बुढ़ापा विरोधी और खूबसूरती का प्रतीक है , जानिए, ‘रोज़ा’ रखने के अद्भुत मेडिकल बेनिफिट्स!

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निस्संदेह रोज़ा एक पवित्र इबादत है और उसका इनाम केवल भगवान ही दे सकता है लेकिन रोज़ा के नतीजे में मनुष्य को ऐसे अद्भुत चिकित्सा लाभ भी प्राप्त होते हैं जिनका आम लोग कल्पना भी नहीं कर सकते।

विशेषज्ञों का कहना है कि तेजी से मनुष्य के बाहरी सौंदर्य, त्वचा की ताजगी, बालों यहां तक कि नाखूनों के लिए भी उपयोगी साबित होता है।

अल अरबिया समाचार चैनल के कार्यक्रम ” सबाह अल अरबिया” में बात करते हुए खाल मामला, बुढ़ापा और कॉस्मेटिक सर्जरी विशेषज्ञ डॉ सअद अस्स्कीर  ने बताया कि एक सप्ताह में 16 घंटे का रोज़ा बुढ़ापे के प्रभाव को कम करने में मदद देता है। उन्होंने इस संबंध में वर्ष 1980 में किए गए एक शोध का भी हवाला दिया और बताया आज तक इस शोध को एक प्रमाण पत्र के रूप में माना जाता है।

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ज़हरीले सामग्री से छुटकारा:

रोज़ा के बिना मानव शरीर की शक्ति और ऊर्जा प्रणाली पाचन के कारण घट जाती है। मगर 12 घंटे के रोज़े के बाद शरीर की ऊर्जा प्रणाली पाचन के निर्देश पर काम नहीं करती। बारह घंटे के रोज़े के बाद मानव शरीर में मौजूद ज़हरीला पदार्थ और अनियमित पदार्थ नष्ट हो जाते हैं। इस तरह शरीर को अनियमित पदार्थ से मुक्ति मिलती है।

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बुढ़ापा:

डॉक्टर सैक़र ने बताया कि यह आभास सही नहीं है कि रोज़ा मनुष्य को कमजोर कर देता है। रोज़ा रखने से इंसान बुढ़ापे को रोकने के सफल प्रयास कर रहा होता है। रोज़े की अवस्था में मानव शरीर में मौजूद ऐसे हार्मोन हरकत में आ जाते हैं जो बुढ़ापे का विरोध करते हैं। रोज़ा से मानव त्वचा मजबूत होती है और उसमें झुर्रियां कम होती हैं।

उन्होंने हदीस का भी हवाला दिया जिसमें पैगम्बर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया था कि “रोज़ा रखो स्वास्थ्य पाओ”। डॉक्टर सैकर का कहना था कि सप्ताह में 16 घंटे के एक रोज़े से मानव शरीर को अद्भुत चिकित्सा लाभ प्राप्त होते हैं।

उन्होंने कहा कि हर दिन रोज़े के चिकित्सा लाभ सामने आ रहे हैं। रोज़ा कैंसर, हृदय रोग और धमनियों के रोगों के आगे भी ढाल है।

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त्वचा की ताजगी:

गर्मी के मौसम में आने वाले माहे रमज़ान में मानव शरीर को रोज़े की हालत में पानी की ज्यादा जरूरत महसूस होती है। सख्त गर्मी में त्वचा झुलस जाती है। डॉक्टर सैकर सुझाव देते हैं कि इफ्तार के बाद और सेहरी के समय में पानी का अधिकतर इस्तेमाल किया जाए। इससे त्वचा को ताजा रखा जा सकता है। इसके अलावा ग्लिसरीन के उपयोग से भी त्वचा को ताजा किया जा सकता है।

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रोज़ेदार के शरीर में कौन सी पदार्थ ज्यादा फैलती है:

अल अरबिया कार्यक्रम में बोलते हुए त्वचा मामलों के विशेषज्ञ डॉक्टर अल सैकर ने कहा कि मानव शरीर को कोलाजीन [बे रंग प्रोटीन जो ज्यादातर गलाई सेन, हाइड रोक्सी प्रोटीन और परोलियन पाई जाती है। शरीर के सभी हेरफेर ऊतक में खुसूसन त्वचा, करी हड्डी और जोड़ बंधन में होती है] और अलासटन के फैलाव की आवश्यकता होती है और रोज़ा इस में मदद करता है।

मानव त्वचा और नाखूनों पर भी रोज़ा का सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। नाखून, सर के बालों का विकास और उनकी मजबूती में वृद्धि होती है। मानव और चेहरे के रंग पर सेट होने वाले प्रभाव नाखूनों पर भी प्रभावित होते हैं. रोज़े  की हालत में शरीर अपने हार्मोनज को फैलाता है जो त्वचा की सौंदर्य और नाखूनों चमक और बालों की मजबूती का सबब बनते हैं। यहां तक कि रोज़े से संक्रमण बैक्टीरिया को रोकने और बुढ़ापे का विरोध करता है।

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सावधानियां:

विशेषज्ञ माहे रमजान आने से पहले रोज़ेदारों को कुछ सावधानियां बरतने का भी सुझाव दिया है। उनका कहना है कि रोगी और गर्भवती महिलाओं को रमजान से पहले अपना मेडिकल जाँच करा लेना चाहिए ताकि यह पता चल सके कि उन्हें रोज़े की हालत में कौन कौन से काम करने हैं खाने में किस तरह की सावधानी की जरूरत है।

अन्य प्रस्ताव आम रोज़ेदारों के लिए है। रोज़े की वजह से अधिक भूख और प्यास मानव चिकित्सा से अत्यधिक खाने पीने पर मजबूर कर सकती है मगर सहरी और इफ्तार में खाने-पीने में संयम का प्रदर्शन करना चाहिए।

खाना खाने के तुरंत बाद सोने की आदत नहीं डलनी चाहिए बल्कि शरीर को भोजन पचाने का कुछ मौका जरूर देना चाहिए। संतुलित भोजन के साथ खाने में सब्जियों की मात्रा बढ़ा देनी चाहिए।

स्मृति को ‘डियर’ पर आपत्ति, छिड़ी मंत्री से बहस

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सोशल मीडिया पर बिहार के शिक्षा मंत्री डॉक्टर अशोक चौधरी और केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री स्मृति इरानी की ट्विटर पर झड़प चर्चा का विषय बन गई है.

बिहार के शिक्षा मंत्री ने जब केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री को अपने ट्वीट में संबोधित करते हुए ‘डियर’ लिखा तो इसके जवाब में स्मृति ने पूछ लिया, ‘महिलाओं को डियर कबसे लिखने लगे.’

बस फिर क्या था, ट्विटर पर दोनों मंत्रियों के बीच पूरी बहस छिड़ गई जो उनके मंत्रालयों के कामकाज तक जा पहुँची.

अशोक चौधरी ने अपने ट्वीट में लिखा था, “डियर स्मृति जी, कभी राजनीति और भाषण से वक़्त मिले तो शिक्षा नीति पर भी ध्यान दें.”

इसके जवाब में स्मृति ने ट्वीट किया, “महिलाओं को डियर कहकर कबसे संबोधित करने लगे अशोक जी?”

स्मृति इरानी और अशोक चौधरी के ट्वीटImage copyrightOTHER

अशोक चौधरी ने जवाब दिया, “आपका अपमान करने के लिए नहीं, बल्कि सिखाने के लिए बता रहा हूँ. पेशेवर ईमेल डियर से ही शुरू होते हैं.”

उन्होंने आगे लिखा, “स्मृति जी कभी मुद्दे का जवाब दीजिए, घुमाएं मत.”

इस ट्वीट के बाद स्मृति इरानी ने सीधे शिक्षा के मुद्दे पर आते हुए अशोक चौधरी से पूछा, “शिक्षा नीति पर आपके राज्य के विचार नहीं मिले हैं और न ही जब आपके साथ आमने-सामने बैठक हुई थी, तब आपने मुझे कोई सुझाव दिया था.”

स्मृति इरानी और अशोक चौधरी के ट्वीटImage copyrightOTHER

इसके जवाब में अशोक चौधरी ने लिखा, “आपसे गुज़ारिश है कि हमारी मीटिंग के मिनेट्स सार्वजनिक कर दीजिए. दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा.”

स्मृति इरानी ने लिखा, “सर, मैं अब ये सार्वजनिक कर दूंगी. आपसे गुज़ारिश है कि शिक्षकों की दो लाख रिक्तियों को भरें और केंद्रीय विद्यालयों के लिए ज़मीन दें.”

अशोक चौधरी ने जवाब दिया, “मैं जानता हूँ कि अपने वादे कैसे पूरे करने हैं. आपसे गुज़ारिश है कि आपने जो वादे किए हैं उन्हें पूरा करें.”

स्मृति इरानी और अशोक चौधरी के ट्वीटImage copyrightOTHER

दो मंत्रियों की ट्विटर पर हुई इस सार्वजनिक तक़रार में कुछ आम लोगों ने भी ख़ूब ट्वीट किए.

द चकोलेबाज़ नाम से संचालित अकाउंट से लिखा गया, “मैडम 12वीं के आगे पढ़े होते तो पता चलता कि ऑफ़िशियल और पेशेवर पत्र कैसे लिखे जाते हैं.”

स्कॉची के नाम से संचालित अकाउंट से ट्वीट किया गया, “आपने कभी जीवन में कोई औपचारिक पत्र या ईमेल नहीं लिखा क्या, स्मृति जी?”

वहीं भारतीय जनता युवा मोर्चा स्टडी सर्किल ने अशोक चौधरी को संबोधित करते हुए ट्वीट किया, “थोड़ी तमीज तो सीख लीजिये श्रीमान! न अपने पद की गरिमा का ख्याल, न दूसरों का. स्मृति जी के ट्वीट से सीखिये कुछ.”

स्मृति इरानी का ट्वीटImage copyrightOTHER

एक यूज़र पटेल सरल ने ग़लत अंग्रेज़ी में स्मृति इरानी से पूछा, “अगर आप कॉलेज या यूनिवर्सिटी गई होतीं तो आपको पता होता कि लोगों को डियर कहना सामान्य बात है.”

साभार – बीबीसी हिंदी

कोलोनी में जंगली जानवरों की दहशत

IMG_4754उदयपुर। हिरणमगरी क्षेत्र की पानेरियों  की मादड़ी में बीती रात जंगली जानवर ने हमला करके पांच गायों को गंभीर रूप से घायल कर दिया। इनमें से एक गाय की मौत भी हो गई। आशंका है कि उक्त हमला पैंथर या जरख द्वारा किया गया है।
गांवों से होते हुए अब पैंथर व जरख जैसे जंगली जानवरों का शहरी क्षेत्र में भी आतंक बढ़ता जा रहा है। पुरोहितों की मादड़ी में भी बीती रात ऐसा ही हुआ। ग्रामीणों का कहना है कि हमला पैंथर द्वारा किया गया, लेकिन वनविभाग के अधिकारियों को यकीन नहीं है। आशंका है कि जरख या अन्य जंगली जानवर ने उक्त हमला किया हो। पुरोहितों की मादड़ी में जंगली जानवर ने बीती रात गायों पर हमला कर दिया, जिससे पांच गायें गंभीर रूप से घायल हो गई। इनमें से एक गाय की मौत हो गई। अन्य गायोंं का उपचार किया जा रहा है। गायों के मुंह और गर्दन सहित शरीर पर अन्य जगह पंजों के निशान हैं। सूचना मिलने पर आज सुबह पुलिस और वन विभाग के कर्मचारी और अधिकारी पहुंचे। वन विभाग के कर्मचारियों ने गायों पर हुए हमले को देखकर बताया कि यह काम कुत्तों का नहीं हो सकता। या तो जरख या पैंथर द्वारा यह हमला किया गया है। इस मामले की जांच शुरू हो गई है। डीएफो टी. मोहनराज के अनुसार शहर की इस घनी बस्ती में पैंथर का आना मुश्किल है, लेकिन फिर भी गीतांजलि अस्पताल के पीछे पहले एक-दो बार पैंथर देखा गया था, हो सकता है भटककर पैंथर इधर आ गया हो।

गर्लफ्रेंड से परेशान युवक ने फतहसागर में कूदा

IMG_4753उदयपुर। गर्लफें्रड व परिजनों से परेशान एक युवक ने आज दोपहर फतहसागर में कूद कर जान दे दी। मृतक द्वारा जल्दबाजी में लिखा गया सुसाइड नोट पुलिस को मिला है, जिसमें उसने गर्लफें्रड सहित अन्य लोगों को चेतावनी देकर छोडऩे का आग्रह किया है। उसने कुछ लोगों को उसकी बर्बादी का जिम्मेदार भी बताया है।
सूत्रों के अनुसार आज दोपहर एक युवक फतहसागर झील में कूद गया। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और गोताखोरों को बुलाया गया, जिन्होंने झील में शव को झील से निकालकर एमबी हॉस्पीटल के मुर्दाघर में रखवाया है। पुलिस को झील की पाल पर मिले बैग से मृतक की शिनाख्त हुई। मृतक का नाम दिनेश (२६) पुत्र गोपाल पुरोहित निवासी डांगियों की मगरी (भुवाणा) है। पुलिस को मिले सुसाइड नोट में मृतक दिनेश ने लिखा है कि क्रक्रउसकी लाइफ अच्छी चल रही थी, लेकिन कुछ लोगों ने उसकी लाइफ बिगाड़ दी। इनमें बड़े पिता राजेश पुरोहित, सुरेश पटेल, चंदा पालीवाल व कमला अहारी शामिल है, जिन्होंने मिलकर मेरी लाइफ खत्म कर दी। मेरी लाइफ में इंद्रा पटेल नामक लड़की लाई थी, जिसने बाद में मेरे साथ रहने से मना कर दिया। वो मेरे साथ नहीं रहना चाहती। मैंने मेरा सबकुछ दांव पर लगा दिया, अपनी नौकरी, अपना पैसा व अपना सबकुछ। और भी बातें हैं, जो पुलिस को मेरे मित्रों और परिजनों से पता चल जाएगी। इन सबको चेतावनी देकर छोड़ देना, ताकि सबक मिले।ञ्जञ्ज  शव को निकालने से पूर्व फतहसागर की पाल पर भारी भीड़ जमा हो गई। सूचना मिलने पर मृतक के परिजन फतहसागर झील और हॉस्पीटल के मुर्दाघर पहुंचे। पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है। पुलिस ने प्रारंभिक जांच में पाया कि उक्त युवक उसकी गर्लफ्रेंड व अन्य परिजनों से परेशान चल रहा था, जिस कारण उसने आत्महत्या की।

आतंक का आरोप, दान से मदद

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पिछले दो साल में देश भर में ऐसे दर्जनों मुसलमान युवा जेल से रिहा किए गए हैं जिन पर चरमपंथी घटनाओं में शामिल होने के आरोप थे.

अदालत ने इस तरह के मामलों में 100 से अधिक मुसलमान युवाओं को इलज़ामों से बाइज्जत बरी कर दिया है. इस तरह के युवाओं की मदद कर रही हैं कुछ मुस्लिम संस्थाएं. इनमें सबसे आगे है जमीयत-उल-उलेमा-ए हिंद.

अक्षरधाम मंदिर पर हमले का मामला हो या मालेगांव बम धमाके का, इस संस्था ने आतंकवाद के मामलों में मुस्लिम युवाओं का मुक़दमा लड़ने और उन्हें इंसाफ दिलाने में अहम भूमिका निभाई है.

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गुलज़ार आज़मी इस संस्था के लीगल सेल के अध्यक्ष हैं. वो कहते हैं कि अब तक उनकी संस्था ने 104 मुस्लिम युवाओं को आतंक के इलज़ाम से बरी करवाया है.

वो बताते हैं, “इनमें से कई ऐसे थे जिन्हें निचली अदालतों ने फांसी की सजा सुनाई थी.” उन्होंने बताया कि उनकी संस्था 65 मुक़दमों में 560 मुस्लिम युवाओं के मुक़दमे लड़ रही है.

आज़मी के मुताबिक़ जमीयत की वकीलों की एक टीम पहले हर केस के तह तक जाती है. यह टीम वही मुक़दमा लड़ने को तैयार होती है जिसमें ये साफ़ होता है कि मुल्ज़िम को फंसाया गया है या वो बेक़सूर है.

गुलज़ार आज़मी कहते हैं कि जमीयत ने इस काम को उस समय शुरू किया जब वकीलों की फीस न देने के कारण कई बेक़सूर मुस्लिम यवाओं को सज़ाएं मिलने लगीं. पैसों की कमी के कारण वो वकीलों की फ़ीस नहीं दे सकते थे और वो मुक़दमा हार जाते थे.”

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जमीयत ने रमज़ान के महीने में मस्जिदों में चंदा जमा करना शुरू किया है. हर साल मुसलमान अपनी कमाई का 2.5 फीसद हिस्सा ज़कात में दान करते हैं. कई लोग ग़रीबों को पैसे देते हैं और कई लोग ऐसी संस्थाओं को जो अच्छे कामों में जुटी हैं. जमीयत ने अब तक इन पैसों में से दो करोड़ रुपए इन मुक़दमों पर खर्च किए हैं.

इस पैसे का एक छोटा हिस्सा उन मुस्लिम युवाओं के परिवारों को दिया जाता है जो या तो जेल में हैं या जो बेगुनाह साबित होकर समाज से दोबारा जुड़ने की कोशिश कर रहे हैं.

गुलज़ार आज़मी के मुताबिक़ वो बेक़सूर ग़ैर मुस्लिमों के मुक़दमे भी लड़ते हैं. उनकी संस्था ने दो ऐसे हिंदुओं को भी बरी करवाया है जिन्हें मौत की सजा सुनाई गई थी. लेकिन ये आतंकवाद से जुड़े मुक़दमे नहीं थे.

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जमीयत के इस काम की सराहना मुसलमान खुलकर कर रहे हैं.

पश्चिम बंगाल में युवा मुस्लिम के संगठन के पदाधिकारी मुहम्मद कमरुजमां कहते हैं कि ग़रीब मुस्लिम नौजवान, जो पैसे की कमी की वजह से ख़ुद को निर्दोष साबित नहीं कर पा रहे हैं, ऐसे में उन्हें निर्दोष साबित करने के लिए जमीयत के पास कोई प्रोग्राम है तो यह अच्छी बात है.

कोलकाता की एक बड़ी मस्जिद के इमाम क़ारी मुहम्मद शफ़ीक़ कहते हैं कि ज़कात के पैसे को ग़रीब मुसलमानों की रिहाई के लिए अदालत में उनकी पैरवी के लिए खर्च की जाए, तो यह एक अच्छा क़दम है

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पिछले साल जमीयत ने एक और बड़ा क़दम उठाया. इसने आतंकवाद के मामलों से बरी हुए मुस्लिम युवाओं को मुआवज़ा दिलाने के लिए अदालत का दरवाज़ा खटखटाया है.

अक्षरधाम हमले के मामले में बरी हुए सभी छह मुसलमानों की तरफ से जमीयत ने गुजरात पुलिस के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में मुक़दमा किया है.

इसमें उन पुलिस अधिकारियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग की गई है जिन्होंने ग़लत तरीक़े से इन मुस्लिम युवाओं को गिरफ्तार किया था.

आतंक विरोधी क़ानून पोटा के सेक्शन 58 में इस बात का प्रावधान है कि इस तरह के मामलों में लोगों को फंसाने वाले पुलिस अधिकारियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की जा सकती है. उनसे बरी हुए लोगों को मुआवजा देने को कहा जा सकता है. इन अधिकारियों के खिलाफ आरोप सही पाए जाने पर अधिकारियों को दो साल की जेल की सजा हो सकती है.

इस केस की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जल्द शुरू होने वाली है.

‘साध्वी प्राची के खिलाफ़ कार्रवाई क्यों नहीं’

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अपने बयानों को लेकर चर्चा में रहने वाली और विश्व हिंदू परिषद की नेता के रूप में चर्चित साध्वी प्राची ने कहा है कि अब वक्त आ गया है कि भारत को मुसलमान मुक्त किया जाए.

समाचार एजेंसी पीटीआई की एक खबर के मुताबिक़ उन्होंने कहा कि देश को कांग्रेस मुक्त बनाने का मिशन पूरा हो चुका है और अब देश को मुसलमान मुक्त बनाने का समय है.

हालांकि विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने साध्वी के इस बयान से पल्ला झाड़ते हए कहा है कि संगठन नहीं चाहता कि मुसलमानों को भारत से निकाल दिया जाए.

संगठन का कहना है कि साध्वी प्राची का उससे कोई संबंध नहीं है.

संगठन के महासचिव सुरेंद्र जैन ने बीबीसी से कहा, ”वो चुनाव लड़ चुकी हैं. हमारे संविधान में लिखा है कि हमारा कोई भी पदाधिकारी चुनाव नहीं लड़ सकता.”

विहिप नेता ने कहा, ”हम नहीं चाहते कि मुसलमानों को निकाल दिया जाए. ये संभव भी नहीं है. हमारी सोच है कि भारत हमेशा से सबके लिए रहा है. मुसलमान पहले यहां व्यापारी के तौर पर आए थे. हमने ही उन्हें पहली मस्जिद बनाकर दी थी. हमारा देश के मुसलमानों से झगड़ा नहीं है. हमारा झगड़ा उन लोगों की मानसिकता से है जो कोई भी बात होगी तो पाकिस्तान ज़िंदाबाद के नारे लगाएंगे, या पाकिस्तान का झंडा फ़हराएंगे. हमारा झगड़ा उस मानसिकता से है, व्यक्तियों से नहीं.”

भाजपा ने भी साध्वी के इस बयान से किनारा कर लिया है. ख़बरों के मुताबिक़ भाजपा प्रमुख अमित शाह ने कहा है कि पार्टी साध्वी प्राची के विवादास्पद बयानों का समर्थन नहीं करती और पार्टी का एकमात्र एजेंडा विकास है.

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पीटीआई के मुताबिक़ साध्वी प्राची ने यह बयान उत्तराखंड के रूड़की में दिया. जहां ख़ानपुर के भाजपा विधायक कुंवर सिंह चैंपियन के घर पर एक समुदाय विशेष के लोगों ने हमला कर दिया था. साध्वी ने हमले को पूर्वनियोजित बताया.

साध्वी प्राची के इस विवादास्पद बयान पर सोशल मीडिया पर लोग बहस कर रहे हैं.

वरिष्ठ पत्रकार ओम थान्वी ने ट्वीट किया, “मुस्लिम-मुक्त भारत. फिर ईसाई-मुक्त भारत. फिर सिनेमा-मुक्त, साहित्य-मुक्त, कला-मुक्त भारत. अंततः भारत-मुक्त भारत. यही है अंतिम भगवा लक्ष्य.”

ख़ान युसुफ़ ने ट्विटर पर लिखा, ”क्यों केंद्र और राज्य सरकारें साध्वी प्राची के खिलाफ़ कार्रवाई नहीं कर रही हैं.

स्वप्निल लिखते हैं, ”वो अपने बोलने की आज़ादी के अधिकार का इस्तेमाल कर रही हैं. अगर आपको पसंद नहीं है, तो मत सुनिए.”

पत्रकार रूपा सुब्रमण्यम लिखती हैं, ”मौका आ गया है कि भारत को साध्वी प्राची/विहिप से मुक्त किया जाए. मोदी ने उन्हें गुजरात में अप्रासंगिक बना दिया था. अगला कदम: देशव्यापी.”

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फ़ारूख लिखते हैं, ”साध्वी प्राची हुईं मुक्त और अनुराग कश्यप की फ़िल्म उड़ता पंजाब पर प्रतिबंध.”

मुज़म्मिल मलिक ने ट्विटर पर लिखा, ”साध्वी प्राची ने जो कहा वो उनका अपना विचार है. मैं सिर्फ़ इतना कहूंगा, कहीं नफ़रत की आग में खुद न जल जाओ.”

समरीन लिखती हैं, ”साध्वी प्राची अपने एक हास्यास्पद टिप्पणी के लिए क्यों ट्रेंड कर रही हैं? वो बोलती हैं क्योंकि हम सुनते हैं. (उनको) सुनना बंद करें.”

जस भोगल ने ट्विटर पर लिखा, ”साध्वी प्राची ने भारत के बारे में अपनी काल्पनिक सोच को दर्शाया है. भारत जैसे सेक्युलर देश में जहां अल्पसंख्यकों के लिए सहिष्णुता रही है, ऐसा कभी नहीं होगा.”

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रमज़ान में बिखरे हज़ारों रंग

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राजस्थान में 20-22 तक आएगा मानसून, अच्छी बारिश होने की सम्भावना

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l_monsoon-in-rajasthanकेरल में मानसून की दस्तक के बाद अब राजस्थान में भी मानसून का इंतजार बढ़ गया है। मौसम विभाग की माने तो 20-22 जून तक मानसून राजस्थान में प्रवेश करेगा और इस बार जयपुर, उदयपुर, अजमेर कोटा में 108 प्रतिशत बारिश हो सकती है, वहीं जोधपुर और बीकानेर संभाग में सामान्य बारिश का योग रहेगा।

13 जून तक प्री मानसून शुरू हो जाएगा और उसके बाद प्रदेश को गर्मी से राहत मिल सकेगी। उधर, चूरू और अलवर क्षेत्र में दोपहर तक हल्की बारिश होती रही। प्रदेश में सामान्य तौर पर 17 या 18 जून तक मानसून शुरू हो जाता है, लेकिन इस बार केरल में हुई देरी का असर देश के अन्य हिस्सों में भी दिखाई दे सकता है।

मौसम विभाग का कहना है कि राजस्थान के अधिकतर संभागों में सामान्य से अधिक बारिश होगी और प्रदेश तरबतर रहेगा।केरल में झमाझमकेरल के कई हिस्सों में जोरदार बारिश हो रही है। भारी बारिश के चलते भूस्खलन से इडुक्की जिले में एक शख्स की मौत हो गई।

भारतीय मौसम विभाग के क्षेत्रीय केंद्र के प्रमुख के. संतोष ने कहा कि दक्षिण-पश्चिम मानसून केरल और लक्षद्वीप में आ गया है। उधर, राज्य के कई हिस्सों में मंगलवार रात से मूसलाधार बारिश हो रही है। मौसम विभाग ने पहले नौ जून को मॉनसून के केरल पहुंचने की उम्मीद जताई थी। भारी बारिश के मद्देनजर तिरुवनंतपुरम जिला प्रशासन एहतियाती कदम उठा रहा है और पोनमुदी जैसे पहाड़ी सैरगाहों में पर्यटकों को जाने से परहेज करने की सलाह दे रहे हैं।

जीजा से थे अवैध संबंध, बीच में आई बहन तो लगाया ठिकाने

illegalrelationजयपुर। अवैध संबधों ने फिर से एक परिवार की खुशियों पर ग्रहण लगा दिया और एक साथ दो परिवारों को हाशिए पर धकेल दिया। एक महिला की हत्या कर दी गई वह अलग। मनोहपुरा थाने का यह पूरा मामला बुधवार को दोपहर में एसपी ग्रामीण डॉ रामेश्वर ने खोला।

एसपी ने बताया कि तीन दिन पहले मनोहरपुरा थाना इलाके में पापडा की ढांणी गांव में रहने वाली लिछमा देवी की हत्या कर दी गई थी। उसके शव को जला दिया गया था। लिछमा देवी का शव बिशनगढ रोड पर मिला था। शव मिलने के बाद से ही परिवार के कुछ लोगों पर पुलिस को शक था।

पुलिस ने इस बारे में लिछमा देवी के पति प्रहलाद से सख्ती से पूछताछ की तो उसका सब्र जवाब दे गया। उसने पत्नी की हत्या करना कबूल कर लिया। हत्या उसने अपनी साली सावित्री के साथ मिलकर की थी। दोनों के बीव अवैध संबध थे। इस बारे में लिछमा ने कई बाद प्रहलाद और सावित्री को चेताया भी था लेकिन बात नहीं बनी। आखिर अवैध संबधों के बीच में आ रही लिछमा देवी को उसके ही पति और बहन ने मौत के घाट उतार दिया।

किसी को शक नहीं हो इस कारण से शव को भी जलाकर नष्ट करने की कोशिश की गई। लेकिन दोना को पुलिस ने गिरफ्तार कर ही लिया

उदयपुर की प्रीति MRS. UNITED NATIONS-2016 में करेंगी भारत को रिप्रजेंट

l_preeti-solanki-1465290715उदयपुर. लेकसिटी की प्रीति सोलंकी ने  फरवरी माह में       ‘मिसेज इंडिया मोस्ट टेलेंटेड क्वीन ऑफ सबस्टेंस-2016 का खिताब जीता था। अब वह जमैका में होने वाली मिसेज यूनाइटेड नेशंस इंटर नेशनल-2016 में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी।

प्रीति ने बताया कि यह प्रतियोगिता जुलाई में होगी जिसके लिए वे तैयारी कर रही हैं। इस बार वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करने जा रही हैं, ऐसे में बड़ी जिम्मेदारी है। वे इस बार और बेहतर प्रदर्शन कर खिताब  अपने नाम करने का पूरा प्रयास करेंगी। गौरतलब है कि प्रीति सोलंकी ने सबसे पहले उदयपुर में संडे स्कूल की शुरुआत की। यह राजस्थान में एक अनोखा संडे स्कूल है। इस कार्य के लिए उन्होंने अपनी जॉब तक छोड़ दी। वे पहले मेवाड़ यूनिवर्सिटी, चित्तौडग़ढ़ में मैनेजमेंट डिपार्टमेंट की विभागाध्यक्ष थीं। इसके अलावा वे कॉरपोरेट ट्रेनर, इंस्पिरेशनल स्पीकर, एचआर मैनेजर, सोशल वर्कर आदि कई भूमिकाएं निभा चुकी हैं।