उदयपुर। देश में एक समग्र वेस्ट वाटर पॉलिसी की जरूरत है। उदयपुर सहित देश का एक बड़ा हिस्सा सेप्टिक टैंक का उपयोग कर रहा है। लेकिन सेप्टिक टैंक के मलबे व निकलने वाले पानी (सेप्टज) के प्रबंधन पर फोकस नहीं है। गन्दे पानी में उपस्थित जीवाणु सब्जियों के माध्यम से मानव स्वास्थ्य को गंभीर संकट पहुँचा रहे हैं। ऐसे में नीति व नियमों से लेकर उपयुक्त इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाना तथा नागरिकों व अधिकारियों की समझ बढ़ाना जरूरी है। शहरीकरण ने खेती योग्य जमीन को नष्ट किया है, जबकि शहर के आस-पास खेती शहर को वास्तविक मायनों में स्मार्ट बनाते है। इन्हीं सब चर्चाओं के साथ सोमवार को विद्या भवन पॉलिटेक्निक में चार दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय कार्यशाला प्रारंभ हुई।
कार्यषाला का आयोजन महाराणा प्रताप कृषि विष्वविद्यालय, वोलकेम इण्डिया लिमिटेड, वेस्टर्न सिडनी यूनिवरसिटी, सी.एस.आई.आर.ओ. आस्ट्रेलिया द्वारा क्रोफर्ड फण्ड के सहयोग से किया जा रहा है। उद्घाटन करते हुए मेयर चन्द्र सिंह कोठारी ने विश्वास व्यक्त किया कि कार्यशाला के उदयपुर में आयोजन से शहर को स्मार्ट सिटी बनाने में मदद मिलेगी। मेयर ने कहा कि स्मार्ट सिटी के प्रयासों में उदयपुर के नागरिकों की भागीदारी अभूतपूर्व है। अध्यक्षता विद्या भवन के अध्यक्ष अजय मेहता ने की।
शहर के आस-पास खेती बचाने से शहर बनेगा स्मार्ट
“राजू राठौड़” ने बच्चों के साथ की धमाल
उदयपुर। देवी अन्नपूर्णा उच्च प्राथमिक विद्यालय में ‘‘राजु राठौड़’’ राजस्थान फिल्म के हीरो, श्री अरविंद राठौड़ निदेशक श्री प्रकाश जी टांक, सुनिल जी कुमावत, निदेशक श्री हितेश सोलंकी ने बच्चो के बीच आकर, प्रार्थना सभा, राष्ट भक्ति गीत व राजस्थानी गीतों का रंगारंग कार्यक्रमों में भाग लिया। विद्यालय के भैया/बहनों ने राजस्थानी हिरो का स्वागत किया और राजू राठौड़ की फिल्म के गीतों से भरी एमपी थ्री सीडी का विमोचन किया एवं इस अवसर पर राजस्थानी हिरो ने गरीब बच्चों के बीच में आकर बहुत खुशी व्यक्त की और उन्होंने कहा कि जब भी मुझे विद्यालय परिवार बुलायेगा मैं आ जाऊंगा। इस अवसर पर विद्यालय के संस्थापक दिनेश भट्, पार्षद नानालाल वया, लवदेव बागड़ी, प्रवीण मारवाड़ी, बलवंत काबरा, विजयलक्ष्मी कुमावत, राजेश सोनी, हिमांशु भट् उपस्थित थे। स्वागत विद्यालय परिवार प्रधानाचार्य श्रीमती उषा जी वर्मा व कार्यक्रम का संचालन श्री मनोहर जी चौधरी ने किया।
उदयपुर में रोजगार सहायता शिविर 24 को
उदयपुर। रोजगार कार्यालय परिसर उदयपुर में एक दिवसीय रोजगार सहायता शिविर का आयोजन 24 नवम्बर को किया जा रहा हैं। जिसमें विभिन्न कम्पनियों द्वारा लगभग 100 पदों पर भर्ती की जाएगी।
सहायक निदेशक (रोजगार) प्रेमाराम ने बताया कि शिविर में रोजगार प्रशिक्षण एवं प्रतियोगी परीक्षा आदि विषयों पर मार्गदर्शन भी दिया जायेगा। इच्छुक आशार्थी अपने सीनियर सैकण्डरी, स्नातक आदि समस्त शैक्षणिक प्रमाण पत्रों तथा दो पासपोर्ट साइज के फोटो के साथ शिविर स्थल पर उपस्थित होकर लाभान्वित हो सकते हैं। शिविर का समय 10 से सांय 4 बजे तक रहेगा।
कांग्रेस के असलम शेख का स्वागत
उदयपुर। मुम्बई के मालाड क्षेत्र के विधायक एवं मुम्बई काँग्रेस कमेटी के महामंत्री असलम शेख का डबोक हवाई अड्डे पहुँचने पर काँग्रेस कार्यकर्ताओ द्वारा मेवाड़ी पागड़ी अवाम माला पहनाकर भव्य स्वागत किया गया ।
पूर्व नेता प्रतिपक्ष उदयपुर नगर निगम दिनेश श्रीमाली ने बताया की असलम शेख के उदयपुर पहुँचने पर डबोक हवाई अड्डे पर भव्य स्वागत किया गयाए स्वागत करने वालो में प्रवक्ता फिरोज अहमद शेखए जगदीश पालीवालए रितुराज शर्माए सतीश लौहारए तरुण भटनागरए मुकेश बड़गुर्जरए भूषण प्रकाश श्रीमालीए आशीष पालीवालए भानु गुर्जरए रोहित पालीवालए मुकेश सेनए शादाब खानए शेलेन्द्र गावरीए भरत अग्रवालए शाहबाज़ खान आदि उपस्थित रहे ।
इस दौरान उदयपुर में राजनीतिक स्थिति तथा काँग्रेस संगठन के बारे में जानकारी ली ।
हैवानियत की पराकाष्ठा और गैर इस्लामी है आतंकवाद – असरार अहमद खान
अजमेर। इस्लामिक आतंकवादी संगठन आईएसआईएस द्वारा पेरिस पर आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा करते हुए भारत में मुसलमानों के सबसे बडे़ धर्म स्थल सूफी संत हजरत ख्वाजा मोईनुद्दीन की दरगाह कमेटी के सदर असरार अहमद खान ने कहा कि इस क्रूरता की जितनी निंदा की जाए कम है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ सभी लोगों के खड़े होने का समय आ गया है। इसे खत्म करने के लिए लोग व्यावहारिक उपाय आजमाएं।
दरगाह कमेटी के सदर ने शनिवार को जारी एक ब्यान में कहा कि हमला हैवानियत की पराकाष्ठा और गैर इस्लामी है। इस्लाम में हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है क्योकि ख्वाजा साहब ने सूफिज्म के माध्यम से इन्सानियत भाईचारे और मानवता का संदेष दिया जो इस्लाम का मूल सिद्धांत है और इसके बिलकुल विपरित आईएसआईएस आतंक फैलाकर इस्लाम की गलत तस्वीर पेष करने का षडयंत्र रच रहा है दरगाह कमेटी इस प्रकार के कायराना आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा करती हैं।
असरार खान ने कहा कि दुनिया भर के मुसलमानों को आतंकवादी और चरमपंथी तत्वों के खिलाफ एकजुट होना चाहिए। ये तत्व मानवता और इस्लाम के सबसे बड़े दुश्मन हैं। उन्होंने कहा कि मुसलमानों को इस्लाम के बारे में व्यापक समझ और कुरान की शिक्षाओं की गलत व्याख्या से बचाने की जरूरत है। दुनिया भर में आतंकवाद और चरमपंथ की चुनौतियों से मुकाबले के लिए इमामों, धार्मिक नेताओं और अन्य विद्वानों को बड़ी भूमिका निभानी होगी।
उन्होने कहा कि आतंकावादियों ने ऐसे लोगों को मारा गया है जो बिल्कुल निर्दोष थे। आईएस को इजरायल और अमेरिका ने बढ़ावा दिया है। सभी देश मिलकर आईएस की मदद बंद करने का दबाव बनाएं। उन्होने कहा कि इस्लामिक आतंकवादी संगठन आईएसआईएस के जुल्मों से पीड़ीत सीरियाई मुस्लिम यूरोपीय देशों में शरण ले रहे हैं। यह आतंकी हमला उन मजलूमों के लिए यूरोप के देशों के दरवाजे बंद करने की साजिश हो सकती है।
मासूम के लिए मदद की गुहार – भामाशाह ध्यान दें
उदयपुर। 9 साल का मासूम बच्चा ज़िन्दगी और मौत के बीच झूल रहा है। इलाज में आने वाला पहाड़ जैसा खर्च को देखते हुए परिजन भी बच्चे को तिल तिल कर मरते रोज देख रहे है । बच्चे के इलाज के लिए भामाशाहों की जरूरत है।मोहम्मद उम्र ( पिता ) – 08854855786
मोहम्मद सलीम ( बड़े पापा ) – 08854891786
पेट्रोल 36 पैसे,डीजल 87 पैसे लीटर महंगा हुआ
देश की पेट्रोलियम कंपनियों ने रविवार को पेट्रोल की कीमतों में 36 पैसे प्रति लीटर की बढोतरी की है। इसके साथ ही डीजल की कीतमों में भी 87 पैसे प्रति लीटर का इजाफा किया गया है। पेट्रोलियम कंपनियों के मुताबिक नई कीमतें रविवार आधी रात से लागू हो जाएंगी। पिछले पखवाडे पेट्रोल के दाम में 50 पैसे प्रति लीटर की कटौती की गई थी जबकि डीजल के दाम में कोई बदलाव नहीं किया गया था। बता दें, पिछले दिनों केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी बढाई थी। पेट्रोल पर पर 1.6 रूपये प्रति लीटर और डीजल पर 40 पैसे प्रति लीटर “एक्साइज ड्यूटी” बढाई गई थी हालांकि इसका उपभोक्ता पर असर नहीं पडा था लेकिन ये लाभ उपभोक्ता को मिलने की बजाय सरकार ने अपने कोष में जमा कर लिया।
अशोक महान हो सकते हैं तो टीपू क्यों नहीं?
टीपू सुल्तान की जयंती मनाने पर विरोध के दौरान पिछले हफ्ते कर्नाटक में दो लोग मारे गए. जैसा कि आजकल देश में बहुत सी हताश कर देने वाली चीजें हिंदू मुस्लिम का मुद्दा बन जा रही हैं, यह भी इसी क़िस्म का मुद्दा बन गया है.दुनिया के इस हिस्से में राजाओं को दो तरह से देखा जाता है- अच्छा जैसे अशोक और अकबर आदि और बुरा जैसे औरंगजेब और टीपू सुल्तान आदि.
एक ऐसे समाज और राष्ट्र में यह खास प्रवृत्ति बन गई है, जो इतिहास को तथ्यों या कारण के बजाय भावनाओं की नज़र से देखता है. यह अधिकांश अनपढ़ और अधिकांश नए पढ़े लिखे लोगों का संकेत भी है. टीपू और उनके जनरलों की प्रतिष्ठा को उन्हीं के ख़िलाफ़ इस तरह इस्तेमाल किया जा रहा है मानो वो हमेशा ही हिंदुओं के ख़िलाफ़ जिहाद चलाते थे. यह बकवास बात है, लेकिन यहां ये बताने की कोशिश करने का कोई मतलब नहीं है. बेहतर हो कि लोग उनके बारे में किताबें पढ़ें और फिर सहमत हों, इसके बजाय कि उन्हें बताया जाए.
लेकिन यहां असल में मुश्किल ये है कि सभ्य दुनिया से उलट, भारत में बहुत कम किताबें लिखी गई हैं. हमारे यहां डायरी रखने और संस्मरण लिखने की कोई परम्परा नहीं है. ऐतिहासिक तथ्यों पर नया काम करने में हमारी कोई दिलचस्पी नहीं है. और इसीलिए टीपू पर कोई ऐसी किताब नहीं है जिसे किसी भारतीय ने लिखा हो. अगर किसी को इस राजा के बारे में कुछ जानना है तो उसे 19वीं शताब्दी में लुईस बॉवरिंग द्वारा लिखी किताब ‘हैदर अली, टीपू सुल्तान एंड स्ट्रगल ऑफ़ मुसलमान पॉवर्स ऑफ़ साउथ’ पढ़ना पड़ेगा. (बॉवरिंग ऐसा नाम है जिसे बंगलुरु के लोग अच्छी तरह परिचित हैं, क्योंकि इनके नाम पर ही सेंट मार्क्स रोड पर बॉवरिंग क्लब है.)
टीपू सुल्तान में जो दिलचस्पी दो-तीन बातों को लेकर है.
पहला, यह कि अंग्रेजों के लिए उन्हें हराना बहुत मुश्किल हो गया था. जब हम पिछले समय के अंतिम महान इतिहासविद सर जदुनाथ सरकार का अध्ययन करते हैं तो यह बिल्कुल साफ हो जाता है कि मराठों से उलट, टीपू असली योद्धा थे. पानीपत की लड़ाई में करारी हार के बाद मराठों का जिस तरह मनोबल टूटा, इसके मुकाबले टीपू का लगातार ज़बदस्त टक्कर देना क़ाबिल-ए-ग़ौर है. ये घटनाएं 40 वर्षों में घटीं यानि, 1761 (जब अहमद अब्दाली ने पानीपत की लड़ाई जीती) और 1799 जब टीपू सुल्तान मारा गया. इन सालों में अंग्रेज़ों ने अपने सभी दुश्मनों का हरा दिया और केवल पंजाब बचा रहा गया, जो कुछ दशकों में रणजीत सिंह की मौत के बाद अपने आप हथियार डाल देता. यह केवल टीपू ही था, जिसकी ओर से उन्हें असली प्रतिरोध का सामना करना पड़ा. वह बहुत जांबाज जनरल था और उसे भू राजनीतिक विषयों की बहुत बारीक समझ थी (अंग्रेजों के ख़िलाफ़ फ्रांसीसियों को इस्तेमाल करना). इसके अलावा युद्ध के प्रति उसका नज़रिया बहुत अत्याधुनिक था.
दूसरी बात, यह जगजाहिर है कि टीपू की सेना ही पहली सेना या शुरुआती सेनाओं में से एक थी जिसने युद्ध में रॉकेट इस्तेमाल किए. उनके सिपाही रॉकेट में ब्लेड लगाते थे, जिन्हें दुश्मन की सेनाओं पर फ़ायर किया जाता था. टीपू को हराने के लिए ब्रितानी इतिहास के सबसे महान योद्धा आर्थर वेलेस्ली की सेवा लेनी पड़ी. वेलेस्ली, जिन्हें हम ‘ड्यूक ऑफ़ वेलिंगटन’ के नाम से जानते हैं, ने बाद में वाटरलू की लड़ाई में नेपोलियन को हराया. यह बड़ी निराशाजनक बात है कि टीपू की सैन्य और राष्ट्रीय उपलब्धियों को आजकल बहुत आसानी से नज़रअंदाज़ किया जा रहा है. टीपू के बारे में जो कुछ याद किया जा रहा है वो बस ये कि उसने हिंदुओं को मारा या धर्म परिवर्तन कराए, चाहे ये बात सही हो या ग़लत.
महान अशोक ने कलिंग को जीतने के बाद विदेशियों या मुसलमानों की हत्याएं नहीं कीं थीं. ये ओड़िया भाषी हिंदू ही थे जिन्हें उसने दसियों हज़ार की संख्या में क्रूरता पूर्वक मार डाला था, जैसा कि कहानियों में हमें बताया जाता है. लेकिन अशोक को महान कहा जाता है और उसका चिह्न ‘शेर’ भारतीय गणतंत्र का आधिकारिक चिह्न है. भारतीय झंडे में चक्र को अशोक चक्र कहा जाता है क्योंकि यह भी उसी का चिह्न है. हम क्यों अशोक का सम्मान करते हैं लेकिन टीपू का नहीं, जबकि दोनों पर ही एक ही जैसे अपराध करने के आरोप हैं? हम इसका जवाब जानते हैं और यह स्वाभाविक ही है. भारत में एक मुसलमान राजा को वैसे ही अपराध के लिए माफ नहीं किया जा सकता, जैसा एक हिंदू राजा ने किया हो. पटियाला की विशाल इमारत को महाराज आला सिंह ने बनवाया था. उनके नाम सैन्य उपलब्धियां शून्य के बराबर हैं. लेकिन आला सिंह ताक़तवर हो गए थे क्योंकि उन्होंने मराठाओं को हराने में अब्दाली का साथ दिया था और उन्हें अफ़गान शासकों की ओर से पुरस्कृत किया गया. क्या कोई आला सिंह या उनके पूर्वजों को देशद्रोही के रूप में देखता है?पटियाला के राजा लगातार महाराजा रणजीत सिंह का विरोध करते रहे, लेकिन उन्हें कोई भी राष्ट्र विरोधी के रूप में नहीं देखता. ऐसा बर्ताव केवल मुस्लिम राजाओं के लिए ही आरक्षित है. ऐसे लोगों के बारे में पढ़ने या लिखने में हमारी दिलचस्पी नहीं है, बल्कि ऐसे लोगों के बारे में बुरे से बुरा मान लेने और ऐसी चीजों के बारे में विरोध करने की हममें हमेशा दिलचस्पी रहती है, जिनके बारे में हम बहुत थोड़ा जानते हैं.
सोजन्य –
धूम धडाके और रोशनी के बिच मनाई दिवाली – रोशनी में नहाया शहर हर चहरे पर दिखी ख़ुशी
उदयपुर। सुख-समृद्धि व वैभव का दीपोत्सव धनतेरस से शुरू होकर आज भाई दूज के साथ संपन्न हो गया। दीपावली पर बुधवार को शहर रोशनी में नहाया। हर घर-प्रतिष्ठान, बाजार, चौक-चौराहा व सरकारी भवन पर आकर्षक सजावट की गई। लोगों ने शुभ मुहूर्त पर लक्ष्मी पूजन कर खुशहाली की कामना की। पूरी रात आतिशबाजी का दौर जारी रहा।
अलसुबह महिलाओं ने परंपरानुसार गोवर्धन पूजा की। दीपावली के अगले दिन गुरुवार को रामा-सामा पर लोगों ने अपने परिजनों व परिचितों के यहां जाकर बड़ों से आशीर्वाद लिया। साथ ही अपनों से छोटों को उपहार देकर दीपावली की शुभकामनाएं दी। मुलाकात का यह दौर देर रात तक जारी रहा। महिलाओं ने घरों में विशेष पकवान बनाकर मेहमानों का मुंह मीठा करवाया।
लक्ष्मी मंदिर में भक्तों की कतार :
दिवाली की अल सुबह से भटियानी चोहट्टा स्थित महालक्ष्मी मंदिर में भक्तों की कतारें लगी जो देर रात तक जारी रही। लक्ष्मी के दर्शन और पूजा के लिए महियें युवा घंटों लाइन में खड़े रहे। पुलिस ने लक्ष्मी मंदिर रोड का यातायात एक दिन पहले ही बंद कर दिया था। सुबह तो भक्तों की कतार जगदीश चोक तक पहुच गयी थी।
सजे बाज़ार बापूबाजार रहा फीका : इस बार हालाँकि शहर के हर हिस्से के बाज़ार रोशनी से जगमग रहे लेकिन शहर का हार्ट कहे जाने वाले बापूबाजार में व्यापारियों ने सजावट में कोई उत्साह नहीं दिखाया। बापूबाजार के अधिकतर व्यवसाई महापौर और नगर निगम के विरोध स्वरुप साज्जा नहीं की। गौर तलब है की शहर की आम जनता बापूबाजार में शाम को रोशनी देखने जरूर आती है।
खेखरे पर हुई गोवर्धन पूजा:
कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा दिवाली के अगले दिन गुरुवार को गोवर्धन पूजा का पर्व मनाया गया। दीपावली के दूसरे दिन गो पूजा का विशेष महत्व होता है। महिलाओं ने अल सुबह गाय की पूजा के बाद गाय पालक (गाय की सेवा करने वाला) को गिफ्ट और अन्न दिया। गोबर से गोवर्धन पर्वत बनाकर जल, मौली, रोली, चावल, फूल, दही और तेल का दीपक जलाकर पूजा की। ऐसी मान्यता है कि इंद्र के कोप से बचने के लिए गोकुल वासियों ने जब गोवर्धन पर्वत के नीचे शरण ली, तब उन्होंने 56 भोग बनाकर श्री कृष्ण को भोग लगाया था। इससे खुश होकर श्री कृष्ण ने आशीर्वाद दिया और कहा इंद्र से डरने की जरूरत नहीं है, वह गोकुल वासियों की हमेशा रक्षा करेंगे।
मेहमानों का सिलसिला सुर रामा शामा :
दिवाली के अगले दिन महिलाऐं गोवर्धन पूजा करती है तो घर के पुरुष इस दिन रामा-शामा करते है । जो लोग दीवाली की रात आतिशबाजी में व्यस्त रहे वो लोग गूरुवार के दिन रामा शामा करने में जुटे रहे। रामा शामा का ये सिलसिला दिन भर चलता रहा। इस दौरान लोगों ने अपने घर आने वाले मेहमानों का स्वागत किया और घर में बनी मिठाइयों से उनका मुंह मीठा कराया। इसी तरह का माहौल सियासी पार्टियों के दफ्तरों और प्राईवेट कंपनियों के संस्थानों में रहा। उधर, दिवाली की छुट्टियों के बाद बाहर के लोगों का घर लौटने का सिलसिला शुरू हो गया।
रोड़वेज और प्राईवेट बसों में सवारियां खचाखच भरी रही। ऐसा ही हाल रेलगाड़ियों का भी रहा… रेलवे स्टेशनों पर रेलों के ज़रिये घर लौटने वालों की रेलमपेल देखि गई।
प्रेम की धमाकेदार वापसी – प्रेम रतन धन पायो
फिल्म: प्रेम रतन धन पायो
डायरेक्टर: सूरज बडजात्या
संगीत: हिमेश रेशमिया
कलाकार: सलमान खान, सोनम कपूर, अनुपम खेर, स्वरा भास्कर, नील नितिन मुकेश और अरमान कोहली

सलमान की जिस फिल्म का दर्शकों को बेसब्री से इंतजार था वह प्रेम रतन धन पायो रिलीज हो गई। दर्शक एक बार फिर से सलमान को प्रेम के रूप में देखकर काफी उत्साहित नजर आ रहे हैं। सलमान ने भी अपने प्रशंसकों को निराश नहीं किया है। सलमान ने एक बार फिर से प्रेम के रूप में खुद को साबित कर दिया है। फिल्म प्रेम रतन धन पायो एक फैमिली ड्रामा है। फिल्म के भव्य सेटों ने दर्शकों को काफी लुभाया है। सूरज बडजात्या और सलमान खान की जोडी ने एक बार फिर सये कमाल कर दिखाया है। फिल्म का संगीत तो पहले से ही लोकप्रिय हो चुका है। फिल्म के अन्य कलाकारों जैसे सोनम कपूर, अनुपम खेर,नील नीतिन मुकेश, स्वरा भास्कर ने भी प्रशंसनीय अभिनय किया है। फिल्म में सलमान खान को डबल रोल में दिखाया गया है। कुल मिलाकर फिल्म प्रेम रतन धन पायो पैसा वसूल फिल्म है।
कहानी: फिल्म की कहानी अयोध्या में शुरू होती है। प्रेम यानी सलमान खान जो कि बडे दिलवाला है उसे रामलीला जुबानी याद है। वह हर वक्त अपनी धुन में रहता है। वह अपनी कमाई वहां की राजकुमारी मैथिली यानी सोनम कपूर के चैरिटेबल ट्रस्ट में दान दे देता है। राजकुमारी मैथिली की प्रशंसा सुनकर प्रेम उनसे मिलने के लिए उत्सुक हो जाता है। प्रेम अपने दोस्त के साथ राजकुमारी से मिलने के लिए राजमहल पहुंच जाता है।
राजकूमारी मैथिली को फिल्म में बडा उदार और दूसरों की सहायता करने वाला दिखाया है। प्रेम राजकुमारी की इस उदारता से काफी प्रभावित होता है। प्रेम राजकुमारी से मिल लेता है। मैथिली से मिलने के बाद फिल्म में प्रेम का माहौल शुरू हो जाता है। फिल्म में सलमान के दूसरे रूप को राजकुमार विजय के रूप में दिखाया गया है। इसके बाद फिल्म रिश्तों के इर्द गिर्द घूमती है। फिल्म की कहानी काल्पनिक और पारिवारिक रिश्तों की बुनियाद पर बनाई गई है। फिल्म ने अंत तक दर्शकों को कुर्सी से बांधकर रखा है।




