सलमान ने कैट से कहा था, मुझे छोड़कर पछताओगी तुम !

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हाल ही की सुर्खियों में रणबीर-कैटरीना के ब्रेकअप की वजह सलमान को माना जा रहा था। आपको बता दें कि कैटरीना-रणबीर 6 साल तक रिलेशनशिप में रहने के बाद अब अलग हुए हैं।

गौरतलब है कि कैटरीना ने रणबीर को उस वक्त डेट करना शुरु किया था जब वह सलमान के साथ रिलेशनशिप में थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, साल 2009 में सलमान खान को जब रणबीर और कैटरीना के रिश्ते की भनक लगी थी तो वह गुस्से में आधी रात को कैटरीना के घर पहुंच गए थे।

पहले सलमान खान कैटरीना पर चिल्लाएं उसके बाद कैटरीना के सामने गिड़गिड़ाते हुए कहा कि वह उन्हें ना छोड़ें। सलमान ने कैट को नशे की हालत में चेतावनी भी दी थी। सलमान ने कहा था कि वो रणबीर को डेट ना करें क्योंकि एकदिन रणबीर उन्हें छोड़ देगा।

खबरों के अनुसार, सलमान-कैट के आगे बहुत रोए थे। उन्होंने कैट से कहा था मुझे छोड़ कर एक दिन बहुत पछताओगी तुम। दोनों के बीच नोकझोक चल ही रही थी तभी सलमान के मैनेजर और ड्राइवर ने बीच में हस्तक्षेप करते हुए सलमान को वहां से लेकर चले गए।

वनपाल की परीक्षा के दौरान महिलाओं शरीर का मापतौल पुरुष कर्मचारियों द्वारा किया

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उदयपुर। जहां एक ओर सरकार महिलाओं का सम्मान करने और उनकी रक्षा करने के लिए जोर-शोर प्रचार कर रही है, दूसरी ओर प्रदेश में वनपाल की परीक्षा के दौरान महिलाओं के साथ अपमानजनक घटना सामने आई है। राजस्थान वन विभाग में वनपाल पद के लिए हो रही शारीरिक दक्षता परीक्षा में महिला अभ्यार्थियों के शरीर का मापतौल पुरुष कर्मचारियों द्वारा किया गया। यह नियमों के उल्लंघन के साथ ही महिलाओं के अधिकारों का हनन है। नियमों के मुताबिक ऐसी किसी भी परीक्षा में महिला अभ्यार्थियों के शरीर का मापतौल केवल महिला कर्मचारी ही कर सकती है।

चितौडग़ढ़ में वनपाल पद के लिए लड़कों और लड़कियों की शारीरिक दक्षता परीक्षा चल रही थी। जहां लड़कों के शरीर का मापतौल पुरुष कर्मचारी द्वारा किया जा रहा था। महिला अभ्यार्थियों के शरीर का मापतौल महिला कर्मचारी की जगह पुरुष कर्मचारी ही कर रहा था। यह घटना एक कैमरे में कैद हो गई, जिसमें साफ-साफ दिख रह रहा है कि महिला अभ्यार्थियां असहज महसूस कर रही हैं। लेकिन न तो उस पुरुषकर्मी को शर्म आई और न ही वहां मौजूद अधिकारियों को। हैरान कर देने वाली बात तो यह है कि जहां पर पुरुष कर्मचारी महिला अभ्यार्थियों के शरीर का मापतौल कर रहा था, वहां उसके साथ एक महिला कर्मचारी भी मौजूद थी।

घटना पर वनमंत्री राजकुमार रिणवा का कहना है कि महिला डॉक्टर चाय पीने चली गई थी, जिसके पीछे से पुरुष कर्मचारियों ने महिला अभ्यार्थियों के शरीर का मापतौल लेना शुरू कर दिया। साथ ही उनका कहना है कि प्रारंभिक तौर पर उस केंद्र का नेतृत्व कर रहे डॉक्टर को निलंबित कर दिया गया है। मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी गई है। इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित काररवाई की जाएगी।

विरोध  नहीं : शायद इसे नौकरी का लोभ कहें या बेरोजगारी की मजबूरी। लेकिन उनका विरोध इसमें कहीं भी नजर नहीं आ रहा। आज के वक्त सरकारी नौकरी को लेकर युवाओं में बहुत ज्यादा कॉम्पीटिशन है, ऐसे में अभ्यार्थी परीक्षा देने एक ही सोच के साथ आता है कि उसे यह नौकरी कैसे न कैसे पानी है। ऐसे में चाहे उसे किन्हीं भी परिस्थितियों से गुजरना पड़ा। उनके दिमाग में केवल सरकारी नौकरी पाना ही  मकसद होता है।

कुख्यात गांवों में पुलिस की दबिश, 24 संदिग्ध हिरासत में

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उदयपुर। उदयपुर के पूर्व एसपी दबंग दिनेश एमएन के कार्यकाल के बाद पहली बार सलूंबर के कुख्यात गांव गामड़ापाल और लसाडिय़ा के गांव कालीभीत में बीती रात पुलिस ने भारी जाब्ते के साथ दबिश देकर २४ संदिग्धों को हिरासत में लिया है। इन बदमाशों पर चोरी, लूट और नकबजनी जैसे अपराधों में शामिल होने का अंदेशा है। पुलिस के आलाधिकारियों ने दो टीमों का गठन किया, जिसमें एक टीम का नेतृत्व एएसपी ग्रामीण ठाकुर चंद्रशील और दूसरी टीम का नेतृत्व गिर्वा डिप्टी रानू शर्मा ने किया।

एसपी राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक चंद्रशील ठाकुर के नेतृत्व में पुलिस अधिकारी और सवा सौ से अधिक पुलिस कर्मियों ने रात से तड़के तक सलूंबर के गामड़ापाल गांव में छापामार कार्रवाई कर 14 संदिग्धों को हिरासत में लिया। दूसरी ओर लसाडिय़ा थाना क्षेत्र के कालीभीत गांव में डिप्टी रानू शर्मा के नेतृत्व में 50 से अधिक जवानों ने छापामार कार्रवाई करते हुए 10 संदिग्धों को हिरासत में लिया। रात दो बजे से सुबह सात बजे तक विभिन्न थानों और पुलिस लाइन के सवा सौ से अधिक जवान, तीन डिप्टी और दस विभिन्न थानों के थानाधिकारियों ने ठाकुर चंद्रशील के नेतृत्व में गामडापाल गांव को घेरे रखा। हर एक घर की तलाशी ली। सुबह तक 14 संदिग्धों को पकड़ा।

जानकारी के अनुसार पुलिस को चोरी, लूटपाट और नकबजनी के कई मामलों में पिछले कई दिनों से अपराधियों की तलाश थी। सूचना के अनुसार गिरोह बनाकर काम करने वाले गामडापाल गांव के कुछ संदिग्ध युवकों की कई वारदात में लिप्त होने की सूचना थी। कल रात पुलिस ने इन संदिग्ध अपराधियों को पकडऩे के लिए पूरी तैयारी और जाब्ते के साथ बड़े ऑपरेशन को अंजाम दिया। इस कार्रवाई में  वल्लभनगर डिप्टी घनश्याम शर्मा, सराड़ा डिप्टी नारायणसिंह, ऋ षभदेव डिप्टी शिवलाल शामिल थे। रात दो बजे गांव में पुलिस ने छापा मारा और सुबह सात बजे तक कार्रवाई चलती रही। एएसपी चंद्रशील ठाकुर ने बताया कि गामड़ापाल गांव में पूर्व में भी कई युवक चोरी, लूटपाट और नकबजनी जैसे जुर्म में गिरफ्तार हो चुके हैं। अभी भी कई ऐसे मामलों में गामड़ापाल गांव के युवकों की तलाश थी। ठाकुर चंद्रशील ने बताया कि हिरासत में लिए युवकों से पूछताछ की जा रही है।

गोवर्धन सागर रिंग रोड के बीच आरहे ३२ मकानों पर युआईटी आर निगम का चला हथोड़ा

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उदयपुर । यूआईटी और नगर निगम ने बुधवार अल सुबह संयुक्त रूप से बड़ी कार्रवाई करते हुए गोवर्धन विलास तालाब के रिंग रोड में आने वाले ३२ मकानों को ध्वस्त किया। बेघर लोगों को बिलिया में बने सरकारी मकान में शिफ्ट किया गया। गोवर्धन सागर के आसपास रिंग रोड के बीच आने वाले कब्जे एवं तालाब पेटे से मकानों को हटाने के आदेश हाईकोर्ट ने भी पहले ही दे रखे थे।
बुधवार सुबह नगर निगम और यूआईटी का पूरा जाब्ता गोवर्धन विलास तालाब के पेट में बसी कच्ची बस्ती पर तैनात हो गया और कच्चे पक्के मकानों को हटाने की कार्रवाई शुरू की गयी। यूआईटी सेक्रेटरी आरएन मेहता के अनुसार गोवर्धन सागर के आसपास रिंग रोड बनाई जा रही है। यहां 30 फीट रिंग रोड सरस पार्लर से लेकर गोवर्धन सागर तक बनाई जानी है। इसलिए रोड के बीच आनेवाले मकानों को कार्रवाई कर आज हटाया गया। कच्ची बस्ती अवैध रूप से कब्जे कर बसाई गयी थी। कब्जे हटाने के लिए नोटिस पूर्व में ही सभी को दिया जाचुका था। मेहता ने बताया की हाईकोर्ट के भी आदेश भी थे कि तालाब के भराव क्षेत्र में बनी बस्ती को हटाया जाय जिसकी वजह से गंदा निकासी का पानी तालाब में गिर रहा था। मेहता ने बताया की जो लोग बेघर हुए है उन्हें बिलिया में बने सरकारी मकान में शिफ्ट किया गया है। उनके सामान ले जाने की व्यवस्था भी नगर निगम और यूआईटी के वाहनों में कर दी गयी थी । सुबह कब्जे हटाने के पहले सभी को अपने घरों का सामान हटाने के लिए समय भी दिया गया था । सुबह सात बजे ही जाब्ता मोके पर पहुंच गया था लेकिन कार्रवाई करीब साढ़े आठ बजे शुरू की गयी। ३२ कच्चे पक्के मकान थे जिन्हे ध्वस्त किया गया। इस दौरान नगरनिगम आयुक्त सिद्धार्थ सिहाग, प्रन्यास सचिव रामनिवास मेहता, ओएसडी कीर्ति राठौड़ और समेत कई अफसर और करीब 100 से ज्यादा पुलिस बल तैनात था। कब्जे हटाने के लिए चार जेसीबी लगाईं गयी थी । यूआईटी और नगर निगम की गाड़ियों का पूरा लवाजमा भी लगा हुआ था । दिन में १२ बजे तक तो रिंग रोड का पूरा रास्ता साफ़ कर दिया गया। रोड बनाने की कार्रवाई भी आज ही शुरू करदी जायेगी। कब्जे धारियों ने रिंग रोड के रास्ते में एक मंदिर भी स्थापित करदिया था जिसको भी आज जाब्ते ने हटाया।

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देशद्रोही कौन है?

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नई दिल्लीः जेएनयू विवाद में छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया की गिरफ्तारी के बाद देशद्रोह का मुद्दा और इसके कानून को लेकर बहस एक बार फिर तेज है.
अब संविधान के जानकार सोली सोराबजी ने कहा है कि सरकार की आलोचना देशद्रोह नहीं हो सकती. लेकिन भारत के टुकड़े करने जैसे नारे देशद्रोही की श्रेणी में आएंगे. सवाल ये है कि देशद्रोही कौन है?
कन्हैया ने कैंपस में नारे लगाए या नहीं इस बात की पुलिस जांच कर रही है लेकिन कन्हैया पर देशद्रोह यानी धारा 124ए का केस दर्ज हो चुका है और तभी से सवाल उठ रहे हैं क्या ये मामला भी देशद्रोह का बनता है.
देशद्रोह के विवाद में जाने माने कानून विशेषज्ञ सोली सोराबजी ने कहा है कि सरकार की आलोचना करना देशदोह नहीं है. पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाना भी देशद्रोह नहीं है लेकिन भारत के टुक़ड़े होंगे जैसे नारे देशद्रोह की श्रेणी में आते हैं.

1870 में बने इस देशद्रोह कानून का इस्तेमाल अंग्रेजों ने महात्मा गांधी और बालगंगाधर तिलक के खिलाफ किया था. आजादी के बाद इसे संविधान में शामिल कर लिया गया था.अब कांग्रेस कह रही है कि देशद्रोह का कानून खत्म होना चाहिए.

हालांकि आजादी के बाद साठ सालों तक कांग्रेस सत्ता में रहती और तब देशद्रोह के कई मामले लगने और विवाद होने के बावजूद देशद्रोह कानून खत्म नहीं हो पाया.
कन्हैया के केस में सवाल उठे थे कि जब दिल्ली पुलिस घटना के वक्त नहीं थी तो मामला कैसे दर्ज कर लिया. कानून के जानकारों के मुताबिक

”बिना शिकायत के भी देशद्रोह का केस दर्ज हो सकता है. स्वत: संज्ञान लेकर पुलिस देशद्रोह का केस दर्ज कर सकती है. देशद्रोह का केस लगाने के लिए हिंसा होना जरूरी नहीं है.”
जानकार मानते हैं कि शुरुआती रिपोर्ट के आधार पर भी देशद्रोह की धारा लगाई जा सकती है लेकिन इस धारा को साबित करने के लिए पुख्ता सबूत जुटाने होंगे.

दरअसल संविधान से मिली अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की वजह से देशद्रोह कानून पर सवाल उठते रहते हैं. कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी के केस में भी यही हुआ था जिसने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को आधार मानकर राष्ट्रीय चिह्नों और प्रतीकों का गलत इस्तेमाल करके संविधान को नीचा दिखाया और देशद्रोह का केस लगा. हालांकि बाद में उनके ऊपर से देशद्रोह का आरोप हटा लिया गया.
कन्हैया और असीम त्रिवेदी के अलावा गुजरात में पटेलों के लिए आरक्षण मांगने वाले हार्दिक पटेल पर देशद्रोह का केस पिछले साल लगा था और वो फिलहाल जेल में हैं.

पाटीदार आंदोलन के दौरान गुजरात में हार्दिक ने एक आदमी से कहा था कि अगर कुछ करना ही चाहते हो तो दो–पांच पुलिसवालों को मारो, कोई पाटीदार युवक को मरना नहीं चाहिए.

मशहूर लेखिका अरुंधति रॉय और हुर्रियत नेता सैयद अली शाह गिलानी पर 2010 में एक सेमिनार में भारत विरोधी भाषण देने के आरोप में देशद्रोह का केस दर्ज हुआ था.

मानवाधिकार कार्यकर्ता बिनायक सेन पर 2007 में नक्सलियों की मदद के आरोप में देशद्रोह का केस लगा और आजीवन कारावास की सज़ा सुना दी गई थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जमानत मिल गई.

News source by ABP news hindi 

#वायरलसच रतन टाटा को लेकर फैलाया जा रहा झूठा मैसेज

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वायरल खबर जेएनयू के छात्रों को टाटा ग्रुप में नौकरी से जुड़ा है. सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक पर ये मैसेज वायरल हो रहा है जिसमें रतन टाटा की फोटो के साथ लिखा है, ”अब से टाटा कंपनी ‪#‎JNU‬ के किसी भी छात्र को अपनी कंपनी में नौकरी नही देगी. जो देश का नही हुआ वो कंपनी का कैसे होगा?
भारत माता की जय…

जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी के छात्रों को लेकर ये मैसेज वायरल किया जा रहा है क्योंकि जेएनयू के छात्रों पर कैंपस में देश के खिलाफ नारे लगाने का आरोप है. और इसलिए मैसेज में भी लिखा है कि जो देश के खिलाफ बोलेगा देश की बड़ी कंपनी टाटा उसे नौकरी नहीं देगी.

ये पोस्ट खुद को बीजेपी के आईटी सेल के सदस्य और कट्टर मोदी समर्थक बताने वाले अश्विन बराड़ के फेसबुक अकाउंट से किया गया है. ये पोस्ट 15 फरवरी यानि कल का है.

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मैसेज की पड़ताल की तो सामने आया कि फेसबुक पर इस पोस्ट के वायरल होने के बाद अमित गोविंद नाम के एक शख्स ने ट्विटर पर टाटा ग्रुप से ये मैसेज डालकर पूछा ‘टाटा कंपनी, क्या ये सच है क्या रतन टाटा ने ऐसा कोई बयान दिया है.’
इसके बाद टाटा ग्रुप की तरफ से बाकायदा बयान जारी करके कहा गया कि,”रतन टाटा की तरफ से ऐसा कोई बयान नहीं जारी किया गया है”

यानि एबीपी न्यूज की इस पड़ताल में फेसबुक पर वायरल हो रहा ये मैसेज झूठा साबित हुआ है.

यहां आपको ये भी बता दे कि रतन टाटा के नाम से ये मैसेज वायरल किया जा रहा है जबकि रतन टाटा अब टाटा ग्रुप के चेयरमैन नहीं है और उनका टाटा ग्रुप के रोजमर्रा के कामकाज या इस तरह के फैसलों से कोई लेना-देना नहीं है. टाटा ग्रुप के चेयरमैन सायरस मिस्त्री हैं.

JNU: अपनी नाकामी छिपाने के लिए ऐसा खतरनाक खेल मत खेलिए ‘सरकार’!

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सियासत के कायदे वही हैं जो राजनीति को रास्ता दिखाएं. जीत के जज्बे को पैदा करने से लेकर सत्ता हथियाने तक धर्म, जाति और ‘राष्ट्रवादी हुंकार’ एक अहम जरिया रहा है.

जब आप जीते थे तो आप सभी की स्याही से सूबे की तकदीर लिखने की उम्मीद थी. आप लोगों की महत्वकांक्षा के नाग ने सच्चे लोकतंत्र को, गरीबी को, भूख को, सुरक्षा को, इंसानियत को, मानवता को डंस लिया. हां, हमारे सियासी मालिक आप ही की बात कर रहा हूं. भय को, भूख को, भ्रष्टाचार को दफनाने के बजाए आप सभी ने हमारी उम्मीदों को दफना दिया. हमने तो आपको अपना हुक्मरान माना, आपको सिर आंखों पर बैठाया, अपनी समस्याओं का समाधान बनाया लेकिन आप उत्पीड़ित अस्मिताओं के निर्मम शोषण का उपकरण बन गए सियासी मालिक.. बताइए ना हमसे चूक कहां हो रही है. समझाइए अब हम क्या करें..

राष्ट्रभक्ति का सर्टिफिकेट आप तो मत ही दीजिए?

फिलहाल ‘हस्तिनापुर’ की सियासत कठघरे में है. विकास के मुद्दे पीछे छूट गए. धर्म और ‘राष्ट्रवादी हुंकार’ का कॉकटेल बनाया जा रहा है. आम लोगों के मुफलिसी के इस दौर में महंगी आलीशान गाड़ियों में सुरक्षा घेरे के बीच चलना और सियासी शिगूफे छोड़ अपना वर्चस्व साबित करने की कोशिश करना कथित राष्ट्रवादी और धार्मिक ठेकेदारों का अहम पेशा रहा है. ठेकेदारी की ये दुकान छोटी से लेकर बड़ी तक है. जिसकी जैसी दुकान उसकी सियासत में उतनी हिस्सेदारी. विहिप, बजरंग दल से शुरू हुई ये सियासी सेना श्रीराम सेना, ये सेना वो सेना पता नहीं कौन कौन सेना तक बन गई…..आजकल तो हमारे यूपी में तीर धनुष की ट्रेनिंग दी जा रही है आईएसआईएस से लड़ने के लिए.. अरे भाई जब तीर धनुष ही काफी हैं तो भारतीय सेना क्या धान काटेगी? क्या इनको भारतीय सेना पर भरोसा नहीं रहा? खैर.. फिलहाल मुद्दा ये नहीं है.

मैं पहले ही साफ कर दूं कि संविधान के खिलाफ हर नारे का मैं विरोध कर रहा हूं. लेकिन इन नारों के सहारे जो सियासत हो रही है उसे बेहद खतरनाक मानता हूं. बंद करिये सर्टिफिकेट देना.. ये देशद्रोही वो देशद्रोही.. मैं ज्यादा राष्ट्रभक्त.. मैं हिन्दू भक्त.. मैं फलां भक्त.. अरे मैं से बाहर निकलिए और हम के बारे में सोचिए. जेएनयू जैसे विश्वविद्यालय से रोशनी निकलती है. और रोशनी का वजूद ही अंधेरे के खिलाफ प्रतिरोध है. धर्मांध और कट्टर लोगों के मन में इस विश्विद्यालय के लिए बराबर नफरत क्यों पलती है? शटडाउन जेएनयू का हैशटैग कितना खतरनाक है ये सोचकर ही मन कांप जाता है. राष्ट्रवादी समय में ‘हम’ और ‘वो’ शब्द बेहद शातिरता के साथ इस्तेमाल किए जा रहे हैं. आम लोगों और देश के बीच की रेखा को भी धुंधला किया जा रहा है. बस जो आपके विचार के साथ नहीं है वह देशद्रोही. ये कैसा सर्टिफिकेटवाद है साहब. मेरा सिंगल सवाल.. नारों के मास्टर माइंड को पकड़ने के लिए क्या अब एफबीआई के जवान आएंगे! आपकी रॉ से लेकर दिल्ली पुलिस तक के हत्थे वह क्यों नहीं चढ़ रहा है? दिल्ली पुलिस महज चंद घंटे में जेएनयू के प्रेसिडेंट कन्हैया को गिरफ्तार करती है जिसका नारे लगाते कोई अभी तक वीडियो भी नहीं आया लेकिन जो नारे लगा रहे थे उन्हें अब तक गिरफ्तार नहीं किया गया है. उनको आप गिरफ्तार करने से क्यों बच रहे हैं. हमें पता है कि कश्मीर में पीडीपी के साथ सरकार बनाने के लिए बन रहे माहौल में दिक्कत आएगी. सत्ता के लिए देशभक्ती का तड़का मत लगाइए. ये आग से मत खेलिए हुजूर.. आपके बच्चे तो ऑक्सफोर्ड में पढ़ते हैं. कमांडों की सुरक्षा के बीच में रहते हैं.. हमारे बच्चे जलेंगे.. मरेंगे.. और कटेंगे.

कानून के रक्षक संस्कृति के रक्षक बन कर पटियाला हाउस कोर्ट में पत्रकारों के साथ मारपीट की. और उतना ही नहीं आपके विधायक जी तो ऐसे ‘कथित आत्मरक्षा’ में पीटाई करने लगे जैसे मुंबईया डॉन हों. वकीलों की आड में आपके ‘सेवकों’ की करतूत से भारत मां गौरवान्वित होंगी.. क्यों हुई होंगी न.. बोलिये ना.. आप नहीं बोलेंगे क्योंकि आपको उतना ही बोलना है जिससे की सत्ता हथियाने में सफलता मिलती रहे. हमें पता है कि निरंकुश होने की चाह वाली किसी भी सत्ता की आंख में सबसे पहले पत्रकार, लेखक और बुद्धिजीवी ही खटकते हैं. क्योंकि यही वे लोग हैं जो सत्ता की पोल खोलते हैं. जनता की आवाज को सत्ता के गलियारे में शोर बनाते हैं. और मधुर संगीत के साथ सोमरस में डूबी मदहोश सत्ता को कर्कश शोर से चिढ़ होती है.

लोकतंत्र का ये हिस्सा भी पढ़ लीजिए!

मुझे तो बस इतनी भर इल्तिजा करनी है कि शोर और चीत्कार के बीच कुछ आवाजें कहीं सहमी और दुबकी हुई हैं. बेआवाज की मानिंद बस उस बेआवाज की आवाज सुन लीजिए. बेशक होंठ सिले नहीं गए हैं लेकिन आपके गुंडों की खौफ से लरज रहे हैं. आप समझ रहे हैं न..आप तो मजलुम के घर पैदा हुए थे. आप गरीब और कमजोर के डर को महसूस कर रहे हैं साहेब.

सुनिए जवाहरलाल नेहरू छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया की मां ने कहा है, “हमें जब से पता चला है कि कन्हैया को गिरफ्तार कर लिया गया है, तब से हम लगातार टीवी देख रहे हैं. मुझे उम्मीद है कि पुलिस उसे बहुत ज्यादा नहीं पीटेगी. उसने कभी भी अपने माता पिता का अपमान नहीं किया, देश की बात तो भूल ही जाइए. कृपया मेरे बेटे को आतंकवादी नहीं बोलिए. वह यह नहीं हो सकता है.” मीना एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता हैं और साढ़े तीन हजार रूपये प्रति माह कमाती हैं. उनके 65 वर्षीय पति लकवाग्रस्त होने की वजह से सात सालों से बिस्तर पर हैं.

आप तो संसद में घुसे तो कैमरे की चमकती रोशनी में माथा टेका. कसम से.. मेरा दिल भर आया. मैं उसे ड्रामा नहीं समझा. चलिए अब आपको कुछ लोकतंत्र का इतिहास दिखाता हूं. देख लीजिएगा चश्मा साफ करके. 1965 में जब अमेरिका ने वियतनाम के खिलाफ युद्ध छेड़ रखा था, तब अमेरिका की मिशिगन यूनिवर्सिटी के छात्रों और शिक्षकों ने यूनिवर्सिटी कैंपस में ही ऐसे लेक्चर्स की शुरूआत की जिसमें लड़ाई के खिलाफ बातें की जाती थीं. लेकिन उनके इस विरोध को न ही देशद्रोह माना गया और न उन पर कोई कार्रवाई हुई बल्कि यूनिवर्सिटी ने उन्हें उसे जारी रखने की इजाजत दे दी.

1965 से 1973 के बीच पूरे अमेरिका के विश्वविद्यालयों में वियतनाम युद्ध के खिलाफ विरोध प्रदर्शन होने लगे, छात्रों ने इस दौरान अमेरिकी झंडे भी जलाए. लेकिन तब भी किसी पर देशद्रोह का मुकदमा नहीं किया गया. सिर्फ उन छात्रों को गिरफ्तार किया गया जो सीधे तौर पर हिंसा में शामिल थे. इसी तरह फरवरी 2003 में इराक युद्ध के खिलाफ भी अमेरिकी विश्वविद्यालयों में छात्रों ने प्रदर्शन किया लेकिन तब भी छात्रों के उस विरोध को देशद्रोह की श्रेणी में नहीं रखा गया.

आर्थिक मुदे पर नाकाम है सरकार?

अब हम आपको बताएंगे कि जेएनयू जैसे विवाद अब रोज आप क्यों चमकाएंगे. खैर चलिए कुछ उस पर आपका ध्यान दिला दूं जो आपको करना था लेकिन किये क्या.. देश की आर्थिक नब्ज बताने वाले शेयर बाजार का सूचकांक सेंसेक्स फिसलकर उस स्तर से भी नीचे पहुंचा हुआ है, जिस स्तर पर मोदी सरकार ने सत्ता संभाली थी. प्रसिद्ध इतिहासकार राचंद्र गुहा के इस ट्वीट पर ध्यान दीजिए..

Blog on JNU controversy by Prakash narayan singh ABP News

रुपया भी सबसे निचले स्तर के करीब है. एक डॉलर की कीमत करीब 68 रुपए है. औद्योगिक विकास दर भी लाल निशान दिखा रहा है. मई 2014 में 4.7 फीसदी रहने वाली औद्योगिक विकास दर दिसंबर में माइनस 1.3 फीसदी रही. इस साल आर्थिक विकास दर यानी जीडीपी का अनुमान भी भी घटाकर सात से साढ़े सात फीसदी के बीच कर दिया गया है. पहले इसके आठ से साढे आठ फीसदी के बीच रहने का अनुमान था. सरकारी बैंकों का बढ़ता घाटा भी मोदी सरकार की मुश्किल बढ़ा रहा है. दिसंबर में खत्म तिमाही में आठ सरकारी बैंकों का घाटा कुल मिलाकर दस हजार करोड़ के पार पहुंच गया है.

सरकार ने पिछले बजट में राजस्व घाटा 3.9 फीसदी तक ले आने का अनुमान रखा था. लेकिन एक तो सरकारी कंपनियों की हिस्सेदारी बेचने से उम्मीद से कम कमाई हुई है. वहीं सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के साथ-साथ वन रैंक वन पेंशन के लिए अतिरिक्त प्रावधान करने के मोर्चे पर भी परेशानी है. इसका हल सरकार किस तरह निकालती है, ये तो 29 फरवरी के बजट से साफ हो सकेगा. साल 2015-16 में आयकर और कॉरपोरेट टैक्स जैसे डायरेक्ट टैक्स से कमाई में भी 40 हजार करोड़ की कमी आने का अनुमान है. हालांकि पेट्रोल और डीजल पर लगातार एक्साइज ड्यूटी बढ़ाकर और सर्विस टैक्स जैसे इनडायरेक्ट टैक्स से सरकार किसी तरह तय लक्ष्य के मुताबिक कमाई कर पाएगी. काले धन के मोर्चे पर भी सरकार उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सकी. विपक्ष के आरोपों के बीच उद्योग जगत भी दबे मुंह कह रहा है कि योजनाएं जारी करने से ज्यादा उनके अमल पर ध्यान देने की जरूरत है.

वोटों की गुल्लक भरने वाली सियासत!

‘कांइयापन’ के ‘स्विंग’ से अक्सर हम भोले हार जाते हैं! वोटों की गुल्लक को भरने के लिए रथयात्रा निकाले गए. दो भाइयों को हिन्दू और मुसलमान में बांटा गया. तहजीब पर कई जगहों पर दंगों के रूप में तमाचे पड़े. ये देश अंदर और बाहर से आग में धधकने लगा. कई जगहों पर इंसानियत को गहरे जख्म मिले. और फिर शुरू हुई वोटों की फसल काटने का सिलसिला..हर चुनाव में.. या जब आर्थिक नाकामी घेरती है तो राष्ट्रभक्ती जागती है. गाय भक्ती तो बिहार चुनाव में जगी ही थी. उससे पहले यूपी विधानसभा चुनाव में लव जिहाद का लिटमस टेस्ट फेल हुआ था.

‘हम भारत के लोग’ पता नहीं कब जाति, धर्म और ‘हुंकार’ पर समझदार होंगे. हम कब भूख, भय और भ्रष्टाचार पर सही समय पर सही निर्णय लेंगे? हम कब वोट की चोट को व्यवस्था के कोढ़ पर मारेंगे? मुझे समझ नहीं आता कि हम कब सच्चे अर्थों में ‘लोकतंत्र का राजा’ बनेंगे?

लेखक :  प्रकाश नारायण सिंह, कंटेंट एडिटर, एबीपी न्यूज

 

आनंदपाल पर बोलते-बोलते मैं खुद आनंदपाल बन गया हूं: कटारिया

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कुख्यात गैंगस्टर आनंदपाल की फरारी मामला राजस्थान पुलिस के लिए लगातार चुनौती बना हुआ है।  पुलिस महकमें की इस बड़ी नाकामयाबी की ज़िम्मेदारी को लेकर प्रदेश के गृह मंत्री गुलाब चंद कटारिया कटघरे में हैं।
जेल से पेशी के दौरान फरार हुए आनंदपाल को पांच महीने से भी ज़्यादा हो गया है, लेकिन पुलिस का तंत्र अब तक उसे ढूंढ निकालने में फेल साबित हुआ है। इस बारे में बार-बार मीडिया के सवालों का सामना गृह मंत्री को करना पड़ रहा है।  आनंदपाल के सवाल पर गृह मंत्री ने एक बार फिर झल्लाते हुए प्रतिक्रिया दी है। 
मीडिया के सवाल पर दिए ताज़ा प्रतिक्रिया में गृह मंत्री ने कहा, ”आनंदपाल के बारे में बोलते-बोलते मैं खुद आनंदपाल बन गया हूं। ” 

सवाल के जवाब में कटारिया ने कहा कि आनंदपाल एक अपराधी है और वो जल्द पकड़ा जाएगा।  उन्होंने कहा कि किसी भी अपराधी का जेल में रहना आसान होता है लेकिन उसका फरार रहकर बाहर उतना ही मुश्किलों भरा रहता है। 
कटारिया ने खुद का उदाहरण देते हुए कहा कि मैं भी इस दौर से गुज़र चूका हूं। उन्होंने उम्मीद जताई कि आनंदपाल फरारी मामले में गठित कमेटी की रिपोर्ट विधानसभा सत्र शुरू होने से पहले मिल जायेगी।

अब हफ्ते में 6 दिन उड़ेगी जयपुर से दुबई की फ्लाइट, बैंकॉक की भी तैयारी

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जयपुर से दुबई जाने वालों के लिए अच्छी खबर है। अब यहां से दुबई जाने के लिए सप्ताह में छह दिन सीधी उड़ान मिल सकेगी। अब तक सोमवार, बुधवार, शुक्रवार और रविवार को एयर इंडिया की विमान सेवा संचालित थी, मंगलवार से स्पाइस जेट ने सप्ताह में पांच दिन के लिए (सोमवार व शनिवार को छोड़कर) नियमित उड़ान शुरू कर दी।
इस मौके पर जयपुर पहुंचे स्पाइस जेट के बोइंग 737 एनजी का वाटर कैनन से स्वागत किया गया। कंपनी के सीएएओ जीपी गुप्ता, गृहमंत्री गुलाब चंद कटारिया, सांसद रामचरण बोहरा ने 9.45 बजे विमान को रवाना किया।
इस 189 की क्षमता वाले विमान में 183 यात्री सवार हुए। गुप्ता ने बताया कि अब उदयपुर-मुंबई सहित जयपुर से बैंकॉक के लिए ग्रीष्मकालीन उड़ान की तैयारी की जा रही है। कोलकाता के लिए भी उड़ान शुरू की जाएगी।
हवाईअड्डे ने मांगी जमीन
हवाईअड्डा प्राधिकरण ने एक और टैक्सी टै्रक बनाने के लिए 1500 गुणा 50 मीटर जमीन मांगी है। इससे विमानों को पुश बैक नहीं करना पड़ेगा, जिससे तेल की बचत हो पाएगी। 
इधर, इंचार्ज चरण सिंह ने बताया कि पीएवी के माध्यम से भी तेल बचाने की कवायद की जा रही है। इससे सालभर में एक महीने का तेल बचाया जा सकेगा।

देश का पहला वर्ल्ड म्यूजिक फेस्टिवल – थिरका शहर

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उदयपुर . वर्ल्ड म्यूजिक फेस्टिवल के पहले दिन रेलवे ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट ग्राउण्ड पर सुरमयी ठण्ड के बीच सजी शाम में विश्व संगीत के कई नामी कलाकारों ने यादगार प्रस्तुतियां दी। कार्यक्रम की शुरुआत फ्लेमेंको म्यूजिक एंड डांस समूह, स्पेन के कलाकारों जुआन्मा जुरानो एवं तमारा , पासो ए दोस के जादुई फ्लेमेनको के चार ताली पर वहां के लोकसंगीत की शानदार प्रस्तुतियों से हुईं। मंच से ताली के साथ पदचाप में सुर मिलाते हुए स्पेनिश गिटार और ताल-लय के साथ सिंगल व ड्यूएट प्रस्तुतियों का दर्शकों ने जम कर आनंद उठाया।
मुख्यमंत्राी वसुंधरा राजे ने भी करतल ध्वनि से उनका हौसला बढ़ाया। प्रस्तुतियों के अंत में पूरे क्रू को स्टेंडिंग ओवेशन दिया गया। विश्वभर में 500 से ज्यादा लाइव कंसर्ट कर चुकी आइवरी कोस्ट की ग्रैमी अवॉर्ड विजेता डोबेटनाहोर की प्रस्तुतियों ने अफ्रीकी कबीलाई व कैरेबियन म्यूजिक की जुगलबंदी से लोगों को झूमने पर मजबूर कर दिया।
इस संगीतमयी शाम का समापन भारत के सबसे लोकप्रिय फ्यूज़न रॉक ब®ड म­ से एक ’द रघु दीक्षित प्रोजेक्ट’ के साथ हुआ। देश में फ्यूजन संगीत के स्टार आइकन ने अपने विशिष्ट परिधान के साथ ही पैरों में कडे़ और घुंघरू बांध कर फ्यूजन पेश किया तो मस्ती दुगुनी हो गई। रघु के रॉक बैण्ड की प्रस्तुति पर वहां मौजूद देशी-विदेशी पर्यटक और दर्शक थिरकने पर मजबूर हो गये।

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इस मोके पर मुख्य अतिथि राजस्थान की मुख्य मंत्री वसुंधरा राजे ने कहा कि वर्ल्ड म्युजिक फेस्टिवल अनूठा और उपलब्धिपूर्ण आयोजन है और यह उदयपुर के संगीत इतिहास में मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम भारत म­ अंतर्राष्ट्रीय संगीत और भारतीय संस्कृति की वैश्विक पहचान के लिए एक बड़ी उपलब्धि ह®। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह एक ऐसा वार्षिक आयोजन बनकर उभरेगा जिसे भारत आने वाले देशी-विदेशी पर्यटक अपने सालाना यात्रा कैलेण्डर म­ शामिल करेंगे।

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