घर बैठे ONLINE पैसा कैसे कमायें – जानिये सात तरीके जो बदल देंगे आपकी ज़िन्दगी

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दुनिया में दो तरह के लोग हैं। पहले वो, जिनकी मूलभूत ज़रूरतें रोटी, कपड़ा और मकान हैं। दूसरे वो, जिनकी मूलभूत ज़रूरतें रोटी, कपड़ा, मकान और इंटरनेट हैं। पैसा कमाने के लिए दोनों ही तरह के लोग असल दुनिया में उतरते हैं। How to earn money online 

एक वह लोग है जो ऑफ लाइन पैसा कमाते है यानी बिना इंटरनेट के जिसमे बड़े कंपनी के सीईओ से लेकर पकोड़े तलने वाले तक ,… वो अपनी म्हणत और काबिलियत से कमा रहे है ,…. अब यही मेहनत और काबिलियत कुछ लोग ऑनलाइन आजमा रहे है ,…. और ऑनलाइन में पैसा भर भर कर कमा रहे है,….और ऑनलाइन कमाने के लिए ना तो किसी को इन्ताव्यु देने की जरूरत है ना ही किसी का कर्मचारी बनाने की जरूरत बीएस जरूरत है तो इंटरनेट कनेक्शन की और इस इंटरनेट और ऑनलाइन का थोडा ज्ञान की ,.. यहाँ थोडा मेने इसलिए कहा क्यूँ की ज्यादा तो थोडा थोडा कर हो जाएगा ,…. तो चलिए आपको ऑनलाइन पैसा कमाने के कुछ रास्ते बता देते है जो बिलकुल जेंयुनन है ,…. आपके सामने आकर बोल रहा हूँ ,…  बस ऑनलाइन और ओफ्लिने पैसा कमाने में एक बात या एक काबिलियत कोमन है वह है मेहनत ,.. जी हाँ मेहनत करोगे तो हुजुर मंजिल मिलती जायेगी ,…..   7 वंडर की तरह आपको में सात तरीके बताता हूँ ,.. जान लीजिये 
 
#1. फ्रीलांसिंग
किसी भी सर्विस की हो सकती है। आप इंटरनेट पर डेटा एंट्री से लेकर सर्वे करने और किसी प्रॉडक्ट को टेस्ट करने जैसा कोई भी काम कर सकते हों, तो आपको काम मिल जाएगा। आपके पास जो भी स्किल हो, अगर इंटरनेट पर किसी को उसकी ज़रूरत है, तो आप पांच से दस हज़ार रुपए तक कमा सकते हैं। Outfiverr.com, upwork.com, freelancer.com और worknhire.com जैसी वेबसाइट्स पर आपको काम मिल सकता है। लेकिन पैसा, काम पूरा होने और क्लाइंट के अप्रूव करने के बाद ही मिलता है। कई बार एक ही काम में क्लाइंट के मन-मुताबिक सुधार भी करने पड़ते हैं।#2. खुद की वेबसाइट
देखिए वेबसाइट बनाना अब कोई मुश्किल काम नहीं रह गया है। आप पैसा देकर बनवा सकते हैं और एफर्ट मारकर खुद भी बना सकते हैं। अगर आप विज़िटर्स को कुछ बेच रहे हैं और आपकी वेबसाइट पर विज़िटर्स लगातार आ रहे हैं, तो गूगल ऐडसेंस से आप कमाई कर सकते हैं। जितने ज़्यादा लोग वेबसाइट पर आएंगे, उतने ज़्यादा पैसे मिलेंगे। गूगल एडसेंस और ब्लॉग के बारे में आपको किसी अगले विडियो में डिटेल में बताउगा लेकिन यह एक बहुत अच्छा रास्ता है ऑनलाइन पैसे कमाने का .#3. एफिलिएट मार्केटिंग (आपस में धंधा करना)
आजकल ई मोमर्स वेबसाइ जैसे अमेज़न फ्लिप्कार्ट आदि कई वेब साईट है और यह वेब साईट अपना एफिलेट प्रोग्राम चलाती है यानी की अगर सीधी भाषा में कहूँ तो यह साईट बजाये किसी को एड देने के आपको अपना प्रोडक्ट बेचने का मोका देती है और आपने इनका प्रोडक्ट बेचा तो उसमे से ये आपको कमीशन देती है . 

मान लीजिए आप वेबसाइट चला ले गए, तो आप अपनी वेबसाईट पर इन ई कोमर्स का अपना अफिलेतेद लिंक दे कर अच्छा पैसा कमा सकते हो . आपके लिंक पर क्लिक कर अगर कोई विज़िटर कोई सर्विस या प्रॉडक्ट खरीदता है, तो इससे आपको पैसा मिलेगा। इसके लिए आपको इन ऑनलाइन मार्केट के एफिलेट प्रोग्राम से जुड़ना पड़ेगा . अगर आपका काम जम गया तो दोस्तों महीने के 50 हज़ार तक आराम से कमा सकते हो .

#4. सर्वे, रिसर्च या रिव्यू करना
कई वेबसाइट ऑनलाइन सर्वे भरने, रिसर्च करने और प्रॉडक्ट्स के रिव्यू लिखने के लिए पैसे देती हैं। काम करने पर पैसा आपके खाते में आएगा। यहीं पर सावधान रहने की ज़रूरत है। आप उनके साथ अपनी बैंक डीटेल्स शेयर करते हैं, तो आपको वेबसाइट की प्रतिष्ठा के मुताबिक ऐक्शन लेना होता है। कई बार काम दिलाने वाले कुछ रकम दबा लेते हैं। इसमें कुछ भरोसेमंद साईट है उनके साथ काम करना ज्यादा अच्छा है .

#5. वर्चुअल असिस्टेंटशिप (किसी का ऑनलाइन काम संभालना)
मान लीजिए कोई भला आदमी बड़ा आदमी भी है। उसके पास अपने ऑनलाइन तामझाम के लिए समय नहीं है। तो वह एक वर्चुअल असिस्टेंट रख लेगा। ऐसे में ज़रूरी नहीं कि असिस्टेंट उस क्लाइंट के साथ ही रहे। वह कहीं से भी इंटरनेट के ज़रिए काम संभाल सकता है। आप किसी के लिए कर्मचारी की तरह काम कर सकते हैं या खुद का बिजनेस भी सेटअप कर सकते हैं।

#6. अनुवाद (ट्रांसलेशन)
भारत के लोगों की एक ताकत भाषा भी है। बतौर मुल्क, हमारे पास बहुत सारी भाषाएं हैं और उनका इस्तेमाल करने वाले बहुत सारे लोग हैं। इंटरनेट पर आने वाला ज़्यादातर काम इंग्लिश में होता है। दक्षिण भारत में अंग्रेज़ी बोलना आम है, लेकिन उत्तर भारतीय इस पर मेहनत करते हैं। नतीजा यह निकलता है कि किसी भी लेख, प्रेस रिलीज़ या किताब का ट्रांसलेशन किया जा सकता है। अंग्रेज़ी से भारतीय भाषाओं में और भारतीय भाषाओं का अंग्रेज़ी अनुवाद… दोनों तरह के काम किए जा सकते हैं। अंग्रेज़ी के बाद जो मार्केट बचता है, उसमें स्पैनिश, फ्रेंच, अरब और जर्मन जैसी भाषाएं आती है। Freelancer.in, Fiverr.com, worknhire.com और Upwork.com देखी जा सकती हैं।

#7. ऑनलाइन ट्यूशन (इंटरनेट वाले मास्टर जी)
मान लीजिए आप किसी विषय में ज्ञानी हैं, तो यह अच्छी बात है, क्योंकि दुनिया में आबादी इतनी है कि हर तरह का ज्ञान लेने वाला आदमी बैठा है। आप इंटरनेट पर ज्ञान बांटना शुरू कर दीजिए। आपकी वजह से बोर्ड का एग्ज़ाम दे रहे किसी स्टूडेंट का भी भला हो सकता है और कहीं खो जा रहा व्यक्ति लौटकर भी आ सकता है। सही वेबसाइट पर ज्ञान बांट रहे होंगे, तो पैसे भी कमाएंगे। यूट्यूब तो बहुत सही जगह है। Vedantu.com, MyPrivateTutor.com, BharatTutors.com और tutorindia.net भी देखे जा सकते हैं।   

उदयपुर संभाग से सभी जिलों के “अंजुमन” मुस्लिम समाज की तरक्की के लिए आये एक मंच पर – अंजुमन का संभागीय सम्मलेन सफलता के साथ संम्पन।

मुस्लिम समाज को अपनी तरक्की की राह खुद तलाशनी होगीक-खलील
-अंजुमन का प्रथम संभाग स्तरीय सम्मेलन
-मुस्लिम समाज की तरक्की के विभिन्न मुद्दों पर हुई चर्चा

उदयपुर . अंजुमन तालीमुल इस्लाम उदयपुर द्वारा रविवार को यहाँ अलीपुरा स्थित रजा गार्डन में आयोजित प्रथम संभाग स्तरीय सम्मलेन कौमी एकता एवं सामाजिक विकास के संकल्प के साथ सम्पन्न हुआ जिसमे संभाग के 300 अधिक प्रतिनिधियों ने भाग भाग लिया !
कार्यक्रम की शुरुआत मौलाना जुलकरनैन द्वारा कुरान शरीफ की तिलावत से हुई.सम्मेलन को संबोधित करते हुए अंजुमन तालीमुल इस्लाम उदयपुर के सदर मोहम्मद खलील ने कहा की अब वक्त आगया है मुस्लिम समाज को भी एक हो कर अपनी कौम की तरक्की की राह खुद को तलाशनी होगी.कोई केवल सियासत के लिए हमारी कौम को इस्तमाल करे यह कतई गवारा नही है.उन्होंने कहा कि जब हम सब एक हो कर अपनी कौम की तरक्की के उपाय तलाशने में कामयाब हो जायेंगे तब आज जो सियासी पार्टियाँ हमारी उपेक्षा कर रही है वे खुद हमारे पास मदद मांगने आयेंगी.उन्होंने तहसील स्तर से लेकर प्रदेश स्तरीय अंजुमन के गठन की रुपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि आज जिस तरह से हम सभी संभाग स्तरीय सम्मेलन अयोजित करने में सफल हुए है उसी तरह से एक महीने की अवधि में प्रदेश स्तरीय अंजुमन कमेटी को भी आकार दे दिया जायेगा जरूरत है कौम की खिदमत के लिए काम करने वाले नौजवानों की,तजुर्बेकारों की जिनकी सलाह,जज्बात और हौंसलों के बूते पर मुस्लिम समाज संवेधानिक दायरे में तरक्की की और अग्रसर होगा.उन्होंने सभी से समाज की तरक्की के लिए इस मुहिम में जुड़ने का आव्हान किया.
सम्मेलन को कपासन के प्रतिनिधि अशफाक हुसैन,चित्तोड़ गढ़ के रमजान भाई छीपा,गनी खान,राजसमन्द के आसिफ हुसैन,अख्तर खान,आबुरोड के सलीम खान,बांसवाडा के नईम शेख,नगर निगम,उदयपुर के पार्षद मोहसीन खान,अंजुमन के पूर्व सेक्रेटरी फारुख हुसैन आदि ने संबोधित करते हुए मुस्लिम समाज के सर्वांगीण विकास के लिए शिक्षा,रोजगार,तकनीकी शिक्षा,सामाजिक एकता जैसे मुद्दों पर पर अपने विचार प्रकट करते हुए प्रदेश स्तरीय अंजुमन गठित करने के उदयपुर अंजुमन के प्रयास की सरहाना की तथा इस मुहिम में अपने स्तर पर तन,मन,धन से जुड़ने की प्रतिबद्धतता दोहराई.पार्षद मोहसीन खान ने कौम की खिदमत के लिए किसी भी राजनीतिक प्रलोभन को ठुकराने की बात कही .
सम्मेलन के आरंभ में के.आर.सिद्दीकी ने संभाग स्तरीय एवं प्रदेश स्तरीय अंजुमन की कार्यकारिणी के गठन के लिए अब तक किये गए प्रयसों की जानकारी देते हुए कहा कि इस के बाद जोधपुर संभाग स्तरीय सम्मेलन शीघ्र आयोजित किया जायेगा जीसी तैयारियां शुरू हो गई है .
सम्मेलन में संभाग के सभी जिलों के प्रतिनिधि के अतिरिक्त उदयपुर की मुस्लिम संस्थाओं के प्रतिनिधि,समाज सेवियों,बुद्धिजीवियों,शिक्षाविदों सहित 300 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया.धन्यवाद की रस्म अन्जुमन सेक्रेटरी रिजवान खान ने अदा की.

अनिल सिंघल या ताराचंद जैन बन सकते है उदयपुर शहर भाजपा के कप्तान।

उदयपुर। भारतीय जनता पार्टी के शहर जिलाध्क्ष दिनेश भट के इस्तीफे के बाद अब शहर का भाजपा का नया कप्तान तय करने की कवायद चल रही है। शहर के नए कप्तान में रविन्द्र श्रीमाली, महेंद्र सिंह शेखावत, किरण जैन के नाम मुख्य है लेकिन अगर सूत्रों की माने तो गुलाबचंद कटारिया अपनी पुरानी टीम से गठ जोड़ करने के मूड में है और इसीलिए भाजपा जिलाध्यक्ष की दौड़ में ताराचंद जैन जो की पहले छह बार जिलाध्यक्ष रह चुके है और अनिल सिंघल सबसे ऊपर है।
पार्टी के कुछ ख़ास नेताओं और कार्यकर्ताओं का कहना है की दिनेश भट्ट और गुलाबचंद कटारिया की पटरी कई समय से बैठ नहीं रही थी। तभी से भाईसाब ने अपने पुराने साथियों को अपने साथ लाने का मन बना लिया था। वैसे भी राजनीति है यहाँ हमेशा के लिए ना कोई दोस्त होता है ना ही कोई दुश्मन और इसीलिए अब भाईसाहब मोजुदा साथीयों को अलविदा कह कर अपने पुराने टीम के साथ गठ जोड़ करने के लिए हाथ बढ़ा सकते है। सूत्रों की माने तो पुरानी टीम ने भी एक तरह से हार मान कर कटारिया के साथ होने का मन बना लिया है, क्यूँ कि लाख कोशिशों के बावजूद कटारिया को ज्यादा नुकसान नहीं पहुचा पाए। यहाँ तक कि हाल ही के विधानसभा चुनाव में तो विरोधियों ने एडी से चोटी तक का जोर लगा दिया कटारिया को हराने के लिए लेकिन इसके बावजूद कटारिया ने जीत हासिल की। इसके अलावा किसी समय में कटारिया के घोर विरोधी माने जाने वाले धर्म नारायण जोशी की कटारिया से दोस्ती फिर मावली विधानसभा से टिकिट मिलना और चुनाव जितना यह घटना क्रम भी बताता है कि कटारिया अपनी पुरानी टीम को एक बार फिर साथ में लेकर मैदान में आ सकते है। और इसकी पहल होने वाली है ताराचंद जैन या अनिल सिंघल को जिलाध्यक्ष बना कर।
वैसे भी भट्ट के इस्तीफे को लेकर पार्टी में कई तरह की अफवाहें सुनाई दे रही हैं। पार्टी के वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं का कहना है कि भट्ट पिछले एक वर्ष से नाममात्र के अध्यक्ष थे। विधानसभा चुनाव तक उन्हें झेला जा रहा था। चुनाव निपटते ही भट्ट को निपटा दिया गया। चर्चा है कि भट्ट ने अपना इस्तीफा स्वेच्छापूर्वक नहीं दिया बल्कि उन्हें इस्तीफा देने के लिए मजबूर कर दिया गया। एक वर्ष से भाजपा के मेवाड़ के नेता गुलाबचंद कटारिया और दिनेश भट्ट की पटरी मेल नहीं खा रही थी। हालांकि संगठन के कार्यक्रमों और विधानसभा चुनाव की रैलियों, सभाओं के दौरान भट्ट को कटारिया के साथ देखा गया। जानकारों का कहना है मंच पर साथ बैठना मजबूरी थी लेकिन कटारिया और भट्ट के बीच मतभेद और मनभेद उजागर हो चुके थे। दो माह पूर्व कवी सम्मलेन के दौरान सूरजपोल थाना अधिकारी द्वारा दिनेश भट्ट के साथ किया गया बुरा बर्ताव और उसके बाद कटारिया द्वारा मंत्री होने के बावजूद कोई एक्शन नहीं लेना दोनों के बिच के संबंधो को उजागर कर दिया था।
ताराचंद जैन गुट के रविन्द्र श्रीमाली से पहले ही गुलाबचंद कटारिया का मेल हो चुका है अनिल सिंघल जिनका कि किसी समय में कटारिया और सिंघल का चोली दामन का साथ था और अनिल सिंघल को जिलाध्यक्ष बनाने के पूर्ण आश्वासन के बाद भी कटारिया द्वारा दिनेश भट्ट को शहर जिलाध्यक्ष बना दिए जाने के बाद से कटारिया और सिंघल अलग अलग हो गए थे। लेकिन अब कटारिया अब अनिल सिंघल के नाम पर मोहर लगा कर एक एक बार फिर अपनी पुरानी टीम को साथ में कर सकते है।

चाक़ू से पहले किया पत्नी पर ताबड़तोड़ वार – फिर खुद के पेट में घोंपा चाक़ू .

Udaipur Post. बीकानेर में मंगलवार को एक व्यक्ति ने अपनी ससुराल में पत्नी पर चाकू से ताबड़तोड़ वार कर उसे गंभीर घायल कर दिया। बाद में उसने खुद के पेट में भी चाकू घोंप कर आत्महत्या करने की कोशिश की। यह वारदात बीकानेर जिले के श्रीडूंगरगढ़ के कालूबास में मंगलवार शाम करीब साढ़े चार बजे घटी। अचानक हुए घटनाक्रम से घर के लोग कुछ समझ ही नहीं पाए। बाद में परिजन दोनों घायलों को स्थानीय चिकित्सालय लेकर गए, जहां उन्हें पीबीएम के ट्रोमा सेंटर रेफर कर दिया। श्रीडूंगरगढ़ सीआइ प्रदीपङ्क्षसह चारण ने बताया कि बीकानेर के गोगागेट निवासी संतोष पुत्र शंकर गिरी मंगलवार को श्रीडूंगरगढ़ के कालू बास अपनी ससुराल पत्नी संतोष देवी को लेने आया था। इस दौरान दोनों में कहासुनी हो गई और झगड़ा बढ़ गया। तभी संतोष ने घर में सब्जी काटने वाले चाकू से पत्नी पर ताबड़तोड़ वार कर दिए। बाद में खुद भी घटना से घबरा गया और खुद को भी चाकू मार लिया।
पहले सरकारी अस्पताल
सीआइ ने कहा कि महिला की हालत गंभीर है। वारदात की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर गई, लेकिन तब तक परिजन दोनों को श्रीडंंूगरगढ़ के सरकारी अस्पताल ले गए। हालत नाजुक होने पर दोनों को पीबीएम के ट्रोमा सेंटर रेफर कर दिया। तब श्रीडूंगरगढ़ थाने से एएसआई यहां पहुंचे। उन्होंने महिला के बयान लेने की कोशिश की, लेकिन वह बयान नहीं दे पाई।
बेटी व मां के रोने पर पहुंचे लोग
पुलिस के मुताबिक घटना के समय संतोष देवी की १५ वर्षीय बेटी और उसकी मां मौजूद थी। चाकू के वार जब संतोष निढाल होकर आंगन में गिर पड़ी तो वे बुरी तरह घबरा गई और जोर-जोर से रोने लगी। शोर-शराबा सुनकर आस-पास के लोग वहां पहुचे। पड़ोसियों की सहायता से दोनों को अस्पताल ले गए और घर के पुरुषों व पुलिस को वारदात की सूचना दी।
बच्चे, महिलाएं थी घर पर
सीआइ चारण ने बताया कि संतोष देवी एक-डेढ़ महीने से पीहर में रह रही थी। दोनों के बीच काफी समय से मनमुटाव चल रहा था। दोनों की शादी को १९ साल हो गए हैं। उनके चार बच्चे हैं। वारदात के समय बच्चे और महिलाएं ही घर पर थी। संतोष ने पत्नी पर चाकू से वार किए तो घर में कोहराम मच गया।

कांग्रेस के फ्लॉप जिलाध्यक्षों पर गिर सकती है गाज – बदले जायेगें इन जिलों के जिलाध्यक्ष .

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उदयपुर पोस्ट .विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के आशा अनुरूप प्रदर्शन नहीं होने से नाखुश कांग्रेस आलाकमान ने अब लोकसभा चुनावों को देखते हुए जिलाध्यक्षों पर नकेल कसना शुरू कर दी है। आलाकमान ने प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे और चारों ओर से प्रभारियों को यह जिम्मा सौंपा है कि वह सभी जिला कांग्रेस कमेटियों के अध्यक्षों के तीन साल के कार्यकाल का रिपोर्ट कार्ड तैयार करें और जहां बदलाव संभव हो वहां तुरंत फैसले लें ।
जानकारों की माने सह प्रभारी जिलाध्यक्षों के कामकाज की रिपोर्ट का आंकलन कर रिपोर्ट कांग्रेस आलाकमान को भेजेंगे। माना जा रहा है कि रिपोर्ट आलाकमान को भेजने के बाद कई जिलों में बदलाव देखने को मिल सकता है।
कई जिलाध्यक्षों को बदला जा सकता है या फिर जिला संगठन को मजबूती देने के लिए कार्यकारी जिलाध्यक्षों की नियुक्तियां की जा सकती हैं। वहीं विधानसभा चुनाव में पार्टी के पक्ष में लहर होने के बावजूद अपने प्रत्याशियों को जिताने में असफल रहे कुछ जिलाध्यक्षों पर गाज गिर सकती है। उनसे प्रत्याशियों की हार की वजह के कारण भी पूछे जा सकते हैं।इधर आलाकमान के इस निर्णय से प्रदेश कांग्रेस की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।

चुनावी प्रदर्शन पर भी नजर
वहीं कांग्रेस आलाकमान की विधानसभा चुनाव में जिलाध्यक्षों के रहे प्रदर्शन पर भी नजर है। दरअसल प्रदेश में कई जिले ऐसे हैं जहां पार्टी का प्रदर्शन विधानसभा चुनाव में कमजोर रहा है, इनमें बीकानेर, अजमेर, कोटा, उदयपुर जैसे अहम जिले भी शामिल हैं ।
इन दिनों में कांग्रेस की शहर व देहात इकाइयों अलग-अलग हैं। इन जिलों में कांग्रेस के कई दिग्गज नेताओं को हार का सामना करना पड़ा है। ,जिनमें नेता प्रतिपक्ष रहे रामेश्वर डूडी, पूर्व सांसद रघुवीर मीणा, पूर्व मंत्री नसीम अख्तर इंसाफ, वीरेंद्र बेनीवाल, मांगीलाल गरासिया जैसे दिग्गज भी शामिल हैं।
ऐसे में इन जिलों के अध्यक्षों से प्रत्याशियों की हार को लेकर सवाल करने के साथ ही उनसे विधानसभा चुनाव के दौरान किए गए कार्यों का विवरण भी मांगा जाएगा।
इन जिलों में हो सकता है बदलाव
वहीं जिन जिला इकाइयों में बदलाव होने की बात कही जा रही है उनमें जयपुर शहर, जयपुर देहात और अलवर शहर भी शामिल हैं। दअरसल जयपुर शहर अध्यक्ष प्रताप सिंह खाचरियावास, जयपुर देहात अध्यक्ष राजेंद्र यादव और अलवर जिलाध्यक्ष टीकाराम जूली गहलोत सरकार में मंत्री बने हैं। ऐसे में व्यस्ता के चलते इन जिलों में अध्यक्षों को बदला जा सकता है।

स्वाइन फ्लू का कहर बरकरार दो मरीजों की मौत, तीन और पॉजिटिव मिले

राजस्थान के कई जिलों सहित उदयपुर संभाग में भी स्वाइन फ्लू का कहर बना हुआ है। रविवार को एमबी अस्पताल के स्वाइन फ्लू वार्ड में अंबामाता निवासी 45 वर्षीय किशन और छोटी सादड़ी (प्रतापगढ़) निवासी 45 वर्षीय तखतमल की मौत हो गई।
चार दिन में तीन रोगियों की मौत हो चुकी है।एमबी अस्पताल अधीक्षक डॉ. लाखन पोसवाल ने बताया कि तखतमल को परिजन काफी देर बाद शनिवार को लेकर आए थे। उसके फेफड़े निमोनिया से पूरी तरह संक्रमित हो गए थे। इससे एक दिन पहले किशन को भर्ती कराया गया था। वह किडनी रोगी था। इस बीच तीन मरीजों में फ्लू की पुष्टि हुई है। इनमें शहर के मोती मगरी निवासी 13 वर्षीय किशोर, झाड़ोल निवासी 27 वर्षीय युवती और प्रतापगढ़ की 28 वर्षीय महिला शामिल हैं। तखतमल की मृत्यु के बाद पॉजिटिव रिपोर्ट आई। बता दें कि इससे पहले प्रतापगढ़ में छोटीसादड़ी के सुबी निवासी 69 वर्षीय रोगी गरवर सिंह, चित्तौड़गढ़ की 23 वर्षीय असीरा, 40 साल की ललिता, चित्तौड़ के 42 वर्षीय खेमराज, उदयपुर के मल्लातलाई निवासी 65 साल के प्रकाश और 27 सितंबर को अंबामाता निवासी 50 वर्षीय प्रकाश, उदयपुर में टेकरी निवासी 45 वर्षीय भुवनेश सहित नौ मरीजों की स्वाइन फ्लू से मौत हो चुकी है।

Homoeopathy Can prevent and cure swine flu – Dr. Kajal Verma

Technically, the term “swine flu” refers to influenza in pigs. Occasionally, pigs transmit influenza viruses to people, mainly to hog farmers and veterinarians. Less often, someone infected with swine flu passes the infection to others.

The human respiratory infection caused by a particular influenza virus H1N1

डॉ. काजल वर्मा

strain — popularly known as swine flu — was first recognized in spring 2009. A few months after the first swine flu cases were reported, rates of confirmed H1N1-related illness were increasing in much of the world. And nao also constantly cases are being diagnosed again in 2019.

Causes-Influenza viruses infect the cells lining your nose, throat and lungs. The virus enters your body when you inhale contaminated droplets or transfer live virus from a contaminated surface to your eyes, nose or mouth.

You can’t catch swine flu from eating pork.

Symptoms
H1N1 flu signs and symptoms in humans are similar to those of other flu strains:

· Fever (but not always)

· Cough

· Sore throat

· Runny or stuffy nose

· Watery, red eyes

· Body aches

· Headache

· Fatigue

· Diarrhea

· Nausea and vomiting

H1N1 flu symptoms develop about one to three days after you’re exposed to the virus.

Risk factors
If you’ve traveled to an area where many people are affected by swine flu (H1N1 flu), you may have been exposed to the virus, particularly if you spent time in large crowds.

Swine farmers and veterinarians have the highest risk of true swine flu because of their exposure to pigs.

Complications

Influenza complications include:

· Worsening of chronic conditions, such as heart disease and asthma

· Pneumonia

· Neurological signs and symptoms, ranging from confusion to seizures

· Respiratory failure

HOMOEOPATHIC REMEDIES

In Homoeopathy there is a concept called Genus Epidemicus . This means is there is an epidemic and you take the symptoms of say 15 ailing people of an area , you will notice a common trend, based on that you give medication…. for the symptoms this medication then, if given to people of that area, can act as preventive medicine.

Some of the important remedies are given below-

Arsenic alb ,influenzinum ,
Rhus tox , bryonia ,merc sol , Eupatorium perf, gelsemium etc

The following measures also help prevent swine flu (H1N1 flu) and limit its spread:

Stay home if you’re sick  If you have swine flu (H1N1 flu), you can give it to others. Stay home for at least 24 hours after your fever is gone.

Wash your hands thoroughly and frequently Use soap and water, or if they’re unavailable, use an alcohol-based hand sanitizer.

Contain your coughs and sneezes Cover your mouth and nose when you sneeze or cough. To avoid contaminating your hands, cough or sneeze into a tissue or the inner crook of your elbow.

Avoid contact Stay away from crowds if possible. And if you’re at high risk of complications from the flu — for example, you’re younger than 5 or you’re 65 or older, you’re pregnant, or you have a chronic medical condition such as asthma — consider avoiding swine barns at seasonal fairs and elsewhere.

Reduce exposure within your household If a member of your household has swine flu, designate only one household member to be responsible for the ill person’s personal care

Smt. Maneka Sanjay Gandhi confers National Awards to Anganwadi Workers for Exceptional Achievements under ICDS Scheme

Hindustan Zinc Nand Ghar Anganwadi workers received the Award for their service in the field of child development and related areas…

 We are pleased to inform that Hon’ble Union Minister for Women & Child Development – Smt. Maneka Sanjay Gandhi has conferred two anganwadi workers  – Ms. Rukmani Bhoi from Tilakheda Nand Ghar, Udaipur and Ms. Vimla Kunwar from Nayakheda Khushi Anganwadi Centre with ‘National Awards for Exceptional Achievements for the year 2017-18’ on 7th January, 2019 in New Delhi.

This award has been presented to 97 Anganwadi Workers (AWWs) for Exceptional Achievements for the year 2017-18 in the presence of Minister of State for Ministry of Women & Child Development – Dr. Virendra Kumar and Secretary, Ministry of Women & Child Development – Mr. Rakesh Srivastava. This annual award is given to motivate the Anganwadi Workers and to recognize their exemplary service in the field of child development and related areas under the ICDS Scheme. The Award at the National Level comprises of a cash prize of Rs. 50,000 and a citation and state Level award comprises of a cash prize of Rs. 10,000 and a citation.

As per guidelines, National Level awards to AWWs are given to the awardees nominated by States/UTs out of the State/UT Level awardees. The number of nominations of AWWs at National Level depends on the size of the State/UT and operational ICDS Projects. The number of awards has also been doubled. The nominations received from the States/UTs were screened and recommended by a Screening Committee headed by Secretary, MWCD. The selection of awardees was made by the Selection Committee headed by Hon’ble Minister for Women & Child Development.

With focus on Child Care – Nand Ghar & Khushi, Education – Shiksha Sambal, Unchi Udaan & Jeevan Tarang, Sustainable Livelihoods – Hindustan Zinc Mining Academy & Samadhan, Women Empowerment – Sakhi, Sports – Zinc Football Academy, Health – Vedanta Hindustan Zinc Heart Hospital & Health Camps, water & sanitation, culture, environment and community development including community assets creation, the company is touching the lives of over 500,000 rural communities in Rajasthan.

सोहराबुद्दीन “फर्जी एंकाउन्टर” मामले में, अमित शाह की मुश्किलें फिर बढ़ सकती है .


उदयपुर पोस्ट । भारतीय जनता पार्टी अध्यक्ष अमित शाह गुजरात में 2005 में सोहराबुद्दीन शेख की फर्जी मुठभेड़ में हुई हत्या के मामले में एक बार फिर परेशानी में फंस सकते हैं। हालांकि उन्हें 2014 में बरी कर दिया गया था और मुम्बई की एक अदालत ने पिछले माह इस केस के सभी 22 आरोपियों को भी दोषमुक्त कर दिया था, लेकिन शाह का नाम सुप्रीम कोर्ट द्वारा सार्वजनिक की गई रिपोर्ट में आया है। यह जांच रिपोर्ट पूर्व न्यायाधीश जस्टिस एच.एस. बेदी ने तैयार की है।
सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व न्यायाधीश जस्टिस एच.एस. बेदी की अध्यक्षता वाली मॉनिटरिंग अथॉरिटी की गत वर्ष 26 फरवरी को एक बन्द लिफाफे में प्राप्त हुई रिपोर्ट को जारी करने का आदेश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने 2012 में जस्टिस बेदी की अध्यक्षता में मॉनिटरिंग अथॉरिटी का गठन कर उसे गुजरात में 2002 से 2006 के बीच हुई सभी 22 फर्जी मुठभेड़ों की जांच करने के लिए कहा था और जिसमें सोहराबुद्दीन फर्जी मुठभेड़ हत्याकांड भी शामिल था।
हालांकि शाह को फिलहाल कोई परेशानी होने वाली नहीं है लेकिन चार सप्ताह बाद कुछ भी नहीं कहा जा सकता है। क्योंकि चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली 3 जजों की बैंचने यह उपलब्ध लगाते हुए कहा कि उसने अब तक बेदी रिपोर्ट स्वीकार नहीं की है और वह सभी संबंधित पक्षों को आपत्तियां दर्ज कराने का समय दे रहा है। कोर्ट ने रिपोर्ट स्वीकार करने या इसे अंतिम रिपोर्ट मानने के प्रश्न पर अगली सुनवाई चार हफ्तों बाद तय की है। चीफ जस्टिस के अतिरिक्त जस्टिसएल. नागेश्वर राव और जस्टिस संजय किशन कौल की बैंच ने गुजरात सरकार के रिपोर्ट को सार्वजनिक ना करने के अनुरोध को अस्वीकार कर दिया और आदेश दिया कि फर्जी मुठभेड़ों की जांच की मांग करने वाले याचिकाकर्ताओं के साथ साथ मीडिया को भी रिपोर्ट उपलब्ध करायी जाए।

बैंच ने राज्य सरकार के इस तर्क को सिरे से खारिज कर दिया कि याचिकाकर्ताओं से रिपोर्ट साझा करने से पूर्वाग्रह पैदा हो जाएगा। चीफ जस्टिस ने कहा कि कोर्ट ने जस्टिस बेदी से 8 पृष्ठ का नोट प्राप्त किया है तथा उन्होंने मॉनिटरिंग अथॉरिटी के सभी सदस्यों से विचार-विमर्श किया है। उनकी प्रतिक्रिया जानने के बाद चीफ जस्टिस ने कहा: यदि जस्टिस बेदी रिपोर्ट देने के लिए अधिकृत हैं, जो कि हम समझते हैं। कि वे हैं, तो राज्य इस पर कैसे आपत्ति कर सकता है। शीर्ष अदालत ने स्वर्गीय वयोवृद्ध पत्रकार बी.जी. वर्गीस, जिनका दिसम्बर 2014 में निधन हो गया था, जाने-माने गीतकार जावेद अख्तर और दिल्ली की सामाजिक कार्यकर्ता शबनम हाशमी द्वारा 2007 में दायर की गई याचिका के मद्देनजर उक्त अथॉरिटी का गठन किया था और यह जांच करने को कहा था कि क्या मुठभेड़ों के तरीके से ऐसा लगता है कि इसमें अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को आतंकवादी मानकर निशाना बनाया गया है। सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त जज बेदी की अध्यक्षता वाले पैनल ने गुजरात में 2002 और 2006 के बीच विभिन्न स्थानों पर हुई गोलीबारी से संबंधित साक्ष्यों का पुनर्मूल्यांकन किया था।
बैंच ने गुजरात सरकार के वकील सॉलीसिटर जनरल तुषार मेहता के रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं करने के दखल को निरस्त कर दिया। मेहता ने कहा था कि रिपोर्ट पर जिम्मेदारी की भावना से काम करने की आवश्यकता है। कोर्ट ने केस में लगातार स्थगन मांगने के लिए गुजरात सरकार की आलोचना करते हुए नोटिंग की कि किस प्रकार उसके वकील ने यह तर्क देकर अदालत से मामले में स्थगन लिए कि सॉलीसिटर जनरल कोर्ट में व्यस्त हैं। जस्टिस गोगोई ने कहा

“गुजरात राज्य मामले में बार-बार और बार-बार स्थगन नहीं मांग सकता। यदि सॉलीसिटर जनरल कोर्ट नम्बर एक में (चीफ जस्टिस कोर्ट) प्राथमिकता नहीं देते और किसी अन्य कोर्ट में जाना चाहते हैं तो यह उनका अपना निर्णय है, लेकिन उन्हें यहां के लिए कोई ना कोई प्रबंध करना होगा।”

रिपोर्ट की एक प्रति गुजरात सरकार को भी प्रत्युत्तर के लिए दी गई और उसका यह अनुरोध खारिज कर दिया गया कि रिपोर्ट को मीडिया की दृष्टि से बचाकर गोपनीय रखा जाए। गत सुनवाई में गुजरात सरकार ने यह कहकर रिपोर्ट पर आपत्ति उठाई थी कि जस्टिस बेदी ने मॉनिटरिंग अथॉरिटी के सदस्यों से विचार-विमर्श किए बिना रिपोर्ट प्रस्तुत की है। जस्टिस बेदी ने बैंच को दिए गए नोट में इस आरोप को नकारा यह स्पष्ट करते हुए कि वे रिपोर्ट को अंतिम नहीं मान रहे हैं और यदि कोई आपत्तियां हों तो उन्हें उठाने के लिएइसे केस के दोनों पक्षों से साक्षा कर रहे हैं, चीफ जस्टिस ने रिपोर्ट को साझा ना करने का गुजरात सरकार का अनुरोध निरस्त कर दिया और कहा कि इसने अपना काम शुरू कर दिया है।
कोर्ट ने हालांकि यह स्पष्टकिया कि “हमारे द्वारा स्वीकार करने के बाद ही रिपोर्ट प्रभावी मानी जाएगी।
। कोर्ट ने वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी द्वारा रिपोर्ट जारी करने के संबंध में उठाई गई इस आपत्ति को भी अस्वीकार कर दिया कि ऐसा करने से उस संभावित आरोपी के केस में पूर्वाग्रह की स्थिति बन जाएगी जिसकी वे पैरवी कर रहे हैं।

रिपोर्ट – जाल खंबाता-राष्ट्रदूत दिल्ली ब्यूरो

बाप ने मासूम बच्चों की इतनी पिटाई की कि बच्चों की म्रत्यु हो गयी।

उदयपुर पोस्ट। जाने लोगों को क्या होता जारहा है, दिल में डर या रहम तो मानो जैसे मर गया हो। लोगों की जान तो मानो इतनी सस्ती हो गयी है की कोई भी कही भी किसी की भी जान लेलेता है। कोई पराया नहीं अब तो अपने ही अपनों की जान के दुश्मन बन गए है।
राजस्थान के उदयपुर जिले में झाडोल गाँव की घटना दिल दाह;ला देने वाली है जिसमे एक पिटा ने अपने दो मासूम बच्चों को इतना पिटा की उनकी जान चली गयी। जानकारी के अनुसार झाड़ोल पुलिस थाना क्षेत्र की ग्राम पंचायत ओगणा के चोकलाबारा गांव में पिता द्वारा अपने दो बच्चों की पिटाई के बाद उनकी मृत्यु होने का मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार देर रात्रि को पिता ने अपने दो मासूम बेटा और बेटी की पिटाई की। पिटाई में बच्चों के गंभीर घायल होने पर उन्हें गुरुवार सुबह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ओगणा लाया गया, जहां पर इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। घटना के बाद आरोपि पिता फरार है। पुलिस थाना में मामला दर्ज किया गया है।