया है। बड़ा दुख है, ये बच्चे इतिहास को फिल्मों के माध्यम से देखते हैं और उसी को वे पत्थर की लकीर मानते हैं। लिहाजा, बालीवुड के प्रॉड्यूसर की जिम्मेदारी है कि वह इस इस पत्थर की लकीर की जिम्मेदारी ले और ऐसा कुछ नहीं करे, जिससे युवा पीढ़ी इतिहास को गलत ढंग से ले ले और फिर वह फिल्म की कहानी काे ही सच मान ले। मैंने यह फिल्म नहीं देखी है। इसलिए दावे के साथ नहीं कह सकता, फिर भी जो कुछ देखने को मिला है, ये ऐतिहासिक तथ्यों से बहुत परे है और इस कारण ये आर्टिस्टिक लाइसेंस की परिभाषा में भी नहीं सकती है।

क्या लक्ष्यराज सिंह ने :

नमस्कार , मै लक्श्राज सिंह मेवाड़ आप सभी से मुखातिब हो रहा ही . रानी पद्मावती पे काल्पनिक फिम के विरोध में बयान बाजी करना तो बहुत आसान है , लेकिन इसका समाधान निकालना आज की सदी की सबसे बड़ी शिक्षा है . क्या इसे पवित्र विषय को एक मरोरंजन के रूप में पेश करना किसी निर्देशक की जिम्मेदाराना शैली है क्या ?मै इस फिल्म के कलाकारों से भी पूछना चाहता हूँ कि उन्होंने मर्यादा में रह कर एक सच्चे कलाकार होने का फ़र्ज़ निभाया है क्या ? क्या पैसा ही सबकुछ होता है ? अब इस वक़्त मेरे परिवार और मुझे हमारे पूर्वजन और मेवाड़ के प्रति हमारे समर्पण का प्रमाण देना पडेगा . फिल्म के प्रति मेरे ज़ज्बात को जानने का क्या जरिया गैर जिम्मेदाराना बयान बाजी , तोड़फोड़ और हाथापाई तक ही सिमित रह गया है क्या ?

मेरे दर्द को जानने का यही एक तरिका है क्या ? ऐसे किसी भी प्रकार के इतिहास के साथ खिलावाड़ का मेवाड़ बहिष्कार करता है . और करता रहेगा . इस फिल्म से जो रोष उभरा है उससे हमे एकजुट होना चाहिए , नाकि एक दुसरे की आलोचना करनी चाहिए .

हम सबका प्रयास हो कि भारत सरकार एक सख्त क़ानून बनाए और उसे लागू भी करवाए ताकि भविष्य में केवल मेवाड़ ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण भारत में मनोरंजन के नाम पर इतिहास , संस्कृति और लोगों की भवनाप्न के साथ छेड़छाड़ करने की कोई भी जुर्रत ना कर सके . यह प्रयास और एकता व्यर्थ जाती है तो इसका सर्वाधिक दुःख मुझे होना . आप सभी की एक जुटाना वाकई में काबिले तारीफ़ है . मन में बहिष्कार की उठ रही ज्वाला को हमे क़ानून के दायरे में रह कर मंजिल तक पहुचाना होगा उम्मीद करता हूँ की आप मेरे विचारों के साथ सहमत होंगे जय मेवाड़ जय भारत .