मच्छर से होने वाली बीमारियों से बचाव के लिये मुख्य सावधानियाँ और उपाय – डॉ. काजल वर्मा

0

मानसून आते ही मौसम खुशनुमा हो जाता है,लेकिन मानसून अपने साथ लेकर आता है कई मच्छर जनित बीमारियां। मलेरिया, टायफायड, हैजा, खांसी, सर्दी, बुखार, डेंगू, चिकनगुनिया और फ्लू इसी मौसम में सबसे अधिक होते हैं। मानसून में सेहत के प्रति सावधानी बरतना बेहद जरूरी हैं। मानसून को

डॉ. काजल वर्मा

खुशनुमा बनाने के लिए थोड़ी सावधानी और घरेलू उपाय काफी हैं। मानसून के साथ ही मौसमी बीमारियां पनपने का खतरा बना रहता है। मुख्यत: बरसात के मौसम में पानी के एकत्रित होने से वेक्टर जनित रोग पैदा होने की संभावना बनी रहती है। इसी को मध्यनजर रखते हुए होम्योपैथी फिजिशियन डॉ. काजल वर्मा इन मौसमी बीमारियों को पनपने से पहले ही रोकथाम करने की महत्वपूर्ण जानकारी दे रहीं है . इनके कारण बचाव व नियंत्रण किस तरह किया जाए इसके लिए आप पूरा आलेख पढ़िए .

बीमारियों के कारण व् रोकथाम व बचाव के उपाय

1. मलेरिया,डेंगू और चिकुनगुनिया विशेष प्रकार के मादा मच्छर के काटने से फैलता है। मलेरिया एनाफिलीज और डेंगू -चिकुनगुनिया एडीज मच्छर के काटने से फैलता है।

2. मादा मच्छर ही मानव या पशुओं को काट खून पीती है जबकि नर मच्छर फूलों के मकरन्द पर जिंदा रहता है।

3. मादा मच्छर पानी में अंडे देती है। अंडे से लारवा फिर प्यूपा और इससे व्यस्क मच्चर विकसीत होता है। लार्वा को हम नष्ट करने के लिये MLO (मलेरिया लारवीसाइड ऑइल जिसमे मिट्टी का तेल, जला काला तेलऔर डीजल 1:3:6 के अनुपात में होता है) और अन्य कीटनाशकों का प्रयोग कर सकते हैं।

4. घरों के अंदर घड़ों, कूलर, हौदियो, फूलदान, मनी प्लांट, नारियलों के खोल व अन्य पात्रों में 7 दिन से ज्यादा पानी खड़ा ना होने दें। 7 दिन में एक बार सुखाकर ही इन्हें वापिस पानी से भरें।
सप्ताह में एक दिन ड्राई डे के रूप में ज़रूर मनाए जिसके अंतर्गत सभी स्थानों से पानी को पूर्णत: खाली करके सुखायें।

ध्यान रहे, पानी इकट्ठे होने की जगह जो चाहे परिण्डे जितनी छोटी या पानी के टैंक जितनी बड़ी क्यों न हो, जैसे टँकीया, खेळी, कूलर, मनी प्लांट, डी फ्रॉस्ट ट्रे, आदि को सप्ताह में एक बार खाली कर, रगड़ कर साफ कर, सुखा कर, ही वापिस भरें ताकि वे कभी मच्छरों के अंडे देने/ ब्रीडिंग के स्थान के रूप में विकसित न हो सकें!!

5. गड्डो को मिट्टी से भर दें, पानी के निकास के लिए नाली बनाये ताकि पानी इक्कट्ठा होकर मच्छर पैदा होने कीजगह न बन सके।

6. बावड़ियों, नाडी-पोखरों, तालाबों, जोहड़ों आदि और उन खेलियों-फव्वारों जिनमे सदैव पानी भरा रहता हो उनमें लार्वा भक्षक मछलियाँ गम्बुजिया या गप्पी डाल दी जानी चाहिए।

7. यदि मछली डालना भी संभव ना हो तो उन पानी के स्त्रोत में लारवानाशक दवाइयों जैसे टेमीफ़ोस,मलेरिया लारवीसाइडल आयल,बैटेक्स इत्यादि का छिड़काव करें ।

8. घरों के दरवाजों खिड़कियों पर जालीदार दरवाजे लगवाएं। यदि यह सम्भव न हो तो मच्चरदानी का प्रयोग करें। मच्छररोधी कॉइल्स, क्रीम अगरबत्ती, आदि का प्रयोग भी लिया जा सकता है।

9. यथासंभव शरीर को पूरे ढकने वाले कपड़े पहने। बच्चों, बुज़ुर्गों और गर्भवती महिलाओं का विशेष ख्याल रखें।

10. यदि बुखार आये तो प्रशिक्षित चिकित्सक से ही इलाज करवाएं। प्रचुर पेय पदार्थ ले, सुपाच्य भोजन लें, आराम करें।

11. यदि खून जांच में मलेरिया चिन्हित होता हैं तो पूर्ण मूल उपचार ज़रूर करवायें, वायवेक्स मलेरिया का 14 दिन और फेलसिफेरम मलेरिया का 3 दिन का पूरा आमूल उपचार चिकित्सकीय देखरेख में ही लेवें। मलेरिया की जाँच व इलाज सभी सरकारी संस्थाओं में मुफ़्त उपलब्ध करवाया जाता है।

12. सामान्यतः ड़ेंगू और चिकुनगुनिया बुखार साधारण इलाज और घरेलू देखरेख पर ही ठीक हो जाता है। घबराएं नही, चिकित्सकीय परामर्श अनुसार ही दवा ले।

मच्छरों से बचने के कुछ मूलभूत उपाय:-

MLO – मलेरिया लारवीसाइड ऑइल सोलुशन बनाने की विधि
K केरोसिन 1 लीटर
B बर्न्ट आयल 3लीटर
D डीजल 6 लीटर
उपयोग: बाहर भरे -फैले हुए पानी मे, गड्डो में भरे पानी मे, नालियो मे भरे पानी मे जएन्टी लारवल एक्टिविटी हेतु। 20 ml प्रति लीनियर मीटर यानी लगभग दो हाथ जगह इक्कट्ठे पानी मे 20 ml। यदि MLO पानी मे डालने के बाद सतह पर फैलता नही तो वह सही रेश्यो में नही बना हुआ और प्रभावी, गुणकारक नही।

टेमिफॉस सोलुशन बनाने की विधि
0.5 ml टेमिफॉस 2 लीटर पानी में घोल बनाये
फिर 1000 लीटर(1*1*1 क्यूबिक मीटर) पानी मे 20 ml सोलुशन डाले। यह उन जल स्त्रोतों टँकी/ खेळी/ फर्मे/कूलर आदि में डाले जो पानी इकट्ठा रखने के काम आते है पर खाली नही करवाये जा सकते। अतिरिक्त पानी की मात्रा में इसी अनुपात में डोज भी अतिरिक्त हो जाएगी।
उपयोग: घरेलू पानी की टंकी / कूलर/ में antilarval एक्टिविटी हेतु।

फोगिंग /फोकल स्प्रे हेतु पायरेथ्रम घोल तैयार करना
1लीटर पायरेथ्रम 19 लीटर डीजल/केरोसिन में घोल बनाकर फोगिंग मशीन में , फोगिंग हेतु या मलेरिया PF, डेंगू चिकनगुनिया केस चिन्हित होने पर फोकल स्प्रे में। बाजार में उपलब्ध विभिन्न डोमेस्टिक मोस्क्विटो स्प्रे भी काम लिए जा सकते है। बन्द कमरे में खिड़की दरवाजे भली प्रकार से बंद कर, खाने पीने की वस्तुओं को ढक कर रखें, कमरे के साइज के हिसाब से हवा में छिड़काव करें, 30-45 मिनट कमरे को बंद रखें।

साधारण और घरेलू उपाय करके भी मच्छरों से बचा जा सकता है स्वंय भी बचे और अपनों को भी बचाएं

ख्याल रहे, पानी ठहरेगा जंहा, मच्छर पनपेगा वँहा……..

आखिर जान है तो जहान है

बांसवाड़ा बना खुनी खेल का जिला तिहरे हत्या काण्ड में दिन दहाड़े पिता और दो बेटों को उतारा मौत के घाट।

उदयपुर पोस्ट। उदयपुर संभाग का बांसवाडा जिला पिछले काफी समय से दिनदहाड़े होने वाली हत्याओं और खुनी खेल का जिला बन चुका है। पुलिस का खौफ तो मानो अपराधियों में है ही नहीं। और इसी बेखोफ तरीके से दिन दहाड़े भीड़ भाड़ वाले इलाके में अपराधियों ने ऐसे जधन्य हत्याकांड को अंजाम दिया कि देखने वाले सिहर उठे। आपसी रंजिश के चलते पिता और उसके दो बेटों पर हमलावरों ने चाक़ू तलवार और सरिये से हमला किया। हमले में पिता और एक पुत्र की मोके पर ही मौत हो गयी जब कि एक बेटे को गंभीर स्थिति में उदयपुर रेफर किया गया है।
इस जधन्य हत्याकांड से सिर्फ बाँसवाड़ा जिले में ही नहीं पुरे संभाग में सनसनी फेल गयी है। हत्याकांड के फोटो व्हाट्स अप पर तेजी से वायरल हो गए हालाँकि पुलिस ने एहतियात के टूर पर बांसवाडा में दो दिन के लिए नेट बंद कर दिया है और धरा 144 लगा दी गयी है।
पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार इंद्रा कॉलोनी निवासी 65 वर्षीय सब्बीर पुत्र सिकंदर उनके दो बेटों शरीफ और साहिद के साथ महात्मा गांधी अस्पताल गए थे। जहां आरोपियों के द्वारा चाकू और लोहे के सरिये से अचानक हमला कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि तीनों अस्पताल परिसर में गायनिक ओपीडी के बाहर खड़े थे। अचानक एक सफेद रंग की कार में आरजे । 27-1-सी-2622 में सवार होकर हमलावर पन्नालाल पिता हीरा सरगड़ा, पन्नालाल के भाई डूंगर एवं नरेश, महेश, नरेंद्र सहित अन्य दो लोग वाहन से उतरे और वहां खड़े शब्बीर एवं उनके दो बेटों पर धारदार हथियार एवं सलियों से हमला कर दिया। जिनमें शब्बीर और एक बेटे की मोके पर ही मौत हो गई। और दूसरे बेटे को गंभीर हालत में उदयपुर रैफर कर दिया  जहाँ शाम तक उसने भी दम तोड़ दिया ।
अस्पताल परिसर के जिस स्थान पर हमलावरों ने घटना को अंजाम दिया गायनिक ओपीडी के सामने उक्त स्थान पर 24 घंटे लोगों की आवाजाही बनी रहती है। और एमसीएच विंग के करीब होने के कारण हमेशा लोग भी अच्छी खासी तादाद में उपस्थित रहते हैं।

शब्बीर मोहम्मद पिता सिकंदर अली उम्र 65 वर्ष हाल निवासी बांसवाड़ा मूल निवासी उत्तर प्रदेश आगरा, एवं पन्नालाल सरगङ्ग व डूंगर सरगड़ा, इन दोनों परिवार के बीच लगभग दो हजार स्क्वायर फीट जमीन का विवाद पिछले 10 सालों से थानों और न्यायालयों में विचाराधीन है। इसी जमीनी विवाद को लेकर दिनांक 31.8.2018 यानी शुक्रवार कल रात 8 बजे के लगभग शब्बीर और पन्नालाल के बीच हाथापाई हुई थी। इस हाथापाई में पन्नालाल और शब्बीर दोनों को ही हल्की चोटे आने पर दोनों महात्मा गांधी चिकित्सालय में आज सुबह इलाज हेतु गए हुए थे जहाँ पहले से घात लगाये बैठे हमलावरों ने उन्हें मौत के घात उतार दिया। 

मर्डर का लाइव वीडियो कैमरे में कैद – हत्या से लेकर भागने तक के पूरे सबुत पुलिस को मिलेंगे –

आज सुबह एक छोटी सी जमीन को लेकर दो परिवारों के बीच चल रही रंजिश के चलते की गई नृशंस हत्या महात्मा गांधी चिकित्सालय के गायनिक वार्ड के बाहर की है । महात्मा वाधी चिकित्सालय प्रशासन द्वारा लगाए गए सीसीटीवी कैमरे में एक कैमरा ऐसी जगह लगा हुआ है, जहां से पूरी वारदात लाइव कैमरे में कैद होगया  हत्यारे हत्या कर महात्मा गांधी चिकित्सालय के पीछे के रास्ते से भागे हैं। वहां पर भी  होस्पीटल के कैमरे लगे हुए हैं। जहां से हत्यारों के भागने की भी पुष्टी होती है । जिस जमीन को लेकर विवाद है। वह जमीन इंदिरा कॉलोनी में है। जिसे दोनों  अपना मालिकाना हक जताकर वर्षों से आपस में लड़ाई लड़ रहे है। दोनों पक्षों को इस विवाद में कई बार पुलिस ने पाबंद कर जेल भी भेजा है। परंतु आज इस छोटी सी जमीन ने तीन लोगों की जान ले ली। इन हत्याओं को लेकर कादिर अहमद का मामला दर्ज कराया है।

पुलिस के सामने भाजयुमो करती रही नारेबाजी, मायूूस हुई एनएसयुआई, बेबस रहे निर्दलीय के समर्थक – सत्ता का सुख का फायदा मिला गुट विशेष को।

उदयपुर। छात्रसंघ चुनाव 2018 में भले ही पुलिस ने अपनी मुस्तैदी से छात्रों को नियम कायदों में ही रखा, लेकिन इसका असर सत्तारूढ़ पार्टी के युवा संगठन पर कम ही देखा गया। जहां – जहां छात्रसंघ चुनाव हो रहे थे, दर्जनों युवा भाजयुमों के टीशर्ट पहने नारेबाजी करते नजर आ रहे थे। वहीं एनएसयुआई और निर्दलीय खड़े हुए उम्मीदवार के समर्थकों को हर समय खाकी के डण्डे का जोर सता रहा था। इस वजह से उन्होंने सुबह थोड़ी बहुत कोशिश तो की लेकिन खाकी वर्दी की अधिकता ने उनकी हिम्मत के साथ कुठाराघात कर दिया। आपको बता दें कि भाजयुमो अध्यक्ष गजेन्द्र भण्डारी के नेतृत्व में दर्जनों युवा कामर्स और साईंस काॅलेज के बाहर चुनाव सम्पन्न होने तक मौजूद रहे और भरी सड़क पर चलते हुए जमकर नारेबाजी की। हालाकि खाकी उन तक भी पंहुची लेकिन उस तरह से नहीं दिखी जिस तरह से वह एनएसयुआई और निर्दलीय के समर्थकों को खदेड़ते समय दिखाई दी।

उदयपुर जिले के सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में शांतिपूर्ण ढंग से चुनाव सम्पन्न हो गए। इस बार पुलिस की ओर से की गई, सख्ती साफ तौर पर दिखाई दी। सुखाडिया विश्वविद्यालय के संघटक महाविद्यालयों में शांति बनी रही, कहीं पर भी किसी तरह की बदमाशी नही हुई। छुटपुट घटनाओं के अलावा पूरे चुनाव में शांति बनी रही। सुखाडिया विश्वविद्यालय में करीब 61 फीसदी मतदान हुआ। वहीं सबसे ज्यादा मतदान प्रतिशत विज्ञान महाविद्यालय में देखने को मिला, जहां करीब 70 प्रतिशत विद्यार्थियों ने अपने मत का प्रयोग किया। इस बार पुलिस की सख्ती से वाणिज्य महाविद्यालय पर मतदान प्रतिशत पर भी असर दिखाई दिया। पुलिस प्रशासन ने सुबह से ही महाविद्यालयों के बाहर डेरा डाल दिया। एसपी कुंवर राष्ट्रदीप ने भी सभी महाविद्यालयों में पंहुचकर मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों से जानकारी ली और शांति व्यवस्था बनाये रखने के निर्देश दिये। पुलिस ने छात्र संघ चुनाव के दौरान निषेध क्षेत्र में प्रचार सामग्रियों को लेकर पंहुचने वाले छात्र छात्राओं को गिरफ्तार कर लिया। वही हुंडदंग करने वाले आधे दर्जन से ज्यादा छात्रों को 151 में पाबंद करवाया। पुलिस की इस कार्रवाई के दौरान दो व चार पहिया वाहनों को भी जब्त कर लिया। वहीं जिला पुलिस अधीक्षक कुंवर राष्ट्र्दिप ने शांतिपूर्ण हुए चुनाव को लेकर छात्र प्रतिनिधियों को क्रेडिट दिया वहीं यह भी कहा कि परिणाम आने तक छात्रों से लिंगदोह के आधार पर ही नियमों की पालना कराई जाएगी।

छात्रसंघ चुनाव बना वर्चस्व की लड़ाई, हिमांषु जीता तो लहराएगा भाजयुमो का परचम, सुखदेव जीता तो फिर छाएगी टीम एमडीएस, एनएसयुआई रहेगी तीसरे पायदान पर।

उदयपुर। पिछले सात दिनों से चल रहे छात्रों का चुनावी दंगल आखिरकार शुक्रवार को मतदान के साथ ही खत्म हो गया। हालाकि ग्यारह दिन बाद परिणाम आने से सभी छात्रनेताओं, उम्मीदवारों और उनके समर्थकों में मायूसी छाई रही। क्यूं कि आज से पहले मतदान के बाद ही मतगणना शुरू हो जाती थी और शाम तक तो परिणाम भी सुना दिया जाता था, लेकिन इस बार ऐसा नहीं होने से चुनावी रंगत फिकी ही देखी गई। वहीं छात्रसंघ चुनाव में केंद्रीय अध्यक्ष पद पर त्रिकोणीय मुकाबले में कांटे की टक्कर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिशद के हिमांषु बागड़ी और एबीवीपी से ही बागी सुखदेव डांगी के बीच देखी गई, अगर बात करें एनएसयूआई के महेश रोत की तो सबसे कमजोर उनकी स्थिति सामने आई, छात्र राजनीति के विष्लेशकों की माने तो श्री रोत तीसरे पायदान पर ही रहेंगे। वहीं हिमांषु बागड़ी के साथ पूरा का पूरा भारतीय जनता युवा मोर्चा लगा रहा और दिन रात एक कर दिए, साथ ही एनएसयूआई से जुड़े कई छात्र नेताओं ने भी अंदरूनी रूप से बागड़ी के समर्थन में ही प्रचार किया। इससे माना जा रहा है कि अगर हिमांषु की जीत होती है तो भाजयुमो का परचम ही चैतरफा लहराएगा और हार होती है तो युवा मोर्चा की काफी फजीती होगी क्यूंकि कांस्टेबल द्वारा थप्पड़ मारने का मसला हो, भूपालपुरा में काॅम्पलेक्स के अवैध निर्माण को तोड़ने के बाद निगम में हंगामा करना हो, या अम्बामाता थाने के एक सिपाही को निलम्बित कराने का मामला। इन तीनों ही मामलों में भाजयुमों के शीर्ष नेतृत्व में काफी जोर आजमाईश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। लेकिन आपको बता दे कि हिमांषु बागड़ी के चुनाव में पूरा का पूरा युवा मोर्चा दल बल के साथ लगा था और मोर्चा से जुडे हर युवा को लग रहा था कि ऐसी जीत होगी जो इतिहास रच देगी। वहीं अगर बात करें एबीवीपी के बागी सुखदेव डांगी की तो उनके समर्थन में पूर्व अध्यक्ष मयूर ध्वज सिंह उनकी टीम, भवानी बोरीवाल सहित साईंस काॅलेज के अध्यक्ष और एबीवीपी के विश्वविद्यालय इकाई अध्यक्ष ने जमकर काम किया हैं। ऐसे में लग रहा है कि सुखदेव डांगी भी कमजोर नहीं है,क्यूंकि जो भी लोग हिमांषु के समर्थन में लगे थे वह वर्तमान में काॅलेजों में पढाई कर रहे हैं और उनका वर्चस्व भी काफी है। इन सभी ने बिना हो हुल्लड़ किए ही बंद में जमकर प्रचार किया और छात्र मतदताओं से उनके पक्ष में तक देने की अपील की। कुल मिलाकर इस चुनाव में हिमांषु की जीत हुई तो भाजयुमो की भी जीत होगी और सुखदेव की जीत हुई तो टीम एमडीएस फिर से एमएलएसयू की सिरमौर बन जाएगी।

कॉलेज परिसर में पाबन्दी लेकिन रिसोर्ट में खुली छूट, जम कर हो रही है “झुमरू” पार्टी

उदयपुर। इस बार पुलिस ने अपनी ताकत दिखाते हुए छात्रसंघ चुनाव (Student union elections Udaipur) के दौरान होने वाली रैलियां और प्रचार प्रसार के नाम पर रंगने वाली सडकों पर तो रोक लगा दी, कॉलेज परिसरों में भी पुलिस की सख्ती के चलते कोई छात्र कॉलेज परिसर में खड़ा तक नहीं हो सकता। लेकिन इन सख्तियों के बावजूद , लिंगदोह कमिटी की सिफारिशों को सख्ती से लागू करवाने के बावजूद छात्रों की पार्टी शार्टी में कोई रोक टोक नहीं दिख रही है, रत की “झुमरू” पार्टियों में जम कर डी जे बज रहा है और ढक्कन खुलते जा रहे है । यूनिवर्सिटी और कॉलेज परिसर के आसपास अगर पुलिस की सख्ती है तो शहर के आसपास के रिसोर्ट में छात्र मजे कर रहे है। विभिन्न पदों के दावेदार अपने अपने संगठनों की सहायता से वोटर्स छात्रों के लिए अलग अलग व्यवस्थाएं कर रहे है।

मतदान को सिर्फ एक दिन बचा है और प्रत्याशी अपना पूरा दम ख़म लगा रहे है। मतदाता विद्यार्थियों को लुभाने का पूरा इंतज़ाम किया हुआ है। चाहे तरह तरह के व्यंजनों का खान पान हो या फिर दारु शारु पी कर डांस करने का इंतज़ाम हो।

ढीकली, तितरड़ी और बड़ी क्षेत्रों में स्थित रिसोर्ट में को विद्यार्थियों की भीड़ उमड़ी। कुछ छात्र नेता स्वयं के वाहनों से विद्यार्थियों को वहां पहुंचा रहे हैं। प्रत्याशियों ने कॉलेजों के बाहर अलसुबह ही बसें व अन्य वाहन लगा रखे थे, जो विद्यार्थियों को कॉलेजों से सीधे उन रिसोर्ट लेकर पहुंचे। विद्यार्थियों ने वहां स्विमिंग पूल का आनन्द लिया, वहीं डीजे पर जमकर झूमे। इसके बाद उन्होंने लजीज व्यंजनों को लुत्फ भी लिया।

गुरुवार की रात यानी मतदान के ठीक एक दिन पहले की रात सभी प्रत्याशियों ने मतदाता छात्र और अपने समर्थक कार्यकर्ताओं के लिए कुछ ख़ास विशेष इंतज़ाम किये है। सूत्रों के अनुसार तो ईसवाल के पास एक रिसोर्ट में एक अध्यक्ष पद के प्रत्याशी ने आज शाम से लेकर कल सुबह तक का पार्टी का पूरा इंतज़ाम किया हुआ है। जिसमे खाने के साथ विदेशी पिने का इंतज़ाम और डीजे पर झूमने के लिए डांस पार्टी का आयोजन भी किया हुआ है।

सूत्रों की माने तो इससे बड़ी पार्टी मतदान की रत को थेंक्स पार्टी का आयोजन कर रखा है जिसमे समर्थक कार्यकर्ता छात्र और कुछ छात्रनेताओं को आमंत्रित किया गया है।

सोयी हुई है जनता – पैट्रोल कंपनियों को मिली है लूट की खुली छूट, क्रूड आयल पहले से सस्ता फिर भी महंगे है पैट्रोल डीज़ल।

0

petrol price hike

उदयपुर। जनता दरसल बेवकूफ है उसको कुछ समझ आता नहीं जो समझ आये उसके सामने तथ्य रख दो झूठ बोल दो वह मान लेगी कोई सवाल नहीं करेगी। डीज़ल पैट्रोल के दाम सारे रिकॉर्ड तोड़ रहे है। और सत्ता जनता को लॉलीपॉप चूसा रही है,..  बढ़ते हुए दामों में सरकार का कोई हाथ नहीं यह तो क्रूड आयल के दाम बढ़ने से दाम बढे है। क्यों की सत्ता में बैठे बड़े बड़े ज्ञानियों को पता है कि इन 125 करोड़ की जनता में कुछ गिनती के लोगों को छोड़ कर सत्ता से सवाल करने का माद्दा किसी में नहीं है। 81-82 Rs ही क्या 100/- Litter के पार भी दाम चले जायेगें इसके बावजूद कोई सवाल नहीं करेगा। सर्कार के कारिंदन को झूठ बोलने जनता को बरगलाने या गुमराह करने में कोई भी फर्क नहीं पड़ता झूठे आंकड़ों या झूठी बातों से बस दिलासा देदेते है।
जी हाँ पैट्रोल और डीज़ल ने अपने सारे पिछले रिकॉर्ड ब्रेक कर दिए है। पहली बार 74 पार होने के बाद अब पेट्रोल की कीमतें पहली बार 81 रूपए प्रति लीटर से ज्यादा हो गई हैं। राजस्थान की राजधानी जयपुर में 29 अगस्त 2018 को पहली बार पेट्रोल के भाव 81 रूपए 5 पैसे और डीजल की कीमतें 74 रूपए 32 पैसे प्रति लीटर हो गई हैं। ऐसा पहली बार हुआ है जब जयपुर में पेट्रोल की कीमतें 81 रूपए प्रति लीटर के पार हुई हैं। जयपुर के अलावा राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 78.18 रुपए प्रति लीटर है, तो डीजल 69.75 रुपए प्रति लीटर हो गया है। वहीं, मुंबई में पेट्रोल 85.60 रुपए/लीटर और डीजल 74.05 रुपए प्रति लीटर तक पहुंच गया है। जानकारों का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने के साथ ही रुपए के मूल्य में गिरावट की वजह से भी पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ी हैं। आज अंतर्राष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 75.96 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआइ क्रूड 68.51 डॉलर प्रति बैरल के आसपास चल रहे हैं। भारतीय बाजार में कच्चे तेल के भाव 4,800 रूपए प्रति बैरल के आसपास चल रहे हैं।

2018 में 2014 के मुकाबले सस्ता है कच्चा तेल, फिर भी पेट्रोल—डीजल महंगे
2014 में जब भारत कच्चा तेल 6,408 रूपए प्रति बैरल के स्तर पर था, उस समय पेट्रोल 71.41 रूपए प्रति लीटर और डीजल 56.71 रूपए प्रति लीटर मिल रहा था। आज भारत में कच्चे तेल की कीमत लगभग 4,800 रूपए प्रति बैरल है, तो पेट्रोल 81.05 रूपए और डीजल 74.32 रूपए प्रति लीटर मिल रहा है। 2014 के मुकाबले अब कच्चे तेल की कीमतें 25 फीसदी तक कम हो गई हैं। इसके बावजूद पेट्रोल 9.64 रूपए और डीजल 17.61 रूपए प्रति लीटर महंगा हो गया है। असल में पेट्रोल—डीजल की कीमतें बढ़ने का कारण है कच्चे तेल पर लगने वाले उत्पाद शुल्क में बढ़ोतरी। जब अंतर्राष्ट्रीय बाजार में क्रूड सस्ता हो रहा था, तब सरकार ने नवम्बर 2014 से जनवरी 2016 तक उत्पाद शुल्क में 9 बार बढ़ोतरी कर दी। मौजूदा वक्त में केन्द्र और राज्य सरकार पेट्रोल पर ग्राहकों से 39 रूपए 31 पैसे और डीजल पर 27 रूपए 79 पैसे टैक्स वसूल रही है। यदि सरकारें उत्पाद शुल्क में कमी कर दें, तो पेट्रोल—डीजल सस्ता हो सकता है।
10 फीसदी तक बढ़ सकता है भाड़ा जयपुर ट्रांसपोर्ट यूनियन से जुड़े इन्द्र कुमार चड्ढा बताते हैं कि हर दिन डीजल की कीमतें बढ़ने से ट्रांसपोर्टर नुकसान उठा रहे हैं। पेट्रोलियम कंपनियां रोजाना डीजल—पेट्रोल के भाव में कुछ पैसे की बढ़ोतरी कर देती है, थोड़ी—थोड़ी बढ़ोतरी के कारण ट्रांसपोर्टर्स पेट्रोलियम पदार्थों के भाव के हिसाब से भाड़ा नहीं बढ़ा पा रहे हैं। बीते 2 महीने में जिस तरह से डीजल—पेट्रोल महंगा हुआ है, उसके कारण ट्रांसपोर्टर 10 से 12 फीसदी तक नुकसान उठा रहे हैं। यदि कीमतें इसी स्तर पर बनी रहीं तो आने वाले दिनों में भाड़ा कम से कम 10 फीसदी बढ़ना तय है। इसी तरह पेट्रोल महंगा होने से शहरी मध्यम वर्ग के लोगोें पर बोझ बढ़ गया है।

UNVEILING THE PRIDE HIDDEN BEHIND HER GHOONGAT, SAYAR KUNWAR MAKES HER COMMUNITY PROUD

0

Sayar’s flour-mill plays an important role in the big events that happen in her village, may it be marriages or any kind of celebrations.

Looking back at the earlier days, 45 years old Sayar’s husband worked as a labourer. Sayar has been a part of the Shanti Samooh (SHG) under Hindustan Zinc’s Sakhi Project since one year. She made meals for the Anganwadi (AWC) children & pregnant women and with that she earned around Rs. 8000/- every month. With the help of the money saved, Sayar also got her daughter married. Sayar always wanted to explore further opportunities and utilize it in helping her family and her village.

Since there was not a single flour mill in Jaisinghpura, all the ladies had to go to the outskirts of the village to grind their cereals. This struck Sayar with an opportunity and along with her husband, Sayar planned to invest in a flour mill. To set up the mill, Sayar took a loan of Rs. 10,000/- from the VO (village organization), Ujala Gram Sanghathan, under Sakhi, in the month of May.

The flour-mill had not only helped her economically but also created convenience for the villagers. Now the entire village comes to Sayar to grind their cereals and with this she earns around Rs. 7,800/- every month.

Sayar has always been very hardworking and ambitious, along with managing the flour mill, she continues to cook for AWC.

Gratified, her daughter said, “Watching my mother do so much has brought immense happiness to me. I was always worried about what would happen after I get married, but now I am not. Because of her leadership skills, she is also elected as one of the representatives of her samooh, and is a cashier in the VO…”.

“I am simply grateful to Hindustan Zinc for giving me my happiness and self-worth…”, emotionally smiled Sayar.

The feeling of confidence clearly showcased on Sayar’s face as she spoke. She had not only been a role model for her Rajput community but every single woman in Jaisinghpura…

Salman Khan ने Bharat की शूटिंग का सेकंड शेड्यूल किया पूरा .

Udaipur Post.   Salman khan  ने Malta में फिल्म ‘Bharat’ के सेकंड शेड्यूल की शूटिंग पूरी कर ली है। रविवार काे उन्होंने को-स्टार katrina kaif के साथ एक तस्वीर अपने ट्विटर अकाउंट पर शेयर की। इस तस्वीर में सलमान शेरवानी अौर कटरीना घाघरा-चोली पहने हुए हैं। दोनों के अलावा इस फिल्म में दिशा पाटनी, नोरा फतेही और सुनील ग्रोवर भी होंगे। फिल्म के सेकंड शेड्यूल की शूटिंग भले ही पूरी हो चुकी हो पर सलमान, मां सलमा खान और बहन अलवीरा के साथ अभी भी माल्टा में ही रुके हुए हैं।

हज मुकम्मल, अब 40 नमाज के लिए मदीना पहुंचेंगे हाजी

0

नमाज में मांगी जाएगी अमन चैन की दुआ, 13 सितम्बर से लौटेंगे वतन

Udaipur. इस्लाम धर्म के पांच अरकान में से एक यानि Hajj saudi arabia के मिना में चल रहा है, दुनियाभर से करीब 50 लाख हज यात्री Hajj पर गए है। Indian Muslim  के साथ  Rajasthan muslim hajj yaatri भी इस बार करीब साढ़े पांच हजार यात्री इस मुकद्दस सफर है और इन सभी हज यात्रियों का हज-2018 मुकम्मल यानि हज पूरा हो गया है। आईए आपको बताते है इस पूरे हज सफर के वो पांच दिन जिनमें हज की रस्में रिवायतें पूरी करने के बाद ही हज मुकम्मल माना जाता है।
ऐसे मुकम्मल हुआ Hajj

पहला दिन 18 अगस्त :सभी हज यात्री ehram बांधकर मिना शहर पहुंचे और यहां जुहर, असर, मगरीब और इशा की नमाज अदा कर रात यहीं पर गुजारी।
दूसरा दिन 19 अगस्त : मिना में सुबह फज् की नमाज पढ़कर जुहर की नमाज के लिए अराफात रवाना हुए। हज सफर का यह सबसे खास दिन माना जाता है। यहां अराफात के मैदान में पहुंचकर जुहर और असर की नमाज पढ़ी गई। सभी हज यात्रियों को दिन ढलने से पहले अराफात छोड़कर मुजदलफा रवाना हुए। मुजदलफा में इशा की नमाज पढ़कर खुले आसमान में सोए। अगले दिन शैतान को पत्थर मारने की रस्म पूरी करने के लिए Hajj यात्रियों ने कंकर चुने।
तीसरा दिन 20 अगस्त : मुजदलफा में फज् की नमाज अदा कर मीना के जमरात पहुंचे और यहां शैतान रूपी स्तंभ को सात-सात कंकर मारे गए। इस रस्म के बाद अहराम की पाबंदी हट जाती है।
चौथा दिन 21 अगस्त : शैतान को कंकर मारने की परम्परा तीन दिन तक चलती है, इसमें दूसरे दिन छोटे-बड़े शैतान को कंकर मारे गए और रात मिना में ही गुजारी।
पांचवां दिन 22 दिन : कंकर मारने की रस्म के तीसरे दिन तीनों शैतानों को एक साथ कंकर मारे जाते है और इसके बाद शाम ढ़लने से पहले हज यात्री मक्का के लिए रवाना हो गए। इसके बाद कुर्बानी दी गई। सउदी सरकार की तरफ से हज यात्रियों द्वारा कुर्बानी की रस्म पूरी करने के लिए अलग-अलग स्लॉटर बनाए गए है, जहां हज यात्री कुछ रकम अदा कर अपने पसंद के जानवर बकरा, मेंड़ा, दुम्बा या ऊंट की कुर्बानी दी जाती है। इसके बाद हज यात्री सिर मुंडवाकर मक्का की जियारत शुरू करते है। हज पूरा करने के बाद सभी हज यात्री चालीस नमाज के लिए 3 सितम्बर से मदीना जाएंगे।
हज पर जाने से पहले सभी हाजियों ने मनाया स्वतंत्रता दिवस
अजीजिया बिल्डिंग में ठहरे हुए है जहां उनके साथ प्रदेश के अलग-अलग शहरों के 386 हज यात्री है। 18 अगस्त को हज के पांच दिन के सफर पर जाने से पहले सभी हज यात्रियों ने यहां 15 अगस्त को तिरंगा फहराकर स्वतंत्रता दिवस मनाया। सभी हज यात्रियों ने अल्लाह की इबादत के दौरान अमन चैन और भाईचारे की दुआएं मांगी।
पहली फ्लाइट सुबह 6 बजे पहुंचेगी
स्टेट हज कमेटी चैयरमेन अमीन पठान ने बताया कि सभी हज यात्रियों का हज-2018 मुकम्मल हो गया है। 12 सितम्बर को रात साढ़े दस बजे हाजियों की पहली फ्लाइट अपने वतन के लिए रवाना होगी आैर अगले दिन सुबह छह बजे पहला जत्था अपने वतन लौटेगा। हाजियों के लौटने का सिलसिला 25 सितम्बर पर रहेगा। इस बार भी आब-ए-जमजम यानी मक्का पवित्र पानी एयरपोर्ट पर ही हाजियों को दिया जाएगा।

LAXMIDEVI’S PRIDE AND HONOR IS HER ‘SAKHI SABJI CENTRE

Today, Laxmidevi’s vegetable cart is not only famous in her community but also in her entire village of Putholi in Chittorgarh, for her fresh vegetables.

Laxmidevi’s husband’s income did not suffice the needs of the family, especially her daughter’s education. One day, she came to know about Hindustan Zinc’s Self Help Group (SHG) from other women of her village and she joined one of the SHGs called Radha Rani Samooh. These SHGs function on the method of ‘thrift savings’ and are linked with banks for loans, at much subsidized rates, which substantially scales up small-scale businesses.

Laxmidevi took a loan of Rs. 3000/- from the samooh to start making earthen pots. By selling these pots, she made a profit of almost Rs. 3000/-. But the season of earthenware had subdued and she stopped making enough money. Laxmidevi was doubtful to start with a new business. However, she had noticed that the women of her village had to travel to far away mandis to fetch fresh vegetables. To help them, ambitious Laxmidevi planned to switch to selling vegetables in her village. Hence, she took a loan of another Rs. 3000/- from her samooh to set up her vegetable selling business.

With the strong support of her family, she also bought a vegetable hand-cart. Every morning, Laxmidevi gets vegetables from the mandi and sells it in her village and today she makes a profit of more than Rs. 6000/- every month.

“Since the time I have been part of the samooh, I feel completely independent. I have a stable source of income. We don’t face any more financial problems. Through my business, I not only help the village ladies, but also earn from it. I am grateful to Hindustan Zinc for giving me my independence…”, says beaming Laxmidevi.

The Sakhi project has been developed to contribute towards socio-economic empowerment of rural women. Currently, ‘Sakhi’ is reaching out to about 19,860 rural and tribal women through almost 1565 SHGs in Rajasthan and Pantnagar.

Independent and confident Laxmidevi, who has ignited a spark of hope in other women of her village, may soon lead to a new story of empowerment in the life of another Sakhi like her…