उदयपुर/राजसमंद। केलवाड़ा क्षेत्र के छीतर की बादल गांव में बीती रात घुसा पैंथर एक छत पर सा रहे माता-पिता के पास से एक १२ साल की बच्ची को उठा ले गया। जाग होने बाद बच्ची का शव मकान के पिछवाड़े पड़ा मिला। इस घटना से ग्रामीणों में भय और वन विभाग के प्रति काफी गुस्सा है।छत पर सो रहे माता-पिता के पास से बच्ची को उठा ले गया पैंथर
उदयपुर/राजसमंद। केलवाड़ा क्षेत्र के छीतर की बादल गांव में बीती रात घुसा पैंथर एक छत पर सा रहे माता-पिता के पास से एक १२ साल की बच्ची को उठा ले गया। जाग होने बाद बच्ची का शव मकान के पिछवाड़े पड़ा मिला। इस घटना से ग्रामीणों में भय और वन विभाग के प्रति काफी गुस्सा है।कटारियाजी, आनंदपाल को छोड़ो, चोरों को ही पकड़वा दो
उदयपुर। गृह सेवक गुलाबचंद कटारिया कुख्यात बदमाश आनंदपाल को एनकाउंटर नहीं करने का लॉलीपोप दे रहे हैं कि क्रआ आजो नहीं होगा एनकाउंटर।ञ्ज, वहीं शहर की जनता कह रही है कि कटारियाजी, आनंदपाल को छोड़ा, शहर में बढ़ रही चोरियों की वारदातों पर ही अंकुश लगवा दो, तो काफी है। शहर में बढ़ती चोरियों से शहरवासी परेशान हो गए हैं।मौसम विभाग के फेसबुक पेज पर हर घंटे शेयर की जा रही है मानसून की जानकारी, जताई जा रही है अच्छे मानसून की उम्मीद

गुलाबचंद कटारिया की फेसबुक पर हुई फजीहत
उदयपुर। गृह सेवक गुलाबचंद कटारिया द्वारा अपने उद्बोधन में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के लिए बार बार गाली का प्रयोग करने के बाद फेसबुक पर अपने पेज पर माफ़ी तो मांग ली लेकिन कई लोगों ने कमेन्ट में कटारिया की जम कर खिचाई की। कटारिया समर्थक कई भाजपा युवा पदाधिकारी कटारिया का बचाव भी करते नज़र आये लेकिन इसके बावदूद १५० से अधिक कमेन्ट में कटारिया को लोगों ने खूब खरी खोटी सुनाई।पुलिस खुद बनी ग्राहक, फिर लपेटा जिस्मफरोशी करने वाले हैवानों को
राजसमंद. जिला विशेष शाखा ने मंगलवार को पीटा एक्ट के तहत कार्रवाई करते हुए दो जगहों पर छापे मारे जहां से 4 महिलाओं सहित 2 दलालों को गिरफ्तार किया गया। दो महिलाएं मुंबई की कॉल गर्ल हैं जबकि अन्य दो कांकरोली से ही हैं।जानकारी के अनुसार, जिला विशेष शाखा ने डीएसपी माधुरी वर्मा के नेतृत्व में राजसमंद के कांकरोली बस स्टेंड स्थित एक होटल व झील किनारे स्थित लाल बंगले के पास एक मकान पर कार्रवाई की। इसके लिए पुलिस ने दोनों जगहों पर जवान को बोगस ग्राहक बनाकर भेजा। इसके बाद जिस्मफरोशों को धर दबोचा। कार्रवाई में दलाल छापली निवासी तुलसा सिंह पुत्र अर्जुनसिंह रावत, पालरा भीम निवासी हिम्मतसिंह पुत्र मोतीसिंह रावत, मयूर होटल के मैनेजर अरड़किया रेलमगरा निवासी शंकरलाल पुत्र किशनलाल कुमावत को गिरफ्तार किया। इसके अलावा मुंबई की दो कॉल गल्र्स और कांकरोली की दो महिलाओं को भी पुलिस ने गिरफ्त में लिया।
5 दिन में कमाने वाली थीं एक लाख रुपए
पुलिस की जांच में सामने आया कि मुंबई की दो कॉल गल्र्स राजसमंद में 5 दिनों के लिए वेश्यावृत्ति के लिए बुलाया गया था। ये 5 दिन में 5 ग्राहकों से एक लाख रुपए कमाने वाली थीं। वहीं, अन्य दो महिलाएं कांकरोली की ही हैं, इसमें से एक महिला इसी तरह के मामले में पहले भी पकड़ी जा चुकी है।
राजस्थान के ग्रहमंत्री ने मनमोहन को 8 बार दी गाली, कहा-US में सा** को कोई भी ऐरा-गेरा नत्थू खेरा रिसीव करता था
उदयपुर .राजस्थान के होम मिनिस्टर गुलाबचंद कटारिया ने रविवार को चूरू में पार्टी वर्कर्स के प्रोग्राम में मनमोहन सिंह के खिलाफ आपत्तिजनक कमेंट किए। उन्होंने 8 बार एक ही गाली का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा, ” मनमोहन अमेरिका जाते थे तो सा* को एयरपोर्ट पर रिसीव करने के लिए ऐरा-गेरा नत्थू खेरा मंत्री आता था। अब मोदी जाते हैं तो खुद राष्ट्रपति ओबामा लेने आते हैं।आ ही गया एक रुका हुआ फ़ैसला…
चौदह साल, तीन महीने और सत्रह दिन पहले दंगाइयों ने अहमदाबाद में गुलबर्ग सोसायटी नाम की एक रिहायशी इमारत में आग लगा दी थी जिसमें 69 लोगों की मौत हो गई थी.
उस वारदात के लिए अदालत ने 11 लोगों को आजीवन कारावास की सज़ा सुना दी. एक मुजरिम को 10 साल की और 12 को सात-सात साल की क़ैद दी गई है.
अदालत का ये फ़ैसला ऐतिहासिक है. स्वतंत्र भारत के इतिहास में बिरले ही ऐसे मौक़े आए हैं जब धार्मिक फ़साद के दौरान हुए क़त्ल-ए-आम के दोषियों को सज़ा मिली हो.
ये छोटी उपलब्धि नहीं है कि गुजरात में 2002 में हुई हिंसा के मामलों में अब तक एक दर्जन से अधिक मुक़दमों में सवा सौ से ज़्यादा मुजरिमों को आजीवन कारावास की सज़ा मिल चुकी है.
सभी मुक़दमों में ये ज़ाहिर हुआ है कि कई दोषी दंगाई राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और उसके घटक, जैसे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद से जुड़े हुए थे.
इन दोषियों में सबसे चर्चित गुजरात की पूर्व मंत्री माया कोडनानी हैं, जिन्हें 91 लोगों के नरसंहार के आरोप में 28 वर्ष की सज़ा पहले ही सुनाई जा चुकी है.
तो क्या गुजरात के दंगा पीड़ितों को अदालत से इंसाफ़ मिल रहा है? सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ का मानना है कि अदालत का फ़ैसला निराश करता है.
थोड़ी देर पहले उन्होंने मुंबई से फ़ोन पर कहा, “अदालत ने सज़ा ज़रूर सुनाई है लेकिन ये कह कर केस को कमज़ोर कर दिया है कि आगज़नी करने वालों ने साज़िश नहीं रची थी.”
तीस्ता की संस्था सिटिज़ेंस फ़ॉर जस्टिस एंड पीस (सीजेपी) ने पीड़ितों की मदद करते हुए पिछले 14 सालों में कई मुक़दमे लड़े हैं.
उन्हीं की कोशिशों के कारण सर्वोच्च न्यायालय ने कई मुक़दमे अपनी निगरानी में चलवाए. कुछ मुक़दमे गुजरात से बाहर की अदालतों में भी भेजे.
इसके चलते तीस्ता का भाजपा-आरएसएस से छत्तीस का आँकड़ा रहा है. एक दिन पहले ही केंद्र सरकार ने सीजेपी का विदेशी चंदा लेने का लाइसेंस रद्द कर दिया.

गुजरात सरकार ने तीस्ता पर पीड़ितों से जमा किए गए चंदे में ग़बन करने के आरोप लगाए हैं.
उनकी गिरफ़्तारी पर फ़िलहाल सर्वोच्च न्यायालय ने रोक लगाई हुई है. गुजरात दंगों के कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई सालों से तीस्ता के निशाने पर हैं.
2002 में जब राज्य में हुए दंगों में एक हज़ार से ज़्यादा मुसलमान मारे गए थे, तो नरेंद्र मोदी वहाँ के मुख्यमंत्री थे.
गुलबर्ग सोसायटी के जिस मकान में आग लगाई गई थी वो एहसान जाफ़री नाम के एक पूर्व सांसद का था.
आग में मरने वाले उनके यहाँ शरण पाए घबराए हुए मुसलमान थे, जिनमें औरतें और बच्चे भी थे.
जब जाफ़री की विधवा ज़ाकिया ने आरोप लगाया कि मोदी ने जानबूझकर दंगों करवाए तो सर्वोच्च न्यायालय ने विशेष पुलिस टीम गठित करके जाँच करवाई.
2012 में इस टीम ने मोदी के ख़िलाफ़ आरोपों को बेबुनियाद कह दिया. इसके बाद धारणा बन गई है कि सर्वोच्च न्यायालय ने मोदी को दंगे होने देने के आरोप से बरी कर दिया है. लेकिन ये धारणा ग़लत है.

जाँच टीम ज़रूर सर्वोच्च न्यायालय ने बनाई लेकिन उसकी रिपोर्ट निचली अदालत में जमा हुई थी.
उस रिपोर्ट के ख़िलाफ़ ज़ाकिया जाफ़री की अपील गुजरात उच्च न्यायालय में सुनी जा रही है.
वहाँ से जो भी फ़ैसला होगा उसके बाद ही रिपोर्ट सर्वोच्च न्यायालय के सामने आएगी.
गुलबर्ग सोसायटी के हत्याकांड का फ़ैसला भले ही आ गया है. लेकिन मोदी के ख़िलाफ़ ज़ाकिया जाफ़री का मुक़दमा अभी जारी है.
देशभर में मुसलमानों की नज़र उस मुक़दमे पर टिकी है, उसका नतीजा आने में चाहे कितने ही साल लग जाएँ.
सोजन्य – बीबीसी –
यहां लगती है गजल गायकी की क्लास, सिखाया जाता है अल्फाजों को नज्मों में बुनना

उदयपुर. गजल जज्बात और अल्फाज का एक बेहतरीन मज्मुआ है। वह आबरू-ए-शायरी भी है जो आम से खास तक हरदिल अजीज है। गजल कई शेर से मुकम्मल होती है, हर शेर में दो पंक्तियां और हर पंक्ति को मिसरा कहते हैं। इस तरह की कई उपयोगी और आधारभूत जानकारियां गजल अकादमी के बैनर तले चल रहे गजल गायकी शिविर में सरदारपुरा स्थित महाराणा कुंभा सभागार में दी जा रही हैं।
शिविर में डॉ. प्रेम भंडारी, डॉ. देवेन्द्र हिरण व डॉ. तामिल मोदी में सुबह 9.30 से 11.30 तक सुरों के अभ्यास से लेकर गजल व नज्मों में उर्दू अल्फाजों के तलफ्फुस तथा गजल में शास्त्रीय संगीत के महत्व को समझा रहे हैं।
डॉ. तामिल ने बताया कि गजल का पहला शेर मत्ला, दोनों मिसरों में काफिया और काफिए के बाद जो शब्द आए उसे रदीफ कहा जाता है। गजल के आखरी शेर जिसमें शायर का नाम या उपनाम (तखल्लुस) हो उसे मक्ता कहा जाता है। एेसे ही शेर की पंक्तियों की लंबाई के हिसाब से गजल की बहर तस की जाती है। गजल का बहतरीन शेर हासिले-गजल कहलाता है और मुशायरे की सबसे उम्दा गजल हासिले मुशायरे के खिताब से नवाजी जाती है।

झीलों की नगरी में गायकी के इस फन को अलहदा मुकाम देने की गरज से पहली बार सजी सुरों और शायरी के अदब की महफिल में 30 से अधिक प्रतिभागियों में स्कूल-कॉलेज स्टूडेंट्स, आयकर अधिकारी, व्यवयायी, समाजसेवी और संगीत विधा से जुड़े व्याख्याता तक इस विधा के सांगीतिक पक्ष के अलावा साहित्यिक स्वरूप से रूबरू होकर निहाल हो रहे हैं।
गुरुवार को कार्यशाला में उर्दू के मकबूल शायर और समीक्षक डॉ.खलील तनवीर ने गजलों की विकास यात्रा और विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि संगीत को त्रिवेणी इसलिए भी कहा जाता है कि इसमें तीन बातें शब्द, तर्ज और आवाज का बड़ा महत्व होता है। अपनी दिलकश शायरी से लिखने वाले, असरदार संगीत से सजाने वाले और बेहतरीन ढंग से रसिकों तक पहुंचाने वाली मखमूर आवाजें नहीं होतीं तो यह विधा किताबों में दफन ही रह जाती।
ट्रैक्टर की ट्रॉली में घुसी कार, राजसमन्द के चार युवाओं की हो गई मौत
उदयपुर . क्षेत्र के करजिया घाटी के पास मंगलवार रात साढ़े दस बजे तेज गति से आ रही अनियंत्रित कार आगे चल रहे ट्रैक्टर की ट्रॉली में घुस गई। हादसे में कार में सवार चार जनों की मौके पर ही मौत हो गई। ट्रैक्टर का ड्राइवर व खलासी घायल हो गए। सूचना पर पहुंची पुलिस ने यातायात सुचारू करवाया व चारों शव को हॉस्पिटल में रखवाया।
इधर, मृतकों की रात साढ़े 11 बजे बाद शिनाख्त हुई। पुलिस ने बताया कि हादसे में राजनगर निवासी इरफान, शाकिर व नदीम की मौके पर ही मौत हो गई। जबकि एक अन्य युवक इरशाद की देर रात मौत होने की सूचना मिली। कार में सवार चारों युवक उदयपुर से कांकरोली की ओर जा रहे थे।
मस्जिद ए हरम में होता है दुनिया का सबसे बड़ा इफ्तार एक साथ 3 लाख लोग करते हैं इफ्तारी

दुनिया का सबसे बड़ा इफ़्तार मदीना शहर में स्थित मस्जिद ए हरम में दुनिया का सबसे बड़ा इफ़्तार देखने को मिल रहा है. 12000 से ज़्यादा मेज़ें रोज़ लगाई जा रही हैं, इन मेज़ों पे तक़रीबन 3 लाख मुसलमान एक दिन में इफ़्तार कर रहे हैं, इस पूरे कार्यक्रम का रोज़ाना का ख़र्चा 10 लाख सऊदी रियाल है जो भारतीय रुपयों में लगभग 1.78 करोड़ आएगा.
खाने पीने की बात करें तो 130000 लीटर ज़मज़म पीया जा रहा है जबकि 50000 लीटर अरबी कॉफ़ी, 300000 ब्रेड रोल, 50000 लीटर दही और दूध और 50000 लीटर फलों के जूस और 40 टन ख़जूर रोज़ाना लग रहे हैं.
इफ़्तार 15 मिनट तक चलता है. खाने की व्यवस्था अलग अलग लोगों ने ले राखी है. इसमें लेकिन एक बड़ी अच्छी बात ये भी है कि इफ़्तार ख़त्म होने के 15 मिनट बाद वहाँ पर किसी भी गंदगी का कोई निशाँ नहीं रहता, ना आपको कहीं कोई पानी नज़र आएगा ना ही खाने का निशाँ. सुभान अल्लाह


