पति नहीं तो पत्नी को टिकट, यह कांग्रेस की परंपरा है: कटारिया

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उदयपुर। भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता गुलाबचंद कटारिया ने पटेल सर्कल स्थित पार्टी कार्यालय में भाजपा प्रत्याशियों की बैठक में वल्लभनगर सीट को लेकर चल रहे विवाद की तरफ इशारा करते हुए कहा कि पति नहीं, तो पत्नी को टिकट यह कांग्रेस की परंपरा है। जैसा कि सलूंबर सीट पर कांग्रेस ने रघुवीर मीणा की पत्नी को टिकट देकर किया है। इससे पूर्व श्री कटारिया का आज सुबह मेवाड़ एक्सप्रेस से उदयपुर के सिटी रेलवे स्टेशन पर पहुंचने पर स्वागत किया गया। इस दौरान श्री कटारिया को फूल-मालाओं से लाद दिया।

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श्री कटारिया ने मेवाड़ के घोषित प्रत्याशियों की बैठक में कहा कि पार्टी ने एक आम कार्यकर्ता को टिकट दिया है, जिसका मान रखना है और चुनावी समर में जान लड़ा देनी है। उन्होंने कहा कि अब अगर चुनाव में जीत हासिल नहीं होती है, तो आगे कोई भी पार्टी आम कार्यकर्ता को टिकट देने की हिम्मत नहीं करेगी। इस बार मेवाड़ में पार्टी ने कार्यकर्ताओं का मान रखा है, तो कार्यकर्ताओं को चाहिए कि पार्टी का मान बढ़ाए और अपने-अपने क्षेत्र से प्रत्याशियों को जीत दिला कर लाएं। कटारिया ने बताया कि टिकट की लाइन में बड़े बड़े दिग्गज थे, लेकिन दलीचंद डांगी और फूलसिंह मीणा जैसे आम कार्यकर्ता को दिया गया है। वल्लभनगर पर टिकट देने के बारे में कटारिया ने कहा अब बाकी बचे टिकट देने का जिम्मा राष्ट्रीय अध्यक्ष पर है, वे जिसको चाहे टिकिट दे सकते हैं। कटारिया ने कहा कि चुनाव प्रचार भी जल्दी हो शुरू कर दिया जाएगा और ज्योतिष से मुहूर्त निकालकर पर्चा भरने की तारीख भी कल तक घोषित कर देंगे।
भव्य स्वागत: श्री गुलाबचंद कटारिया को उदयपुर विधानसभा क्षेत्र से पुन: प्रत्याशी बनाये जाने के बाद आज सुबह पहली बार नगर में आने पर रेलवे स्टेशन पर पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा जोरदार स्वागत किया गया। सुबह दिल्ली से आने वाली मेवाड़ एक्सप्रेस से पहुंचे कटारिया का पार्टी के पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं ने नारे लगते हुए फूल मालाओं से लाद दिया और स्टेशन से काफिला सूरजपोल स्थित डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रतिमा पर पहुंचा और माल्यार्पण किया गया। बाद में कटारिया ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए चुनाव में जी जान से जुट जाने का आह्वान किया। कटारिया का स्वागत करने के लिए सिटी स्टेशन पहुंचने वालों में जिलाध्यक्ष दिनेश भट्ट, पूर्व महामंत्री प्रमोद सामर, महापौर रजनी डांगी, युवा मोर्चा अध्यक्ष जिनेंद्र शास्त्री, उपाध्यक्ष लव देव बागड़ी आदि बड़ी संख्या में भाजपा पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद थे।

राजस्थान विधानसभा चुनाव 2013 के भाजपा प्रत्याशियों कि पहली लिस्ट घोषित

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उदयपुर। लिए राजस्थान विधान सभा चुनाव 2013 के लिए भाजपा ने अपने 176 प्रत्याशियों कि पहली सूचि जारी कि है। जिसमे उदयपुर शहर से प्रतिपक्ष के नेता गुलाबचंद कटारिया चुनाव लड़ेगे और ग्रामीण से फूल सिंह मीणा को टिकिट दिया है।

उदयपुर सम्भाग कि आठ सीटों में से वल्लभ नगर को छोड़ कर ७ सीटों पर प्रत्याशियों कि घोषणा कि गयी जहाँ यह प्रत्याशी भाजपा के लिए चुनाव लड़ेगे :

उदयपुर शहर – गुलाबचंद कटारिया

उदयपुर ग्रामीण – फूल सिंह मीणा

गोगुन्दा – प्रताप गमेती

झाड़ोल – बाबूलाल खराड़ी

खेरवाड़ा – नाना लाल अहारी

मावली – दलीचंद डांगी

सलूम्बर – अमृत लाल मीणा

 

: 176 घोषित  सूचि:

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आज से प्रत्याशी नामांकन पात्र दाखिल कर सकेगे

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अधिसूचना के साथ ही शुरू हो गया नाम निर्देशन पत्रा दाखिल करने की प्रक्रिया
उदयपुर, विधानसभा आमचुनाव के तहत 14 वीं विधानसभा चुनाव के लिए अधिसूचना मंगलवार को जारी की गई। अभ्यर्थियों द्वारा 5 से 12 नवम्बर तक प्रातः11 बजे से अपराह्न 3 बजे तक (कार्य दिवसों में) संबंधित विधानसभा क्षेत्रा के रिटर्निंग अधिकारी को नाम निर्देशन पत्रा प्रस्तुत किये जा सकते है।
जिला निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि जारी कार्यक्रम के अनुसार 13 नवम्बर को प्रातः 11 बजे से नाम निर्देशन पत्रों की संवीक्षा की जायेगी। अभ्यर्थी 16 नवम्बर को अपराह्न 3 बजे तक नाम वापस ले सकेंगे तथा इसी दिन अपरान्ह 3 बजे पश्चात उम्मीद्वारों को विधानसभा स्तर पर चुनाव चिन्हों का आंवटन किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि यदि आवश्यक हुआ तो मतदान 1 दिसम्बर (रविवार) को प्रातः 8 से सायं 5 बजे तक सम्पन्न होगा। मतगणना 8 दिसम्बर को जिला मुख्यालय पर प्रातः 8 बजे से शुरू होगी।उन्होंने बताया कि 10 नवम्बर को रविवार का सार्वजनिक अवकाश होने के कारण अभयर्थियों द्वारा नामांकन पत्रा दाखिल नहीं किया जा सकेगे और ना ही रिटर्निंग अधिकारी द्वारा स्वीकार किये जा सकेगे।

आंखों के नीचे काले घेरे से छुटकारा पाने के उपाय – nicc beauty tips

NICC Director, Sweeti Chhabra
NICC Director, Sweeti Chhabra

सौंदर्य समस्याओं में आँखों के काले घेरों की समस्या भी एक प्रमुख और आम समस्या है । आँखों के काले घेरे देखने में बिलकुल भी अछे नहीं लगते तथा अच्छे – भले सौंदर्य को नष्ट कर देते है । यह काले घेरे खराब स्वास्थ्य को दर्शते है । यह प्रायः शरीर में कैल्शियम तथा लोह तत्वों की कमी के कारण तो कभी पुरी नींद न लेने के कारण होते है । इनके समाधान के लिए nicc कि डायरेक्टर स्वीटी छाबड़ा लेकर आयी है कुछ स्पेशल टिप्स —

 

 

 

 

 

 

 

काले घेरे होने के कारण

अपर्याप्त नींद आँखों के काले घेरों की समस्या का प्रमुख कारण है ।
खराब स्वास्थ्य के कारण भी आँखों के नीचे काले घेरे पद जाते है ।
विटामिन ‘ ए ‘ की कमी भी काले घेरे की समस्या को उत्पन्न करती है ।
आँखों को प्रति असावधानी रखना भी इस समस्या को उत्पन्न करती है ।
आँखों का नियमित रूप से व्यायाम न करना भी इस समस्या का कारण बनाता है ।
आनुवांशिक कारणों से भी यह समस्या उत्पन्न हो जाती है ।
अध्ययन करते समय पर्याप्त प्रकाश न होना भी काले घेरों की समस्या का प्रमुख कारण है ।
भावनात्मक दबाव , चिंता और तनाव भी इस समस्या का प्रमुख कारण है ।
अधिक और घटिया कालिती के सौंदर्य प्रसाधनों का प्रयोग भी आँखों के काले घेरों की समस्या का प्रमुख कारण है ।

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क्या करें

.प्राप्ती नींद लें ।

.पानी का अधिक सेवन करें ।

.दूध और अंडे का सेवन करें ।

.लाल पके टमाटरों का नियमित सेवन करें ।

.आँखों का नियमित व्यायाम करें ।

.व्यर्थ की चिंता और तनाव से बचे ।

.गाजर के रस का नियमित सेवन करें ।

.शराब व धूमपान के सेवन से बचें ।

.ताजा गुलाब के फूलों से बने गुलकंद का सेवन करें ।

.बादाम और शहद को सामान मात्रा में मिलाएं और आँखों के चारों और इस मिश्रण को लगाकर हलके हाथों से मसाज करें और लगभग आधा घंटे बाद चहरे को धोले ।

.आँखों पर खीर का रस भे लगाएं ।

.आँखों के काले घेरों को साफ कने के लिए आलू के रस को आँखों के चारों ओर लागातार हलके हाथों से मसाज करें ।

क्या वनडे क्रिकेट में गेंदबाज़ ख़तरे में हैं?

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zaheerअंतरराष्ट्रीय वनडे क्रिकेट के शुरुआती दिनों में 50 ओवरों में 250 रनों को भी अच्छा स्कोर माना जाता था.irfan-pathan-2013

पीछा करते वक़्त जब जीत के लिए ज़रूरी रन रेट एक ओवर में छह रन से ऊपर चला जाता तो इसे हासिल करना असंभव मान लिया जाता.
आजकल अधिकतर मैदानों पर तीन सौ रन औसत स्कोर हैं, 350 के स्कोर को अच्छा माना जाता है और जब तक ज़रूरी रन रेट आठ रन प्रति ओवर के अंदर होता है तब तक जीत मुमकिन मानी जाती है.

तो क्या क्रिकेट ने तरक्की की है या फिर उसका उलटा हुआ है? क्या वनडे क्रिकेट में क्लिक करें बल्लेबाजी इतनी अच्छी होती जा रही है कि वनडे के लिए ही ख़तरा बन गई है? क्या खेल के नियम बनाने वालों ने इस फ़ॉर्मेट को ख़त्म करने के बीज बो दिए हैं?

टेस्ट और वनडे

यदि क्लिक करें ऑस्ट्रेलिया और भारत के बीच हुई सिरीज़ में तीन बार सात सौ से ज़्यादा रन बनाए गए तो सिर्फ़ खेल के नियमों पर ही आरोप मत मढ़िए.

हमें यह स्वीकारना होगा कि दो तरह के गेंदबाज़ निराशाजनक रूप से औसत दर्ज़े के हैं.

क्लिक करें भारत के मध्यक्रम को दो बार नेस्तनाबूद करने वाले मिशेल जॉनसन ने भी दो मौक़ों पर बेहद ख़राब गेंदबाज़ी की. कभी बहुत शॉर्ट और कभी बहुत ज़्यादा तेज़ या वाइड.

नागपुर में क्लिक करें ऑस्ट्रेलिया के 350 रनों का पीछे करके भारत के जीतने के एक दिन बाद ही शारज़ाह में पाकिस्तान और दक्षिण अफ्रीका के बीच हुए मैच की दोनों पारियों का स्कोर 365 रहा.

इस मैच में वनडे क्रिकेट के नियमों ने छक्कों और चौकों की बौछार नहीं होने दी क्योंकि गेंदबाज़ी जबरदस्त थी.
टेस्ट मैचों को गेंदबाज़ जिताते हैं जबकि वनडे मैचों को बल्लेबाज जिताते हैं. क्रिकेट के इन दो फॉर्मेट में यही बुनियादी फ़र्क है.

वनडे में शुरुआत से ही मौक़े गेंदबाज़ों के ख़िलाफ़ रहे हैं क्योंकि माना जाता रहा है कि दर्शक गेंद को विकेटकीपर के हाथों में जाते देखने के बजाए छक्के-चौकों की बरसात देखने आते हैं.

जब टी-20 क्रिकेट के फॉर्मेट विकसित हुआ तब टेस्ट और फटाफट क्रिकेट के बीच के इस फॉर्मेट के टी-ट्वेंटी जैसा होने की संभावना ज़्यादा थी.

खिलाड़ी फिट

सीमित ओवरों के मैच में टेस्ट क्रिकेट की लय और बहाव की उम्मीद रखना भी अवास्तविक ही है.

हाल ही में भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की गेंदबाज़ों के अप्रासंगिक होने की शिकायत करना न सिर्फ़ इसलिए चौंकाने वाला है कि यह एक बल्लेबाज़ ने की है बल्कि इसलिए भी क्योंकि वनडे क्रिकेट अपने समय की टी-ट्वेंटी थी. लंबे शॉट, तेज रन और अपनी खास तकनीक इसकी विशेषता थी.

दूसरे शब्दों में कहा जाए तो यह हमेशा से ऐसा ही था.

वनडे क्रिकेट के नए नियमों, जिनमें हर पारी में दो नई गेंदों का इस्तेमाल और घेरे से अधिकतम चार क्षेत्ररक्षकों का बाहर होने शामिल है, ने बड़े स्कोर संभव किए हैं. लेकिन न टीवी शिकायत कर रहा है, न दर्शक शिकायत कर रहे हैं और न ही किसी ने प्रायोजकों की ही कोई शिकायत सुनी है.

भारत और ऑस्ट्रेलिया जब बेंगलुरु में अंतिम वनडे मैच खेलने उतरीं तो दोनों ही टीमें दो-दो मैच जीतकर बराबरी पर थीं. किसी ने इससे ज़्यादा क्या माँगा होता?

वनडे क्रिकेट से न सिर्फ़ नतीज़े देने की उम्मीद की जाती है बल्कि यह भी उम्मीद की जाती है कि नतीज़ा जितना संभव हो उतनी देर से निकले.

पिछले कुछ दशकों में अच्छे स्कोर का भी सफलतापूर्वक पीछा करना इसलिए मुमकिन हुआ है क्योंकि बल्लेबाज़ी में गेंदबाज़ी के मुकाबले तकनीक का ज़्यादा विकास हुआ है.

ये बल्लों की गुणवत्ता में हुए सुधार की ही नतीज़ा है कि आज ख़राब खेले गए शॉट पर भी गेंद छह रन के लिए सीमा रेखा से बाहर चली जाती है. आज स्वीप स्पॉट का क्षेत्र पहले से बड़ा है और इस सब के ऊपर खिलाड़ी भी पहले से ज़्यादा फिट और ताक़तवर हैं.
चार दशक पहले वनडे क्रिकेट की शुरुआत से अब तक गेंदबाज़ी में सिर्फ़ दो ही खोजें हुई हैं, ‘रिवर्स स्विंग’ और ‘दूसरा’.

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नई तकनीक का तोड़

कई साल पहले जब दो गेंदों इस्तेमाल करने की शुरुआत हुई थी तब इसलिए कोई शिकायत नहीं की गई क्योंकि उस वक़्त रिवर्स स्विंग भी नहीं होती थी.

यह सच है कि नए नियम गेंदबाज़ों के ख़िलाफ़ हैं लेकिन उतने नहीं जितना कि कहा जा रहा है.

क्या सिर्फ़ एक क्षेत्ररक्षक से फ़र्क पड़ सकता है? हाँ, वे फ़र्क ला सकता है, जब आपके पास नौ ही क्षेत्ररक्षक हों और जिनमें से पाँच सिर्फ़ घेरे के अंदर हों.

गेंदबाज़ों को यह तय करना होगा कि वे अपनी ताक़त या बल्लेबाज़ की कमज़ोरी में से किस पर गेंदबाज़ी करते हैं और यह चुनाव दिलचस्प होगा.

हालांकि यह स्वीकार करना भी मुश्किल है कि इस विचार ने ही यॉर्कर को एक हथियार के रूप में ख़त्म कर दिया.

किसी भी खेल का विकास किसी एक पक्ष द्वारा नई तकनीक या नीति को विकसित करने और दूसरे पक्ष द्वारा उसकी काट खोजने और उसके आगे अपनी नई नीति जोड़ने से होता है.

डब्ल्यूजी ग्रेस के समय में गेंदबाज़ों को बैकफुट शॉट की काट खोजनी पड़ी तो सचिन के समय में अपर-कट की. बल्लेबाज़ों को पहले आउटस्विंग का तोड़ खोजना पड़ा तो बाद में ‘दूसरे’ का. यह खेल का प्राकृतिक विकास है.

कभी-कभी नियम बनाने वालों ने उस पक्ष की ओर हो गए जो खेल में हावी था.

यदि जल्द ही गेंदबाज़ों और कप्तानों ने बल्लेबाज़ों की नई तकनीकों का तोड़ नहीं खोजा तो फिर संभवतः तकनीकी समिति को ही कुछ करना पड़े. लेकिन हाथ खड़े करना अभी जल्दबाज़ी है. गेंदबाज़ों की रचनात्मक प्रतिक्रिया को भी एक मौका दिया जाना चाहिए.

जर्मनी में ‘भयंकर’ मूंछों की विश्व चैंपियनशिप

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जर्मनी में सैंकड़ों की तादाद में प्रतियोगी विश्व दाढ़ी एवं मूंछ चैंपियनशिप में हिस्सा लेने के लिए जुटे. इस अनोखी प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए क़रीब 20 देशों से लोग आए.

चेहरे के सबसे अच्छे बाल की इस विश्व प्रतियोगिता में हिस्सा लेने आए लोगों की अजीबो-गरीब दाढ़ी-मूंछ दर्शकों के आकर्षण का केंद्र बनी रही.
इस प्रतियोगिता के आयोजक ने कहा कि उन्हें उम्मीद से बेहतर प्रतिक्रिया मिली है. वह कहते हैं, “दुनिया के कई देशों से हिस्सा लेने के लिए लोग यहां आए हैं. ”

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एक प्रतियोगी ब्रैंडन बिगिंस का कहना है, “मैंने एक बार अमरीका में इस तरह की प्रतियोगिता में हिस्सा लिया था और अब मैं अपनी दाढ़ी को दुनिया से रूबरू कराना चाहता हूं. मैं यहां देखूंगा कि मेरी दाढ़ी के लिए दर्शकों की कैसी प्रतिक्रिया मिलती है.”
इस प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए 300 लोग आ चुके हैं जो उम्मीद से कहीं ज्यादा है.
इस प्रतियोगिता में हिस्सा लेने आए निक थॉमस कहते हैं कि उन्हें इस प्रतियोगिता की जानकारी ऑनलाइन और फेसबुक के जरिए मिली.
वह कहते हैं, “मैंने सोचा कि मैं इस प्रतियोगिता में शामिल होकर देखूं कि क्या होता है और शायद मैं अपनी दाढ़ी और बढ़ा सकता हूं.”

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हमेशा के लिए जुदा हुईं ‘लंबी जुदाई’ वाली रेशमा

[ad type=”300×250″ src=”https://www.udaipurpost.com/wp-content/uploads/2013/11/shahi-green-copy.jpg” link=”” align=”” adsense=””]Pakistani-Singer-Reshmaउनकी मखमली आवाज जब फ़िज़ा में गूंजती थी तो थार मरुस्थल का ज़र्रा-ज़र्रा कुंदन सा चमकने लगता… वे राजस्थान के शेखावाटी अंचल के एक गांव में पैदा हुईं थीं लेकिन उनका गायन कभी सरहद की हदों में नहीं बंधा.

अपने ज़माने की मशहूर पाकिस्तानी गायिका क्लिक करें रेशमा ‘लम्बी जुदाई’ का गाना सुनाकर हमेशा के लिए जुदा हो गई. रेशमा के निधन की ख़बर उनके जन्म स्थान राजस्थान में बहुत दुःख और अवसाद के साथ सुनी गई.
संगीत के कद्रदानों के लिए पिछले कुछ समय में ये दूसरा दुःख भरा समाचार है. पहले शहंशाह–ग़ज़ल क्लिक करें मेहंदी हसन विदा हुए और अब रेशमा ने भी दुनिया को अलविदा कह दिया.

रेशमा राजस्थान में रेगिस्तानी क्षेत्र के चुरू जिले के लोहा में पैदा हुई और फिर पास के मालसी गाव में जा बसी. भारत बंटा तो रेशमा अपने परिवार के साथ पाकिस्तान चली गई. लेकिन इससे ना तो उनका अपने गांव से रिश्ता टूटा न ही लोगों से.

मिट्टी से रिश्ता
रेशमा को जब भी मौका मिला वो राजस्थान आती रहीं और सुरों को अपनी सर-ज़मी पर न्योछावर करती रहीं. लोगों को याद है जब रेशमा को वर्ष 2000 में सरकार ने दावत दी और वो खिंची चली आईं तब उन्होंने ने जयपुर में खुले मंच से अपनी प्रस्तुति दी और फ़िज़ा में अपने गायन का जादू बिखेरा.

रेशमा ने न केवल अपना पसंदीदा ‘केसरिया बालम पधारो म्हारे देश’ सुनाया बल्कि ‘लम्बी जुदाई’ सुनाकर सुनने वालो को सम्मोहित कर दिया था.

इस कार्यक्रम के आयोजन से जुड़े अजय चोपड़ा उन लम्हों को याद कर बताते हैं जब रेशमा को दावत दी गई तो वो कनाडा जाने वाली थीं और कहने लगी उनको वीसा मिल गया है.

मगर जब उनको अपनी माटी का वास्ता दिया गया तो रेशमा भावुक हो गईं. अजय चोपड़ा बताते हैं कि रेशमा को उनकी माटी के बुलावे का वास्ता दिया वो ठेठ देशी मारवाड़ी लहजे में बोलीं, “अगर माटी बुलाव तो बताओ फेर मैं किया रुक सकू हूं?”

ये ऐसा मौका था जब क्लिक करें राजस्थान की माटी में पैदा पंडित जसराज, क्लिक करें जगजीत सिंह, मेहंदी हसन और रेशमा जयपुर में जमा हुए और प्रस्तुति दी.

इस वाकये के बारे में अजय चोपड़ा बताते हैं होटल में रेशमा ने राजस्थानी ठंडई की ख्वाहिश ज़ाहिर की तो ठंडई का सामान मंगाया गया और रेशमा ने खुद अपने हाथ से ठंडई बनाई.

अजय ने बताया, ”वो अपने गांव, माटी और लोगों को याद कर बार-बार जज़्बाती हो जाती थीं. रेशमा ने मंच पर कई बार अपने गांव- देहात और बीते हुए दौर को याद किया और उन रिश्तों को अमिट बताया.”

विनम्र स्वभाव
राजस्थानी गीत संगीत को अपनी रिकॉर्डिंग के काम से ऊंचाई देने वाले केसी मालू का गांव रेशमा के पुश्तैनी गांव से दूर नहीं है.

केसी मालू को मलाल है रेशमा की चाहत के बावजूद भी वो उनके गीत गायन को रिकॉर्ड नहीं कर सके. खुद रेशमा ने उनसे ‘पधारो म्हारे देश’ गीत रिकॉर्ड करने को कहा था.

केसी मालू कहते हैं, “हमने राजस्थान की लोक गायकी और पारम्परिक गीतों की कोई चार हज़ार रिकॉर्डिंग की हैं मगर हमें आज अफ़सोस है हम रेशमा के सुर रिकॉर्ड नहीं कर सके. उनकी रेकॉर्डिग के बिना हमारा संकलन अधूरा सा लगता है.”

अरसे पहले ये नामवर गायिका अपने परिजनों के साथ जोधपुर आईं तो उनके साथ रेशमा के जेठ भी थे. वे रेशमा की भूरि-भूरि प्रंशसा कर रहे थे.

उन्होंने बताया, ” रेशमा बहुत बड़ी गुलकार हैं मगर घर-परिवार में छोटे-बड़े का अदब करना कभी नहीं भूलतीं.”

उनके जेठ ने बताया कि उनके घर में जीवन, रस्मों-रिवाज़ और व्यवहार वैसा है जैसा राजस्थान में रहते था.

संगीत से जुड़े श्री मालू कहते हैं रेशमा अपने गांव से बहुत लगाव रखती थीं. वे बताते हैं, “उस वक्त उनका गांव सड़क से नहीं जुड़ा था. रेशमा को इसका बहुत दर्द था. उनकी इस बात को सरकार तक पहुंचाया और सड़क बन गई तो रेशमा बहुत खुश हुईं.”

रेशमा अब नहीं रहीं. दमादम मस्त कलंदर सुनाकर वो चली गईं. आखिरी बार जब रेशमा ने जयपुर में ‘लम्बी जुदाई’ सुनाया तो कौन जानता था कि ये जुदाई बहुत लम्बी होने वाली है, इतनी लंबी कि फिर न मिले.

रेशमा न सही मगर फिज़ा में बिखरे उनके बोल उनकी मौजूदगी की गवाही देते रहेंगे.
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कांग्रेसी नेता ने बुलाया दावेदारी जताने के लिए, योजनाये बता कर खाना खिला दिया

election congressउदयपुर। विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकिट के दावेदारों और मौजूदा विधायक से नाराजगी तथा पार्टी की गुट बाजी दावेदारों कि घोषणा होने के पहले और ज्यादा बढ़ती जा रही है। उदयपुर ग्रामीण के एक कांग्रेसी दावेदार ने बुधवार को जिस आनन् फानन में प्रेस वार्ता आयोजित की उसी तेजी से प्रेस वार्ता का विषय बदल कर सेवादल के पदाधिकारियों को वार्ता में बैठा दिया और खुद वार्ता से गायब और वार्ता के लिए आये पत्रकारों को खाना खिला कर रवाना करदिया ।
उदयपुर ग्रामीण के कांग्रेसी दावेदार देवेन्द्र मीणा ने बुधवार को होटल पारस महल में पत्रकारो कि प्रेस वार्ता आयोजित कि जिसका मकसद ग्रामीण में अपनी दावेदारी को और ज्यादा मजबूत करना था। लेकिन आखरी वक़्त में टिकिट मिलने के पहले प्रेस वार्ता आयोजित करने कि गलत सलाह पर उन्होंने विचार कर प्रेस वार्ता का विषय बदल दिया और सेवादल के पदाधिकारी अध्यक्ष दयालाल चौधरी, प्रवक्ता राजकुमार सुहालका आदि ने प्रेस को सम्बोधित किया और कांग्रेस पार्टी में सेवा दल के योगदान कि बात कही और आगामी चुनाव में सेवादल कांग्रेस कि विजय में अपने योगदान का ब्यौरा दिया। जिन बातों का कोई ओचित्य नहीं न ही इस वार्ता कि कही आवश्यकता नहीं दिखी । जब सेवा दल के पदाधिकारियों से पूछा गया कि प्रेस वार्ता को बुलाने का मकसद कुछ और था और यहाँ आकर बात कुछ और हो रही तो इस पर कोई भी पदाधिकारी सही जवाब नहीं दे पाया । अध्यक्ष दयालाल चौधरी ने बताया कि ग्रामीण से प्रमुख दावेदार देवेन्द्र मीणा प्रेस से रूबरू होना छटे थे लेकिन उनके रिश्तेदार में किसी कि मौत हो गयी इस वजह से वह नहीं आये ।
जबकि सूत्रों के अनुसार उन्हें वार्ता के ठीक एक घंटे पहले पार्टी के बड़े पदाधिकारियों ने इस तरह प्रेस वार्ता नहीं करने कि सलाह दी और कहा कि यदि तुम्हे टिकिट मिलता होगा तब भी नहीं मिलेगा और इससे आगे मेसेज अच्छा नहीं जाएगा । तब आखरी वक़्त में प्रेस वार्ता का विषय बदला गया। ग्रामीण में अभी मौजूदा कांग्रेसी विधायक सज्जन कटारा के खिलाफ एक तरह से यह खुली बगावत है। क्यों कि सूत्रों के अनुसार देवेन्द्र मीणा और उनके गुट का मानना है| कि सज्जन कटारा से लोग खुश नहीं है । और यदि उनको टिकिट दिया गया तो ग्रामीण सिट जा सकती है । दबी जबान में सज्जन कटारा पर परिवार वाद का भी आरोप लगाया जा रहा है।

मेले के रंग में सर चढ़ कर बोला राजस्थानी नृत्यों का जादू

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उदयपुर। समूची कायनात में अपनी खुशबू बिखेर रही है राजस्थान की धरती। उसी रत्नगर्भा वसुंधरा के वरद पुत्र है ‘भवई नृत्य’ के अनुपम कलाकार हरिहर बाबा। उम्र 65 वर्ष, सिर पर घडे 71, प्रस्तुति – 30 मिनट, हर एक अचंभित था। इस उम्र में लोग अपना वजन नहीं संभाल पाते और भवई नृत्य की शानदार प्रस्तुति ने लोगों का मन मोह लिया। मौका था नगर निगम में आयोजित दीपावली मेला 2013 की 5वें दिन आयोजित सांस्कृतिक संध्या में राजस्थानी कार्यक्रम का। राजस्थानी संस्कृति का जादू मंगलवार को लोगों के सर चढ कर बोला। बालीवुड के गानों से दूर राजस्थानी संस्कृति को जिंदा रखने वाली रेखा राव ने निगम के इस मंच पर एक से एक प्रस्तुतियों को लोगों ने काफी सराहा। राजस्थानी गानों की लता मंगकेश्कर कही जाने वाली रेखा राव ने मंगलवार को अपने अनूठे अंदाज में लोगों को ठुमके लगाने पर मजबूर कर दिया। एक से एक शानदार प्रस्तुति देते हुए उन्होंने ना केवल युवाओं को थिरकाया बल्कि हर एक राजस्थानी गीतों पर फिदा हो गया। राजस्थानी कलाकारों की इन प्रस्तुतियों ने देर रात तक लोगों को बांधे रखा और घुमर, मटकी और भवई नृत्यों की प्रस्तुति पर खुले मन से तालियों के द्वारा उनका हौंसला बढाया।

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बदलते मौसम में रखें होठों का स्पेशल ध्यान – nicc beauty tips

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sweeti-chhabaraNICC की डायरेक्टर स्वीटी छाबड़ा सर्दियों के मोसम में होठों की खास देखभाल के लिए बताती है कि , सर्दियों के मौसम में होंठ अक्सर फटे जाते हैं, क्योंकि होंठों से नेचुरल ऑइल खत्म हो जाता है। जिसके कारण होंठ फटे और रूखे सूख हो जाते है। सर्दी में तेज हवाएं और सूर्य की तेज किरणों से हारमोंस में असंतुलन पैदा हो जाता है जिसकी वजह से होंठ फट जाते हैं। सूखे होंठों से बार-बार पपडी निकालते रहने से भी होंठ मुलायम नहीं रह पाते है। ऎसे में लिप बाम नहीं लगाना चाहिए। आप कुछ समय के लिए होंठों को बिना कुछ लगाएं खुला छोड दें। अगर होंठों पर बार-बार पपडी जमती हो, तो डॉक्टर से सलाह लें। डॉक्टर द्वारा बताए गए उपचार से आप इस बीमारी से मुक्त हो सकती हैं। वैसे होंठ फटने का सबसे बडा कारण विटामिन की कमी होती है। अगर आप इससे छुटकारा पाना चाहती हैं तो विटामिन बी युक्त खाद्य पदार्थ को अपने खाने में शामिल करें। उदाहरण के तौर पर ब्राउन राइस, अंडा आदि और साथ ही कुछ घरेलू उपाय ट्राइ करें जिससे इस मौसम में आप अपने होठों की नमीं और मुस्कान बरकरार रख सकें।

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डाइट रखें खास ध्यान सर्दियों में अक्सर लोग पानी का सेवन कम कर देते हैं। इससे भी कई बार वे डीहाइड्रेशन का शिकार हो जाते हैं जिससे उनके होठ फटने लगते हैं। ऎसा न हो, इसके लिए प्रतिदिन दो से तीन लीटर पानी का सेवन जरूर करें। साथ ही हरी और पत्तेदार सब्जियां खूब खाएं। गाजर, टमाटर आदि के सेवन से भी होठ नहीं फटते।

एलोवेरा से करें मसाज एलोवेरा के पौधे से निकलने वाले सेमीलि�`ड जेल की मसाज न सिर्फ त्वचा के लिए बल्कि होठों के लिए भी बहुत फायदेमंद है। अगर आपको एलोवेरा नहीं मिल पा रहा तो आप बाजार में मिलने वाले एलोवेरा जेल से भी रोज सोने के पहले होठों पर मसाज करें। इससे होठों की नमी बरकरार रहेगी।

वैसलीन से बनाएं जेल वैसे तो वैसलीन की मसाज भी होठों की नमी को बरकरार रखने में फायदेमंद है लेकिन अगर इससे भी आपको लंबे समय तक आराम नहीं मिलता तो शहद या ऑलिव ऑयल डालकर आप इसे और अधिक प्रभावी बना सकते हैं। शहद के साथ वैसलीन का यूज करने का सबसे अच्छा तरीका है कि पहले आप वैसलीन से होठों की मसाज करें और फिर 15 मिनट बाद होठों पर शहद से मसाज करके सिर्फ पानी से मुंह धो लें। दिन में दो बार इस मसाज से बेहतर परिणाम मिलेगा। इसी तरह वैसलीन में जैतून का तेल दिन में दो से तीन बार होठों पर लगाने से भी फटे होठों को आराम मिलता है। इस प्रक्रिया को चार से पांच दिन लगातार करने से होठों की खोयी नमी लौट आती है।

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सोने से पहले करें देखभाल सर्दियों में आपके होठ बिल्कुल न फटें इसके लिए जरूरी है कि आप रोज सोने से पहले होठों पर मिल्क क्रीम की मसाज करें। इसके अलावा सोने के पहले नाभि में रोज सरसो का तेल या देशी घी लगाने से भी होठ नहीं फटते। चाहें तो सोने से पहले मलाई में चुटकी भर हल्दी डालकर रोज होठों की मालिश करें। इसके अलावा, सोने से पहले होठों पर खीरे का जूस लगाकर 20 मिनट तक छोड दें और फिर पानी से धो लें। इससे भी होठ नहीं फटेंगे।

लगाएं गुलाब का पेस्ट गुलाब की पंखुडियों को धो लें और दूध में दो घंटे तक भिगोकर रखें। इसके बाद इन्हें मैश करके पेस्ट बना लें और होठों पर लगाएं। 15 से 20 मिनट के बाद होठ धो लें। सर्दियों में अगर आपके होठ बहुत रूखे हो जाते हैं तो प्रतिदिन एक बार गुलाब का यह पेस्ट होठों पर जरूर लगाएं।