बालदिवस पर मुट्ठी संस्थान ने राजकीय विद्यालय के “बाल कलाकार” को प्रोत्साहित किया

उदयपुर। महिलाओं के स्वाभिमान और उनके हक़ के लिए काम करने वाली “मुट्ठी” संस्थान बाल दिवस के उपलक्ष में विभिन्न राजकीय विद्यालयों में बाल कलाकारों को निखारने और प्रोत्साहित करने का प्रयास कर रही है। मुट्ठी संस्थान ने बच्चों के साथ तीन दिवसीय “बाल कलाकार” प्रतियोगिताएं आयोजित की।
मुट्ठी संस्थान की संस्थापक अर्चना शक्तावत और सरोज पटेल ने बताया कि राजकीय स्कूलों में पढने वाले बच्चों में कई प्रतिभाएं छुपी हुई रहती है, बस उन्हें आगे आने के अवसर अक्सर कम मिलते है। बच्चों का मनोबल बढाने के लिए मुट्ठी संस्थान ने बाल दिवस पर तीन दिवसीय कार्यक्रम “बालकलाकार” अलग अलग राजकीय स्कूलों में आयोजित कर रहा है। यह प्रतियोगिताएं १३ से १५ नवम्बर तक यह विभिन्न स्कूलों में आयोजित किया जारहा है। बाल कलाकार कार्यक्रम के तहत बच्चों में दो प्रतियोगिताएं “वाद विवाद” एवं “पोस्टरमेकिंग” रखी गयी है।
संस्थान की संस्थापक अर्चना शक्तावत ने बताया कि आज बाल दिवस पर भूपालपूरा राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय में दोनों प्रतियोगिता आयोजित की गयी जिसमे छात्राओं ने बढचढ कर हिस्सा लिया। वाद विवाद प्रतियोगिता मे बच्चों ने कन्या भ्रूण हत्या,बढ़ते हुए प्रदूषण और स्वच्छ भारत आदि कई विषयों पर अपना पक्ष रखा। वही पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता में दिल को छू लेने वाले विषयो को अपनी कलाकारी से रंग भर कर उनको और खूबसूरत बनाया। प्रतियोगिता के बाद प्रथम, द्वितीय, त्रतिय आने वाली छात्राओं को पुरुस्कृत किया साथ ही प्रतियोगिता में भाग लेने वाली हर छात्रा को सांत्वना पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

मुट्ठी संस्थान की संस्थापक सरोज पटेल ने बताया कि 13 नवम्बर से शुरू किये गए इस प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य राजकीय विद्यालय के बच्चों को प्रोत्साहित करना था। 13 नवम्बर को कविता राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में प्रतियोगिता आयोजित की थी जिसमे काफी बच्चों ने भाग लिया 15 नवम्बर को हैप्पी होम प्रतापनगर में प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा।

Kids deserve to be happy,safe and healthy, with gentle and safe Homoeopathy- Dr. Kajal Verma

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Homeopathy is gaining recognition in the conventional field of medicine and has been subject to many clinical trials.

Homeopathic treatment for children can be separated into two categories: self-limiting,

डॉ. काजल वर्मा

acute conditions such as colds, sore throats, and stomach flu, or persistent, chronic conditions such as allergies and eczema. Homeopathy is successful in both categories.

Homoeopathy is effective in treating variety of troubles that a child faces. Whether it is an infantile colic, teething trouble, aches and pains or even a behavioral disturbance Homoeopathy can manage them althus helps in keeping illnesses at bay. It
strengthens the child’s natural defenses so that
withinhe or she can fight off the cold or flu that every child around him may be facing. And helps them stay healthy and illness-free for longer durations of time.

Homoeopathic medications not only relieve common and acute problems of children but also prevent recurrent episodes of ill-health. Recurrent tonsillitis,
enlarged adenoids,
bedwetting, allergies,
asthma,
bronchitis,
diarrhea,
constipation and many more illnesses can be safely and effectively treated with Homeopathy.

There is a wide range of emotional and mental conditions that homeopathy can help children with, such as:

Anxiety and Fears

Autism Spectrum Disorders

Behavioral Problems

Clinginess and whininess

Depression

Excessive anger

Grief

Hyperactivity

Nervousness and anxiety

Nightmares

Separation anxiety

Homeopathy is respectful of the mind/body connection. Experience teaches us that illness stems from the mind and from there manifests in the rest of the body. We therefore place great value on the mental and emotional symptoms as guides to the remedy.

The biggest advantage of Homeopathy is that the medicines are easy to administer and not bitter. Kids love them as they are small, sweet sugar pills which can be administered directly or can be crushed with the help of spoon and then given to the child. Children willingly and happily take Homeopathy. The amount of lactose content in Homoeopathic medications is so less that it poses no problems even in case of Diabetic children.

Homoeopathic system of medication believes that every person is unique and has his or her own ways of reacting to the environment and his or her own unique way of manifesting an illness. Your Homoeopath gives importance to each symptom that your child has, he also takes into consideration the causation of each complaint. It takes into consideration these differentiating, individualizing symptoms for prescribing. Hence, the treatment that each child receives is different from another child suffering from the same ailment.

The management strategy for each case is different and thus this approach is of great use in cases of children suffering from behavioral disorders. Homeopathic medications are not habit forming and thus one does not need to worry about ‘drug dependence’ especially in cases of emotional disturbances like ADHD, Autism, and Depression etc.

The benefits of Homoeopathy are much more than any other system of Medicine. Hence its time that you be wise, choose Homoeopathy and give your child the safest and most effective treatment for his or her illness.

पद्मावती का प्रदर्शन नहीं रुका तो कानून ही नहीं बहुत कुछ टूटेगा

उदयपुर। संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावती का विरोध किसी भी तरह कम होने नाम नहीं लेरहा। राजस्थान के करीब करीब हर समाज के संगठनों ने फिल्म प्रदर्शन को लेकर आपत्ति जताई है। इसी कड़ी में आज भिंडर की जनता सेना ने जिला कलेक्ट्री पर धरना दिया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम ज्ञापन देकर फिल्म के प्रदर्शन को रोकने की मांग की है।
भिंडर की जनता सेना ने आज जिला कलेक्टर पर धरना दिया जिसमे विधायक रणधीर सिंह भिंडर ने भी भाग लिया। जनता सेना के कार्यकर्ताओं ने जिला कलेक्ट्री पर धरने के दौरान प्रदर्शन किया और फिल्म पद्मावती के प्रदर्शन को रोके जाने की मांग की है। इधर धरने में शामिल रंधीर सिंह भिंडर ने गृहमंत्री गुलाब चाँद कटारिया के उस वक्तव्य का जवाब भी देदिया कि कटारिया ने कहा था फिल्म प्रदर्शन के दौरान किसी को कानून नहीं तोड़ने दिया जाएगा। कटारिया के घोर विरोधी माने जाने वाले रणधीर सिंह भिंडर ने पलटवार करते हुए आज कहा कि फिल्म का प्रदर्शन अगर नहीं रोका गया तो कानून क्या फिर तो हम बहुत कुछ तोड़ देंगे। भिंडर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ज्ञापन दिया जिसमे बताया कि फिल्म में तथ्यों को मोड़ तोड़ के पेश किये जाने की पूरी संभावना है क्यूँ कि अलाउद्दीन खिलजी ने चित्तोडगढ पर आक्रमण सामरिक महत्त्व के चलते किया था। और पद्मावत मालिक मोहम्मद जायसी ने लिखी थी जो दुर्ग आक्रमण के २२४ साल बाद लिखा गया। खुद मालिक मोहम्मद जायसी का कहना है कि पद्मावत सिर्फ रूपक के रूप में लिखा गया है। ऐसे में फिल्मकार संजय लीला भंसाली उस उपन्यास को इतिहास बता कर फिल्म में लाना चाहता है जो किसी भी सूरत में मानी नहीं है। रणधीर सिंह भिंडर ने कहा कि रानी पद्मावती की जीवनी पर बनी फिल्म में जिस तरह से रानी पद्मावती को नाचते हुए दिखाया गया है वह अपमानजनक है। इस फिल्म के निर्माण से पहले मेवाड़ से एक ​व्यक्ति को फिल्म निर्माता से मिलने भेजा था। उस समय ही तय हो गया था कि फिल्म की कहानी को राजघराने के पास भेजा जाएगा लेकिन ऐसा नही हुआ और फिल्म का निर्माण कर दिया साथ ही करणी सेना के विरोध के बाद तय हुआ था कि​ फिल्म को रिलीज करने से पहले आपत्तिजनक दृश्य को हटाया जाएगा और ऐसा भी नही हुआ। इतना ही नही अब प्रोमो रिलीज किया गया है जिसमें आपत्तिजनक दृश्य है तो पूरी फिल्म में कितने दृश्यआपत्तिजनक होंगे। जनता सेना ने प्रधानमंत्री से फिल्म के प्रदर्शन को रोकने की मांग की है फिल्म प्रदर्शित करने की सूरत में उग्र आन्दोलन की चेतावनी भी दी है।

उदयपुर की नन्‍ही बेटी को राष्‍ट्र्र्र्पति करेंगे पुरस्कृत, बाल दिवस पर मिलेगा सम्‍मान

उदयपुर . राजस्थान से उदयपुर की सात साल की लब्धि सुराणा ने देश-दुनिया में स्केटिंग में अपने रिकार्ड और कई कीर्तिमान की असाधारण उपलब्धि के लिए राष्ट्रीय बाल पुरस्कार बाल दिवस पर प्रदान किया जाएगा। लब्धि इनलाइन स्पीड स्केटिंग कर रही है और उसको और परिवार जनों को जब राष्ट्रपति के हाथों अवार्ड मिलने की खबर मिली तो सबने खुशियां मनाई। उदयपुर के भूपालपुरा क्षेत्र में रहने वाली लब्धि सुराणा को भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की ओर से 14 नवंबर को राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रीय बाल पुरस्कार लेने के लिए आमंत्रित किया है।

उसे राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद यह अवार्ड प्रदान करेंगे। इसमें लब्धि को 10 हजार रुपए नकद, तीन हजार रुपए का बुक वाउचर, एक रजत पदक और प्रमाण पत्र प्रदान किया जाएगा।

लब्धि के पिता कपिल सुराणा मार्बल व्यवसायी है तो माता अंजलि सुराणा गृहणी है। मां अंजलि ने बताया कि लब्धि ने स्केटिंग की प्रेक्ट्रिस पिछले तीन साल से कर रही है और वह सवेरे पांच बजे उठकर प्रेक्ट्रिस करने लगती है, मां के अनुसार वह देश की की सबसे कम उम्र की स्केटिंग में पहली प्रतिभागी होगी। अंजलि ने बताया कि लब्धि ने स्केटिंग में जिस तरह से कीर्तिमान बनाए उसी तरह से वह पढ़ाई में भी पीछे नहीं है, रॉकवुड्स हाई स्कूल में दूसरी क्लास की छात्रा क्लास टॉपर है। लब्धि के पापा कपिल बताते है कि अण्डर-8 वर्ग में लब्धि ने अपने कोच मंजीत सिंह व पुष्पेन्द्र सिंह के साथ बहुत मेहनत की और उसने कई प्रतियोगिताओं में अव्वल स्थान पाया।

मेवाड़ के गौरव शाली इतिहास के साथ छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं करेगी मेवाड़ क्षत्रिय महासभा – तनवीर सिंह कृष्णावत

उदयपुर । फिल्म निर्देशक संजय लीला भंसाली की निर्माणाधीन फिल्म पद्मावती के विरोध में मेवाड़ में राजपूतों की सशक्त संस्थान मेवाड़ क्षत्रिय महासभा सड़कों पर उतरेगी और प्रदर्शन करेंगी।महासभा के महामंत्री तनवीर सिंह कृष्णावत ने बताया कि मंगलवार को मेवाड़ क्षत्रिय महासभा के केंद्रीय कार्यकारिणी की बैठक आयोजित की जायेगी जिसमें समाज जनों के साथ ही जिले के समस्त समाज प्रमुखों के साथ सर्वसमाज की बैठक आहूत की होगी। बैठक में सर्व समाज से विरोध में समर्थन की अपील की जायेगी। कृष्णावत ने कहा कि फिल्म में क्षत्रियों के गौरवशाली इतिहास के साथ संजय भंसाली छेड़छाड़ कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार फिल्म में महारानी पद्मिनी के चरित्र का गलत तरीके से चित्रण किया जा रहा है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। महासभा ने चेतावनी दी है कि उक्त फिल्म में गलत तथ्य प्रस्तुत करने पर प्रत्येक स्तर पर विरोध किया जाएगा। साथ ही फिल्म को प्रदेश में रिलीज नहीं होने दिया जाएगा।

पेड़ से लटके मिले प्रेमी युगल – सुसाईट नोट में लिखा था ….

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पोस्ट न्यूज़ । बांसवाडा राजस्थान के गढ़ी थाना क्षेत्र के भगोरा मार्ग स्थित बोहरा एवं लखरा समाज के कब्रिस्तान के पीछे शुक्रवार की सुबह एक खेत में बबूल के पेड़ से फंदे से लटके हुए प्रेमी युगल के शव बरामद हुए। इससे पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। मौके पर बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्रित हो गए। सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस को मौके पर मिले एक फोल्डऱ से सुसाइड नोट बरामद होने के साथ कॉलेज छात्रा की अंक तालिका, चद्दर पानी एवं सफेद रंग के तरल पदार्थ से भरी हुई दो बोतलें व नमकीन के पैकेट्स बरामद हुए हैं। जो पुलिस के कब्जे में हैं। वहीं सूचना पर पहुंचे दोनों के परिजनों ने हत्या कर शवों को बबूल के पेड़ से लटकाने का आरोप लगाया है। इससे कुछ देर के लिए हादसा स्थल पर विवाद की स्थिति भी बनी। बाद में पुलिस की समझाइश के बाद दोनों के शवों को नीचे उतारा और पोस्टमार्टम के लिए बांसवाड़ा महात्मा गांधी चिकित्सालय लाया गया

गढ़ी थाना प्रभारी लाभुराम चौघरी ने बताया कि भगोरा मार्ग पर बबूल के पेड़ से शव लटके होने की जानकारी गुरुवार देर शाम को लगी थी। इस पर संबंधित चौकी प्रभारी लक्ष्मणसिंह की ओर से हादसा स्थल को काफी देर तक देखने के प्रयास किए, लेकिन उसको कोई सुराग नहीं लगा। इसके बाद अंधेरा होने की वजह से पुलिस वापस लौट गई। इसके बाद शुक्रवार सुबह फिर पुलिस तलाशी में जुटी तो मौके पर पहुंची। जहां बोहरा एवं लखारा समाज के कब्रिस्तान के पीछे खेत में बबुल के पेड़ से प्रेमी युगल के शव एक साथ लटके हुए बरामद हुए। इसकी जानकारी पर कुछ देर में ही पुलिस जाप्ता मौके पर पहुंच गया। इतने में ही मौके पर बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी भी एकत्रित हो गए। पुलिस ने ग्रामीणों ने शिनाख्त के प्रयास भी करवाए, लेकिन सुराग नहीं लगा।

इसके बाद पुलिस ने मौके पर पड़े मिले एक फोल्डर को टटोला, जिसमें छात्रा की अंक तालिका के साथ एक नई कॉपी में सुसाईड नोट भी लिखा हुआ था, जिसमें स्वेच्छा से जहरीला पदार्थ का सेवन कर आत्महत्या करना लिखा था। इसके साथ ही अंक तालिका से छात्रा की शिनाख्त अड़ोर निवासी मीना पुत्री नानूलाल भगोरा के रूप में हुई। जबकि सुसाइड नोट पर लिखे मोबाइल नंबर के आधार पर युवक की पहचान लोहारियापाड़ा (भगोरा) निवासी किशन पुत्र दलजी कलासुआ के रूप में हुई। इसके बाद पुलिस ने दोनों के परिजनों को मौके पर बुलाया।

पुलिस के अनुसार युवक 25 वर्षीय किशन का विवाह दो वर्ष पूर्व हो चुका है। जबकि मीना अपनी बहन के घर बांसवाड़ा रह कर एक निजी महाविद्यालय में तृतीय वर्ष में अध्ययनरत थी। छात्रा के जीजाजी के अनुसार मीना गत शुक्रवार को ही घर से कॉलेज जाने निकली थी। वहीं किशन के परिजनों ने बताया कि वह रोजाना परतापुर में मजदूरी के लिए जाता था। जो पिछले पांच दिनों से घर वापस नही लौटा था। दोनों के शव शुक्रवार को एक साथ गले में फंदा ड़ाले हुए एक-दूसरे से लिपटे एवं हाथों में हाथ लिए हुए बरामद हुए हैं।

मौके पर पहुंचे दोनों के परिजन, रिश्तेदार एवं ग्रामीणों ने हत्या का अंदेशा व्यक्त किया। परिजनों ने बताया सुसाइड नोट पर दोनो में किसी के भी हस्ताक्षर नही है। परिजनों का यह भी कहना था कि यदि दोनों ने जहर पिया था तो पेड़ तक पहुंच कर लटकने की संभावना भी नहीं बनती है। फोल्डऱर में सुसाइड नोट के साथ युवती के जाति प्रमाण पत्र की छाया प्रति के टूकड़े मिले। जिस पर परिजनों का कहना है कि इसको फाडऩे की क्या जरुरत पड़ गई।

रंग लाया पार्षद देवेन्द्र जावलिया फैसला – वार्ड में 38 लाख के कामों का हुआ शुभारम्भ

उदयपुर। नगर निगम पार्षद ने समिति अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के बाद महापौर और पार्टी के आला कमानों को कुछ बोलते नहीं बना। आखिर तुरत फुरत में नगर निगम की तरफ से इस्तीफा देने वाले पार्षद के वार्ड में ३८ लाख के वर्क ऑर्डर पास हो गए और कार्य भी शुरू करवा दिए। अब बाकी जिन वार्डों में अभी तक कार्य नहीं हुए है वे पार्षद भी इसी तरह का कदम उठाने के बारे में विचार कर रहे है।
पांच दिन पहले वार्ड १० के पार्षद देवेन्द्र जावलिया ने मोर्निंग वाक् के दौरान गृहमंत्री शहर विधायक गुलाबचंद कटारिया को aइक्रमण निरोधी समिति के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देदिया था।जावलिया ने कहा था कि पिछले तीन सालों में उनके वार्ड में मात्र 37 लाख के काम हुए। वह जनता को जवाब दे भी तो क्या। वहीं उन्हें अतिक्रमण निरोधी समिति का अध्यक्ष भी बनाया गया, उन्हें लगा कि वह सिर्फ नाम मात्र के अध्यक्ष है और औपचारिकता निभा रहे है क्योंकि असहाय लोगों पर तो निगम तुरन्त कार्रवाई कर रहा है, रसूखदारों के अवैध निर्माण सीना ताने खड़े हुए है। जावलिया के इस्तीफे के बाद निगम में ही नहीं शहर में हडकंप मच गया और सोशल मिडिया पर उदयपुर की जनता ने देवेन्द्र जावलिया के इस कदम की प्रसंशा करते हुए महापौर को आड़े हाथों लिया था। जावलिया के इस कदम के बाद आनन् फानन में निगम प्रबंधन ने वार्ड 10 के लिए 38 लाख के वर्क आॅर्डर पास कर दिए और सिर्फ तीन दिन में पास हुए वर्क आॅर्डर के बारे में जब महापौर चंदर सिंह कोठारी और निर्माण समिति अध्यक्ष पारस सिंघवी से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि यह प्रयास तो तीन महीने से चल रहा था। जावलिया के विरोध के बाद वर्कआर्डर पास हुआ यह मात्र मिथ्या है।
इधर सूत्रों की माने तो महापौर के कार्य से नाखुश कई वार्ड के पार्षद और समिति अध्यक्ष इसे है जो यह कदम उठा सकते है। एक समिति अध्यक्ष ने नाम नहीं छपने की सूरत में बताया कि समितियां सिर्फ नाम की बनी हुई है इस बोर्ड का सर्वे सर्वा बन कर सिर्फ एक ही आदमी चला रहा है। पार्धदों की परेशानी या जनता की परेशानी से कोई लेना देना नहीं। हमारी समितियों के काम होते है हमसे ही नहीं पूछा जाता है ऐसे में समिति के अध्यक्ष पद पर बने रहने से क्या मतलब जनता को जवाब भी देना पड़ता है। आगे बताया कि बहुत जल्दी तीन समिति अध्यक्ष और इस्तीफा देदेगें। इस पूरे मामले पर जब नेता प्रतिपक्ष मोहसीन खान से बात की गई तो उन्होंने कहा कि भले ही भाजपा के 49 पार्शद सत्ता में हो लेकिन महापौर के आगे किसी की नहीं चलती। एक भी समितिध्यक्ष के पास वह ताकत नहीं है कि वह खुद की मर्जी से उसकी समिति का काम ही करवा ले।

उदयपुर में देबारी तिराहे पर ट्रोले के चक्के से कुचलाया युवक का सिर

उदयपुर। देबारी तिराहे पर एक बार फिर बेकाबू ट्रक के निचे बाइक सवार के आजाने से मौत हो गयी। मोटरसाइकिल सवार ट्रक ट्रोले के पहिये के निचे आगया जिससे उसका सर पूरी तरह क्षत विक्षत हो गया। राह चलते लोगों ने जैसे ही देखा एकाएक उनके मूंह से चीख निकल गयी। कानोड़ निवासी महावीर प्रसाद आज सुबह अपनी बैक से उदयपुर काम से आरहा था। देबारी तिराहे पर सामने से आती तेज गति की ट्रक ने महावीर को चपेट में लेलिया। जैसे ही महावीर निचे गिरा उसके सर पर ट्रक का पिचला पहिया चढ़ गया और सर बीरी तरह बिखर गया। मोके पर सर के तुकडे इधर उधर बिखर गए। शव देखते ही लोगों की चीख निकल पड़ी। लोगों ने तुरंत ही मांस के लोथड़े को एक जगह कर मुंह पर चद्दर डाल दी। कुछ ही देर में मौके पर लम्बा जाम लग गया। कई लोग जाम में फंस गए। सूचना पर प्रतापनगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची पुलिस ने क्षत विक्षत शव को लोगों की मदद से जीप में रखवाते हुए एमबी चिकित्सालय के मुर्दाघर पहुंचाया। मृतक की जेब से मिले कागजों से उसकी पहचान होने पर परिजनों को दुर्घटना की सूचना दी। परिजन एकाएक समझ नहीं पाए और उदयपुर पहुंच गए।
अस्पताल के मुर्दाघर में शव देखते ही बिलख पड़े। इधर, दुर्घटना के बाद पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त ट्रोले व मोटरसाइकिल को जब्त कर देबारी चौकी पर रखवाया। और यातायात को बहाल किया। गौरतलब है कि देबारी जिंक चौराहा हादसों का चौराया होने के बाद प्रशासन ने यहां ढ़लान में बैरिकेड्स लगा कर वाहनों की रफ्तार पर लगाम लगाई। लेकिन आज भी गुजरने वाले भारवाहक वाहन ढ़लान में बेकाबू होकर भिड़ जाते है।

गेहूं, केरोसिन, रसोई गैस नहीं मिले तो वॉट्सएप कर करें शिकायत

Post. रसद विभाग से जुड़ी करीब-करीब सभी शिकायतों के लिए अब उपभोक्ताओं को दफ्तर जाकर शिकायत करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग हर जिले के लिए रसद विभाग का एक वॉट्सएप नंबर जारी करेगा।
यह सुविधा केवल उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए शुरू की जा रही है। जिले में एक वॉट्सएप नंबर दिया जा रहा है। यह नंबर प्रवर्तन अधिकारी के पास हमेशा एक्टिव रहेगा। जैसे ही शिकायत नंबर पर फ्लैश होगी। वैसे ही तत्काल विभाग हरकत में आएगा और कार्रवाई हो सकेगी।
वास्तव में राशन की दुकानों पर केरोसिन नहीं मिलने और गेहूं खराब और तस्करी किए जाने की शिकायतें सामने आती है। इसके अलावा बड़ी मात्रा में सब्सिडी वाले नीले केरोसिन की कालाबाजारी भी होती है। कई बार गेहूं भी कालाबाजारी में जाता है। इन्हीं समस्याओं को देखते हुए वॉट्सएप नंबर जारी किया जा रहा है। यह नंबर शीघ्र ही आमजन को उपलब्ध करा दिया जाएगा।
रसोई गैस को लेकर जिले में सर्वाधिक शिकायतें आती रही है। वेंडर रास्ते में सिलेंडर से गैस निकाल लेते हैं। उपभोक्ता वजन करने को कहता है तो विवाद हो जाते हैं। सिलेंडर लेना उपभोक्ता की मजबूरी भी होती ही है। साथ ही मौके पर सुनवाई नहीं होती। होम डिलेवरी नहीं किए जाने, गली-चौराहों पर सिलेंडर भरे वाहन खड़े कर वहीं से बांटने जैसे मामले अब भी जिले में आम है। अधिकांश कामकाजी लोगो को यह समस्या सबसे ज्यादा आड़े आती है।
इसी से निपटने के लिए यह वॉट्सएप नंबर काफी उपयोगी साबित होगा। शिकायतकर्ता मौके से फोटो भी खींचकर अपलोड कर सकेंगे जिससे वेंडर बच नहीं सकेंगे। जांच में यह भी साफ हो जाएगा कि सिलेंडर की सील और वजन से छेड़छाड़ वेंडर ने की या संचालक ने।

दहेज़ ह्त्या का दोषी था पति – छह वर्ष बाद कोर्ट ने दी 10 साल की सजा

उदयपुर . विवाहके पांच वर्ष बाद पत्नी को दहेज के लिए शारीरिक मानसिक प्रताड़नाएं देकर आत्महत्या के लिए मजबूर करने के दोषी पति को महिला उत्पीड़न मामलों के अतिरिक्त सेशन जज डा. दुष्यंत दत्त ने बुधवार को 10 वर्ष कठोर कारावास की सजा सुनाई। ठोकर चौराहा निवासी विवाहिता ने छह वर्ष पूर्व फांसी लगाकर अपनी जान दी थी।
केस डायरी के मुताबिक मनीषा चौधरी को खुदकुशी के लिए उकसाने के दोषी पति महेंद्र पुत्र कालूलाल चौधरी को न्यायालय ने धारा 304-बी के अंतर्गत 10 वर्ष कठोर कारावास, दहेज उत्पीड़न की धारा 498-ए के अंतर्गत 2 वर्ष कठोर कैद और 5 हजार रुपए जुर्माना की सजाएं सुनाई। अदालत ने मृतका की सास पुष्पादेवी को दहेज यातना और आत्महत्या के लिए विवश करने के आरोपाें से बरी किया। राज्य सरकार की तरफ से पैरवी लोक अभियोजक प्रेमसिंह पंवार ने की। मनीषा की मौत फंदे पर लटकने से 31 नवंबर 2011 को हुई थी। प्रतापनगर थाने में रिपोर्ट मृतका के जेठ अमृतलाल ने दर्ज कराकर बताया था कि घटना के दिन सुबह मनीषा घर में अकेली थी। पति महेंद्र तड़के किसी काम से घर से बाहर गया हुआ था। बच्चे स्कूल चले गए थे। साढे़ 10 बजे महेंद्र घर लौटा तो मकान का मेन गेट बंद था। उसने डाेर बेल बजाई मनीषा के फोन पर कई बार रिंग दी। काफी देर तक दरवाजा नहीं खुलने पर पड़ौसी के पेचकस से दरवाजा खोला। अंदर बेडरूम में मनीषा अपने दुपट्टे का फंदा बनाकर पंखे से लटकी मिली थी। ससुराल पक्ष ने खुदकुशी का कारण मानसिक तनाव होना बताया था।
पिता ने दर्ज कराई थी रिपोर्ट
5दिसंबर को मृतका के पिता कांतिलाल पटेल निवासी कंधारवाड़ी, बांसवाड़ा ने प्रतापनगर थाने में दूसरी रिपोर्ट दर्ज कराई थी। कांतिलाल ने पति के साथ सास को भी दोषी बताकर रिपोर्ट में कहा था कि मनीषा का विवाह 7 मई 2006 को हुआ था। भरपूर दहेज देने के बावजूद पति सास संतुष्ट नहीं हुए। 10 लाख रुपए की मांग को लेकर यातनाएं देना शुरू कर दिया था। सोने की पांच गिन्नियां दी। मनीषा के पुत्र होने पर चार तोला सोने के कंगन चांदी के बर्तन महेंद्र को 25 ग्राम सोने का ब्रेसलेट दिया। महेंद्र को 51 हजार रुपए नकद भी दिए। उसके बैंक खाते में 2 लाख रुपए जमा और कराए थे। वो नशे में मनीषा को पीटता था।