दिलचस्प ऑफर : अगर तलाक हुआ तो मुफ्त में होगी दूसरी शादी

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बीजिंग। चौंक गए ना…यह ऑफर सच है। इन निदों चीन में यह स्कीम बहुत लोकप्रिय हो रही है। एक मैरिज ब्यूरो ने यह स्कीम चलाई है, जिसके तहत अगर किसी व्यक्ति का तलाक हो जाता है तो उसकी दूसरी शादी मुफ्त में करवाई जाएगी।

यह है स्कीम

– मैरिज ब्यूरो के इस ऑफर के मुताबिक अगर शादी के बाद एक साल के अंदर किसी जोड़े का तलाक हो जाता है तो ब्यूरो उनकी दूसरी शादी के लिए दुल्हन खोजेगा।

– मनपसंद लड़की से व्यक्ति की शादी करवाई जाएगी।

– लड़की कुंवारी होगी यह भी वादा किया गया है।

– यही नहीं अगर तलाक होता है तो इसके लिए 20 लाख रूपए देने होंगे।

– दुल्हन को खोजने से लेकर शादी के सारे इंतजाम मैरिज ब्यूरो ही करेगा।

– यह ऑफर तीन महीने के लिए दिया जा रहा है।

इसलिए दिया यह अनोखा ऑफर

दरअसल चीन में इन दिनों तलाक के केस तेजी से बढ़ रहे हैं और यही नहीं तलाक के बाद लोग दूसरी शादी नहीं कर रहे हैं। इसके चलते शंघाई में बुदि्धजीवियों की मीटिंग हुई जिसके बाद ब्यूरो ने यह आक र्षक ऑफर निकाला। इस ऑफर की दिलचस्प बात यह है कि इसमें कहा गया है कि अगर किसी तलाकशुदा की शादी करवाई जाऎगी तो उसकी शादी चीन की नहीं बल्कि वियतनाम की लड़की से करवाई जा एगी। ऎसा इसलिए कहा गया है क्यों ऎसा माना जाता है कि वियतनाम की लड़कियां अपेक्षाकृत वफादार होती हैं।

मासूमों की मौत पर शर्मनाक बयान – कोई कुत्ते को पत्थर मार दे तो इसके लिए सरकार जिम्मेदार नहीं”

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vk singhउदयपुर .  फरीदाबाद में दलित मासूम बच्चों को जिंदा जलाए जाने की घटना पर विदेश राज्यमंत्री जनरल वीके सिंह(रि.) ने बेहद शर्मनाक और आपत्तिजनक बयान देते हुए कहा है कि “अगर कोई कुत्ते को पत्थर मार दे तो इसके लिए सरकार जिम्मेदार नहीं है”।
 हालांकि यह पहली बार नहीं है कि जब वीके सिंह ने कोई विवादित बयान दिया हो इससे पहले भी वह कई मौकों पर विवादित बयान देकर फंस चुके हैं। इससे पहले मीडिया पर अभद्र टिप्पणी करके तो �कभी साहित्यकारों पर भी अय्याशी का आरोप मढ़कर वीके सिंह विवादों में फंसते रहे हैं। सेना में रहने के दौरान भी उनकी उम्र को लेकर काफी विवाद रहा।
गौरतलब है कि फरीदाबाद के बल्लभगढ़ इलाके में एक गांव में एक पूरे परिवार को जला के मारने की कोशिश की गई। इसमें दो मासूम बच्चों की मौत हो गई। इसके बाद इसे लेकर राजनीति भी गरमा गई है। विपक्ष इसे लेकर लगातार सरकार को घेरने की कोशिश में है। इसके साथ ही इलाके के लोग भी आंदोलन के लिए उतारू हैं। बुधवार को पुलिस को लाठी चलानी पड़ी थी।

 

ACB ने थानेदार को थाणे में ही रिश्वत लेते हुए पकड़ा

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उदयपुर। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने हाथीपोल पुलिस थाने के एसआई पृथ्वीसिंह को तीन हजार रूपए रिश्वत लेते बुधवार को रंगे हाथों गिरफ्तार किया। उसने यह राशि मूर्ति तस्करी मामले में गिरफ्तार आरोपितों से मारपीट नहीं करने, रिमाण्ड नहीं बढ़वाने की एवज में ली थी। हाथीपोल थाने में आरोपितों के सामने ही हुई कार्रवाई से थाने में हड़कम्प मच गया। एएसपी बृजेश सोनी बताया कि उत्तरी आयड़ निवासी शेखर पुत्र शांतिलाल शर्मा ने ब्यूरो कार्यालय में शिकायत दी थी। उसका कहना था कि उसके पड़ौसी जुगनू पुत्र गोविन्द लाल भावसार व विकास उर्फ विक्की पुत्र लालचंद राव को मूर्ति तस्करी के मामले में गिरफ्तार किया गया था।

वह 17 अक्टूबर को हाथीपोल थाने में आरोपितों से मिलने पहुंचा तो पता चला कि जांच अधिकारी एसआई पृथ्वीसिंह उनसे मारपीट कर रहा था और रिमाण्ड बढ़वाने की धमकी दे रहा था। इस पर शेखर एसआई से मिला तो उसने 15 हजार रूपए रिश्वत मांगी और 10 हजार लेने पर राजी हो गया। पांच हजार रूपए उसने ले भी लिए लेकिन बकाया 5 हजार रूपए के लिए आरोपितों से मारपीट कर धमकाने लगा। सत्यापन में पुष्टि होने पर एसीबी ने जाल बिछाया और 3 हजार रूपए लेते ही एसआई पृथ्वीसिंह को धर लिया।

एक वर्षü पहले ही हुई पदोन्नति

आरोपित एसआई पृथ्वीसिंह पुत्र दौलतसिंह राजपूत मूलत: डूंगरपुर जिले के अमृतिया-आसपुर का है। वष्ाü 1981 में वह कांस्टेबल पद पर भर्ती हुआ था। वर्ष 2014 में वह उपनिरीक्षक बना था। जून 2014 से वह हाथीपोल थाने में तैनात था।

 

सांस्कृतिक राजनीति मँहगी पड़ने वाली है -अपने ही सांस्कृतिक फंदे में फंसी भाजपा

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चूँकि भारतीय जनता पार्टी सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का वाहक होने का दावा करती है, इसलिए अगर उसकी राजनीति को सांस्कृतिक रूप से परिभाषित किया जाए तो उसके किसी पैरोकार को आप‌त्त‌ि नहीं होनी चाहिए.

दरअसल, इस समय यह सत्तारूढ़ दल अपने ही बनाये हुए जिस फंदे में फँसा हुआ है, वह उसकी सांस्कृतिक राष्ट्रवादी राजनीति की ही देन है.

गो-रक्षा इस पार्टी के सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का प्रमुख आधार है, लेकिन उसके आधार पर हो सकने वाली गोलबंदी को पूरे देश में समान रूप से लागू करने के बजाय वह उसे केवल ग़ैर-भाजपा शासित राज्यों में ही आज़मा रही है.

गाय काटने के शक को लेकर होने वाली भीड़-हिंसा की घटनाएँ या तो उत्तर प्रदेश में हुई हैं या हिमाचल प्रदेश में. जबकि स्वयं भाजपा शासित गोवा के मुख्यमंत्री बाक़ायदा घोषित कर चुके हैं कि वे गोमांस खाने पर प्रतिबंध नहीं लगाएँगे, क्योंकि उनके प्रदेश की आबादी का एक प्रमुख हिस्सा गोमांस खाता है.

चूँकि भाजपा इस विषय में कुछ नहीं बोलती, इसलिए उसकी यह राजनीतिक चतुराई छिपी नहीं रह पाती.

भाजपा उत्तर-पूर्वी राज्यों में खाए जाने वाले गोमांस पर भी नहीं बोलती. इसी चतुराई का दूसरा हिस्सा यह है कि प्रधानमंत्री ने भी इस घटनाक्रम के ग़ैर-भाजपा राज्यों में सीमित होने का लाभ उठाया.

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पहले तो दादरी की दर्दनाक घटना पर वे बोले नहीं, और जब उनकी सरकार पर दबाव पड़ा तो उन्होंने इस घटना की निंदा तो नहीं ही की, केंद्र सरकार को इन घटनाओं से अलग करके ज़िम्मेदारी लेने से भी इनकार कर दिया.

संघवादी ढाँचे की राजनीति खेलने की ऐसी मिसाल किसी प्रधानमंत्री ने पहली बार दी. अगर वास्तव में प्रधानमंत्री को दादरी की घटना अफ़सोसनाक लगी थी तो गृह मंत्रालय के ज़रिए उत्तर प्रदेश सरकार से उसकी तफ़सील पूछना और उस पर अधिक प्रभावी कार्रवाई का दबाव डालना पूरी तरह उनके अधिकार-क्षेत्र में है. वैसे भी वे उत्तर प्रदेश से सांसद हैं.

इस सांस्कृतिक फंदे को उसका ख़ास रूप साहित्यकारों की कार्रवाई ने दिया है. भारत के इतिहास में इतनी भाषाओं के मशहूर साहित्यकारों ने इतनी बड़ी संख्या में पहली बार प्रतिरोध-स्वरूप पुरस्कार वापस करके एक नयी मिसाल कायम की है.

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इस पर बहस की जा सकती है कि उन्हें ऐसा करना चाहिये था या नहीं, पर इसमें कोई शक नहीं कि उनका प्रतिरोध बेहद असरदार निकला. सरकार हिली हुई लग रही है. उसके और भाजपा के प्रवक्ता हर मंच पर अपना बचाव करते घूम रहे हैं.

मुश्किल यह है कि उनके पास इस सांस्कृतिक आक्रमण का उत्तर देने के लिये न तो सांस्कृतिक भाषा है और न ही तर्कों का सांस्कृतिक ढाँचा है. वे साहित्यकारों के मुक़ाबले राजनीतिक भाषा बोल कर काम चला लेना चाहते हैं.

दरअसल, साहित्यकारों की अंदरूनी राजनीति और उनके हिंदुत्व विरोधी विचारधारात्मक लगावों को सामने ला कर भाजपा उस मुद्दे की धार कुंद नहीं कर पा रही है जिसे पुरस्कार वापसी के क़दम से का़फी तीखापन मिल गया है.

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हम सभी जानते हैं कि साहित्यकारों के कहने पर भाजपा के विरोध में कोई वोट देने नहीं जा रहा है. लेकिन, अकादमी पुरस्कारों की वापसी की घटना पूरे विश्व के सांस्कृतिक जगत में गूँज सकती है.

साहित्यकारों और कलाकारों का अपना एक नेटवर्क होता है. वैसे भी पुरस्कार वापिस करने वाले सभी साहित्यकार वामपंथी ख़ेमे के नहीं हैं. इनमें साहित्य की दुनिया में मार्क्सवाद के प्रभाव से जूझने वाले रचनाकार भी हैं.

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सलमान रुश्दी के आवाज़ में आवाज़ मिलाने से आगे भी फ़र्क पड़ने वाला है. रुश्दी ने यह भी कहा है कि वैसे तो प्रधानमंत्री बड़े बातूनी (टाकेटिव) हैं, पर ऐसे मसलों पर उनकी चुप्पी गुंडई (ठगरी) को बढ़ावा दे रही है.

भाजपा को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि मोदी की आर्थिक नीति का समर्थन करने वाले टिप्पणीकारों ने भी गोमांस पर होने वाली राजनीति पर चिंता जताई है.

अगर भाजपा और उसके समर्थनक संगठनों, जैसे बजरंग दल, गोरक्षा दल और हिंदू जागरण मंच, ने अपने कदम वापस नहीं खींचे तो यह सांस्कृतिक राजनीति दूरगामी दृष्टि से उन्हें मँहगी पड़ने वाली है.

 

sours- BBC HINDI

हिन्दुस्तान जिंक के छःमाही वित्तीय परिणामों की घोषणा

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दूसरी तिमाही में जस्ता-सीसा-चांदी का उत्पादन बढ़ा

९५% साधारण लाभांष के साथ अतिरिक्त ९५% अंतरिम लाभांश की भी घोषणा

hzlउदयपुर। 2015 हिन्दुस्तान जिंक लिमिटेड ने आज मुम्बई में आयोजित अपनी निदेशक मण्डल की बैठक में 30 सितम्बर 2015 को समाप्त छःमाही व दूसरी तिमाही के वित्तीय परिणामों की घोषणा की।

हिन्दुस्तान जिंक ने दूसरी तिमाही में खनित धातु उत्पादन, बिक्री योग्य, सीसा-जस्ता तथा चांदी उत्पादन में सकारात्मक वृद्धि की है। कंपनी ने लाभ में वृद्धि के साथ ही 95 प्रतिषत साधारण लाभांष के साथ अतिरिक्त 95 प्रतिषत अंतरिम लाभांष की भी घोषणा की गयी है।

‘‘हिन्दुस्तान जिंक के चेयरमैन श्री अग्निवेष अग्रवाल जी ने कहा कि लण्दन मेटल एक्सचेंज (एलएमई) में जस्ता धातु की कीमते विपरीत परिस्थितियों होने के बावजूद मजबूत एवं सकारात्मक प्रदर्षन रहा है। कंपनी की सचांलन क्षमता एवं लागत नियंत्रण पर रणनीति से श्रेष्ठ परिणाम हासिल हुए है। नव नियुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी के नेतृत्व में कंपनी की परियोजनाओं का विस्तार तथा कंपनी की खनन उत्पादन क्षमता में वृद्धि और उत्पादन लागत में कमी को बनाए रखने तथा लाभ में सुधार के लिए हम प्रतिबद्ध है।’’

इस तिमाही में खनित धातु का उत्पादन 240,000 मैट्रीक टन हुआ जो गतवर्ष की तुलना में 13 प्रतिषत अधिक है। वित्तीय वर्ष 2016 की दूसरी तिमाही में 472,000 मैट्रीक टन हुआ है जो गतवर्ष की समान अवधि की तुलना में 26 प्रतिषत अधिक है।

एकीकृत रिफाइन्ड जस्ता धातु 211,000 मैट्रीक टन उत्पादन हुआ जो गतवर्ष की समान अवधि की तुलना में 22ः की वृद्धि दर्षाता है। वित्तीय वर्ष 2016 की छःमाही में एकीकृत जस्ता धातु 398,000 मैट्रीक टन उत्पादन हुआ जो गतवर्ष की तुलना में 28 प्रतिषत अधिक है। उत्पादन में सुधार कंपनी के प्रचालनों के सुचाररूप से संचालन के कारण रहा है।

वित्तीय वर्ष 2016 की दूसरी तिमाही के दौरान कंपनी ने 3,908 करोड़ रु. का राजस्व अर्जित किया जो गतवर्ष की इसी समान अवधि की तुलना में 4ः अधिक है तथा 2,285 करोड़ रु. का शुद्ध लाभ अर्जित किया जो गतवर्ष की इसी समान अवधि की तुलना में 5ः अधिक दर्शाता है।

एकीकृत बिक्री योग्य सीसा एवं चांदी धातु उत्पादन क्रमषः 39,000 मैट्रीक टन तथा 110 मैट्रीक टन हुआ जो गतवर्ष की समान अवधि के तुलना में क्रमषः 53 प्रतिषत एवं 64 प्रतिषत अधिक है।

कम्पनी के निदेशक मण्डल ने चालू वित्तीय वर्ष के लिए 95 प्रतिशत साधारण लाभांष के साथ अतिरिक्त 95 प्रतिषत अंतरिम लाभांश भी घोषित किया है जो 2 रूपये के प्रति इक्विटी शेयर पर 1.90 रु. है । दोनों लाभांषों के भुगतान की रिकॉर्ड तिथि 26 अक्टूबर 2015 निर्धारित की है।

क्या कच्ची बस्तियां एवं अल्पसंख्यकों के क्षेत्र शहर से बाहर होंगे?

one-of-the-white-cupolasउदयपुर। उदयपुर शहर को स्मार्ट सिटी में लिये जाने का जोर शोर से प्रचार किया जा रहा है, लेकिन नगर निगम उदयपुर एवं जिला प्रशासन उदयपुर शहर द्वारा पॉश इलाकों एवं कच्ची बस्तियों, अल्पसख्ंयकों की कॉलोनियों के विकास एवं समस्याओं के समाधान के लिए अलग-अलग माप दण्ड अपनाए जाते हैं। यह विचार माकपा शहर सचिव एवं पूर्व पार्षद राजेश सिंघवी ने व्यक्त करते हुए कहा कि नगर निगम उदयपुर द्वारा एक तरफ तो शहर के पॉश इलाकों में रोड़ पर रोड़ का निर्माण किया जा रहा है, जिससे सड़कों का लेवल लोगों के मकान के गेट से उपर हो गया है, वहीं कच्ची बस्तियों में आज भी लोग टूटी फूटी सड़कों व नालियों के ठीक होने का वर्षो से इन्तजार कर रहे हैं।
सिंघवी ने नगर निगम उदयपुर द्वारा सफाई के मामलों में भी दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि एक तरफ तो वार्ड 15 जिसमें राज्य के गृहमंत्री गुलाबचन्द कटारिया का मकान है, में 40 से ज्यादा सफाई कर्मचारी कार्य कर रहे हैं, वहीं माछला मगरा स्थित कच्ची बस्तियों के वार्ड नं. 16 के क्षेत्र में 10 से 12 सफाई कर्मचारी ही कार्य कर रहे हैं, जिससे क्षेत्र की जनता गंदगी में रहने को मजबूर है। सिंघवी ने कहा कि उन्होंने इस बारे में कई बार महापौर, आयुक्त एवं स्वास्थ्य अधिकारी से बात कर समस्या का निराकरण करने का आग्रह किया, लेकिन वहां से सिर्फ टालमटोल का ही जवाब दिया गया।
सिंघवी ने कहा कि नगर निगम उदयपुर के रवैये से ऐसा लगता है कि उदयपुर शहर को स्मार्ट सिटी बनाने के पहले कच्ची बस्तियों, अल्पसंख्यकों के क्षेत्र को शहर से बाहर धकेल दिया जाएगा।
सिंघवी ने कहा कि नगर निगम उदयपुर ने अगर अपना दोहरा रवैया नहीं बदला और कच्ची बस्तियों, अल्पसंख्यक बस्तियों के क्षेत्र में विकास एवं सफाई कर्मचारी लगाने जैसे कार्य शुरू नहीं किये तो क्षेत्र की जनता को साथ लेकर आंदोलन किया जाएगा।

श्री भट्ट पी.आर.एस.आई. के संयुक्त सचिव निर्वाचित

G N BHATTउदयपुर | राजस्थान जनसंपर्क सेवा के वरिष्ठ अधिकारी और राजस्थान सूचना केन्द्र, नई दिल्ली के अतिरिक्त निदेशक गोपेन्द्र नाथ भट्ट को पब्लिक रिलेशन्स सोसायटी ऑफ इंडिया (पी.आर.एस.आई.) के दिल्ली चैप्टर का निर्विरोध संयुक्त सचिव चुना गया है।
पी.आर.एस.आई. के वार्षिक सम्मेलन में निर्वाचन अधिकारी रजत गुप्ता ने एस. रामगोपालन को चेयरमेन, नरेश कुमार को उपाध्यक्ष, के.एम. प्रशांत को महासचिव, गोपेन्द्र नाथ भट्ट को संयुक्त सचिव एवं सुश्री रमा विजय को सर्वसम्मति से कोषाध्यक्ष चुने जाने की घोषणा की।

आयड़ से नगर निगम ने हटाया अतिक्रमण

DSCN2087उदयपुर । नगर निगम द्वारा आज शबरी कॉलोनी, आयड़ में अतिक्रमण विरूद्व कार्यवाही करवाकर हटाकर लगभग 3000 स्का. फीट भूमि अतिक्रमण मुक्त करवा दी गई।
क्षैत्रवासीयों की शिकायत पर महापौर के निर्देशानुसार सुलभ कॉम्पलेक्स के पास सार्वजनिक भूमि पर नाना भाई द्वारा अपने घोड़े बांधकर अस्तबल बनाकर अतिक्रमण किया हुआ था, जिन्हें हटाकर लगभग 3000 स्का. फीट भूमि अतिक्रमण मुक्त करवा दिया गया और हाथो हाथ वहां निगम स्वामित्व का बोर्ड लगाकर और रेलिंग लगवाकर उक्त भूमि को सुरक्षित किया गया।
यहीं पास में बिलकीस द्वारा कमरा बनाकर अतिक्रमण किया हुआ था, जिन्हें पूर्व में निगम द्वारा चेताया गया था। उक्त अतिक्रमण को भी हाथो हाथ हटवाया गया। अतिक्रमण कार्यवाही के दौरान राजस्व शाखा अधिकारी (कार्यवाहक) नितीश भटनागर, पटवारी चमन सिंह, अभय कुमार बंया एवं दलपत सिंह मौजुद थे।

ओम बन्ना सेवा संस्थान की और से मेलडी माताजी जी को चढाई चुन्दडी श्रृंगार ध्वजा

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उदयपुर । श्री ओम बन्ना सेवा संस्थान बलीचा धाम की ओर से रविवार को सुबह मेलडी माता मन्दिर परिसर में माता जी को चून्दडी, श्रृंगार एवं ध्वजा चढाई गई। ओम बन्ना सेवा संस्थान के आरपी सिंह आकवा ने बताया कि रविवार को प्रातः 8.00. बजे ओम सेवा संस्थान से कार्यकर्ता एवं भक्तगण परम्परागत वेश भूषा में कलश यात्रा उसके आगे बेण्ड बाजे, ओम बन्ना संस्थान के पदाधिकारी गाजे बाजे के साथ रवाना होकर मेलडी माता मन्दिर पहुॅचकर महन्त वीरम देवी जी के समक्ष माता जी मन्दिर में चून्दडी, श्रृंगार एवं ध्वजा चढाई गई एवं महाआरती की गई । इस अवसर पर बजरंग सेना के संस्थापक कमलेन्द्र सिंह पंवार, विरेन्द्र सिंह सनवाडा, विक्रम सिंह तलावदा, चैन सिंह राजावत, रणजीत मीणा, ओम पाल सिंह, अजय पाल सिंह, आकवा, चन्द्र सिंह सहित अनेक भक्तगण उपस्थित थे।

बच्चों ने उदयपुर को स्मार्ट सिटी बनाने का संकल्प लिया

 

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उदयपुर । लायंस क्लब एकलिंगजी एवं लायंक क्लब एलिट की ओर से तीन दिवसीय गरबा महोत्सव का आगाज हुआ । लायंस क्लब एलिट के अध्यक्ष ओम प्रकाश अग्रवाल ने बताया कि तीन दिवसीय गरबा महोत्सव का आयुर्वेद चौराहा स्थित उत्सव वाटिका में माता जी की तस्वीर लगा किया गया। लायंक क्लब एकलिंग जी के अध्यक्ष नरेश माहेश्वरी ने बताया कि रविवार को बच्चों ने माता जी की तस्वीर के सामने बेटी बचाओं, बेटी पढाओं, स्वच्छ भारत, स्वस्थ भारत, पर्यावरण संरक्षण, स्मार्ट सिटी बनाने का संकल्प लिया ।