उदयपुर में पुलिस और हिस्ट्रीशीटर गोगा गैंग के बीच फायरिंग – गोगा के एनकाउंटर की अफवाह, लेकिन असल में हुआ फरार।

उदयपुर. फतहनगर के लदानी गांव में गुरुवार को पुलिस और हिस्ट्रीशीटर मुजफ्फर उर्फ गोगा गैंग के चार साथियों के बीच मुठभेड़ हुई। मुठभेड़ में दो अपराधी घायल हो गए जब की मुजफ्फर उर्फ़ गोगा व् एक और उसका साथी फरार हो गया। इधर शहर में गोगा के एनकाउंटर की अफवाह सोशल मीडिया पर चल रही है जबकि पुलिस ने अपने प्रेस नॉट में साफ़ किया कि गोगा फरार ह गया।
पुलिस जानकारी के अनुसार दो बाइक पर आए गोगा गैंग के चार सदस्यों को पुलिस ने घेर लिया तो गोगा ने पुलिस पर चार फायर किए। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने भी चार राउंड फायर किए, जिसमें गैंग के सदस्य सज्जननगर कच्ची बस्ती के मोहम्मद इमरान को गोली लगी।
बाइक से गिरने पर सविना के साजिद का पैर फैक्चर हो गया। गोगा और उसका साथी बड़ा मेवाती उर्फ इस्माइल फरार हो गए। पुलिस ने उनका कपासन तक पीछा किया लेकिन हाथ नहीं लगे।
फायरिंग में घायल साजिद और इमरान को पुलिस ने एंबुलेंस से एमबी हॉस्पिटल भेजा, जहां उसके परिजन और दोस्तों की भीड़ जमा हो गई। दोनों का देर रात तक उपचार चलता रहा।
इधर, इमरान के घायल होने की सूचना पर इमरान के पिता शकील एमबी हॉस्पिटल पहुुंचे और चिल्लाते रहे कि पुलिस ने मेरे और मेरे बेटे के साथ धोखा किया है।

पुलिस प्रेस नोट के आधार पर विस्तार से खबर :
जिला पुलिस अधीक्षक कुंवर राष्ट्रदीप ने बताया कि कुख्यात वांछित अपराधी मुज्जफर उर्फ गोगा की धरपकड़ के लिए थानाधिकारियों एवं एसटीएफ को निर्देश दिए थे. विगत दो वर्षो से गोगा अपनी गैंग के साथ कई गंभीर अपराधों में लिप्त रहा है. गत 19 सितंबर को थाना खेरोदा क्षेत्र में इसने साथियों के साथ कालू पिंजारा की गोली मारकर हत्या कर दी थी. गुरुवार शाम को पुलिस को सूचना मिली कि गोगा चार साथियों के साथ दो मोटर साइकिल पर भीलवाड़ा से उदयपुर की तरफ आ रहा है. इस पर स्पेशल टीम प्रभारी गोवर्धन सिंह भाटी मय टीम एवं भूपालपुरा सीआई हरेन्द्र सिंह सोदा मय टीम को रवाना किया. साथ ही वल्लभनगर वृत के सभी थानाधिकारियों को भी संभावित रास्तों पर धरपकड़ के निर्देश दिए.

उदयपुर से पहुंची टीम ने थानाधिकारी डबोक रविन्द्र प्रताप सिंह मय जाप्ता ने मावली चौराहे पर नाकाबंदी की एवं कांस्टेबल प्रहलाद एवं भंवरलाल की टीम को प्राईवेट कार से रैकी के लिए फतहनगर सीमा पर भेजा गया. चारों अपराधियों को देखने पर सूचना मावली चौराहे पर नाकाबंदी कर रही टीम को दी कि गोगा, बड़ा मेवाती, इमरान उर्फ इमू, एवं साजिद उर्फ सईद दो मोटर साइकिल पर उदयपुर की तरफ आ रहे है. हम उनका पीछा कर रहे है. इस पर चौराहे पर नकाबंदी कर रही पुलिस टीम फतहनगर की तरफ रवाना हुई. मावली से करीब नौ किलोमीटर पहुंचने पर लदानी गांव से कुछ आगे चारों अभियुक्त आते दिखाई दिए.

लदानी गांव के निकट चारों आरोपियों को पकड़ने के लिए पुलिस का जाब्ता रूका तो उन्होंने वापस फतहनगर की तरफ भागने का प्रयास किया. इस पर पीछा कर रहे कांस्टेबल प्रहलाद एवं भंवरलाल पर गोगा एवं बड़ा मेवाती ने जाने से मारने की नियत से 4 राउंड फायर किए. पुलिस ने भी अपनी आत्मरक्षा में 4 राउंड फायर किए जिनमें से गोली इमरान उर्फ इमू को लगी तथा साजिद उर्फ सईद का मोटर साइकिल से गिरने से पैर में फैक्चर हो गया. गोगा व बड़ा मेवाती फरार हो गए. इस घटनाक्रम को लेकर मावली थाने में चारों अपराधियों के विरूद्ध जान से मारने की नियत एवं राजकार्य में बाधा का प्रकरण दर्ज किया गया. दोनों घायल को हिरासत में लेकर प्राथमिक उपचार करवा कर एम.बी. हॉस्पीटल में भर्ती कराया गया है. फरार दोनों अपराधियों की तलाश जारी है.

सुप्रीम कोर्ट के तीन अहम् फैसले – आधार , आरक्षण और प्रसारण ,.. जानिये क्या है ?

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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को तीन अहम फैसले दिए। पहला अाधार की अनिवार्यता पर था। शीर्ष अदालत ने आधार की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा। कहा- ‘सरकारी योजनाओं के लाभ के लिए यह अनिवार्य रहेगा। हालांकि, स्कूलों में एडमिशन और बैंक खाता खोलने के लिए यह जरूरी नहीं है।’ दूसरा फैसला सरकारी नौकरी में प्रमोशन में आरक्षण का लाभ देने पर था। इस पर कोर्ट ने अपना 2006 का फैसला बरकरार रखते हुए कहा कि राज्यों को प्रमोशन में आरक्षण के लिए आंकड़ा जुटाने की जरूरत नहीं है। तीसरे फैसले में अदालती कार्रवाई की लाइव स्ट्रीमिंग को मंजूरी दी गई। कोर्ट का कहना था कि इससे पारदर्शिता आएगी।

आधार कहां जरूरी, कहां नहीं; इस पर सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश

  1. ‘‘सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए आधार जरूरी है। पैन कार्ड को लिंक करने और इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने के लिए आधार कार्ड जरूरी रहेगा।’’
  2. ‘‘शिक्षा ही हमें अंगूठे के निशान से दस्तखत की ओर ले गई। अब टेक्नोलॉजी हमें दस्तखत से दोबारा अंगूठे के निशान पर ले जा रही है, लेकिन स्कूलों में एडमिशन के लिए आधार को जरूरी नहीं किया जा सकता।’’
  3. ‘‘यूजीसी, नीट और सीबीएसई की परीक्षाओं के लिए आधार जरूरी नहीं है। अदालत की इजाजत के बिना किसी भी एजेंसी के साथ बायोमैट्रिक डेटा साझा न किया जाए।’’
  4. ‘‘बैंक खाता खोलने के लिए आधार कार्ड जरूरी नहीं है।’’
  5. ‘‘आधार एक्ट की धारा 57 रद्द की जाती है। निजी कंपनियां आधार कार्ड नहीं मांग सकेंगी।’’
  6. ‘‘मोबाइल फोन कनेक्शन या नया सिम कार्ड खरीदने के लिए आधार जरूरी नहीं है।’’
  7. ‘‘आधार नहीं दिखा पाने के चलते किसी भी बच्चे को किसी योजना के लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता।’’

 

डेटा की हिफाजत के लिए कानून बनाए सरकार :  जस्टिस सीकरी और सुप्रीम कोर्ट ने अपनी टिप्पणियों में कहा, “यह जरूरी नहीं है कि हर चीज सर्वोत्तम (बेस्ट) हो, कुछ अलग (यूनिक) भी होना चाहिए।” आधार हाशिए पर मौजूद समाज के तबके को सशक्त करने और उन्हें पहचान देने का काम करता है। आधार दूसरे आईडी प्रूफ की तुलना में अलग है, क्योंकि इसका डुप्लीकेट नहीं बनाया जा सकता। एक व्यक्ति को आवंटित हुआ आधार नंबर किसी दूसरे व्यक्ति को नहीं दिया जा सकता। केंद्र को डेटा की हिफाजत के लिए जल्द से जल्द कानून बनाने की जरूरत है। सरकार यह सुनिश्चित करे कि देश में किसी भी अवैध प्रवासी को आधार कार्ड आवंटित न हो।

फैसले से अलग जस्टिस चंद्रचूड़ की टिप्पणियां- आधार का डेटा डिलीट करें मोबाइल कंपनियां

  • जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने फैसले से अलग अपनी टिप्पणियों में कहा कि मोबाइल कंपनियों को ग्राहकों से लिया गया आधार का डेटा डिलीट कर देना चाहिए।
  • ‘‘आधार का डेटा संवेदनशील है। किसी थर्ड पार्टी या किसी वेंडर की तरफ से इसका दुरुपयोग होने का खतरा है।’’
  • ‘‘निजी कंपनियों को आप आधार के डेटा का इस्तेमाल करने देंगे तो वे नागरिकों की प्रोफाइल करेंगी और उनके राजनीतिक विचार जानने की कोशिश करेंगी। यह निजता का उल्लंघन है।’’
  • ‘‘क्या आप ये मानकर चल रहे हैं कि बैंक खाता खुलवाने वाला हर शख्स संभावित आतंकी या मनी लॉन्डरर है?’’
  • ‘‘आधार अपने मकसद में फेल हो चुका है। आज आधार के बिना भारत में रहना असंभव हो गया है और यह संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है।’’
  • ‘‘आधार एक्ट को मनी बिल के तौर पर संसद से पारित कराना संविधान के साथ धोखा है।’’

 

प्रमोशन में आरक्षण पर पुराना फैसला बरकरार

सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी नौकरियों में आरक्षण पर 2006 में दिए अपने फैसले पर दोबारा विचार करने से इनकार कर दिया। यह फैसला एम नागराज के मामले में दिया गया था। इसमें कहा गया था कि राज्य सरकारें कुछ शर्तों के साथ प्रमोशन में आरक्षण दे सकती हैं, लेकिन इसके लिए उन्हें संबंधित समुदाय के पिछड़ होने के आंकड़े देने होंगे। केंद्र का कहना था कि इसमें शर्तें बेवजह लगाई गई हैं। ऐसे में इसे सात जजों की बेंच के पास दोबारा विचार के लिए भेजा जाना चाहिए।

प्रमोशन में आरक्षण के लिए आंकड़ा जुटाने की जरूरत नहीं : चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुआई वाली पांच जजों की संविधान पीठ ने एकमत से फैसला सुनाया। बेंच ने कहा कि आरक्षण देने के लिए राज्य सरकारों को एससी-एसटी के पिछड़ेपन को बताने वाला संख्यात्मक आंकड़ा इकट्ठा करने की कोई जरूरत नहीं है। 2006 में पांच जजों की बेंच ने कहा था कि इन समुदायों के कर्मचारियों को पदोन्नत में आरक्षण देने से पहले राज्य सरकारी नौकरियों में उनके अपर्याप्त प्रतिनिधित्व और प्रशासनिक कार्यकुशलता के बारे में तथ्य पेश करेंगे।

 

लाइव प्रसारण को मंजूरी

सुप्रीम कोर्ट ने अदालती कार्यवाही के लाइव प्रसारण और वीडियो रिकॉर्डिंग को भी मंजूरी दे दी। कोर्ट ने कहा कि इसकी शुरुआत सुप्रीम कोर्ट से ही हो। इसके लिए नियम बनाएं जाएं। अदालती कार्यवाही के प्रसारण से न्यायिक व्यवस्था में जवाबदेही आएगी।

 

इन्फेक्शन दूर करने के लिए सूरज की किरणें बेस्ट होती हैं। इसी तरह लाइव स्ट्रीमिंग से न्यायिक कार्यवाही में पारदर्शिता आएगी। जनता को जानने का अधिकार मिलेगा -“सुप्रीम कोर्ट”

सरकार को आधार से 90 हजार करोड़ का फायदा

अरुण जेटली ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि यूनिक आइडेंटिटी नंबर (यूआईएन) को कानूनी समीक्षा के बाद ही स्वीकार किया गया था। इस अमल में लाने के बावजूद कांग्रेस यह नहीं जानती थी कि आधार से क्या होगा? भारत में 122 करोड़ लोगों के पास आधार कार्ड है। हमारा मानना है कि इससे सरकारी योजनाओं के हितग्राहियों के पहचान सुनिश्चित की जा सकती है और जाली हितग्राहियों को रोका जा सकता है। सरकार को इससे हर साल 90 हजार करोड़ का फायदा हो रहा है।

हिन्दुस्तान जिंक एवं सृजन द स्पार्क का दो दिवसीय ’’जष्न-ए-परवाज’’ कार्यक्रम 28 से

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उदयपुर । सृजन द स्पार्क संस्था द्वारा हिन्दुस्तान जिंक के सहयोग से इस वर्ष आयोजित होने वाले ‘‘एक सकून जष्न ए परवाज़‘‘ कार्यक्रम के बारे में यषद भवन में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए हिन्दुस्तान ज़िंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुनील दुग्गल ने कहा कि हिन्दुस्तान जिंक कला और संगीत को बढ़ावा देने के लिए हमेषा आगे रहा है। वल्र्ड म्यूजिक फेस्टिवल, स्मृतियां और सृजन द स्पार्क जैसे राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन हिन्दुस्तान जिं़क के सहयोग से किया जाता रहा है। उन्होंने आह्वान किया कि लेकसिटी की पहचान यहां की संस्कृति के साथ-साथ संगीत के लिए विश्वविद्यालय से हो जिसके लिए सभी कलाप्रेमी संस्थाएं मिल कर कार्य करें जिससें कला, कलाकारों और कार्यक्रम एवं उदयपुर को विष्वस्तरीय पहचान मिल सकें। उन्होंने कहा कि हावर्ड जैसी यूनिवर्सिटी संगीत के लिए उदयपुर में हो जोे कि विश्व में उदयपुर को प्लेटफार्म प्रदान करें।

हिन्दुस्तान जिं़क के मुख्य वित्तिय अधिकारी अमिताभ गुप्ता ने कहा कि हिन्दुस्तान जिंक कला और साहित्य के लिए अपनी जिम्मदारी निभाने के लिए हमेशा से अग्रणी रहा हैं उन्होंने कहा कि जिस तरह जयपुर की पहचान लिटरेचर फेस्टिवल के लिए है उसी प्रकार उदयपुर संगीत का मुख्य केन्द्र बने।

देष के प्रसिद्ध संगीतकार आनन्द मिलिन्द को इस वर्ष हिन्दुस्तान जिं़ंक सृजन पुरस्कार 2018 से नवाजा जाएगा। इनके साथ ही राजस्थान सहित देष में साहित्य, संगीत एवं कला के लिये अपना बहुमूल्य योगदान देने वाले 7 अन्य व्यक्तियों एवं संस्थाओं को भी इस बार पुरस्कार से नवाज़ा जाएगा। 28 सितंबर को सायं 7.45 बजे, लोककला मंडल में आयोजित होने वाले एक सुकून जष्न ए परवाज कार्यक्रम में विख्यात गज़ल गायक पंकज उधास अपनी प्रस्तुती देगें।

सृजन द स्पार्क के अध्यक्ष पीएस तलेसरा ने बताया कि गज़ल, शास्त्रीय संगीत एवं गायन के जरियें भारतीय संस्कृति की धरोहर को संजोये रखने के उददे्ष्य से गठित की गई इस संस्था द्वारा स्थानीय कलाकारों को मंच प्रदान करने के लिए अनेक कार्यक्रम आयोजित किये गये हंै। संस्था द्वारा अब तक तीन बार राष्ट्रीय मुषायरा आयोजित किया गया जिसमें ख्यातनाम शायरों ने भाग लिया है। संस्था के 2015 में आयोजित पहले कार्यक्रम में प्रख्यात गायक रूपकुमार राठौड़ एवं दूसरे वर्ष 2016 में शैलेष लोढ़ा, 2017 में देष के प्रसिद्ध संगीतकार आनन्द जी को सम्मानित किया जा चुका है।

‘एक सुकून जष्न ए परवाज़‘ के सचिव अब्बास अली बंदूक वाला ने कहा कि हिन्दुस्तान ज़िंक सृजन अवार्ड हिन्दुस्तान जिं़क के सहयोग से दिया जाता है जिसमें एक लाख रूपये की राषि दी जाती है जो इस वर्ष संगीतकार आनंद मिलिन्द की प्रसिद्ध जोड़ी को प्रदान किया जाएगा। गत वर्ष की भांति इस वर्ष भी साहित्य कला एवं संगीत के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले लोगों एवं संस्थाओं कला प्रेरक अवार्ड दिये जा रहे हैं जिनमें सृजन आमीर खुसरों अवार्ड नई दिल्ली के गालिब इंस्टीट्यूट को, सृजन वीडी पालुस्कर अवार्ड चित्तौडगढ़ की मीरा कला संस्थान, सृजन खेमचंद प्रकाश अवार्ड दुबई के कस्तुब पिंगल को, सृजन औंकारनाथ ठाकुर अवार्ड मुबंई के पण्डित भवदीप जयपुरवाले, सृजन कोमल कोठारी अवार्ड उदयपुर के रियाज़ ए तहसीन, जावरा मध्यप्रदेश के मास्टर मदन अवार्ड अहमद रज़ा को दिया जाएगा।

कार्यक्रम संयोजक जीआर लोढ़ा ने प्रेसवार्ता में सृजन द स्पार्क द्वारा संगीत के लिए शुरू की जाने वाली अकादमी एवं योजना के बारे में जानकारी दी।

‘‘सृजन द स्पार्क’’ ‘‘एक सुकून जष्न ए परवाज़ 2018‘‘ की अध्यक्षता हिन्दुस्तान जिं़क के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री सुनील दुग्गल ने की। पे्रसवार्ता में हिन्दुस्तान जिं़क के हेड कार्पोरेट अफेयर्स प्रवीण कुमार जैन, सृजन द स्पार्क के सदस्य उमेश मनवानी, अन्य पदाधिकारी सहित हिन्दुस्तान जिं़क के अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में प्रवेष निःषुल्क परंतु निमंत्रण पत्र द्वारा होगा।

हिन्दुस्तान जिं़क के हेड कार्पोरेट कम्यूनिकेषन पवन कौषिक ने बताया कि हिन्दुस्तान जिं़क सामाजिक कार्यक्रमों में अपनी पूर्ण सहभागिता के साथ ही अपनी संस्कृति एवं सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने के लिए अग्रसर रहा है जश्ने परवाज़ का चैथा संस्करण इस ओर अगला कदम है।

Manthan – Do not burn plastic, Instead recycle them

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There always has been a view point that burning plastic helps us in the reduction of waste and this is a reason that about 12% (756 Million Metric Tonnes) of plastic waste generated in this world is burnt. However, have we ever wondered the hazardous impact that plastic burning has?

Burning of plastic waste in an open field is a major source of air pollution and is dangerous to human & environment health. When burnt gas like Carbon Monoxide, Dioxins and Furans are released into the air. Scary is that studies have linked Dioxins and Furans to cancer and respiratory diseases.

Interestingly, Plastic bags and bottles are the most common type of plastic that are burnt. Gases releases after burning of plastic may increase risk of heart disease, worsen respiratory illnesses – asthma & emphysema, causes rashes, nausea or headaches, damages the nervous system, kidney, liver and reproductive systems in the body. Dioxins tend to settle on crops and waterways eventually leading to the food we consume. As per the estimate by Central Pollution Control Board (CPCB), the plastic consumption in India, is 8 million tons per annum and about 5.7 million tons of plastic is converted into waste annually.

According to National Environmental Engineering Research Institute, open burning of plastic waste emits dioxins and furans that are estimated to be 8656.55 gTEQ (Grams of Toxicity Equivalency Quantity) annually. 44.65% of Kerala’s population is involved in burning of plastic and so, The Kerala High Court has banned burning of plastic in June 2018, in public spaces as it adds to 29.4% of Air pollution. In December 2016, The National Green Tribunal banned burning of plastics on the flood plains of river Ravi as it leads to severe water and air pollution Himachal Pradesh.

Burning of plastic also releases more greenhouse gases into the atmosphere causing climate change. This also affects the wildlife as these pollutants cause deformed offspring, reproductive system failure, immune related diseases and neurobehavioral effects in them.

Burning plastic is one of the most serious environmental disasters today. There is always a decision that brings change. This is not something that cannot be solved.

“Manthan”, an initiative by Hindustan Zinc, is a series of stories to bring awareness about various concerns like air pollution, water pollution, plastic pollution, noise pollution, climate change, road safety and wildlife protection.

“THANKS TO SAKHI PROJECT, NOW I HAVE MY OWN KIRANA STORE…”, NEEMA DEVI

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The empowered women empower families and in turn empower the society. Same goes with the story of 34 years old Neema Devi.

Neema Devi in spite of belonging to a small village Chapri, has completed her education till 10th standard. This shows not only her hard-work but her dedication to excel in life. Neema’s husband is a tailor and earns nearly 600-800 per day. Neema stays in a joint family with her 3 daughters and taking care of such a large family has always been a great responsibility.

Determined to help her husband and family, Neema was firm to do something of her own. Her determined and focused approach led her to look for options that could bring stability in her life. It is then she became a member of ‘Dashmata’ Self Help Group (SHG) under Hindustan Zinc Sakhi Project.

Neema has now been associated with Sakhi project for more than a year. With the aim to start something of her own, she took a loan of Rs. 10,000/- from her Village Organization (VO).

Today Neema has opened her own Kirana store.  With the help of her shop, she is earning Rs. 3,000 – 4,000 every month. All this while her family, especially her 3 daughters have supported her in setting up her own business.

“Hindustan SHG has given me hopes to grow further and help my family. I don’t have to worry about the economic conditions of my family anymore…”, Neema said, smiling with moist eyes.

The women of the SHGs in her village, plan and form groups, when they need to file petitions and appeals directly to the Sarpanch. This shows their escalated empowerment levels.

Sakhi Project has helped Neema in living a much more confident, living a happy & dignified life.

The Sakhi program promotes sustainable women run grassroots institutions like Self Help Groups (SHGs) to act as vehicles for empowerment. The program is geared to mobilize rural women and invest in developing their capacities around leadership, skill development, savings and entrepreneurship.

खाकी और खादी आमने सामने, गृहमंत्री पड़े पशोपेश में – जनता हुई पुलिस के साथ कहा नियम सबके लिए .

उदयपुर।  शुक्रवार की रात सूरजपोल चौराहे पर समय सीमा के बाद कवी सम्मलेन रुकवाने गए पुलिस अधिकारियों और भाजपा नेताओं में धक्का मुक्की हो गयी। जहाँ एक तरफ घटना को लेकर भाजपा नेता आक्रोशित है और गृहमंत्री से सूरजपोल थाना अधिकारी को हटाने की मांग कर रहे है वहीँ पुलिस 10 बजे बाद तेज आवाज़ में माइक नहीं बजाने को लेकर हाईकोर्ट के आदेशों की पालना करवाने का हवाला दे रही है। घटना के विडियो हुए वायरल जनता का मानना थाना अधिकारी ने कुछ गलत नहीं किया नियम सबके लिए बराबर चाहे कोई नेता ही क्यूँ ना हो.
जानकारी के अनुसार शुक्रवार की रात सूरजपोल चौराहे पर गणेश उत्सव के अंतर्गत हिन्दू महा सभा टाइगर फ़ोर्स द्वारा कवी सम्मलेन का आयोजन किया जा रहा था। कवी सम्मेनल में भाजपा जिलाध्यक्ष दिनेश भट्ट मंडल अध्यक्ष चंचल अग्रवाल सहित कई भाजपा नेता भी मोजूद थे। 11 बजे के बाद कवी सम्मलेन में सूरजपोल थाना अधिकारी आदर्श कुमार ने आयोजनकर्ता श्याम बाबा से कवी सम्मलेन बंद करने को कहा। एक बार कहने पर जब साउंड और कवि सम्मेलन  बंद नहीं हुआ तो थाना अधिकारी आदर्श कुमार ने कड़ाई से कवी सम्मलेन को बंद करने को कहा। कवी सम्मलेन में मोजूद भाजपा जिलाध्यक्ष दिनेश भट्ट ने बिच में बोला तो थाना अधिकारी ने नियमों का हवाला देते हुए कह दिया की नियम नहीं है कि ११ बजे बाद भी साउंड बजे। जिलाध्यक्ष को मना करने के बाद मोजूद भाजपा नेता और कार्यकर्ताओं ने अपनी प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया कि जिलाध्यक्ष को एसा कैसे कह दिया . नियमों के आधार पर देखा जाए तो थाना अधिकारी आदर्श कुमार कही गलत नहीं थे. लेकिन जिलाध्यक्ष दिनेश भट्ट को मना कहना मोजूद भाजपा पदाधिकारियों को आखर गया और एक तरह से खादी और खाकी आमने सामने हो गए। एक तरफ थाना अधिकारी आदर्श कुमार बंद करवाने पर अड़े रहे वहीँ भाजपा नेता अपनी तोहीन समझ कवी सम्मलेन को चलाने पर आमादा रहे। धीरे धीरे सूरजपोल चौराहा पुलिस छावनी में तब्दील हो गया और कई अधिकारी मोके पर पहुच गए। एक बार तो एसा तक आगया कि पुलिस अधिकारियों के साथ भाजपा नेता और कार्यकर्ताओं ने धक्का मुक्की तक कर डाली।
शनिवार सुबह घटना के विडियो तेजी से शहर भर में वायरल होते रहे। भाजपा समर्थक एक तरफ भाजपा और सत्ता की तोहिन बता रहे है वही दूसरी तरफ आम शहरवासी नियम सबके लिए बराबर कह वीडियो वायरल कर रहे है।
पुलिस और नेताओं की यह लड़ाई शहर विधायक और राज्य के गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया के पास भी पहुची है।  कटारिया ने जांच के बाद कारवाई करने को कहा है।  इधर भाजपा नेता जिलाध्यक्ष दिनेश भट्ट के साथ थाना अधिकारी द्वारा दुर्वय्वार की बात को लेकर आक्रोशित है और कारवाई करने पर अड़े हुए है। वहीँ दूसरी तरफ भाजपा का दूसरा धड़ भैरोसिंह शेखावत मंच पुलिस अधिकारियों के पक्ष में आगया है और उनका कहना है कि चाहे कोई भी हो नियम सबके लिए बराबर है।
इस सारे मामले को लेकर सबसे ज्यादा पशोपेश जैसी स्थिति गृहमंत्री और जगत भाईसाहब कटारिया जी की है। वह न तो अपने विभाग के अधिकारी पर कार्रवाई कर सकते हैं न ही अपनी पार्टी के पदाधिकारी के अपमान को दरकिनार। वैसे इस मामले में गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जन सुनवाई के दौरान पार्टी के कुछ लोगों की ओर से लिखीत शिकायत पत्र जरूर दिया है। बिना पढ़े किसी शिकायत पर किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती। शिकायत पर पहले जांच करवाई जाएगी और जिस किसी की ओर से गलती हुई है उस को दंड दिया जाएगा।
वीडियो हमने भी देखे और घटना के वक़्त मोजूद लोगों से बात भी की . देखा जाए तो थाना अधिकारी नियमों के हिसाब से कही भी गलत नहीं, लेकिन अगर थोड़ी रियायत देदी जाती तब भी चल सकता था . दूसरी तरफ यह भी देखा जा रहा है कि कवी सम्मलेन का संचालक श्याम बाबा का भी रिकार्ड इतना अच्छा नहीं कि पुलिस रियायत दे कर कोई मोका दे ,.. भाजपा के जिलाध्यक्ष सहित अन्य नेताओं को भी यह सब बात सोचनी चाहिए और इसे मोके पर जब कि हर तरफ सत्ता आपकी है तो शालीनता बरतते हुए सारी बातों को ध्यान में रख मामले को ठंडा करना चाहिए ताकि जो पुलिस जनता की सुरक्षा में रात भर जागती रहती है उसका मनोबल भी बना रहे .
फिल्म स्पाइडरमैन का एक डायलोग है जब साधारण युवा के पास स्पाइडरमैन वाली ताक़त आजाती है तब उसके अंकल कहते है .
ताकत जिसके पास होती है उसकी जिम्मेदारियां बढ़ जाती है,.. उसको हमेशा लोगों का ध्यान रखना पड़ता है लेकिन यहाँ सब कुछ उलटा है ,.. सत्ता के साथ साथ ताक़त आती है और ताक़त आते ही नेता इस ताक़त के नशे में मदमस्त हो जाते है और अपने आगे किसी को कुछ नहीं समझते . शायद यह घटना ऐसी ही ताक़त की परिणिति है .

Hindustan Zinc’s vision is to develop 10,000 football players in Rajasthan”, Sunil Duggal, CEO-Hindustan Zinc

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Hindustan Zinc officially launched Project “Zinc Football” today to provide professional football coaching to the rural children of Rajasthan who are in the age group of 5-12 years. Hindustan Zinc has built a world class residential Football Academy at Zawar near Udaipur in Rajasthan with state-of-the-art facilities.

 Logo of Zinc Football was also launched by Sunil Duggal, CEO-Hindustan Zinc, President-Vedanta Football – Annanya Agarwal, IG of Udaipur – Vishal Bansal and Collector of Udaipur – Bishnucharan Mallick.

 Hindustan Zinc Football Academy is India’s first technology based Academy. The Academy would provide international standard training facilities with ‘F-Cube’ Training and Assessment Technology, the world’s first intelligent and interactive device for football and fitness training, skill assessment, cognitive development, practice and also factor in important parameters like skills, nutrition, physical, psychological and mental development. 

 The Zinc Football Academy will also be equipped with 3 FIFA Quality Turf and also a 7v7 size Natural Grass Ground for training and practice equipped with Team Dugouts.

 The scouting of Football talent was done by Hindustan Zinc by going in the deep rural areas. 4500 children were scanned and finally 30 children have been shortlisted in the first batch which are fully supported by Hindustan Zinc who have also taken the responsibility of giving scholarships to all the students for their formal education also. Zinc Football intends to train over 2000 passionate boys and girls by fully skilled football trainers through 64 community football centres – Zinc Football Schools, across Rajasthan. 

 Speaking on the launch, Sunil Duggal, CEO – Hindustan Zinc said, “We at Hindustan Zinc are committed for working towards projects that support the public at large. With the launch of Zinc Football, we wish to establish Rajasthan on Indian football map, and eventually take our country to greater heights in sports. Our vision is to develop 10,000 football players in Rajasthan and in the next 3 years and emerge amongst one of the top 25 positions in football across the world.”

 “ I was very excited to see Zawar’s ‘Kumar Mangalam Football Tournament”. I saw thousands of people watching matches with great interest. This is when I thought we should develop a full-fledged football academy and scout young talent and give them world’s latest training and other facilities” Sunil Duggal said.

 Annanya Agarwal, President, Vedanta Football said, “Being a footballer myself, I am very passionate about football. India has a lot of talent but very little infrastructure. There is definitely a gap between what we need and what we have. This needs to be bridged. Our aim is to put India firmly on the world footballing map and see India among the top-10 teams in Asia and top-25 in the world within the next five years.”

 Vishal Bansal, IG-Udaipur said, “I would like to congratulate all the young talented students of Hindustan Zinc Football Academy. I am pleased to see such latest technology being implemented to train the young talent.”  Bishnucharan Mallick, Collector, Udaipur said, “Hindustan Zinc has set a benchmark for other corporates as it is working with a lot of vigor and passion in different spheres. I wish them all the best.”

 Hindustan Zinc has partnered with ‘The Football Link’, one of India’s premier football development organizations with professional expertise in organizing large-scale football initiatives for developing grassroots football in the country. The Founder of ‘The Football Link’ – Chetan Mishra spoke about the ecosystem of sports which is very different in India and abroad. He said, “There is a lot of talent observed in Rajasthan with high endurance, fitness level and speed amongst the children. Our dream is to see young talented individuals play in the world cup.”

 Hindustan Zinc is India’s only and world’s leading integrated Zinc-Lead-Silver producer. The Company has been associated with sports and has been promoting sportsmen for almost 4 decades when the company made its football stadium at Zawar in Rajasthan in 1976. Since last 40 years, National Football Tournaments are being organized every year at Zawar Stadium. The company has also supported several athletes in the past who have brought numerous laurels for the country in international events.

सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामले में पूर्व इंस्पेक्टर का आरोप, मुझे चुप कराने की कोशिश की जा रही है

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गुजरात के चर्चित सोहराबुद्दीन शेख, कौसर बी और तुलसीराम प्रजापति एनकाउंटर मामले की जांच करने वाले गुजरात पुलिस के रिटायर्ड इंस्पेक्टर का कहना है कि सरकार द्वारा उन्हें इस मामले में कोर्ट से दूर रखने की भरसक कोशिश की जा रही है.

13 साल पहले वसंत लालजीभाई सोलंकी को सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर की जांच का जिम्मा सौंपा गया था, जहां उन्होंने इसे एनकाउंटर को फ़र्ज़ी बताया था और अपने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को इन न्यायेतर हत्याओं का जिम्मेदार बताया था.

गुजरात के इस चर्चित एनकाउंटर मामले में मुख्य आरोपी के रूप में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह समेत गुजरात पुलिस के कई आला अधिकारियों के नाम थे.

इस मामले की सुनवाई मुंबई की विशेष सीबीआई अदालत में चल रही है. दिसंबर 2014 में अदालत ने अमित शाह को इस मामले में बिना किसी जांच के आरोपमुक्त कर दिया था. बीते साल नवंबर से चल रही सुनवाई में मामले के ढेरों गवाह अब तक अपने पहले दिए बयान से पलट चुके हैं.

द वायर  में छापी खबर के अनुसार  सोलंकी ने  कहा कि सरकार की ओर से उन्हें कोर्ट से दूर रखने की भरसक कोशिशें की जा रही हैं. उन्होंने कहा कि सरकार हर वो तरीका इस्तेमाल कर चुकी है, जिससे वे कोर्ट तक न पहुंच पाएं.

उनका कहना है कि इस संबंध में हुआ हालिया प्रयास राज्य सरकार द्वारा अचानक उनको मिली सुरक्षा हटाना है. उन्होंने बताया कि 2009 में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद उनके सुरक्षा प्रदान की गयी गयी थी, जिसे बीती 18 जुलाई को बिना किसी सूचना के हटा लिया गया. उन्होंने कहा कि बिना सुरक्षा के वे अहमदाबाद से मुंबई नहीं जा सकते.

उन्होंने कहा, ‘मुझे किसी कारण से ही सुरक्षा दी गयी थी. अगर किसी जज की अचानक मौत हो सकती है, तो मैं तो बस एक रिटायर्ड इंस्पेक्टर हूं. सरकार और पुलिस इस मामले के सभी आरोपियों को क्लीन चिट दिलवाने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं. वे हत्या भी कर सकते हैं.’

सोलंकी का इशारा सीबीआई अदालत के जज बृजगोपाल हरकिशन लोया की तरफ था, जिनकी मौत पर बीते साल उनके परिजनों की ओर से कई सवाल उठाये गए थे. अपनी मृत्यु के समय जज लोया सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर मामले की सुनवाई कर रहे थे. जज लोया को मिली सिक्योरिटी उनकी मृत्यु से कुछ समय पहले ही हटाई गई थी.

सोलंकी का आरोप है कि उनके सुरक्षाकर्मियों को हटाए जाने को लेकर सरकार की तरफ से कोई सूचना नहीं दी गयी थी और इस बारे में राज्य के पुलिस विभाग, सुप्रीम कोर्ट सहित विभिन्न अधिकारियों को लिखे गए 8 पत्रों का भी उन्हें कोई जवाब नहीं दिया गया.

उन्होंने द वायर  को बताया, 2009 में, जिस साल मैं रिटायर हुआ, के बाद दो बंदूकधारी कॉन्स्टेबल 24 घंटे मेरे साथ रहते थे, लेकिन बीती 18 जुलाई से वे नहीं आये, न ही मुझे राज्य सरकार द्वारा इसकी कोई वजह ही बताई गयी.

उनका कहना है कि वे इस बारे में गुजरात के डीजीपी, गुजरात सीआईडी के डीआईजीपी, गुजरात सीआईडी-आईबी के डीआईजीपी, राज्य सरकार के गृह मंत्रालय, गुजरात हाई कोर्ट, सीबीआई के डीआईजी, इस मामले की सुनवाई कर रहे विशेष सीबीआई जज एसजे शर्मा और सुप्रीम कोर्ट को पत्र लिख चुके हैं, लेकिन अब तक कहीं से कोई जवाब नहीं मिला.

वे कहते हैं, ‘मैं अपनी और अपने परिवार के सुरक्षा के बारे में चिंतित हूं. मैं सबको लिख चुका हूं, मुझे उम्मीद थी कि वे कुछ कहेंगे लेकिन सब चुप्पी साधे रहे. 2 महीने बाद 6 सितंबर को मुझे सीबीआई की विशेष अदालत के जज एसजे शर्मा की ओर से 21 सितंबर को कोर्ट के समक्ष पेश होने का नोटिस मिला. यह साफ था कि मेरी सिक्योरिटी क्यों हटाई गयी.’

सोलंकी का दावा है कि राज्य सरकार उन्हें कोर्ट के समक्ष पेश होने से रोकने के लिए ऐसा किया गया. विभिन्न विभागों को लिखे गए पत्रों वे कहते हैं, ‘मुझे डर है कि मुझे और मेरी पत्नी पर भीड़ का हमला हो सकता है. यह एक हाई-प्रोफाइल केस है और मैं एक महत्वपूर्ण गवाह हूं.’

सोलंकी का यह भी कहना है कि ठीक तब, जब मामले की सुनवाई चल रही है और उन्हें पेश होना है, उनकी सुरक्षा हटा देना परेशान करने वाला है. उनका यह भी कहना है कि मामले में उनकी गवाही काफी महत्वपूर्ण होगी और ‘डूबते जहाज’ जैसी स्थिति में आ गए इस मामले को बचा सकती है.

हालांकि द वायर  से उन्होंने कहा कि जब तक उन्हें उचित सुरक्षा नहीं दी जाती, सुनवाई के लिए अहमदाबाद से मुंबई पहुंचना मुमकिन नहीं होगा. उन्होंने यह भी कहा, ‘गवाह की सुरक्षा और बिना किसी डर के अदालत के सामने गवाही सुनिश्चित करना सरकार और न्यायपालिका की जिम्मेदारी है.’

सोलंकी ने यह भी दावा किया कि जांच के दौरान उन्होंने ऐसे सबूत इकठ्ठा किये थे, जो इस मामले में गुजरात पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी डीजी वंज़ारा और उनके साथियों को सीधी संलिप्तता को साबित करते थे.

उन्होंने यह भी आरोप भी लगाया कि इस मामले की जांच का नेतृत्व कर रही आईपीएस अधिकारी गीता जौहरी, उन अधिकारियों में से एक थीं, जिनसे नवंबर 2006 में अमित शाह ने कथित तौर पर संपर्क साधकर वंज़ारा और राजकुमार पांडियन जैसे अधिकारियों के प्रति नरम रवैया बरतने को कहा था.

सोलंकी का आरोप है, ‘जौहरी मैडम ने मुझे अधिकारियों के प्रति नरम रहने को कहा और मेरी बनाई जांच रिपोर्ट में कई बिंदुओं में बदलाव करने को कहा था. नेताओं की बनाई एक साज़िश को पुलिसवालों ने अंजाम दिया और 3 बेगुनाह लोगों की जान ले ली गयी. मुझे खरीद लिया जाये, ऐसा सवाल ही नहीं उठता.’

पेसिफिक यूनिवर्सिटी और पेसिफिक इंस्टीट्यूट आॅफ मेडिकल साइंस के खिलाफ सीबीआई ने दर्ज किया मामला

उदयपुर. एमबीबीएस के प्रवेश में गड़बड़ी मामले में राजस्‍थान के तीन मेडिकल कॉलेजों के खिलाफ सीबीआई ने मामला दर्ज कर लिया है. इन कॉलेजों में उदयपुर का पेसिफिक यूनिवर्सिटी, पेसिफिक इंस्टीट्यूट आॅफ मेडिकल साइंस उदयपुर के साथ ही राजस्थान यूनिवर्सिटी ऑफ हैल्थ साइंस और निम्स मेडिकल कॉलेज शामिल है. इसके अलावा पेसिफिक यूनिवर्सिटी के खिलाफ भी अलग से मामला दर्ज किया है.

सूत्रों के अनुसार प्रवेश में जमकर धांधली की गई इसी के चलते अदालत ने धांधली में शामिल पेसिफिक इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस उदयपुर के प्रिंसिपल, पीसीपीएमटी 2015 अजमेर के कॉर्डिनेटर, राजस्थान एडमिशन बोर्ड के चेयरमैन पेसिफिक यूनिवर्सिटी उदयपुर के रजिस्ट्रार, पेसिफिक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल उदयपुर, राजस्थान यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंस जयपुर के रजिस्ट्रार, राजस्थान यूजी ( मेडिकल एंड डेंटल) एडमिशन बोर्ड जयपुर के चेयरमैन, निम्स मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल जयपुर के प्रिंसिपल, एमसीआई न्यूदिल्ली के संबंधित अधिकारी, पीसीपीएमटी 2015 अजमेर के कॉर्डिनेटर के खिलाफ जयपुर हाईकोर्ट के आदेशानुसार मामला दर्ज कर लिया गया है.

ऐसे किया था फर्जीवाड़ा

झूंझुनू के विवेक बुगालिया ने राजस्थान हाईकोर्ट में मेडिकल कॉलेजों के खिलाफ याचिका दायर की थी. इसमें आरोप लगाया गया था कि प्रदेश की इन तीनों मेडिकल कॉलेजों में वर्ष 2015 में पीसीपीएमटी में प्राप्त अंकों के आधार पर एडमिशन दिए गए. इस दौरान तय अंकों से कम अंक वाले अभ्यर्थियों को प्रवेश दे दिया गया. साथ ही कुछ अन्य अभ्यर्थी जो काउंसलिंग में शामिल भी नहीं हुए थे, उनकी उपस्थिति दर्शाने के लिए फर्जी हस्ताक्षर से उपस्थिति दिखा दी गई और प्रवेश दे दिया. ये प्रवेश उन अभ्यर्थियों को दिया गया जो इसके योग्य ही नहीं थे. इसी तरह से काउंसलिंग में रिक्त सीटों को भरा हुआ बता दिया, जबकि सीटें भरी हुई ही नहीं थी. इस पर हाइकोर्ट ने नौ फरवरी 2018 को राज्य सरकार को निर्देश दिया कि मामला दिल्ली सीबीआई में भेजा जाए.

Manthan – Can the Middle Class Dent the demand of Polythene Bags?

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Millions of commuters travel every day through metros, trains, buses, private taxis, autos and their own vehicles. Most of us have to buy something or the other while returning home. Some of us are even asked over phone to buy some groceries or some vegetables or some stationery for the child to complete homework. In residential colonies, local vegetable sellers take millions of rounds throughout the country to sell vegetables. Local shopkeepers look at our convenience as a regular customer. And the convenience is a polythene bag – a small foldable polythene bag.

The journey of polythene bags begins – from shopkeepers to our homes and from our homes to the garbage. Spills from the garbage bins and occupies roads, drainage etc. These single use polythene bags reach to the area of no return, or rather, no bio-degradation.

We pay for creating plastic waste and adding to the pollution.

Why can’t we carry our own bag, a simple cloth bag, to buy vegetables or groceries even from the local suppliers?  Why we have to depend on our convenience and comfort and accept polythene bags? Don’t we have a choice or is it that we are uncomfortable carrying a cloth/canvas bag and polythene bag looks better?

This is where, the middle-class , counted amongst the majority of Indian population can dent the plastic pollution. We stop insisting to have polythene bags to carry items. If the shopkeeper does not have, we stop expecting him to get anyhow from the nearby shop.  We stop looking only for our convenience, our comfort and our necessity. For once we look at the impact this one intentional ignorance leads to – an unintentional damage to the environment.

India currently consumes about 4 kilograms of Polythene per person, and it is expected to increase significantly during the next 25 years to almost 13 kilograms per person, as per a recent study. India is expected to add more than 18 million tonnes of polythene demand by 2041, based on population growth.

Very sadly – ultimately the demand will drive the supply of polythene bags in near future.

Going by the annual consumption of polythene bags, even if we stay away from polythene bags for a day, this is set to reduce significantly the quantum of plastic waste by as much as 25,000 tonnes.

Later, this one day can become a week and even a month. We may not feel the necessity for polythene bags for once, after few years.

Finally, one day, even Kanta Bai will also use only cloth bag for groceries.

“Manthan”, an initiative by Hindustan Zinc, is a series of stories to bring awareness about various concerns like air pollution, water pollution, plastic pollution, noise pollution, climate change, road safety and wildlife protection.