उदयपुर। द ललित लक्ष्मी विलास में २३ अक्टूबर से १ नवंबर तक “कबाब इस्की” फ़ूड फेस्टिवल आयोजित किया जारहा है। कबाब फ़ूड फेस्टिवल के दौरान लजीज और विभिन्न प्रकार के कबाब गेस्ट को सर्व किये जायेगें।
द ललित लक्ष्मी विलास पैलेस के मास्टर शेफ विजेन्द्र सिंह ने बताया पूर्व में कबाब फेस्टिवल आने वाले मेहमानों द्वारा काफी सराहा गया था। मास्टर शेफ विजेन्द्र ने बताया कि वेज और नॉन वेज कबाब मेहमानों को ड्रिंक्स के साथ परोसा जाएगा अगर कोई मेहमान ड्रिंक्स नहीं चाहेगा तो बिना ड्रिक्स के परोसे जाने की भी सुविधा है।
वेज और नॉन वेज कबाबों में चार-चार तरह के कबाब का ज़ायका इस फ़ूड फेस्टिवल में उठाया जा सकता है। वेज कबाब में अफगानी पनीर टिक्का कबाब, दही और अंजीर का कबाब, भट्टी के दम आलू कबाब, और सांगरी और चने कि टिक्की के कबाब परोसे जायेगे।
नॉन वेज कबाब में अफगानी मुर्ग, सुर्खिला काकोरी कबाब, सरसों वाली मच्छी तथा बन्नों कबाब परोसे जायेगे। वेज और नॉन वेज प्लेटर के साथ सूप स्वीट डिश और नान के साथ बलूची दाल भी परोसी जायेगी।
असिस्टेंड फ़ूड मेनेजर मानवेंद्र सिंह ने बताया कि वेज कबाब के साथ एल्कोहल १६०० रुपये बिना एल्कोहल ११०० रुपये तथा नॉन वेज के लिए एल्कोहल के साथ १८०० रुपये तथा बिना एल्कोहल १३०० रुपये प्रत्येक डिश पर चार्ज किया गया है। मानवेंद्र सिंह ने बताया कि शहरवासियों और पर्यटकों द्वारा कबाब का यह फ़ूड फेस्टिवल काफी पसंद किया जारहा है।
द ललित में लज़ीज़ कबाब फेस्टिवल
“Sakhi” Designer Garments on the Ramp
Hindustan Zinc to showcase fashion garments made by “Sakhi” rural women on the fashion ramp on 28thOctober in Jaipur
50 “Sakhi” rural women of village Gagwana and Kayad in the district of Ajmer have been working for almost 2 months to make designer garments. A training in this regard was provided to these rural women, most of whom are educated, as part of development of “Sakhi” product cluster on fashion garments.
“Under the project “Sakhi” by Hindustan Zinc, our focus is to develop a hub of karigars that can help fashion designers from across the country, fashion students and other fashion experts. It is not easy to find such a hub of karigars at one place and this is expected to be useful for the fashion industry. With this cluster, Hindustan Zinc is aiming to create a sustainable employment for these women. This will also encourage thousands of rural women to take-up this creative art”, said Pavan Kaushik, who is the Head of the Project “Sakhi” in Hindustan Zinc.
The karigars now, Furkana Bano and Kukum Kavar of village Kayad had no experience of such a work. As they say, the rural conditions never exposed them to such an art. Similarly Tabassum Bano and Ryaj Bano from village Gagwana always wanted to do something like this but never got a chance for such training as it was quite expensive. Wasima Bano from village Kayad had only one thing to say, “yeh sab hamari ummedon se uppar hai”.
The trainers, Zakir Khan and Rajni Kaur Khan when started training them had to face tough times as most of these women had no background knowledge. A small workshop was conducted under the “Sakhi” project to ascertain their creativity. These women lived at distance and engaging them for long hours was difficult. “zardozi, zari, gota-patti, danka, pearls and embroidery work needed continuous sitting for hours and initially it was difficult to convince them. But once they started learning and working, they never saw time” says Rajni. Zakir and Rajni are from Udaipur and have been staying in Ajmer so that they can be with these women and develop this fashion hub.
These women have made 48 garments like sarees, sarwar kurta, kurtees and kaftans, in a record time of about 45 days. Delhi based stylist Joyjeet has been engaged to give final touching. Asha Baxi the former Dean of National Institute of Fashion Technology (NIFT) and perhaps the first fashion faculty of India visited these women along with the students and faculty of Fashion Design. Asha Baxi is setting up Fashion Design Department in the Indian Institute of Crafts and Design, Jaipur.
To showcase these garments, Hindustan Zinc has now given these women a platform through “Sakhi” Fashion Show on 28th October 2015 at Hotel Clarks Amer, Jaipur. The show is choreographed by leading Asian choreographer Rashmi Virmani and would have leading models from Delhi and Mumbai. Renowned fashion designers like Jattinn Kochhar, Niki Mahajan, Rajdeep Ranawat, Gaurav Gupta, and Anand Bhushan would be present during the show. The current Miss India 2014, Koyal Rana, would be part of the show stopper.
“Sakhi” would also present designs for the uniforms for children of Anganwadis and Nand Ghar.
Hindustan Zinc has been engaged in empowerment of rural and tribal women of Rajasthan since 2006 through formation of self-help-groups. Today, these SHGs are popularly known as “Sakhi”, and the women associated with these SHGs as “Sakhees”. “Sakhi” has developed product based clusters to strengthen the social and economic conditions of these women. Clusters of fashion garments, school uniforms, home furnishing, candle making, spices, floor mats, pickle and papad, paper craft etc. have already been developed that have been successful in bringing sustainable empowerment in hundreds of these rural and tribal women.
दिलचस्प ऑफर : अगर तलाक हुआ तो मुफ्त में होगी दूसरी शादी
बीजिंग। चौंक गए ना…यह ऑफर सच है। इन निदों चीन में यह स्कीम बहुत लोकप्रिय हो रही है। एक मैरिज ब्यूरो ने यह स्कीम चलाई है, जिसके तहत अगर किसी व्यक्ति का तलाक हो जाता है तो उसकी दूसरी शादी मुफ्त में करवाई जाएगी।
यह है स्कीम
– मैरिज ब्यूरो के इस ऑफर के मुताबिक अगर शादी के बाद एक साल के अंदर किसी जोड़े का तलाक हो जाता है तो ब्यूरो उनकी दूसरी शादी के लिए दुल्हन खोजेगा।
– मनपसंद लड़की से व्यक्ति की शादी करवाई जाएगी।
– लड़की कुंवारी होगी यह भी वादा किया गया है।
– यही नहीं अगर तलाक होता है तो इसके लिए 20 लाख रूपए देने होंगे।
– दुल्हन को खोजने से लेकर शादी के सारे इंतजाम मैरिज ब्यूरो ही करेगा।
– यह ऑफर तीन महीने के लिए दिया जा रहा है।
इसलिए दिया यह अनोखा ऑफर
दरअसल चीन में इन दिनों तलाक के केस तेजी से बढ़ रहे हैं और यही नहीं तलाक के बाद लोग दूसरी शादी नहीं कर रहे हैं। इसके चलते शंघाई में बुदि्धजीवियों की मीटिंग हुई जिसके बाद ब्यूरो ने यह आक र्षक ऑफर निकाला। इस ऑफर की दिलचस्प बात यह है कि इसमें कहा गया है कि अगर किसी तलाकशुदा की शादी करवाई जाऎगी तो उसकी शादी चीन की नहीं बल्कि वियतनाम की लड़की से करवाई जा एगी। ऎसा इसलिए कहा गया है क्यों ऎसा माना जाता है कि वियतनाम की लड़कियां अपेक्षाकृत वफादार होती हैं।
मासूमों की मौत पर शर्मनाक बयान – कोई कुत्ते को पत्थर मार दे तो इसके लिए सरकार जिम्मेदार नहीं”
उदयपुर . फरीदाबाद में दलित मासूम बच्चों को जिंदा जलाए जाने की घटना पर विदेश राज्यमंत्री जनरल वीके सिंह(रि.) ने बेहद शर्मनाक और आपत्तिजनक बयान देते हुए कहा है कि “अगर कोई कुत्ते को पत्थर मार दे तो इसके लिए सरकार जिम्मेदार नहीं है”।
ACB ने थानेदार को थाणे में ही रिश्वत लेते हुए पकड़ा
उदयपुर। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने हाथीपोल पुलिस थाने के एसआई पृथ्वीसिंह को तीन हजार रूपए रिश्वत लेते बुधवार को रंगे हाथों गिरफ्तार किया। उसने यह राशि मूर्ति तस्करी मामले में गिरफ्तार आरोपितों से मारपीट नहीं करने, रिमाण्ड नहीं बढ़वाने की एवज में ली थी। हाथीपोल थाने में आरोपितों के सामने ही हुई कार्रवाई से थाने में हड़कम्प मच गया। एएसपी बृजेश सोनी बताया कि उत्तरी आयड़ निवासी शेखर पुत्र शांतिलाल शर्मा ने ब्यूरो कार्यालय में शिकायत दी थी। उसका कहना था कि उसके पड़ौसी जुगनू पुत्र गोविन्द लाल भावसार व विकास उर्फ विक्की पुत्र लालचंद राव को मूर्ति तस्करी के मामले में गिरफ्तार किया गया था।
वह 17 अक्टूबर को हाथीपोल थाने में आरोपितों से मिलने पहुंचा तो पता चला कि जांच अधिकारी एसआई पृथ्वीसिंह उनसे मारपीट कर रहा था और रिमाण्ड बढ़वाने की धमकी दे रहा था। इस पर शेखर एसआई से मिला तो उसने 15 हजार रूपए रिश्वत मांगी और 10 हजार लेने पर राजी हो गया। पांच हजार रूपए उसने ले भी लिए लेकिन बकाया 5 हजार रूपए के लिए आरोपितों से मारपीट कर धमकाने लगा। सत्यापन में पुष्टि होने पर एसीबी ने जाल बिछाया और 3 हजार रूपए लेते ही एसआई पृथ्वीसिंह को धर लिया।
एक वर्षü पहले ही हुई पदोन्नति
आरोपित एसआई पृथ्वीसिंह पुत्र दौलतसिंह राजपूत मूलत: डूंगरपुर जिले के अमृतिया-आसपुर का है। वष्ाü 1981 में वह कांस्टेबल पद पर भर्ती हुआ था। वर्ष 2014 में वह उपनिरीक्षक बना था। जून 2014 से वह हाथीपोल थाने में तैनात था।
सांस्कृतिक राजनीति मँहगी पड़ने वाली है -अपने ही सांस्कृतिक फंदे में फंसी भाजपा
Image copyrightPTIचूँकि भारतीय जनता पार्टी सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का वाहक होने का दावा करती है, इसलिए अगर उसकी राजनीति को सांस्कृतिक रूप से परिभाषित किया जाए तो उसके किसी पैरोकार को आपत्ति नहीं होनी चाहिए.
दरअसल, इस समय यह सत्तारूढ़ दल अपने ही बनाये हुए जिस फंदे में फँसा हुआ है, वह उसकी सांस्कृतिक राष्ट्रवादी राजनीति की ही देन है.
गो-रक्षा इस पार्टी के सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का प्रमुख आधार है, लेकिन उसके आधार पर हो सकने वाली गोलबंदी को पूरे देश में समान रूप से लागू करने के बजाय वह उसे केवल ग़ैर-भाजपा शासित राज्यों में ही आज़मा रही है.
गाय काटने के शक को लेकर होने वाली भीड़-हिंसा की घटनाएँ या तो उत्तर प्रदेश में हुई हैं या हिमाचल प्रदेश में. जबकि स्वयं भाजपा शासित गोवा के मुख्यमंत्री बाक़ायदा घोषित कर चुके हैं कि वे गोमांस खाने पर प्रतिबंध नहीं लगाएँगे, क्योंकि उनके प्रदेश की आबादी का एक प्रमुख हिस्सा गोमांस खाता है.
चूँकि भाजपा इस विषय में कुछ नहीं बोलती, इसलिए उसकी यह राजनीतिक चतुराई छिपी नहीं रह पाती.
भाजपा उत्तर-पूर्वी राज्यों में खाए जाने वाले गोमांस पर भी नहीं बोलती. इसी चतुराई का दूसरा हिस्सा यह है कि प्रधानमंत्री ने भी इस घटनाक्रम के ग़ैर-भाजपा राज्यों में सीमित होने का लाभ उठाया.
Image copyrightReutersपहले तो दादरी की दर्दनाक घटना पर वे बोले नहीं, और जब उनकी सरकार पर दबाव पड़ा तो उन्होंने इस घटना की निंदा तो नहीं ही की, केंद्र सरकार को इन घटनाओं से अलग करके ज़िम्मेदारी लेने से भी इनकार कर दिया.
संघवादी ढाँचे की राजनीति खेलने की ऐसी मिसाल किसी प्रधानमंत्री ने पहली बार दी. अगर वास्तव में प्रधानमंत्री को दादरी की घटना अफ़सोसनाक लगी थी तो गृह मंत्रालय के ज़रिए उत्तर प्रदेश सरकार से उसकी तफ़सील पूछना और उस पर अधिक प्रभावी कार्रवाई का दबाव डालना पूरी तरह उनके अधिकार-क्षेत्र में है. वैसे भी वे उत्तर प्रदेश से सांसद हैं.
इस सांस्कृतिक फंदे को उसका ख़ास रूप साहित्यकारों की कार्रवाई ने दिया है. भारत के इतिहास में इतनी भाषाओं के मशहूर साहित्यकारों ने इतनी बड़ी संख्या में पहली बार प्रतिरोध-स्वरूप पुरस्कार वापस करके एक नयी मिसाल कायम की है.
Image copyrightunkइस पर बहस की जा सकती है कि उन्हें ऐसा करना चाहिये था या नहीं, पर इसमें कोई शक नहीं कि उनका प्रतिरोध बेहद असरदार निकला. सरकार हिली हुई लग रही है. उसके और भाजपा के प्रवक्ता हर मंच पर अपना बचाव करते घूम रहे हैं.
मुश्किल यह है कि उनके पास इस सांस्कृतिक आक्रमण का उत्तर देने के लिये न तो सांस्कृतिक भाषा है और न ही तर्कों का सांस्कृतिक ढाँचा है. वे साहित्यकारों के मुक़ाबले राजनीतिक भाषा बोल कर काम चला लेना चाहते हैं.
दरअसल, साहित्यकारों की अंदरूनी राजनीति और उनके हिंदुत्व विरोधी विचारधारात्मक लगावों को सामने ला कर भाजपा उस मुद्दे की धार कुंद नहीं कर पा रही है जिसे पुरस्कार वापसी के क़दम से का़फी तीखापन मिल गया है.
Image copyrightUDAY PRAKASH FACEBOOK BBC IMRAN QURESHI ASHOK VAJPAYEEहम सभी जानते हैं कि साहित्यकारों के कहने पर भाजपा के विरोध में कोई वोट देने नहीं जा रहा है. लेकिन, अकादमी पुरस्कारों की वापसी की घटना पूरे विश्व के सांस्कृतिक जगत में गूँज सकती है.
साहित्यकारों और कलाकारों का अपना एक नेटवर्क होता है. वैसे भी पुरस्कार वापिस करने वाले सभी साहित्यकार वामपंथी ख़ेमे के नहीं हैं. इनमें साहित्य की दुनिया में मार्क्सवाद के प्रभाव से जूझने वाले रचनाकार भी हैं.
Image copyrightAFPसलमान रुश्दी के आवाज़ में आवाज़ मिलाने से आगे भी फ़र्क पड़ने वाला है. रुश्दी ने यह भी कहा है कि वैसे तो प्रधानमंत्री बड़े बातूनी (टाकेटिव) हैं, पर ऐसे मसलों पर उनकी चुप्पी गुंडई (ठगरी) को बढ़ावा दे रही है.
भाजपा को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि मोदी की आर्थिक नीति का समर्थन करने वाले टिप्पणीकारों ने भी गोमांस पर होने वाली राजनीति पर चिंता जताई है.
अगर भाजपा और उसके समर्थनक संगठनों, जैसे बजरंग दल, गोरक्षा दल और हिंदू जागरण मंच, ने अपने कदम वापस नहीं खींचे तो यह सांस्कृतिक राजनीति दूरगामी दृष्टि से उन्हें मँहगी पड़ने वाली है.
sours- BBC HINDI
हिन्दुस्तान जिंक के छःमाही वित्तीय परिणामों की घोषणा
दूसरी तिमाही में जस्ता-सीसा-चांदी का उत्पादन बढ़ा
९५% साधारण लाभांष के साथ अतिरिक्त ९५% अंतरिम लाभांश की भी घोषणा
उदयपुर। 2015 हिन्दुस्तान जिंक लिमिटेड ने आज मुम्बई में आयोजित अपनी निदेशक मण्डल की बैठक में 30 सितम्बर 2015 को समाप्त छःमाही व दूसरी तिमाही के वित्तीय परिणामों की घोषणा की।
हिन्दुस्तान जिंक ने दूसरी तिमाही में खनित धातु उत्पादन, बिक्री योग्य, सीसा-जस्ता तथा चांदी उत्पादन में सकारात्मक वृद्धि की है। कंपनी ने लाभ में वृद्धि के साथ ही 95 प्रतिषत साधारण लाभांष के साथ अतिरिक्त 95 प्रतिषत अंतरिम लाभांष की भी घोषणा की गयी है।
‘‘हिन्दुस्तान जिंक के चेयरमैन श्री अग्निवेष अग्रवाल जी ने कहा कि लण्दन मेटल एक्सचेंज (एलएमई) में जस्ता धातु की कीमते विपरीत परिस्थितियों होने के बावजूद मजबूत एवं सकारात्मक प्रदर्षन रहा है। कंपनी की सचांलन क्षमता एवं लागत नियंत्रण पर रणनीति से श्रेष्ठ परिणाम हासिल हुए है। नव नियुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी के नेतृत्व में कंपनी की परियोजनाओं का विस्तार तथा कंपनी की खनन उत्पादन क्षमता में वृद्धि और उत्पादन लागत में कमी को बनाए रखने तथा लाभ में सुधार के लिए हम प्रतिबद्ध है।’’
इस तिमाही में खनित धातु का उत्पादन 240,000 मैट्रीक टन हुआ जो गतवर्ष की तुलना में 13 प्रतिषत अधिक है। वित्तीय वर्ष 2016 की दूसरी तिमाही में 472,000 मैट्रीक टन हुआ है जो गतवर्ष की समान अवधि की तुलना में 26 प्रतिषत अधिक है।
एकीकृत रिफाइन्ड जस्ता धातु 211,000 मैट्रीक टन उत्पादन हुआ जो गतवर्ष की समान अवधि की तुलना में 22ः की वृद्धि दर्षाता है। वित्तीय वर्ष 2016 की छःमाही में एकीकृत जस्ता धातु 398,000 मैट्रीक टन उत्पादन हुआ जो गतवर्ष की तुलना में 28 प्रतिषत अधिक है। उत्पादन में सुधार कंपनी के प्रचालनों के सुचाररूप से संचालन के कारण रहा है।
वित्तीय वर्ष 2016 की दूसरी तिमाही के दौरान कंपनी ने 3,908 करोड़ रु. का राजस्व अर्जित किया जो गतवर्ष की इसी समान अवधि की तुलना में 4ः अधिक है तथा 2,285 करोड़ रु. का शुद्ध लाभ अर्जित किया जो गतवर्ष की इसी समान अवधि की तुलना में 5ः अधिक दर्शाता है।
एकीकृत बिक्री योग्य सीसा एवं चांदी धातु उत्पादन क्रमषः 39,000 मैट्रीक टन तथा 110 मैट्रीक टन हुआ जो गतवर्ष की समान अवधि के तुलना में क्रमषः 53 प्रतिषत एवं 64 प्रतिषत अधिक है।
कम्पनी के निदेशक मण्डल ने चालू वित्तीय वर्ष के लिए 95 प्रतिशत साधारण लाभांष के साथ अतिरिक्त 95 प्रतिषत अंतरिम लाभांश भी घोषित किया है जो 2 रूपये के प्रति इक्विटी शेयर पर 1.90 रु. है । दोनों लाभांषों के भुगतान की रिकॉर्ड तिथि 26 अक्टूबर 2015 निर्धारित की है।
क्या कच्ची बस्तियां एवं अल्पसंख्यकों के क्षेत्र शहर से बाहर होंगे?
उदयपुर। उदयपुर शहर को स्मार्ट सिटी में लिये जाने का जोर शोर से प्रचार किया जा रहा है, लेकिन नगर निगम उदयपुर एवं जिला प्रशासन उदयपुर शहर द्वारा पॉश इलाकों एवं कच्ची बस्तियों, अल्पसख्ंयकों की कॉलोनियों के विकास एवं समस्याओं के समाधान के लिए अलग-अलग माप दण्ड अपनाए जाते हैं। यह विचार माकपा शहर सचिव एवं पूर्व पार्षद राजेश सिंघवी ने व्यक्त करते हुए कहा कि नगर निगम उदयपुर द्वारा एक तरफ तो शहर के पॉश इलाकों में रोड़ पर रोड़ का निर्माण किया जा रहा है, जिससे सड़कों का लेवल लोगों के मकान के गेट से उपर हो गया है, वहीं कच्ची बस्तियों में आज भी लोग टूटी फूटी सड़कों व नालियों के ठीक होने का वर्षो से इन्तजार कर रहे हैं।
सिंघवी ने नगर निगम उदयपुर द्वारा सफाई के मामलों में भी दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि एक तरफ तो वार्ड 15 जिसमें राज्य के गृहमंत्री गुलाबचन्द कटारिया का मकान है, में 40 से ज्यादा सफाई कर्मचारी कार्य कर रहे हैं, वहीं माछला मगरा स्थित कच्ची बस्तियों के वार्ड नं. 16 के क्षेत्र में 10 से 12 सफाई कर्मचारी ही कार्य कर रहे हैं, जिससे क्षेत्र की जनता गंदगी में रहने को मजबूर है। सिंघवी ने कहा कि उन्होंने इस बारे में कई बार महापौर, आयुक्त एवं स्वास्थ्य अधिकारी से बात कर समस्या का निराकरण करने का आग्रह किया, लेकिन वहां से सिर्फ टालमटोल का ही जवाब दिया गया।
सिंघवी ने कहा कि नगर निगम उदयपुर के रवैये से ऐसा लगता है कि उदयपुर शहर को स्मार्ट सिटी बनाने के पहले कच्ची बस्तियों, अल्पसंख्यकों के क्षेत्र को शहर से बाहर धकेल दिया जाएगा।
सिंघवी ने कहा कि नगर निगम उदयपुर ने अगर अपना दोहरा रवैया नहीं बदला और कच्ची बस्तियों, अल्पसंख्यक बस्तियों के क्षेत्र में विकास एवं सफाई कर्मचारी लगाने जैसे कार्य शुरू नहीं किये तो क्षेत्र की जनता को साथ लेकर आंदोलन किया जाएगा।
श्री भट्ट पी.आर.एस.आई. के संयुक्त सचिव निर्वाचित
उदयपुर | राजस्थान जनसंपर्क सेवा के वरिष्ठ अधिकारी और राजस्थान सूचना केन्द्र, नई दिल्ली के अतिरिक्त निदेशक गोपेन्द्र नाथ भट्ट को पब्लिक रिलेशन्स सोसायटी ऑफ इंडिया (पी.आर.एस.आई.) के दिल्ली चैप्टर का निर्विरोध संयुक्त सचिव चुना गया है।आयड़ से नगर निगम ने हटाया अतिक्रमण
उदयपुर । नगर निगम द्वारा आज शबरी कॉलोनी, आयड़ में अतिक्रमण विरूद्व कार्यवाही करवाकर हटाकर लगभग 3000 स्का. फीट भूमि अतिक्रमण मुक्त करवा दी गई।
क्षैत्रवासीयों की शिकायत पर महापौर के निर्देशानुसार सुलभ कॉम्पलेक्स के पास सार्वजनिक भूमि पर नाना भाई द्वारा अपने घोड़े बांधकर अस्तबल बनाकर अतिक्रमण किया हुआ था, जिन्हें हटाकर लगभग 3000 स्का. फीट भूमि अतिक्रमण मुक्त करवा दिया गया और हाथो हाथ वहां निगम स्वामित्व का बोर्ड लगाकर और रेलिंग लगवाकर उक्त भूमि को सुरक्षित किया गया।
यहीं पास में बिलकीस द्वारा कमरा बनाकर अतिक्रमण किया हुआ था, जिन्हें पूर्व में निगम द्वारा चेताया गया था। उक्त अतिक्रमण को भी हाथो हाथ हटवाया गया। अतिक्रमण कार्यवाही के दौरान राजस्व शाखा अधिकारी (कार्यवाहक) नितीश भटनागर, पटवारी चमन सिंह, अभय कुमार बंया एवं दलपत सिंह मौजुद थे।


